AI डेटा केंद्रों से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा

NGO discusses environmental implications of AI data centres — concept mind map

AI डेटा केंद्रों से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा

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AI डेटा केंद्र

✎ AI डेटा केंद्र अत्यधिक ऊर्जा और जल-गहन होते हैं, जिनके पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों को कम करने के लिए व्यापक मूल्यांकन और सार्वजनिक भागीदारी आवश्यक है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव-विविधता  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में विकास और उनके अनुप्रयोग  |  GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
  • Prelims: AI डेटा केंद्र, हाइपरस्केल डेटा केंद्र, पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA), सार्वजनिक परामर्श, ऊर्जा खपत, जल खपत, जैव-विविधता पर प्रभाव, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन
  • Essay: प्रौद्योगिकी और पर्यावरण: विकास बनाम स्थिरता की दुविधा, सतत विकास के पथ पर AI: अवसर और चुनौतियाँ

त्वरित पुनरावृत्ति: AI डेटा केंद्र अत्यधिक ऊर्जा और जल-गहन होते हैं, जिनके पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों को कम करने के लिए व्यापक मूल्यांकन और सार्वजनिक भागीदारी आवश्यक है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

विशाखापत्तनम में एक पर्यावरण NGO, ग्रीन विशाखा ने प्रस्तावित हाइपरस्केल AI डेटा केंद्रों के पर्यावरणीय, सामाजिक और कानूनी निहितार्थों पर चर्चा करने के लिए कानूनी बिरादरी के सदस्यों के साथ एक सत्र का आयोजन किया। इस चर्चा में भूमि, जल, बिजली और जैव-विविधता पर इन परियोजनाओं के संभावित प्रभावों का आकलन करने पर जोर दिया गया, जिससे AI डेटा केंद्रों के पर्यावरणीय पदचिह्न पर सार्वजनिक बहस तेज हो गई है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में डिजिटल अवसंरचना के विस्तार के साथ-साथ डेटा केंद्रों की मांग में तेजी आई है, विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते उपयोग के कारण।
  • हाइपरस्केल डेटा केंद्र बड़े पैमाने पर डेटा भंडारण और प्रसंस्करण क्षमता प्रदान करते हैं, जो AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और बिग डेटा एनालिटिक्स के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • इन केंद्रों को चलाने के लिए बड़ी मात्रा में बिजली और पानी की आवश्यकता होती है, जिससे पर्यावरण पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।
  • पर्यावरण प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment – EIA) किसी भी बड़ी परियोजना के पर्यावरणीय परिणामों का मूल्यांकन करने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है, जिसमें सार्वजनिक परामर्श (Public Consultation) एक अनिवार्य घटक है।
  • संविधान (Constitution) और पर्यावरणीय कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित करना ऐसी परियोजनाओं के लिए आवश्यक है, ताकि प्राकृतिक संसाधनों और सामाजिक न्याय को बनाए रखा जा सके।
  • विधानसभाओं में सरकारी आदेशों पर बहस की कमी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक जवाबदेही पर चिंताएँ बढ़ाती है।

AI डेटा केंद्र और उनके पर्यावरणीय निहितार्थ क्या हैं?

  • AI डेटा केंद्र वे सुविधाएँ हैं जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संबंधित कंप्यूटिंग कार्यों, डेटा भंडारण और नेटवर्क संचालन का समर्थन करती हैं।
  • ये केंद्र बड़ी मात्रा में डेटा को संसाधित करने और AI मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए उच्च-प्रदर्शन वाले सर्वर और कूलिंग सिस्टम का उपयोग करते हैं।
  • पर्यावरणीय निहितार्थों में मुख्य रूप से उच्च ऊर्जा खपत शामिल है, क्योंकि सर्वर और कूलिंग सिस्टम को लगातार बिजली की आवश्यकता होती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है।
  • इन केंद्रों को ठंडा रखने के लिए बड़ी मात्रा में पानी की भी आवश्यकता होती है, जिससे स्थानीय जल संसाधनों पर दबाव पड़ सकता है, खासकर जल-संकट वाले क्षेत्रों में।
  • डेटा केंद्रों के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र और जैव-विविधता (Biodiversity) पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  • इलेक्ट्रॉनिक कचरा (E-waste) एक और चिंता का विषय है, क्योंकि पुराने उपकरण लगातार बदले जाते हैं, जिससे अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौती उत्पन्न होती है।
  • इन परियोजनाओं के सामाजिक प्रभाव में स्थानीय समुदायों का विस्थापन, संसाधनों तक पहुँच में बदलाव और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर शामिल हो सकते हैं।
  • पारदर्शी पर्यावरण और सामाजिक प्रभाव आकलन (Environmental and Social Impact Assessments) तथा व्यापक सार्वजनिक परामर्श इन प्रभावों को कम करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
उच्च ऊर्जा खपत डेटा केंद्रों को चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होती है, जिससे ऊर्जा उत्पादन पर दबाव पड़ता है और कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है।
जल का गहन उपयोग सर्वर को ठंडा रखने के लिए बड़ी मात्रा में पानी का उपयोग किया जाता है, जिससे स्थानीय जल संसाधनों पर दबाव पड़ता है, खासकर जल-तनाव वाले क्षेत्रों में।
भूमि की आवश्यकता हाइपरस्केल डेटा केंद्रों को विशाल भूखंडों की आवश्यकता होती है, जिससे कृषि भूमि या पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों का नुकसान हो सकता है।
ई-कचरा उत्पादन पुराने सर्वर और उपकरण बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक कचरा उत्पन्न करते हैं, जिसके निपटान से पर्यावरणीय प्रदूषण का खतरा होता है।
जैव विविधता पर प्रभाव बड़े पैमाने पर निर्माण और संसाधन निष्कर्षण से स्थानीय जैव विविधता और पारिस्थितिक तंत्र बाधित हो सकते हैं।
सामाजिक न्याय के मुद्दे परियोजनाओं के लाभ और लागत का असमान वितरण स्थानीय समुदायों को प्रभावित कर सकता है, खासकर यदि विस्थापन या संसाधन की कमी होती है।

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • AI डेटा केंद्रों की बढ़ती संख्या से ऊर्जा, जल और भूमि संसाधनों पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है।
  • इन केंद्रों से उत्पन्न होने वाला ई-कचरा और कार्बन उत्सर्जन पर्यावरणीय प्रदूषण में वृद्धि कर रहा है।
  • जैव विविधता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जिससे पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ सकता है।

सामाजिक महत्व

  • स्थानीय समुदायों पर डेटा केंद्रों के प्रभाव, जैसे विस्थापन या संसाधन की कमी, सामाजिक न्याय के मुद्दे उठा रहे हैं।
  • पारदर्शी पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव आकलन (Environmental and Social Impact Assessments – ESIA) तथा जन परामर्श की कमी से जनता में असंतोष बढ़ सकता है।
  • मानवाधिकारों और संवैधानिक कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा हो सके।

शासन और विनियामक महत्व

  • सरकारी आदेशों पर विधायी बहस की कमी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के लिए चिंता का विषय है।
  • पर्यावरणीय कानूनों और संवैधानिक प्रावधानों का सख्त अनुपालन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
  • नियामक ढांचे को मजबूत करने और AI डेटा केंद्रों के पर्यावरणीय प्रभावों को संबोधित करने के लिए नई नीतियों की आवश्यकता है।

चुनौतियाँ

1. संसाधन की कमी

  • डेटा केंद्रों द्वारा अत्यधिक ऊर्जा और जल की खपत से स्थानीय संसाधनों पर दबाव पड़ता है।
  • यह समस्या उन क्षेत्रों में और गंभीर हो जाती है जहां पहले से ही जल या बिजली की कमी है।

2. पर्यावरणीय प्रदूषण

  • कार्बन उत्सर्जन में वृद्धि से जलवायु परिवर्तन में योगदान होता है।
  • ई-कचरा प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है, जिससे मिट्टी और जल प्रदूषण का खतरा है।

3. पारदर्शिता और जन भागीदारी का अभाव

  • परियोजनाओं से संबंधित सरकारी आदेशों पर विधायी बहस न होना लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है।
  • पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव आकलन में पारदर्शिता और व्यापक जन परामर्श की कमी से स्थानीय समुदायों की चिंताओं को नजरअंदाज किया जा सकता है।

4. जैव विविधता और भूमि उपयोग पर प्रभाव

  • बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण से कृषि भूमि या संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों का नुकसान हो सकता है।
  • निर्माण गतिविधियों से स्थानीय जैव विविधता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

5. कानूनी और संवैधानिक अनुपालन

  • पर्यावरणीय कानूनों और संवैधानिक प्रावधानों का उचित अनुपालन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
  • मानवाधिकारों और पर्यावरणीय न्याय के सिद्धांतों को बनाए रखना एक चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
ऊर्जा और जल की खपत डेटा केंद्रों को चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली और पानी की आवश्यकता होती है, जिससे स्थानीय संसाधनों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है।
कार्बन उत्सर्जन उच्च ऊर्जा खपत जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता बढ़ाती है, जिससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और जलवायु परिवर्तन में वृद्धि होती है।
ई-कचरा प्रबंधन पुराने और अप्रचलित AI हार्डवेयर से उत्पन्न होने वाला इलेक्ट्रॉनिक कचरा पर्यावरणीय प्रदूषण और स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है।
भूमि अधिग्रहण और जैव विविधता बड़े पैमाने पर डेटा केंद्रों के लिए भूमि अधिग्रहण से कृषि भूमि का नुकसान हो सकता है और स्थानीय जैव विविधता को खतरा हो सकता है।
पारदर्शिता और जन परामर्श परियोजनाओं के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों के आकलन में पारदर्शिता की कमी तथा जन परामर्श का अभाव स्थानीय समुदायों में असंतोष पैदा करता है।
विधायी समीक्षा का अभाव सरकारी आदेशों पर विधायी निकायों में बहस न होने से लोकतांत्रिक जवाबदेही पर सवाल उठता है।

आगे की राह

  • AI डेटा केंद्रों के लिए एक व्यापक और सख्त पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment – EIA) और सामाजिक प्रभाव आकलन (Social Impact Assessment – SIA) अनिवार्य किया जाए।
  • ऊर्जा दक्षता मानकों को कड़ा किया जाए और डेटा केंद्रों को नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर स्विच करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
  • जल-कुशल शीतलन प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा दिया जाए और डेटा केंद्रों के लिए जल पुनर्चक्रण प्रणालियों को अनिवार्य किया जाए।
  • ई-कचरा प्रबंधन के लिए सख्त नियम और नीतियां बनाई जाएं, जिसमें उत्पादकों की विस्तारित जिम्मेदारी (Extended Producer Responsibility – EPR) शामिल हो।
  • स्थानीय समुदायों के साथ व्यापक और सार्थक जन परामर्श सुनिश्चित किया जाए, और उनकी चिंताओं को परियोजना नियोजन में शामिल किया जाए।
  • सरकारी आदेशों और नीतियों पर विधायी निकायों में खुली बहस और समीक्षा को अनिवार्य किया जाए।
  • डेटा केंद्रों के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र नियामक निकाय स्थापित किया जाए।
  • पर्यावरणीय न्याय के सिद्धांतों को लागू किया जाए ताकि परियोजना के लाभ और लागत का वितरण न्यायसंगत हो।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

AI डेटा केंद्र · पर्यावरणीय प्रभाव आकलन · सामाजिक न्याय · ऊर्जा खपत · जल उपयोग · जैव विविधता संरक्षण · सार्वजनिक परामर्श · संवैधानिक कानून · पर्यावरण कानून · सतत विकास · डिजिटल अवसंरचना · नीति निर्माण

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘Article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘टिप्पणी’: ‘स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार जीवन के अधिकार का हिस्सा है।’}
  • {‘Article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘टिप्पणी’: ‘राज्य पर्यावरण के संरक्षण और सुधार का प्रयास करेगा।’}
  • {‘Article’: ‘अनुच्छेद 51A(g)’, ‘टिप्पणी’: ‘प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह पर्यावरण की रक्षा करे।’}

अवधारणा प्रवाह

AI डेटा केंद्रों की बढ़ती मांग  →  ↓  →  उच्च ऊर्जा, जल और भूमि की आवश्यकता  →  ↓  →  संसाधन की कमी, कार्बन उत्सर्जन और ई-कचरा  →  ↓  →  पर्यावरणीय प्रदूषण और जैव विविधता का नुकसान  →  ↓  →  सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन  →  ↓  →  नियामक और विधायी समीक्षा की आवश्यकता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत अनिवार्य है।
2. AI डेटा केंद्रों को ‘हाइपरस्केल’ कहा जाता है क्योंकि वे बड़ी मात्रा में डेटा को संसाधित करने और संग्रहीत करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जिसके लिए महत्वपूर्ण भूमि, जल और ऊर्जा संसाधनों की आवश्यकता होती है।
3. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का उद्देश्य AI डेटा केंद्रों की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हरित ऊर्जा को बढ़ावा देना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। भारत में EIA पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत एक वैधानिक आवश्यकता है। कथन 2 सही है। हाइपरस्केल डेटा केंद्र वास्तव में बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेसिंग और स्टोरेज के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जिसके लिए महत्वपूर्ण संसाधनों की आवश्यकता होती है। कथन 3 गलत है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का प्राथमिक उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है, न कि विशेष रूप से AI डेटा केंद्रों की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करना। हालांकि, यह अप्रत्यक्ष रूप से हरित ऊर्जा उपलब्धता में योगदान दे सकता है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन AI डेटा केंद्रों के पर्यावरणीय प्रभावों का सबसे अच्छा वर्णन करता है?

  1. AI डेटा केंद्र केवल वायु प्रदूषण में योगदान करते हैं, क्योंकि वे बड़ी मात्रा में बिजली का उपभोग करते हैं।
  2. AI डेटा केंद्रों के लिए उच्च ऊर्जा खपत, जल उपयोग और भूमि अधिग्रहण प्रमुख पर्यावरणीय चिंताएँ हैं।
  3. AI डेटा केंद्र मुख्य रूप से जैव विविधता को प्रभावित करते हैं, क्योंकि वे वनों की कटाई का कारण बनते हैं।
  4. AI डेटा केंद्र केवल इलेक्ट्रॉनिक कचरे का उत्पादन करते हैं, जिसका पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव पड़ता है।

उत्तर: AI डेटा केंद्रों के लिए उच्च ऊर्जा खपत, जल उपयोग और भूमि अधिग्रहण प्रमुख पर्यावरणीय चिंताएँ हैं। — AI डेटा केंद्रों को चलाने के लिए बड़ी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन होता है (यदि ऊर्जा गैर-नवीकरणीय स्रोतों से आती है)। उन्हें ठंडा रखने के लिए भी महत्वपूर्ण जल की आवश्यकता होती है, और उनके बड़े आकार के लिए भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता होती है, जिससे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो सकता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ AI डेटा केंद्रों के पर्यावरणीय और सामाजिक निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। भारत में ऐसे परियोजनाओं के लिए एक संतुलित और सतत दृष्टिकोण सुनिश्चित करने हेतु क्या उपाय किए जा सकते हैं? (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय: AI डेटा केंद्रों का संक्षिप्त परिचय और उनके बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालना।
मुख्य भाग:
1. पर्यावरणीय निहितार्थ: उच्च ऊर्जा खपत (कार्बन उत्सर्जन), जल उपयोग (शीतलन के लिए), भूमि अधिग्रहण (पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव), इलेक्ट्रॉनिक कचरा उत्पादन।
2. सामाजिक निहितार्थ: स्थानीय समुदायों का विस्थापन, आजीविका पर प्रभाव, सामाजिक न्याय के मुद्दे, सरकारी आदेशों में पारदर्शिता की कमी और विधायी बहस का अभाव।
3. संवैधानिक और कानूनी संदर्भ: पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986; जल (रोकथाम और प्रदूषण नियंत्रण) अधिनियम, 1974; वायु (रोकथाम और प्रदूषण नियंत्रण) अधिनियम, 1981; न्यायिक समीक्षा का सिद्धांत; अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार और स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार)।
4. संतुलित और सतत दृष्टिकोण के लिए उपाय:
• कठोर पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) और सामाजिक प्रभाव आकलन (SIA)।
• व्यापक सार्वजनिक परामर्श और हितधारक सहभागिता।
• नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग अनिवार्य करना।
• जल-कुशल शीतलन प्रौद्योगिकियों को अपनाना।
• ई-कचरा प्रबंधन के लिए सख्त नियम।
• विधायी विधानसभाओं में परियोजनाओं पर बहस और पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
• ‘पर्यावरण न्याय’ और ‘अंतर-पीढ़ीगत इक्विटी’ के सिद्धांतों का पालन।
निष्कर्ष: AI डेटा केंद्रों के लाभों और उनके पर्यावरणीय/सामाजिक लागतों के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर बल देना, ताकि सतत विकास सुनिश्चित किया जा सके।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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