साइक्लोन अरनब से आंध्र प्रदेश को 4,600 करोड़ रुपये का नुकसान, मुख्यमंत्री ने किया आकलन

साइक्लोन अरनब से आंध्र प्रदेश को 4,600 करोड़ रुपये का नुकसान, मुख्यमंत्री ने किया आकलन

साइक्लोन अरनब से आंध्र प्रदेश को 4,600 करोड़ रुपये का नुकसान, मुख्यमंत्री ने किया आकलन

चक्रवात अर्नब: क्षति आकलन प्रक्रियाप्रारंभिक आकलन₹4,600 करोड़अंतर-मंत्रालयी दल30 अक्टूबरक्षतिपूर्ति निर्धारणNDRF/SDRF
चक्रवात अर्नब: क्षति आकलन प्रक्रिया

✎ चक्रवात में जनहानि का मुख्य कारण प्रायः तूफानी लहर होती है, और आपदा के बाद क्षति का अंतिम आकलन राज्य के प्रारंभिक आकलन के बाद अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल द्वारा किया जाता है, जिसके आधार पर SDRF और केंद्रीय सहायता तय होती है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — आपदा प्रबंधन (Disaster Management), पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन  |  GS Paper II — केंद्र-राज्य संबंध और आपदा के समय संस्थागत समन्वय  |  GS Paper I — भारत का भूगोल: तटीय क्षेत्र एवं कृषि-बागवानी क्षेत्र
  • Prelims: चक्रवात की श्रेणियाँ (IMD वर्गीकरण), आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (Inter-Ministerial Central Team), गोदावरी डेल्टा और कोनसीमा क्षेत्र का भूगोल, तूफानी लहर (Storm Surge)
  • Essay: आपदा-लचीलापन: तटीय राज्यों में चक्रवात-पूर्व तैयारी और जान-माल की हानि में कमी, बदलते जलवायु परिदृश्य में तटीय समुदायों की आजीविका और बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा

त्वरित पुनरावृत्ति: चक्रवात में जनहानि का मुख्य कारण प्रायः तूफानी लहर होती है, और आपदा के बाद क्षति का अंतिम आकलन राज्य के प्रारंभिक आकलन के बाद अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल द्वारा किया जाता है, जिसके आधार पर SDRF और केंद्रीय सहायता तय होती है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

यह खबर चर्चा में क्यों?

आंध्र प्रदेश सरकार ने चक्रवात अर्नब से हुई प्रारंभिक आकलन के आधार पर लगभग ₹4,600 करोड़ के नुकसान का अनुमान जताया है। मुख्यमंत्री ने कृष्णा और गोदावरी क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया और बताया कि आपदा-पूर्व तैयारी से जनहानि सीमित रही, जिसमें मृतकों की संख्या सात बताई गई है। बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए अन्य राज्यों से कर्मी मँगवाने की बात कही गई है, और केंद्र से अंतर-मंत्रालयी दल 30 अक्टूबर को क्षति का आकलन करने पहुँचने वाला है। नारियल और ऑयल पाम के पेड़ों तथा राहत शिविरों में रह रहे परिवारों के लिए मुआवजे की घोषणा भी की गई है। इन सभी पहलुओं के कारण यह घटना आपदा प्रबंधन, क्षति-आकलन की प्रक्रिया और केंद्र-राज्य समन्वय की दृष्टि से परीक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण है।

पृष्ठभूमि

  • बंगाल की खाड़ी में बनने वाले चक्रवात भारत के पूर्वी तट, विशेषकर आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु, को बार-बार प्रभावित करते हैं। भारत की तटरेखा लगभग 7,500 किलोमीटर लंबी है, जो इसे चक्रवात और तूफानी लहरों के प्रति संवेदनशील बनाती है।
  • ओडिशा में 1999 के महाचक्रवात और आंध्र प्रदेश में 2014 के हुदहुद चक्रवात के बाद आपदा प्रबंधन की संस्थागत व्यवस्था और चेतावनी तंत्र में सुधार किए गए, जिनमें भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की पूर्व-चेतावनी प्रणाली प्रमुख है।
  • आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत राष्ट्रीय स्तर पर NDMA, राज्य स्तर पर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला स्तर पर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण गठित किए गए हैं। राहत और पुनर्वास के लिए SDRF और आपदा की गंभीरता के अनुसार NDRF से सहायता दी जाती है।
  • आपदा के बाद केंद्र सरकार अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल भेजती है, जो राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत ज्ञापन और मौके पर क्षति का आकलन करता है। इसी आकलन के आधार पर उच्च-स्तरीय समिति केंद्रीय सहायता की राशि तय करती है।
  • सेंडाई फ्रेमवर्क फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन (2015–2030) आपदा जोखिम में कमी के लिए वैश्विक ढाँचा है, जो पूर्व-तैयारी, जोखिम-मूल्यांकन और समुदाय-आधारित लचीलेपन पर बल देता है।

चक्रवात क्या है और आपदा-पश्चात प्रबंधन कैसे होता है?

  • चक्रवात निम्न वायुदाब वाला एक तीव्र घूर्णनशील तूफान है, जो सामान्यतः 26–27 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाले समुद्री जल पर बनता है। पृथ्वी का घूर्णन (कोरिऑलिस बल) इसके घूमने की दिशा तय करता है।
  • IMD पवन की गति के आधार पर चक्रवात को वर्गीकृत करता है, जैसे चक्रवाती तूफान, गंभीर चक्रवाती तूफान, अति गंभीर चक्रवाती तूफान और सुपर चक्रवाती तूफान।
  • तटीय क्षेत्रों में सबसे अधिक जनहानि का कारण प्रायः तूफानी लहर (Storm Surge) होती है, जबकि तेज हवाएँ बिजली के खंभों, पेड़ों और फसलों को भारी नुकसान पहुँचाती हैं।
  • आपदा के बाद क्षति-आकलन की प्रक्रिया में राज्य सरकार प्रारंभिक आकलन जारी करती है, फिर केंद्रीय दल जाँच करता है और अंत में राहत एवं पुनर्वास की राशि तय होती है। उदाहरण के लिए, बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए अन्य राज्यों से कर्मियों की सहायता पारस्परिक सहयोग का व्यावहारिक रूप है।
  • राहत कार्यों में राहत शिविरों में रह रहे परिवारों को अनाज और नकद सहायता देना, तथा फसल और बागवानी क्षति के लिए इनपुट सब्सिडी और मुआवजा देना शामिल है। इनके मानदंड राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष और प्रचलित नीतियों के अनुसार तय होते हैं।
  • बिजली के खंभे उखड़ने जैसी क्षति को कम करने के लिए भूमिगत केबल बिछाने जैसे विकल्पों पर विचार किया जाता है, परंतु इसकी लागत और व्यवहार्यता का मूल्यांकन आवश्यक है।
  • तटीय क्षेत्रों में जल-निकासी नालों का अवरोध बाढ़ और जलभराव बढ़ाता है, इसलिए नालों की सफाई और रखरखाव आपदा-प्रबंधन का अनिवार्य हिस्सा है। तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) अधिसूचना, 2019 इस संदर्भ में प्रासंगिक नियामक ढाँचा है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
चक्रवात आर्णब (Cyclone Arnab) आंध्र प्रदेश के कृष्णा और गोदावरी क्षेत्रों को प्रभावित करने वाला चक्रवाती तूफ़ान; प्रारंभिक आकलन में ₹4,600 करोड़ की अनुमानित क्षति
प्रारंभिक क्षति आकलन यह आँकड़ा प्रारंभिक है; अंतिम आकलन क्षति की गणना (Enumeration) और केंद्रीय दल के सत्यापन के बाद ही संभव होता है
जनहानि में सीमितता सात मौतें बताई गईं; राज्य सरकार ने इसका श्रेय चक्रवात-पूर्व तैयारी (Preparedness) को दिया
विद्युत अवसंरचना की क्षति अकेले डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनसीमा जिले में लगभग 8,000 विद्युत खंभे उखड़े; विद्युत आपूर्ति बहाली के लिए अन्य राज्यों के कर्मियों और मशीनों पर निर्भरता
कृषि एवं बागवानी क्षति नारियल और ऑयल पाम के वृक्ष गिरे; प्रति वृक्ष ₹1,500 क्षतिपूर्ति की घोषणा और आदान सहायता का प्रस्ताव
राहत उपाय राहत शिविरों में स्थानांतरित परिवारों को 25 किलो चावल का थैला और नकद सहायता

महत्व

आर्थिक

  • ₹4,600 करोड़ का प्रारंभिक अनुमान कृषि, बागवानी और विद्युत अवसंरचना पर सीधा आर्थिक भार दर्शाता है।
  • नारियल और ऑयल पाम जैसी दीर्घकालिक फसलों की क्षति से उत्पादन और किसान आय पर असर लंबे समय तक रहता है, क्योंकि इन वृक्षों को पुनः फलदायी होने में वर्षों लगते हैं।
  • विद्युत आपूर्ति की शीघ्र बहाली से औद्योगिक और घरेलू गतिविधियों की पुनःस्थापना होती है, जो आर्थिक पुनरुद्धार की पहली शर्त है।

शासन और प्रशासन

  • पूर्व-चेतावनी और तैयारी से जनहानि को सीमित रखना आपदा प्रबंधन की सफलता का प्रमाण माना जाता है।
  • क्षति आकलन के लिए अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल का गठन केंद्र और राज्य के बीच समन्वित सूचना-प्रवाह की व्यवस्था है।
  • राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से लेकर जिला कलेक्टर स्तर तक की संस्थागत भूमिका इस राहत-कार्य में स्पष्ट दिखती है।

संघीय संबंध

  • विद्युत कर्मियों के लिए पड़ोसी राज्यों से अनुरोध अंतर-राज्यीय सहयोग का व्यावहारिक उदाहरण है।
  • आपदा राहत में केंद्रीय सहायता और राज्य के अपने संसाधनों के बीच वित्तीय साझेदारी का प्रश्न सहकारी संघवाद से जुड़ता है।

दीर्घकालिक अवसंरचना एवं पर्यावरण

  • भूमिगत विद्युत केबल बिछाने पर विचार चक्रवात-प्रवण क्षेत्रों में अवसंरचना की अनुकूलन (Resilience) रणनीति का संकेत है।
  • कुनावरम ड्रेन का अवरोध दर्शाता है कि जल निकासी प्रणाली का रखरखाव आपदा जोखिम न्यूनीकरण का अभिन्न अंग है।

चुनौतियाँ

1. क्षति आकलन और क्षतिपूर्ति का सत्यापन

  • प्रारंभिक अनुमान और अंतिम आकलन में अंतर संभव है, इसलिए गणना की पारदर्शी प्रक्रिया आवश्यक है।
  • फसल, वृक्ष और आवास की क्षति का सही वर्गीकरण तथा दोहरे लाभ से बचाव प्रशासनिक चुनौती है।

2. विद्युत अवसंरचना की भेद्यता

  • हजारों खंभों का उखड़ना दर्शाता है कि ओवरहेड लाइन चक्रवात के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है।
  • भूमिगत केबल की लागत अधिक होती है, इसलिए उसे चरणबद्ध रूप से और जोखिम-आधारित तरीके से अपनाना होगा।

3. जल निकासी और बाढ़ जोखिम

  • जल निकासी नालों के अवरोध से फसलें जलमग्न होती हैं, जिससे क्षति का दायरा बढ़ता है।
  • तटीय डेल्टा क्षेत्रों में ज्वार, वर्षा-जल और नदी-प्रवाह का एक साथ दबाव जल निकासी को जटिल बनाता है।

4. अंतर-राज्यीय संसाधन समन्वय

  • अन्य राज्यों से कर्मी और मशीनें मँगाने में परिवहन, वेतन और प्रतिनियुक्ति के नियम समन्वय माँगते हैं।
  • सहायता के अनुरोध की औपचारिक प्रक्रिया और त्वरित निर्णय के बीच संतुलन आवश्यक है।

5. तटीय कृषि की आजीविका-संवेदनशीलता

  • नारियल और ऑयल पाम के वृक्षों की क्षति छोटे किसानों की दीर्घकालिक आय को प्रभावित करती है।
  • वृक्ष-आधारित फसलों के लिए बीमा कवरेज सीमित होने से पुनर्वास पर वित्तीय दबाव बढ़ता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
क्षति का अंतिम आँकड़ा प्रारंभिक ₹4,600 करोड़ का अनुमान केंद्रीय दल के सत्यापन से बदल सकता है
विद्युत खंभों की पुनःस्थापना 8,000 खंभों की शीघ्र बहाली के लिए मशीनों और कर्मियों की उपलब्धता पर निर्भरता
जल निकासी अवरोध कुनावरम ड्रेन का अवरोध जलभराव से फसल क्षति को बढ़ा सकता है
राहत का वितरण राहत शिविरों में रहने वाले परिवारों तक सहायता का समयबद्ध और पारदर्शी वितरण
दीर्घकालिक लागत भूमिगत विद्युत केबल की उच्च लागत और वित्तीय व्यवहार्यता का प्रश्न
कृषि आय का नुकसान वृक्ष-आधारित फसलों के पुनर्वास में वर्षों का समय और सीमित बीमा कवरेज

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि (State Disaster Response Fund – SDRF)

आगे की राह

  • क्षति आकलन को डिजिटल और जिला-वार सत्यापन के आधार पर पूरा किया जाए, ताकि क्षतिपूर्ति का वितरण पारदर्शी हो।
  • केंद्रीय दल की रिपोर्ट के आधार पर अंतिम राहत पैकेज का निर्धारण समयबद्ध ढंग से हो।
  • विद्युत आपूर्ति बहाली के लिए अंतर-राज्यीय कर्मी-भंडार (Mutual Assistance) की पूर्व-व्यवस्था बनाई जाए।
  • चक्रवात-प्रवण तटीय क्षेत्रों में विद्युत लाइनों के भूमिगत बिछाने की व्यवहार्यता का चरणबद्ध अध्ययन किया जाए।
  • कुनावरम जैसे जल निकासी नालों का नियमित रखरखाव और अवरोध-हटाने का कार्यक्रम स्थानीय निकायों के साथ मिलकर चलाया जाए।
  • वृक्ष-आधारित फसलों के लिए बीमा कवरेज का विस्तार और पुनर्रोपण सहायता पर विचार किया जाए।
  • चक्रवात-पूर्व चेतावनी से लेकर समुदाय-स्तर की तैयारी तक का आपदा प्रबंधन प्रोटोकॉल अद्यतन किया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005) · राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) · राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि (SDRF) · राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) · अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (Inter-Ministerial Central Team) · सेंडाई आपदा जोखिम न्यूनीकरण ढाँचा (Sendai Framework for Disaster Risk Reduction) · आपदा लचीलापन (Disaster Resilience) · सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) · राज्यों के बीच पारस्परिक सहायता (Interstate Mutual Assistance) · भूमिगत विद्युत केबल (Underground Power Cables) · राहत से पुनर्वास तक का संक्रमण (Transition from Relief to Recovery) · वित्त आयोग और आपदा निधि (Finance Commission and Disaster Funds)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 275 — वित्त आयोग की सिफारिश पर केंद्रीय अनुदान का आधार
  • अनुच्छेद 282 — राज्य द्वारा सार्वजनिक प्रयोजन हेतु व्यय
  • सातवीं अनुसूची, राज्य सूची की प्रविष्टि 14 — कृषि; फसल क्षति सहायता

अवधारणा प्रवाह

चक्रवात का तटीय प्रभाव: विद्युत खंभे उखड़े, वृक्ष गिरे, फसलें जलमग्न हुईं  →  प्रारंभिक क्षति आकलन: ₹4,600 करोड़ का अनुमान और सात मौतें  →  तत्काल राहत: राहत शिविर, 25 किलो चावल और नकद सहायता  →  विद्युत आपूर्ति बहाली: अंतर-राज्यीय कर्मी और मशीनों की तैनाती  →  क्षति गणना के बाद क्षतिपूर्ति और आदान सहायता का निर्धारण  →  अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल का सत्यापन और केंद्रीय सहायता का निर्णय  →  दीर्घकालिक उपाय: भूमिगत केबल, जल निकासी सुधार और आपदा-रोधी अवसंरचना

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं।
2. राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि (SDRF) का गठन राज्य सरकार द्वारा किया जाता है।
3. आपदा प्रबंधन विषय संघ सूची (Union List) का एकमात्र विषय है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत NDMA के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं। कथन 2 सही है: SDRF का गठन अधिनियम की धारा 48 के अनुसार राज्य सरकार करती है और इसके लिए केंद्र अंशदान देता है। कथन 3 गलत है: आपदा प्रबंधन किसी एक सूची का एकमात्र विषय नहीं है; इसमें संघ और राज्य दोनों की भूमिका है, इसलिए यह कथन असत्य है।

Q2. निम्नलिखित दो कथनों (A और R) पर विचार कीजिए:
कथन (A): चक्रवात से भारी संपत्ति-क्षति होने के बावजूद पूर्व-तैयारी से मानव-हानि सीमित की जा सकती है।
कारण (R): समय पर पूर्व-चेतावनी और सुरक्षित निकासी (evacuation) से जीवन-हानि में उल्लेखनीय कमी आती है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
1. (A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
2. (A) और (R) दोनों सत्य हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
3. (A) सत्य है, किंतु (R) असत्य है।
4. (A) असत्य है, किंतु (R) सत्य है।

  1. (A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
  2. (A) और (R) दोनों सत्य हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
  3. (A) सत्य है, किंतु (R) असत्य है
  4. (A) असत्य है, किंतु (R) सत्य है

उत्तर: (A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — चक्रवात-प्रबंधन में पूर्व-चेतावनी, तटीय क्षेत्रों से समय पर निकासी और राहत शिविरों की व्यवस्था का सीधा संबंध जीवन-रक्षा से है। यही कारण है कि संपत्ति-क्षति बड़ी होने पर भी मानव-हानि घटाई जा सकती है। इसलिए (R) सत्य है और (A) की सही व्याख्या करता है।

Q3. निम्नलिखित सूचियों को सुमेलित कीजिए:

सूची I (संस्था/ढाँचा)
1. सेंडाई ढाँचा
2. राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल
3. राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि
4. अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल

सूची II (विशेषता)
a. क्षति का आकलन करने के लिए केंद्र द्वारा भेजा गया दल
b. 2015-2030 के लिए वैश्विक आपदा जोखिम न्यूनीकरण ढाँचा
c. आपदा प्रबंधन अधिनियम के अंतर्गत गठित विशेष बल
d. राज्य स्तर पर आपदा-राहत के लिए गठित निधि

सही सुमेलन चुनिए:

  1. 1-b, 2-c, 3-d, 4-a
  2. 1-c, 2-b, 3-a, 4-d
  3. 1-b, 2-a, 3-d, 4-c
  4. 1-d, 2-c, 3-b, 4-a

उत्तर: 1-b, 2-c, 3-d, 4-a — सेंडाई ढाँचा (2015-2030) वैश्विक आपदा जोखिम न्यूनीकरण ढाँचा है, इसलिए 1-b। NDRF का गठन आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 44 के अंतर्गत होता है, इसलिए 2-c। SDRF राज्य स्तर की निधि है (धारा 48), इसलिए 3-d। अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल क्षति-आकलन के लिए भेजे जाते हैं, इसलिए 4-a।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ चक्रवात-प्रवण तटीय राज्यों में आपदा-पश्चात प्रतिक्रिया की वर्तमान संस्थागत व्यवस्था का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या केवल राहत-केंद्रित उपाय आपदा-प्रबंधन की चुनौती का समाधान कर सकते हैं? साथ ही बताइए कि भूमिगत विद्युत केबल जैसे लचीलेपन-उन्मुख उपायों को व्यवहार्य बनाने में कौन-सी संस्थागत और वित्तीय बाधाएँ सामने आ सकती हैं। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर-संरचना (मॉडल उत्तर-कंकाल):

1. भूमिका: चक्रवात ‘अर्नब’ से आंध्र प्रदेश को अनुमानित ₹4,600 करोड़ की क्षति, सात मौतें, लगभग 8,000 विद्युत खंभे उखड़ना और राहत शिविरों में परिवारों का स्थानांतरण। इससे स्पष्ट है कि पूर्व-तैयारी से जीवन-हानि घटी, परंतु आधारभूत ढाँचे की क्षति व्यापक रही।

2. संवैधानिक एवं विधिक ढाँचा:
– आपदा प्रबंधन मूलतः राज्य का प्राथमिक दायित्व है; संघ की भूमिका सहायता, समन्वय और गंभीर आपदा की स्थिति में अनुच्छेद 355 के अंतर्गत संरक्षण के दायित्व से जुड़ी है।
– आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005: NDMA (धारा 3, प्रधानमंत्री अध्यक्ष), राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA), जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF, धारा 44), राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि (SDRF, धारा 48) और राष्ट्रीय आपदा शमन निधि (NDMF)।
– विद्युत आपूर्ति का प्रबंधन राज्य विद्युत उपयोगिताओं और राज्यों के बीच पारस्परिक सहायता पर आधारित है, जो सहकारी संघवाद का व्यावहारिक उदाहरण है।

3. अंतरराष्ट्रीय और नीतिगत आयाम:
– सेंडाई आपदा जोखिम न्यूनीकरण ढाँचा (2015-2030) का मूल संदेश है कि जोखिम-न्यूनीकरण पर निवेश, प्रतिक्रिया-आधारित उपायों से अधिक लागत-प्रभावी है।
– अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल द्वारा क्षति-आकलन और उसके आधार पर सहायता-निर्णय की प्रक्रिया।

4. वित्तीय आयाम:
– SDRF का आकार और केंद्र-राज्य अंशदान का निर्धारण वित्त आयोग की सिफ़ारिशों से होता है; राहत-मानदंड (जैसे प्रति नारियल/ताड़ वृक्ष मुआवज़ा, फसल-क्षति सहायता) प्रायः अलग-अलग कार्यकारी आदेशों से तय होते हैं।
– राहत-राशि का त्वरित वितरण बनाम गणना (enumeration) में विलंब का तनाव।

5. समालोचनात्मक विश्लेषण:
– पक्ष: त्वरित राहत, राज्यों के बीच कर्मचारी-साझेदारी और केंद्रीय दल से त्वरित आकलन संकट-प्रबंधन की क्षमता दिखाते हैं।
– विपक्ष: राहत-केंद्रितता जोखिम-न्यूनीकरण को पीछे रखती है; खंभे और वृक्ष-आधारित मुआवज़ा दीर्घकालिक लचीलापन नहीं बनाता; कमजोर तटीय समुदायों की पुनर्वास-आवश्यकता उपेक्षित रहती है।
– भूमिगत केबल: लाभ (कम क्षति, तेज़ बहाली) बनाम उच्च प्रारंभिक लागत, भूमि-जल स्तर, मरम्मत की जटिलता और राज्य वित्तीय क्षमता।
– कुंनावरम जैसे जल-निकास (drain) अवरोधों की सफाई जैसे स्थानीय प्रबंधन का महत्व: आपदा-प्रबंधन में ‘जल-प्रबंधन’ और ‘भू-उपयोग नियोजन’ को जोड़ना आवश्यक।

6. निष्कर्ष: राहत से लचीलापन (resilience) की ओर संक्रमण; सेंडाई ढाँचे की प्राथमिकताओं के अनुरूप स्थानीय शासन, जोखिम-मानचित्रण, पूर्व-चेतावनी, और वित्तीय प्रावधान को एकीकृत करने का तर्कसंगत पक्ष। अंत में संतुलित सुझाव: पूर्व-निवेश और प्रतिक्रिया-निधि दोनों के बीच संतुलन।

स्रोत: The Hindu

Andhra Pradesh PCS (APPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: चक्रवात ‘अर्नब’ के कारण आंध्र प्रदेश में अनुमानित क्षति ₹4,600 करोड़ होने का आकलन किस विभाग/एजेंसी द्वारा किया गया है?

  1. आंध्र प्रदेश आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (APDMA)
  2. कृषि विभाग, आंध्र प्रदेश सरकार
  3. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD)
  4. राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF)

उत्तर: आंध्र प्रदेश आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (APDMA) — आंध्र प्रदेश आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (APDMA) द्वारा चक्रवात ‘अर्नब’ के कारण हुई क्षति का अनुमान ₹4,600 करोड़ लगाया गया है।

Mains: चक्रवात ‘अर्नब’ के आंध्र प्रदेश पर पड़ने वाले आर्थिक एवं सामाजिक प्रभावों का विश्लेषण करते हुए, राज्य सरकार द्वारा उठाए गए राहत एवं पुनर्वास उपायों की चर्चा कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


Related guides on our sites

No Comments

Post A Comment