गृह मंत्री अमित शाह 21 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर शहीदों को करेंगे श्रद्धांजलि

गृह मंत्री अमित शाह 21 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर शहीदों को करेंगे श्रद्धांजलि

गृह मंत्री अमित शाह 21 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर शहीदों को करेंगे श्रद्धांजलि

✎ 21 अक्टूबर को पुलिस स्मरण दिवस मनाया जाता है, जो 1959 की कोंगका ला घटना में बलिदान हुए जवानों की स्मृति में है; पुलिस राज्य सूची का विषय है, जबकि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करते हैं।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, पुलिस बलों की भूमिका और चुनौतियाँ)  |  GS Paper II — शासन एवं संघवाद (पुलिस राज्य का विषय, केंद्र-राज्य समन्वय, पुलिस सुधार)
  • Prelims: कोंगका ला (Kongka La) घटना, 1959 और पुलिस स्मरण दिवस (21 अक्टूबर), राष्ट्रीय पुलिस स्मारक (National Police Memorial), चाणक्यपुरी, नई दिल्ली, पुलिस: संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची की प्रविष्टि 1, संघ सूची की प्रविष्टि 2A: राज्यों की सहायता हेतु केंद्रीय बलों की तैनाती, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) और उनका गृह मंत्रालय के अधीन होना, प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ (2006) — पुलिस सुधार के सात निर्देश, पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D)
  • Essay: सुरक्षा बलों का कल्याण और बलिदान की स्मृति: लोकतांत्रिक राज्य में पुलिस का सम्मान और उत्तरदायित्व, पुलिस सुधार: राज्य का विषय होते हुए भी केंद्र की भूमिका कैसे निर्णायक है?

त्वरित पुनरावृत्ति: 21 अक्टूबर को पुलिस स्मरण दिवस मनाया जाता है, जो 1959 की कोंगका ला घटना में बलिदान हुए जवानों की स्मृति में है; पुलिस राज्य सूची का विषय है, जबकि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करते हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह 21 अक्टूबर 2026 (बुधवार) को पुलिस स्मरण दिवस (Police Commemoration Day) के अवसर पर नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक (National Police Memorial) पर कर्तव्य निर्वहन के दौरान बलिदान देने वाले पुलिस कर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। यह दिवस प्रत्येक वर्ष 21 अक्टूबर को मनाया जाता है, जो वर्ष 1959 में लद्दाख के कोंगका ला क्षेत्र में भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प में केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (Central Reserve Police Force) के जवानों के बलिदान की स्मृति में है। इस अवसर पर आंतरिक सुरक्षा में पुलिस बलों के योगदान और उनके कल्याण का विषय पुनः सार्वजनिक विमर्श में आता है।

पृष्ठभूमि

  • संविधान में पुलिस को राज्य सूची की प्रविष्टि 1 में रखा गया है, इसलिए कानून-व्यवस्था और लोक व्यवस्था मुख्यतः राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है।
  • संघ सूची की प्रविष्टि 2A के अंतर्गत संघ सरकार राज्यों की सहायता के लिए केंद्रीय सशस्त्र बलों को तैनात कर सकती है, जिससे केंद्र-राज्य समन्वय का व्यावहारिक ढांचा बनता है।
  • केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करते हैं, जिनमें सीमा सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा, औद्योगिक सुरक्षा और सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियाँ शामिल हैं।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ (2006) मामले में पुलिस सुधार हेतु सात निर्देश दिए, जिनमें राज्य सुरक्षा आयोग, पुलिस स्थापना बोर्ड और पुलिस शिकायत प्राधिकरण जैसे प्रावधान शामिल थे।
  • राष्ट्रीय पुलिस स्मारक का लोकार्पण वर्ष 2018 में हुआ, जिसमें कर्तव्य पर बलिदान देने वाले पुलिस कर्मियों के नाम अंकित हैं।

पुलिस स्मरण दिवस और राष्ट्रीय पुलिस स्मारक क्या है?

  • पुलिस स्मरण दिवस प्रत्येक वर्ष 21 अक्टूबर को मनाया जाता है और इसका उद्देश्य देश की आंतरिक सुरक्षा में कर्तव्य निभाते हुए बलिदान देने वाले पुलिस कर्मियों को श्रद्धांजलि देना है।
  • इस दिवस की पृष्ठभूमि 1959 की कोंगका ला घटना है, जब लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प में केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल के जवानों ने बलिदान दिया था।
  • राष्ट्रीय पुलिस स्मारक नई दिल्ली के चाणक्यपुरी क्षेत्र में स्थित है और यह देश भर के पुलिस बलों के बलिदान की सामूहिक स्मृति का प्रतीक है।
  • पुलिस संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची का विषय है, अतः पुलिस व्यवस्था, भर्ती और संचालन की प्रमुख जिम्मेदारी राज्यों के पास है।
  • केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) में छह बल शामिल हैं: सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), सशस्त्र सीमा बल (SSB) और असम राइफल्स।
  • पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D) गृह मंत्रालय के अधीन है, जो पुलिस से संबंधित अनुसंधान, प्रशिक्षण और तकनीकी मानकों के विकास में भूमिका निभाता है।
  • पुलिस सुधार का संवैधानिक आधार राज्य सूची में निहित है, किंतु प्रकाश सिंह मामले के निर्देशों, मॉडल पुलिस अधिनियम और केंद्र की सहायक योजनाओं के माध्यम से सुधार की प्रक्रिया को राष्ट्रीय स्तर पर दिशा मिलती है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
आयोजन की तिथि 21 अक्टूबर को पुलिस स्मरण दिवस (Police Commemoration Day) मनाया जाता है। यह दिन 1959 में लद्दाख के कोंगका ला (Kongka La) में भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प की स्मृति में चिह्नित है, जिसमें केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों ने प्राणों की आहुति दी थी।
राष्ट्रीय पुलिस स्मारक (National Police Memorial) नई दिल्ली के चाणक्यपुरी क्षेत्र में स्थित यह स्मारक कर्तव्य-पालन में शहीद हुए पुलिसकर्मियों की स्मृति को समर्पित है। इसका उद्घाटन 31 अक्टूबर 2018 को हुआ था।
श्रद्धांजलि का स्वरूप गृह मंत्री द्वारा स्मारक पर पुष्पांजलि देकर शहीदों को श्रद्धांजलि देना राष्ट्रीय स्तर पर पुलिस बल के बलिदान की औपचारिक मान्यता है। इससे आंतरिक सुरक्षा में कार्यरत बलों का मनोबल बढ़ता है।
संस्थागत उत्तरदायित्व केंद्र सरकार के अधीन गृह मंत्रालय इस दिवस के आयोजन का समन्वय करता है, जबकि पुलिस राज्य का विषय होने के कारण राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में भी इसी प्रकार की श्रद्धांजलि सभाएँ होती हैं।
शहीदों के नाम का अभिलेखन स्मारक में शहीद पुलिसकर्मियों के नाम दर्ज किए जाते हैं, जिससे बलिदान का स्थायी दस्तावेज़ीकरण होता है और यह जनस्मृति का हिस्सा बनता है।

महत्व

संवैधानिक एवं प्रशासनिक महत्त्व

  • पुलिस संविधान की सातवीं अनुसूची में राज्य सूची का विषय है, फिर भी सीमा-क्षेत्रों और आंतरिक सुरक्षा में केंद्रीय बलों की भूमिका राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार की जाती है।
  • केंद्र और राज्य पुलिस बलों के बीच सहयोग और समन्वय की भावना को ऐसे आयोजन सुदृढ़ करते हैं, जो संघवाद की कार्यप्रणाली का व्यावहारिक पक्ष है।

सामाजिक एवं नैतिक महत्त्व

  • शहीदों की स्मृति जनता और युवाओं में सेवा, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के मूल्य पैदा करती है।
  • शहीद परिवारों के प्रति सम्मान व्यक्त करना सामाजिक एकजुटता और राज्य-नागरिक संबंधों में विश्वास को गहरा करता है।

सुरक्षा एवं मनोबल से जुड़ा महत्त्व

  • सीमा-सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा में कार्यरत जवानों के बलिदान की मान्यता से बल का मनोबल और संस्थागत गौरव बना रहता है।
  • कोंगका ला जैसी घटनाएँ भारत की सीमा-सुरक्षा के इतिहास का हिस्सा हैं, जिन्हें स्मरण करना राष्ट्रीय सुरक्षा चेतना को पुष्ट करता है।

चुनौतियाँ

1. पुलिस बल का मनोबल और कल्याण

  • लंबे कार्य-घंटे, अपर्याप्त अवकाश और तनावपूर्ण परिस्थितियाँ पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य पर दबाव डालती हैं।
  • शहीद परिवारों के आर्थिक और सामाजिक पुनर्वास की व्यवस्था एक सतत चुनौती है, जिसके लिए एकरूप और पारदर्शी तंत्र आवश्यक है।

2. पुलिस सुधार की अपूर्ण प्रक्रिया

  • वर्ष 2006 में प्रकाश सिंह मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों के लिए सुधारों के निर्देश दिए, परंतु उनके क्रियान्वयन में राज्यवार असमानता बनी हुई है।
  • पुलिस की राजनीतिक तटस्थता, कार्यकाल की स्थिरता और जवाबदेही के प्रश्न आज भी सुधार-विमर्श के केंद्र में हैं।

3. आंतरिक सुरक्षा की बदलती चुनौतियाँ

  • साइबर अपराध, संगठित अपराध और सीमा-पार आतंकवाद ने पुलिस के कार्य-क्षेत्र और दक्षता की माँग को बढ़ाया है।
  • केंद्रीय बलों और राज्य पुलिस के बीच अधिकार-क्षेत्र और समन्वय की स्पष्टता आवश्यक है।

4. पुलिस की आधुनिकता और प्रशिक्षण

  • तकनीकी उपकरणों, फॉरेंसिक विज्ञान और डेटा-आधारित पुलिसिंग में निवेश की गति राज्यों में असमान है।
  • मानवाधिकारों के सम्मान के साथ प्रभावी कार्रवाई का संतुलन प्रशिक्षण की प्रमुख चुनौती है।

5. जनविश्वास और पुलिस की छवि

  • पुलिस की छवि पर कुछ घटनाओं के कारण प्रश्न उठते रहे हैं, जिससे बल और समाज के बीच दूरी बन सकती है।
  • जनता के साथ संवाद, शिकायत-निवारण और पारदर्शिता जनविश्वास की आधारशिला हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
पुलिस सुधारों का अधूरा क्रियान्वयन सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और मॉडल पुलिस अधिनियम, 2006 के प्रावधानों को अपनाने में राज्यों की गति भिन्न है।
शहीद परिवारों का पुनर्वास आर्थिक सहायता, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा की एकसमान व्यवस्था का अभाव सामने आ सकता है।
केंद्र-राज्य समन्वय पुलिस राज्य सूची का विषय होने से केंद्रीय बलों और राज्य पुलिस के बीच अधिकार-क्षेत्र की स्पष्टता की आवश्यकता बनी रहती है।
बदलते अपराध-स्वरूप साइबर और संगठित अपराध के लिए विशेष दक्षता, तकनीक और अंतर-एजेंसी समन्वय अपेक्षित है।
जवानों का मानसिक स्वास्थ्य लंबी ड्यूटी और जोखिमपूर्ण कार्य-परिस्थितियों से तनाव और थकान की समस्या बढ़ सकती है।

आगे की राह

  • पुलिस सुधारों के लिए सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और मॉडल पुलिस अधिनियम, 2006 के आधार पर राज्यवार प्रगति की नियमित समीक्षा हो।
  • शहीद परिवारों के कल्याण के लिए एकरूप, पारदर्शी और समयबद्ध सहायता-तंत्र बनाया जाए।
  • पुलिसकर्मियों के लिए कार्य-घंटों, अवकाश और मानसिक स्वास्थ्य सहायता से जुड़ी व्यवस्थाएँ सुदृढ़ की जाएँ।
  • केंद्र और राज्य पुलिस बलों के बीच सूचना-साझाकरण और संयुक्त प्रशिक्षण को संस्थागत रूप दिया जाए।
  • साइबर अपराध और फॉरेंसिक विज्ञान में विशेषज्ञता बढ़ाने के लिए आधुनिक प्रशिक्षण और तकनीकी निवेश किया जाए।
  • पुलिस प्रशिक्षण में मानवाधिकार, संवैधानिक मूल्यों और नैतिक आचरण पर बल दिया जाए।
  • जनता के साथ संवाद, शिकायत-निवारण तंत्र और पारदर्शिता को बढ़ाकर जनविश्वास सुदृढ़ किया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

पुलिस स्मृति दिवस (Police Commemoration Day) · राष्ट्रीय पुलिस स्मारक (National Police Memorial) · राज्य सूची और पुलिस (State List and Police) · अनुच्छेद 355 (Article 355) · केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (Central Armed Police Forces – CAPF) · प्रकाश सिंह मामला, 2006 (Prakash Singh Case) · मॉडल पुलिस अधिनियम, 2006 (Model Police Act, 2006) · पुलिस सुधार (Police Reforms) · संघवाद और कानून-व्यवस्था (Federalism and Law and Order) · पुलिस-जनसंख्या अनुपात (Police-Population Ratio) · बल-कल्याण और शहीद परिवार (Welfare of Personnel) · बौद्धिक एवं आंतरिक सुरक्षा (Internal Security)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 355: केंद्र का बाह्य आक्रमण व आंतरिक अशांति से संरक्षण का दायित्व
  • सातवीं अनुसूची, राज्य सूची प्रविष्टि 1 व 2: सार्वजनिक व्यवस्था और पुलिस राज्य विषय
  • सातवीं अनुसूची, संघ सूची प्रविष्टि 2क: केंद्रीय बलों की राज्यों में तैनाती

अवधारणा प्रवाह

कोंगका ला (1959) में केंद्रीय बल के जवानों का बलिदान, जिससे पुलिस की सेवा और बलिदान की स्मृति का आधार बना।  →  बलिदान की स्मृति में 21 अक्टूबर को पुलिस स्मरण दिवस के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई।  →  गृह मंत्रालय के समन्वय में राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है।  →  श्रद्धांजलि से बल का मनोबल, जनता में सम्मान और राष्ट्रीय सुरक्षा चेतना सुदृढ़ होती है।  →  सम्मान और मनोबल की यह भावना कल्याण-व्यवस्था, प्रशिक्षण और पुलिस सुधारों की माँग को प्रासंगिक बनाए रखती है।  →  पुलिस सुधार और कल्याण-नीतियों के सतत क्रियान्वयन से सेवा की दक्षता और जनविश्वास बढ़ता है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पुलिस भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची का विषय है।
2. संविधान का अनुच्छेद 355 संघ को प्रत्येक राज्य को बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से संरक्षित करने का कर्तव्य सौंपता है।
3. प्रकाश सिंह मामले (2006) में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश केवल केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों पर लागू होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: पुलिस और सार्वजनिक व्यवस्था राज्य सूची की प्रविष्टियाँ 1 और 2 में आती हैं। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 355 संघ का कर्तव्य है, परंतु इसका व्यावहारिक अर्थ राज्यों की सहायता करना है, उनकी जगह लेना नहीं। कथन 3 गलत है: प्रकाश सिंह मामले के निर्देश मुख्यतः राज्य पुलिस बलों के लिए थे, जैसे राज्य सुरक्षा आयोग, पुलिस महानिदेशक का चयन और कार्यकाल-सुरक्षा।

Q2. निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): पुलिस स्मृति दिवस प्रति वर्ष 21 अक्टूबर को मनाया जाता है ताकि कर्तव्य-पालन में प्राण न्योछावर करने वाले पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी जा सके।
कारण (R): यह तिथि वर्ष 1959 में लद्दाख के कोंगका ला क्षेत्र में भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प की स्मृति से जुड़ी है।
उपर्युक्त के संदर्भ में सही उत्तर चुनिए।

  1. A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है
  2. A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है
  3. A सही है, परंतु R गलत है
  4. A गलत है, परंतु R सही है

उत्तर: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है — 21 अक्टूबर 1959 की कोंगका ला झड़प में केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) के जवान शहीद हुए थे, इसी कारण यह तिथि पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाई जाती है। अतः कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।

Q3. पुलिस से संबंधित अनुसंधान, प्रशिक्षण-सामग्री और आधुनिकीकरण से जुड़े कार्यों के लिए गृह मंत्रालय के अधीन कौन-सा नोडल संगठन कार्य करता है?

  1. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB)
  2. पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D)
  3. राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA)
  4. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI)

उत्तर: पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D) — पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (Bureau of Police Research and Development – BPR&D) गृह मंत्रालय के अधीन पुलिस सुधार, अनुसंधान और आधुनिकीकरण का नोडल संगठन है। NCRB अपराध आँकड़ों का संकलन करता है, NIA आतंकवाद और गंभीर अपराधों की जाँच करती है, तथा CBI विशेष जाँच का कार्य करती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ पुलिस को संविधान में राज्य का विषय रखा गया है, फिर भी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और संघ की भूमिका लगातार बढ़ी है। संवैधानिक ढाँचे और संस्थागत व्यवस्था के संदर्भ में इस संतुलन की समालोचनात्मक परीक्षा कीजिए। साथ ही बताइए कि पुलिस सुधारों में प्रकाश सिंह मामले के निर्देश कितने प्रभावी रहे हैं और इनके क्रियान्वयन में कौन-सी बाधाएँ सामने आती हैं। (15 Marks)

रूपरेखा: MODEL-ANSWER SKELETON: (1) प्रस्तावना: 21 अक्टूबर 1959 की कोंगका ला झड़प, पुलिस स्मृति दिवस और राष्ट्रीय पुलिस स्मारक (नई दिल्ली) में शहीदों के नाम अंकित होने का उल्लेख। (2) संवैधानिक ढाँचा: सातवीं अनुसूची की राज्य सूची की प्रविष्टि 1 (सार्वजनिक व्यवस्था) और प्रविष्टि 2 (पुलिस); अनुच्छेद 246 के अंतर्गत विधायी शक्ति का विभाजन; अनुच्छेद 256 और 257 के अंतर्गत संघ के निर्देश; अनुच्छेद 355 के अंतर्गत संघ का संरक्षण-कर्तव्य; अनुच्छेद 312 के अंतर्गत अखिल भारतीय सेवाएँ (IPS); अनुच्छेद 33 के अंतर्गत सशस्त्र और पुलिस बलों के मूल अधिकारों पर संसदीय प्रतिबंध। (3) संस्थागत ढाँचा: गृह मंत्रालय के अधीन CAPF (BSF, CRPF, CISF, ITBP, SSB, असम राइफल्स); BPR&D; पुलिस अधिनियम, 1861 और उसकी सीमाएँ। (4) सुधार प्रक्रिया: राष्ट्रीय पुलिस आयोग (1977-81); रिबेरो समिति (1998); पद्मनाभैया समिति (2000); सोली सोराबजी समिति द्वारा मॉडल पुलिस अधिनियम, 2006; प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ (2006) के सात निर्देश, जैसे राज्य सुरक्षा आयोग, DGP का न्यूनतम कार्यकाल, जाँच और कानून-व्यवस्था का पृथक्करण, पुलिस शिकायत प्राधिकरण। (5) मूल्यांकन: कई राज्यों द्वारा मॉडल कानून को अपनाने में विलंब और आंशिक अनुपालन; कार्यपालिका के हस्तक्षेप से पुलिस की स्वायत्तता पर प्रश्न; पुलिस-जनसंख्या अनुपात में कमी (संयुक्त राष्ट्र के सुझाए मानक लगभग 222 प्रति लाख के संदर्भ में)। (6) संतुलित दृष्टिकोण: केंद्रीकरण के पक्ष में तर्क (अंतर-राज्यीय अपराध, आतंकवाद, सीमा सुरक्षा) और संघवाद के पक्ष में तर्क (राज्य की जमीनी जानकारी, स्थानीय उत्तरदायित्व, सरकारिया आयोग की संघ-राज्य सहयोग की सिफारिशें)। (7) निष्कर्ष: सहकारी संघवाद के ढाँचे में पुलिस को स्वायत्त, उत्तरदायी और प्रशिक्षित बनाने की आवश्यकता, तथा बलिदान करने वाले कर्मियों के कल्याण और सम्मान को संस्थागत रूप देना।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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