सियांग परियोजना: भूमि मालिकों की अनदेखी, राज्य सरकार पर अविश्वास

सियांग परियोजना: भूमि मालिकों की अनदेखी, राज्य सरकार पर अविश्वास

सियांग परियोजना: भूमि मालिकों की अनदेखी, राज्य सरकार पर अविश्वास

सियांग अपर परियोजना: हितधारकों के विचारकिसानों का मंच (SIFF)केंद्र और राज्य सरकारपरामर्शभूस्वामियों से परामर्श नहींआरोपों का खंडनपरियोजना का महत्त्वविश्वास में कमीराष्ट्रीय सुरक्षा, चीन का प्रत्युत्तरचिंताएँआजीविका, कृषि भूमि, सांस्कृतिक विरासत स्वच्छ ऊर्जा, ग्रिड स्थिरता, बुनियादी
सियांग अपर परियोजना: हितधारकों के विचार

✎ सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना (लगभग 11,200 मेगावाट, अभी पूर्व-साध्यता चरण में) से जुड़ा प्रश्न यह है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा हितों के साथ प्रभावित समुदायों की पारदर्शी परामर्श और सूचित सहमति को कैसे संतुलित किया जाए।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भारतीय भूगोल (ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र, जलविद्युत की संभावना, जनजातीय समुदाय और उनकी आजीविका)  |  GS Paper II — राजव्यवस्था (केंद्र-राज्य विधायी शक्तियाँ, अनुच्छेद 371H, भूमि अधिग्रहण विधि, स्थानीय परामर्श की संवैधानिक एवं विधिक व्यवस्था)  |  GS Paper III — पर्यावरण एवं अर्थव्यवस्था (जलविद्युत परियोजनाएँ, पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया, ऊर्जा सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा के आयाम)
  • Prelims: सियांग नदी: तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो, अरुणाचल प्रदेश में सियांग, असम में ब्रह्मपुत्र, अरुणाचल प्रदेश से संबंधित अनुच्छेद 371H के विशेष प्रावधान, संघ सूची की प्रविष्टि 56 (अंतरराज्यीय नदियों का विनियमन और विकास) तथा राज्य सूची की प्रविष्टि 17 (जल), समवर्ती सूची की प्रविष्टि 38 (विद्युत), भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 (सामाजिक प्रभाव आकलन का प्रावधान), वन अधिकार अधिनियम, 2006 (ग्राम सभा की भूमिका), पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) अधिसूचना, 2006, बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं (25 मेगावाट से अधिक) को वर्ष 2019 में नवीकरणीय ऊर्जा की श्रेणी में शामिल किया जाना
  • Essay: विकास परियोजनाओं में स्थानीय समुदायों की सहमति बनाम राष्ट्रीय हित: सीमावर्ती क्षेत्रों में संतुलन की चुनौती, लोकतांत्रिक शासन में विश्वास निर्माण: पारदर्शिता, परामर्श और निर्णय प्रक्रिया की वैधता

त्वरित पुनरावृत्ति: सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना (लगभग 11,200 मेगावाट, अभी पूर्व-साध्यता चरण में) से जुड़ा प्रश्न यह है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा हितों के साथ प्रभावित समुदायों की पारदर्शी परामर्श और सूचित सहमति को कैसे संतुलित किया जाए।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

अरुणाचल प्रदेश की सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम (SIFF) ने प्रस्तावित सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना (Siang Upper Multipurpose Project: SUMP) के विरोध में आवाज़ उठाई है। फोरम का आरोप है कि प्रभावित भूस्वामियों और समुदायों से परामर्श नहीं किया गया, परियोजना के गुण-दोषों पर चर्चा नहीं हुई और इससे राज्य सरकार के प्रति विश्वास में कमी आई है। फोरम ने सितंबर 2025 के एक ज्ञापन समझौते (MoU) की प्रक्रिया पर भी प्रश्न उठाए हैं। दूसरी ओर, केंद्र और राज्य सरकार परियोजना को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा और चीन की विशाल बाँध परियोजना के प्रत्युत्तर में आवश्यक मानती हैं। राज्य सरकार ने ज्ञापन पर हस्ताक्षर को लेकर लगाए गए आरोपों का खंडन किया है। यह प्रकरण बताता है कि अत्यधिक महत्त्व की अवसंरचना परियोजनाओं में भी भूमि, आजीविका और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े स्थानीय हितों के लिए पारदर्शी परामर्श प्रक्रिया कितनी आवश्यक है।

पृष्ठभूमि

  • सियांग नदी तिब्बत से भारत में प्रवेश करती है और अरुणाचल प्रदेश में इसे सियांग कहा जाता है; असम पहुँचकर यही नदी ब्रह्मपुत्र के रूप में जानी जाती है।
  • सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना की क्षमता लगभग 11,200 मेगावाट बताई जा रही है, जिसे भारत की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में गिना जा रहा है। यह अभी पूर्व-साध्यता सर्वेक्षण (pre-feasibility survey) के चरण में है।
  • सियांग घाटी और नदी तट के किनारे बसे स्वदेशी समुदाय आजीविका, कृषि भूमि और सांस्कृतिक विरासत पर संभावित प्रभाव की आशंका व्यक्त कर रहे हैं।
  • सितंबर 2025 के ज्ञापन समझौते में कहा गया है कि परियोजना व्यवहार्य पाई जाने पर उसकी तैयारी का कार्य प्रभावित परिवारों के साथ परामर्श से किया जाएगा, तथा प्रभावित परिवारों के आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक सशक्तीकरण की प्रतिबद्धता दोहराई गई है।
  • चीन द्वारा यारलुंग त्सांगपो के निचले भाग पर विशाल जलविद्युत परियोजना के निर्माण की घोषणा के बाद भारत में सीमावर्ती नदी-आधारित परियोजनाओं को रणनीतिक दृष्टि से देखा जा रहा है।

सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना क्या है?

  • यह अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी पर प्रस्तावित एक बहुउद्देशीय जलविद्युत परियोजना है, जिसमें विद्युत उत्पादन के साथ बाढ़ नियंत्रण और जल प्रबंधन के उद्देश्य भी शामिल बताए जाते हैं।
  • परियोजना की प्रस्तावित क्षमता लगभग 11,200 मेगावाट है, जो इसे देश की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में रखती है।
  • परियोजना की तैयारी के क्रम में पहला चरण पूर्व-साध्यता रिपोर्ट (Pre-Feasibility Report: PFR) का है, जिसमें स्थल की तकनीकी, भू-वैज्ञानिक और आर्थिक व्यवहार्यता का प्रारंभिक आकलन किया जाता है।
  • इसके बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (Detailed Project Report: DPR), पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA), वन और पर्यावरण स्वीकृति, तथा सामाजिक प्रभाव आकलन जैसे चरण आते हैं।
  • जल संसाधन पर विधायी शक्ति संविधान में राज्य सूची में रखी गई है, जबकि अंतरराज्यीय नदियों का विनियमन और विकास संघ सूची का विषय है; विद्युत समवर्ती सूची में आती है।
  • भूमि अधिग्रहण की स्थिति में सामाजिक प्रभाव आकलन और जनसुनवाई जैसी प्रक्रियाएँ भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013 के अंतर्गत आवश्यक मानी जाती हैं।
  • जनजातीय क्षेत्रों में वन भूमि के उपयोग हेतु वन अधिकार अधिनियम, 2006 के अंतर्गत ग्राम सभा की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है; ऐसे प्रकरणों में स्वतंत्र, पूर्व और सूचित सहमति (Free, Prior and Informed Consent: FPIC) की अवधारणा नीति-विमर्श का केंद्रीय विषय रही है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्त्व
परियोजना का स्वरूप अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी पर प्रस्तावित 11,200 मेगावाट क्षमता की सियांग उपरी बहुउद्देशीय परियोजना (Siang Upper Multipurpose Project – SUMP) है, जिसे देश की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना (Hydropower Project) बताया जा रहा है
वर्तमान चरण परियोजना अभी पूर्व-साध्यता सर्वेक्षण (Pre-feasibility Survey) के चरण में है; अंतिम स्वीकृति और निर्माण का निर्णय अभी नहीं हुआ है
सरकारी तर्क केंद्र और राज्य सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय और चीन की विशाल बांध परियोजना के प्रतिसंतुलन के रूप में प्रस्तुत करती हैं
प्रभावित समुदाय सियांग नदी के तट पर बसे स्वदेशी समुदाय हैं, जिनकी आजीविका और सांस्कृतिक विरासत पर प्रभाव की आशंका जताई गई है
विवादित दस्तावेज़ सितंबर 2025 का समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding – MoU) है, जिसमें पूर्व-साध्यता प्रतिवेदन (Pre-feasibility Report – PFR) के बाद की तैयारी को प्रभावित परिवारों के साथ परामर्श से करने की प्रतिबद्धता है

महत्व

आर्थिक

  • जलविद्युत स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है, जिससे ऊर्जा संक्रमण के लक्ष्यों में योगदान हो सकता है
  • बड़ी क्षमता वाली परियोजना से पूर्वोत्तर क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति और ग्रिड स्थिरता पर सकारात्मक असर की संभावना है
  • जलाशय आधारित परियोजनाएँ पीक आवश्यकता के समय विद्युत की आपूर्ति में सहायक होती हैं

सामरिक

  • सीमावर्ती अरुणाचल प्रदेश में बुनियादी ढाँचे और जल-प्रवाह की निगरानी से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा के तर्क को सरकारी स्तर पर प्रमुखता दी गई है
  • चीन की ओर से तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो पर बनाई जा रही विशाल बांध परियोजना के संदर्भ में नदी-जल पर सूचना और नियंत्रण का प्रश्न सामरिक महत्त्व रखता है

पर्यावरणीय और बहु-उद्देशीय पक्ष

  • परियोजना के उद्देश्यों में बाढ़ नियंत्रण और जल प्रबंधन जैसे पहलू शामिल बताए गए हैं, जिनकी पुष्टि अंतिम अध्ययनों से होनी है
  • जलविद्युत परियोजनाओं के लाभ और लागत का मूल्यांकन पर्यावरणीय प्रभाव आकलन के माध्यम से ही संभव है

चुनौतियाँ

1. सहमति और परामर्श की कमी

  • SIFF का आरोप है कि भू-स्वामियों और समुदायों से पूर्व-साध्यता सर्वेक्षण के दौरान परामर्श नहीं किया गया
  • राज्य सरकार की ओर से परियोजना के लाभ और हानि पर प्रभावित समुदायों के साथ खुली चर्चा का अभाव बताया गया है
  • पारदर्शिता की कमी से स्थानीय लोगों में राज्य सरकार के प्रति भरोसा घटने की स्थिति बनी है

2. भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास

  • प्रभावित परिवारों की भूमि, आवास और सामुदायिक संपत्ति पर प्रभाव की आशंका है
  • समझौता ज्ञापन के बाद कैबिनेट द्वारा गेकू और यिंगकोंग गाँवों के लिए वैकल्पिक नगर बनाने के निर्णय का उल्लेख किया गया है, जबकि पूर्व-साध्यता प्रतिवेदन अभी अधूरा है
  • भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013 में सामाजिक प्रभाव आकलन और प्रभावित परिवारों से परामर्श की व्यवस्था है, जिसकी प्रक्रिया पर प्रश्न उठाए गए हैं

3. सांस्कृतिक और आजीविका संबंधी खतरा

  • सियांग घाटी के स्वदेशी समुदाय नदी को आजीविका के स्रोत के साथ सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हैं
  • बाँध से नदी का स्वरूप और तटीय जीवन बदलने पर पारंपरिक कृषि, मत्स्य और सामुदायिक रीति-रिवाज प्रभावित हो सकते हैं

4. समझौता ज्ञापन की वैधता पर विवाद

  • SIFF ने आरोप लगाया है कि कुछ व्यक्तियों को सहमति के लिए प्रेरित किया गया और एक ही परिवार के कई सदस्यों को अलग-अलग परिवार के रूप में गिना गया
  • राज्य सरकार ने दबाव में हस्ताक्षर कराए जाने के आरोप से इनकार किया है, जिससे तथ्यों की स्वतंत्र जाँच की आवश्यकता रेखांकित होती है
  • बहुमत के दावे की प्रक्रिया पर भरोसा तभी बनेगा जब दस्तावेज़ सार्वजनिक और सत्यापन योग्य हों

5. पर्यावरणीय और भू-संवेदनशीलता

  • अरुणाचल प्रदेश का हिमालयी क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से अति संवेदनशील (Seismic Zone V) है, जिससे बड़े बाँध की सुरक्षा पर गंभीर विचार आवश्यक है
  • वन, जैव विविधता और नदी पारिस्थितिकी पर संचयी प्रभाव का आकलन अभी पूरा नहीं हुआ है
  • निचले क्षेत्रों में जल-प्रवाह और गाद प्रबंधन पर पड़ने वाले प्रभाव की वैज्ञानिक जाँच की आवश्यकता है

6. राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थानीय सहमति के बीच संतुलन

  • केंद्र और राज्य द्वारा परियोजना को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ने से स्थानीय विरोध के प्रति संवेदनशीलता का प्रश्न खड़ा होता है
  • जल और जलविद्युत राज्य सूची का विषय होने से राज्य की भूमिका केंद्रीय ढाँचे के साथ समन्वित होनी चाहिए
  • सामरिक आवश्यकता और स्थानीय अधिकारों के बीच सह-अस्तित्व वाला ढाँचा विकसित करना चुनौती है

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
सहमति प्रक्रिया पूर्व-साध्यता सर्वेक्षण की सूचना और परामर्श के अभाव से प्रभावित समुदायों की भागीदारी कमजोर रही है
परिवारों की गणना एक ही परिवार के कई सदस्यों को अलग परिवार मानने के आरोप से बहुमत के दावे की विश्वसनीयता पर प्रश्न
समझौता ज्ञापन का दायरा समझौता ज्ञापन में केवल पूर्व-साध्यता प्रतिवेदन का उल्लेख है, जबकि वैकल्पिक नगरों जैसी योजनाएँ उसके बाद की चरण की लगती हैं
भरोसे का संकट निर्णय एकतरफा लेने की धारणा से राज्य सरकार और स्थानीय समुदायों के बीच विश्वास घटा है
पर्यावरण और भूकंपीय जोखिम हिमालयी और भूकंप-प्रवण क्षेत्र में विशाल बाँध से पारिस्थितिक और सुरक्षा जोखिम के विस्तृत आकलन की आवश्यकता है
आजीविका और संस्कृति नदी-तट आधारित आजीविका और सांस्कृतिक विरासत पर दीर्घकालिक प्रभाव का मूल्यांकन अभी प्रारंभिक स्तर पर है

आगे की राह

  • पूर्व-साध्यता सर्वेक्षण से पहले ही प्रभावित परिवारों और भू-स्वामियों के साथ सूचित परामर्श की सार्वजनिक प्रक्रिया शुरू की जाए
  • पूर्व-साध्यता प्रतिवेदन और समझौता ज्ञापन के दस्तावेज़ स्थानीय भाषा में सार्वजनिक किए जाएँ, ताकि जानकारी के आधार पर निर्णय हो सके
  • परिवारों की गणना और हस्ताक्षर-सत्यापन के लिए स्वतंत्र जाँच की व्यवस्था हो
  • भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013 के अनुरूप सामाजिक प्रभाव आकलन विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन से पहले पूरा किया जाए
  • पर्यावरण प्रभाव आकलन में संचयी प्रभाव, भूकंपीय जोखिम और निचले क्षेत्रों पर जल-प्रवाह के प्रभाव को शामिल किया जाए
  • सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक आजीविका की रक्षा के लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी वाली संरक्षण योजना बने
  • लाभ-साझेदारी और रोजगार के प्रावधान परियोजना के प्रभाव के अनुपात में स्पष्ट रूप से तय हों
  • शिकायत निवारण तंत्र और केंद्र-राज्य-समुदाय की संयुक्त समीक्षा समिति बनाकर निर्णयों में भरोसा बढ़ाया जाए

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 21 – आजीविका और सांस्कृतिक जीवन की सुरक्षा
  • अनुच्छेद 300क – संपत्ति का अधिकार, विधिक अधिकार के रूप में
  • सातवीं अनुसूची, सूची II, प्रविष्टि 17 – जल और जलविद्युत राज्य का विषय

अवधारणा प्रवाह

सियांग नदी पर 11,200 मेगावाट क्षमता की परियोजना का प्रस्ताव, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा और चीनी बांध के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया  →  परियोजना अभी पूर्व-साध्यता सर्वेक्षण के चरण में है और पूर्व-साध्यता प्रतिवेदन अभी पूरा नहीं हुआ है  →  सितंबर 2025 के समझौता ज्ञापन और वैकल्पिक नगरों जैसी योजनाओं को लेकर सूचना और स्पष्टता की कमी  →  भू-स्वामियों और समुदायों से परामर्श न होने तथा परिवारों की गणना पर आरोप से सहमति की प्रक्रिया पर प्रश्न  →  पारदर्शिता की कमी से राज्य सरकार और स्थानीय समुदायों के बीच भरोसे का संकट और विरोध  →  अंतिम निर्णय से पहले सामाजिक प्रभाव आकलन, पर्यावरण प्रभाव आकलन और सार्वजनिक परामर्श की आवश्यकता

स्रोत: The Indian Express


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