राज्यसभा उपाध्यक्ष ने तंजानिया में आईपीयू सभा में लिया भाग

राज्यसभा उपाध्यक्ष ने तंजानिया में आईपीयू सभा में लिया भाग

राज्यसभा उपाध्यक्ष ने तंजानिया में आईपीयू सभा में लिया भाग

भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल की IPU सभा में भागीदारीIPU सभा में भागभारतवैश्विक मुद्दों पर संवअंतर्राष्ट्रीयसंसदीय कूटनीतिबढ़ावाभारत की भूमिकामजबूत
भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल की IPU सभा में भागीदारी

✎ अंतर-संसदीय संघ (IPU) विश्व की संसदों का एक वैश्विक संगठन है जो लोकतंत्र, शांति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है, जिसमें भारत एक सक्रिय सदस्य है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध  |  GS Paper II — भारतीय राजव्यवस्था
  • Prelims: अंतर-संसदीय संघ (IPU), IPU सभा, भारत की विदेश नीति, संसदीय कूटनीति, राज्यसभा के उपसभापति, तंजानिया
  • Essay: वैश्विक शासन में संसदीय कूटनीति की भूमिका, भारत की विदेश नीति के निर्धारक तत्व

त्वरित पुनरावृत्ति: अंतर-संसदीय संघ (IPU) विश्व की संसदों का एक वैश्विक संगठन है जो लोकतंत्र, शांति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है, जिसमें भारत एक सक्रिय सदस्य है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

पृष्ठभूमि

  • अंतर-संसदीय संघ (IPU) दुनिया भर की संसदों का एक वैश्विक संगठन है, जो शांति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए काम करता है।
  • भारत IPU का एक सक्रिय सदस्य रहा है और नियमित रूप से इसकी सभाओं तथा अन्य आयोजनों में भाग लेता है।
  • संसदीय प्रतिनिधिमंडलों का आदान-प्रदान विभिन्न देशों के बीच द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • ये सभाएँ सदस्य देशों को लोकतंत्र, मानवाधिकार, सतत विकास और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर अपने विचार साझा करने का मंच प्रदान करती हैं।
  • भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अक्सर लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के उपसभापति जैसे वरिष्ठ संसदीय पदाधिकारी करते हैं, जो भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
  • ऐसी सभाओं में भागीदारी भारत को अपनी विदेश नीति के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने और वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को मजबूत करने में मदद करती है।

अंतर-संसदीय संघ (IPU) क्या है?

  • अंतर-संसदीय संघ (Inter-Parliamentary Union – IPU) एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जो विश्व की संसदों को एक साथ लाता है।
  • इसकी स्थापना 1889 में हुई थी और यह दुनिया के सबसे पुराने बहुपक्षीय संगठनों में से एक है।
  • IPU का मुख्य उद्देश्य लोकतंत्र को बढ़ावा देना, मानवाधिकारों की रक्षा करना और अंतर्राष्ट्रीय शांति तथा सहयोग को मजबूत करना है।
  • यह विभिन्न देशों के सांसदों के बीच संवाद और सहयोग के लिए एक मंच प्रदान करता है।
  • IPU संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के साथ घनिष्ठ संबंध रखता है और संयुक्त राष्ट्र महासभा में स्थायी पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त है।
  • यह लैंगिक समानता, सतत विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals – SDGs) और युवा सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर भी सक्रिय रूप से काम करता है।
  • IPU की सभाएँ वर्ष में दो बार आयोजित की जाती हैं, जहाँ सदस्य संसदें महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करती हैं और प्रस्ताव पारित करती हैं।
  • भारत IPU का एक संस्थापक सदस्य है और इसकी गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेता रहा है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
अंतर-संसदीय संघ (IPU) यह राष्ट्रीय संसदों का एक वैश्विक संगठन है, जो लोकतंत्र और संसदीय संवाद को बढ़ावा देता है।
भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल यह भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और वैश्विक मंच पर उसके विचारों का प्रतिनिधित्व करता है।
153वीं IPU सभा यह विभिन्न देशों के सांसदों को वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करने और सहयोग स्थापित करने का अवसर प्रदान करती है।
उपसभापति, राज्यसभा की भूमिका यह भारत की संसद के उच्च सदन के प्रतिनिधित्व को दर्शाता है और वैश्विक संसदीय कूटनीति में भारत की सक्रिय भागीदारी को मजबूत करता है।
अरुशा, तंजानिया में आयोजन यह अफ्रीकी महाद्वीप में संसदीय सहयोग और संवाद के महत्व को रेखांकित करता है।

महत्व

कूटनीतिक महत्व

  • भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल की IPU सभा में भागीदारी वैश्विक मंच पर भारत की सॉफ्ट पावर (Soft Power) और लोकतांत्रिक मूल्यों को प्रदर्शित करती है।
  • यह विभिन्न देशों के साथ संसदीय कूटनीति (Parliamentary Diplomacy) को बढ़ावा देती है, जिससे द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संबंध मजबूत होते हैं।
  • यह भारत को वैश्विक शासन (Global Governance) में अपनी भूमिका को सुदृढ़ करने और अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों को आकार देने में सहायता करती है।

लोकतांत्रिक महत्व

  • IPU जैसे मंच संसदीय लोकतंत्र (Parliamentary Democracy) के सिद्धांतों को मजबूत करते हैं और विभिन्न देशों में लोकतांत्रिक संस्थाओं के विकास को प्रोत्साहित करते हैं।
  • यह सांसदों को सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) का आदान-प्रदान करने और विधायी प्रक्रियाओं में सुधार करने का अवसर प्रदान करता है।
  • यह वैश्विक चुनौतियों जैसे जलवायु परिवर्तन, गरीबी और असमानता पर संसदीय प्रतिक्रियाओं को विकसित करने में मदद करता है।

बहुपक्षीय सहयोग

  • यह मंच विभिन्न देशों के बीच सहयोग और समझ को बढ़ावा देता है, जिससे वैश्विक शांति और सुरक्षा में योगदान मिलता है।
  • यह भारत को संयुक्त राष्ट्र (United Nations) और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ समन्वय स्थापित करने में सहायता करता है।
  • यह भारत के ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के दर्शन को वैश्विक स्तर पर प्रसारित करने का एक माध्यम है।

चुनौतियाँ

1. वैश्विक सर्वसम्मति का अभाव

  • विभिन्न देशों के बीच राष्ट्रीय हितों और प्राथमिकताओं में भिन्नता के कारण वैश्विक मुद्दों पर सर्वसम्मति बनाना एक चुनौती है।
  • भू-राजनीतिक तनाव और शक्ति संतुलन में बदलाव अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बाधित कर सकते हैं।

2. प्रभावी कार्यान्वयन

  • IPU जैसे मंचों पर लिए गए निर्णयों और संकल्पों को सदस्य देशों की राष्ट्रीय नीतियों में प्रभावी ढंग से लागू करना एक चुनौती है।
  • कानूनी बाध्यता की कमी के कारण इन संकल्पों का पालन सुनिश्चित करना कठिन हो सकता है।

3. विकासशील देशों की आवाज

  • विकासशील देशों, विशेषकर ग्लोबल साउथ (Global South) के देशों की चिंताओं और प्राथमिकताओं को वैश्विक एजेंडे में पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिलाना एक चुनौती है।
  • संसाधनों और क्षमता की कमी के कारण इन देशों की भागीदारी सीमित हो सकती है।

4. डिजिटल विभाजन

  • डिजिटल प्रौद्योगिकियों तक पहुंच में असमानता संसदीय संवाद और सहयोग में बाधा उत्पन्न कर सकती है, खासकर दूरस्थ भागीदारी के संदर्भ में।
  • साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता से संबंधित चिंताएं भी एक चुनौती हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
वैश्विक ध्रुवीकरण बढ़ता भू-राजनीतिक ध्रुवीकरण अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सर्वसम्मति को कमजोर कर सकता है।
प्रतिनिधित्व की असमानता छोटे और विकासशील देशों की आवाज को बड़े और विकसित देशों के बराबर महत्व देना एक चुनौती है।
संकल्पों का कार्यान्वयन IPU द्वारा पारित संकल्पों को सदस्य देशों की राष्ट्रीय नीतियों में प्रभावी ढंग से एकीकृत करने में कठिनाई।
संसाधन और क्षमता कई देशों के पास अंतर्राष्ट्रीय संसदीय मंचों में प्रभावी ढंग से भाग लेने के लिए पर्याप्त संसाधन और क्षमता का अभाव है।
सूचना का प्रसार IPU की चर्चाओं और परिणामों को राष्ट्रीय संसदों और आम जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना।

आगे की राह

  • भारत को IPU जैसे मंचों पर सक्रिय रूप से भाग लेकर वैश्विक मुद्दों पर अपनी स्थिति को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना चाहिए।
  • विकासशील देशों, विशेषकर ग्लोबल साउथ के देशों के साथ सहयोग को मजबूत करना चाहिए ताकि उनकी चिंताओं को वैश्विक एजेंडे में शामिल किया जा सके।
  • संसदीय कूटनीति के माध्यम से द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संबंधों को और गहरा करना चाहिए।
  • लोकतांत्रिक मूल्यों और सुशासन (Good Governance) के सिद्धांतों को बढ़ावा देने में नेतृत्व की भूमिका निभानी चाहिए।
  • जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और सतत विकास (Sustainable Development) जैसे साझा वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करना चाहिए।
  • IPU के निर्णयों और संकल्पों को राष्ट्रीय विधायी प्रक्रियाओं में शामिल करने के तरीकों का पता लगाना चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

अंतर-संसदीय संघ (IPU) · वैश्विक संसदीय कूटनीति · बहुपक्षवाद · सतत विकास लक्ष्य (SDGs) · लोकतंत्र को मजबूत करना · अंतर्राष्ट्रीय सहयोग · संसदीय प्रतिनिधिमंडल · संयुक्त राष्ट्र · जलवायु परिवर्तन · शांति और सुरक्षा

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51’, ‘note’: ‘अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 73’, ‘note’: ‘संघ की कार्यकारी शक्ति का विस्तार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 253’, ‘note’: ‘अंतर्राष्ट्रीय समझौतों को लागू करने की शक्ति’}

अवधारणा प्रवाह

भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल IPU सभा में भाग लेता है।  →  वैश्विक मुद्दों पर अंतर्राष्ट्रीय सांसदों के साथ संवाद होता है।  →  भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों और विदेश नीति का प्रदर्शन होता है।  →  बहुपक्षीय सहयोग और संसदीय कूटनीति को बढ़ावा मिलता है।  →  वैश्विक शासन और शांति में भारत की भूमिका मजबूत होती है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. अंतर-संसदीय संघ (IPU) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. IPU एक वैश्विक संगठन है जो दुनिया के संसदों को एक साथ लाता है।
2. यह संयुक्त राष्ट्र (UN) का एक विशेष अभिकरण (Specialized Agency) है।
3. इसका मुख्य उद्देश्य लोकतंत्र और संसदीय संवाद को बढ़ावा देना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि IPU वास्तव में दुनिया के संसदों को एक साथ लाने वाला एक वैश्विक संगठन है। कथन 2 गलत है क्योंकि IPU संयुक्त राष्ट्र का एक विशेष अभिकरण नहीं है, बल्कि यह संयुक्त राष्ट्र के साथ घनिष्ठ संबंध रखने वाला एक स्वतंत्र संगठन है। कथन 3 सही है क्योंकि IPU का मुख्य उद्देश्य लोकतंत्र, मानवाधिकार और संसदीय संवाद को बढ़ावा देना है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से अंतर-संसदीय संघ (IPU) के उद्देश्यों में शामिल है/हैं?
1. शांति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना।
2. प्रतिनिधि लोकतंत्र को मजबूत करना।
3. मानवाधिकारों का सम्मान सुनिश्चित करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनें:

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — IPU के उद्देश्यों में शांति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना, प्रतिनिधि लोकतंत्र को मजबूत करना और मानवाधिकारों का सम्मान सुनिश्चित करना शामिल है। ये सभी इसके मूल सिद्धांतों का हिस्सा हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ अंतर-संसदीय संघ (IPU) की भूमिका का विश्लेषण करें और बताएं कि यह वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करने में कैसे योगदान देता है। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **परिचय:** अंतर-संसदीय संघ (IPU) का संक्षिप्त परिचय, इसकी स्थापना और सदस्य देशों का उल्लेख।
2. **IPU की भूमिका:**
* **संसदीय कूटनीति और संवाद:** विभिन्न देशों के सांसदों के लिए एक मंच प्रदान करना।
* **लोकतंत्र को मजबूत करना:** लोकतांत्रिक संस्थानों, प्रक्रियाओं और मानवाधिकारों को बढ़ावा देना।
* **अंतर्राष्ट्रीय सहयोग:** वैश्विक चुनौतियों जैसे जलवायु परिवर्तन, सतत विकास लक्ष्यों (SDGs), शांति और सुरक्षा पर सहयोग।
* **संयुक्त राष्ट्र के साथ संबंध:** संयुक्त राष्ट्र के कार्यों में संसदीय आयाम जोड़ना और उसके प्रस्तावों को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने में सहायता करना।
* **कानून निर्माण और नीति निर्माण में सांसदों की भूमिका:** राष्ट्रीय संसदों को अंतर्राष्ट्रीय संधियों और समझौतों पर विचार-विमर्श करने के लिए प्रोत्साहित करना।
3. **वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद में योगदान:**
* **प्रतिनिधित्व और वैधता:** वैश्विक निर्णयों में जनता की आवाज को शामिल करना।
* **उत्तरदायित्व और पारदर्शिता:** अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और सरकारों की जवाबदेही बढ़ाना।
* **सर्वसम्मति निर्माण:** विभिन्न देशों के बीच आम सहमति बनाने में सहायता करना।
* **अंतर्राष्ट्रीय कानून का अनुपालन:** राष्ट्रीय संसदों के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और मानदंडों को लागू करवाना।
4. **चुनौतियाँ और भविष्य:** IPU के समक्ष आने वाली चुनौतियाँ और इसकी भविष्य की प्रासंगिकता पर संक्षिप्त टिप्पणी।
5. **निष्कर्ष:** IPU के महत्व को दोहराते हुए एक संतुलित निष्कर्ष।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


Related guides on our sites

No Comments

Post A Comment