22 Oct आधार प्रमाणीकरण अब टीडीआर पोर्टल पर: जानिए कैसे होगा उपयोग
✎ आधार प्रमाणीकरण का उपयोग तभी वैध और उचित है जब वह स्वैच्छिक हो, आधार धारक की सूचित सहमति पर आधारित हो और इनकार करने पर वैकल्पिक पहचान दस्तावेज़ों द्वारा सेवा से वंचित न किया जाए।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन (e-Governance, वैधानिक निकाय, नागरिक-केंद्रित सेवाएँ) | GS Paper II — राजव्यवस्था (अनुच्छेद 21 और निजता का अधिकार, संघवाद और स्थानीय शासन) | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा (साइबर धोखाधड़ी और पहचान की चोरी)
- Prelims: आधार (Aadhaar) और UIDAI की वैधानिक स्थिति, आधार अधिनियम, 2016 की धारा 7 और धारा 8, आधार प्रमाणीकरण के प्रकार: जनसांख्यिकीय, बायोमेट्रिक और OTP, वर्चुअल आईडी और मास्क्ड आधार, हस्तांतरणीय विकास अधिकार (Transferable Development Rights — TDR), तल क्षेत्र अनुपात (Floor Space Index — FSI), 74वाँ संविधान संशोधन अधिनियम और बारहवीं अनुसूची, राज्य सूची की प्रविष्टि 5 (स्थानीय शासन)
- Essay: डिजिटल पहचान प्रणाली और व्यक्तिगत निजता: सुरक्षा बनाम स्वायत्तता, नगरीय शासन में पारदर्शिता के लिए प्रौद्योगिकी: अवसर और सीमाएँ
त्वरित पुनरावृत्ति: आधार प्रमाणीकरण का उपयोग तभी वैध और उचित है जब वह स्वैच्छिक हो, आधार धारक की सूचित सहमति पर आधारित हो और इनकार करने पर वैकल्पिक पहचान दस्तावेज़ों द्वारा सेवा से वंचित न किया जाए।
यह खबर चर्चा में क्यों?
तेलंगाना सरकार ने नगरीय प्रशासन एवं शहरी विकास विभाग (Municipal Administration and Urban Development — MA&UD) को हस्तांतरणीय विकास अधिकार (Transferable Development Rights — TDR) पोर्टल पर संपत्ति मालिकों, बिल्डरों और डेवलपर्स के लिए आधार प्रमाणीकरण (Aadhaar Authentication) लागू करने का अधिकार दिया है। 22 अक्टूबर 2026 के आदेश के अनुसार इसका उपयोग पंजीकरण और लॉगिन, TDR से जुड़े आवेदन जमा करने तथा उन्हें संपत्ति डेटाबेस से जोड़ने में होगा। नगर नियोजन निदेशालय (DTCP) और ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (GHMC) के अधिकारियों का प्रशासनिक प्रमाणीकरण भी इसी पोर्टल पर होगा। आदेश का उद्देश्य फर्जी पहचान, दोहरे पंजीकरण और धोखाधड़ी को रोककर अभिलेखों की शुद्धता सुनिश्चित करना बताया गया है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि यह प्रमाणीकरण स्वैच्छिक है, इसके लिए आधार धारक की सहमति अनिवार्य है, और इससे इनकार करने या असमर्थ रहने वाले किसी व्यक्ति को सेवा से वंचित नहीं किया जाएगा। ऐसी स्थिति में पासपोर्ट, मतदाता फोटो पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, PAN कार्ड और अन्य सरकारी फोटो पहचान पत्र वैकल्पिक दस्तावेज़ के रूप में स्वीकार किए जाने होंगे।
पृष्ठभूमि
- आधार अधिनियम, 2016 (आधार (वित्तीय एवं अन्य सब्सिडी, लाभ और सेवाओं का लक्षित परिदान) अधिनियम, 2016) के तहत भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (Unique Identification Authority of India — UIDAI) को आधार संख्या जारी करने और प्रमाणीकरण व्यवस्था चलाने का वैधानिक दायित्व मिला है।
- के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ (2018) के निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने आधार को सब्सिडी और लाभों के लक्षित परिदान के लिए वैध माना, किंतु निजता के अधिकार को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मौलिक अधिकार घोषित किया।
- पुट्टस्वामी निर्णय में अधिनियम की धारा 57 के उस प्रावधान को असंवैधानिक ठहराया गया, जो निजी संस्थाओं को आधार माँगने की व्यापक अनुमति देता था। इससे सार्वजनिक सेवाओं में आधार का उपयोग कानूनी आधार पर सीमित हुआ।
- भूमि और नगर नियोजन राज्य विषय है, जबकि नगरपालिका प्रशासन का आधार 74वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 है, जिसने भाग IXA और बारहवीं अनुसूची के माध्यम से शहरी स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा दिया।
- TDR जैसी व्यवस्थाएँ भू-उपयोग नियंत्रण और खुले स्थान या विरासत संरक्षण के लिए प्रयोग होती हैं, इसलिए इनमें फर्जी दावों और दोहरे अंतरण की आशंका अधिक रहती है, जिससे पहचान सत्यापन की आवश्यकता बढ़ती है।
आधार प्रमाणीकरण क्या है?
- आधार प्रमाणीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें किसी व्यक्ति की पहचान को केंद्रीय आधार डेटाबेस (Central Identities Data Repository — CIDR) से मिलान करके सत्यापित किया जाता है। यह केवल पुष्टि करता है कि दी गई जानकारी मेल खाती है या नहीं; व्यक्ति का पूरा विवरण साझा नहीं किया जाता।
- प्रमाणीकरण के प्रमुख प्रकार हैं: जनसांख्यिकीय प्रमाणीकरण (नाम, जन्मतिथि, लिंग आदि का मिलान), बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण (अंगुली की छाप या आइरिस) और OTP आधारित प्रमाणीकरण।
- वर्चुअल आईडी (Virtual ID) 16 अंकों की अस्थायी संख्या है, जिससे वास्तविक आधार संख्या बार-बार साझा किए बिना प्रमाणीकरण संभव होता है। मास्क्ड आधार में संख्या के केवल अंतिम चार अंक दिखाई देते हैं।
- आधार अधिनियम की धारा 8 के अनुसार प्रमाणीकरण के समय व्यक्ति की सूचित सहमति लेना और उसे प्रमाणीकरण के उद्देश्य की जानकारी देना अनिवार्य है।
- हस्तांतरणीय विकास अधिकार (TDR) में किसी भूखंड के अप्रयुक्त विकास अधिकारों को दूसरे भूखंड पर अतिरिक्त निर्माण के लिए स्थानांतरित किया जाता है। इसमें तल क्षेत्र अनुपात (FSI) की गणना और अधिकारों का सही अभिलेख अहम होता है।
- सार्वजनिक सेवाओं में आधार का उपयोग तभी वैध माना जाता है जब उसका कानूनी आधार हो और वैकल्पिक पहचान विकल्प उपलब्ध हों। इसी कारण सेवा से वंचित न करने का प्रावधान महत्वपूर्ण है।
- पहचान सत्यापन का उद्देश्य अभिलेखों की शुद्धता, फर्जी पंजीकरण की रोकथाम और जवाबदेही है, जबकि निजता संरक्षण के लिए डेटा न्यूनतम मात्रा में और केवल उद्देश्य-सीमित रूप में प्रयोग होना चाहिए।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| आधार प्रमाणीकरण का दायरा | तेलंगाना सरकार ने MA&UD विभाग को हस्तांतरणीय विकास अधिकार (Transferable Development Rights) के ऑनलाइन TDR पोर्टल पर संपत्ति मालिकों, बिल्डरों और डेवलपरों के लिए आधार प्रमाणीकरण लागू करने का अधिकार दिया है |
| प्रमाणीकरण के उपयोग के क्षेत्र | पंजीकरण, लॉगिन, TDR संबंधी आवेदन जमा करने और आवेदन को संपत्ति डेटाबेस से जोड़ने में आधार प्रमाणीकरण का प्रयोग होगा |
| प्रशासनिक प्रमाणीकरण | DTCP और GHMC के अधिकारियों की पहचान भी पोर्टल पर आधार प्रमाणीकरण से होगी, जिससे प्रशासनिक लॉगिन और कार्यवाही का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा |
| स्वैच्छिक प्रकृति | आधार प्रमाणीकरण स्वैच्छिक है और इसके लिए आधार धारक की सहमति अनिवार्य है |
| सेवा की निरंतरता | जो व्यक्ति प्रमाणीकरण से इनकार करे या करने में असमर्थ हो, उसे कोई सेवा देने से मना नहीं किया जाएगा |
| वैकल्पिक पहचान दस्तावेज़ | पासपोर्ट, मतदाता फोटो पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड और विभाग द्वारा मान्य अन्य सरकारी फोटो पहचान पत्र स्वीकार किए जाएंगे |
| घोषित उद्देश्य | प्रतिरूपण (Impersonation), दोहरी प्रविष्टि और धोखाधड़ी रोकना तथा रिकॉर्ड की सटीकता और अखंडता सुनिश्चित करना |
महत्व
प्रशासनिक और शासन-संबंधी
- TDR जैसी प्रणाली में फर्जी पहचान से होने वाली धोखाधड़ी पर रोक लगाने में आधार प्रमाणीकरण एक सहायक उपकरण है
- एक ही व्यक्ति द्वारा कई खातों या आवेदनों से होने वाली दोहरी प्रविष्टि कम होती है, जिससे पोर्टल के रिकॉर्ड अधिक विश्वसनीय बनते हैं
- अधिकारियों की प्रमाणित लॉगिन व्यवस्था से फाइल-प्रसंस्करण की जवाबदेही और ऑडिट-योग्यता बढ़ती है
कानूनी और संवैधानिक
- आधार प्रमाणीकरण का स्वैच्छिक होना और सहमति पर आधारित होना पुट्टस्वामी निर्णय (2017 और 2018) में प्रतिपादित आनुपातिकता के सिद्धांत के अनुरूप है
- आधार अधिनियम, 2016 के प्रमाणीकरण से जुड़े प्रावधानों के अंतर्गत सूचित सहमति और वैकल्पिक पहचान का मार्ग सुनिश्चित करना आवश्यक होता है
- सेवा से इनकार न करने का प्रावधान प्रशासनिक कार्रवाई को मौलिक अधिकारों की सीमा के भीतर रखने का प्रयास दर्शाता है
नगरीय नियोजन और संपत्ति-अधिकार
- हस्तांतरणीय विकास अधिकार (TDR) में आरक्षित भूमि के मालिक को उस भूमि के बदले अन्यत्र विकास-योग्य अधिकार मिलते हैं, इसलिए इन अधिकारों का स्वामित्व-रिकॉर्ड स्पष्ट होना आवश्यक है
- संपत्ति-डेटाबेस से जुड़ाव होने पर एक ही भूखंड पर दोहरे दावे की संभावना घटती है, जिससे विवाद और मुकदमेबाज़ी कम हो सकती है
- नगरीय विकास में पारदर्शिता बढ़ने से निवेशकों और बिल्डरों के बीच विश्वास मजबूत होता है
चुनौतियाँ
1. निजता और सहमति का प्रश्न
- आधार प्रमाणीकरण में बायोमेट्रिक और जनसांख्यिकीय डेटा शामिल होता है, इसलिए उसका उपयोग केवल उद्देश्य तक सीमित रहना चाहिए
- सहमति औपचारिक न होकर वास्तविक होनी चाहिए; बिल्डरों और डेवलपरों जैसे आर्थिक रूप से प्रभावशाली पक्षों के सामने आम संपत्ति-मालिक पर दबाव की आशंका रहती है
- पुट्टस्वामी निर्णय के अनुसार किसी भी राज्य-हस्तक्षेप के लिए वैधता, वैध उद्देश्य और आनुपातिकता आवश्यक है
यूपीएससी लिंक: GS2: संविधान, अनुच्छेद 21 और निजता का अधिकार
2. बहिष्करण का जोखिम
- बुजुर्ग, ग्रामीण और डिजिटल रूप से वंचित लोगों के पास आधार अद्यतन न होने या बायोमेट्रिक विफलता की स्थिति में भी सेवा मिलती रहनी चाहिए
- वैकल्पिक दस्तावेज़ों की सूची केवल कागज़ पर होने से व्यावहारिक बहिष्करण नहीं रुकता; कर्मचारियों का प्रशिक्षण आवश्यक है
- शिकायत निवारण की स्पष्ट व्यवस्था न होने पर अस्वीकृति के मामलों की पहचान कठिन होती है
यूपीएससी लिंक: GS2: शासन में नागरिक-केंद्रित सेवा-वितरण और सामाजिक न्याय
3. डेटा सुरक्षा और दुरुपयोग
- पोर्टल से जुड़े संपत्ति-मालिकों और अधिकारियों के डेटा के लीक या दुरुपयोग का जोखिम बना रहता है
- डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के अंतर्गत डेटा-न्यासी की जिम्मेदारियाँ और सुरक्षा-उपाय सुनिश्चित करना आवश्यक है
- प्रमाणीकरण लॉग का दुरुपयोग रोकने के लिए पहुँच-नियंत्रण और नियमित ऑडिट महत्वपूर्ण हैं
यूपीएससी लिंक: GS3: साइबर सुरक्षा और GS2: डिजिटल शासन
4. पहचान और स्वामित्व के बीच अंतर
- आधार प्रमाणीकरण व्यक्ति की पहचान की पुष्टि करता है, परंतु यह भूमि पर वैध स्वामित्व या अधिकार-पत्र की वैधता तय नहीं करता
- भूमि अभिलेखों में पुरानी प्रविष्टियाँ, बँटवारे और विवादित दावे बने रहें तो डिजिटल पहचान से भी विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं होते
- इसलिए पहचान-प्रमाणीकरण को भूमि-अभिलेख की जाँच और कानूनी दस्तावेज़ों के साथ जोड़कर देखना आवश्यक है
यूपीएससी लिंक: GS2: शासन, भूमि-सुधार और संपत्ति-अधिकार (अनुच्छेद 300A)
5. प्रशासनिक क्षमता और अंतर-संचालनीयता
- नगर निगम, विकास प्राधिकरण और राज्य विभागों के डेटाबेस के बीच तकनीकी समन्वय सीमित होने से प्रक्रिया धीमी हो सकती है
- स्थानीय स्तर के कर्मचारियों को डिजिटल प्रणाली, सहमति-प्रक्रिया और डेटा-नैतिकता का प्रशिक्षण देना चुनौतीपूर्ण है
- तकनीकी विफलता की स्थिति में वैकल्पिक मैन्युअल व्यवस्था का अभाव पूरी प्रक्रिया को बाधित कर सकता है
यूपीएससी लिंक: GS2: स्थानीय शासन और ई-गवर्नेंस की चुनौतियाँ
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| सहमति की गुणवत्ता | सहमति औपचारिक होकर दबाव में न दी जाए, इसकी जाँच कठिन है |
| सेवा से वंचना | आधार प्रमाणीकरण न होने पर भी आवेदक को सेवा मिले, इसके व्यवहारिक क्रियान्वयन में अंतर संभव है |
| डेटा सुरक्षा | बायोमेट्रिक और संपत्ति-डेटा के संयोजन से बड़े पैमाने पर जोखिम बढ़ सकता है |
| स्वामित्व-विवाद | पहचान की पुष्टि से भूमि के वैध स्वामित्व का निर्धारण स्वतः नहीं होता |
| संस्थागत समन्वय | DTCP, GHMC और राज्य विभागों के बीच डेटा-मानकीकरण की कमी से प्रक्रिया में देरी हो सकती है |
| डिजिटल अंतर | तकनीकी साक्षरता और इंटरनेट पहुँच की कमी से छोटे संपत्ति-मालिक पीछे रह सकते हैं |
आगे की राह
- प्रमाणीकरण के समय सहमति-फॉर्म हिंदी, तेलुगु और अंग्रेज़ी में उपलब्ध कराए जाएँ और उसमें डेटा के उपयोग का उद्देश्य स्पष्ट लिखा जाए
- वैकल्पिक पहचान दस्तावेज़ों की सूची पोर्टल और कार्यालयों में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाए
- आधार प्रमाणीकरण से इनकार या विफलता के मामलों में त्वरित शिकायत निवारण तंत्र और समय-सीमा तय की जाए
- डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के अनुरूप डेटा-न्यासी दायित्व, भंडारण-अवधि और पहुँच-नियंत्रण स्पष्ट किए जाएँ
- प्रमाणीकरण लॉग और अधिकारियों की गतिविधि का नियमित स्वतंत्र ऑडिट हो
- पहचान-प्रमाणीकरण को भूमि-अभिलेखों और कानूनी स्वामित्व-दस्तावेज़ों की जाँच के साथ जोड़ा जाए, ताकि पहचान और स्वामित्व के बीच का अंतर दूर हो
- नगर निगम और विकास प्राधिकरण के कर्मचारियों को डिजिटल प्रणाली, डेटा-नैतिकता और सहमति-प्रक्रिया पर नियमित प्रशिक्षण दिया जाए
- तकनीकी विफलता की स्थिति के लिए मैन्युअल वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाए ताकि सेवा का प्रवाह न रुके
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
आधार प्रमाणीकरण (Aadhaar Authentication) · हस्तांतरणीय विकास अधिकार (Transferable Development Rights – TDR) · सहमति-आधारित प्रमाणीकरण और डेटा गोपनीयता · पुट्टस्वामी निर्णय (K.S. Puttaswamy Case, 2017 और 2018) · निजता का अधिकार और अनुच्छेद 21 · आधार अधिनियम, 2016 की धारा 7 और धारा 8 · आनुपातिकता की कसौटी (Proportionality Test) · डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (DPDP Act, 2023) · शहरी स्थानीय शासन और अनुच्छेद 243W · डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) · वैकल्पिक पहचान दस्तावेज़ और सेवा से वंचन का निषेध · भू-उपयोग विनियमन और नगर नियोजन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21: निजता और व्यक्तिगत गरिमा का अधिकार, पुट्टस्वामी निर्णय से संबद्ध
- अनुच्छेद 300A: संपत्ति का विधिक अधिकार, रिकॉर्ड की सटीकता से जुड़ा
- अनुच्छेद 243W और बारहवीं अनुसूची: नगरपालिकाओं की नगरीय नियोजन शक्तियाँ
अवधारणा प्रवाह
संपत्ति और विकास-अधिकार के रिकॉर्ड में फर्जी पहचान और दोहरी प्रविष्टि का जोखिम → तेलंगाना सरकार द्वारा MA&UD विभाग को आधार प्रमाणीकरण के उपयोग का प्राधिकार देना → पोर्टल पर पंजीकरण, लॉगिन और TDR आवेदन में सहमति-आधारित आधार प्रमाणीकरण → आवेदन का संपत्ति-डेटाबेस से जुड़ाव, जिससे रिकॉर्ड की अखंडता बढ़ती है → DTCP और GHMC के अधिकारियों का भी प्रशासनिक प्रमाणीकरण → इनकार या असमर्थता की स्थिति में वैकल्पिक पहचान दस्तावेज़ों से सेवा की निरंतरता → पारदर्शी और धोखाधड़ी-रहित नगरीय विकास तथा संपत्ति-अधिकारों की सुरक्षा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. आधार अधिनियम, 2016 और उससे संबंधित न्यायिक निर्णयों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आधार अधिनियम की धारा 7 के अंतर्गत भारत की संचित निधि से वित्तपोषित सब्सिडी और लाभों के लिए आधार को शर्त के रूप में निर्धारित किया जा सकता है।
2. उच्चतम न्यायालय ने के.एस. पुट्टस्वामी मामले (2018) में आधार अधिनियम की धारा 57 के उस प्रावधान को रद्द किया, जो निजी संस्थाओं को आधार सत्यापन की मांग करने की अनुमति देता था।
3. उच्चतम न्यायालय की नौ-न्यायाधीशों की पीठ ने निजता के अधिकार को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मौलिक अधिकार घोषित किया था।
4. आधार संख्या निर्वाचन आयोग द्वारा जारी की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- चारों
उत्तर: केवल तीन — कथन 1 सही है: धारा 7 के अंतर्गत संचित निधि से वित्तपोषित सब्सिडी और सेवाओं के लिए आधार को शर्त बनाया जा सकता है। कथन 2 सही है: पुट्टस्वामी (2018) में धारा 57 का वह भाग रद्द हुआ जो निजी निकायों को अनुबंध के आधार पर आधार माँगने देता था। कथन 3 सही है: पुट्टस्वामी (2017) में निजता को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मौलिक अधिकार माना गया। कथन 4 गलत है: आधार संख्या भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) जारी करता है, निर्वाचन आयोग नहीं।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): TDR पोर्टल पर आधार प्रमाणीकरण स्वैच्छिक रखा गया है, और जो व्यक्ति इसके लिए सहमति नहीं देता, उसे वैकल्पिक पहचान दस्तावेज़ों के आधार पर सेवा से वंचित नहीं किया जा सकता।
कारण (R): आधार अधिनियम की धारा 8 के अंतर्गत प्रमाणीकरण से पहले संबंधित व्यक्ति को प्रमाणीकरण के उद्देश्य और प्रयोग की सूचना देना तथा उसकी सहमति प्राप्त करना आवश्यक है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, किंतु R गलत है।
- A गलत है, किंतु R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है, क्योंकि प्रशासनिक आदेश में प्रमाणीकरण को स्वैच्छिक बताया गया है और वैकल्पिक दस्तावेज़ों की स्वीकार्यता सुनिश्चित की गई है। कारण (R) भी सही है और आदेश में सहमति की अनिवार्यता का आधार धारा 8 की प्रक्रियात्मक शर्तों में है। अतः R, A की सही व्याख्या करता है।
Q3. निम्नलिखित सूचियों को सुमेलित कीजिए:
सूची I (आधार अधिनियम, 2016 के प्रावधान)
1. धारा 7
2. धारा 8
3. धारा 57
सूची II (विषय)
a. प्रमाणीकरण से पहले सूचना देना और सहमति लेना
b. निजी संस्थाओं द्वारा आधार की मांग पर उच्चतम न्यायालय द्वारा रोक
c. सब्सिडी और लाभों के लिए आधार को शर्त बनाने का प्रावधान
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
- 1-c, 2-a, 3-b
- 1-a, 2-b, 3-c
- 1-c, 2-b, 3-a
- 1-b, 2-c, 3-a
उत्तर: 1-c, 2-a, 3-b — धारा 7 सब्सिडी और लाभों के लिए आधार की शर्त से संबंधित है, इसलिए 1-c। धारा 8 प्रमाणीकरण के समय सूचना और सहमति से जुड़ी है, इसलिए 2-a। धारा 57 का वह भाग, जो निजी निकायों को आधार माँगने की अनुमति देता था, पुट्टस्वामी (2018) में रद्द हुआ, इसलिए 3-b।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ आधार प्रमाणीकरण को भूमि और नगर-नियोजन से जुड़ी ई-गवर्नेंस प्रक्रियाओं में अपनाने से प्रशासनिक शुद्धता और धोखाधड़ी-रोधन बढ़ सकता है, किंतु इससे निजता और सहमति के संवैधानिक प्रश्न भी उठते हैं। हस्तांतरणीय विकास अधिकार (TDR) जैसी व्यवस्थाओं के संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि यदि सहमति-आधारित प्रमाणीकरण के साथ वैकल्पिक पहचान का विकल्प उपलब्ध न कराया जाए, तो पुट्टस्वामी निर्णय की कसौटी पर ऐसी व्यवस्था की संवैधानिक वैधता पर क्या प्रभाव पड़ेगा। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर संरचना (मॉडल-उत्तर कंकाल):
1. भूमिका: हस्तांतरणीय विकास अधिकार (TDR) की अवधारणा स्पष्ट कीजिए। भूमि-स्वामी को भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन हेतु अधिग्रहण या आरक्षण के कारण जो विकास-क्षमता प्रतिबंधित होती है, उसके बदले हस्तांतरणीय प्रमाणपत्र मिलता है। तेलंगाना सरकार का 22 अक्टूबर 2026 का आदेश उल्लेख कीजिए, जिसमें MA&UD विभाग को पंजीकरण, लॉगिन, आवेदन और संपत्ति-डेटाबेस से जोड़ने हेतु आधार प्रमाणीकरण के उपयोग का अधिकार दिया गया है।
2. प्रशासनिक औचित्य: प्रतिरूपण (impersonation), दोहरी प्रविष्टि और धोखाधड़ी रोकना तथा अभिलेखों की शुद्धता व अखंडता सुनिश्चित करना। संवैधानिक संदर्भ: अनुच्छेद 243W तथा 74वें संविधान संशोधन की बारहवीं अनुसूची (नगर नियोजन, भू-उपयोग विनियमन) के अंतर्गत नगरपालिकाओं की भूमिका। भूमि-अभिलेख डिजिटलीकरण के लिए डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) का संदर्भ।
3. विधिक ढाँचा: आधार अधिनियम, 2016 की धारा 7 (सब्सिडी/लाभ हेतु शर्त), धारा 8 (सूचना और सहमति), धारा 57 (निजी निकायों हेतु प्रावधान का रद्द होना, पुट्टस्वामी 2018)। आधार और अन्य विधियाँ (संशोधन) अधिनियम, 2019 द्वारा निजी संस्थाओं के लिए प्रमाणीकरण का स्वैच्छिक होना। पुट्टस्वामी (2017) में निजता को अनुच्छेद 21 का भाग मानना और चार-स्तरीय आनुपातिकता परीक्षण (वैधानिकता, वैध उद्देश्य, आनुपातिकता, प्रक्रियात्मक सुरक्षा) का प्रतिपादन।
4. डेटा संरक्षण: डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के सहमति, उद्देश्य-सीमा और डेटा-न्यूनीकरण के सिद्धांत; सहमति वास्तव में स्वतंत्र है या नहीं, यह प्रश्न।
5. व्यावहारिक तनाव: स्वैच्छिकता और व्यवहार में अनिवार्यता का अंतर; तकनीकी विफलता या बायोमेट्रिक असफलता से बहिष्करण का जोखिम; पासपोर्ट, मतदाता फोटो पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, PAN जैसे वैकल्पिक दस्तावेज़ों की स्वीकार्यता का महत्त्व।
6. दूसरा प्रश्न (परिणाम): यदि वैकल्पिक पहचान का विकल्प न हो, तो सहमति की स्वतंत्रता समाप्त होती है और सेवा से वंचन होता है। यह पुट्टस्वामी की आनुपातिकता कसौटी और अनुच्छेद 14 व 21 की दृष्टि से असंगत माना जा सकता है।
7. संतुलित निष्कर्ष: प्रयोजन-सीमित, डेटा-न्यूनीकृत प्रमाणीकरण, स्वतंत्र ऑडिट, शिकायत निवारण तंत्र और वैकल्पिक दस्तावेज़ों की अनिवार्य स्वीकार्यता के साथ प्रशासनिक दक्षता और निजता के बीच संतुलन संभव है।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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