05 Oct न्यायमूर्ति पी. सैम कोशी बने तेलंगाना उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश
✎ उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा संविधान के अनुच्छेद 223 के तहत की जाती है, ताकि मुख्य न्यायाधीश के पद की रिक्ति या अनुपस्थिति में न्यायिक कार्यों की निरंतरता सुनिश्चित की जा सके।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान: महत्वपूर्ण प्रावधान, कार्यपालिका और न्यायपालिका का संगठन एवं कार्य
- Prelims: कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश, उच्च न्यायालय, अनुच्छेद 223, भारत का राष्ट्रपति, न्यायाधीशों की नियुक्ति, न्यायिक प्रशासन
- Essay: भारतीय न्यायपालिका की स्वतंत्रता और जवाबदेही, संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों में कार्यपालिका की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा संविधान के अनुच्छेद 223 के तहत की जाती है, ताकि मुख्य न्यायाधीश के पद की रिक्ति या अनुपस्थिति में न्यायिक कार्यों की निरंतरता सुनिश्चित की जा सके।
यह खबर चर्चा में क्यों?
तेलंगाना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अपारेष कुमार सिंह को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किए जाने के बाद, न्यायमूर्ति पी. सैम कोशी को तेलंगाना उच्च न्यायालय का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (Acting Chief Justice) नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की गई है और विधि एवं न्याय मंत्रालय ने इसकी अधिसूचना जारी की है। यह घटनाक्रम उच्च न्यायालयों में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों और प्रक्रिया को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
पृष्ठभूमि
- भारतीय संविधान के तहत, प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय (High Court) का प्रावधान है।
- उच्च न्यायालय देश की न्यायिक प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और राज्यों में सर्वोच्च न्यायिक प्राधिकरण के रूप में कार्य करते हैं।
- उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और संबंधित राज्य के राज्यपाल के परामर्श से की जाती है।
- मुख्य न्यायाधीश की अनुपस्थिति या पद रिक्त होने की स्थिति में, संविधान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति का प्रावधान करता है।
- न्यायाधीशों की पदोन्नति, स्थानांतरण और सेवानिवृत्ति के कारण उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त हो सकता है।
- उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त होने पर न्यायिक प्रशासन की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति आवश्यक होती है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश क्या होता है?
- कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 223 के तहत की जाती है।
- यह प्रावधान तब लागू होता है जब उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त हो, या जब मुख्य न्यायाधीश अनुपस्थित हों या अपने पद के कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ हों।
- कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- इस पद पर आमतौर पर उच्च न्यायालय के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को नियुक्त किया जाता है।
- कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के पास स्थायी मुख्य न्यायाधीश के समान सभी शक्तियां और कार्य होते हैं।
- यह नियुक्ति तब तक प्रभावी रहती है जब तक स्थायी मुख्य न्यायाधीश पदभार ग्रहण नहीं कर लेते या मुख्य न्यायाधीश अपनी अनुपस्थिति समाप्त कर अपने कर्तव्यों को फिर से शुरू नहीं कर देते।
- यह व्यवस्था न्यायिक कार्यों की निरंतरता और उच्च न्यायालय के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति | उच्च न्यायालयों के सुचारु कामकाज को सुनिश्चित करता है, विशेषकर जब स्थायी मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त हो। |
| राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति | यह दर्शाता है कि उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों और मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति में कार्यपालिका की भूमिका होती है, जो संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है। |
| सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नति के बाद रिक्ति | न्यायिक पदानुक्रम में प्रगति को दर्शाता है, जहाँ उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत किया जा सकता है। |
| कॉलेजियम प्रणाली की भूमिका | सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम द्वारा न्यायाधीशों की पदोन्नति की सिफारिश न्यायिक नियुक्तियों में न्यायपालिका की प्रमुख भूमिका को रेखांकित करती है। |
| कानून और न्याय मंत्रालय की अधिसूचना | न्यायिक नियुक्तियों को औपचारिक रूप देने और सार्वजनिक करने में सरकारी तंत्र की भूमिका को स्पष्ट करता है। |
महत्व
न्यायिक प्रशासन
- कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति उच्च न्यायालयों में न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता सुनिश्चित करती है, जिससे न्याय वितरण प्रणाली में कोई व्यवधान नहीं आता है।
- यह प्रक्रिया उच्च न्यायालयों के भीतर नेतृत्व परिवर्तन को सुचारु बनाती है, खासकर जब स्थायी मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त हो जाता है।
संवैधानिक प्रक्रिया
- यह घटना भारत के संविधान में निहित न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया को दर्शाती है, जिसमें राष्ट्रपति की भूमिका और कॉलेजियम प्रणाली की सिफारिशें शामिल हैं।
- न्यायाधीशों की पदोन्नति और कार्यवाहक नियुक्तियाँ न्यायिक स्वतंत्रता और जवाबदेही के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैं।
न्यायिक पदानुक्रम
- उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत होना न्यायिक पदानुक्रम में प्रगति का एक सामान्य और महत्वपूर्ण पहलू है, जो अनुभवी न्यायाधीशों को देश के सर्वोच्च न्यायालय में सेवा करने का अवसर प्रदान करता है।
- यह न्यायिक प्रणाली में योग्यता और अनुभव के महत्व को दर्शाता है, जहाँ न्यायाधीशों को उनके प्रदर्शन और वरिष्ठता के आधार पर उच्च पदों पर पदोन्नत किया जाता है।
चुनौतियाँ
1. न्यायिक रिक्तियों का प्रबंधन
- उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के पदों की रिक्तियाँ न्यायपालिका पर कार्यभार बढ़ाती हैं, जिससे मामलों के निपटान में देरी हो सकती है।
- कार्यवाहक नियुक्तियाँ अस्थायी समाधान प्रदान करती हैं, लेकिन स्थायी नियुक्तियों में देरी से न्यायिक प्रशासन की दक्षता प्रभावित हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय न्यायपालिका: संरचना, कार्यप्रणाली और मुद्दे
2. कॉलेजियम प्रणाली की पारदर्शिता
- कॉलेजियम प्रणाली की कार्यप्रणाली और सिफारिशों की पारदर्शिता को लेकर समय-समय पर चिंताएँ उठाई जाती रही हैं, जिससे नियुक्तियों की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।
- न्यायिक नियुक्तियों में कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच संभावित गतिरोध भी एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: न्यायिक नियुक्तियाँ और कॉलेजियम प्रणाली
3. न्यायिक स्वतंत्रता और जवाबदेही
- न्यायिक स्वतंत्रता बनाए रखना महत्वपूर्ण है, लेकिन साथ ही नियुक्तियों और पदोन्नति में जवाबदेही सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
- कार्यवाहक नियुक्तियों की अवधि और उनके अधिकार क्षेत्र को लेकर स्पष्टता की कमी भी एक चुनौती हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: न्यायिक स्वतंत्रता और जवाबदेही
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| न्यायिक रिक्तियाँ | न्याय वितरण में देरी और न्यायपालिका पर बढ़ता बोझ। |
| कॉलेजियम प्रणाली की पारदर्शिता | नियुक्तियों की प्रक्रिया में अस्पष्टता और संभावित पक्षपात का आरोप। |
| कार्यवाहक नियुक्तियों की अवधि | लंबे समय तक कार्यवाहक पद पर रहने से प्रशासनिक स्थिरता पर असर। |
| केंद्र-न्यायपालिका संबंध | नियुक्तियों को लेकर कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच संभावित गतिरोध। |
आगे की राह
- न्यायिक रिक्तियों को समयबद्ध तरीके से भरने के लिए कॉलेजियम प्रणाली और सरकार के बीच समन्वय को मजबूत करना।
- न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए कॉलेजियम प्रणाली की कार्यप्रणाली में सुधार करना।
- कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और समय-सीमा निर्धारित करना ताकि प्रशासनिक अनिश्चितता कम हो।
- न्यायिक नियुक्तियों के लिए एक राष्ट्रीय न्यायिक आयोग (National Judicial Commission) जैसे वैकल्पिक तंत्रों पर विचार करना, जो न्यायिक स्वतंत्रता और जवाबदेही दोनों को सुनिश्चित करे।
- उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि करना ताकि लंबित मामलों के बोझ को कम किया जा सके और न्याय वितरण प्रणाली को मजबूत किया जा सके।
- न्यायिक अधिकारियों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना ताकि वे उच्च पदों के लिए तैयार हो सकें।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
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संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 217’, ‘note’: ‘उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 223’, ‘note’: ‘कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 124’, ‘note’: ‘सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति’}
अवधारणा प्रवाह
तेलंगाना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नति। → मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त होना। → राष्ट्रपति द्वारा कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति। → कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा अधिसूचना जारी करना। → उच्च न्यायालय के न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता सुनिश्चित करना।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के राष्ट्रपति उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करते हैं।
2. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति तब की जाती है जब मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त हो या वे अपने कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ हों।
3. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को मुख्य न्यायाधीश के समान शक्तियाँ और अधिकार प्राप्त होते हैं।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 223 के तहत, राष्ट्रपति उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करते हैं। कथन 2 भी सही है। यह नियुक्ति मुख्य न्यायाधीश के पद रिक्त होने या उनके कर्तव्यों का निर्वहन करने में असमर्थ होने पर की जाती है। कथन 3 भी सही है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को मुख्य न्यायाधीश के समान ही सभी शक्तियाँ और अधिकार प्राप्त होते हैं, जब तक वे उस पद पर कार्य करते हैं।
Q2. भारत के संविधान के किस अनुच्छेद के तहत उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति का प्रावधान है?
- अनुच्छेद 214
- अनुच्छेद 217
- अनुच्छेद 223
- अनुच्छेद 226
उत्तर: अनुच्छेद 223 — अनुच्छेद 223 ‘कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति’ से संबंधित है। यह प्रावधान करता है कि जब किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त हो या जब ऐसा कोई मुख्य न्यायाधीश अनुपस्थिति के कारण या अन्यथा अपने पद के कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ हो, तब राष्ट्रपति उस न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों में से किसी एक को ऐसे कर्तव्यों का पालन करने के लिए नियुक्त कर सकता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ उच्च न्यायालय में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के संवैधानिक प्रावधानों की व्याख्या कीजिए। न्यायिक स्वतंत्रता और उच्च न्यायपालिका की कार्यप्रणाली पर ऐसी नियुक्तियों के संभावित प्रभावों का भी विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के संदर्भ और हालिया घटना का उल्लेख करें। मुख्य भाग में, अनुच्छेद 223 के तहत संवैधानिक प्रावधानों का विस्तार से वर्णन करें, जिसमें नियुक्ति की शर्तें और राष्ट्रपति की भूमिका शामिल हो। इसके बाद, न्यायिक स्वतंत्रता पर कार्यवाहक नियुक्तियों के संभावित प्रभावों का विश्लेषण करें, जिसमें अल्पकालिक कार्यकाल, नीतिगत निर्णयों पर प्रभाव और न्यायाधीशों की पदोन्नति पर असर जैसे बिंदु शामिल हों। उच्च न्यायपालिका की कार्यप्रणाली पर इसके प्रभावों पर भी चर्चा करें, जैसे प्रशासनिक निरंतरता और मामलों के निपटान पर प्रभाव। निष्कर्ष में, इन नियुक्तियों के महत्व और चुनौतियों को संतुलित करते हुए एक संक्षिप्त सारांश प्रस्तुत करें।
स्रोत: The Hindu
Telangana PCS (TGPSC (TSPSC)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: न्यायमूर्ति पी. सैम कोशी को हाल ही में किस उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया है?
- तेलंगाना उच्च न्यायालय
- आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय
- कर्नाटक उच्च न्यायालय
- केरल उच्च न्यायालय
उत्तर: तेलंगाना उच्च न्यायालय — न्यायमूर्ति पी. सैम कोशी को 15 मार्च 2024 को तेलंगाना उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया।
Mains: तेलंगाना उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति पी. सैम कोशी की नियुक्ति के महत्व और इसके राज्य के न्यायिक प्रशासन पर पड़ने वाले प्रभाव का विश्लेषण कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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