02 Nov दिल्ली में वायु गुणवत्ता बिगड़ी: GRAP-II लागू, जानें प्रभाव
✎ GRAP एक चरणबद्ध, AQI-आधारित आपातकालीन कार्ययोजना है, जिसका प्रवर्तन वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) करता है; चरण-II ('बहुत खराब', AQI 301-400) में धूल नियंत्रण और सार्वजनिक परिवहन पर बल दिया जाता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण, पारिस्थितिकी और आपदा प्रबंधन (वायु प्रदूषण नियंत्रण, वायु गुणवत्ता सूचकांक, GRAP) | GS Paper II — शासन (वैधानिक निकाय: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग; केंद्र-राज्य समन्वय; अंतर-राज्य समन्वय) | GS Paper II — संविधान और न्यायपालिका (अनुच्छेद 21 और पर्यावरण; सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की भूमिका)
- Prelims: GRAP (Graded Response Action Plan) — वायु गुणवत्ता में गिरावट के आधार पर चरणबद्ध कार्रवाई योजना, CAQM (Commission for Air Quality Management) — वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग, 2021 के अधिनियम के तहत गठित, वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) की श्रेणियाँ — ‘बहुत खराब’ (301-400) और ‘गंभीर’ (401-500), PM2.5 और PM10 — कण पदार्थ (Particulate Matter) के दो प्रमुख आकार और उनके स्रोत, BS-VI उत्सर्जन मानक — भारत स्टेज (Bharat Stage) मानकों का नवीनतम चरण, वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, अनुच्छेद 48A (राज्य का पर्यावरण संरक्षण का कर्तव्य) और अनुच्छेद 51A(छ)/(ज) — मूल कर्तव्य, EPCA (Environment Pollution Prevention and Control Authority) — GRAP के मूल ढांचे से जुड़ी पूर्ववर्ती संस्था
- Essay: वायु प्रदूषण: विकास, परिवहन और जीवन-अधिकार के बीच संतुलन की चुनौती, आपातकालीन उपाय बनाम दीर्घकालिक समाधान: क्या चरणबद्ध कार्रवाई योजनाएँ प्रदूषण की जड़ तक पहुँच पाती हैं?
त्वरित पुनरावृत्ति: GRAP एक चरणबद्ध, AQI-आधारित आपातकालीन कार्ययोजना है, जिसका प्रवर्तन वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) करता है; चरण-II (‘बहुत खराब’, AQI 301-400) में धूल नियंत्रण और सार्वजनिक परिवहन पर बल दिया जाता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
नई दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 31 अक्टूबर को 117 से बढ़कर 1 नवंबर को 261 और फिर सोमवार को 324 तक पहुँच गया, जिसके बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का चरण-II तत्काल प्रभाव से लागू करने का आदेश जारी किया। वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुँचने के कारण यह कदम उठाया गया। चरण-II के अंतर्गत धूल प्रदूषण पर अंकुश लगाने के उपायों को तेज़ करना, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना और पार्किंग शुल्क में वृद्धि जैसे कदम शामिल हैं। समाचार में प्रतिबंधों के चलते सीमाओं पर यातायात जाम और वाहनों को लौटाए जाने की घटनाओं का भी उल्लेख है, जो इस योजना के प्रवर्तन की व्यावहारिक चुनौतियों को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
- GRAP की शुरुआत 2017 में पर्यावरण प्रदूषण निवारण और नियंत्रण प्राधिकरण (EPCA) की सिफारिशों के आधार पर हुई थी, ताकि वायु गुणवत्ता बिगड़ने पर पूर्व-निर्धारित और चरणबद्ध कदम उठाए जा सकें।
- CAQM की स्थापना वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के अंतर्गत हुई, जिसका कार्यक्षेत्र दिल्ली-एनसीआर और उससे लगे क्षेत्र हैं। इसे राज्य सरकारों को निर्देश देने की शक्ति प्राप्त है, और GRAP के चरणों का प्रवर्तन इसी के आदेशों से होता है।
- वायु गुणवत्ता की श्रेणियाँ AQI पर आधारित हैं, और GRAP के चरण इन्हीं श्रेणियों से जुड़े हैं। ‘खराब’ श्रेणी में चरण-I, ‘बहुत खराब’ में चरण-II, ‘गंभीर’ में चरण-III और उससे अधिक गंभीर स्थिति में चरण-IV लागू होता है।
- सर्वोच्च न्यायालय ने एम.सी. मेहता वाद सहित कई मामलों में दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर निगरानी रखी है और प्रदूषण नियंत्रण के लिए समयबद्ध कदमों पर बल दिया है।
- वाहन उत्सर्जन मानकों में BS-VI का लागू होना और अपशिष्ट दहन, निर्माण-धूल तथा पराली जलाने जैसे मौसमी स्रोतों का नियंत्रण, दिल्ली-एनसीआर की वायु नीति के प्रमुख आयाम हैं।
GRAP क्या है?
- ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) वायु गुणवत्ता सूचकांक के स्तर के अनुसार चार चरणों में बँटी एक आपातकालीन कार्ययोजना है, जिसका उद्देश्य प्रदूषण बढ़ने पर त्वरित और क्रमिक प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है।
- चरण-I और चरण-II मुख्यतः धूल नियंत्रण, निर्माण-कार्य पर रोक, सड़कों की सफाई, पार्किंग शुल्क में वृद्धि और सार्वजनिक परिवहन के प्रोत्साहन जैसे उपायों पर केंद्रित होते हैं।
- चरण-III में निर्माण-कार्यों पर अधिक सख्त प्रतिबंध और कुछ वाहनों पर रोक जैसे कदम शामिल होते हैं, जबकि चरण-IV सबसे गंभीर स्थिति में लागू होता है।
- प्रवर्तन का अधिकार CAQM के पास है, और वह संबंधित राज्यों तथा एजेंसियों को निर्देश जारी करता है; इस प्रकार यह एक बहु-राज्यीय समन्वय का उदाहरण है।
- GRAP का आधार वायु गुणवत्ता सूचकांक है, इसलिए इसकी सफलता सटीक निगरानी, समय पर पूर्वानुमान और सार्वजनिक सूचना पर निर्भर करती है।
- यह योजना मूलतः आपातकालीन उपाय है; इसे दीर्घकालिक स्रोत-नियंत्रण नीतियों (जैसे उत्सर्जन मानक, स्वच्छ ईंधन और सार्वजनिक परिवहन विस्तार) का पूरक माना जाता है, विकल्प नहीं।
- संवैधानिक दृष्टि से स्वच्छ वायु को अनुच्छेद 21 में जीवन के अधिकार का हिस्सा माना गया है, और अनुच्छेद 48A राज्य पर पर्यावरण संरक्षण का दायित्व डालता है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| कार्यवाही का आधार | वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में तेज़ वृद्धि के आधार पर ग्रैप (Graded Response Action Plan – GRAP) का चरण-II लागू किया गया, जिससे प्रदूषण-नियंत्रण उपाय वायु गुणवत्ता की गंभीरता के अनुपात में बढ़ते हैं। |
| AQI का रुझान | AQI 31 अक्टूबर को 117 से बढ़कर 1 नवंबर को 261 और फिर 324 हो गया; यह ‘अति खराब’ श्रेणी का संकेत है। यह क्रमिक वृद्धि दर्शाती है कि केवल मौसमी कारण पर्याप्त नहीं, बल्कि स्रोत-आधारित नियंत्रण भी आवश्यक है। |
| आदेश जारी करने वाली संस्था | वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management – CAQM) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (National Capital Region – NCR) के लिए आदेश दिया। यह आयोग वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के अंतर्गत गठित बहु-राज्यीय निकाय है। |
| प्रमुख उपाय | धूल प्रदूषण पर अंकुश लगाना, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना और पार्किंग शुल्क में वृद्धि करना, जो वाहन-आधारित और निर्माण-आधारित दोनों स्रोतों को लक्षित करते हैं। |
| मौसमी कारक | ‘प्रतिकूल मौसम परिस्थितियाँ’ का उल्लेख बताता है कि कम हवा की गति और तापमान प्रतिलोमन (Temperature Inversion) से प्रदूषक वायुमंडल में फँसे रहते हैं, जिससे स्थानीय उत्सर्जन का प्रभाव बढ़ जाता है। |
| अंतर-राज्यीय पहलू | क्षेत्र-व्यापी आदेश होने के कारण दिल्ली और पड़ोसी राज्यों के बीच समन्वित कार्यवाही आवश्यक हो जाती है। सीमा-बिंदुओं पर जाँच से यातायात में बाधा भी इसी समन्वय की चुनौती को दर्शाती है। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- वायु प्रदूषण को मौसमी आपात स्थिति मानकर त्वरित और स्तरीकृत प्रतिक्रिया देना सार्वजनिक स्वास्थ्य संरक्षण का व्यावहारिक तरीका है।
- धूल नियंत्रण और सार्वजनिक परिवहन पर बल से PM10 और PM2.5 जैसे कणीय प्रदूषकों में कमी की संभावना बनती है।
प्रशासनिक और संस्थागत महत्व
- वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की भूमिका से यह स्पष्ट होता है कि बहु-राज्यीय क्षेत्र में एकीकृत नीति-निर्देशन संभव है।
- क्रमबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना का चरण-आधारित ढाँचा प्रशासन को पूर्व-निर्धारित नियमों के अनुसार कार्य करने में सक्षम बनाता है।
सामाजिक और आर्थिक महत्व
- सार्वजनिक परिवहन और पार्किंग शुल्क जैसे उपाय निजी वाहन-उपयोग के व्यवहार में परिवर्तन लाने का प्रयास हैं, जिसका प्रभाव शहरी गतिशीलता पर पड़ता है।
- प्रदूषण-जनित रोगों का बोझ कम होने से स्वास्थ्य-व्यय और उत्पादकता-हानि में राहत मिल सकती है।
चुनौतियाँ
1. स्रोत-आधारित नियंत्रण की सीमाएँ
- GRAP मुख्य रूप से आपातकालीन उपायों पर केंद्रित है, जबकि वायु प्रदूषण के दीर्घकालिक स्रोत जैसे औद्योगिक उत्सर्जन, कचरा दहन और निर्माण धूल पर स्थायी नियंत्रण आवश्यक है।
- AQI बढ़ने के बाद लागू होने वाले उपाय प्रदूषण को रोकने के बजाय उसकी तीव्रता कम करने तक सीमित रहते हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-III: पर्यावरण संरक्षण; प्रदूषण नियंत्रण
2. राज्यों के बीच समन्वय
- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे कई राज्य आते हैं, और प्रत्येक की प्रवर्तन क्षमता भिन्न है।
- सीमा-बिंदुओं पर जाँच से यातायात बाधित होता है, जिससे नीति की प्रभावशीलता और जन-सुविधा के बीच संतुलन की समस्या उठती है।
यूपीएससी लिंक: GS-II: संघवाद; केंद्र-राज्य समन्वय; अंतर-राज्यीय परिषद
3. मौसमी और भौगोलिक बाधाएँ
- शीत ऋतु में हवा की धीमी गति और तापमान प्रतिलोमन के कारण प्रदूषक ज़मीन के पास जमा रहते हैं।
- भौगोलिक दृष्टि से इंडो-गंगा मैदान की स्थलाकृति और पराली दहन जैसी मौसमी गतिविधियाँ स्थिति को और जटिल बनाती हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-I: भारत का भूगोल; मानसून और मौसम-तंत्र; GS-III: पर्यावरण
4. जन-सुविधा और आर्थिक प्रभाव
- पार्किंग शुल्क और परिवहन-प्रतिबंध दैनिक यात्रियों, छोटे व्यवसायों और परिवहन-क्षेत्र पर अतिरिक्त भार डाल सकते हैं।
- सार्वजनिक परिवहन की क्षमता और पहुँच सीमित हो तो नागरिकों के पास निजी वाहन के अतिरिक्त विकल्प कम रहते हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-II: शासन में नागरिक-केंद्रितता; GS-III: शहरी आधारभूत संरचना
5. प्रवर्तन और अनुपालन
- प्रतिबंधों का प्रभावी क्रियान्वयन स्थानीय प्रशासन, परिवहन और प्रदूषण नियंत्रण संस्थाओं की क्षमता पर निर्भर करता है।
- नियमों की जानकारी और अनुपालन के बीच अंतर बने रहने से नीति का अपेक्षित परिणाम कम मिलता है।
यूपीएससी लिंक: GS-II: सुशासन; प्रशासनिक सुधार; लोक नीति का क्रियान्वयन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| आपातकालीन बनाम दीर्घकालिक उपाय | GRAP के उपाय तात्कालिक हैं; स्थायी समाधान के लिए उत्सर्जन-स्रोतों का वैज्ञानिक मानचित्रण और दीर्घकालिक नीति आवश्यक है। |
| बहु-राज्यीय समन्वय | राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विभिन्न राज्यों में नियमों का एकरूप क्रियान्वयन चुनौतीपूर्ण है। |
| सार्वजनिक परिवहन की पर्याप्तता | परिवहन विकल्प सीमित होने पर पार्किंग शुल्क और प्रतिबंध नागरिकों पर असमान बोझ डाल सकते हैं। |
| मौसम-आधारित अनिश्चितता | प्रतिकूल मौसम में प्रदूषण का स्तर उपायों के प्रभाव को सीमित कर देता है, जिससे नीति की प्रभावशीलता का मूल्यांकन कठिन होता है। |
| धूल और निर्माण गतिविधि | धूल प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए निर्माण-स्थलों और सड़कों की निगरानी व्यवहार में चुनौतीपूर्ण है। |
| प्रवर्तन क्षमता | निगरानी, दंड और जन-जागरूकता के बीच तालमेल न होने से नियमों का अनुपालन असमान रहता है। |
आगे की राह
- स्रोत-वार उत्सर्जन सूची (Source Apportionment) को नियमित रूप से अद्यतन कर उसी आधार पर स्थायी नियंत्रण उपाय तय किए जाएँ।
- सार्वजनिक परिवहन की क्षमता, आवृत्ति और पहुँच बढ़ाई जाए, ताकि पार्किंग शुल्क जैसे उपाय नागरिकों पर अनुचित भार न डालें।
- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के राज्यों के बीच प्रवर्तन-मानकों और सूचना-साझाकरण की एकीकृत प्रणाली विकसित की जाए।
- निर्माण-स्थलों और सड़क-धूल पर वास्तविक-समय निगरानी और दंड-व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए।
- वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देशों के अनुपालन की स्थिति का सार्वजनिक प्रतिवेदन नियमित रूप से जारी हो।
- सरकारी और निजी वाहनों के लिए स्वच्छ ईंधन और विद्युत गतिशीलता को प्रोत्साहन देने की नीति को समेकित रूप से लागू किया जाए।
- प्रदूषण-आपातकाल में नागरिकों को समय पर सूचना, स्वास्थ्य-सलाह और वैकल्पिक परिवहन-मार्गों की जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (Graded Response Action Plan – GRAP) · वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management – CAQM) · वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index – AQI) · सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) · अनुच्छेद 21 और स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार · अनुच्छेद 48A (राज्य का पर्यावरण संरक्षण का कर्तव्य) · अनुच्छेद 51A(छ) (मौलिक कर्तव्य) · सावधानी का सिद्धांत (Precautionary Principle) · प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle) · सार्वजनिक परिवहन और धूल प्रदूषण नियंत्रण · राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme – NCAP) · न्यायिक सक्रियता और एम.सी. मेहता मामला (M.C. Mehta Case)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21: स्वच्छ पर्यावरण में जीवन का अधिकार (न्यायिक व्याख्या)
- अनुच्छेद 48A: राज्य का पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन का दायित्व
- अनुच्छेद 51A(g): नागरिकों का पर्यावरण-संरक्षण का मूल कर्तव्य
अवधारणा प्रवाह
शीत ऋतु में हवा की धीमी गति, तापमान प्रतिलोमन और स्थानीय उत्सर्जन से प्रदूषकों का जमाव → वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में तेज़ वृद्धि (117 से 324 तक) → वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा ‘अति खराब’ श्रेणी के आधार पर GRAP चरण-II लागू करने का आदेश → धूल नियंत्रण, सार्वजनिक परिवहन प्रोत्साहन और पार्किंग शुल्क वृद्धि जैसे उपायों का क्रियान्वयन → यातायात-नियंत्रण और सीमा-जाँच से नागरिक-सुविधा पर अस्थायी प्रभाव → वायु गुणवत्ता में सुधार की निगरानी और स्थिति के अनुसार अगले चरण का निर्णय
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और उससे सटे क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता के प्रबंधन हेतु संसद द्वारा पारित अधिनियम, 2021 के अंतर्गत गठित किया गया है।
2. ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान के अंतर्गत चरण-II उस स्थिति में लागू होता है जब वायु गुणवत्ता सूचकांक ‘बहुत खराब’ श्रेणी (301-400) में हो।
3. चरण-II के उपाय तभी लागू होते हैं जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 500 से अधिक हो जाए।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: आयोग का गठन वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्र) अधिनियम, 2021 के अंतर्गत हुआ। कथन 2 सही है: संशोधित ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान में चरण-II ‘बहुत खराब’ (301-400) श्रेणी से जुड़ा है। कथन 3 गलत है, क्योंकि 500 से ऊपर की स्थिति गंभीर-प्लस (चरण-IV) से संबंधित है।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
कथन (A): दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कई राज्यों और एजेंसियों के बीच समन्वित कार्रवाई आवश्यक है।
कारण (R): वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को एनसीआर के राज्य सरकारों और संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश जारी करने की शक्तियाँ प्राप्त हैं।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — वायु प्रदूषण एक अंतर्राज्यीय समस्या है, इसलिए एनसीआर में समन्वित कार्रवाई आवश्यक है। आयोग को अधिनियम, 2021 के अंतर्गत राज्यों और संबंधित एजेंसियों को निर्देश देने की शक्ति प्राप्त है, जो समन्वय की व्यवस्था का आधार है।
Q3. निम्नलिखित सूचियों का सही मिलान कीजिए:
सूची-I (अनुच्छेद)
(a) अनुच्छेद 21
(b) अनुच्छेद 48A
(c) अनुच्छेद 51A(छ)
सूची-II (प्रावधान)
1. प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और संवर्धन करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक कर्तव्य है।
2. पर्यावरण की रक्षा और संवर्धन करना राज्य का नीति-निदेशक तत्व है।
3. प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के अंतर्गत स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार भी सम्मिलित माना गया है।
सही उत्तर चुनिए:
- (a)-1, (b)-2, (c)-3
- (a)-2, (b)-1, (c)-3
- (a)-3, (b)-2, (c)-1
- (a)-2, (b)-3, (c)-1
उत्तर: (a)-3, (b)-2, (c)-1 — अनुच्छेद 21 की व्याख्या न्यायालय ने स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार को सम्मिलित करते हुए की है, इसलिए (a)-3 सही है। अनुच्छेद 48A राज्य का नीति-निदेशक तत्व है (b)-2, जबकि अनुच्छेद 51A(छ) नागरिकों का मौलिक कर्तव्य है (c)-1।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान जैसी आपातकालीन व्यवस्थाएँ वायु गुणवत्ता में अचानक गिरावट के समय त्वरित हस्तक्षेप का साधन हैं, किंतु इन्हें मुख्यतः अल्पकालिक उपाय माना जाता है। दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण नियंत्रण के संस्थागत ढाँचे की भूमिका की समालोचनात्मक परीक्षा कीजिए। साथ ही बताइए कि क्या अनुच्छेद 21 के अंतर्गत स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार राज्य को केवल आपातकालीन उपायों से आगे बढ़कर दीर्घकालिक नीति अपनाने के लिए बाध्य करता है। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर संरचना: (1) परिचय: दिल्ली में AQI का 117 (31 अक्टूबर) से 261 (1 नवंबर) और फिर 324 तक पहुँचना; ‘बहुत खराब’ श्रेणी में चरण-II की घोषणा; AQI श्रेणियाँ (0-50 अच्छा, 201-300 खराब, 301-400 बहुत खराब, 401-500 गंभीर)। (2) GRAP का उद्भव: सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर पर्यावरण प्रदूषण (नियंत्रण एवं निवारण) प्राधिकरण (EPCA) द्वारा 2016 में तैयार; चरण I से IV तक की व्यवस्था; चरण-II में धूल नियंत्रण, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा और पार्किंग शुल्क वृद्धि जैसे उपाय। (3) संस्थागत ढाँचा: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM), वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021; आयोग द्वारा राज्यों और एजेंसियों को निर्देश; सहकारी संघवाद की चुनौतियाँ; पराली दहन, वाहन उत्सर्जन और औद्योगिक स्रोतों का अंतर्राज्यीय स्वरूप; राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP, 2019) का दीर्घकालिक दृष्टिकोण। (4) समालोचना के बिंदु: आपातकालीन उपाय (निर्माण रोक, वाहन प्रतिबंध, सीमा-जाँच से होने वाला यातायात जाम) आर्थिक और सामाजिक लागत के साथ आते हैं; दीर्घकालिक स्रोत-नियंत्रण पर कम बल; प्रवर्तन की सीमाएँ; अंतर्राज्यीय समन्वय में कमी। (5) संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 21 के अंतर्गत स्वच्छ वायु व पर्यावरण का अधिकार (सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य, 1991; एम.सी. मेहता मामले); अनुच्छेद 48A (राज्य का कर्तव्य); अनुच्छेद 51A(छ) (नागरिकों का मौलिक कर्तव्य); पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 और वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981। (6) सिद्धांत: सावधानी का सिद्धांत और प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (वेल्लोर सिटिजन्स वेलफेयर फोरम मामला, 1996); अनुच्छेद 21 की व्याख्या से दीर्घकालिक नीति की बाध्यता का तर्क। (7) संतुलित मत: आपातकालीन उपाय जन-स्वास्थ्य की तत्काल रक्षा के लिए अनिवार्य; परंतु स्थायी समाधान के लिए स्रोत-आधारित, बहु-क्षेत्रीय और दीर्घकालिक नीति आवश्यक। (8) निष्कर्ष: सुधारात्मक अधिकार के रूप में आपातकालीन उपाय और दीर्घकालिक नीति का समन्वय।
स्रोत: The Indian Express
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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