भारत का रक्षा उत्पादन लक्ष्य: आत्मनिर्भरता और रणनीतिक स्वायत्तता

भारत का रक्षा उत्पादन लक्ष्य: आत्मनिर्भरता और रणनीतिक स्वायत्तता

भारत का रक्षा उत्पादन लक्ष्य: आत्मनिर्भरता और रणनीतिक स्वायत्तता

रक्षा उत्पादन और निर्यात में वृद्धिरणनीतिक स्वायत्ततानिर्भरता घटानाघरेलू उद्योगप्रोत्साहनउत्पादन विस्ताररोजगार सृजननिर्यात वृद्धिबाजार में उपस्थितिसैन्य क्षमतासुदृढ़ीकरण
रक्षा उत्पादन और निर्यात में वृद्धि

✎ रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ (2025-26) और रक्षा निर्यात लगभग ₹40,000 करोड़ तक पहुँचे हैं; लक्ष्य 2029 तक ₹3 लाख करोड़ उत्पादन और ₹50,000 करोड़ निर्यात का है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन और सामाजिक न्याय (सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप; संघ और राज्यों के कार्य; रक्षा और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े नीतिगत ढाँचे)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (औद्योगिक नीति, विनिर्माण, निर्यात संवर्धन); आंतरिक सुरक्षा (सुरक्षा चुनौतियाँ और रक्षा तैयारी)  |  GS Paper II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (भारत की सामरिक स्वायत्तता और रक्षा निर्यात का कूटनीतिक आयाम)
  • Prelims: रक्षा उत्पादन और रक्षा निर्यात के वर्ष 2029 तक के लक्ष्य (₹3 लाख करोड़ उत्पादन; ₹50,000 करोड़ निर्यात), रक्षा उत्पादन एवं निर्यात संवर्धन नीति (DPEPP 2020), रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP 2020) और पूंजीगत अधिग्रहण, सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची (Positive Indigenisation List), iDEX (Innovations for Defence Excellence) योजना और स्टार्टअप की भागीदारी, रक्षा औद्योगिक गलियारे (Defence Industrial Corridors): उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु, आयुध निर्माणी बोर्ड का निगमीकरण और रक्षा सार्वजनिक उपक्रम (DPSU), चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) और त्रि-सेवा एकीकरण
  • Essay: आत्मनिर्भरता और सामरिक स्वायत्तता: क्या स्वदेशी रक्षा क्षमता राष्ट्रीय सुरक्षा का स्थायी आधार बन सकती है?, रक्षा उद्योग का विकास: औद्योगिक नीति, नवाचार और निर्यात के बीच संतुलन

त्वरित पुनरावृत्ति: रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ (2025-26) और रक्षा निर्यात लगभग ₹40,000 करोड़ तक पहुँचे हैं; लक्ष्य 2029 तक ₹3 लाख करोड़ उत्पादन और ₹50,000 करोड़ निर्यात का है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जैसलमेर में रक्षा मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की बैठक में कहा कि भारत विदेशी स्रोतों पर सामरिक निर्भरता घटाने के लिए घरेलू रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ कर रहा है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा बजट बढ़कर रिकॉर्ड ₹7.85 लाख करोड़ हो गया है, जिसमें पूंजीगत परिव्यय ₹2.19 लाख करोड़ है। रक्षा उत्पादन 2014-15 के ₹46,429 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुँचा है और रक्षा निर्यात 2014 में ₹2,000 करोड़ से कम से बढ़कर लगभग ₹40,000 करोड़ हो गया है। सरकार का लक्ष्य 2029 तक रक्षा उत्पादन ₹3 लाख करोड़ और रक्षा निर्यात ₹50,000 करोड़ तक पहुँचाने का है। बैठक में नई पीढ़ी के प्लेटफॉर्म और हथियार प्रणालियों की शीघ्र शामिल किए जाने, त्रि-सेवा एकीकरण और संयुक्त संचालन योजना पर भी चर्चा हुई।

पृष्ठभूमि

  • स्वतंत्रता के बाद के दशकों में भारत का रक्षा उपकरण आयात पर भारी निर्भर रहा है। इसी पृष्ठभूमि में ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी नीतियों के तहत स्वदेशी उत्पादन और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहन दिया गया।
  • रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) में समय-समय पर सुधार किए गए हैं। वर्ष 2020 की DAP में ‘भारतीय-IDDM’ (स्वदेशी डिज़ाइन, विकास और निर्माण) श्रेणी को प्राथमिकता दी गई।
  • सरकार ने वर्ष 2020 में रक्षा उत्पादन एवं निर्यात संवर्धन नीति (DPEPP 2020) लागू की, जिसका उद्देश्य 2025 तक रक्षा उत्पादन और निर्यात के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय करना था।
  • आयुध निर्माणी बोर्ड का 2021 में सात रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (DPSU) में निगमीकरण किया गया, जिससे उत्पादन में दक्षता और जवाबदेही बढ़ाने का प्रयास हुआ।
  • रक्षा मंत्री ने प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन को भी आधुनिक युद्ध की मूल शक्ति बताया, जो आधुनिक युद्ध में प्रौद्योगिकी-आधारित बदलाव की ओर संकेत करता है।

रक्षा उत्पादन और सामरिक स्वायत्तता क्या है?

  • सामरिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) का अर्थ है कि कोई राष्ट्र अपनी सुरक्षा नीति और निर्णय बाहरी दबाव के बिना स्वतंत्र रूप से ले सके; इसके लिए स्वदेशी रक्षा क्षमता आवश्यक मानी जाती है।
  • स्वदेशीकरण (Indigenisation) का अर्थ है रक्षा उपकरणों और प्रणालियों का स्वदेशी डिज़ाइन, विकास और निर्माण; सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची में शामिल वस्तुओं का आयात बंद कर घरेलू स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है।
  • रक्षा उत्पादन में सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा सार्वजनिक उपक्रम (DPSU) और निजी उद्योग दोनों शामिल हैं; पूंजीगत अधिग्रहण के माध्यम से सशस्त्र बलों के लिए प्रमुख प्रणालियाँ खरीदी जाती हैं।
  • iDEX (Innovations for Defence Excellence) स्टार्टअप, लघु उद्योग और शोधकर्ताओं को रक्षा आवश्यकताओं से जोड़ने वाला मंच है, जिसका प्रशासन रक्षा मंत्रालय के तहत होता है।
  • रक्षा औद्योगिक गलियारे उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में विकसित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य औद्योगिक क्लस्टर, निवेश और निर्यात को एक स्थान पर केंद्रित करना है।
  • रक्षा नीति में संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची के अंतर्गत ‘भारत की रक्षा’ और सशस्त्र बलों से संबंधित विषय केंद्र के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
  • चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) की व्यवस्था त्रि-सेवा समन्वय, संयुक्त योजना और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए की गई है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
रक्षा बजट 2026-27 रिकॉर्ड 7.85 लाख करोड़ रुपये, जिसमें पूंजी परिव्यय (Capital Outlay) 2.19 लाख करोड़ रुपये है। इससे आधुनिकीकरण के लिए पूंजी अधिग्रहण को प्राथमिकता मिलती है।
रक्षा उत्पादन का विस्तार 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये हुआ। यह स्वदेशी उत्पादन क्षमता में वृद्धि का संकेत है।
रक्षा निर्यात की वृद्धि 2014 में 2,000 करोड़ रुपये से कम से बढ़कर लगभग 40,000 करोड़ रुपये हुआ। इससे भारत की रक्षा उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धा का पता चलता है।
2029 के लक्ष्य रक्षा उत्पादन 3 लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इससे नीति की समय-सीमा तय होती है।
त्रि-सेवा एकीकरण थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच संयुक्त योजना और क्षमता के समन्वित उपयोग पर बल है। इससे संयुक्त युद्ध-क्षमता बढ़ती है।
प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन अगली पीढ़ी के प्लेटफॉर्म और हथियार प्रणालियों को शामिल करने तथा कर्मियों की तैयारी पर ज़ोर है। यह आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति से जुड़ा है।

महत्व

आर्थिक

  • रक्षा उत्पादन और निर्यात में वृद्धि से घरेलू विनिर्माण आधार मज़बूत होता है और उच्च-तकनीक रोज़गार सृजित होते हैं।
  • पूंजी परिव्यय में वृद्धि से औद्योगिक मांग बढ़ती है, जिसका लाभ सहायक उद्योगों और एमएसएमई (MSME) तक पहुंच सकता है।
  • रक्षा निर्यात से विदेशी मुद्रा अर्जित होती है और भुगतान संतुलन पर सकारात्मक असर पड़ता है।

रणनीतिक

  • रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) के लिए विदेशी स्रोतों पर निर्भरता घटाना आवश्यक माना गया है।
  • स्वदेशी प्रौद्योगिकी क्षमता राष्ट्रीय सुरक्षा की दीर्घकालिक गारंटी देती है, विशेषकर संघर्ष के बदलते स्वरूप में।

तकनीकी और संस्थागत

  • अगली पीढ़ी के प्लेटफॉर्म और हथियार प्रणालियों के शीघ्र समावेश से सैन्य आधुनिकीकरण की गति बढ़ती है।
  • त्रि-सेवा एकीकरण और संयुक्त योजना से सेवाओं के बीच समन्वय सुदृढ़ होता है, जो आगे चलकर संयुक्त कमान ढांचे की तैयारी से भी जुड़ता है।

चुनौतियाँ

1. आयात पर निर्भरता

  • अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म और कई उप-प्रणालियों के लिए अब भी विदेशी स्रोतों पर निर्भरता बनी हुई है।
  • आयातित घटकों पर निर्भरता से आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और लागत में अनिश्चितता का खतरा रहता है।
  • स्वदेशीकरण सूचियों के बावजूद उच्च-तकनीक घटकों का घरेलू उत्पादन सीमित है।

2. प्रौद्योगिकी अंतराल

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन और साइबर क्षमताओं में अनुसंधान एवं विकास के स्तर पर अंतर बना हुआ है।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी के बावजूद मौलिक डिज़ाइन और बौद्धिक संपदा में सुधार की आवश्यकता है।

3. निर्यात प्रतिस्पर्धा

  • वैश्विक रक्षा बाज़ार में कीमत, गुणवत्ता, समय-सीमा और निर्यात-पश्चात सेवाओं के मानक कड़े हैं।
  • निर्यात लक्ष्य तक पहुंचने के लिए विदेशी ग्राहकों के साथ दीर्घकालिक अनुबंध और आपूर्ति भरोसा आवश्यक है।

4. पूंजी अधिग्रहण की प्रक्रिया

  • खरीद प्रक्रिया की जटिलता और समय-सीमा में देरी से परियोजनाओं की लागत और समय बढ़ता है।
  • बजट में वृद्धि के बावजूद पूंजी व्यय का प्रभावी उपयोग और प्राथमिकता-निर्धारण चुनौती है।

5. मानव संसाधन और सैन्य संरचना

  • बदलते युद्ध स्वरूप के लिए कर्मियों के कौशल-उन्नयन और निरंतर प्रशिक्षण की आवश्यकता है।
  • नई संरचनाओं और संरचनात्मक सुधारों को तीनों सेवाओं में समान रूप से लागू करना कठिन है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

समस्या चिंता
घटकों का आयात उच्च-तकनीक उप-प्रणालियों पर विदेशी निर्भरता से आपूर्ति और लागत जोखिम बढ़ता है।
खरीद में विलंब लंबी अधिग्रहण प्रक्रिया से नई प्रणालियों के समावेश में देरी होती है।
अनुसंधान एवं विकास का स्तर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन और साइबर क्षेत्र में मौलिक क्षमता सीमित है।
निर्यात बाज़ार की प्रतिस्पर्धा वैश्विक बाज़ार में गुणवत्ता, कीमत और विश्वसनीयता के मानक कठोर हैं।
कौशल और प्रशिक्षण बदलती तकनीक के लिए कर्मियों का निरंतर उन्नयन आवश्यक है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • रक्षा औद्योगिक गलियारे (Defence Industrial Corridors)
  • सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची (Positive Indigenisation List)
  • इनोवेशन्स फॉर डिफेंस एक्सेलेंस (iDEX)

आगे की राह

  • उच्च-तकनीक घटकों के लिए घरेलू आपूर्ति श्रृंखला विकसित कर आयात निर्भरता को चरणबद्ध रूप से घटाया जाए।
  • पूंजी अधिग्रहण प्रक्रिया को सरल और समय-बद्ध बनाकर परियोजनाओं में विलंब कम किया जाए।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन और साइबर क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास में निजी क्षेत्र, स्टार्टअप और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी बढ़ाई जाए।
  • एमएसएमई को रक्षा आपूर्ति श्रृंखला से जोड़कर उत्पादन का आधार व्यापक किया जाए।
  • निर्यात के लिए मानकीकरण, गुणवत्ता प्रमाणन और दीर्घकालिक अंतर-सरकारी समझौतों को प्राथमिकता दी जाए।
  • तीनों सेवाओं में संयुक्त योजना और साझा प्रशिक्षण को संस्थागत रूप देकर त्रि-सेवा एकीकरण को गहरा किया जाए।
  • कर्मियों के कौशल-उन्नयन के लिए आधुनिक तकनीक पर केंद्रित प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से चलाए जाएं।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

रक्षा उत्पादन · रक्षा निर्यात · आत्मनिर्भरता · सामरिक स्वायत्तता · स्वदेशीकरण · सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची (Positive Indigenisation Lists) · रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (Defence Acquisition Procedure) · रक्षा औद्योगिक गलियारे (Defence Industrial Corridors) · iDEX (Innovations for Defence Excellence) · त्रि-सेवा एकीकरण

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 246 — संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण
  • सातवीं अनुसूची, संघ सूची — प्रविष्टि 1 (भारत की रक्षा) और प्रविष्टि 2 (सेनाएं)

अवधारणा प्रवाह

रणनीतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय सुरक्षा की आवश्यकता की पहचान  →  रक्षा बजट और पूंजी परिव्यय में वृद्धि के माध्यम से आधुनिकीकरण को वित्तीय समर्थन  →  घरेलू रक्षा उद्योग को प्रोत्साहन और स्वदेशीकरण पर बल  →  रक्षा उत्पादन का 46,429 करोड़ से 1.78 लाख करोड़ रुपये तक विस्तार  →  निर्यात में वृद्धि और वैश्विक बाज़ार में भारत की उपस्थिति का विस्तार  →  अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकी, त्रि-सेवा एकीकरण और मानव संसाधन के उन्नयन से सैन्य क्षमता का सुदृढ़ीकरण  →  2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपये निर्यात के लक्ष्य की प्राप्ति

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रक्षा संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची में सम्मिलित है।
2. रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council) की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं।
3. वर्ष 2021 में आयुध निर्माणियों को सात रक्षा लोक उपक्रमों (Defence Public Sector Undertakings) में रूपांतरित किया गया।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: रक्षा संघ सूची की प्रविष्टि 1 में आता है। कथन 2 गलत है, क्योंकि रक्षा अधिग्रहण परिषद की अध्यक्षता रक्षा मंत्री करते हैं। कथन 3 सही है, जिसमें 41 आयुध निर्माणियों का रूपांतरण सात डीपीएसयू में हुआ था। अतः सही उत्तर केवल दो है।

Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियाँ रक्षा क्षेत्र में आयात-निर्भरता घटाने में सहायक हैं।
तर्क (R): इन सूचियों में सम्मिलित वस्तुओं के लिए निर्धारित समय-सीमा के बाद उनके आयात की अनुमति नहीं दी जाती, और उन्हें देश में ही विकसित या निर्मित करना होता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, परंतु (R) सही है।

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है। — सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियाँ (2020 से) उन वस्तुओं की सूची देती हैं जिन्हें एक निश्चित समय-सीमा में स्वदेश में निर्मित करना अनिवार्य है। समय-सीमा के बाद उनका आयात सामान्यतः नहीं किया जाता। इसलिए (R), (A) की सही व्याख्या है।

Q3. भारत के रक्षा औद्योगिक गलियारों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही है?

  1. उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु
  2. केरल और कर्नाटक
  3. ओडिशा और पश्चिम बंगाल
  4. राजस्थान और गुजरात

उत्तर: उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु — रक्षा औद्योगिक गलियारे (Defence Industrial Corridors) उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में स्थापित किए गए हैं। इनका उद्देश्य रक्षा विनिर्माण को क्षेत्रीय रूप से केंद्रित कर निजी और सार्वजनिक निवेश को आकर्षित करना है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत का रक्षा उत्पादन 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया है, और रक्षा निर्यात दो हज़ार करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 40,000 करोड़ रुपये तक पहुँचा है। 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये के उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपये के निर्यात का लक्ष्य रखा गया है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की इस नीति का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या केवल उत्पादन और निर्यात के आँकड़ों में वृद्धि से सामरिक स्वायत्तता सुनिश्चित हो सकती है? अपने तर्कों के साथ उत्तर दीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की रूपरेखा:
(1) भूमिका: रक्षा संघ सूची (सातवीं अनुसूची, अनुच्छेद 246) में रक्षा विषय का स्थान; सामरिक स्वायत्तता की अवधारणा; समाचार के आँकड़े (रक्षा बजट 2026-27 लगभग 7.85 लाख करोड़ रुपये, पूंजीगत व्यय लगभग 2.19 लाख करोड़ रुपये)।
(2) नीतिगत ढाँचा: रक्षा उत्पादन और निर्यात संवर्धन नीति (DPEPP 2020) का उद्देश्य और उसके लक्ष्य; रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP 2020) में स्वदेशी श्रेणी को प्राथमिकता; सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियाँ; सामरिक भागीदारी मॉडल; रक्षा औद्योगिक गलियारे (उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु, 2018 में घोषित); iDEX (2018) द्वारा स्टार्ट-अप और नवाचार को जोड़ना; आयुध निर्माणियों का 2021 में सात डीपीएसयू में रूपांतरण; FDI की सीमा (स्वचालित मार्ग में 74 प्रतिशत)।
(3) सकारात्मक पक्ष: उत्पादन में वृद्धि, निजी क्षेत्र की भागीदारी, निर्यात में बढ़ोतरी, आयात-निर्भरता में कमी के संकेत।
(4) आलोचनात्मक पक्ष: उच्च तकनीक वाले घटकों, जेट इंजन, सेंसर और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में अब भी आयात पर निर्भरता; अनुसंधान एवं विकास और निजी क्षेत्र की क्षमता का सीमित होना; मात्रात्मक आँकड़ों और गुणात्मक स्वदेशी क्षमता के बीच अंतर; सेवाओं की आवश्यकताओं के साथ समन्वय की चुनौती। कारगिल समीक्षा समिति (1999) और नरेश चंद्र कार्य दल (2012) द्वारा रक्षा सुधारों तथा अधिग्रहण में पारदर्शिता पर दिए गए सुझावों का उल्लेख करें।
(5) संतुलित मत: उत्पादन-मूल्य आँकड़े सामरिक स्वायत्तता का संकेतक हैं, पर पूर्ण गारंटी नहीं; स्वायत्तता के लिए मुख्य तकनीकों पर नियंत्रण, प्रौद्योगिकी अंतरण की गहराई और त्रि-सेवा एकीकृत आवश्यकताओं की पूर्ति भी ज़रूरी है।
(6) निष्कर्ष: सुधार के साथ भविष्य-उन्मुख दृष्टि और नीति में निरंतरता की आवश्यकता पर बल।

स्रोत: orissapost.com


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