01 Sep AI निर्मित रचनाओं का कॉपीराइट संभव, किंतु लेखक नहीं हो सकता AI: कॉपीराइट कार्यालय
✎ भारतीय कॉपीराइट कार्यालय के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा बनाए गए कार्य को कॉपीराइट संरक्षण मिल सकता है, लेकिन AI प्रणाली को उसके 'लेखक' के रूप में मान्यता नहीं दी जा सकती, क्योंकि कॉपीराइट अधिनियम के तहत 'लेखक' एक मानव…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, संविधान और राजव्यवस्था | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, बौद्धिक संपदा अधिकार
- Prelims: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), कॉपीराइट अधिनियम, 1957, बौद्धिक संपदा अधिकार, दिल्ली उच्च न्यायालय, कॉपीराइट रजिस्ट्रार, रचनात्मक कार्य
- Essay: कृत्रिम बुद्धिमत्ता का भविष्य और मानव समाज पर इसके प्रभाव, डिजिटल युग में बौद्धिक संपदा अधिकारों का संरक्षण: चुनौतियाँ और समाधान
त्वरित पुनरावृत्ति: भारतीय कॉपीराइट कार्यालय के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा बनाए गए कार्य को कॉपीराइट संरक्षण मिल सकता है, लेकिन AI प्रणाली को उसके ‘लेखक’ के रूप में मान्यता नहीं दी जा सकती, क्योंकि कॉपीराइट अधिनियम के तहत ‘लेखक’ एक मानव ‘व्यक्ति’ होता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, भारतीय कॉपीराइट कार्यालय (Copyright Office) ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) द्वारा बनाए गए कार्य को कॉपीराइट संरक्षण मिल सकता है, लेकिन AI प्रणाली को उसके ‘लेखक’ के रूप में मान्यता नहीं दी जा सकती। यह निर्णय अमेरिकी AI शोधकर्ता स्टीफन थैलेर (Stephen Thaler) के एक आवेदन के संदर्भ में आया है, जिसमें उन्होंने अपनी AI प्रणाली DABUS द्वारा निर्मित एक कलाकृति के लिए कॉपीराइट मांगा था। यह मामला दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) के निर्देश के बाद कॉपीराइट कार्यालय द्वारा तय किया गया था।
पृष्ठभूमि
- स्टीफन थैलेर ने अपनी AI प्रणाली DABUS द्वारा बनाई गई कलाकृति ‘ए रीसेंट एंट्रेंस टू पैराडाइज’ (A Recent Entrance to Paradise) के लिए कॉपीराइट पंजीकरण का अनुरोध किया था।
- थैलेर ने तर्क दिया कि DABUS को दृश्य और भाषाई इनपुट के माध्यम से प्रशिक्षित करने के बाद, अंतिम कलाकृति AI की आंतरिक परिचालन प्रक्रिया द्वारा बिना किसी वास्तविक समय के मानवीय हस्तक्षेप के उत्पन्न हुई थी।
- उन्होंने यह भी कहा कि वह DABUS को एकमात्र लेखक के रूप में मान्यता दिलाना चाहते थे, न कि AI प्रणाली को कानूनी व्यक्तित्व या स्वतंत्र प्रवर्तनीय अधिकार देने के लिए, बल्कि यह सटीक रूप से रिकॉर्ड करने के लिए कि कलाकृति कैसे बनाई गई थी।
- मार्च 2025 में, एक अमेरिकी अदालत ने थैलेर के आवेदन को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया था कि अमेरिकी कॉपीराइट अधिनियम (US Copyright Act) के लिए मानवीय लेखकत्व की आवश्यकता है।
- दिल्ली उच्च न्यायालय ने अप्रैल में कॉपीराइट कार्यालय को यह तय करने का निर्देश दिया था कि क्या एक AI प्रणाली अपने द्वारा बनाए गए कार्य पर एकमात्र लेखकत्व का दावा कर सकती है।
- कॉपीराइट कार्यालय ने अपने आदेश में मुख्य रूप से इस बात पर जोर दिया कि कॉपीराइट अधिनियम के प्रावधान ‘लेखक’ को एक ‘व्यक्ति’ — यानी एक मानव — के रूप में पहचानते हैं, जो कार्य को अस्तित्व में लाता है।
कॉपीराइट अधिनियम, 1957 और AI लेखकत्व
- अधिनियम की धारा 2(d) ‘लेखक’ को परिभाषित करती है, जो किसी साहित्यिक या नाटकीय कार्य के संबंध में लेखक, किसी संगीत कार्य के संबंध में संगीतकार, किसी कलात्मक कार्य के संबंध में कलाकार, और किसी फोटोग्राफ के संबंध में फोटोग्राफर होता है। यह परिभाषा स्पष्ट रूप से एक ‘व्यक्ति’ को संदर्भित करती है।
- कॉपीराइट कार्यालय ने इस बात पर जोर दिया कि कानून उस तकनीकी तंत्र के बीच अंतर करता है जिसके माध्यम से आउटपुट उत्पन्न होता है और कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त व्यक्ति जिसे लेखकत्व का श्रेय दिया जाता है।
- रजिस्ट्रार ऑफ कॉपीराइट, प्रोफेसर (डॉ.) उन्नत पंडित ने कहा कि AI द्वारा बनाई गई कलाकृति को ‘मौलिक’ (original) माना जा सकता है, यदि यह किसी विशिष्ट स्रोत या अन्य कार्य से कॉपी नहीं की गई है और इसमें पर्याप्त स्वतंत्र रूप से उत्पन्न अभिव्यंजक चरित्र है।
- हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक प्रणाली के स्वायत्त रूप से कार्य करने का मतलब यह नहीं है कि वह कार्य को अस्तित्व में लाने वाले व्यक्ति की पहचान बदल देती है। निष्पादन में स्वायत्तता कार्य की अवधारणा के समान नहीं है।
- यह निर्णय वैश्विक स्तर पर AI द्वारा उत्पन्न कार्यों के लेखकत्व और कॉपीराइट को लेकर चल रही बहस में भारत के रुख को स्पष्ट करता है, जहां कई अन्य देशों ने भी मानवीय लेखकत्व की आवश्यकता पर बल दिया है।
- इस निर्णय का अर्थ है कि AI द्वारा बनाए गए कार्यों के कॉपीराइट का दावा करने के लिए एक मानव निर्माता या प्रोग्रामर को ‘लेखक’ के रूप में सूचीबद्ध करना होगा, भले ही AI ने कार्य को स्वायत्त रूप से उत्पन्न किया हो।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| AI-निर्मित कार्य की मौलिकता | कॉपीराइट कार्यालय ने स्वीकार किया कि AI द्वारा निर्मित कार्य मौलिक हो सकता है, यदि वह किसी अन्य स्रोत से कॉपी नहीं किया गया हो। |
| लेखक की परिभाषा | कॉपीराइट अधिनियम के तहत ‘लेखक’ को एक ‘व्यक्ति’ (मानव) के रूप में परिभाषित किया गया है, जो कार्य को अस्तित्व में लाता है। |
| मानव हस्तक्षेप | कॉपीराइट कार्यालय ने इस बात पर जोर दिया कि कार्य के निर्माण के लिए मानव लेखकत्व आवश्यक है, भले ही AI प्रणाली स्वायत्त रूप से कार्य करती हो। |
| दिल्ली उच्च न्यायालय का निर्देश | यह निर्णय दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद आया है, जिसमें कार्यालय को AI प्रणाली द्वारा बनाए गए कार्य के लेखकत्व पर निर्णय लेने को कहा गया था। |
| वैश्विक संदर्भ | स्टीफन थैलेर ने दुनिया भर के 16 अधिकार क्षेत्रों में DABUS के लिए कॉपीराइट मांगा है, जिनमें से कई ने मानव लेखकत्व की आवश्यकता के कारण इनकार कर दिया है। |
महत्व
बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights) पर प्रभाव
- यह निर्णय AI-निर्मित कार्यों के लिए बौद्धिक संपदा अधिकारों के भविष्य के संबंध में एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करता है।
- यह स्पष्ट करता है कि वर्तमान कानूनी ढांचा AI को लेखक के रूप में मान्यता नहीं देता है, जिससे AI के विकास और उपयोग के लिए नई कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
तकनीकी नवाचार और नीति निर्माण
- यह AI प्रौद्योगिकी के तेजी से विकास और मौजूदा कानूनों के बीच बढ़ते अंतर को उजागर करता है, जिससे नीति निर्माताओं को इस क्षेत्र में नए कानून बनाने की आवश्यकता महसूस हो सकती है।
- यह AI के नैतिक और कानूनी निहितार्थों पर व्यापक बहस को बढ़ावा देगा, विशेष रूप से रचनात्मकता और मानव लेखकत्व की अवधारणाओं के संबंध में।
कला और रचनात्मक उद्योग
- यह निर्णय उन कलाकारों और रचनाकारों के लिए महत्वपूर्ण है जो AI उपकरणों का उपयोग करते हैं, क्योंकि यह उनके कार्यों के कॉपीराइट स्वामित्व को प्रभावित करेगा।
- यह AI-जनित कला के व्यावसायिक उपयोग और मुद्रीकरण के लिए नए मॉडल विकसित करने की आवश्यकता को जन्म दे सकता है।
चुनौतियाँ
1. AI-निर्मित कार्यों का लेखकत्व
- AI प्रणाली द्वारा बनाए गए कार्यों के लिए ‘लेखक’ की पहचान करना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि वर्तमान कानून केवल मनुष्यों को लेखक के रूप में मान्यता देते हैं।
- यह सवाल उठता है कि क्या AI प्रणाली को कानूनी व्यक्तित्व दिया जाना चाहिए ताकि वह कॉपीराइट का दावा कर सके।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – सूचना प्रौद्योगिकी; बौद्धिक संपदा अधिकार
2. बौद्धिक संपदा कानूनों का आधुनिकीकरण
- मौजूदा कॉपीराइट कानून AI जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों की चुनौतियों का सामना करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
- कानूनी ढांचे को अद्यतन करने की आवश्यकता है ताकि AI-निर्मित कार्यों के लिए उचित सुरक्षा और प्रोत्साहन प्रदान किया जा सके।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – सूचना प्रौद्योगिकी; बौद्धिक संपदा अधिकार
3. रचनात्मकता और मौलिकता की परिभाषा
- AI द्वारा निर्मित कार्यों की मौलिकता को कैसे मापा जाए, यह एक जटिल प्रश्न है, खासकर जब AI बिना किसी स्पष्ट मानव हस्तक्षेप के कार्य उत्पन्न करता है।
- यह मानव रचनात्मकता और मशीन-जनित आउटपुट के बीच की रेखा को धुंधला करता है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – सूचना प्रौद्योगिकी; बौद्धिक संपदा अधिकार
4. AI के उपयोग से संबंधित नैतिक दुविधाएँ
- AI के व्यापक उपयोग से उत्पन्न होने वाली नैतिक दुविधाएँ, जैसे कि जिम्मेदारी का निर्धारण, पारदर्शिता और संभावित दुरुपयोग, महत्वपूर्ण चिंताएँ हैं।
- यह सुनिश्चित करना कि AI का उपयोग नैतिक सिद्धांतों के अनुरूप हो, एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – सूचना प्रौद्योगिकी; नैतिकता
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| AI लेखकत्व की अस्वीकृति | यह AI के विकास और AI-जनित सामग्री के मुद्रीकरण को हतोत्साहित कर सकता है, क्योंकि रचनाकारों को उनके कार्यों के लिए पूर्ण कानूनी सुरक्षा नहीं मिल पाएगी। |
| कानूनी अस्पष्टता | AI-निर्मित कार्यों के लिए कॉपीराइट स्वामित्व के संबंध में मौजूदा कानूनों में अस्पष्टता बनी हुई है, जिससे मुकदमेबाजी और अनिश्चितता बढ़ सकती है। |
| मानव बनाम मशीन रचनात्मकता | यह मानव रचनात्मकता के मूल्य और मशीन-जनित आउटपुट के बीच के अंतर को लेकर बहस को जन्म देता है, जिससे कला और रचनात्मक उद्योगों में नई चुनौतियाँ पैदा होती हैं। |
| अंतर्राष्ट्रीय सामंजस्य का अभाव | विभिन्न देशों में AI-निर्मित कार्यों के कॉपीराइट पर अलग-अलग दृष्टिकोण हैं, जिससे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एकरूपता का अभाव है और वैश्विक व्यापार में जटिलताएँ आ सकती हैं। |
आगे की राह
- AI-निर्मित कार्यों के लिए एक स्पष्ट और व्यापक कानूनी ढांचा विकसित करना, जो मानव लेखकत्व के महत्व को बनाए रखते हुए AI की क्षमताओं को भी पहचानता हो।
- कॉपीराइट अधिनियम में संशोधन करना ताकि ‘लेखक’ की परिभाषा को AI के संदर्भ में स्पष्ट किया जा सके, संभवतः एक ‘निर्माता’ या ‘योगदानकर्ता’ की अवधारणा को शामिल करके।
- AI-निर्मित कार्यों के लिए एक विशेष प्रकार का बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Right) बनाने पर विचार करना, जो पारंपरिक कॉपीराइट से भिन्न हो।
- AI-निर्मित सामग्री के लिए स्वामित्व और उपयोग के संबंध में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सामंजस्य को बढ़ावा देना।
- AI के नैतिक उपयोग और जिम्मेदारी के सिद्धांतों पर दिशा-निर्देश विकसित करना, ताकि नवाचार को बढ़ावा देते हुए संभावित दुरुपयोग को रोका जा सके।
- AI-जनित कार्यों की मौलिकता और रचनात्मकता का मूल्यांकन करने के लिए नए मापदंड और मूल्यांकन प्रणालियाँ विकसित करना।
- हितधारकों (कलाकारों, डेवलपर्स, कानूनी विशेषज्ञों) के साथ परामर्श करके एक समावेशी नीति निर्माण प्रक्रिया सुनिश्चित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
कृत्रिम बुद्धिमत्ता · कॉपीराइट कानून · मानव रचनाशीलता · बौद्धिक संपदा अधिकार · दिल्ली उच्च न्यायालय · कॉपीराइट अधिनियम · रचना का स्वामित्व · अधिकारिता का सिद्धांत · तकनीकी विकास · नैतिक और कानूनी मुद्दे
अवधारणा प्रवाह
AI प्रणाली द्वारा कलाकृति का निर्माण → कलाकृति के लिए कॉपीराइट पंजीकरण हेतु आवेदन → कॉपीराइट कार्यालय द्वारा ‘लेखक’ की परिभाषा की समीक्षा → मानव लेखकत्व की आवश्यकता पर जोर → AI को लेखक के रूप में अस्वीकृत करना → AI-निर्मित कार्य की मौलिकता को स्वीकार करना
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारतीय कॉपीराइट अधिनियम के तहत, केवल एक ‘व्यक्ति’ (मानव) ही किसी कार्य का लेखक हो सकता है।
2. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा उत्पन्न कार्य को कॉपीराइट सुरक्षा नहीं दी जा सकती है।
3. कॉपीराइट कार्यालय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि कॉपीराइट अधिनियम ‘लेखक’ को एक ‘व्यक्ति’ के रूप में परिभाषित करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि AI द्वारा उत्पन्न कार्य को कॉपीराइट सुरक्षा दी जा सकती है, भले ही AI स्वयं लेखक न हो। कथन 3 सही है क्योंकि कॉपीराइट कार्यालय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
Q2. अभिकथन (A): भारतीय कॉपीराइट कार्यालय ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) प्रणाली को किसी कार्य का एकमात्र लेखक मानने से इनकार कर दिया है।
कारण (R): भारतीय कॉपीराइट अधिनियम में ‘लेखक’ को एक ‘व्यक्ति’ के रूप में परिभाषित किया गया है, जो एक मानव है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि कॉपीराइट कार्यालय ने AI को लेखक मानने से इनकार कर दिया है। कारण (R) भी सही है और यह अभिकथन की सही व्याख्या करता है, क्योंकि अधिनियम में लेखक की परिभाषा ही इस निर्णय का आधार है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा उत्पन्न कार्यों के कॉपीराइट स्वामित्व को लेकर हालिया निर्णय ने बौद्धिक संपदा अधिकारों के समक्ष नई चुनौतियाँ खड़ी की हैं। इन चुनौतियों का आलोचनात्मक परीक्षण करें और भारतीय संदर्भ में कॉपीराइट कानून के संभावित विकास पर चर्चा करें। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: AI द्वारा उत्पन्न कार्यों के कॉपीराइट स्वामित्व पर हालिया निर्णय का संक्षिप्त उल्लेख करें (जैसे अमेरिकी शोधकर्ता स्टीफन थैलेर का मामला और भारतीय कॉपीराइट कार्यालय का रुख)।
2. वर्तमान स्थिति और कानूनी आधार: भारतीय कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के तहत ‘लेखक’ की परिभाषा (धारा 2(d) का उल्लेख) और ‘मानव रचनाशीलता’ के सिद्धांत पर प्रकाश डालें। दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश और कॉपीराइट कार्यालय के निर्णय का संदर्भ दें कि AI स्वयं लेखक नहीं हो सकता, लेकिन कार्य को सुरक्षा मिल सकती है।
3. बौद्धिक संपदा अधिकारों के समक्ष चुनौतियाँ:
क. ‘लेखक’ की पारंपरिक अवधारणा: AI की स्वायत्तता बनाम मानव हस्तक्षेप की सीमा।
ख. स्वामित्व का निर्धारण: AI प्रणाली के डेवलपर, उपयोगकर्ता या प्रशिक्षण डेटा प्रदाता में से कौन मालिक होगा?
ग. मौलिकता का मानदंड: क्या AI द्वारा उत्पन्न कार्य में ‘मौलिकता’ का तत्व माना जा सकता है?
घ. नैतिक और दार्शनिक प्रश्न: AI को कानूनी व्यक्तित्व देने की बहस।
ङ. उल्लंघन और प्रवर्तन: AI द्वारा उत्पन्न सामग्री के उल्लंघन का पता लगाना और उस पर कार्रवाई करना।
4. भारतीय संदर्भ में कॉपीराइट कानून के संभावित विकास:
क. मौजूदा कानून में संशोधन की आवश्यकता: AI-जनित कार्यों को शामिल करने के लिए परिभाषाओं का विस्तार।
ख. ‘सहायक लेखक’ या ‘सह-लेखक’ की अवधारणा: मानव और AI के बीच सहयोग को मान्यता देना।
ग. विशेष नियम या दिशानिर्देश: AI-जनित सामग्री के लिए विशिष्ट कॉपीराइट नीतियाँ बनाना।
घ. अंतर्राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य: अन्य देशों के अनुभवों से सीखना (जैसे यूके, यूएसए)।
ङ. नीतिगत संतुलन: नवाचार को बढ़ावा देने और रचनाकारों के अधिकारों की रक्षा के बीच संतुलन।
5. निष्कर्ष: AI के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए, कॉपीराइट कानून में अनुकूलन की आवश्यकता पर बल दें, ताकि तकनीकी प्रगति के साथ-साथ रचनात्मकता और बौद्धिक संपदा अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
स्रोत: The Indian Express
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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