19 Oct किसानों के लिए मोबाइल पर लाइव सरकार: शिवराज ने लॉन्च किया नया पोर्टल
✎ मोबाइल-आधारित ई-शासन का मूल उद्देश्य सेवाओं को नागरिक की हथेली तक पहुँचाना है, परंतु इसकी सफलता डिजिटल विभाजन को कम करने और डेटा संरक्षण सुनिश्चित करने पर निर्भर करती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन (ई-शासन, किसान-केंद्रित योजनाएँ, सेवा-वितरण में डिजिटल माध्यम की भूमिका) | GS Paper III — अर्थव्यवस्था (कृषि क्षेत्र में डिजिटल रूपांतरण, कृषि सुधार और किसान आय)
- Prelims: डिजिटल कृषि मिशन (Digital Agriculture Mission), एग्रीस्टैक (AgriStack) और किसान पहचान पत्र (Farmer ID), किसान कॉल सेंटर (Kisan Call Centre) और टोल-फ्री नंबर 1551, ई-नाम (e-NAM) — राष्ट्रीय कृषि बाज़ार, उमंग ऐप (UMANG App), राष्ट्रीय ई-शासन योजना (NeGP), डिजिटल इंडिया (Digital India) कार्यक्रम, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023
- Essay: डिजिटल तकनीक से ग्रामीण किसान का सशक्तिकरण: अवसर और चुनौतियाँ, सेवा-वितरण में लोक-सुलभता: जब सरकार हर व्यक्ति की हथेली तक पहुँचे
त्वरित पुनरावृत्ति: मोबाइल-आधारित ई-शासन का मूल उद्देश्य सेवाओं को नागरिक की हथेली तक पहुँचाना है, परंतु इसकी सफलता डिजिटल विभाजन को कम करने और डेटा संरक्षण सुनिश्चित करने पर निर्भर करती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा किसानों को समर्पित एक नया पोर्टल शुरू किया गया, जिसे केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने समर्पित किया। प्रेस विज्ञप्ति के शीर्षक के अनुसार इस पहल का उद्देश्य सरकारी सेवाओं और सूचनाओं को मोबाइल के माध्यम से किसानों तक अधिक सुलभ बनाना है। परीक्षा की दृष्टि से यह समाचार ई-शासन के उस व्यापक रुझान से जुड़ता है जिसमें कृषि-सेवाएँ डिजिटल मंच पर लाई जा रही हैं। पोर्टल के विशेष घटकों, तकनीकी विवरणों और लक्षित लाभार्थियों की संख्या के लिए मूल प्रेस विज्ञप्ति (PIB) का अवलोकन अवश्य करें, क्योंकि यहाँ केवल सामान्य सूचना उपलब्ध है।
पृष्ठभूमि
- भारत में ई-शासन की औपचारिक शुरुआत राष्ट्रीय ई-शासन योजना (National e-Governance Plan, NeGP) से मानी जाती है, जिसे वर्ष 2006 में स्वीकृत किया गया था।
- किसानों तक सूचना पहुँचाने के लिए किसान कॉल सेंटर (Kisan Call Centre) की स्थापना वर्ष 2004 में की गई थी, जो कृषि-परामर्श का पारंपरिक दूरसंचार माध्यम रहा है।
- डिजिटल इंडिया (Digital India) कार्यक्रम वर्ष 2015 में आरंभ हुआ, जिसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं को इलेक्ट्रॉनिक रूप में उपलब्ध कराना और डिजिटल अवसंरचना का विस्तार करना है।
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2024 में डिजिटल कृषि मिशन (Digital Agriculture Mission) को स्वीकृति दी, जिसके अंतर्गत एग्रीस्टैक (AgriStack) जैसे डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना घटक शामिल हैं।
- डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा और सहमति-आधारित प्रसंस्करण के लिए विधिक ढाँचा प्रदान करता है, जो किसानों के डेटा से जुड़े मंचों पर भी प्रासंगिक है।
मोबाइल-आधारित ई-शासन (m-Governance) क्या है?
- मोबाइल-आधारित ई-शासन से आशय उस शासन-व्यवस्था से है जिसमें मोबाइल फ़ोन, मोबाइल ऐप, एसएमएस, आईवीआर (IVR) और यूएसएसडी (USSD) जैसे माध्यमों से सरकारी सेवाएँ और सूचनाएँ नागरिकों तक पहुँचाई जाती हैं।
- ई-शासन का विस्तार है: जहाँ ई-शासन सामान्यतः कंप्यूटर और इंटरनेट पर आधारित होता है, वहीं मोबाइल-आधारित ई-शासन उन नागरिकों तक पहुँचता है जिनके पास व्यक्तिगत कंप्यूटर नहीं है।
- इसके प्रमुख लाभ हैं: सेवाओं की समय और स्थान से स्वतंत्र उपलब्धता, सूचना का तीव्र प्रसार, मध्यस्थों पर निर्भरता में कमी और पारदर्शिता में वृद्धि।
- कृषि क्षेत्र में इसका उपयोग मौसम-सूचना, फ़सल-सलाह, मंडी-भाव, बीमा और ऋण से संबंधित जानकारी देने में किया जाता है।
- एग्रीस्टैक किसानों, भूमि-अभिलेखों और फ़सल-सर्वेक्षण के डेटा को एकीकृत करने का डिजिटल ढाँचा है, जिस पर कृषि-सेवाओं के डिजिटल वितरण की नींव टिकती है।
- उमंग (UMANG) जैसे एकीकृत मोबाइल ऐप यह दिखाते हैं कि एक ही मंच से कई विभागों की सेवाएँ उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
- प्रमुख चुनौतियाँ हैं: डिजिटल विभाजन (Digital Divide), यानी इंटरनेट, स्मार्टफ़ोन और डिजिटल साक्षरता की असमान उपलब्धता; तथा डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के जोखिम।
- इन चुनौतियों के समाधान हेतु बहुभाषी इंटरफ़ेस, ऑफ़लाइन-सहायता केंद्र और डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम आवश्यक माने जाते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| आरंभकर्ता | कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (Ministry of Agriculture and Farmers Welfare) द्वारा किसानों के लिए नया पोर्टल (Portal) प्रारंभ किया गया है। |
| मुख्य माध्यम | मोबाइल (Mobile) के माध्यम से सरकारी सेवाओं और सूचनाओं तक पहुँच, अर्थात् सेवाएँ मोबाइल पर उपलब्ध कराने पर बल। |
| लक्षित वर्ग | देश के किसान, जिन्हें कृषि-संबंधी सरकारी सुविधाओं और जानकारी तक सीधी और सुलभ पहुँच मिलती है। |
| नीतिगत प्रकृति | शासन के डिजिटल रूपांतरण (Digital Transformation) का हिस्सा, जिसमें सेवा-वितरण को अंतिम नागरिक तक पहुँचाने का उद्देश्य है। |
| स्रोत-सीमा | प्रेस विज्ञप्ति के इस अंश में पोर्टल के विशिष्ट मॉड्यूल, औपचारिक नाम या सेवाओं की सूची नहीं दी गई है; परीक्षा की दृष्टि से इतना ही मूल तथ्य पर्याप्त है। |
महत्व
प्रशासनिक और डिजिटल शासन
- सरकारी सेवाओं को मोबाइल पर उपलब्ध कराना शासन के डिजिटल रूपांतरण की दिशा में एक कदम है, जिससे सेवा-वितरण का माध्यम कार्यालय से हटकर सीधे नागरिक के हाथ तक पहुँचता है।
- डिजिटल पहुँच से प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और समयबद्धता बढ़ाने की संभावना रहती है।
कृषि एवं किसान कल्याण
- किसानों को समय पर सूचना और सेवाएँ मिलने से कृषि निर्णयों की गुणवत्ता में सुधार की संभावना बनती है।
- दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों के लिए भौतिक दूरी और कार्यालयी बाधाएँ कम होती हैं।
नागरिक-केंद्रित लोक सेवा वितरण
- नागरिक-केंद्रित शासन (Citizen-centric Governance) की अवधारणा के अनुरूप सेवा को नागरिक की सुविधा के अनुसार ढालने का प्रयास है।
- सेवा-वितरण में मध्यस्थों की भूमिका घटने से अवसर की समानता को सहारा मिल सकता है।
संघीय समन्वय
- कृषि राज्य सूची का विषय होने के कारण केंद्र की ऐसी पहल प्रभावी होने के लिए राज्य सरकारों के साथ समन्वय पर निर्भर करती है।
- केंद्र द्वारा मानक डिजिटल ढाँचा उपलब्ध कराना सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की भावना से मेल खाता है।
चुनौतियाँ
1. डिजिटल विभाजन (Digital Divide)
- मोबाइल, इंटरनेट और बिजली की उपलब्धता सभी ग्रामीण क्षेत्रों में एक समान नहीं है।
- स्मार्टफोन की सुलभता और खर्च वहन करने की क्षमता में अंतर से कुछ किसान पीछे रह सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-2: शासन; GS-3: समावेशी विकास और डिजिटल अवसंरचना
2. डिजिटल साक्षरता और भाषा
- वृद्ध किसानों और कम शिक्षित वर्ग के लिए डिजिटल इंटरफ़ेस का उपयोग कठिन हो सकता है।
- स्थानीय भाषाओं और बोलियों में सामग्री की उपलब्धता सेवा की पहुँच तय करती है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: सामाजिक न्याय; GS-2: शासन में नागरिक भागीदारी
3. डेटा गोपनीयता और सुरक्षा
- किसानों के व्यक्तिगत और भूमि-संबंधी डेटा के संग्रह और उपयोग में गोपनीयता का प्रश्न उठता है।
- डिजिटल प्रणाली पर साइबर सुरक्षा के जोखिम बढ़ते हैं और इसके लिए मजबूत सुरक्षा ढाँचा आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: शासन; GS-3: साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण
4. केंद्र-राज्य समन्वय
- कृषि राज्य सूची का विषय होने से सेवाओं के कार्यान्वयन में राज्यों की भूमिका निर्णायक है।
- विभिन्न राज्यों के भूमि अभिलेख और कृषि डेटाबेस के बीच एकरूपता लाना चुनौतीपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: संघवाद और केंद्र-राज्य संबंध
5. सेवा की गुणवत्ता और शिकायत निवारण
- ऑनलाइन सेवा में तकनीकी त्रुटि या सर्वर बाधा होने पर किसान के पास वैकल्पिक मार्ग होना आवश्यक है।
- शिकायत निवारण की प्रभावी व्यवस्था के बिना डिजिटल पहुँच का लाभ अधूरा रहता है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: लोक सेवा वितरण और प्रशासनिक सुधार
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| इंटरनेट और मोबाइल पहुँच | ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में नेटवर्क की सीमित उपलब्धता से सेवा का लाभ असमान रूप से मिल सकता है। |
| डिजिटल साक्षरता | वृद्ध और कम पढ़े-लिखे किसानों के लिए इंटरफ़ेस की जटिलता बाधा बन सकती है। |
| डेटा गोपनीयता | किसानों के व्यक्तिगत डेटा के उपयोग और भंडारण के लिए स्पष्ट सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं। |
| केंद्र-राज्य समन्वय | राज्य स्तर पर अभिलेखों और सेवाओं के एकीकरण में समन्वय की कमी से कार्यान्वयन प्रभावित हो सकता है। |
| शिकायत निवारण | सेवा विफलता की स्थिति में प्रभावी शिकायत तंत्र और मानव सहायता की व्यवस्था सीमित होने का जोखिम है। |
आगे की राह
- ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी का विस्तार कर डिजिटल पहुँच की खाई को कम किया जाए।
- स्थानीय भाषाओं में सरल इंटरफ़ेस और दृश्य-आधारित मार्गदर्शन उपलब्ध कराए जाएँ, ताकि कम साक्षर किसान भी सेवा का उपयोग कर सकें।
- किसानों के डेटा के संग्रह, उपयोग और भंडारण के लिए स्पष्ट नियम और सहमति-आधारित प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।
- साइबर सुरक्षा के मानक लागू कर पोर्टल की नियमित सुरक्षा-जाँच और ऑडिट की व्यवस्था की जाए।
- राज्य सरकारों के साथ मिलकर भूमि अभिलेख और कृषि डेटाबेस के एकीकरण हेतु समन्वय तंत्र मजबूत किया जाए।
- ऑफ़लाइन विकल्प, हेल्पलाइन और सामुदायिक सहायता केंद्र (जैसे कृषि विज्ञान केंद्र) के माध्यम से डिजिटल सेवा को सहायक बनाया जाए।
- पोर्टल पर शिकायत निवारण और सेवा-स्तर मानक (Service Level Standards) की सार्वजनिक निगरानी की व्यवस्था की जाए।
- सेवा के उपयोग और प्रभाव का नियमित मूल्यांकन कर नीति में सुधार के लिए प्रतिक्रिया-तंत्र (Feedback Mechanism) विकसित किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
ई-शासन (e-Governance) · मोबाइल-आधारित शासन (m-Governance) · डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure) · एग्रीस्टैक (AgriStack) · डिजिटल कृषि मिशन (Digital Agriculture Mission) · किसान रजिस्ट्री (Farmer Registry) · सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) · डेटा संरक्षण और गोपनीयता (Data Protection and Privacy) · प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer) · कृषि-तकनीकी समावेशन (Agri-tech Inclusion) · डिजिटल विभाजन (Digital Divide)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 246: केंद्र-राज्य विधायी शक्तियों का वितरण
- सातवीं अनुसूची, सूची II (प्रविष्टि 14): कृषि राज्य सूची का विषय
अवधारणा प्रवाह
केंद्र सरकार द्वारा सरकारी सेवाओं को मोबाइल पर उपलब्ध कराने का नीतिगत लक्ष्य तय किया जाता है। → कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय किसानों के लिए समर्पित पोर्टल प्रारंभ करता है। → किसान मोबाइल के माध्यम से सेवाओं और सूचनाओं तक सीधी पहुँच प्राप्त करते हैं। → सेवा-वितरण में मध्यस्थों की भूमिका घटती है और प्रक्रिया की समयबद्धता बढ़ती है। → डिजिटल पहुँच से कृषि निर्णयों और प्रशासनिक पारदर्शिता में सुधार की संभावना बनती है। → डिजिटल विभाजन, डेटा सुरक्षा और राज्य समन्वय की चुनौतियाँ प्रभाव की सीमा तय करती हैं। → इन चुनौतियों के समाधान से सेवा का लाभ सभी किसानों तक समान रूप से पहुँचने की दिशा बनती है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कृषि संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची में आती है।
2. डिजिटल कृषि मिशन का कार्यान्वयन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा किया जाता है।
3. उमंग (UMANG) एक एकीकृत मोबाइल एप्लिकेशन है, जिससे नागरिक कई सरकारी सेवाएँ एक ही मंच से प्राप्त कर सकते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- उपर्युक्त में से कोई नहीं, क्योंकि सभी गलत हैं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: कृषि प्रविष्टि 14 के अंतर्गत राज्य सूची का विषय है, इसलिए राज्य सरकारों की प्रधान भूमिका रहती है। कथन 2 गलत है: डिजिटल कृषि मिशन का नोडल मंत्रालय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय है, न कि इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्रालय। कथन 3 सही है: उमंग एप मोबाइल-आधारित शासन का बहु-सेवा मंच है। अतः कथन 1 और 3 सही हैं, यानी दो।
Q2. निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): कृषि क्षेत्र में एग्रीस्टैक जैसे डिजिटल ढाँचे से पात्र किसानों की पहचान और कल्याण योजनाओं का लक्ष्यीकरण बेहतर हो सकता है।
कारण (R): एकीकृत किसान पहचान संख्या से भूमि अभिलेखों और लाभार्थी डेटाबेस को आपस में जोड़ना संभव होता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सही है, किंतु (R) गलत है
- (A) गलत है, किंतु (R) सही है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — एग्रीस्टैक किसान रजिस्ट्री, डिजिटल फसल सर्वेक्षण और भूमि अभिलेखों के आधार पर लाभार्थियों की सत्यापित पहचान का ढाँचा है। यही आधार लक्ष्यीकरण में सहायक है, इसलिए (R) (A) की सही व्याख्या है। डेटा की सटीकता और सहमति के प्रश्न अलग से विचारणीय हैं, पर यहाँ कथन दोनों सही हैं।
Q3. निम्नलिखित सूची-युग्मों को सुमेलित कीजिए:
सूची I (पहल/अधिनियम)
A. डिजिटल इंडिया
B. राष्ट्रीय ई-शासन योजना (National e-Governance Plan)
C. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम
D. डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम
सूची II (वर्ष)
1. 2015
2. 2006
3. 2000
4. 2023
सही सुमेलन चुनिए:
- A-1, B-2, C-3, D-4
- A-2, B-1, C-4, D-3
- A-1, B-3, C-2, D-4
- A-4, B-2, C-1, D-3
उत्तर: A-1, B-2, C-3, D-4 — डिजिटल इंडिया की शुरुआत 2015 में हुई, राष्ट्रीय ई-शासन योजना 2006 में स्वीकृत हुई, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 में पारित हुआ और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 में पारित हुआ। अतः सही सुमेलन A-1, B-2, C-3, D-4 है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में मोबाइल-आधारित शासन को कृषि क्षेत्र तक विस्तारित करने की पहलें राज्य-विषय में केंद्र की भूमिका को नई दिशा दे रही हैं। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि किसानों के डिजिटल डेटा की गोपनीयता और सहमति सुनिश्चित किए बिना ऐसे मंचों की सफलता किस हद तक संदिग्ध हो जाती है। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर संरचना (मॉडल उत्तर बिंदु):
1. भूमिका: समकालीन संदर्भ में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा किसानों के लिए नए मोबाइल-सुलभ पोर्टल का शुभारंभ, ई-शासन से मोबाइल-आधारित शासन की ओर बढ़ते रुझान का उदाहरण है। नीति-समीक्षा के लिए यह मामला संघीय प्रश्न से जुड़ा है।
2. संवैधानिक ढाँचा: कृषि सातवीं अनुसूची की राज्य सूची (प्रविष्टि 14) का विषय है; केंद्र की शक्ति संघ-सूची और समवर्ती सूची के विषयों (जैसे आँकड़े, सूचना प्रौद्योगिकी, डेटा) तथा अनुच्छेद 246 से आती है। अनुच्छेद 282 के अंतर्गत केंद्र प्रायोजित योजनाओं के वित्तपोषण का आधार बनता है।
3. संस्थागत एवं नीतिगत ढाँचा: डिजिटल कृषि मिशन, एग्रीस्टैक (किसान रजिस्ट्री, डिजिटल फसल सर्वेक्षण, भूमि अभिलेखों का एकीकरण), डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की अवधारणा, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और पीएम-किसान का डेटा-आधारित लक्ष्यीकरण।
4. पक्ष में तर्क: लाभार्थियों की सटीक पहचान से रिसाव कम होता है; मोबाइल पहुँच से दूरस्थ किसानों तक सेवा विस्तार; एकीकृत मंच से पारदर्शिता और समय-बचत; सहकारी संघवाद के अंतर्गत राज्य-एकीकरण की संभावना।
5. आलोचनात्मक पक्ष: डिजिटल विभाजन (इंटरनेट, स्मार्टफोन, साक्षरता की कमी), भाषा और सुलभता की बाधाएँ, राज्य-केंद्र डेटा-समन्वय की चुनौती, और कृषि-आधारित निजी मंचों से जुड़ी व्यावसायिक चिंताएँ।
6. डेटा गोपनीयता: डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के अंतर्गत सहमति, उद्देश्य-सीमा और डेटा न्यूनीकरण के सिद्धांत प्रासंगिक हैं; अनुच्छेद 21 के अंतर्गत निजता के अधिकार को पुट्टस्वामी मामले (2017) में मौलिक अधिकार घोषित किया गया। किसान के बहिष्करण या गलत प्रविष्टि से उत्पन्न विवादों के निवारण हेतु शिकायत-तंत्र अनिवार्य है।
7. संतुलित निष्कर्ष: मोबाइल-आधारित शासन तभी सार्थक है जब डिजिटल सुलभता, भाषाई समावेशन, सहमति-आधारित डेटा प्रशासन और स्थानीय सेवा केंद्र साथ चलें। ई-शासन की सफलता को केवल पोर्टल की संख्या से नहीं, बल्कि अंतिम किसान तक सेवा की पहुँच और गोपनीयता की सुरक्षा से आँका जाना चाहिए।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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