केरल उच्च न्यायालय ने अवैध कचरा फेंकने वाले वाहन की नीलामी को दी मंजूरी

केरल उच्च न्यायालय ने अवैध कचरा फेंकने वाले वाहन की नीलामी को दी मंजूरी

केरल उच्च न्यायालय ने अवैध कचरा फेंकने वाले वाहन की नीलामी को दी मंजूरी

अवैध कचरा डंपिंग: कानूनी प्रक्रियाअवैध डंपिंगअस्पताल कचराशिकायत मिलनानिवासीजुर्माना लगाना₹2 लाखकचरा हटाने का आदेशपंचायतअनुपालन न होने परउच्च न्यायालयमशीन ज़ब्तउप-कलेक्टर
अवैध कचरा डंपिंग: कानूनी प्रक्रिया

✎ अवैध डंपिंग के मामलों में पंचायतें प्रदूषक-भुगतान सिद्धांत के आधार पर जुर्माना, जब्ती और नीलामी द्वारा उत्तरदायित्व तय कर सकती हैं, और उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के अंतर्गत इन आदेशों की वैधता की न्यायिक समीक्षा करता है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — राजव्यवस्था और शासन (पंचायती राज संस्थाएँ, स्थानीय शासन की शक्तियाँ, न्यायपालिका की भूमिका)  |  GS Paper III — पर्यावरण (ठोस एवं जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन, प्रदूषक-भुगतान सिद्धांत, पर्यावरणीय विधिक उपाय)
  • Prelims: अनुच्छेद 243G (पंचायतों की शक्तियाँ और उत्तरदायित्व), अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता), अनुच्छेद 48A (पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन, राज्य के नीति निदेशक तत्व), अनुच्छेद 51A(छ) (मौलिक कर्तव्य: प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा), पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016, जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016, प्रदूषक-भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle)
  • Essay: स्थानीय निकाय, पर्यावरण न्याय और उत्तरदायित्व तय करने में विधि की भूमिका, लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण में पंचायतों की प्रवर्तन शक्ति: अधिकार, सीमाएँ और जवाबदेही

त्वरित पुनरावृत्ति: अवैध डंपिंग के मामलों में पंचायतें प्रदूषक-भुगतान सिद्धांत के आधार पर जुर्माना, जब्ती और नीलामी द्वारा उत्तरदायित्व तय कर सकती हैं, और उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के अंतर्गत इन आदेशों की वैधता की न्यायिक समीक्षा करता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केरल उच्च न्यायालय ने मलप्पुरम ज़िले की पुलिक्कल ग्राम पंचायत को अंतियूरकुन्नु स्थित एक निजी खदान में अवैध रूप से कचरा डालने में प्रयुक्त मिट्टी हटाने वाली मशीन (Earth Mover) की नीलामी करने और उसकी आय अपशिष्ट प्रबंधन के लिए उपयोग करने की अनुमति दे दी है। न्यायमूर्ति एम.ए. अब्दुल हकीम ने कोझिकोड स्थित वाहन-स्वामी की याचिका खारिज कर दी, जिसमें पेरिंथलमन्ना उप-कलेक्टर द्वारा जारी जब्ती और नीलामी के आदेश को चुनौती दी गई थी। न्यायालय ने पाया कि पंजीकृत स्वामी ने उचित सावधानी (Due Diligence) नहीं बरती थी, इसलिए केरल पंचायत राज अधिनियम की धारा 219U के अंतर्गत की गई जब्ती और ज़ब्ती की पुष्टि की गई। यह निर्णय स्थानीय निकाय द्वारा अवैध डंपिंग के लिए ज़िम्मेदार पक्षों से वसूली और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक विधिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

पृष्ठभूमि

  • अगस्त 2025 में एक परित्यक्त ग्रेनाइट खदान में अस्पताल के कचरे सहित बड़ी मात्रा में अपशिष्ट डाला गया। स्थानीय निवासियों की शिकायत पर पंचायत ने खदान-स्वामी और ठेकेदारों पर ₹2 लाख का जुर्माना लगाया तथा कचरा हटाने का निर्देश दिया।
  • निर्देशों का पालन न होने पर निवासी उच्च न्यायालय पहुँचे। न्यायालय के निर्देश पर ज़िला कलेक्टर ने पंचायत सचिव को कचरा हटाने, मशीन जब्त करने और उसकी नीलामी करने का निर्देश दिया।
  • पंचायत ने 15 अगस्त 2025 को मशीन जब्त की और उप-कलेक्टर ने 10 दिसंबर 2025 को नीलामी की अनुमति दी। साथ ही कचरा हटाने, सफ़ाई और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की लागत ज़िम्मेदार पक्षों से वसूलने का आदेश दिया गया।
  • वाहन-स्वामी का तर्क था कि मशीन दूसरों को पट्टे पर दी गई थी। उच्च न्यायालय ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए माना कि स्वामी ने अपने वाहन के उपयोग पर उचित निगरानी नहीं रखी।
  • पर्यावरण से जुड़े विधिक ढाँचे में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 और जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अंतर्गत स्थानीय निकायों की भूमिका महत्त्वपूर्ण है, जबकि अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए जुर्माना, जब्ती और वसूली जैसे उपाय उपलब्ध हैं।

पंचायती राज संस्थाएँ और अपशिष्ट प्रबंधन में उनकी प्रवर्तन भूमिका क्या है?

  • संविधान का 73वाँ संशोधन (1992) पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा देता है। अनुच्छेद 243G के अंतर्गत राज्य विधानमंडल पंचायतों को स्वशासन की इकाई के रूप में कार्य करने हेतु आवश्यक शक्तियाँ और अधिकार प्रदान कर सकता है।
  • स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे विषय पंचायतों के कार्य-क्षेत्र में आते हैं। इसलिए स्थानीय स्तर पर कचरा संग्रह, निपटान और अवैध डंपिंग की रोकथाम में पंचायतों की प्रत्यक्ष भूमिका होती है।
  • राज्यों के पंचायत अधिनियम (जैसे केरल पंचायत राज अधिनियम) में जुर्माना, नोटिस, सामग्री या वाहन की जब्ती और नीलामी जैसे प्रवर्तन उपायों के प्रावधान होते हैं, ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके।
  • प्रदूषक-भुगतान सिद्धांत के अनुसार प्रदूषण फैलाने वाला व्यक्ति या संस्था पर्यावरणीय क्षति की लागत वहन करेगा। इस सिद्धांत को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 और राष्ट्रीय पर्यावरण न्यायशास्त्र में मान्यता मिली है।
  • अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण की रक्षा और संवर्धन का निर्देश देता है, जबकि अनुच्छेद 51A(छ) नागरिकों पर प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा का मौलिक कर्तव्य डालता है।
  • उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के अंतर्गत प्रशासनिक आदेशों की विधिक वैधता की समीक्षा कर सकता है। यह न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) का एक रूप है, जिसके द्वारा जब्ती और नीलामी जैसे आदेशों की प्रक्रियागत और तथ्यात्मक वैधता जाँची जाती है।
  • जब्त वाहन के मामलों में स्वामी से उचित सावधानी की अपेक्षा की जाती है। पट्टे या किराये पर देने का दावा तभी स्वीकार्य माना जाता है जब स्वामी ने उसके उपयोग पर निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित की हो।
  • नीलामी से प्राप्त राशि अपशिष्ट प्रबंधन के लिए पंचायत निधि में जमा होने से प्रवर्तन कार्रवाई और सार्वजनिक सेवा के बीच सीधा संबंध बनता है, जिससे स्थानीय संसाधनों से पर्यावरण सुधार को बल मिलता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्त्व
उच्च न्यायालय का निर्णय केरल उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज कर ज़ब्ती और नीलामी आदेश को बरकरार रखा; ग्राम पंचायत को नीलामी की अनुमति मिली
कानूनी आधार केरल पंचायत राज अधिनियम की धारा 219U के अंतर्गत वाहन की ज़ब्ती और समपहरण (Confiscation) की वैधता की पुष्टि हुई
उल्लंघन का स्वरूप एक परित्यक्त ग्रेनाइट खदान में अस्पताल अपशिष्ट सहित बड़ी मात्रा में ठोस अपशिष्ट का अवैध निपटान हुआ
दंडात्मक और पुनर्वसूली उपाय ₹2 लाख का जुर्माना, अपशिष्ट हटाने का आदेश, सफाई व्यय और पर्यावरणीय प्रतिपूर्ति की वसूली का निर्देश
राजस्व का उपयोग वाहन की नीलामी से प्राप्त राशि ग्राम पंचायत निधि में जमा होगी और अपशिष्ट प्रबंधन में खर्च होगी
पंजीकृत स्वामी का दायित्व वाहन पट्टे पर देने का तर्क स्वीकार नहीं हुआ; उचित सावधानी (Due Diligence) में विफलता को निर्णायक माना गया

महत्व

प्रशासनिक महत्त्व

  • स्थानीय निकाय, जिला कलेक्टर और उप-कलेक्टर की भूमिकाएँ एक ही प्रक्रिया में समन्वित दिखती हैं: शिकायत, जुर्माना, ज़ब्ती, नीलामी और वसूली
  • ग्राम पंचायत सचिव को अपशिष्ट हटाने और वाहन ज़ब्त करने के निर्देश मिलने से प्रशासनिक आदेशों के क्रियान्वयन की व्यावहारिक तस्वीर सामने आती है

विधिक महत्त्व

  • उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार की गई ज़ब्ती और नीलामी न्यायिक जाँच में टिकती है
  • वाहन पट्टे पर देने के तर्क को अस्वीकार करना यह संकेत देता है कि पंजीकृत स्वामी से उचित सावधानी की अपेक्षा की जाती है, भले ही वाहन वास्तविक रूप से किसी और के पास हो

पर्यावरणीय महत्त्व

  • प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle) का व्यावहारिक उदाहरण है, जिसमें प्रदूषण फैलाने वाले पक्षों से क्षतिपूर्ति वसूली जाती है
  • अस्पताल अपशिष्ट का खुले में निपटान जन-स्वास्थ्य और भूजल के लिए जोखिम पैदा करता है, इसलिए ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई आवश्यक मानी जाती है

स्थानीय वित्त एवं सशक्तीकरण

  • नीलामी से प्राप्त राशि ग्राम पंचायत निधि में जाने से स्थानीय निकाय को अपशिष्ट प्रबंधन के लिए अपना संसाधन मिलता है
  • यह मामला पंचायती राज संस्थाओं की विधिक शक्तियों के उपयोग और उनकी जवाबदेही को रेखांकित करता है

चुनौतियाँ

1. अवैध अपशिष्ट निपटान और निगरानी की कमी

  • परित्यक्त खदानों और खाली भूमि पर अपशिष्ट डालना अक्सर तभी पकड़ में आता है जब स्थानीय निवासी शिकायत करते हैं
  • नियमित निगरानी और सूचना-तंत्र के अभाव में अपराध समय पर नहीं रुकता

2. स्वामित्व और दायित्व का प्रश्न

  • वाहन किराये या पट्टे पर देने की स्थिति में वास्तविक उपयोगकर्ता और पंजीकृत स्वामी के बीच दायित्व का निर्धारण जटिल हो जाता है
  • उचित सावधानी के मानक स्पष्ट न होने पर प्रवर्तन एजेंसियों और न्यायालयों दोनों के लिए निर्णय कठिन होता है

3. अस्पताल अपशिष्ट का जोखिम

  • अस्पताल अपशिष्ट में संक्रामक और रासायनिक तत्व होते हैं, जिन्हें सामान्य कचरे की तरह फेंकना जन-स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है
  • जैव-चिकित्सा अपशिष्ट के सुरक्षित संग्रह, परिवहन और उपचार की व्यवस्था का पालन सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण है

4. स्थानीय निकायों की क्षमता

  • छोटी ग्राम पंचायतों के पास तकनीकी कर्मचारी, वाहन और वित्तीय संसाधन सीमित होते हैं
  • जुर्माना वसूली, ज़ब्ती और नीलामी जैसी प्रक्रियाओं के लिए विधिक और प्रशासनिक प्रशिक्षण की आवश्यकता रहती है

5. संपत्ति की ज़ब्ती और प्रक्रियात्मक न्याय

  • निजी संपत्ति की ज़ब्ती और नीलामी में विधि के अनुसार प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है, ताकि स्वामी के अधिकार सुरक्षित रहें
  • प्रवर्तन की कठोरता और निष्पक्ष सुनवाई के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासन की प्रमुख चुनौती है

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

समस्या चिंता
अवैध डंपिंग की पुनरावृत्ति निगरानी और सूचना-तंत्र कमज़ोर होने पर परित्यक्त स्थल बार-बार निशाना बनते हैं
अस्पताल अपशिष्ट का असुरक्षित निपटान जन-स्वास्थ्य, भूजल और मिट्टी पर दीर्घकालिक दुष्प्रभाव की आशंका
वाहन स्वामित्व में जवाबदेही पट्टे पर दिए गए वाहनों के मामलों में दायित्व तय करने के स्पष्ट मानक कम हैं
स्थानीय निकायों की सीमित क्षमता तकनीकी कर्मचारियों, वाहनों और प्रशिक्षण की कमी से प्रवर्तन कमज़ोर होता है
वसूली और नीलामी में विलंब आदेश के बाद वास्तविक वसूली और नीलामी में समय लगने से प्रभाव कम होता है

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) (Swachh Bharat Mission (Gramin))

आगे की राह

  • परित्यक्त खदानों, खाली भूमि और जल स्रोतों की नियमित निगरानी के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर निरीक्षण-तंत्र और सूचना प्रणाली विकसित की जाए
  • ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 (Solid Waste Management Rules, 2016) के अंतर्गत स्रोत पर पृथक्करण और संग्रह की व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए
  • जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 (Bio-Medical Waste Management Rules, 2016) के अनुपालन की जाँच अस्पतालों और सामान्य अपशिष्ट के बीच समन्वय से हो
  • वाहन पंजीकरण में पट्टे और हस्तांतरण की सूचना को अद्यतन रखने की व्यवस्था हो, ताकि दायित्व तय करना सरल हो
  • पंचायत सचिवों और कर्मचारियों को ज़ब्ती, नीलामी और वसूली की विधिक प्रक्रिया पर नियमित प्रशिक्षण दिया जाए
  • स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत ठोस और द्रव अपशिष्ट प्रबंधन के लिए स्थायी संसाधन और तकनीकी सहायता सुनिश्चित की जाए
  • नीलामी से प्राप्त राशि का पारदर्शी उपयोग और सार्वजनिक लेखा-परीक्षण सुनिश्चित हो, ताकि स्थानीय जवाबदेही बढ़े
  • जनभागीदारी और निवासी समितियों को शिकायत और सूचना के माध्यम से प्रवर्तन में शामिल किया जाए

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) · ग्यारहवीं अनुसूची (Eleventh Schedule) · अनुच्छेद 243G (Article 243G) · प्रदूषक भुगतान करेगा सिद्धांत (Polluter Pays Principle) · पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 (Environment (Protection) Act, 1986) · ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 (Solid Waste Management Rules, 2016) · अनुच्छेद 21 और स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार (Right to Clean Environment) · संपत्ति का अधिकार और अनुच्छेद 300A (Article 300A) · राज्य वित्त आयोग (State Finance Commission) · पंचायत निधि (Panchayat Fund) · स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) (Swachh Bharat Mission (Gramin)) · स्थानीय निकायों की प्रवर्तन क्षमता (Enforcement Capacity of Local Bodies)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 48A: पर्यावरण संरक्षण का राज्य का नीति-निर्देश
  • अनुच्छेद 51A(g): प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा का मौलिक कर्तव्य
  • अनुच्छेद 300A: विधि के प्राधिकार के बिना संपत्ति से वंचित न करना

अवधारणा प्रवाह

परित्यक्त ग्रेनाइट खदान में अस्पताल अपशिष्ट सहित ठोस अपशिष्ट का अवैध डंपिंग (2 अगस्त 2025)  →  स्थानीय निवासियों की शिकायत और ग्राम पंचायत द्वारा ₹2 लाख का जुर्माना तथा अपशिष्ट हटाने का निर्देश  →  अनुपालन न होने पर उच्च न्यायालय में याचिका; जिला कलेक्टर के निर्देश पर वाहन की ज़ब्ती (15 अगस्त 2025)  →  उप-कलेक्टर द्वारा नीलामी का प्राधिकार और सफाई व पर्यावरणीय प्रतिपूर्ति की वसूली का आदेश (10 दिसंबर 2025)  →  वाहन स्वामी की चुनौती; उच्च न्यायालय द्वारा उचित सावधानी में विफलता मानकर याचिका खारिज (23 अक्टूबर 2026)  →  नीलामी से प्राप्त राशि ग्राम पंचायत निधि में जमा होकर अपशिष्ट प्रबंधन में उपयोग होगी

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में पंचायतों के कार्यों की सूची में सम्मिलित है।
2. अनुच्छेद 243G के अंतर्गत संसद विधि द्वारा पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की योजनाओं के कार्यान्वयन हेतु शक्तियाँ प्रदान कर सकती है।
3. अनुच्छेद 243I के अंतर्गत राज्यपाल द्वारा राज्य वित्त आयोग का गठन किया जाता है, जो पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: ग्यारहवीं अनुसूची की सातवीं… नहीं, छठी प्रविष्टि ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता संरक्षण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन’ से संबंधित है। कथन 2 गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 243G में पंचायतों को शक्तियाँ देने का अधिकार राज्य के विधानमंडल को है, संसद को नहीं। कथन 3 सही है, क्योंकि अनुच्छेद 243I राज्य वित्त आयोग के गठन और उसके कार्यों से संबंधित है।

Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
कथन (A): स्थानीय निकाय अवैध अपशिष्ट निपटान में प्रयुक्त वाहन को ज़ब्त करके नीलाम कर सकता है, भले ही वाहन का पंजीकृत स्वामी घटना में प्रत्यक्ष रूप से सम्मिलित न हो।
कारण (R): ऐसी शक्ति का स्रोत राज्य के पंचायत राज विधान में निहित वैधानिक प्रावधान है, न कि पंचायत की स्वाभाविक कार्यकारी शक्ति।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (b) (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (c) (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
  4. (d) (A) गलत है, किंतु (R) सही है।

उत्तर: (a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — स्थानीय निकायों की ज़ब्ती और नीलामी की शक्ति राज्य विधि से ही प्राप्त होती है, इसलिए (R) सही है और (A) की व्याख्या करता है। स्वामी के ‘उचित सावधानी’ न बरतने के आधार पर वाहन की ज़ब्ती की वैधता को मान्यता देना इसी वैधानिक ढाँचे का परिणाम है। उच्च न्यायालय के निर्णय में भी यही तर्क अपनाया गया।

Q3. निम्नलिखित सुमेलन पर विचार कीजिए:
सूची I (अधिनियम/नियम)
A. जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016
B. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
C. ग्यारहवीं अनुसूची की छठी प्रविष्टि

सूची II (विषय-क्षेत्र)
1. पर्यावरण संरक्षण से संबंधित सर्वव्यापी (छत्र) विधान
2. सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
3. अस्पतालों से उत्पन्न अपशिष्ट के निपटान का विनियमन

सही सुमेलन का चयन कीजिए:

  1. (a) A-1, B-2, C-3
  2. (b) A-3, B-1, C-2
  3. (c) A-2, B-3, C-1
  4. (d) A-3, B-2, C-1

उत्तर: (b) A-3, B-1, C-2 — जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 अस्पतालों के अपशिष्ट के विनियमन से संबंधित है (A-3)। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 छत्र विधान है (B-1)। ग्यारहवीं अनुसूची की छठी प्रविष्टि सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित है (C-2)।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ हाल के एक प्रकरण में केरल उच्च न्यायालय (Kerala High Court) ने मलप्पुरम जिले की पुलिक्कल ग्राम पंचायत को अवैध अपशिष्ट डंपिंग में प्रयुक्त अर्थ मूवर की ज़ब्ती और नीलामी की अनुमति दी, जिसकी आय अपशिष्ट प्रबंधन के लिए पंचायत निधि में जमा होगी। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का दायित्व स्थानीय निकायों को सौंपा गया है, किंतु उनकी प्रवर्तन क्षमता सीमित है। इस संदर्भ में स्थानीय निकायों की प्रवर्तन शक्तियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि प्रदूषक भुगतान करेगा सिद्धांत (Polluter Pays Principle) को व्यवहार में लागू करने में कौन-सी विधिक और प्रशासनिक बाधाएँ आती हैं। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की संरचना इस प्रकार हो:
(1) भूमिका: पुलिक्कल प्रकरण का तथ्यात्मक सार। अपशिष्ट डंपिंग, ₹2 लाख का जुर्माना, वाहन की ज़ब्ती (15 अगस्त 2025), उप-कलेक्टर द्वारा नीलामी का आदेश (10 दिसंबर 2025), और स्वामी की ‘उचित सावधानी’ न बरतने के आधार पर उच्च न्यायालय द्वारा याचिका खारिज करना। वैधानिक आधार केरल पंचायत राज अधिनियम की धारा 219U बताया गया है।
(2) संवैधानिक ढाँचा: अनुच्छेद 243G के अंतर्गत पंचायतों को शक्तियाँ देना राज्य विधानमंडल का कार्य है। ग्यारहवीं अनुसूची की छठी प्रविष्टि (सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन) का उल्लेख करें। 73वें संविधान संशोधन (1992) का संदर्भ दें। अनुच्छेद 243I के अंतर्गत राज्य वित्त आयोग की भूमिका बताएँ, जो पंचायत निधि के सुदृढ़ीकरण से जुड़ी है।
(3) पर्यावरणीय और न्यायिक आधार: अनुच्छेद 21 में स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार (सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य, 1991)। अनुच्छेद 48A और अनुच्छेद 51A(छ) (यहाँ छ से तात्पर्य मूल कर्तव्य का पर्यावरण संबंधी खंड) का उल्लेख करें। ‘प्रदूषक भुगतान करेगा’ सिद्धांत को भारतीय पर्यावरण-विधि में स्थापित करने वाले निर्णय: वेल्लोर सिटिज़न्स वेलफेयर फोरम (1996) और इंडियन काउंसिल फॉर एन्वायरो-लीगल एक्शन बनाम भारत संघ (1996)।
(4) विधिक ढाँचा: पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986; ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016; जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016; राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010।
(5) संतुलित दृष्टिकोण:
– पक्ष में तर्क: निकटता और त्वरित कार्रवाई, प्रतिरोधक प्रभाव, प्रत्यक्ष लागत-वसूली।
– विपक्ष में तर्क: अनुच्छेद 300A के अंतर्गत संपत्ति के अधिकार पर प्रभाव; तृतीय पक्ष (जैसे लीज़ पर देने वाले स्वामी) के साथ अन्याय की आशंका; आनुपातिकता का प्रश्न; स्थानीय निकायों के पास तकनीकी और कानूनी क्षमता की कमी; वित्तीय संसाधनों की कमी और अनुपालन-निगरानी की दुर्बलता।
(6) समाधान और निष्कर्ष: उचित प्रक्रिया (due process) और आनुपातिकता सुनिश्चित करते हुए क्षमता-निर्माण, डिजिटल निगरानी, राज्य वित्त आयोग से पर्याप्त अनुदान, और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के घटकों के साथ तालमेल को बल दें। निष्कर्ष में कहें कि प्रवर्तन शक्ति सफल तभी होगी जब वह विधिक वैधता, प्रशासनिक क्षमता और सामुदायिक सहभागिता के साथ चले।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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