केरल उच्च न्यायालय ने राज्य को पीओसीएसओ न्यायालयों में सुविधाएं सुनिश्चित करने का दिया निर्देश

केरल उच्च न्यायालय ने राज्य को पीओसीएसओ न्यायालयों में सुविधाएं सुनिश्चित करने का दिया निर्देश

केरल उच्च न्यायालय ने राज्य को पीओसीएसओ न्यायालयों में सुविधाएं सुनिश्चित करने का दिया निर्देश

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POCSO special court setup

✎ POCSO अधिनियम, 2012 बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए एक व्यापक कानून है, जिसके तहत विशेष न्यायालयों की स्थापना की जाती है ताकि मामलों की त्वरित और बाल-सुलभ सुनवाई सुनिश्चित की जा सके।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

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  • Prelims: POCSO अधिनियम, 2012, केरल उच्च न्यायालय, उच्चतम न्यायालय के निर्देश, बाल यौन शोषण, विशेष न्यायालय, अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार), अनुच्छेद 39 (बालकों के स्वास्थ्य का दुरुपयोग नहीं), राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत
  • Essay: भारत में बाल संरक्षण: चुनौतियाँ और समाधान, न्यायपालिका की भूमिका: सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों का संरक्षण

त्वरित पुनरावृत्ति: POCSO अधिनियम, 2012 बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए एक व्यापक कानून है, जिसके तहत विशेष न्यायालयों की स्थापना की जाती है ताकि मामलों की त्वरित और बाल-सुलभ सुनवाई सुनिश्चित की जा सके।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केरल उच्च न्यायालय ने प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस (POCSO) अधिनियम, 2012 के तहत स्थापित अधिकांश विशेष न्यायालयों में पर्याप्त सुविधाओं की कमी पाई है। न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह इन न्यायालयों में अधिनियम के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करे और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के आलोक में आवश्यक अतिरिक्त न्यायालयों की संख्या का खुलासा करे। यह निर्णय बाल यौन शोषण के मामलों में त्वरित और संवेदनशील न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

पृष्ठभूमि

  • POCSO अधिनियम, 2012 (Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012) बच्चों को यौन उत्पीड़न, यौन शोषण और पोर्नोग्राफी से बचाने के लिए एक व्यापक कानून है।
  • इस अधिनियम के तहत, बच्चों के यौन शोषण से संबंधित मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायालयों की स्थापना का प्रावधान है।
  • उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया था कि देश के प्रत्येक जिले में, जहाँ अधिनियम के तहत 100 से अधिक मामले दर्ज हैं, विशेष न्यायालय स्थापित किए जाएँ।
  • उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार को इन न्यायालयों के लिए पीठासीन अधिकारी, विशेष लोक अभियोजकों और न्यायालय कर्मचारियों की नियुक्ति हेतु धन उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया था।
  • याचिकाकर्ता ने केरल उच्च न्यायालय को सूचित किया कि राज्य सरकार आवश्यक संख्या में विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति करने में विफल रही है।
  • उच्चतम न्यायालय ने सभी उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से यह सुनिश्चित करने को भी कहा था कि न्यायिक अकादमियों में विशेष कार्यक्रम विकसित किए जाएँ ताकि POCSO न्यायालयों से जुड़े विशेष लोक अभियोजकों को कानून के साथ-साथ बाल मनोविज्ञान, बाल व्यवहार और बाल स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में भी प्रशिक्षण दिया जा सके।

POCSO अधिनियम, 2012 और विशेष न्यायालय

  • POCSO अधिनियम, 2012 बच्चों को यौन अपराधों से बचाने और उनके हितों की रक्षा करने के लिए भारत का एक महत्त्वपूर्ण कानून है।
  • यह अधिनियम 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति को ‘बच्चा’ के रूप में परिभाषित करता है।
  • अधिनियम में विभिन्न प्रकार के यौन अपराधों जैसे यौन उत्पीड़न, गंभीर यौन उत्पीड़न और पोर्नोग्राफी के लिए कठोर दंड का प्रावधान है।
  • POCSO अधिनियम के तहत, बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए विशेष न्यायालयों की स्थापना का प्रावधान है। इन न्यायालयों को मामलों की त्वरित सुनवाई और निपटान के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • इन विशेष न्यायालयों को बाल-सुलभ वातावरण प्रदान करने, बच्चे की निजता सुनिश्चित करने और बच्चे को बार-बार न्यायालय में उपस्थित होने से बचाने के लिए विशेष प्रक्रियाएँ अपनानी होती हैं।
  • अधिनियम के तहत, पुलिस को बच्चे के बयान दर्ज करते समय विशेष सावधानी बरतनी होती है और बच्चे को किसी भी प्रकार के आघात से बचाना होता है।
  • विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति का प्रावधान है, जिन्हें बच्चों से संबंधित मामलों में विशेषज्ञता हासिल होती है।
  • यह अधिनियम बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए एक मजबूत कानूनी ढाँचा प्रदान करता है और न्याय प्रणाली को बच्चों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाने का प्रयास करता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
POCSO अधिनियम, 2012 (लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम) बच्चों को यौन अपराधों से बचाने और ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष प्रक्रियाएँ निर्धारित करने हेतु अधिनियमित।
विशेष न्यायालयों की स्थापना POCSO मामलों की त्वरित और संवेदनशील सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक जिले में विशेष न्यायालयों का प्रावधान।
पर्याप्त सुविधाओं का अभाव कई POCSO न्यायालयों में आवश्यक बुनियादी ढाँचे, जैसे बाल-सुलभ वातावरण और प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश प्रत्येक जिले में 100 से अधिक POCSO मामलों वाले जिलों में विशेष न्यायालयों की स्थापना और उनके वित्तपोषण का निर्देश।
केरल उच्च न्यायालय का निर्देश राज्य को POCSO न्यायालयों में पर्याप्त सुविधाएँ सुनिश्चित करने और आवश्यक अतिरिक्त न्यायालयों की संख्या बताने का आदेश।
विशेष लोक अभियोजकों का प्रशिक्षण कानून के साथ-साथ बाल मनोविज्ञान, बाल व्यवहार और बाल स्वास्थ्य में प्रशिक्षण की आवश्यकता।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • यह बच्चों को यौन अपराधों से बचाने और उनके हितों की रक्षा करने में सहायक है।
  • न्यायालयों में बाल-सुलभ वातावरण सुनिश्चित होने से पीड़ित बच्चों को न्याय प्रक्रिया में सहजता महसूस होगी।
  • विशेषज्ञता प्राप्त लोक अभियोजकों से मामलों की प्रभावी पैरवी संभव होगी, जिससे दोषियों को दंडित किया जा सकेगा।

शासन और न्यायिक महत्व

  • उच्च न्यायालय का निर्देश न्यायिक सक्रियता का उदाहरण है, जो कार्यपालिका को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए प्रेरित करता है।
  • यह सुनिश्चित करेगा कि POCSO अधिनियम के तहत स्थापित विशेष न्यायालय अपने उद्देश्यों को पूरा कर सकें।
  • न्यायिक प्रणाली में विश्वास को बढ़ावा देगा, विशेषकर कमजोर वर्गों और बच्चों के बीच।

नीतिगत और प्रशासनिक महत्व

  • राज्य सरकारों को POCSO न्यायालयों के लिए पर्याप्त संसाधनों और बुनियादी ढाँचे के प्रावधान पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
  • विशेष लोक अभियोजकों के प्रशिक्षण और नियुक्ति में सुधार से न्यायिक प्रक्रिया की गुणवत्ता बढ़ेगी।
  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय की आवश्यकता को उजागर करता है, क्योंकि केंद्र सरकार इन न्यायालयों के वित्तपोषण में सहायता करती है।

चुनौतियाँ

1. बुनियादी ढाँचे का अभाव

  • कई POCSO न्यायालयों में आवश्यक सुविधाओं जैसे अलग प्रतीक्षा कक्ष, परामर्श कक्ष और बाल-सुलभ वातावरण की कमी है।
  • यह पीड़ित बच्चों के लिए न्याय प्रक्रिया को और अधिक तनावपूर्ण बना सकता है।

2. विशेष लोक अभियोजकों की कमी और प्रशिक्षण का अभाव

  • आवश्यक संख्या में विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति न होना मामलों के निपटान में देरी का कारण बनता है।
  • बाल मनोविज्ञान और व्यवहार में प्रशिक्षण की कमी से अभियोजन की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

3. न्यायालयों की अपर्याप्त संख्या

  • सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद, कई जिलों में POCSO मामलों की बढ़ती संख्या के अनुपात में पर्याप्त न्यायालय नहीं हैं।
  • इससे मामलों का बैकलॉग बढ़ता है और न्याय में देरी होती है।

4. राज्य सरकारों पर वित्तीय और प्रशासनिक बोझ

  • POCSO न्यायालयों के लिए पर्याप्त सुविधाएँ और कर्मचारी उपलब्ध कराना राज्य सरकारों पर वित्तीय और प्रशासनिक बोझ डालता है।
  • केंद्र सरकार से पर्याप्त और समय पर वित्तपोषण सुनिश्चित करना एक चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
POCSO न्यायालयों में सुविधाओं की कमी पीड़ित बच्चों के लिए असहज वातावरण, न्याय प्रक्रिया में बाधा।
विशेष लोक अभियोजकों की अपर्याप्त संख्या मामलों के निपटान में देरी, प्रभावी अभियोजन में कमी।
प्रशिक्षण का अभाव (बाल मनोविज्ञान आदि में) अभियोजन की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव, बच्चों की संवेदनशीलता को समझने में कमी।
अतिरिक्त न्यायालयों की आवश्यकता मामलों का बढ़ता बैकलॉग, न्याय में देरी।
राज्य द्वारा दायित्वों का निर्वहन न करना अधिनियम के उद्देश्यों की पूर्ति में बाधा, न्यायिक निर्देशों की अवहेलना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012)

आगे की राह

  • राज्य सरकारों को POCSO अधिनियम के तहत निर्धारित दिशानिर्देशों का पालन करते हुए न्यायालयों में आवश्यक बुनियादी ढाँचा और सुविधाएँ सुनिश्चित करनी चाहिए।
  • विशेष लोक अभियोजकों की पर्याप्त संख्या में नियुक्ति की जाए और उन्हें बाल मनोविज्ञान, बाल व्यवहार तथा बाल स्वास्थ्य में विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाए।
  • सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, 100 से अधिक POCSO मामलों वाले जिलों में अतिरिक्त विशेष न्यायालयों की स्थापना की जाए।
  • केंद्र सरकार को POCSO न्यायालयों के लिए पर्याप्त और समय पर वित्तीय सहायता प्रदान करनी चाहिए ताकि राज्य सरकारों पर बोझ कम हो।
  • न्यायिक अकादमियों को विशेष लोक अभियोजकों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित करने चाहिए।
  • न्यायालयों में बाल-सुलभ वातावरण बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएँ, जैसे अलग प्रतीक्षा कक्ष और परामर्श सुविधाएँ।
  • POCSO मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जाए और मामलों के बैकलॉग को कम करने के उपाय किए जाएँ।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

POCSO अधिनियम · बाल यौन शोषण · विशेष न्यायालय · न्यायिक अवसंरचना · उच्च न्यायालय के निर्देश · सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देश · बाल मनोविज्ञान प्रशिक्षण · विशेष लोक अभियोजक · राज्य की भूमिका · न्याय तक पहुंच

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 21: जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार
  • अनुच्छेद 39(f): बच्चों के स्वस्थ विकास के अवसर
  • अनुच्छेद 226: उच्च न्यायालयों की रिट जारी करने की शक्ति
  • अनुच्छेद 32: संवैधानिक उपचारों का अधिकार (सर्वोच्च न्यायालय के संदर्भ में)

अवधारणा प्रवाह

POCSO अधिनियम का उद्देश्य बच्चों को यौन अपराधों से बचाना है।  →  अधिनियम के तहत विशेष न्यायालयों की स्थापना का प्रावधान है।  →  कई न्यायालयों में सुविधाओं और कर्मचारियों की कमी पाई गई।  →  केरल उच्च न्यायालय ने राज्य को सुविधाएँ सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।  →  यह बच्चों को न्याय दिलाने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. POCSO अधिनियम, 2012 के तहत स्थापित विशेष न्यायालयों को पर्याप्त सुविधाओं से युक्त होना चाहिए।
2. सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार, प्रत्येक जिले में 100 से अधिक POCSO मामलों वाले जिलों में विशेष न्यायालय स्थापित किए जाने चाहिए।
3. केंद्र सरकार को इन विशेष न्यायालयों के लिए पीठासीन अधिकारी, विशेष लोक अभियोजक और अदालत के कर्मचारियों की नियुक्ति हेतु धन उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि केरल उच्च न्यायालय ने राज्य को POCSO न्यायालयों में पर्याप्त सुविधाएं सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है, जो अधिनियम के दिशानिर्देशों के अनुरूप है। कथन 2 भी सही है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने ऐसे जिलों में विशेष न्यायालय स्थापित करने का निर्देश दिया है जहां 100 से अधिक मामले दर्ज हैं। कथन 3 भी सही है क्योंकि केंद्र सरकार को इन न्यायालयों के संचालन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया गया है, जिसमें कर्मचारियों की नियुक्ति भी शामिल है।

Q2. अभिकथन (A): POCSO अधिनियम के तहत विशेष लोक अभियोजकों को केवल कानून में ही नहीं, बल्कि बाल मनोविज्ञान और बाल व्यवहार जैसे अन्य क्षेत्रों में भी प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।
कारण (R): यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि बाल यौन शोषण के मामलों में न्याय प्रक्रिया बच्चों के लिए संवेदनशील और सहायक हो।

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को निर्देश दिया है कि न्यायिक अकादमियों में विशेष कार्यक्रम विकसित किए जाएं ताकि POCSO न्यायालयों से जुड़े विशेष लोक अभियोजकों को कानून के साथ-साथ बाल मनोविज्ञान, बाल व्यवहार और बाल चिकित्सा स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में भी प्रशिक्षण दिया जा सके। कारण (R) भी सही है और यह अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है, क्योंकि इस तरह का प्रशिक्षण बच्चों के प्रति संवेदनशील न्याय सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ बाल यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012 के प्रभावी कार्यान्वयन में विशेष न्यायालयों की भूमिका का परीक्षण कीजिए। हाल के उच्च न्यायालय के निर्देशों के आलोक में इन न्यायालयों के समक्ष आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान हेतु आवश्यक कदमों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत POCSO अधिनियम, 2012 के उद्देश्य और विशेष न्यायालयों की स्थापना के महत्व से करें।

**भाग 1: विशेष न्यायालयों की भूमिका का परीक्षण**
* **अधिनियम का उद्देश्य:** बच्चों को यौन अपराधों से बचाना, उनके सर्वोत्तम हित सुनिश्चित करना।
* **विशेष न्यायालयों की आवश्यकता:** त्वरित न्याय, बाल-अनुकूल प्रक्रिया, पीड़ितों के आघात को कम करना।
* **अधिनियम के प्रावधान:** धारा 24 (बाल-अनुकूल वातावरण), धारा 35 (विशेष न्यायालयों का गठन), धारा 36 (विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति)।
* **प्रक्रियात्मक लाभ:** बंद कमरे में सुनवाई, बच्चों की पहचान का प्रकटीकरण न करना, एक ही व्यक्ति द्वारा बार-बार पूछताछ से बचना।

**भाग 2: हाल के उच्च न्यायालय के निर्देशों के आलोक में चुनौतियाँ और समाधान**
* **चुनौतियाँ:**
* **अपर्याप्त अवसंरचना:** केरल उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार, अधिकांश न्यायालयों में सुविधाओं की कमी (जैसे बाल-अनुकूल वातावरण, प्रतीक्षा कक्ष)।
* **न्यायालयों की कमी:** सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों के बावजूद, पर्याप्त संख्या में विशेष न्यायालयों का अभाव (विशेषकर 100 से अधिक मामलों वाले जिलों में)।
* **विशेष लोक अभियोजकों की कमी:** आवश्यक संख्या में विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति न होना।
* **प्रशिक्षण का अभाव:** लोक अभियोजकों को बाल मनोविज्ञान और व्यवहार में विशेष प्रशिक्षण की कमी।
* **संसाधनों का अभाव:** केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषण में संभावित अंतराल या राज्यों द्वारा संसाधनों का अपर्याप्त उपयोग।
* **समाधान हेतु आवश्यक कदम:**
* **अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण:** राज्य सरकारों द्वारा अधिनियम के दिशानिर्देशों के अनुसार पर्याप्त और बाल-अनुकूल सुविधाएं सुनिश्चित करना।
* **अतिरिक्त न्यायालयों की स्थापना:** सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए, आवश्यकतानुसार और विशेष न्यायालयों का गठन।
* **विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति:** पर्याप्त संख्या में योग्य विशेष लोक अभियोजकों की समयबद्ध नियुक्ति।
* **व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम:** न्यायिक अकादमियों द्वारा विशेष लोक अभियोजकों के लिए कानून, बाल मनोविज्ञान, बाल व्यवहार और बाल चिकित्सा स्वास्थ्य पर अनिवार्य प्रशिक्षण।
* **केंद्र-राज्य समन्वय:** केंद्र सरकार द्वारा समय पर और पर्याप्त वित्तीय सहायता, तथा राज्यों द्वारा इन निधियों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना।
* **नियमित निगरानी:** उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा POCSO न्यायालयों के कामकाज और सुविधाओं की नियमित निगरानी।

**निष्कर्ष:** POCSO अधिनियम का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा हो सकता है जब विशेष न्यायालयों को आवश्यक अवसंरचना, प्रशिक्षित कर्मियों और बाल-संवेदनशील प्रक्रियाओं के साथ सशक्त किया जाए, जिससे बच्चों को न्याय तक प्रभावी पहुंच मिल सके।

स्रोत: The Hindu

Kerala PCS (Kerala PSC (KAS)) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: केरल उच्च न्यायालय द्वारा राज्य को POCSO न्यायालयों में पर्याप्त सुविधाएं सुनिश्चित करने का निर्देश देने का मुख्य कारण क्या है?

  1. A. POCSO अधिनियम, 2012 के तहत बालकों के अधिकारों की रक्षा हेतु
  2. B. राज्य सरकार द्वारा न्यायालयों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को दूर करने के लिए
  3. C. उच्च न्यायालय द्वारा राज्य सरकार को दिए गए निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने हेतु
  4. D. न्यायालयों में महिलाओं के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए

उत्तर: B. राज्य सरकार द्वारा न्यायालयों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को दूर करने के लिए — केरल उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को POCSO न्यायालयों में बालकों के लिए सुरक्षित और अनुकूल माहौल सुनिश्चित करने हेतु पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

Mains: केरल उच्च न्यायालय द्वारा राज्य सरकार को POCSO न्यायालयों में पर्याप्त सुविधाएं सुनिश्चित करने का निर्देश देने के संदर्भ में, बालकों के अधिकारों की रक्षा और न्यायालयों में सुधार हेतु राज्य सरकार द्वारा उठाए जाने वाले आवश्यक कदमों का वर्णन करें।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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