तेलंगाना का ईवी बूम: औद्योगिक नीति 2.0 से निवेश आकर्षित करने की तैयारी

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तेलंगाना का ईवी बूम: औद्योगिक नीति 2.0 से निवेश आकर्षित करने की तैयारी

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तेलंगाना में EV नीति 2.0

✎ तेलंगाना की औद्योगिक नीति 2.0 का लक्ष्य इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण और संबद्ध उद्योगों में निवेश आकर्षित करके हरित गतिशीलता को बढ़ावा देना है, जिसके लिए एक व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
  • Prelims: औद्योगिक नीति 2.0, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), बैटरी प्रौद्योगिकी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, विनिर्माण क्षेत्र, ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस
  • Essay: भारत में हरित गतिशीलता को बढ़ावा देने में राज्यों की भूमिका, औद्योगिक नीतियां और आर्थिक विकास

त्वरित पुनरावृत्ति: तेलंगाना की औद्योगिक नीति 2.0 का लक्ष्य इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण और संबद्ध उद्योगों में निवेश आकर्षित करके हरित गतिशीलता को बढ़ावा देना है, जिसके लिए एक व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

तेलंगाना सरकार ने अपनी आगामी औद्योगिक नीति 2.0 के माध्यम से इलेक्ट्रिक वाहन (EV) विनिर्माण, बैटरी आपूर्ति और संबद्ध उद्योगों को आकर्षित करने पर ध्यान केंद्रित किया है। राज्य सरकार ने EV क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए लक्षित प्रोत्साहन देने की बात कही है, जिसका उद्देश्य हरित गतिशीलता (Green Mobility) की ओर संक्रमण को तेज करना और एक मजबूत EV पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।

पृष्ठभूमि

  • भारत सरकार ने देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं, जिनमें FAME इंडिया योजना (Faster Adoption and Manufacturing of Electric Vehicles in India) प्रमुख है।
  • वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण की चिंताओं के कारण इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है।
  • EV क्षेत्र में विनिर्माण, बैटरी प्रौद्योगिकी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और रीसाइक्लिंग सहित एक व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता होती है।
  • राज्यों की औद्योगिक नीतियां (Industrial Policies) निवेश आकर्षित करने और विशिष्ट क्षेत्रों के विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • तेलंगाना जैसे राज्य अपनी औद्योगिक शक्तियों का लाभ उठाकर और ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ (Ease of Doing Business) में सुधार करके निवेश आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं।
  • सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और लॉजिस्टिक्स जैसे नए युग के क्षेत्रों में भी निवेश आकर्षित करने की योजना है, जो EV पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं।

औद्योगिक नीति 2.0 और EV क्षेत्र का महत्व

  • औद्योगिक नीति 2.0: यह तेलंगाना सरकार की एक नई पीढ़ी की नीति है जिसमें सेमीकंडक्टर, लॉजिस्टिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों के लिए 10 नई नीतियां शामिल होंगी। इसका उद्देश्य राज्य में निवेश के लिए एक अनुकूल माहौल बनाना है।
  • इलेक्ट्रिक वाहन (EV) क्षेत्र: इसमें इलेक्ट्रिक वाहनों का विनिर्माण, लिथियम-आयन बैटरी और अन्य उन्नत बैटरी प्रौद्योगिकियों का उत्पादन, चार्जिंग स्टेशनों का विकास और EV घटकों की आपूर्ति श्रृंखला शामिल है।
  • हरित गतिशीलता: यह परिवहन के ऐसे साधनों को संदर्भित करता है जो पर्यावरण पर न्यूनतम नकारात्मक प्रभाव डालते हैं, जैसे इलेक्ट्रिक वाहन, सार्वजनिक परिवहन और साइकिल चलाना। यह प्रदूषण कम करने और ऊर्जा दक्षता बढ़ाने में मदद करता है।
  • निवेश आकर्षण: राज्य सरकारें लक्षित प्रोत्साहन, भूमि आवंटन, कर छूट और नियामक सरलीकरण जैसे उपायों के माध्यम से उद्योगों को अपने राज्य में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।
  • पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण: EV क्षेत्र के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र में वाहन विनिर्माण, बैटरी प्रौद्योगिकी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, सार्वजनिक परिवहन में EV का एकीकरण और बैटरी रीसाइक्लिंग सुविधाएं शामिल हैं।
  • उद्योग-अकादमिक संबंध: उद्योगों, शैक्षणिक संस्थानों और कौशल विकास केंद्रों के बीच मजबूत संबंध नवाचार को बढ़ावा देने, कुशल कार्यबल तैयार करने और नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • स्वदेशी क्षमताएं: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), रोबोटिक्स और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी क्षमताओं का विकास गतिशीलता क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और नवाचार के लिए आवश्यक है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
औद्योगिक नीति 2.0 (Industrial Policy 2.0) तेलंगाना की आगामी औद्योगिक नीति, जिसमें सेमीकंडक्टर (Semiconductor), लॉजिस्टिक्स (Logistics) और इलेक्ट्रॉनिक्स (Electronics) जैसे क्षेत्रों के लिए 10 नई पीढ़ी की नीतियां शामिल हैं। यह राज्य के औद्योगिक विकास के अगले चरण को दिशा देगी।
इलेक्ट्रिक वाहन (EV) क्षेत्र पर ध्यान EV विनिर्माण, बैटरी आपूर्ति और संबद्ध कंपनियों को आकर्षित करने के लिए लक्षित प्रोत्साहन। यह हरित गतिशीलता (Greener Mobility) और कार्बन उत्सर्जन में कमी के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होगा।
निवेश आकर्षित करने पर जोर EV विनिर्माण, बैटरी और चार्जिंग अवसंरचना (Charging Infrastructure) सहित पूरे ऑटोमोटिव मूल्य श्रृंखला (Automotive Value Chain) में निवेश आकर्षित करना। यह राज्य में रोजगार सृजन और आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा देगा।
उद्योग-अकादमिक-कौशल विकास संबंध उद्योग, शिक्षाविदों और कौशल विकास के बीच मजबूत संबंध बनाना। यह भविष्य की गतिशीलता आवश्यकताओं के लिए कुशल कार्यबल तैयार करने में मदद करेगा।
व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) में सुधार राज्य में निवेश और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए व्यापार करने में आसानी के माहौल को बेहतर बनाना।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • EV क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने से राज्य में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी और नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
  • औद्योगिक नीति 2.0 के माध्यम से सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उच्च-प्रौद्योगिकी (High-Technology) क्षेत्रों में विकास से राज्य की अर्थव्यवस्था में विविधीकरण (Diversification) आएगा।
  • व्यापार सुगमता में सुधार से घरेलू और विदेशी दोनों तरह के निवेश को आकर्षित करने में मदद मिलेगी, जिससे राज्य की राजस्व आय में वृद्धि होगी।

पर्यावरणीय महत्व

  • इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने से जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) पर निर्भरता कम होगी, जिससे वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
  • हरित गतिशीलता की ओर संक्रमण से जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के प्रभावों को कम करने में मदद मिलेगी और सतत विकास (Sustainable Development) के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकेगा।

सामाजिक महत्व

  • EV क्षेत्र में कौशल विकास और प्रशिक्षण कार्यक्रमों से युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे, जिससे बेरोजगारी कम होगी।
  • बेहतर चार्जिंग अवसंरचना और EV उपलब्धता से सार्वजनिक परिवहन में सुधार होगा, जिससे नागरिकों के लिए आवागमन आसान और किफायती होगा।

सामरिक महत्व

  • स्वदेशी क्षमताओं के विकास पर जोर, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence), रोबोटिक्स (Robotics) और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में, भारत को वैश्विक गतिशीलता क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगा।
  • EV बैटरी प्रौद्योगिकी और विनिर्माण में आत्मनिर्भरता से ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) बढ़ेगी और आयात पर निर्भरता कम होगी।

चुनौतियाँ

1. अवसंरचनात्मक चुनौतियाँ

  • EV चार्जिंग स्टेशनों की कमी और उनकी असमान उपलब्धता, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
  • बैटरी विनिर्माण और रीसाइक्लिंग (Recycling) के लिए आवश्यक विशेष अवसंरचना का अभाव।

2. तकनीकी और अनुसंधान चुनौतियाँ

  • बैटरी प्रौद्योगिकी में अनुसंधान और विकास (R&D) की आवश्यकता ताकि लागत कम हो और दक्षता बढ़े।
  • AI, रोबोटिक्स और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी क्षमताओं के विकास के लिए पर्याप्त निवेश और विशेषज्ञता का अभाव।

3. कौशल विकास और मानव संसाधन

  • EV विनिर्माण, रखरखाव और चार्जिंग अवसंरचना के लिए प्रशिक्षित और कुशल कार्यबल की कमी।
  • उद्योग और अकादमिक जगत के बीच प्रभावी समन्वय का अभाव, जिससे पाठ्यक्रम को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं बनाया जा पाता।

4. वित्तीय और नीतिगत चुनौतियाँ

  • EV और बैटरी विनिर्माण के लिए प्रारंभिक उच्च निवेश लागत।
  • राज्य और केंद्र सरकारों के बीच नीतियों में समन्वय की कमी, जिससे निवेशकों के लिए अनिश्चितता पैदा होती है।

5. आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) चुनौतियाँ

  • EV बैटरी के लिए महत्वपूर्ण खनिजों (जैसे लिथियम, कोबाल्ट) की वैश्विक आपूर्ति पर निर्भरता।
  • घटकों और पुर्जों के स्थानीय विनिर्माण के लिए एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला का अभाव।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
चार्जिंग अवसंरचना की कमी EV अपनाने की दर को धीमा कर सकता है और उपभोक्ताओं के बीच ‘रेंज चिंता’ (Range Anxiety) पैदा कर सकता है।
बैटरी प्रौद्योगिकी की लागत EV को पेट्रोल/डीजल वाहनों की तुलना में महंगा बनाती है, जिससे व्यापक उपभोक्ता स्वीकृति में बाधा आती है।
कुशल कार्यबल का अभाव EV विनिर्माण, सर्विसिंग और अनुसंधान एवं विकास में बाधा डालता है।
महत्वपूर्ण खनिजों पर निर्भरता भू-राजनीतिक जोखिमों और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों को बढ़ाती है।
नीतिगत अस्थिरता निवेशकों के विश्वास को प्रभावित कर सकती है और दीर्घकालिक नियोजन को बाधित कर सकती है।

आगे की राह

  • एक सुदृढ़ और व्यापक EV चार्जिंग अवसंरचना का विकास करना, जिसमें सार्वजनिक और निजी भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाए।
  • बैटरी प्रौद्योगिकी में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना और स्वदेशी बैटरी विनिर्माण क्षमताओं को विकसित करना।
  • EV क्षेत्र के लिए एक समर्पित कौशल विकास कार्यक्रम शुरू करना, जिसमें उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम शामिल हों।
  • उद्योग, अकादमिक जगत और स्टार्टअप्स (Startups) के बीच सहयोग को मजबूत करना ताकि AI, रोबोटिक्स और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा मिल सके।
  • EV और बैटरी विनिर्माण के लिए लक्षित प्रोत्साहन और कर लाभ प्रदान करना ताकि निवेश आकर्षित हो और उत्पादन लागत कम हो।
  • महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और घरेलू अन्वेषण पर ध्यान केंद्रित करना।
  • राज्य और केंद्र सरकारों के बीच EV नीतियों में समन्वय स्थापित करना ताकि एक स्थिर और अनुकूल नियामक वातावरण बन सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

औद्योगिक नीति · इलेक्ट्रिक वाहन (EV) · विनिर्माण क्षेत्र · निवेश प्रोत्साहन · बुनियादी ढाँचा · व्यवसाय करने में आसानी · कौशल विकास · हरित गतिशीलता · सेमीकंडक्टर नीति · मूल्य श्रृंखला · राज्य औद्योगिक नीतियाँ · आर्थिक संवृद्धि

अवधारणा प्रवाह

तेलंगाना की औद्योगिक नीति 2.0 का अनावरण  →  EV विनिर्माण और संबद्ध उद्योगों को लक्षित प्रोत्साहन  →  राज्य में निवेश और औद्योगिक विकास में वृद्धि  →  रोजगार सृजन और आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा  →  हरित गतिशीलता और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) एक प्रमुख नीतिगत पहल है।
2. राज्य सरकारें अपने औद्योगिक नीतियों के माध्यम से विशिष्ट क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान कर सकती हैं।
3. ‘व्यवसाय करने में आसानी’ (Ease of Doing Business) का उद्देश्य उद्योगों के लिए नियामक बोझ को कम करना और प्रक्रियाओं को सरल बनाना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का प्राथमिक उद्देश्य हरित हाइड्रोजन के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देना है, न कि सीधे इलेक्ट्रिक वाहनों को। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए FAME इंडिया योजना जैसी पहलें हैं। कथन 2 सही है। राज्य सरकारें अपनी औद्योगिक नीतियों के तहत कर रियायतें, सब्सिडी और भूमि आवंटन जैसे प्रोत्साहन देकर निवेश आकर्षित करती हैं। कथन 3 सही है। ‘व्यवसाय करने में आसानी’ का मुख्य उद्देश्य उद्योगों के लिए लाइसेंसिंग, अनुमति और अन्य नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाकर निवेश के अनुकूल माहौल बनाना है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कारक इलेक्ट्रिक वाहन (EV) अपनाने की गति को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है?
1. मजबूत चार्जिंग अवसंरचना का विकास
2. बैटरी प्रौद्योगिकी में नवाचार और लागत में कमी
3. सरकारी प्रोत्साहन और सब्सिडी
4. सार्वजनिक परिवहन में EV का एकीकरण
सही विकल्प का चयन करें:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — सभी चार कारक इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने की गति को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मजबूत चार्जिंग अवसंरचना EV उपयोगकर्ताओं के लिए सुविधा सुनिश्चित करती है। बैटरी प्रौद्योगिकी में नवाचार और लागत में कमी EV को अधिक किफायती बनाती है। सरकारी प्रोत्साहन और सब्सिडी खरीद लागत को कम करके उपभोक्ताओं को आकर्षित करती है। सार्वजनिक परिवहन में EV का एकीकरण बड़े पैमाने पर कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करता है और EV प्रौद्योगिकी की स्वीकार्यता बढ़ाता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ राज्य औद्योगिक नीतियाँ आर्थिक संवृद्धि और रोजगार सृजन में कैसे योगदान करती हैं? तेलंगाना की ‘औद्योगिक नीति 2.0’ के संदर्भ में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए अपनाई गई रणनीतियों का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर को दो मुख्य भागों में संरचित किया जाना चाहिए:
1. **राज्य औद्योगिक नीतियों का महत्व:**
* **परिभाषा:** राज्य औद्योगिक नीतियों का संक्षिप्त परिचय – राज्य स्तर पर उद्योगों के विकास, निवेश प्रोत्साहन और रोजगार सृजन के लिए बनाई गई नीतियाँ।
* **योगदान के बिंदु:**
* **निवेश प्रोत्साहन:** कर रियायतें, सब्सिडी, भूमि आवंटन, सिंगल विंडो क्लीयरेंस।
* **रोजगार सृजन:** नए उद्योगों की स्थापना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार।
* **बुनियादी ढाँचा विकास:** औद्योगिक गलियारे, लॉजिस्टिक्स, बिजली और पानी की आपूर्ति।
* **क्षेत्रीय असंतुलन में कमी:** पिछड़े क्षेत्रों में उद्योगों को बढ़ावा।
* **कौशल विकास:** स्थानीय कार्यबल के लिए प्रशिक्षण और कौशल उन्नयन।
* **आर्थिक विविधीकरण:** विभिन्न क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देना।
* **व्यवसाय करने में आसानी (Ease of Doing Business):** नियामक प्रक्रियाओं का सरलीकरण।
2. **तेलंगाना की ‘औद्योगिक नीति 2.0’ और EV क्षेत्र:**
* **नीति का लक्ष्य:** ‘औद्योगिक नीति 2.0’ का परिचय – नई पीढ़ी की नीतियों (सेमीकंडक्टर, लॉजिस्टिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स) पर ध्यान।
* **EV क्षेत्र के लिए रणनीतियाँ:**
* **लक्षित प्रोत्साहन:** EV निर्माताओं, बैटरी आपूर्तिकर्ताओं और संबद्ध कंपनियों को आकर्षित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन।
* **समग्र मूल्य श्रृंखला पर ध्यान:** EV विनिर्माण, बैटरी उत्पादन और चार्जिंग अवसंरचना सहित संपूर्ण ऑटोमोटिव मूल्य श्रृंखला में निवेश।
* **औद्योगिक शक्तियों का लाभ उठाना:** राज्य की मौजूदा औद्योगिक शक्तियों का उपयोग।
* **उद्योग-अकादमिक-कौशल विकास लिंकेज:** नवाचार और कुशल कार्यबल के लिए उद्योग, शिक्षाविदों और कौशल विकास संस्थानों के बीच सहयोग।
* **व्यवसाय करने में आसानी में सुधार:** निवेश के अनुकूल माहौल बनाना।
* **पारिस्थितिकी तंत्र का विकास:** वाहन विनिर्माण, बैटरी प्रौद्योगिकी, चार्जिंग अवसंरचना, सार्वजनिक परिवहन और पुनर्चक्रण सहित एक व्यापक EV पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण।
* **निष्कर्ष:** इन रणनीतियों के माध्यम से तेलंगाना का EV क्षेत्र में अग्रणी बनने का लक्ष्य और इसके संभावित आर्थिक व पर्यावरणीय लाभ।

स्रोत: The Hindu

Telangana PCS (TGPSC (TSPSC)) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: तेलंगाना राज्य सरकार द्वारा हाल ही में घोषित ‘औद्योगिक नीति 2.0’ का मुख्य उद्देश्य क्या है?

  1. राज्य में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग को बढ़ावा देना और निवेश आकर्षित करना
  2. कृषि क्षेत्र में नवाचार और तकनीकी उन्नयन को प्रोत्साहित करना
  3. राज्य के सभी जिलों में औद्योगिक पार्कों की स्थापना करना
  4. राज्य में पर्यटन उद्योग को पुनर्जीवित करना

उत्तर: राज्य में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग को बढ़ावा देना और निवेश आकर्षित करना — औद्योगिक नीति 2.0 का मुख्य उद्देश्य राज्य में इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को बढ़ावा देना और निवेश आकर्षित करना है।

Mains: तेलंगाना राज्य में ‘औद्योगिक नीति 2.0’ के माध्यम से इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा अपनाई गई प्रमुख रणनीतियों और उनके संभावित प्रभावों पर चर्चा कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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