पर्यावरण मंत्री ने वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए PAVAN-I3C केंद्र का दौरा किया

पर्यावरण मंत्री ने वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए PAVAN-I3C केंद्र का दौरा किया

पर्यावरण मंत्री ने वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए PAVAN-I3C केंद्र का दौरा किया

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वायु प्रदूषण नियंत्रण प्रक्रिया

✎ CAQM एक सांविधिक, बहु-राज्य निकाय है जो NCR में वायु गुणवत्ता का समन्वित प्रबंधन करता है, और GRAP उसका प्रमुख AQI-आधारित चरणबद्ध कार्रवाई तंत्र है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण (वायु प्रदूषण, पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विधिक व नीतिगत उपाय)  |  GS Paper II — शासन (सांविधिक निकाय, केंद्र-राज्य समन्वय, बहु-राज्य प्रशासन)
  • Prelims: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management – CAQM) और उसका विधिक आधार, श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (Graded Response Action Plan – GRAP) के चरण, वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index – AQI) की श्रेणियाँ और उसमें शामिल प्रदूषक, PM2.5 और PM10 में अंतर, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme – NCAP), वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 तथा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, पर्यावरण प्रदूषण (निवारण एवं नियंत्रण) प्राधिकरण (EPCA) और CAQM का संबंध, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और उसके सटे क्षेत्र
  • Essay: वायु प्रदूषण: आर्थिक विकास और स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार के बीच संतुलन, बहु-राज्य पर्यावरण प्रशासन में सांविधिक निकायों और एकीकृत निगरानी प्रणालियों की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: CAQM एक सांविधिक, बहु-राज्य निकाय है जो NCR में वायु गुणवत्ता का समन्वित प्रबंधन करता है, और GRAP उसका प्रमुख AQI-आधारित चरणबद्ध कार्रवाई तंत्र है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के PAVAN-I3C एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र का दौरा कर वायु प्रदूषण शमन परिचालनों की समीक्षा की। यह समीक्षा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और उससे सटे क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए चल रहे उपायों के कार्यान्वयन और उनकी प्रभावशीलता का आकलन करने के उद्देश्य से हुई। ऐसे केंद्र विभिन्न राज्यों और एजेंसियों से प्राप्त आंकड़ों को एक मंच पर लाकर त्वरित निर्णय और समन्वित कार्रवाई को संभव बनाते हैं, इसलिए यह समाचार प्रशासनिक समन्वय और वायु प्रदूषण नियंत्रण की संस्थागत व्यवस्था, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है।

पृष्ठभूमि

  • वायु प्रदूषण का मौसमी स्वरूप: सर्दियों में कम तापमान, धीमी हवा की गति और तापमान उलटाव (Temperature Inversion) के कारण प्रदूषक वायुमंडल की निचली परतों में जमा हो जाते हैं, जिससे NCR में PM2.5 का स्तर अक्सर बढ़ जाता है।
  • पर्यावरण प्रदूषण (निवारण एवं नियंत्रण) प्राधिकरण (EPCA) की स्थापना 1998 में हुई थी, परंतु इसके अधिकार-क्षेत्र और बहु-राज्य समन्वय की सीमाएँ अनुभव में आईं।
  • वर्ष 2020 में अध्यादेश द्वारा CAQM की स्थापना हुई और 2021 में संसद द्वारा अधिनियम पारित होने से इसे विधिक स्वरूप और व्यापक अधिकार प्राप्त हुए।
  • राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) 2019 में आरंभ हुआ, जिसका लक्ष्य अनेक शहरों में PM10 और PM2.5 के स्तर में चरणबद्ध कमी लाना है।
  • फसल अवशेष दहन (Crop Residue Burning) को NCR के वायु प्रदूषण में मौसमी योगदानकर्ता के रूप में पहचाना गया है, जिसके प्रबंधन हेतु राज्यों के स्तर पर विभिन्न उपाय लागू होते हैं।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार) की न्यायिक व्याख्या में स्वच्छ पर्यावरण को जीवन के अधिकार का अंग माना है।

CAQM और PAVAN-I3C क्या है?

  • CAQM एक सांविधिक, बहु-राज्य निकाय है, जो NCR और उससे सटे क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता के समन्वित प्रबंधन के लिए उत्तरदायी है। इसके क्षेत्राधिकार में दिल्ली तथा सम्बद्ध राज्य शामिल हैं।
  • आयोग के पास संबंधित राज्य सरकारों और एजेंसियों को निर्देश देने तथा नियमों के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई करने के प्रावधान हैं।
  • श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (GRAP) वायु गुणवत्ता सूचकांक के स्तर के अनुसार चरणबद्ध उपाय तय करती है। AQI बढ़ने पर निर्माण गतिविधियों पर रोक, वाहनों पर प्रतिबंध और उद्योगों के नियंत्रण जैसे कड़े उपाय लागू होते हैं।
  • वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) की श्रेणियाँ 0–50 (अच्छा), 51–100 (संतोषजनक), 101–200 (मध्यम), 201–300 (खराब), 301–400 (बहुत खराब) और 401–500 (गंभीर) हैं। इसमें PM2.5, PM10, NO2, SO2, CO, O3, NH3 और Pb जैसे प्रदूषकों को शामिल किया जाता है।
  • PM2.5 वे सूक्ष्म कण हैं जिनका व्यास लगभग 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है और ये फेफड़ों में गहराई तक पहुँच सकते हैं। PM10 अपेक्षाकृत बड़े कण हैं।
  • एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र सामान्यतः निगरानी स्टेशनों, उपग्रह आंकड़ों और स्रोत-वार सूचनाओं को एक जगह जोड़ता है, ताकि प्रदूषण के हॉटस्पॉट की पहचान और प्रवर्तन कार्रवाई का समन्वय हो सके।
  • वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोत परिवहन, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण व सड़क की धूल, ठोस अपशिष्ट दहन और फसल अवशेष दहन हैं। इसलिए नियंत्रण उपाय स्रोत-आधारित होते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
वैधानिक संस्था (Statutory Body) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एवं आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) का गठन वर्ष 2021 के अधिनियम के तहत हुआ है। इसे एक वैधानिक निकाय के रूप में समन्वित और बाध्यकारी निर्देश देने की शक्ति प्राप्त है।
समेकित कमान एवं नियंत्रण केंद्र (Integrated Command and Control Centre) ‘PAVAN-I3C’ नामक यह केंद्र विभिन्न स्रोतों से प्राप्त वायु गुणवत्ता आंकड़ों को एक मंच पर लाकर वास्तविक समय में निगरानी और त्वरित निर्णय को संभव बनाता है।
वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index – AQI) यह सूचकांक वायु प्रदूषण की स्थिति को जनता के लिए सरल श्रेणियों में व्यक्त करता है और शमन कार्रवाइयों की प्राथमिकता तय करने में आधार बनता है।
क्षेत्रीय समन्वय राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और उससे सटे राज्यों के बीच प्रदूषण के स्रोतों (पराली दहन, धूल, वाहन, उद्योग) पर एक साझा प्रशासनिक ढांचा कार्य करता है।
मंत्रालयी समीक्षा केंद्रीय पर्यावरण मंत्री द्वारा केंद्र का निरीक्षण यह दर्शाता है कि शमन संचालन की नियमित उच्च-स्तरीय समीक्षा शासन की जवाबदेही का हिस्सा है।

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • वायु प्रदूषण मानव स्वास्थ्य, विशेषकर श्वसन और हृदय रोगों, से सीधे जुड़ा है, इसलिए इसका नियंत्रण जीवन के अधिकार से संबंधित है।
  • वास्तविक समय की निगरानी से प्रदूषण के चरम स्तर पर तुरंत हस्तक्षेप संभव होता है, जिससे प्रदूषण के बढ़ने की अवधि सीमित होती है।

शासन एवं प्रशासनिक महत्व

  • बहु-राज्यीय क्षेत्र में एक केंद्रीकृत आदेश-श्रृंखला से अलग-अलग राज्यों के बीच समन्वय की कमी को कम किया जा सकता है।
  • आंकड़ों पर आधारित निर्णय-प्रक्रिया से नीति-निर्माण अधिक साक्ष्य-आधारित और पारदर्शी बनती है।
  • ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (Graded Response Action Plan – GRAP) जैसे चरणबद्ध उपायों को लागू करने में ऐसी प्रणाली सहायक होती है।

संघीय एवं संवैधानिक महत्व

  • वायु प्रदूषण एक अंतर-राज्यीय समस्या है, इसलिए इसके लिए समन्वित संस्थागत ढांचा सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की भावना को व्यावहारिक रूप देता है।
  • पर्यावरण संरक्षण को राज्य और केंद्र दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी मानने से संघीय संरचना में विषय-विशिष्ट समन्वय का उदाहरण मिलता है।

चुनौतियाँ

1. बहु-स्रोत प्रदूषण की जटिलता

  • वायु प्रदूषण के स्रोत बिखरे हुए हैं, जैसे फसल अवशेष दहन, निर्माण-धूल, सड़क की धूल, वाहन उत्सर्जन और औद्योगिक उत्सर्जन।
  • एक ही तकनीकी केंद्र से सभी स्रोतों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना कठिन है, क्योंकि प्रत्येक स्रोत की प्रवर्तन-व्यवस्था अलग है।

2. राज्यों के बीच प्रवर्तन में असमानता

  • राज्य सरकारों की प्रशासनिक क्षमता, वित्तीय संसाधन और प्राथमिकताएं अलग-अलग होती हैं।
  • निर्देशों के कार्यान्वयन में विलंब या असंगति से समग्र शमन प्रभाव कमजोर पड़ सकता है।

3. आंकड़ों की विश्वसनीयता और डेटा समन्वय

  • निगरानी केंद्रों की संख्या, अंशांकन (Calibration) और डेटा गुणवत्ता में अंतर से निर्णयों की सटीकता प्रभावित हो सकती है।
  • विभिन्न एजेंसियों (केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) के आंकड़ों में समन्वय आवश्यक है।

4. आजीविका और पर्यावरण के बीच संतुलन

  • कठोर प्रतिबंध, जैसे निर्माण कार्य या औद्योगिक गतिविधियों पर रोक, श्रमिकों और छोटे व्यवसायों की आजीविका पर प्रभाव डाल सकते हैं।
  • न्यायसंगत संक्रमण (Just Transition) के बिना प्रतिबंध सामाजिक असंतोष का कारण बन सकते हैं।

5. कृषि अवशेष प्रबंधन की चुनौती

  • पराली दहन का समाधान केवल प्रवर्तन से नहीं, बल्कि किसानों के लिए वैकल्पिक तकनीक और आर्थिक प्रोत्साहन से संभव है।
  • लघु जोत वाले किसानों के लिए मशीनरी की उपलब्धता और लागत एक बड़ी बाधा है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

समस्या चिंता
बहु-स्रोत उत्सर्जन विभिन्न स्रोतों के लिए अलग-अलग प्रवर्तन तंत्र होने से समग्र नियंत्रण कमजोर रहता है।
राज्यों के बीच असंगति समान मानकों और समय-सारिणी के अभाव में शमन प्रभाव सीमित हो सकता है।
डेटा की गुणवत्ता निगरानी उपकरणों के रखरखाव और अंशांकन में कमी से निर्णय प्रभावित हो सकते हैं।
आजीविका पर प्रभाव निर्माण और औद्योगिक प्रतिबंधों से श्रमिकों की आय पर असर पड़ सकता है।
पराली दहन वैकल्पिक तकनीक की लागत और उपलब्धता किसानों के लिए व्यावहारिक बाधा बनी हुई है।

आगे की राह

  • समेकित कमान एवं नियंत्रण केंद्र के आंकड़ों को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और स्थानीय निकायों के साथ वास्तविक समय में साझा कर एक एकीकृत डेटा प्रणाली विकसित की जाए।
  • GRAP के प्रत्येक चरण के लिए स्पष्ट, पूर्व-निर्धारित और सार्वजनिक रूप से ज्ञात कार्रवाई-सूची तय की जाए, ताकि प्रवर्तन में एकरूपता आए।
  • पराली प्रबंधन के लिए मशीनरी की सब्सिडी, कस्टम हायरिंग केंद्र और फसल अवशेष से आय के मॉडल को बढ़ावा दिया जाए।
  • निर्माण-धूल नियंत्रण के लिए ऑनलाइन निगरानी, साइट-स्तरीय अनुपालन और दोषी इकाइयों पर समयबद्ध दंड की व्यवस्था हो।
  • श्रमिकों और छोटे व्यवसायों के लिए प्रतिबंध-अवधि में आय-सहायता जैसे न्यायसंगत संक्रमण उपाय सुनिश्चित किए जाएं।
  • सार्वजनिक परिवहन, इलेक्ट्रिक वाहन और स्वच्छ ईंधन की ओर संक्रमण को गति देकर स्रोत-स्तर पर उत्सर्जन घटाया जाए।
  • राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के दीर्घकालिक लक्ष्यों के साथ क्षेत्रीय योजनाओं का समन्वय सुनिश्चित किया जाए।
  • नागरिक जागरूकता और समुदाय-आधारित निगरानी को बढ़ावा देकर शमन नीतियों में जन-भागीदारी बढ़ाई जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

वायु प्रदूषण · वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) · एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र (PAVAN-I3C) · पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 · राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) · सतत विकास लक्ष्य (SDGs) · पराली जलाना · वाहन उत्सर्जन · औद्योगिक प्रदूषण · शहरीकरण · सार्वजनिक स्वास्थ्य · जलवायु परिवर्तन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 21: स्वच्छ वायु में जीवन का अधिकार
  • अनुच्छेद 48A: पर्यावरण संरक्षण का राज्य का दायित्व
  • अनुच्छेद 51A(g): पर्यावरण संरक्षण का मौलिक कर्तव्य

अवधारणा प्रवाह

वायु प्रदूषण के स्रोतों (पराली, धूल, वाहन, उद्योग) से उत्सर्जन में वृद्धि होती है।  →  समेकित कमान एवं नियंत्रण केंद्र वास्तविक समय में वायु गुणवत्ता आंकड़ों की निगरानी करता है।  →  वायु गुणवत्ता सूचकांक के स्तर के आधार पर GRAP के संबंधित चरण की पहचान होती है।  →  CAQM संबंधित राज्यों और एजेंसियों को निर्देश जारी करता है और शमन संचालन का समन्वय करता है।  →  प्रवर्तन, निगरानी और समीक्षा के माध्यम से प्रदूषण-स्तर में कमी के परिणामों का मूल्यांकन होता है।  →  मूल्यांकन के आधार पर अगले चरण की नीति और शमन रणनीति में संशोधन किया जाता है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) का गठन पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत किया गया है।
2. CAQM केवल दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण से संबंधित मामलों से निपटता है।
3. CAQM के पास वायु प्रदूषण के स्रोतों की निगरानी, पहचान और उन पर नियंत्रण के लिए व्यापक शक्तियाँ हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। CAQM का गठन पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत किया गया है। कथन 2 गलत है। CAQM दिल्ली, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण से संबंधित मामलों से निपटता है। कथन 3 सही है। CAQM के पास वायु प्रदूषण के स्रोतों की निगरानी, पहचान और उन पर नियंत्रण के लिए व्यापक शक्तियाँ हैं।

Q2. राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसका लक्ष्य 2024 तक पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5 और PM10) सांद्रता को 20-30% तक कम करना है।
2. यह पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया है।
3. यह एक बाध्यकारी कार्यक्रम है जिसके तहत उल्लंघनों के लिए दंड का प्रावधान है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 सही है। NCAP का लक्ष्य 2024 तक पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5 और PM10) सांद्रता को 20-30% तक कम करना है। कथन 2 सही है। यह पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया है। कथन 3 गलत है। NCAP एक गैर-बाध्यकारी कार्यक्रम है और इसमें उल्लंघनों के लिए सीधे दंड का प्रावधान नहीं है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण एक गंभीर और बहुआयामी चुनौती बनी हुई है। इस संदर्भ में, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए और वायु प्रदूषण को कम करने के लिए इसकी प्रमुख रणनीतियों पर प्रकाश डालिए। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत NCR में वायु प्रदूषण की गंभीरता का संक्षिप्त परिचय देकर करें। CAQM के गठन, उसके जनादेश और क्षेत्राधिकार का उल्लेख करें। इसकी भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण करते हुए इसकी सफलताओं और सीमाओं दोनों पर चर्चा करें। इसकी प्रमुख रणनीतियों जैसे कि पराली जलाने पर नियंत्रण, औद्योगिक उत्सर्जन नियमन, वाहन प्रदूषण नियंत्रण, निर्माण और विध्वंस गतिविधियों का प्रबंधन, और एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र (PAVAN-I3C) जैसे तकनीकी हस्तक्षेपों का विस्तृत वर्णन करें। अंत में, वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए आगे की राह और चुनौतियों पर निष्कर्ष प्रस्तुत करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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