Author: Purvi Ma'am

  न्याय के सिंहासन का विस्तार या संवैधानिक चतुराई? धन विधेयक के गलियारों से गुज़रता सर्वोच्च न्यायालय भूमिका: न्याय की प्रतीक्षा और व्यवस्था का द्वंद्व भारतीय लोकतंत्र के भव्य मंदिर में, सर्वोच्च न्यायालय...

  हिमालय की पुकार: क्या पिघलते ग्लेशियर भारत-चीन कूटनीति के बीच जमी बर्फ को पिघला पाएंगे? प्रकृति का अलार्म और कूटनीति की चौखट प्रकृति न तो सरहदें जानती है और न ही वह...

  ब्रह्मांड के 'अदृश्य जासूस': क्या न्यूट्रिनो रोकेंगे परमाणु हथियारों का निर्माण? परिचय (Introduction) कल्पना कीजिए कि एक ऐसा जासूस है जो दीवारों, पहाड़ों और यहाँ तक कि इंसानी जिस्म के आर-पार देख...

 कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का भारतीय समाज और रोजगार पर प्रभाव: एक तकनीकी नवजागरण या विनाशकारी सुनामी? मानव सभ्यता के इतिहास में पहिए, भाप के इंजन और इंटरनेट के बाद अब कृत्रिम...

भारतीय संविधान ने विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन किया है। न्यायपालिका को संविधान का संरक्षक और नागरिकों के मौलिक अधिकारों का रक्षक माना गया है।...

दशकों तक, किसी भी देश का वैश्विक प्रभाव उसकी सैन्य ताकत, व्यापार या सांस्कृतिक निर्यात से मापा जाता था। लेकिन आज, 'सॉफ्ट पावर' (Soft Power) का एक नया हथियार उभर...