26 Oct ओडिशा में चक्रवात अरनब: तैयारियों का व्यापक अवलोकन और रणनीति
✎ चक्रवात की तीव्रता IMD द्वारा हवा की अधिकतम स्थायी गति से तय होती है, जबकि तटीय जनहानि का सबसे बड़ा कारण प्रायः तूफानी लहर (Storm Surge) होती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भूगोल (बंगाल की खाड़ी में चक्रवात का निर्माण, मानसूनोत्तर काल की भूमिका) | GS Paper III — आपदा प्रबंधन (प्रारंभिक चेतावनी, आपदा-पूर्व तैयारी, राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण) | GS Paper II — शासन (आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत संस्थागत ढाँचा, जिला प्रशासन की भूमिका)
- Prelims: चक्रवात की IMD वर्गीकरण श्रेणियाँ (अवदाब से सुपर चक्रवाती तूफान तक), बंगाल की खाड़ी में चक्रवात-निर्माण की परिस्थितियाँ, IMD की प्रभाव-आधारित चेतावनी के रंग-कोड: हरा, पीला, नारंगी और लाल, आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और ओडिशा आपदा त्वरित कार्य बल (ODRAF), तूफानी लहर (Storm Surge) की प्रकृति और तटीय क्षति में उसकी भूमिका, यनम: पुडुचेरी का एक भू-भाग जो आंध्र प्रदेश से घिरा है
- Essay: आपदा प्रबंधन में प्रारंभिक चेतावनी की भूमिका: जीवन-रक्षा से आजीविका-संरक्षण तक, जलवायु परिवर्तन के दौर में तटीय समुदायों की सहिष्णुता: विकास और आपदा जोखिम न्यूनीकरण का संबंध
त्वरित पुनरावृत्ति: चक्रवात की तीव्रता IMD द्वारा हवा की अधिकतम स्थायी गति से तय होती है, जबकि तटीय जनहानि का सबसे बड़ा कारण प्रायः तूफानी लहर (Storm Surge) होती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
26 अक्टूबर 2026 को ओडिशा सरकार ने चक्रवात ‘अर्णब’ की संभावित प्रगति को देखते हुए कई जिलों में उच्च सतर्कता घोषित की और तैयारी बढ़ाई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार यह तंत्र बंगाल की खाड़ी के मध्य-पूर्वी और मध्य-पश्चिमी भाग में था तथा गोपालपुर (ओडिशा) से लगभग 580 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में केंद्रित था। इसके गंभीर से अति गंभीर चक्रवाती तूफान में तीव्र होने और 28 अक्टूबर के पूर्वाह्न में बापटला और विशाखापत्तनम के बीच, यनम के निकट, आंध्र प्रदेश के तट को पार करने का अनुमान है। भूस्पर्श के समय हवा की अधिकतम स्थायी गति 115-125 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंके 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक होने की संभावना है। ओडिशा में पुरी, गजपति, गंजाम, रायगढ़ा, कोरापुट और मलकानगिरि के लिए नारंगी चेतावनी तथा 16 जिलों के लिए पीली चेतावनी जारी हुई है। राज्य सरकार ने दोनों उप-मुख्यमंत्रियों, छह मंत्रियों और पाँच वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों को संवेदनशील जिलों में भेजा है, ताकि राहत, पुनर्वास और पुनर्स्थापन कार्यों का सुचारु प्रबंधन सुनिश्चित हो।
पृष्ठभूमि
- बंगाल की खाड़ी उत्तर हिंद महासागर का भाग है। मानसून की वापसी के बाद का अक्टूबर से दिसंबर का काल यहाँ चक्रवात-निर्माण का दूसरा प्रमुख समय माना जाता है, जबकि मई-जून में भी चक्रवात बनते हैं।
- ओडिशा का लंबा और निम्न-भूमि वाला तटीय क्षेत्र चक्रवातों और तूफानी लहरों के प्रति संवेदनशील है। वर्ष 1999 के सुपर चक्रवात में राज्य को भारी जनहानि हुई थी, जिसके बाद चक्रवात-आश्रय स्थलों और आपदा प्रबंधन ढाँचे को सुदृढ़ करने पर ज़ोर दिया गया।
- वर्ष 2013 के फेलिन चक्रवात के समय समय पर निकासी (evacuation) और चेतावनी-प्रसार से जनहानि अपेक्षाकृत सीमित रही। इस अनुभव को भारत में प्रारंभिक चेतावनी और सामुदायिक निकासी के उदाहरण के रूप में पढ़ा जाता है।
- आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत आपदा प्रबंधन का त्रिस्तरीय ढाँचा बना: राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर। राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष होते हैं।
- भारत सेंडाई आपदा जोखिम न्यूनीकरण ढाँचा (2015-2030) का हस्ताक्षरकर्ता है, जो आपदा जोखिम को समझने, उसके प्रबंधन और पूर्व-तैयारी को प्राथमिकता देता है।
चक्रवात क्या है?
- चक्रवात निम्न वायुदाब वाला एक घूर्णी तंत्र है, जो लगभग 26-27 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाली उष्ण समुद्री सतह पर बनता है। पृथ्वी के घूर्णन से उत्पन्न कोरिओलिस बल इसे घुमाव देता है।
- IMD की श्रेणियाँ हवा की अधिकतम स्थायी गति पर आधारित हैं: अवदाब (31-49 किमी/घंटा), गहरा अवदाब (50-61 किमी/घंटा), चक्रवाती तूफान (62-88 किमी/घंटा), गंभीर चक्रवाती तूफान (89-117 किमी/घंटा), अति गंभीर चक्रवाती तूफान (118-165 किमी/घंटा), अति भीषण चक्रवाती तूफान (166-220 किमी/घंटा) और सुपर चक्रवाती तूफान (220 किमी/घंटा से अधिक)।
- IMD प्रभाव-आधारित चेतावनी के चार रंग प्रयोग करता है: हरा (कोई चेतावनी नहीं), पीला (सतर्क रहें), नारंगी (तैयार रहें) और लाल (कार्रवाई करें)। नारंगी और लाल चेतावनी प्रायः निकासी और प्रशासनिक तैयारी से जुड़ी होती है।
- चक्रवात से होने वाली तटीय जनहानि का सबसे बड़ा कारण प्रायः तूफानी लहर (Storm Surge) होती है, यानी समुद्र के जल का असामान्य उभार जो भूस्पर्श के समय तटीय क्षेत्र में भर जाता है। इसलिए केवल हवा की गति से जोखिम का आकलन पर्याप्त नहीं है।
- भूस्पर्श के बाद चक्रवात के स्थलीय भाग से भारी वर्षा और बाढ़ आती है, जो अंतर्देशीय जिलों तक असर डाल सकती है। इसी कारण ओडिशा के कई गैर-तटीय जिलों में भी चेतावनी जारी होती है।
- आपदा प्रबंधन में राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) नीति और दिशानिर्देश देता है, जबकि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) विशेषज्ञ बचाव-दल की भूमिका निभाता है। ओडिशा आपदा त्वरित कार्य बल (ODRAF) राज्य का अपना विशेषज्ञ बल है।
- जिला स्तर पर जिला कलेक्टर आपदा प्रबंधन का नेतृत्व करते हैं। निकासी, आश्रय-स्थल, राहत-सामग्री और संचार का समन्वय यहीं से होता है, इसलिए वरिष्ठ अधिकारियों की जिला-स्तरीय तैनाती शासन की एक सामान्य व्यावहारिक प्रक्रिया है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| चक्रवात की स्थिति | बंगाल की खाड़ी के मध्य-पूर्वी और उससे लगे पश्चिम-मध्य भाग के ऊपर; ओडिशा के गोपालपुर से लगभग 580 किमी दक्षिण-पूर्व में केंद्रित |
| अनुमानित स्थल-मार्ग (Landfall) | 28 अक्टूबर के पूर्वाह्न में आंध्र प्रदेश-यनम तट पर, बापटला और विशाखापत्तनम के बीच |
| पवन गति | भूस्पर्श के समय 115-125 किमी प्रति घंटा, झोंके 140 किमी प्रति घंटा तक |
| तीव्रता का क्रम | गंभीर चक्रवाती तूफान से अति गंभीर चक्रवाती तूफान तक तीव्र होने का पूर्वानुमान |
| चेतावनी स्तर | पुरी, गजपति, गंजाम, रायगडा, कोरापुट और मलकानगिरि में नारंगी चेतावनी; बालेश्वर, भद्रक, जाजपुर, कटक, खोरधा सहित कई जिलों में पीली चेतावनी |
| प्रशासनिक तैयारी | दो उप मुख्यमंत्री, छह मंत्री और पाँच वरिष्ठ IAS अधिकारी संवेदनशील जिलों में तैनात; जिला प्रशासन को पर्याप्त व्यवस्था का निर्देश |
महत्व
आपदा प्रबंधन और प्रशासन
- राज्य स्तर पर मंत्रियों और वरिष्ठ IAS अधिकारियों की जिला-स्तरीय तैनाती से निर्णय-प्रक्रिया विकेंद्रीकृत होती है और निगरानी सीधे ज़मीन पर होती है।
- आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005) के तहत राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर के प्राधिकरणों का ढाँचा राहत, पुनर्वास और पुनर्स्थापन के चरणों को एक क्रम में रखता है।
- तैनाती का उद्देश्य केवल पूर्व-तैयारी नहीं, बल्कि भूस्पर्श के बाद की राहत और पुनर्स्थापन प्रक्रिया का समन्वय भी है।
मौसम विज्ञान और पूर्व चेतावनी
- भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department — IMD) द्वारा चक्रवात की स्थिति, तीव्रता और पवन गति का पूर्वानुमान जारी किया गया है।
- नारंगी और पीली चेतावनी का रंग-आधारित वर्गीकरण जिलों को जोखिम के स्तर के अनुसार प्राथमिकता देने में सहायक होता है।
- समुद्र में चक्रवात की ट्रैकिंग से समय पर निकासी और मछुआरों के लिए समुद्र-यात्रा पर रोक जैसे निर्णय संभव होते हैं।
कृषि और अर्थव्यवस्था
- अक्टूबर का महीना ओडिशा में खरीफ धान की कटाई का समय है; तेज हवा और वर्षा से फसल को गंभीर नुकसान हो सकता है।
- तटीय जिलों में मछली पकड़ने और उससे जुड़ी आजीविका पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
- आपदा के बाद बुनियादी ढाँचे की मरम्मत में सार्वजनिक व्यय बढ़ता है, जिससे राज्य के राजकोषीय संसाधनों पर दबाव आता है।
अंतर-राज्यीय आयाम
- चक्रवात का भूस्पर्श आंध्र प्रदेश के यनम क्षेत्र में होने का अनुमान है, जबकि प्रभाव ओडिशा के दक्षिणी और मध्य जिलों तक फैल सकता है।
- ऐसी स्थिति में दोनों राज्यों के बीच सूचना-साझाकरण और समन्वय आवश्यक हो जाता है।
चुनौतियाँ
1. पथ और तीव्रता का अनिश्चित पूर्वानुमान
- चक्रवात के पथ में थोड़ा परिवर्तन भी भूस्पर्श के स्थान और प्रभावित क्षेत्र को बदल सकता है।
- अति गंभीर चक्रवाती तूफान की तीव्रता का अनुमान अंतिम समय तक बदल सकता है, जिससे तैयारी का समय सीमित हो जाता है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: आपदा प्रबंधन; मौसम पूर्वानुमान की भूमिका
2. तटीय जनसंख्या की निकासी और आश्रय
- संवेदनशील तटीय गाँवों से समय पर निकासी के लिए परिवहन, संचार और सुरक्षित आश्रय स्थलों की व्यवस्था आवश्यक है।
- बुजुर्ग, दिव्यांग और बच्चों जैसे अधिक संवेदनशील समूहों की विशेष देखभाल एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: GS-1: भेद्यता और जोखिम; GS-2: सामाजिक क्षेत्र में सेवाएँ
3. वर्षा, जल-भराव और पहाड़ी क्षेत्रों का जोखिम
- ओडिशा में 31 अक्टूबर तक हल्की से मध्यम वर्षा और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा का अनुमान है।
- कोरापुट और मलकानगिरि जैसे पहाड़ी और वनीय जिलों में अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है।
यूपीएससी लिंक: GS-1: भौगोलिक विशेषताएँ और आपदाएँ; GS-3: पर्यावरण
4. अंतर-राज्यीय समन्वय
- भूस्पर्श आंध्र प्रदेश में होने के कारण दोनों राज्यों की एजेंसियों के बीच रियल-टाइम सूचना का आदान-प्रदान आवश्यक है।
- केंद्र और राज्यों की एजेंसियों के बीच भूमिकाओं का स्पष्ट बँटवारा न हो तो राहत कार्यों में दोहराव या देरी हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: केंद्र-राज्य संबंध और सहकारी संघवाद
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| पूर्वानुमान की अनिश्चितता | पथ और तीव्रता में बदलाव से तैयारी का समय और स्थान दोनों बदल सकते हैं। |
| तटीय निकासी | सुरक्षित आश्रय, परिवहन और संचार की कमी से जानमाल का नुकसान बढ़ सकता है। |
| भारी वर्षा और भूस्खलन | पहाड़ी जिलों में अचानक बाढ़ और भूस्खलन से सड़कें और संपर्क बाधित हो सकते हैं। |
| फसल और आजीविका | धान की कटाई के समय तेज हवा और वर्षा से किसानों और मछुआरों की आय प्रभावित होती है। |
| अंतर-राज्यीय समन्वय | भूस्पर्श एक राज्य में और प्रभाव दूसरे राज्य में होने से सूचना और संसाधनों का समन्वय कठिन हो सकता है। |
आगे की राह
- जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को निकासी योजना, आश्रय स्थलों और संचार व्यवस्था की जाँच के लिए स्पष्ट समय-सीमा दी जाए।
- IMD के पूर्वानुमान को स्थानीय स्तर पर सरल भाषा और स्थानीय भाषाओं में पहुँचाने की व्यवस्था की जाए, ताकि ग्रामीण समुदाय समय पर कार्रवाई कर सकें।
- आंध्र प्रदेश और ओडिशा के बीच सूचना-साझाकरण और संयुक्त समन्वय तंत्र को सक्रिय रखा जाए।
- संवेदनशील समूहों (बुजुर्ग, दिव्यांग, बच्चे) की पहचान कर उनकी निकासी को प्राथमिकता दी जाए।
- पहाड़ी जिलों में भूस्खलन और अचानक बाढ़ की निगरानी के लिए स्थानीय स्तर के जोखिम मानचित्र अद्यतन किए जाएँ।
- भूस्पर्श के बाद राहत, पुनर्वास और पुनर्स्थापन के चरणों के लिए पहले से प्रोटोकॉल तैयार रखा जाए।
- फसल हानि के आकलन और बीमा दावों की प्रक्रिया को शीघ्र शुरू करने की व्यवस्था की जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
चक्रवात प्रबंधन · आपदा जोखिम न्यूनीकरण · राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण · भारत मौसम विज्ञान विभाग · तटीय भेद्यता · पूर्व चेतावनी प्रणाली · राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल · समुदाय-आधारित आपदा तैयारी · पुनर्वास और बहाली · जलवायु परिवर्तन के प्रभाव
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 162: राज्य कार्यपालिका द्वारा प्रशासनिक तैनाती और निर्देश
- अनुच्छेद 21: जीवन रक्षा और निकासी का संवैधानिक आधार
अवधारणा प्रवाह
बंगाल की खाड़ी में गर्म समुद्री सतह और अनुकूल वायुमंडलीय दशाओं में निम्न दाब क्षेत्र का चक्रवात में संघनन → चक्रवात का पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ना और गंभीर से अति गंभीर चक्रवाती तूफान में तीव्र होना → IMD द्वारा पूर्वानुमान जारी और जिलों के लिए रंग-आधारित (नारंगी व पीली) चेतावनी घोषित → राज्य सरकार द्वारा दो उप मुख्यमंत्रियों, छह मंत्रियों और पाँच वरिष्ठ IAS अधिकारियों की संवेदनशील जिलों में तैनाती → 28 अक्टूबर के पूर्वाह्न में आंध्र प्रदेश-यनम तट पर भूस्पर्श और ओडिशा में वर्षा व तेज हवा का प्रभाव → भूस्पर्श के बाद पवन गति में क्रमशः कमी और राहत, पुनर्वास तथा पुनर्स्थापन कार्यों का आरंभ
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
2. उष्णकटिबंधीय चक्रवात केवल समुद्र के ऊपर बनते हैं और कभी भी भूमध्य रेखा पर नहीं बनते।
3. चक्रवातों के नामकरण की प्रक्रिया विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) द्वारा क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम विज्ञान केंद्रों (RSMCs) के सहयोग से की जाती है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। IMD पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत एक एजेंसी है। कथन 2 गलत है। उष्णकटिबंधीय चक्रवात भूमध्य रेखा के 5 डिग्री अक्षांश के भीतर नहीं बनते हैं क्योंकि कोरिओलिस बल इस क्षेत्र में बहुत कमजोर होता है। कथन 3 सही है। WMO और क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम विज्ञान केंद्र (RSMCs) चक्रवातों के नामकरण में सहयोग करते हैं, जिसमें भारत के लिए IMD भी शामिल है।
Q2. चक्रवात ‘अरनब’ के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सबसे सटीक रूप से ‘ऑरेंज अलर्ट’ का वर्णन करता है, जैसा कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी किया जाता है?
- यह संकेत देता है कि गंभीर मौसम की स्थिति की संभावना नहीं है और सामान्य सावधानी बरतनी चाहिए।
- यह अधिकारियों को ‘तैयार रहने’ के लिए सचेत करता है, जिसका अर्थ है कि मौसम की स्थिति बिगड़ सकती है और संभावित रूप से जीवन और संपत्ति को प्रभावित कर सकती है।
- यह ‘कार्रवाई करने’ का संकेत देता है, जिसका अर्थ है कि बहुत गंभीर मौसम की स्थिति की उम्मीद है और तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है।
- यह संकेत देता है कि बहुत गंभीर मौसम की स्थिति पहले से ही मौजूद है और व्यापक नुकसान हो रहा है।
उत्तर: यह अधिकारियों को ‘तैयार रहने’ के लिए सचेत करता है, जिसका अर्थ है कि मौसम की स्थिति बिगड़ सकती है और संभावित रूप से जीवन और संपत्ति को प्रभावित कर सकती है। — IMD द्वारा जारी ‘ऑरेंज अलर्ट’ का अर्थ है ‘तैयार रहें’। यह अधिकारियों और जनता को संभावित रूप से गंभीर मौसम की स्थिति के लिए तैयार रहने की चेतावनी देता है जो जीवन और संपत्ति को प्रभावित कर सकती है। ‘येलो अलर्ट’ का अर्थ है ‘देखते रहें’, जबकि ‘रेड अलर्ट’ का अर्थ है ‘कार्रवाई करें’।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रभावी प्रबंधन में पूर्व चेतावनी प्रणालियों और समुदाय-आधारित तैयारियों की भूमिका का परीक्षण कीजिए। इस संबंध में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा किए गए प्रयासों पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते खतरे और प्रभावी प्रबंधन की आवश्यकता पर संक्षिप्त परिचय दें।
2. **पूर्व चेतावनी प्रणालियों की भूमिका:**
* भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की भूमिका: उपग्रह इमेजरी, रडार नेटवर्क, मौसम मॉडल, बुलेटिन जारी करना (येलो, ऑरेंज, रेड अलर्ट)।
* तकनीकी प्रगति: डॉप्लर रडार, उच्च-रिज़ॉल्यूशन उपग्रह डेटा, सुपरकंप्यूटिंग।
* संचार तंत्र: SMS अलर्ट, रेडियो, टेलीविजन, सोशल मीडिया, स्थानीय प्रशासन के माध्यम से अंतिम-मील कनेक्टिविटी।
* जीवन और संपत्ति के नुकसान को कम करने में प्रभावशीलता।
3. **समुदाय-आधारित तैयारियों की भूमिका:**
* स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाना: जागरूकता कार्यक्रम, मॉक ड्रिल, क्षमता निर्माण।
* स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण: आपदा मित्र, नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवक।
* स्थानीय ज्ञान और संसाधनों का उपयोग।
* निकासी योजनाओं में भागीदारी, आश्रयों का प्रबंधन।
* आपदा के बाद त्वरित प्रतिक्रिया और पुनर्वास में योगदान।
4. **राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के प्रयास:**
* **स्थापना और जनादेश:** आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत।
* **नीति निर्माण:** राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (NDMP) 2016, सेंडाई फ्रेमवर्क के अनुरूप।
* **क्षमता निर्माण:** राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) का प्रशिक्षण और तैनाती।
* **जागरूकता अभियान:** ‘आपदा मित्र’ जैसी योजनाएं।
* **तकनीकी उन्नयन:** IMD और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय।
* **राज्य सरकारों के साथ समन्वय:** ओडिशा जैसे राज्यों के सफल मॉडल का उल्लेख।
5. **चुनौतियाँ और आगे का रास्ता:**
* अंतिम-मील तक चेतावनी पहुंचाने में चुनौतियाँ।
* समुदाय की भागीदारी में निरंतरता।
* जलवायु परिवर्तन के कारण आपदाओं की बढ़ती आवृत्ति और तीव्रता।
* अंतर-एजेंसी समन्वय को मजबूत करना।
6. **निष्कर्ष:** एक समग्र और एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दें जो प्रौद्योगिकी, संस्थागत ढांचे और समुदाय की सक्रिय भागीदारी को जोड़ता हो।
स्रोत: orissapost.com
Odisha PCS (OPSC (OAS)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: ओडिशा में ‘चक्रवात अरनब’ से निपटने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों में निम्नलिखित में से कौन सा शामिल नहीं है?
- आपदा प्रबंधन अधिकारियों की विशेष बैठक आयोजित करना
- मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को विभिन्न प्रभावित क्षेत्रों में तैनात करना
- राज्य के सभी तटीय क्षेत्रों में पूर्ण निकासी आदेश जारी करना
- एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ टीमों को तैयार रखना
उत्तर: राज्य के सभी तटीय क्षेत्रों में पूर्ण निकासी आदेश जारी करना — राज्य सरकार द्वारा पूर्ण निकासी आदेश जारी नहीं किया गया है, बल्कि केवल उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में निकासी प्रक्रिया को तेज किया गया है।
Mains: चक्रवात अरनब के मद्देनजर ओडिशा सरकार द्वारा अपनाई गई आपदा प्रबंधन रणनीति की व्याख्या करते हुए, राज्य में चक्रवात तैयारी एवं प्रतिक्रिया तंत्र की प्रभावशीलता का मूल्यांकन कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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