12 Oct केरल में आक्रामक प्रजातियों से जैव विविधता बचाने हेतु नई नीति
✎ आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ जैव विविधता के लिए एक गंभीर खतरा हैं, जो पारिस्थितिकी तंत्र को बाधित करती हैं और स्थानिक प्रजातियों को विस्थापित करती हैं, जिनके प्रबंधन के लिए रोकथाम, निगरानी और जन जागरूकता महत्वपूर्ण है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण, जैव विविधता, आपदा प्रबंधन | GS Paper I — भूगोल (भारत एवं विश्व का भूगोल)
- Prelims: आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ (Invasive Alien Species – IAS), जैव विविधता (Biodiversity), केरल राज्य जैव विविधता बोर्ड (Kerala State Biodiversity Board – KSBB), पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem), स्थानिक प्रजातियाँ (Native Species), प्रजाति उन्मूलन (Species Eradication), जैविक आक्रमण (Biological Invasion), मोज़ाम्बिक टिलापिया (Mozambique Tilapia)
- Essay: जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास, मानव गतिविधियों का पर्यावरण पर प्रभाव
त्वरित पुनरावृत्ति: आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ जैव विविधता के लिए एक गंभीर खतरा हैं, जो पारिस्थितिकी तंत्र को बाधित करती हैं और स्थानिक प्रजातियों को विस्थापित करती हैं, जिनके प्रबंधन के लिए रोकथाम, निगरानी और जन जागरूकता महत्वपूर्ण है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केरल राज्य जैव विविधता बोर्ड (KSBB) ने आक्रामक विदेशी प्रजातियों (Invasive Alien Species – IAS) के कारण उत्पन्न खतरों को कम करने के लिए एक नीतिगत दस्तावेज़ राज्य सरकार को सौंपा है। इस दस्तावेज़ में इन प्रजातियों के प्रसार की रोकथाम और निगरानी, जन जागरूकता बढ़ाने तथा इनसे निपटने के लिए क्षमता निर्माण पर जोर दिया गया है। यह पहल राज्य की जैव विविधता पर बढ़ते दबाव को देखते हुए महत्वपूर्ण है।
पृष्ठभूमि
- आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ वे प्रजातियाँ हैं जिन्हें उनके प्राकृतिक निवास स्थान से बाहर किसी नए पारिस्थितिकी तंत्र में लाया जाता है और जो वहाँ की स्थानिक प्रजातियों तथा पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा बन जाती हैं।
- ये प्रजातियाँ अक्सर तेजी से फैलती हैं, स्थानिक प्रजातियों के साथ प्रतिस्पर्धा करती हैं, और अंततः उन्हें विस्थापित कर देती हैं, जिससे जैव विविधता का नुकसान होता है।
- केरल के अंतर्देशीय जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में 32 विदेशी प्रजातियाँ दर्ज की गई हैं, जिनमें 4 पौधे और 28 मछली प्रजातियाँ शामिल हैं। मोज़ाम्बिक टिलापिया सबसे व्यापक आक्रामक मछली प्रजाति है।
- वन पारिस्थितिकी तंत्र में क्रोमोलेना ओडोराटा (Chromolaena odorata), लेंटाना कैमरा (Lantana camara) और मिकानिया माइक्रेन्था (Mikania micrantha) जैसी प्रजातियाँ स्थानिक पौधों के पुनर्जनन को बाधित कर रही हैं।
- इन प्रजातियों का प्रवेश जानबूझकर (जैसे जलीय कृषि, सजावटी व्यापार) या अनजाने में (जैसे गिट्टी जल, नर्सरी व्यापार, प्राकृतिक आपदाएँ) हो सकता है।
- आक्रामक प्रजातियों के कारण कृषि को भी भारी नुकसान होता है, जिससे फसलें प्रभावित होती हैं और आर्थिक हानि होती है।
आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ (Invasive Alien Species – IAS) क्या हैं?
- आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ ऐसी प्रजातियाँ हैं जिन्हें उनके मूल भौगोलिक क्षेत्र से बाहर मानव गतिविधियों या प्राकृतिक प्रक्रियाओं के माध्यम से नए वातावरण में लाया जाता है।
- ये प्रजातियाँ नए पारिस्थितिकी तंत्र में स्थापित होने के बाद तेजी से फैलती हैं और वहाँ की स्थानिक (Native) जैव विविधता, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं, अर्थव्यवस्था और मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं।
- इनका प्रभाव स्थानिक प्रजातियों के विस्थापन, खाद्य श्रृंखला में व्यवधान, रोगजनकों के प्रसार और कृषि उत्पादकता में कमी के रूप में देखा जा सकता है।
- आक्रामक प्रजातियों का परिचय अक्सर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, पर्यटन, परिवहन (जैसे जहाजों का गिट्टी जल) और कभी-कभी जानबूझकर (जैसे सजावटी पौधे या जलीय कृषि के लिए) होता है।
- इनसे निपटने के लिए रोकथाम, शीघ्र पता लगाना, उन्मूलन, नियंत्रण और प्रबंधन जैसी रणनीतियों की आवश्यकता होती है।
- जैव विविधता पर अभिसमय (Convention on Biological Diversity – CBD) के तहत आक्रामक विदेशी प्रजातियों को जैव विविधता के लिए एक प्रमुख खतरा माना गया है और सदस्य देशों को इनसे निपटने के लिए राष्ट्रीय रणनीतियाँ विकसित करने का आह्वान किया गया है।
- भारत में भी विभिन्न राज्यों और केंद्र सरकार द्वारा आक्रामक प्रजातियों के प्रबंधन के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, जिसमें जागरूकता बढ़ाना और अनुसंधान को प्राथमिकता देना शामिल है।
- केरल राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा प्रस्तावित नीतिगत दस्तावेज़ में संगरोध उपायों, जोखिम मूल्यांकन, अनुसंधान और स्थानीय समुदायों को शामिल करने पर जोर दिया गया है।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ · जैव विविधता · पारिस्थितिकी तंत्र · पर्यावरण संरक्षण · राज्य जैव विविधता बोर्ड · संघवाद · अंतर्राष्ट्रीय सहयोग · सतत विकास · पादप प्रजातियाँ · मत्स्य प्रजातियाँ · कृषि · आर्थिक उपयोग
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ (Invasive Alien Species – IAS) वे प्रजातियाँ हैं जो अपने मूल पारिस्थितिकी तंत्र से बाहर लाई जाती हैं और जिनका प्रसार स्थानीय जैव विविधता के लिए खतरा पैदा करता है।
2. केरल राज्य जैव विविधता बोर्ड ने आक्रामक विदेशी प्रजातियों के प्रभावों को कम करने के लिए एक सात-सूत्रीय रणनीतिक योजना प्रस्तुत की है।
3. भारत में आक्रामक विदेशी प्रजातियों के खतरे को कम करने के लिए एक विशेष कानूनी ढांचा पहले से ही मौजूद है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ वे प्रजातियाँ हैं जो अपने मूल पारिस्थितिकी तंत्र से बाहर लाई जाती हैं और जिनका प्रसार स्थानीय जैव विविधता के लिए खतरा पैदा करता है। केरल राज्य जैव विविधता बोर्ड ने आक्रामक विदेशी प्रजातियों के प्रभावों को कम करने के लिए एक सात-सूत्रीय रणनीतिक योजना प्रस्तुत की है। कथन 3 गलत है, क्योंकि भारत में आक्रामक विदेशी प्रजातियों के खतरे को कम करने के लिए अभी तक कोई विशेष कानूनी ढांचा मौजूद नहीं है, बल्कि इसकी आवश्यकता महसूस की जा रही है।
Q2. आक्रामक विदेशी प्रजातियों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. ये प्रजातियाँ अक्सर स्थानीय प्रजातियों के पुनरुत्पादन में बाधा डालती हैं।
2. इनका प्रवेश केवल जानबूझकर मानव गतिविधियों के माध्यम से होता है।
3. मोज़ाम्बिक तिलापिया केरल के अंतर्देशीय जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में पाई जाने वाली एक व्यापक आक्रामक मछली प्रजाति है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है, क्योंकि आक्रामक प्रजातियाँ अक्सर स्थानीय पादप प्रजातियों के पुनरुत्पादन में बाधा डालती हैं, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव आता है और जैव विविधता का नुकसान होता है। कथन 2 गलत है, क्योंकि आक्रामक प्रजातियों का प्रवेश जानबूझकर (जैसे जलीय कृषि, सजावटी व्यापार) और अनजाने में (जैसे गिट्टी का पानी, नर्सरी व्यापार, प्राकृतिक आपदाएँ) दोनों तरीकों से हो सकता है। कथन 3 सही है, मोज़ाम्बिक तिलापिया केरल के अंतर्देशीय जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में पाई जाने वाली एक व्यापक आक्रामक मछली प्रजाति है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ (Invasive Alien Species – IAS) स्थानीय जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक गंभीर खतरा उत्पन्न करती हैं। इस खतरे को कम करने के लिए केरल राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा सुझाई गई रणनीतियों पर चर्चा कीजिए। साथ ही, भारत में इस चुनौती से निपटने के लिए एक व्यापक कानूनी और नीतिगत ढाँचे की आवश्यकता का भी मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: आक्रामक विदेशी प्रजातियों (IAS) को परिभाषित करें और जैव विविधता पर उनके प्रभाव का संक्षिप्त उल्लेख करें।
मुख्य भाग:
1. केरल राज्य जैव विविधता बोर्ड (KSBB) द्वारा सुझाई गई रणनीतियाँ:
– रोकथाम और निगरानी पर जोर।
– जन जागरूकता और क्षमता निर्माण।
– जोखिम मूल्यांकन और अनुसंधान को प्राथमिकता।
– स्थानीय समुदायों को शामिल करना।
– प्रजातियों की आक्रामकता को सत्यापित करने के लिए वैज्ञानिक पहचान और वर्गीकरण।
– जहाँ उन्मूलन संभव न हो, वहाँ आक्रामक प्रजातियों का आर्थिक उपयोग।
– सख्त संगरोध उपाय।
2. भारत में व्यापक कानूनी और नीतिगत ढाँचे की आवश्यकता का मूल्यांकन:
– वर्तमान में विशेष कानूनी ढाँचे का अभाव।
– IAS के कारण होने वाले पारिस्थितिक और आर्थिक नुकसान।
– संघ सरकार की भूमिका और अंतर-राज्यीय समन्वय की आवश्यकता।
– अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताएँ (जैसे जैविक विविधता पर कन्वेंशन – CBD)।
– विभिन्न मंत्रालयों (पर्यावरण, कृषि, मत्स्य पालन) के बीच समन्वय।
– अनुसंधान और विकास में निवेश।
निष्कर्ष: IAS के खतरे को कम करने के लिए एक एकीकृत, बहुआयामी और सहयोगात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दें, जिसमें राज्य और केंद्र सरकार दोनों की सक्रिय भागीदारी हो।
स्रोत: The Hindu
Kerala PCS (Kerala PSC (KAS)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: केरल राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा प्रस्तुत ‘आक्रामक प्रजातियों के खतरों को कम करने’ हेतु नीति दस्तावेज के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
- A. यह नीति दस्तावेज आक्रामक बाहरी प्रजातियों के नियंत्रण एवं प्रबंधन के लिए एक व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत करता है।
- B. नीति में आक्रामक प्रजातियों के प्रभावों का आकलन करने हेतु वैज्ञानिक अध्ययन एवं अनुसंधान को अनिवार्य किया गया है।
- C. नीति के अंतर्गत आक्रामक प्रजातियों के प्रसार को रोकने हेतु केवल कानूनी उपायों पर ही बल दिया गया है।
- D. नीति में स्थानीय समुदायों एवं स्वैच्छिक संगठनों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया गया है।
उत्तर: C. नीति के अंतर्गत आक्रामक प्रजातियों के प्रसार को रोकने हेतु केवल कानूनी उपायों पर ही बल दिया गया है। — नीति दस्तावेज में आक्रामक प्रजातियों के नियंत्रण हेतु कानूनी उपायों के साथ-साथ वैज्ञानिक अनुसंधान, सामुदायिक भागीदारी एवं तकनीकी हस्तक्षेपों को भी शामिल किया गया है।
Mains: केरल राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा प्रस्तुत ‘आक्रामक प्रजातियों के खतरों को कम करने’ हेतु नीति दस्तावेज की प्रमुख विशेषताओं एवं इसके क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा कीजिए। साथ ही, केरल में जैव विविधता संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका का भी उल्लेख कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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