25 Oct लोकसभा स्पीकर बिरला और रूस के ड्यूमा स्पीकर वोलोडिन ने संसदीय सहयोग बढ़ाने पर बातचीत की
✎ संसदीय कूटनीति विधायी निकायों के माध्यम से द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करती है, और इसका उदाहरण 12वें BRICS संसदीय मंच 2026 की भारत द्वारा मेज़बानी है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (भारत और प्रमुख देशों के साथ द्विपक्षीय संबंध; बहुपक्षीय मंच; BRICS) | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — भारतीय राजनीति एवं शासन (संसद की संरचना, कार्य और संसदीय प्रक्रियाएँ; ई-शासन)
- Prelims: लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका और संवैधानिक स्थिति (अनुच्छेद 93), संघीय सभा (Federal Assembly) और रूसी राज्य ड्यूमा (State Duma) की संरचना, BRICS और 12वाँ BRICS संसदीय मंच 2026 (भारत की अध्यक्षता में), भारत-रूस सामरिक एवं विशेषाधिकार प्राप्त सामरिक साझेदारी (Special and Privileged Strategic Partnership), संसद भाषिणी (Sansad Bhashini) और भाषिणी (Bhashini) — राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन (NLTM) की पहल, अंतर-संसदीय संघ (Inter-Parliamentary Union, IPU), संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता सुधार और G4 समूह, संविधान सदन (Samvidhan Sadan) — 12वें BRICS संसदीय मंच की मेज़बानी का स्थल
- Essay: विश्व राजनीति में संसदीय कूटनीति: द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करने का लोकतांत्रिक माध्यम, लोकतंत्र में प्रौद्योगिकी और भाषा: संसदीय कार्यवाही को सुलभ, समावेशी और नागरिक-केंद्रित बनाने की चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: संसदीय कूटनीति विधायी निकायों के माध्यम से द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करती है, और इसका उदाहरण 12वें BRICS संसदीय मंच 2026 की भारत द्वारा मेज़बानी है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रूसी राज्य ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन से नई दिल्ली में मुलाकात की और दोनों देशों की संसदों के बीच निरंतर संस्थागत संवाद, प्रतिनिधिमंडलों के नियमित आदान-प्रदान तथा युवा एवं महिला सांसदों की अधिक भागीदारी पर चर्चा की। यह बैठक 12वें BRICS संसदीय मंच 2026 से पहले हुई, जिसकी मेज़बानी भारत संसद के माध्यम से 26-27 अक्टूबर को संविधान सदन के केंद्रीय सभागार में करेगा और जिसकी अध्यक्षता इस समय भारत के पास है। भारत-रूस संबंधों के 80 वर्ष पूरे होने के संदर्भ में दोनों पक्षों ने विशेषाधिकार प्राप्त सामरिक साझेदारी को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई। बैठक में BRICS संसदों के सहयोग, आतंकवाद के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय प्रयास और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधारों पर भी विचार हुआ, जिसमें भारत की स्थायी सदस्यता के लिए रूस के निरंतर समर्थन की सराहना की गई। लोकसभा अध्यक्ष ने संसद भाषिणी जैसी प्रौद्योगिकी पहलों की जानकारी भी दी, जिनका उद्देश्य संसदीय कार्यवाही को अधिक सुलभ बनाना है।
पृष्ठभूमि
- भारत और रूस के बीच राजनयिक संबंध 1947 के बाद से विकसित हुए हैं; वर्ष 2026 में इन संबंधों के 80 वर्ष पूरे होने के उल्लेख से दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक विश्वास की पृष्ठभूमि स्पष्ट होती है।
- BRICS एक बहुपक्षीय मंच है, जिसमें भारत, रूस, चीन, ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका प्रमुख सदस्य हैं; इसके भीतर संसदीय आयाम अलग से संगठित होता है, जिसे BRICS संसदीय मंच कहा जाता है।
- संसदीय कूटनीति के तहत विधायी निकाय सरकार की औपचारिक राजनयिक प्रक्रिया से समानांतर रूप से संवाद करते हैं; इसमें प्रतिनिधिमंडलों का आदान-प्रदान, समितियों के बीच सहयोग और अंतर-संसदीय मंचों की भागीदारी शामिल है।
- संसद भाषिणी भाषिणी (Bhashini) परियोजना का हिस्सा है, जो राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन (National Language Translation Mission) के अंतर्गत विकसित की गई है और इसका लक्ष्य भारतीय भाषाओं में डिजिटल पहुँच बढ़ाना है।
- भारत की स्थायी सदस्यता के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधार का मुद्दा G4 समूह (भारत, ब्राज़ील, जर्मनी और जापान) के माध्यम से उठाया जाता रहा है, और रूस इस मांग का समर्थक रहा है।
संसदीय कूटनीति क्या है?
- संसदीय कूटनीति (Parliamentary Diplomacy) वह प्रक्रिया है जिसमें किसी देश के विधायी निकाय, जैसे लोकसभा और राज्यसभा, अन्य देशों की संसदों के साथ सीधे संवाद, प्रतिनिधिमंडल-आदान-प्रदान और बहुपक्षीय मंचों के माध्यम से संबंध बनाते हैं।
- भारत में लोकसभा अध्यक्ष संविधान के अनुच्छेद 93 के अंतर्गत सदन के प्रमुख होते हैं; वे सदन की कार्यवाही के संचालन के साथ-साथ संसद के अंतर्राष्ट्रीय संपर्कों में भी प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
- संविधान के अनुच्छेद 79 के अनुसार भारत की संसद में राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा सम्मिलित हैं; संसदीय संपर्क इन्हीं संवैधानिक संस्थाओं के माध्यम से होता है।
- रूस की संघीय सभा (Federal Assembly) दो सदनों से बनी है: ऊपरी सदन फेडरेशन काउंसिल और निचला सदन राज्य ड्यूमा; व्याचेस्लाव वोलोदिन राज्य ड्यूमा के अध्यक्ष हैं।
- BRICS संसदीय मंच BRICS सदस्य देशों की विधायी संस्थाओं को सहयोग के लिए एक साझा मंच देता है, जहाँ आतंकवाद-विरोध, बहुपक्षीय सुधार और संसदीय सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा होती है।
- अंतर-संसदीय संघ (IPU) विश्व के राष्ट्रीय संसदों का अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जो संसदीय संवाद और लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए कार्य करता है।
- संसद भाषिणी जैसी डिजिटल पहलें संसदीय कार्यवाही में बहुभाषिकता, सुलभता और पारदर्शिता बढ़ाती हैं; इससे विधायी प्रक्रिया का नागरिकों तक पहुँचना आसान होता है।
- संविधान सदन, नई दिल्ली में स्थित वह भवन है जहाँ भारत की संसद के केंद्रीय सभागार में अंतरराष्ट्रीय संसदीय बैठकें आयोजित होती हैं; इस बार 12वाँ BRICS संसदीय मंच यहीं होगा।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| 12वां ब्रिक्स संसदीय मंच 2026 | भारत की अध्यक्षता में 26–27 अक्टूबर 2026 को संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में आयोजित; ब्रिक्स देशों की संसदों के बीच सहयोग का बहुपक्षीय मंच |
| भारत–रूस विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त सामरिक साझेदारी | दोनों देशों के संबंधों का वर्तमान ढांचा; 80 वर्ष के राजनयिक संबंधों के संदर्भ में इसे और गहरा करने की पुनः पुष्टि |
| संस्थागत संसदीय संवाद | लोकसभा और रूसी राज्य ड्यूमा के बीच निरंतर संपर्क तथा संसदीय प्रतिनिधिमंडलों का नियमित आदान-प्रदान |
| युवा और महिला सांसदों की भागीदारी | संसदीय कूटनीति में नए नेतृत्व और समावेशी प्रतिनिधित्व को बढ़ावा |
| संसद भाषिणी (Sansad Bhashini) | संसदीय कार्यवाही को सुलभ, समावेशी और नागरिक-केंद्रित बनाने हेतु प्रौद्योगिकी आधारित पहल का साझा विमर्श |
| बहुपक्षीय मुद्दों पर समन्वय | ब्रिक्स संसदों में सहयोग, आतंकवाद के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय प्रयास और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार पर विचार-विमर्श |
महत्व
राजनयिक महत्व
- विधायी प्रमुखों (Presiding Officers) के स्तर पर संवाद, कार्यपालिका स्तर की कूटनीति को पूरक बनाता है।
- संसदीय संपर्क से द्विपक्षीय संबंधों में विश्वास और पारदर्शिता बढ़ती है, जो दीर्घकालिक साझेदारी का आधार है।
- 80 वर्ष के राजनयिक संबंधों का उत्सव वर्ष संवाद को नई ऊर्जा देता है।
संसदीय एवं संस्थागत महत्व
- नियमित प्रतिनिधिमंडल आदान-प्रदान से विधायी अनुभव, समिति-प्रणाली और प्रक्रियागत नवाचारों की साझेदारी संभव होती है।
- संसदीय संस्थाएँ राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व और जनभागीदारी का माध्यम हैं; उनके बीच सहयोग से लोकतांत्रिक संस्थाओं की परस्पर समझ बढ़ती है।
सामरिक एवं बहुपक्षीय महत्व
- ब्रिक्स संसदीय मंच पर सहयोग से भारत की अध्यक्षता में वैश्विक दक्षिण के मुद्दों को संसदीय स्वर मिलता है।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के भारत के दावे पर रूस के समर्थन की सराहना, बहुपक्षीय सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है।
- आतंकवाद के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर साझा रुख सुरक्षा सहयोग के व्यापक ढांचे को मज़बूत करता है।
तकनीकी एवं सामाजिक महत्व
- संसद भाषिणी जैसी बहुभाषी डिजिटल पहल से कार्यवाही की सुलभता बढ़ती है और भाषाई समावेशन को बल मिलता है।
- युवा और महिला सांसदों की भागीदारी लोकतंत्र में समावेशिता के उद्देश्य को आगे बढ़ाती है।
चुनौतियाँ
1. संसदीय कूटनीति की संस्थागत निरंतरता
- संसदीय संवाद प्रायः सदन-अध्यक्षों की व्यक्तिगत पहल पर निर्भर रहता है; स्थायी तंत्र और समयबद्ध कार्ययोजना का अभाव हो सकता है।
- विधायी कार्यकाल बदलने पर पूर्व में हुई सहमतियों की निरंतरता सुनिश्चित करना कठिन होता है।
यूपीएससी लिंक: GS2: संसद की भूमिका और कार्यप्रणाली; भारत की विदेश नीति
2. भिन्न संसदीय ढाँचे और प्रक्रियाएँ
- रूस की संघीय सभा में राज्य ड्यूमा और संघ परिषद हैं, जबकि भारत में लोकसभा और राज्यसभा हैं; दोनों की शक्तियाँ और प्रक्रियाएँ भिन्न हैं।
- इन अंतरों के कारण संयुक्त समितियों या समान प्रक्रियाओं पर सहमति बनाना जटिल हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: GS2: तुलनात्मक संसदीय और शासन प्रणालियाँ
3. बदलते भू-राजनीतिक दबाव
- रूस पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों और वैश्विक ध्रुवीकरण के बीच भारत को अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखनी होती है।
- बहुध्रुवीय विश्व में विभिन्न साझेदारियों के बीच संतुलन साधना एक निरंतर चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: GS2: भारत के हित और द्विपक्षीय/बहुपक्षीय संबंध
4. भाषिक और डिजिटल पहुँच की सीमाएँ
- बहुभाषी प्रौद्योगिकी का अनुवाद-गुणवत्ता, शब्दावली और सांस्कृतिक सूक्ष्मता के स्तर पर सुधार अभी जारी है।
- सभी देशों की संसदों में समान डिजिटल आधारभूत ढांचा उपलब्ध नहीं है, जिससे सहयोग की गति प्रभावित हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: GS2: शासन में प्रौद्योगिकी और ई-गवर्नेंस; GS3: डिजिटल अवसंरचना
5. सुरक्षा परिषद सुधार पर सर्वसम्मति का अभाव
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार पर सदस्य देशों में व्यापक सहमति अब तक नहीं बन सकी है।
- वीटो शक्ति और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे सुधार प्रक्रिया को धीमा रखते हैं।
यूपीएससी लिंक: GS2: संयुक्त राष्ट्र और उसकी संस्थाएँ; भारत की बहुपक्षीय भूमिका
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| संस्थागत निरंतरता | संवाद व्यक्तिगत पहल पर निर्भर; स्थायी तंत्र और समयबद्ध कार्ययोजना का अभाव |
| संसदीय ढाँचों में अंतर | रूस की द्विसदनीय संघीय सभा और भारत की संसद की प्रक्रियाओं में भिन्नता |
| भू-राजनीतिक संतुलन | प्रतिबंधों और ध्रुवीकरण के बीच रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने की चुनौती |
| भाषिक और डिजिटल अंतर | बहुभाषी तकनीक की सटीकता और सभी देशों में समान डिजिटल आधारभूत ढांचे का अभाव |
| सुरक्षा परिषद सुधार | विस्तार और वीटो संरचना पर व्यापक सर्वसम्मति का अभाव |
| बहुपक्षीय सहयोग की सीमाएँ | आतंकवाद पर साझा परिभाषा और कार्रवाई पर मतभेद बने रह सकते हैं |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- संसद भाषिणी (Sansad Bhashini)
आगे की राह
- संसदीय संवाद को एक स्थायी संस्थागत ढांचा देकर द्विवार्षिक या वार्षिक कार्ययोजना तय की जाए, ताकि सदन-अध्यक्षों के बदलने से निरंतरता न टूटे।
- युवा और महिला सांसदों के आदान-प्रदान को अनुभव-आधारित प्रशिक्षण, समिति-कार्य और संयुक्त कार्यशालाओं से जोड़ा जाए।
- तुलनात्मक संसदीय अध्ययन को बढ़ावा दिया जाए, ताकि दोनों देशों की विधायी प्रक्रियाओं की व्यावहारिक समझ विकसित हो।
- संसद भाषिणी जैसी बहुभाषी तकनीकों का अनुभव ब्रिक्स संसदों के साथ साझा किया जाए और अनुवाद-गुणवत्ता में सुधार हेतु सहयोग बढ़े।
- बहुपक्षीय मंचों पर आतंकवाद के विरुद्ध साझा परिभाषा और ठोस कार्रवाई की दिशा में संसदीय स्तर पर संवाद जारी रखा जाए।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार पर क्षेत्रीय और विकासशील देशों के बीच व्यापक सहमति बनाने हेतु संसदीय मंचों का उपयोग किया जाए।
- साझेदारी को केवल सांकेतिक उपलब्धियों तक सीमित न रखकर व्यापार, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से जोड़ा जाए, ताकि संबंध व्यापक आधार पर विकसित हों।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
संसदीय कूटनीति (Parliamentary Diplomacy) · लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका · संसद भाषिणी (Sansad Bhashini) · ब्रिक्स संसदीय मंच (BRICS Parliamentary Forum) · भारत-रूस विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी · अनुच्छेद 253 और संधि-कार्यान्वयन विधि · अनुच्छेद 105 और संसदीय विशेषाधिकार · कार्यपालिका की विदेश नीति में भूमिका · संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् सुधार · अंतर-संसदीय संघ (Inter-Parliamentary Union) · संसदीय समितियाँ और विदेश नीति पर विधायी निगरानी · सूचना-प्रौद्योगिकी आधारित संसदीय पारदर्शिता
अवधारणा प्रवाह
भारत की अध्यक्षता में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच (26–27 अक्टूबर 2026) के आयोजन की तैयारी → मंच से पहले लोकसभा अध्यक्ष और रूसी राज्य ड्यूमा के अध्यक्ष के बीच द्विपक्षीय बैठक → भारत–रूस विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त सामरिक साझेदारी की पुनः पुष्टि और संसदीय संस्थाओं के बीच नियमित संवाद पर सहमति → युवा और महिला सांसदों के आदान-प्रदान तथा प्रतिनिधिमंडल-विनिमय के माध्यम से संसदीय कूटनीति का विस्तार → ब्रिक्स संसदों में सहयोग, आतंकवाद-विरोधी साझा प्रयास और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार पर बहुपक्षीय समन्वय → द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संबंधों में विश्वास एवं पारदर्शिता का सुदृढ़ीकरण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 253 संसद को ऐसी विधि बनाने की शक्ति देता है जो किसी अंतर्राष्ट्रीय संधि या समझौते के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक हो।
2. संविधान का अनुच्छेद 105 संसद के सदस्यों को संसद में वाक्-स्वातंत्र्य तथा कुछ विशेषाधिकार प्रदान करता है।
3. संसद के सभी विशेषाधिकार संविधान में पूर्णतः सूचीबद्ध (enumerated) हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: अनुच्छेद 253 के अंतर्गत संसद अंतर्राष्ट्रीय संधियों के कार्यान्वयन हेतु विधि बना सकती है। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 105 सदस्यों की वाक्-स्वातंत्र्य और संसद में कही गई बातों पर न्यायिक कार्रवाई से संरक्षण से संबंधित है। कथन 3 गलत है: अधिकांश विशेषाधिकार संविधान में स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध नहीं हैं; वे संसदीय परंपरा और संसद द्वारा बनाए गए नियमों से विकसित हुए हैं।
Q2. कथन-कारण (Assertion-Reason) प्रश्न:
कथन (A): संसदीय कूटनीति कार्यपालिका की औपचारिक कूटनीति को पूरक बनाती है, क्योंकि इसके माध्यम से विधायक विभिन्न देशों के विधायकों के साथ सीधा संवाद स्थापित करते हैं।
कारण (R): संविधान के अंतर्गत विदेश नीति और संधि-निर्माण पूर्णतः कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और संसद की इसमें कोई भूमिका नहीं होती।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, किंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) सही है, किंतु (R) गलत है। — कथन (A) सही है: संसदीय कूटनीति (जैसे अंतर-संसदीय संघ और ब्रिक्स संसदीय मंच के माध्यम से संवाद) कार्यपालिका की कूटनीति का पूरक है। कारण (R) गलत है: संधि-निर्माण का अधिकार संविधान के अंतर्गत कार्यपालिका के पास है (अनुच्छेद 73 के अंतर्गत संघ की कार्यपालिका शक्ति), परंतु संसद अनुच्छेद 253 के अंतर्गत संधियों के कार्यान्वयन हेतु विधि बनाने तथा विदेश नीति पर चर्चा और प्रश्न-उत्तर के माध्यम से निगरानी करती है।
Q3. निम्नलिखित सुमेलन (match) कीजिए:
सूची-I (संविधान का अनुच्छेद)
1. अनुच्छेद 79
2. अनुच्छेद 105
3. अनुच्छेद 108
4. अनुच्छेद 253
सूची-II (विषय)
a. संसद के दोनों सदनों का गठन
b. सदस्यों के विशेषाधिकार
c. संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक
d. संधियों के कार्यान्वयन हेतु विधि-निर्माण
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही सुमेलन चुनिए:
- 1-a, 2-b, 3-c, 4-d
- 1-b, 2-a, 3-d, 4-c
- 1-a, 2-c, 3-b, 4-d
- 1-d, 2-b, 3-c, 4-a
उत्तर: 1-a, 2-b, 3-c, 4-d — अनुच्छेद 79 संघीय संसद (राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा) के गठन से संबंधित है। अनुच्छेद 105 सदस्यों के विशेषाधिकारों से संबंधित है। अनुच्छेद 108 संयुक्त बैठक की व्यवस्था करता है। अनुच्छेद 253 संधियों के कार्यान्वयन के लिए संसद को विधि-निर्माण की शक्ति देता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत की संसदीय कूटनीति (Parliamentary Diplomacy) कार्यपालिका की विदेश नीति को किस सीमा तक पूरक बना सकती है, इसका समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि संवैधानिक ढाँचे में संसद की संधि-संबंधी भूमिका सीमित क्यों मानी जाती है और इस सीमा को पार करने के लिए कौन-से संस्थागत उपाय संभव हैं। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना: (1) प्रस्तावना: लोकसभा अध्यक्ष और रूसी राज्य ड्यूमा अध्यक्ष की बैठक (ब्रिक्स संसदीय मंच 2026 से पूर्व) को संसदीय कूटनीति के उदाहरण के रूप में रखें। (2) संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 73 के अंतर्गत संघ की कार्यपालिका शक्ति; अनुच्छेद 53 के अंतर्गत संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित, किंतु संसदीय प्रणाली में मंत्रिपरिषद् द्वारा प्रयुक्त; अनुच्छेद 246 और सातवीं अनुसूची की संघ सूची की प्रविष्टि 14 (संधियों और समझौतों का निष्पादन); अनुच्छेद 253 के अंतर्गत संधियों के कार्यान्वयन हेतु विधि-निर्माण; अनुच्छेद 51 (अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा)। (3) संसद के साधन: प्रश्नकाल, शून्यकाल, विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति, अनुच्छेद 105 के अंतर्गत सदस्यों की वाक्-स्वातंत्र्य और विशेषाधिकार, अंतर-संसदीय संघ (Inter-Parliamentary Union) और राष्ट्रमंडल संसदीय संघ जैसे बहुपक्षीय मंच, प्रतिनिधिमंडलों का आदान-प्रदान। (4) समकालीन संदर्भ: 12वाँ ब्रिक्स संसदीय मंच 2026 (भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में, संसद द्वारा संसद भवन के सेंट्रल हॉल/संविधान सदन में आयोजित); भारत-रूस विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी; संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् सुधार पर चर्चा; आतंकवाद के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय सहयोग। (5) तकनीकी आयाम: संसद भाषिणी (Sansad Bhashini) द्वारा कार्यवाही को बहुभाषी और सुलभ बनाना, जिसका भाषा-तकनीक आधार राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन (Bhashini, MeitY) से जुड़ा है। (6) दृष्टिकोणों का संतुलन: (क) समर्थन पक्ष: संसदीय संवाद द्वारा विश्वास-निर्माण, द्विपक्षीय संबंधों में स्थायित्व, जनमत और दलगत-निरपेक्ष संवाद; (ख) सीमा पक्ष: संधि-निर्माण और विदेश नीति में कार्यपालिका की प्रधानता, संसद की भूमिका अधिकतर ex-post निगरानी तक सीमित, सामान्यतः संधियों के लिए अनिवार्य संसदीय अनुमोदन का संवैधानिक प्रावधान नहीं। (7) निष्कर्ष: संस्थागत उपाय—विदेश मामलों की समिति की नियमित बैठकें, संधियों की संसदीय समीक्षा की प्रक्रिया पर विधायी या परंपरागत सहमति, दलगत-निरपेक्ष प्रतिनिधिमंडल, युवा और महिला सांसदों की भागीदारी—के साथ संतुलित निष्कर्ष दें।
स्रोत: orissapost.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Anthropology VS PSIR
- Best PSIR optional coaching
- Best PSIR optional coaching online
- Best PSIR optional teacher
- लोकसभा स्पीकर बिरला और रूस के ड्यूमा स्पीकर वोलोडिन ने संसदीय सहयोग बढ़ाने पर बातचीत की - October 25, 2026
- UP’s New Age Verification Rules to Curb POCSO Act Misuse - October 25, 2026
- ब्रिक्स संसदीय मंच का 12वाँ सत्र कल शुरू होगा: प्रमुख बिंदु - October 25, 2026

No Comments