29 Sep वित्त आयोग की रिपोर्ट: राज्यों को मिलेगी अधिक वित्तीय सहायता, जानिए मुख्य बिंदु

✎ वित्त आयोग केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों को व्यवस्थित करता है और राज्यों को संसाधन आवंटन में मदद करता है।
प्रासंगिकता — UPSC & State PCS: Economy/Governance
**वित्त आयोग की रिपोर्टें: संघवाद, संसाधन बंटवारा और विकासात्मक प्राथमिकताएं**
वित्त आयोग भारत के संघीय ढांचे का एक प्रमुख स्तंभ है, जो केंद्र और राज्यों के बीच राजस्व के वितरण तथा वित्तीय संसाधनों के आवंटन को सुनिश्चित करता है। यह संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत गठित एक संवैधानिक निकाय है, जिसका मुख्य कार्य केंद्र से राज्यों को मिलने वाले करों के बंटवारे तथा विभिन्न योजनाओं के लिए अनुदान निर्धारित करना है। हाल के वर्षों में, 15वें वित्त आयोग (2021-26) ने ‘राज्यों की उत्तरदायी एवं प्रभावी सरकारों’ को बढ़ावा देने पर जोर दिया है, जिसमें राज्यों को स्वायत्तता देते हुए उनकी विकासात्मक आवश्यकताओं को ध्यान में रखा गया है। इसने ‘परिणाम-आधारित’ अनुदानों के माध्यम से राज्यों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया है, जिससे शासन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।
15वें वित्त आयोग की रिपोर्ट में ‘राज्यों की क्षमता निर्माण’ और ‘स्थानीय शासन को सशक्त बनाने’ पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसमें पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों को अधिक वित्तीय संसाधन आवंटित करने की सिफारिश की गई है, ताकि वे अपने स्तर पर विकासात्मक योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कर सकें। इसके अलावा, आयोग ने ‘जिला स्तर पर विकासात्मक योजनाओं’ के लिए एक निश्चित राशि (स्थायी पूंजी) रखने का प्रस्ताव किया है, जिससे जमीनी स्तर पर संसाधनों का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित हो सके। यह संघवाद को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि इससे राज्यों और स्थानीय निकायों को अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार योजनाएं बनाने की स्वतंत्रता मिलती है।
वित्त आयोग की रिपोर्टें न केवल राज्यों के वित्तीय स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं, बल्कि देश के समग्र विकास पर भी गहरा असर डालती हैं। उदाहरण के लिए, 15वें आयोग ने ‘स्वास्थ्य और शिक्षा’ जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में राज्यों को विशेष अनुदान देने की सिफारिश की है, जिससे मानव संसाधन विकास को बढ़ावा मिल सके। इसके अलावा, ‘जलवायु परिवर्तन’ और ‘आपदा प्रबंधन’ जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी आयोग ने राज्यों को अतिरिक्त संसाधन आवंटित करने का प्रस्ताव रखा है, ताकि वे इन चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हों। यह दर्शाता है कि वित्त आयोग केवल राजस्व बंटवारे तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को भी आकार देता है।
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (State PCS) के परीक्षार्थियों के लिए वित्त आयोग की रिपोर्टें अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनमें संघवाद, राजकोषीय नीति, और विकासात्मक अर्थशास्त्र जैसे विषयों को गहराई से समझाया गया है। UPSC के मुख्य परीक्षा में ‘भारतीय अर्थव्यवस्था’, ‘संविधान’, और ‘शासन’ जैसे विषयों से संबंधित प्रश्नों में इन रिपोर्टों का उल्लेख किया जा सकता है। इसी प्रकार, राज्य PCS परीक्षाओं में ‘राज्य वित्त’, ‘स्थानीय शासन’, और ‘विकासात्मक योजनाएं’ जैसे विषयों पर इन रिपोर्टों से उदाहरण दिए जा सकते हैं। इसलिए, इन रिपोर्टों का अध्ययन न केवल सैद्धांतिक ज्ञान को मजबूत करता है, बल्कि उत्तर लेखन में भी सटीकता और गहराई लाता है।
स्रोत: niti.gov.in
अभ्यास प्रश्न
Q1. वित्त आयोग की रिपोर्टों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- वित्त आयोग का गठन राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है और इसकी अवधि 5 वर्ष होती है।
- वित्त आयोग केवल केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे की सिफारिश करता है।
- वित्त आयोग का मुख्य कार्य राज्यों को ऋण प्रदान करना है।
- वित्त आयोग की रिपोर्ट संसद में पेश नहीं की जाती है।
उत्तर
वित्त आयोग का गठन राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है और इसकी अवधि 5 वर्ष होती है। — वित्त आयोग का गठन संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है और इसकी अवधि 5 वर्ष होती है। इसका मुख्य कार्य केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे की सिफारिश करना है।
Q2. वित्त आयोग की रिपोर्ट में निम्नलिखित में से किसके बारे में सिफारिश की जाती है?
- राज्यों को विशेष सहायता अनुदान प्रदान करना।
- राज्यों के लिए नए राज्य बनाना।
- राज्यों के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण।
- राज्यों के लिए विदेश नीति तैयार करना।
उत्तर
राज्यों को विशेष सहायता अनुदान प्रदान करना। — वित्त आयोग की रिपोर्ट में राज्यों को विशेष सहायता अनुदान प्रदान करने की सिफारिश की जाती है, ताकि राज्यों की वित्तीय स्थिति में सुधार हो सके।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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