01 Nov छत्तीसगढ़ सरकार ने मीडिया कर्मियों के लिए बीमा योजना का प्रारूप जारी किया, सुझाव आमंत्रित
✎ मीडिया कर्मियों के लिए छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य एवं दुर्घटना समूह बीमा योजना-2026 का प्रारूप जनसंपर्क विभाग ने जारी किया है, जिस पर 1 से 30 नवंबर 2026 तक ईमेल द्वारा सुझाव लिए जा रहे हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन व्यवस्था (राज्य सरकारों की कल्याणकारी योजनाएँ, सार्वजनिक नीति निर्माण में परामर्श प्रक्रिया) | GS Paper II — सामाजिक न्याय (असंगठित और अनियत रोजगार में लगे श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा) | GS Paper III — अर्थव्यवस्था / सामाजिक क्षेत्र (बीमा क्षेत्र और सामाजिक सुरक्षा का संबंध)
- Prelims: समूह बीमा (Group Insurance) और व्यक्तिगत बीमा में अंतर, भारतीय संविधान का अनुच्छेद 41 (राज्य के नीति निदेशक तत्व), सूची II (राज्य सूची) में लोक स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के विषय, संविधान का अनुच्छेद 282 (संघ और राज्यों द्वारा सार्वजनिक प्रयोजन के लिए व्यय), भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI), श्रमजीवी पत्रकार और अन्य समाचार पत्र कर्मचारी (सेवा शर्तें) अधिनियम, 1955, भारतीय प्रेस परिषद (Press Council of India) की भूमिका, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 और असंगठित श्रमिक
- Essay: असंगठित और अनुबंध आधारित कार्यबल की सामाजिक सुरक्षा: राज्य की भूमिका और सीमाएँ, लोकतंत्र में स्वतंत्र पत्रकारिता और उसके कर्मियों की सुरक्षा का संबंध
त्वरित पुनरावृत्ति: मीडिया कर्मियों के लिए छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य एवं दुर्घटना समूह बीमा योजना-2026 का प्रारूप जनसंपर्क विभाग ने जारी किया है, जिस पर 1 से 30 नवंबर 2026 तक ईमेल द्वारा सुझाव लिए जा रहे हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में कार्यरत मीडिया कर्मियों को स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा सुरक्षा देने के उद्देश्य से ‘छत्तीसगढ़ मीडिया कर्मी स्वास्थ्य एवं दुर्घटना समूह बीमा योजना-2026’ का प्रारूप जनसंपर्क विभाग द्वारा तैयार किया है। प्रारूप को विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक किया गया है और इस पर सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। सुझाव भेजने की प्रक्रिया 1 नवंबर 2026 से शुरू होकर 30 नवंबर 2026 तक चलेगी। सुझाव ईमेल के माध्यम से भेजे जा सकते हैं। यह कदम किसी योजना को अंतिम रूप देने से पहले हितधारकों से परामर्श की प्रशासनिक प्रक्रिया को दर्शाता है, जिससे नीति की व्यावहारिकता और पात्रता से जुड़े प्रश्नों पर विचार हो सके।
पृष्ठभूमि
- भारत में मीडिया कर्मियों की सेवा शर्तों के नियमन के लिए श्रमजीवी पत्रकार और अन्य समाचार पत्र कर्मचारी (सेवा शर्तें) अधिनियम, 1955 लागू है, जो मुख्यतः समाचार पत्र संस्थानों में कार्यरत कर्मियों से संबंधित है।
- अनेक मीडिया कर्मी अनुबंध, अंशकालिक या डिजिटल माध्यमों में कार्य करते हैं, जिन पर नियोक्ता-आधारित सामाजिक सुरक्षा व्यवस्थाएँ पूर्ण रूप से लागू नहीं होतीं।
- सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में राज्य सरकारें अपने क्षेत्राधिकार में कल्याण योजनाएँ बनाती हैं; लोक स्वास्थ्य राज्य सूची का विषय है, जबकि श्रम और सामाजिक सुरक्षा समवर्ती सूची में आते हैं।
- संविधान का अनुच्छेद 41 राज्य को बेरोजगारी, वृद्धावस्था, बीमारी और अंगहीनता की स्थिति में लोक सहायता उपलब्ध कराने का मार्गदर्शन देता है, जो ऐसी योजनाओं का नैतिक और नीतिगत आधार है।
- सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 ने असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा के प्रावधानों को एक संहिता में समेकित करने का प्रयास किया है।
समूह बीमा योजना क्या है?
- समूह बीमा (Group Insurance) एक ऐसी बीमा व्यवस्था है जिसमें किसी एक नियोक्ता, संगठन, पेशेवर समूह या समुदाय के सदस्यों को एक ही पॉलिसी के अंतर्गत सामूहिक रूप से बीमा सुरक्षा दी जाती है।
- समूह बीमा में व्यक्तिगत बीमा की तुलना में जोखिम साझा किया जाता है, जिससे प्रशासनिक लागत घटती है और सदस्यों को अपेक्षाकृत सुलभ शर्तों पर सुरक्षा मिल सकती है।
- स्वास्थ्य बीमा में चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति या उपचार से जुड़ी सुविधा शामिल होती है, जबकि दुर्घटना बीमा में दुर्घटनावश मृत्यु या स्थायी विकलांगता की स्थिति में मुआवजा दिया जाता है।
- बीमा क्षेत्र का नियमन भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 के अंतर्गत स्थापित IRDAI द्वारा किया जाता है, जबकि सरकारी योजनाओं में प्रीमियम वहन, पात्रता और लाभ-वितरण का निर्धारण संबंधित विभाग करता है।
- किसी भी ऐसी योजना के प्रारूप पर सुझाव लेना प्रशासनिक पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श के सिद्धांत से जुड़ा है, जिससे नीति के क्रियान्वयन में व्यावहारिक कमियाँ पहले पहचानी जा सकें।
- राज्य के स्तर पर ऐसी योजनाएँ संविधान के अनुच्छेद 282 के अंतर्गत राज्य की संचित निधि से सार्वजनिक प्रयोजन के लिए व्यय के रूप में वित्त-पोषित की जा सकती हैं।
- सामाजिक सुरक्षा के विस्तार में यह प्रश्न महत्वपूर्ण है कि पात्रता की परिभाषा, पंजीकरण की प्रक्रिया और दावा-निपटान की व्यवस्था कितनी सरल और समावेशी है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| योजना का नाम | छत्तीसगढ़ मीडिया कर्मी स्वास्थ्य एवं दुर्घटना समूह बीमा योजना-2026 (Chhattisgarh Media Workers Health and Accident Group Insurance Scheme-2026) अभी प्रारूप (Draft) अवस्था में है, इसलिए इसे अभी लागू योजना न मानें |
| नोडल विभाग | जनसंपर्क विभाग (Public Relations Department), छत्तीसगढ़ ने प्रारूप तैयार किया है और इसे विभागीय वेबसाइट www.dprcg.gov.in पर प्रकाशित किया है |
| लक्षित वर्ग | राज्य में कार्यरत सभी पात्र मीडिया कर्मी, अर्थात् पत्रकार और मीडिया से जुड़े अन्य कर्मचारी |
| बीमा का स्वरूप | समूह बीमा (Group Insurance) के अंतर्गत स्वास्थ्य और दुर्घटना, दोनों प्रकार की सुरक्षा का प्रस्ताव है, जिसमें अप्रत्याशित दुर्घटना की स्थिति में लाभ मिलने की बात कही गई है |
| परामर्श प्रक्रिया | एक नवंबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक ईमेल ([email protected]) के माध्यम से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं, जिसमें प्रारूप के साथ क्रियान्वयन पर भी विचार मांगे गए हैं |
महत्व
सामाजिक सुरक्षा और कल्याण
- मीडिया कर्मियों को स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा कवर देना राज्य की कल्याणकारी भूमिका का व्यावहारिक उदाहरण है, जो संविधान के नीति-निदेशक तत्वों की भावना से जुड़ता है
- पत्रकारों के कार्य में अक्सर फील्ड रिपोर्टिंग, आपदा और संघर्ष क्षेत्र में जाना और असुरक्षित परिस्थितियाँ शामिल होती हैं, इसलिए दुर्घटना बीमा का व्यावहारिक महत्व अधिक है
- अनौपचारिक या अनुबंध आधारित कार्यों में लगे मीडिया कर्मियों के लिए नियोक्ता पर निर्भर न रहते हुए न्यूनतम सुरक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में यह कदम उपयोगी है
प्रशासनिक और नीति-निर्माण प्रक्रिया
- प्रारूप को सार्वजनिक परामर्श (Public Consultation) के लिए रखना नीति-निर्माण में हितधारकों की भागीदारी का उदाहरण है
- सुझाव प्रक्रिया से योजना के कवरेज, प्रीमियम, दावा निपटान और पात्रता के मानदंडों पर व्यावहारिक सुधार संभव होते हैं
- ईमेल और विभागीय वेबसाइट के माध्यम से सुझाव लेना ई-गवर्नेंस के उपयोग को दर्शाता है
संघीय ढांचे के संदर्भ में
- राज्य सूची और समवर्ती सूची के विषयों पर राज्य अपने स्तर पर कल्याणकारी योजनाएँ बना सकते हैं, पर बीमा कारोबार का विषय संघ सूची में आता है, इसलिए राज्य की भूमिका प्रायः नियोजन, वित्तपोषण और समन्वय तक सीमित रहती है
- यह उदाहरण बताता है कि राज्य स्तर पर सामाजिक सुरक्षा के प्रयोग किस प्रकार संघीय ढांचे में अपनी जगह बनाते हैं
चुनौतियाँ
1. बीमा विषय की संवैधानिक स्थिति
- बीमा (Insurance) संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची (Union List) में आता है, इसलिए राज्य स्वयं बीमा कंपनी के रूप में कारोबार नहीं कर सकता
- ऐसी स्थिति में योजना को प्रायः किसी बीमा कंपनी के साथ समूह बीमा अनुबंध के माध्यम से लागू किया जाता है, जिसकी शर्तें और नियामक ढांचा भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) के मानदंडों से प्रभावित होते हैं
यूपीएससी लिंक: सातवीं अनुसूची, संघ-राज्य विधायी शक्तियों का वितरण
2. पात्रता और परिभाषा का प्रश्न
- ‘मीडिया कर्मी’ की स्पष्ट परिभाषा तय करना कठिन है, क्योंकि इसमें स्थायी, संविदा, अंशकालिक और स्वतंत्र (फ्रीलांस) कार्यकर्ता आते हैं
- पात्रता तय न होने पर कई वास्तविक कार्यकर्ता योजना के दायरे से बाहर रह सकते हैं, जबकि प्रमाण-पत्र की कठोर शर्तें छोटे और ग्रामीण क्षेत्र के पत्रकारों के लिए बाधा बन सकती हैं
यूपीएससी लिंक: सामाजिक सुरक्षा में समावेशन, असंगठित और अनुबंध श्रमिकों की स्थिति
3. वित्तीय स्थिरता और प्रीमियम
- समूह बीमा में प्रीमियम का भार राज्य, नियोक्ता और कर्मी के बीच किस अनुपात में बंटेगा, यह योजना की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए निर्णायक है
- जोखिम का सही आकलन न होने पर प्रीमियम बढ़ सकता है या बीमा कंपनियों की रुचि घट सकती है, जिससे योजना कमजोर पड़ सकती है
यूपीएससी लिंक: राज्य वित्त, सार्वजनिक व्यय की प्राथमिकताएँ
4. दावा निपटान और प्रशासनिक क्षमता
- दावों के सत्यापन, दस्तावेज़ों की जाँच और समयबद्ध भुगतान में विलंब होने पर योजना का वास्तविक लाभ कम हो जाता है
- जिले और तहसील स्तर पर सूचना तथा सहायता केंद्रों की कमी से कर्मियों तक योजना की जानकारी देर से पहुँचती है
यूपीएससी लिंक: प्रशासनिक सुधार, लोक सेवा वितरण में ई-गवर्नेंस की भूमिका
5. मीडिया उद्योग की संरचनात्मक समस्या
- मीडिया संस्थानों में रोजगार की अस्थिरता और अनुबंध आधारित नियुक्तियों के कारण नियोक्ता-आधारित सामाजिक सुरक्षा का दायरा सीमित है
- इस क्षेत्र में पहले से चले आ रहे श्रम कानूनों का प्रवर्तन असमान रहा है, जिससे राज्य स्तरीय योजनाओं पर अतिरिक्त दबाव बनता है
यूपीएससी लिंक: असंगठित और अनुबंध श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा, श्रम कानून
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| कानूनी दायरा | राज्य द्वारा बीमा कारोबार का सीधा संचालन संभव नहीं है, इसलिए बीमा कंपनी के साथ अनुबंध और उसकी शर्तें योजना की सफलता तय करेंगी |
| पात्रता की परिभाषा | स्थायी, संविदा, अंशकालिक और फ्रीलांस मीडिया कर्मियों को शामिल करने के मानदंड स्पष्ट न होने पर बहिष्करण की आशंका है |
| प्रीमियम का बोझ | राज्य, नियोक्ता और कर्मी के बीच अंशदान का बंटवारा तय न होने से योजना की वित्तीय व्यवहार्यता पर प्रश्न उठ सकता है |
| दावा निपटान | दस्तावेज़ी जटिलता और विलंबित भुगतान से लाभार्थियों का भरोसा घट सकता है |
| सूचना की पहुँच | ग्रामीण और छोटे शहरों के पत्रकारों तक ऑनलाइन परामर्श और योजना की जानकारी सीमित रूप से पहुँच पाती है |
| नियोक्ता की भूमिका | मीडिया संस्थानों की जिम्मेदारी और राज्य की भूमिका के बीच स्पष्ट विभाजन न होने पर अंशदान और अनुपालन में असमानता आ सकती है |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- छत्तीसगढ़ मीडिया कर्मी स्वास्थ्य एवं दुर्घटना समूह बीमा योजना-2026 (Chhattisgarh Media Workers Health and Accident Group Insurance Scheme-2026)
आगे की राह
- प्रारूप पर सुझाव देने से पहले पात्रता की परिभाषा में स्थायी, संविदा, अंशकालिक और फ्रीलांस मीडिया कर्मियों को स्पष्ट रूप से शामिल करने का प्रस्ताव रखा जाए
- प्रीमियम के अंशदान का अनुपात राज्य, नियोक्ता और कर्मी के बीच पारदर्शी ढंग से तय किया जाए और उसका आधार बीमांकिक (Actuarial) आकलन हो
- दावा निपटान के लिए समयसीमा, दस्तावेज़ों की सूची और ऑनलाइन ट्रैकिंग की व्यवस्था की जाए
- बीमा कंपनी के चयन में नियामक मानदंडों और सेवा-स्तर की शर्तों को अनुबंध में स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए
- जिला स्तर पर सहायता केंद्र और हेल्पलाइन स्थापित कर दूरदराज के पत्रकारों तक जानकारी पहुँचाई जाए
- सुझाव-प्रक्रिया के परिणामों को सार्वजनिक किया जाए, ताकि नीति-निर्माण में पारदर्शिता बनी रहे
- केंद्र के श्रम और सामाजिक सुरक्षा ढांचे के साथ समन्वय करके दोहराव से बचा जाए और उपलब्ध लाभों की जानकारी कर्मियों को दी जाए
- योजना के क्रियान्वयन के बाद कवरेज और दावा-अनुपात का नियमित मूल्यांकन किया जाए और उसके आधार पर प्रावधानों में सुधार हो
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
सामाजिक सुरक्षा (Social Security) · समूह बीमा (Group Insurance) · मीडिया कर्मी · असंगठित क्षेत्र के कामगार (Unorganised Workers) · सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Code on Social Security, 2020) · राज्य नीति के निदेशक तत्व (Directive Principles of State Policy) · कल्याणकारी राज्य (Welfare State) · जोखिम संकलन (Risk Pooling) · भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) · समवर्ती सूची (Concurrent List) · वेतन बोर्ड (Wage Board) · सार्वजनिक परामर्श (Public Consultation)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 41: बीमारी और अशक्तता में लोक सहायता का नीति-निदेशक सिद्धांत
- अनुच्छेद 42: कार्य की न्यायोचित और मानवीय दशाओं का प्रावधान
- अनुच्छेद 162: राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार
अवधारणा प्रवाह
मीडिया कर्मियों की असुरक्षा (स्वास्थ्य जोखिम, दुर्घटना और रोजगार की अस्थिरता) की पहचान → राज्य के जनसंपर्क विभाग द्वारा स्वास्थ्य एवं दुर्घटना समूह बीमा योजना-2026 का प्रारूप तैयार करना → विभागीय वेबसाइट पर प्रारूप प्रकाशित कर एक नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक ईमेल द्वारा सुझाव आमंत्रित करना → सुझावों के आधार पर पात्रता, प्रीमियम और दावा प्रक्रिया में संशोधन → बीमा कंपनी के साथ समूह बीमा अनुबंध और नियामक शर्तों के अनुसार योजना का क्रियान्वयन → पात्र मीडिया कर्मियों को स्वास्थ्य और दुर्घटना कवर का लाभ और मूल्यांकन के आधार पर आगे का सुधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 39(च) (Article 39(e)) राज्य को निर्देश देता है कि वह श्रमिकों के स्वास्थ्य और शक्ति का दुरुपयोग न होने दे।
2. अनुच्छेद 42 के अंतर्गत राज्य को निःशुल्क विधिक सहायता (Free Legal Aid) उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
3. अनुच्छेद 41 के अंतर्गत राज्य बीमारी और अंगहीनता जैसी स्थितियों में लोक सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास करेगा।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: अनुच्छेद 39(च) श्रमिकों के स्वास्थ्य और शक्ति के दुरुपयोग पर रोक की बात करता है। कथन 2 गलत है: अनुच्छेद 42 में कार्य की न्यायोचित और मानवीय दशाओं तथा प्रसूति सहायता का उल्लेख है, जबकि निःशुल्क विधिक सहायता अनुच्छेद 39क में है। कथन 3 सही है: अनुच्छेद 41 बेरोजगारी, वृद्धावस्था, बीमारी और अंगहीनता में लोक सहायता की बात करता है। अतः उत्तर ‘केवल दो’ है।
Q2. कथन (A): किसी एक परिभाषित व्यावसायिक समूह के लिए बनाई गई समूह बीमा योजना सामान्यतः अलग-अलग व्यक्तिगत पॉलिसियों की तुलना में प्रति सदस्य अधिक किफायती होती है।
कारण (R): बड़े समूह में जोखिम का संकलन होने से दावों के पूर्वानुमान की स्थिरता बढ़ती है और प्रशासनिक लागत प्रति सदस्य घटती है।
सही विकल्प चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, किंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — जोखिम संकलन (Risk Pooling) का सिद्धांत बताता है कि बड़े समूह में व्यक्तिगत जोखिम एक-दूसरे को संतुलित करते हैं, जिससे बीमा कंपनी के लिए दावों का अनुमान अधिक स्थिर होता है। इसी से प्रीमियम प्रति सदस्य घटता है और प्रशासनिक लागत भी बँटती है। अतः (R) (A) की सही व्याख्या है।
Q3. भारत में कार्यरत पत्रकारों और समाचार-पत्र कर्मियों की सेवा-शर्तों (Conditions of Service) को विनियमित करने वाला मुख्य केंद्रीय अधिनियम कौन-सा है?
- कार्यरत पत्रकार तथा अन्य समाचार-पत्र कर्मचारी (सेवा शर्तें) और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1955
- प्रेस परिषद अधिनियम, 1978
- भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999
- असंगठित कामगार सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, 2008
उत्तर: कार्यरत पत्रकार तथा अन्य समाचार-पत्र कर्मचारी (सेवा शर्तें) और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1955 — कार्यरत पत्रकार तथा अन्य समाचार-पत्र कर्मचारी (सेवा शर्तें) और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1955 समाचार-पत्र उद्योग के कर्मियों की सेवा-शर्तों, वेतन निर्धारण हेतु वेतन बोर्ड और अन्य प्रावधानों से संबंधित है। प्रेस परिषद अधिनियम, 1978 प्रेस परिषद के गठन और कार्यों से जुड़ा है। IRDAI अधिनियम, 1999 बीमा क्षेत्र का विनियमन करता है, जबकि असंगठित कामगार सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, 2008 को अब सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 में समाहित किया गया है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राज्य स्तर पर मीडिया कर्मियों जैसे विशेष व्यावसायिक समूहों के लिए अलग से स्वास्थ्य एवं दुर्घटना समूह बीमा योजनाएँ बनाना सामाजिक सुरक्षा के संवैधानिक दायित्व की पूर्ति का एक व्यावहारिक माध्यम है। इस दृष्टिकोण का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि यदि ऐसी योजनाएँ सुझाव-प्रक्रिया के बाद भी केवल प्रशासनिक घोषणाओं तक सीमित रह जाएँ और समूह के वास्तविक कामगारों तक न पहुँचें, तो सामाजिक सुरक्षा के लक्ष्य और कल्याणकारी राज्य की अवधारणा पर क्या प्रभाव पड़ेगा। (15 Marks)
रूपरेखा: MODEL-ANSWER SKELETON:
(1) परिचय: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जनसंपर्क विभाग के माध्यम से ‘छत्तीसगढ़ मीडिया कर्मी स्वास्थ्य एवं दुर्घटना समूह बीमा योजना–2026’ का प्रारूप जारी करना, सुझाव-अवधि 1 नवंबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक, और ईमेल के माध्यम से सुझाव मँगवाना।
(2) संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 39(च) (श्रमिकों के स्वास्थ्य और शक्ति का दुरुपयोग रोकना), अनुच्छेद 41 (बीमारी, अंगहीनता और वृद्धावस्था में लोक सहायता), अनुच्छेद 43 (कार्य की दशाएँ और जीवन-स्तर), अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार, जिसमें स्वास्थ्य सम्मिलित माना गया है)। ये प्रावधान राज्य नीति के निदेशक तत्व (Directive Principles of State Policy) हैं, इसलिए न्यायोचित नहीं हैं, परंतु नीति-निर्माण के लिए मार्गदर्शक हैं।
(3) संघीय ढाँचा: सामाजिक सुरक्षा (प्रविष्टि 23) और श्रमिक कल्याण (प्रविष्टि 24) समवर्ती सूची में हैं, अतः केंद्र और राज्य दोनों विधि बना सकते हैं। केंद्रीय सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के ढाँचे के साथ राज्य योजना का तालमेल, दोहराव से बचाव और संसाधनों का बँटवारा विचारणीय है।
(4) वैधानिक और संस्थागत संदर्भ: कार्यरत पत्रकार तथा अन्य समाचार-पत्र कर्मचारी (सेवा शर्तें) और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1955; वेतन बोर्ड (पालेकर, बछावत, मजीठिया) की सिफारिशें; प्रेस परिषद अधिनियम, 1978 के अंतर्गत प्रेस परिषद भारत की भूमिका; सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 में असंगठित कामगारों का समावेशन।
(5) बीमा का तकनीकी पक्ष: समूह बीमा में जोखिम संकलन (Risk Pooling) से प्रीमियम प्रति सदस्य घटता है; प्रतिकूल चयन (Adverse Selection) और नैतिक जोखिम (Moral Hazard) की चुनौतियाँ; IRDAI का विनियामक ढाँचा; दावा निपटान की पारदर्शिता; पोर्टेबिलिटी।
(6) पक्ष में तर्क: सामाजिक सुरक्षा का विस्तार अनौपचारिक और अस्थायी रोजगार वाले कर्मियों तक; अमर्त्य सेन का क्षमता दृष्टिकोण (Capability Approach) – स्वास्थ्य सुरक्षा से कार्यक्षमता और स्वतंत्रता बढ़ती है; सार्वजनिक परामर्श से नीति में सहभागिता।
(7) विपक्ष/सीमाएँ: विशेष समूहों के लिए अलग योजनाओं से बिखरा हुआ सामाजिक सुरक्षा ढाँचा; पात्रता के सत्यापन की कठिनाई (फ्रीलांस और अंशकालिक कर्मी); ईमेल-आधारित परामर्श में डिजिटल पहुँच की सीमा; प्रीमियम का वित्तीय भार और उसका स्रोत; द्वितीय राष्ट्रीय श्रम आयोग (2002) की सिफारिशों के अनुरूप व्यापक, सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता।
(8) निष्कर्ष/सुझाव: पात्रता का स्पष्ट मानदंड, केंद्र-राज्य समन्वय, प्रभावी शिकायत निवारण, परामर्श के परिणामों का सार्वजनिक प्रकाशन, और नियमित मूल्यांकन; सामाजिक सुरक्षा को अधिकार-आधारित ढाँचे से जोड़ते हुए कल्याणकारी राज्य के लक्ष्य की ओर बढ़ना।
स्रोत: amarujala.com
Chhattisgarh PCS (CGPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा मीडिया कर्मियों के लिए प्रस्तावित बीमा योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह योजना राज्य के सभी पत्रकारों एवं मीडिया कर्मियों को कवर करेगी। 2. सरकार इस योजना के लिए सुझाव आमंत्रित कर रही है। 3. योजना का उद्देश्य मीडिया कर्मियों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 2 और 3 — कथन 1 गलत है क्योंकि योजना का प्रारूप तैयार किया जा रहा है, अतः अभी सभी पत्रकारों को कवर करने की पुष्टि नहीं हुई है। कथन 2 और 3 सही हैं।
Mains: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा मीडिया कर्मियों के लिए प्रस्तावित बीमा योजना के महत्व एवं इसके संभावित प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए, राज्य में पत्रकारिता के विकास में इस प्रकार की योजनाओं की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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