28 Oct कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कानून उल्लंघन करने वाले पीजी आवासों को सील करने की अनुमति दी
✎ शहरी स्थानीय निकायों के कार्य 74वें संविधान संशोधन (1992) के अंतर्गत अनुच्छेद 243W और बारहवीं अनुसूची से तय होते हैं, जबकि इनकी वास्तविक शक्तियाँ राज्य विधान से प्राप्त होती हैं; उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के तहत ऐसे प्रवर्तन की…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — शासन एवं संविधान (स्थानीय शासन, शहरी स्थानीय निकाय, न्यायपालिका की भूमिका) | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र I — समाज (शहरीकरण, प्रवासी श्रमिकों और छात्रों के लिए किफायती आवास) | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — आपदा प्रबंधन और सुरक्षा (भवन सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा)
- Prelims: 74वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992, अनुच्छेद 243W और बारहवीं अनुसूची, अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालय की रिट शक्ति), जनहित याचिका (PIL) और सतत परमादेश (Continuing Mandamus), पेइंग गेस्ट (PG) आवास, मॉडल किरायेदारी अधिनियम, 2019, न्यायिक समीक्षा, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत
- Essay: शहरी स्थानीय निकायों का सशक्तीकरण: कागज़ी अधिकार और वास्तविक क्षमता, नियामक प्रवर्तन और सस्ते आवास की उपलब्धता के बीच संतुलन
त्वरित पुनरावृत्ति: शहरी स्थानीय निकायों के कार्य 74वें संविधान संशोधन (1992) के अंतर्गत अनुच्छेद 243W और बारहवीं अनुसूची से तय होते हैं, जबकि इनकी वास्तविक शक्तियाँ राज्य विधान से प्राप्त होती हैं; उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के तहत ऐसे प्रवर्तन की निगरानी कर सकता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण (GBA) और उसके अधीन आने वाले नगर निगमों को उन पेइंग गेस्ट (PG) आवासों को सील करने की अनुमति दी है, जो न्यायालय में याचिकाकर्ता नहीं हैं, जिन्हें नोटिस जारी हो चुके हैं और जो लागू मानदंडों का उल्लंघन करते हुए संचालित हो रहे हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज की पीठ ने याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दिया। न्यायालय पहले से ही PG संचालन में मानदंडों के पालन की निगरानी कर रहा है और सुरक्षा सहित अन्य पहलुओं पर अलग से दिशा-निर्देश भी जारी कर रहा है। नगर निकाय की ओर से कहा गया कि वह उन व्यवसायों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के लिए तैयार है, जो लागू नियमों और पूर्व बीबीएमपी (BBMP) तथा न्यायालय के निर्देशों के विपरीत चल रहे हैं। याचिकाकर्ता PG को अनुपालन के लिए समय देने का अनुरोध स्वीकार किया गया। अगली सुनवाई 4 नवंबर तक स्थगित की गई। इस प्रकरण में मुख्य बिंदु यह है कि नियामक प्रवर्तन की शक्ति नगर निकाय के पास है, जबकि उच्च न्यायालय उसके उपयोग की निगरानी कर रहा है।
पृष्ठभूमि
- बेंगलुरु में शहरी प्रशासन का ढाँचा बदला है। पहले बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP) यह दायित्व निभाती थी। अब ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण (GBA) और उसके अधीन नगर निगम यह भूमिका निभाते हैं। इसी कारण आदेश में पूर्व बीबीएमपी के निर्देशों का उल्लेख है।
- बेंगलुरु जैसे तेज़ी से बढ़ते महानगरों में शिक्षा और रोज़गार के लिए बाहर से आने वाले छात्र और कामकाजी युवा बड़ी संख्या में PG आवास में रहते हैं। इससे किफायती आवास की माँग बढ़ी है और अनेक PG बिना पर्याप्त अनुमति या सुरक्षा मानकों के चल रहे हैं।
- अग्नि सुरक्षा, निकास मार्ग, वेंटिलेशन, पानी और स्वच्छता जैसे मानक भवन उप-नियमों और नगर निकाय के व्यापार या संचालन संबंधी नियमों से तय होते हैं। ऐसे मानकों का उल्लंघन सीधे निवासियों की सुरक्षा से जुड़ा है।
- उच्च न्यायालय पहले ही इन याचिकाओं में मानदंड-पालन की निगरानी कर रहा है। ऐसी स्थिति में न्यायालय नगर निकाय की कार्रवाई को दिशा देता है और उसके उपयोग की सीमा भी तय करता है।
- नगर निकायों को प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकारें अपने विधानों के माध्यम से उन्हें कार्य और अधिकार सौंपती हैं। इसलिए निकाय की शक्तियाँ राज्य कानून से निर्धारित होती हैं, न कि केवल किसी न्यायिक आदेश से।
पेइंग गेस्ट (PG) आवास और उनका नियमन क्या है?
- पेइंग गेस्ट (PG) आवास ऐसा किराये का आवास है, जिसमें एक ही भवन में कई व्यक्ति भुगतान पर रहते हैं। सामान्यतः इसमें भोजन, सफाई या अन्य सुविधाएँ भी शामिल होती हैं।
- PG का नियमन मुख्यतः राज्य और स्थानीय कानूनों से होता है। इसमें भवन उप-नियम, अग्नि सुरक्षा, स्वच्छता और व्यापार या संचालन की अनुमति जैसे पहलू आते हैं।
- संविधान के अनुच्छेद 243W के अनुसार राज्य विधानमंडल नगरपालिकाओं को ऐसी शक्तियाँ और दायित्व दे सकता है, जो स्वशासन की इकाई के रूप में कार्य करने के लिए आवश्यक हों। बारहवीं अनुसूची में नगरपालिकाओं के 18 विषय सूचीबद्ध हैं, जिनमें नगर नियोजन, भूमि उपयोग का नियमन और जन स्वास्थ्य शामिल हैं।
- 74वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के द्वारा संविधान में भाग IX-A जोड़ा गया और नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा मिला। इसी कारण नगर निकाय नियमों को लागू करने का वैधानिक आधार पाते हैं।
- सील करना (Sealing) प्रशासनिक प्रवर्तन का एक उपाय है। इसका प्रयोग तभी उचित है, जब संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर दिया गया हो और कानूनी प्रक्रिया का पालन हुआ हो। यहाँ प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) का सिद्धांत प्रासंगिक है।
- अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों और अन्य कानूनी अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट जारी कर सकता है। जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से वह सार्वजनिक हित के मामलों में निगरानी भी कर सकता है। सतत परमादेश (Continuing Mandamus) के तहत न्यायालय किसी प्राधिकरण से नियत अवधि में अनुपालन रिपोर्ट मँगवा सकता है।
- न्यायालय की भूमिका प्रशासनिक निर्णय को प्रतिस्थापित करने की नहीं होती। न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) का उद्देश्य यह देखना है कि प्रशासनिक कार्रवाई विधि-सम्मत, उचित और मनमानी से मुक्त हो।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| न्यायिक निगरानी में प्रवर्तन | उच्च न्यायालय याचिकाओं की सुनवाई के दौरान पीजी (PG) आवासों में नियमों के पालन की निगरानी कर रहा है। यह न्यायालय द्वारा प्रवर्तन की निगरानी का व्यावहारिक उदाहरण है। |
| गैर-पक्षकार प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की अनुमति | आदेश केवल याचिकाकर्ता पीजी तक सीमित नहीं है। जो आवास इस कार्यवाही के पक्षकार नहीं हैं और उल्लंघन कर रहे हैं, उनके विरुद्ध भी ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण (Greater Bengaluru Authority) (GBA) और उसके घटक निगम कार्रवाई कर सकते हैं। |
| आवश्यक नगर निकाय की भूमिका | GBA और उसके घटक निगमों को नोटिस की अवहेलना करने वाले आवासों को सील करने की अनुमति दी गई है। इससे नगर निकायों की प्रवर्तन शक्ति की पुष्टि होती है। |
| अनुपालन हेतु समय देना | याचिकाकर्ता पीजी को मानदंडों के पालन के लिए समय दिया गया है। इससे न्यायिक विवेक और प्रक्रियागत न्याय का संतुलन दिखता है। |
| सुरक्षा दिशानिर्देश | न्यायालय ने पीजी से जुड़े सुरक्षा और अन्य पहलुओं पर अलग दिशानिर्देश जारी किए हैं, जो GBA के मानदंडों के अतिरिक्त हैं। इससे आवासीय सुरक्षा शासन का विषय बनती है। |
महत्व
विधिक एवं संवैधानिक
- न्यायालय द्वारा सतत निगरानी (Continuing Mandamus) की प्रवृत्ति दिखती है, जिसमें आदेश के बाद भी प्रवर्तन की प्रगति पर सुनवाई जारी रहती है।
- नगर निकायों की वैधानिक शक्तियों को न्यायिक स्वीकृति मिलती है, जिससे उनके आदेशों की वैधता मज़बूत होती है।
- पूर्ववर्ती BBMP के निर्देश और न्यायालय के आदेश दोनों को लागू करने का आधार बनता है, जिससे प्रशासनिक निरंतरता बनी रहती है।
नगरीय प्रशासन
- बेंगलुरु जैसे तेज़ी से बढ़ते महानगर में आवासीय व्यवसायों का नियमन नगर निकाय की प्रमुख जिम्मेदारी है।
- GBA और उसके घटक निगमों के बीच समन्वित प्रवर्तन से नगरीय शासन में स्पष्ट उत्तरदायित्व तय होता है।
सामाजिक एवं सुरक्षा
- पीजी आवासों में रहने वाले छात्रों और कामकाजी लोगों की सुरक्षा और स्वच्छता सीधे नियमों के पालन पर निर्भर करती है।
- सुरक्षा दिशानिर्देशों से आवासीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा होती है और अनियमित आवासों पर रोक लगती है।
आर्थिक
- नियमित पीजी व्यवसाय से किराया-आधारित आवास बाज़ार में पारदर्शिता आती है और उपभोक्ता विश्वास बढ़ता है।
- अनुपालन की लागत के कारण छोटे संचालकों पर दबाव आ सकता है, इसलिए नीति में संतुलन आवश्यक है।
चुनौतियाँ
1. अनियमित पीजी क्षेत्र का विस्तार
- बड़ी संख्या में पीजी आवास बिना पंजीकरण या निर्धारित मानदंडों के संचालित हो सकते हैं, जिससे निरीक्षण और निगरानी कठिन हो जाती है।
- नोटिस के बावजूद व्यवसाय जारी रहना यह दर्शाता है कि प्रवर्तन की नियमित प्रणाली कमज़ोर है।
यूपीएससी लिंक: शासन में प्रशासनिक सुधार और प्रवर्तन तंत्र (GS-II)
2. प्रवर्तन क्षमता और संसाधनों की सीमा
- सील करने जैसी कार्रवाई के लिए पर्याप्त कर्मचारी, निरीक्षण तंत्र और प्रशिक्षित अधिकारी आवश्यक हैं।
- एक साथ कई आवासों पर कार्रवाई में विधिक चुनौतियाँ और कानून-व्यवस्था संबंधी जोखिम भी जुड़े रहते हैं।
यूपीएससी लिंक: स्थानीय शासन की वित्तीय और प्रशासनिक क्षमता (GS-II)
3. नगर निकायों में संस्थागत परिवर्तन
- पूर्ववर्ती BBMP से GBA और घटक निगमों की ओर संक्रमण के दौरान अधिकार-क्षेत्र और नियमों की स्पष्टता आवश्यक है।
- पुराने निर्देशों और नए मानदंडों के बीच सामंजस्य न होने पर भ्रम और मुकदमेबाज़ी बढ़ सकती है।
यूपीएससी लिंक: नगरीय स्थानीय शासन की संरचना और अधिकार-क्षेत्र (GS-II)
4. सुरक्षा और उपभोक्ता हितों में संतुलन
- सुरक्षा और स्वच्छता के कठोर मानक आवश्यक हैं, किंतु उनका अनुपालन सस्ते आवास के विकल्प को सीमित न करे, यह भी देखना होगा।
- छोटे और असंगठित संचालकों के लिए अनुपालन की प्रक्रिया सरल और समयबद्ध होनी चाहिए।
यूपीएससी लिंक: नागरिक सुविधाएँ और सामाजिक न्याय से जुड़े नीतिगत संतुलन (GS-II)
5. विभिन्न प्राधिकरणों के बीच समन्वय
- पीजी आवास के संचालन में नगर निकाय, अग्निशमन, भवन उपविधि और अन्य विभागों की भूमिकाएँ जुड़ी होती हैं।
- एकीकृत एकल-खिड़की प्रक्रिया के अभाव में अनुपालन का बोझ संचालकों और प्रशासन दोनों पर पड़ता है।
यूपीएससी लिंक: सहकारी संघवाद और विभागीय समन्वय (GS-II)
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| समस्या | चिंता |
|---|---|
| अवैध या अपंजीकृत संचालन | नियमों से बाहर चल रहे आवास सुरक्षा और स्वच्छता के जोखिम बढ़ाते हैं। |
| सीमित प्रवर्तन क्षमता | निरीक्षण और सील करने की कार्रवाई के लिए पर्याप्त मानव और तकनीकी संसाधन चाहिए। |
| संस्थागत संक्रमण | BBMP से GBA की ओर परिवर्तन में अधिकार-क्षेत्र और पुराने निर्देशों की स्थिति अस्पष्ट हो सकती है। |
| अनुपालन की लागत | छोटे संचालकों के लिए मानदंडों का पालन कठिन हो सकता है, जिससे आवास की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। |
| विभागीय समन्वय का अभाव | एक से अधिक प्राधिकरणों की भूमिका से प्रक्रिया जटिल होती है और देरी होती है। |
आगे की राह
- पीजी आवासों का अनिवार्य पंजीकरण और एक केंद्रीकृत डिजिटल सूची तैयार की जाए, ताकि नियमों के पालन की निगरानी सरल हो।
- GBA और घटक निगमों के बीच प्रवर्तन की स्पष्ट भूमिकाएँ और समन्वय-तंत्र निर्धारित किए जाएँ।
- सुरक्षा, अग्निशमन और स्वच्छता के मानकों की जाँच-सूची (checklist) सार्वजनिक की जाए, ताकि संचालक पहले से तैयारी कर सकें।
- छोटे संचालकों के लिए चरणबद्ध अनुपालन और समयसीमा का प्रावधान हो, जिससे सस्ते आवास की उपलब्धता बनी रहे।
- नोटिस, सुनवाई और कार्रवाई की प्रक्रिया की समयबद्धता तय की जाए, ताकि लंबित मामलों की संख्या घटे।
- निवासियों के लिए शिकायत-निवारण की सरल व्यवस्था हो, जिससे उपभोक्ता सीधे अनियमितताओं की सूचना दे सकें।
- नगर निकायों के कर्मचारियों के लिए निरीक्षण और प्रवर्तन में प्रशिक्षण तथा तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाए।
- न्यायालय के दिशानिर्देशों और नगर निकाय के उपविधियों के बीच सामंजस्य सुनिश्चित करने हेतु एक स्पष्ट नियामक ढाँचा बनाया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
स्थानीय स्वशासन · 74वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 · अनुच्छेद 243W · बारहवीं अनुसूची · ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण (GBA) · पीजी आवास (Paying Guest Accommodation) का नियमन · अनुच्छेद 226 और परमादेश (Mandamus) · अनुच्छेद 19(1)(छ) और अनुच्छेद 19(6) · अनुच्छेद 21 और प्रक्रियागत न्याय · नैसर्गिक न्याय (Natural Justice) · सार्वजनिक सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा मानक · न्यायिक सक्रियता (Judicial Activism)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 226: उच्च न्यायालय की रिट शक्ति, याचिकाओं पर आदेश
- अनुच्छेद 243W: नगरपालिकाओं को शक्ति व दायित्व देना
- अनुच्छेद 19(1)(छ): व्यवसाय की स्वतंत्रता, उचित प्रतिबंध अधीन
- अनुच्छेद 21: आवासीय जीवन में सुरक्षा और गरिमा
अवधारणा प्रवाह
पीजी आवासों द्वारा नगर निकाय के मानदंडों और पूर्व निर्देशों का उल्लंघन → नगर निकाय (GBA और घटक निगम) द्वारा नोटिस जारी करना → पीजी संचालकों द्वारा उच्च न्यायालय में याचिकाएँ दाखिल करना → उच्च न्यायालय द्वारा अनुपालन हेतु समय देना और सुरक्षा दिशानिर्देश जारी करना → गैर-पक्षकार उल्लंघनकर्ता आवासों पर नगर निकाय द्वारा सील करने जैसी प्रवर्तन कार्रवाई → न्यायालय की निगरानी में नियमों का पालन और अगली सुनवाई (4 नवंबर) में प्रगति की समीक्षा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा संविधान में भाग IX-क जोड़ा गया, जो नगरपालिकाओं से संबंधित है।
2. संविधान की बारहवीं अनुसूची में नगरपालिकाओं के कार्य सूचीबद्ध हैं।
3. अनुच्छेद 243W के अंतर्गत राज्य विधानमंडल नगरपालिकाओं को ऐसी शक्तियाँ और अधिकार दे सकता है, जिनसे वे स्वशासन की इकाइयों के रूप में कार्य कर सकें।
4. नगरपालिकाओं के लिए राज्य वित्त आयोग का गठन अनुच्छेद 243X के अंतर्गत किया जाता है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी चार
उत्तर: केवल तीन — कथन 1 सही है: भाग IX-क (अनुच्छेद 243P से 243ZG) नगरपालिकाओं से संबंधित है। कथन 2 सही है: बारहवीं अनुसूची में नगरपालिकाओं के 18 कार्य सूचीबद्ध हैं। कथन 3 सही है: अनुच्छेद 243W राज्य को शक्तियाँ देने का विवेकाधिकार देता है। कथन 4 गलत है: नगरपालिकाओं के लिए राज्य वित्त आयोग का प्रावधान अनुच्छेद 243Y में है; अनुच्छेद 243X में ग्राम पंचायतों के वित्त से संबंधित प्रावधान नहीं है, वहाँ अनुच्छेद 243I है।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
कथन (A): न्यायालय नगरीय स्थानीय निकायों को भवन और व्यापार संबंधी विद्यमान नियमों के प्रवर्तन का निर्देश दे सकते हैं।
कारण (R): अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता में किसी लोक प्राधिकरण को उसके वैधानिक कर्तव्य का पालन करने का आदेश देना भी शामिल है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) का सही स्पष्टीकरण है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) का सही स्पष्टीकरण नहीं है
- (A) सही है, किंतु (R) गलत है
- (A) गलत है, किंतु (R) सही है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) का सही स्पष्टीकरण है — अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय परमादेश जैसी रिट जारी कर लोक प्राधिकरण को उसके वैधानिक दायित्व का पालन करने का आदेश दे सकता है। इसी आधार पर न्यायालय नगर निकाय को विद्यमान नियमों के प्रवर्तन का निर्देश दे सकता है। अतः (R) (A) का सही स्पष्टीकरण है।
Q3. अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय द्वारा जारी वह रिट, जिसके द्वारा किसी लोक प्राधिकरण या अधिकारी को उसके वैधानिक कर्तव्य का पालन करने का आदेश दिया जाता है, कौन-सी है?
- बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus)
- परमादेश (Mandamus)
- प्रतिषेध (Prohibition)
- उत्प्रेषण (Certiorari)
उत्तर: परमादेश (Mandamus) — परमादेश (Mandamus) उस समय जारी होता है जब कोई लोक अधिकारी अपने वैधानिक कर्तव्य का पालन न करे। बंदी प्रत्यक्षीकरण अवैध निरोध के विरुद्ध है, प्रतिषेध निचली अदालत को अधिकार-सीमा के बाहर जाने से रोकता है, और उत्प्रेषण निचली अदालत के आदेश को रद्द करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ नगरीय स्थानीय निकायों को भवन, व्यापार और सुरक्षा मानकों के प्रवर्तन की शक्ति प्राप्त है, फिर भी न्यायालय के आदेशों से ऐसे पीजी आवासों पर भी कार्रवाई की अनुमति दी जा सकती है, जो संबंधित याचिका के पक्षकार नहीं हैं। संविधान के भाग IX-क के संदर्भ में इस प्रवृत्ति का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि ऐसी कार्रवाई से प्रभावित होने वाले व्यक्तियों के प्रक्रियागत अधिकारों की रक्षा किस प्रकार सुनिश्चित की जानी चाहिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल उत्तर के बिंदु: (1) भूमिका: पीजी आवास की बढ़ती संख्या, शहरी आवास बाज़ार और सुरक्षा-मानकों के बीच तनाव; कर्नाटक उच्च न्यायालय (न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज) का आदेश, जिसमें ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण और उसके नगर निगमों को गैर-याचिकाकर्ता पीजी आवासों पर विद्यमान नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई की छूट दी गई; अगली सुनवाई 4 नवंबर। (2) संवैधानिक ढाँचा: 74वाँ संविधान संशोधन, 1992 द्वारा भाग IX-क जोड़ा गया; अनुच्छेद 243W के अंतर्गत राज्य विधानमंडल नगरपालिकाओं को शक्तियाँ देता है; बारहवीं अनुसूची में भवन-नियमन और नगर नियोजन के कार्य सूचीबद्ध हैं; अनुच्छेद 243S के अंतर्गत वार्ड समितियों का प्रावधान। राज्य के नगर-विधान (नगर निगम अधिनियम) और ग्रेटर बेंगलुरु से संबंधित राज्य विधि के उपबंधों के आधार पर प्रवर्तन। (3) न्यायिक शक्ति का विश्लेषण: अनुच्छेद 226 के अंतर्गत परमादेश की अधिकारिता; अनुच्छेद 142 का उल्लेख न करें जब तक आवश्यक न हो; याचिका का पक्षकार न होने वाले आवासों तक आदेश का विस्तार: अंतर-पक्षीय (inter partes) प्रभाव की सीमा, न्यायिक संयम (Judicial Restraint) बनाम न्यायिक सक्रियता का तुलनात्मक मूल्यांकन। (4) मौलिक अधिकारों का संतुलन: अनुच्छेद 19(1)(छ) के अंतर्गत व्यापार की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 19(6) के अंतर्गत युक्तियुक्त निर्बंधन; अनुच्छेद 21 के अंतर्गत सुरक्षित और गरिमापूर्ण आवास का अधिकार; मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978) में प्रक्रिया की युक्तियुक्तता; ओल्गा टेलिस बनाम बॉम्बे नगर निगम (1985) में आजीविका के अधिकार पर सिद्धांत। (5) प्रक्रियागत न्याय: नैसर्गिक न्याय (सुनवाई का अवसर, सूचना, कारण-बताओ नोटिस) का पालन; सील करने से पहले उचित नोटिस और अपील का अवसर; आदेश की मनमानी से बचाव। (6) सुरक्षा का पक्ष: राष्ट्रीय भवन संहिता, 2016 के अग्नि-सुरक्षा और निकास प्रावधान; पीजी में रहने वाले छात्रों और कामकाजी वर्ग की सुरक्षा। (7) नीति-संतुलन: मॉडल किरायेदारी अधिनियम, 2019 जैसे मॉडल कानूनों से किरायेदार-मकान मालिक संतुलन; पंजीकरण, लाइसेंस और निरीक्षण की व्यवस्थित प्रणाली को अधिक नियमित रूप से लागू करने की आवश्यकता बनाम दंडात्मक सील करने का विकल्प। (8) निष्कर्ष: न्यायालय की भूमिका प्रवर्तन को सक्षम बनाने तक सीमित रहे, जबकि निकायों की स्वायत्तता, नोटिस-प्रक्रिया और पारदर्शी लाइसेंसिंग से नागरिक-स्वतंत्रता और सार्वजनिक सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हों।
स्रोत: The Hindu
Karnataka PCS (KPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा नागरिक निकाय को कानूनों का उल्लंघन करने वाले पीजी आवासों को सील करने की अनुमति देने के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- यह निर्णय केवल बैंगलोर शहर तक सीमित है और राज्य के अन्य शहरों पर लागू नहीं होता।
- नागरिक निकाय को कानूनों का उल्लंघन करने वाले पीजी आवासों को सील करने का अधिकार उच्च न्यायालय द्वारा प्रदान किया गया है।
- यह निर्णय केवल आवासीय क्षेत्रों में लागू होता है, व्यावसायिक क्षेत्रों में नहीं।
- उच्च न्यायालय ने पीजी आवासों को सील करने के खिलाफ अपील करने के अधिकार को निरस्त कर दिया है।
उत्तर: नागरिक निकाय को कानूनों का उल्लंघन करने वाले पीजी आवासों को सील करने का अधिकार उच्च न्यायालय द्वारा प्रदान किया गया है। — कर्नाटक उच्च न्यायालय ने नागरिक निकाय को कानूनों का उल्लंघन करने वाले पीजी आवासों को सील करने का अधिकार प्रदान किया है, जिससे राज्य भर में कानून व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
Mains: कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा पीजी आवासों को कानूनों के उल्लंघन पर सील करने की अनुमति देने के निर्णय के संदर्भ में, राज्य में पीजी आवासों के नियमन और कानून प्रवर्तन की चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए। इसके साथ ही, इस निर्णय के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर भी प्रकाश डालिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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