एनबीए द्वारा बीज क्षेत्र से 2.02 करोड़ रुपये जारी, जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा

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एनबीए द्वारा बीज क्षेत्र से 2.02 करोड़ रुपये जारी, जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा

ABS फंड प्रवाह प्रक्रियाABS फंड उत्पन्नबीज क्षेत्रNBA द्वारा संवितरण2.02 करोड़जैव विविधता संरक्षणसमुदाय स्तरसमुदाय कल्याणक्षमता निर्माण
ABS फंड प्रवाह प्रक्रिया

✎ पहुँच और लाभ साझाकरण (ABS) तंत्र जैविक संसाधनों के उपयोग से प्राप्त लाभों को उन समुदायों के साथ साझा करने का एक महत्वपूर्ण साधन है जिन्होंने उन्हें संरक्षित किया है, जो जैव विविधता अधिनियम, 2002 द्वारा अनिवार्य है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण, जैव विविधता और आपदा प्रबंधन  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (पर्यावरण अर्थशास्त्र)  |  GS Paper II — शासन (नीति और हस्तक्षेप)
  • Prelims: जैव विविधता अधिनियम, 2002, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA), पहुँच और लाभ साझाकरण (ABS), जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ (BMCs), स्थानीय समुदायों का कल्याण, बीज क्षेत्र
  • Essay: सतत विकास में जैव विविधता संरक्षण की भूमिका, पर्यावरण शासन और सामुदायिक भागीदारी

त्वरित पुनरावृत्ति: पहुँच और लाभ साझाकरण (ABS) तंत्र जैविक संसाधनों के उपयोग से प्राप्त लाभों को उन समुदायों के साथ साझा करने का एक महत्वपूर्ण साधन है जिन्होंने उन्हें संरक्षित किया है, जो जैव विविधता अधिनियम, 2002 द्वारा अनिवार्य है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने बीज क्षेत्र से प्राप्त पहुँच और लाभ साझाकरण (Access and Benefit Sharing – ABS) निधियों से 2.02 करोड़ रुपये का संवितरण किया है। यह पहल जमीनी स्तर पर जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय समुदायों के कल्याण का समर्थन करने के उद्देश्य से की गई है, जो जैव विविधता अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के अनुरूप है।

पृष्ठभूमि

  • भारत ने 1992 के जैविक विविधता पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (Convention on Biological Diversity – CBD) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका उद्देश्य जैव विविधता का संरक्षण, इसके घटकों का सतत उपयोग और आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से होने वाले लाभों का उचित और न्यायसंगत साझाकरण सुनिश्चित करना है।
  • CBD के प्रावधानों को लागू करने के लिए, भारत ने 2002 में जैव विविधता अधिनियम (Biological Diversity Act) पारित किया, जो देश में जैव विविधता के संरक्षण और सतत उपयोग के लिए एक कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
  • इस अधिनियम के तहत राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA), राज्य जैव विविधता बोर्ड (SBBs) और स्थानीय स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMCs) की स्थापना की गई है।
  • पहुँच और लाभ साझाकरण (ABS) तंत्र इस अधिनियम का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो यह सुनिश्चित करता है कि जैविक संसाधनों के उपयोग से प्राप्त लाभ उन समुदायों के साथ साझा किए जाएँ जिन्होंने इन संसाधनों को संरक्षित और बनाए रखा है।
  • बीज क्षेत्र, विशेष रूप से कृषि और बागवानी में, जैविक संसाधनों के उपयोग का एक प्रमुख क्षेत्र है जहाँ से ABS निधियाँ उत्पन्न होती हैं।
  • ABS निधियों का उपयोग आमतौर पर जैव विविधता संरक्षण गतिविधियों, स्थानीय समुदायों की क्षमता निर्माण और उनके सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए किया जाता है।

पहुँच और लाभ साझाकरण (ABS) तंत्र

  • पहुँच और लाभ साझाकरण (ABS) एक ऐसा सिद्धांत है जो जैविक संसाधनों के उपयोग से होने वाले मौद्रिक और गैर-मौद्रिक लाभों को उन देशों और स्थानीय समुदायों के साथ साझा करने पर केंद्रित है जिन्होंने इन संसाधनों को संरक्षित किया है।
  • यह जैविक विविधता पर अभिसमय (CBD) के तीन मुख्य उद्देश्यों में से एक है, साथ ही जैव विविधता का संरक्षण और इसके घटकों का सतत उपयोग भी इसके उद्देश्य हैं।
  • भारत में, जैव विविधता अधिनियम, 2002 ABS तंत्र को कानूनी रूप से अनिवार्य करता है। यह अधिनियम जैविक संसाधनों तक पहुँच को विनियमित करता है और यह सुनिश्चित करता है कि उनसे प्राप्त लाभों को साझा किया जाए।
  • राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) और राज्य जैव विविधता बोर्ड (SBBs) ABS तंत्र के कार्यान्वयन के लिए प्रमुख नियामक निकाय हैं।
  • लाभ साझाकरण में रॉयल्टी, संयुक्त उद्यम, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, अनुसंधान और विकास में भागीदारी, और स्थानीय समुदायों के लिए क्षमता निर्माण जैसे विभिन्न रूप शामिल हो सकते हैं।
  • ABS का उद्देश्य जैविक संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देना और स्थानीय समुदायों को उनके पारंपरिक ज्ञान और संरक्षण प्रयासों के लिए पुरस्कृत करना है, जिससे उन्हें जैव विविधता संरक्षण में सक्रिय भागीदार बनने के लिए प्रोत्साहन मिलता है।
  • बीज क्षेत्र में, जब कोई कंपनी या शोधकर्ता किसी विशेष बीज किस्म या आनुवंशिक सामग्री का उपयोग करता है, तो उसे ABS दिशानिर्देशों के तहत लाभ साझा करना होता है, जो अंततः उन किसानों या समुदायों तक पहुँचता है जिन्होंने उन बीजों को विकसित या संरक्षित किया है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
जैविक विविधता अधिनियम, 2002 भारत में जैविक विविधता के संरक्षण, इसके घटकों के सतत उपयोग और जैविक संसाधनों के उपयोग से होने वाले लाभों के उचित व न्यायसंगत बँटवारे के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
पहुँच और लाभ-साझाकरण (ABS) तंत्र यह सुनिश्चित करता है कि जैविक संसाधनों का उपयोग करने वाले उपयोगकर्ता (जैसे बीज कंपनियाँ) उन समुदायों के साथ लाभ साझा करें जिन्होंने इन संसाधनों को संरक्षित और विकसित किया है।
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के प्रावधानों को लागू करने के लिए एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) है। यह ABS तंत्र के कार्यान्वयन में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
राज्य जैव विविधता बोर्ड (SBBs) राज्य स्तर पर जैविक विविधता के संरक्षण और ABS तंत्र को लागू करने के लिए जिम्मेदार हैं।
जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ (BMCs) स्थानीय स्तर पर जैविक विविधता के संरक्षण, सतत उपयोग और ABS तंत्र के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये स्थानीय समुदायों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
सीड सेक्टर से ABS फंड यह दर्शाता है कि कृषि और बीज उद्योग जैसे क्षेत्र, जो जैविक संसाधनों का उपयोग करते हैं, लाभ-साझाकरण के माध्यम से स्थानीय समुदायों और जैव विविधता संरक्षण में योगदान दे रहे हैं।

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • जैविक विविधता (Biodiversity) का संरक्षण: ABS फंड का उपयोग सीधे जमीनी स्तर पर जैव विविधता संरक्षण गतिविधियों के लिए किया जाता है, जैसे कि स्थानीय प्रजातियों का संरक्षण, पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण और प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा।
  • पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का सुदृढीकरण: स्वस्थ जैव विविधता परागण, मिट्टी निर्माण और जल शुद्धिकरण जैसी महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को बनाए रखने में मदद करती है, जिससे समग्र पर्यावरणीय स्थिरता बढ़ती है।

सामाजिक-आर्थिक महत्व

  • समुदाय का सशक्तिकरण: ABS फंड स्थानीय समुदायों, विशेषकर स्वदेशी समुदायों और किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है, जिन्होंने पीढ़ियों से जैविक संसाधनों का संरक्षण किया है। यह उनके पारंपरिक ज्ञान और प्रथाओं को मान्यता देता है।
  • ग्रामीण आजीविका में सुधार: फंड का उपयोग समुदाय-आधारित परियोजनाओं, स्थायी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने और वैकल्पिक आजीविका के अवसरों को विकसित करने के लिए किया जा सकता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक कल्याण में वृद्धि होती है।
  • न्याय और समानता को बढ़ावा: यह सुनिश्चित करता है कि जैविक संसाधनों के उपयोग से होने वाले लाभ उन लोगों के साथ साझा किए जाएँ जिन्होंने इन संसाधनों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे संसाधनों के उपयोग में न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित होता है।

शासन और नीतिगत महत्व

  • जैविक विविधता अधिनियम, 2002 का प्रभावी कार्यान्वयन: NBA द्वारा ABS फंड का वितरण अधिनियम के प्रावधानों को सक्रिय रूप से लागू करने और इसके उद्देश्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं की पूर्ति: यह जैविक विविधता पर कन्वेंशन (Convention on Biological Diversity – CBD) के नागोया प्रोटोकॉल (Nagoya Protocol) के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में मदद करता है, जो पहुँच और लाभ-साझाकरण पर केंद्रित है।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्रोत्साहन: यह घटना बीज क्षेत्र जैसे उद्योगों को जैव विविधता संरक्षण में अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (Corporate Social Responsibility – CSR) को पूरा करने और स्थानीय समुदायों के साथ सहयोग करने के लिए प्रोत्साहित करती है।

चुनौतियाँ

1. जागरूकता और क्षमता निर्माण का अभाव

  • स्थानीय समुदायों और जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMCs) के बीच ABS तंत्र के बारे में जागरूकता की कमी है।
  • समुदायों के पास लाभ-साझाकरण समझौतों को प्रभावी ढंग से बातचीत करने और फंड का प्रबंधन करने के लिए आवश्यक तकनीकी और कानूनी क्षमता का अभाव हो सकता है।

2. लाभ-साझाकरण के मूल्यांकन और वितरण में जटिलता

  • जैविक संसाधनों के मौद्रिक मूल्य का आकलन करना और यह निर्धारित करना जटिल है कि लाभों को विभिन्न हितधारकों के बीच कैसे वितरित किया जाए।
  • पारंपरिक ज्ञान और आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से होने वाले अप्रत्यक्ष लाभों को मापना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

3. निगरानी और प्रवर्तन तंत्र

  • ABS समझौतों के अनुपालन की निगरानी करना और यह सुनिश्चित करना कि फंड का उपयोग इच्छित उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है, एक चुनौती है।
  • उल्लंघनों के मामलों में प्रभावी प्रवर्तन तंत्र की आवश्यकता है।

4. दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता

  • ABS फंड का प्रवाह उद्योग की गतिविधियों पर निर्भर करता है, जो अस्थिर हो सकता है।
  • जैव विविधता संरक्षण के लिए दीर्घकालिक और सतत वित्तपोषण सुनिश्चित करना एक चुनौती है।

5. हितधारकों का समन्वय

  • राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA), राज्य जैव विविधता बोर्ड (SBBs), जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMCs), उद्योग और स्थानीय समुदायों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करना आवश्यक है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
पारंपरिक ज्ञान की पहचान यह सुनिश्चित करना कि जैविक संसाधनों से जुड़े पारंपरिक ज्ञान वाले सभी समुदायों की पहचान की जाए और उन्हें ABS तंत्र में शामिल किया जाए।
फंड का प्रभावी उपयोग यह सुनिश्चित करना कि वितरित फंड का उपयोग वास्तव में जैव विविधता संरक्षण और समुदाय के कल्याण के लिए किया जाए, न कि अन्य उद्देश्यों के लिए।
उद्योग की भागीदारी सभी प्रासंगिक उद्योगों को ABS तंत्र में सक्रिय रूप से भाग लेने और लाभ-साझाकरण दायित्वों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करना।
कानूनी विवाद ABS समझौतों या लाभ-साझाकरण के वितरण से संबंधित संभावित कानूनी विवादों को हल करने के लिए स्पष्ट तंत्र का अभाव।
क्षमता निर्माण की आवश्यकता स्थानीय स्तर पर BMCs और समुदायों की क्षमता को मजबूत करना ताकि वे ABS प्रक्रियाओं को समझ सकें और उनमें प्रभावी ढंग से भाग ले सकें।

आगे की राह

  • ABS तंत्र के बारे में स्थानीय समुदायों, विशेषकर जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMCs) के सदस्यों के बीच व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएँ।
  • BMCs और अन्य हितधारकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए जाएँ ताकि उन्हें लाभ-साझाकरण समझौतों पर बातचीत करने, फंड का प्रबंधन करने और जैव विविधता संरक्षण परियोजनाओं को लागू करने में मदद मिल सके।
  • लाभ-साझाकरण के मूल्यांकन और वितरण के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और मानकीकृत दिशानिर्देश विकसित किए जाएँ, जिसमें पारंपरिक ज्ञान और आनुवंशिक संसाधनों के मूल्य को शामिल किया जाए।
  • ABS फंड के उपयोग की निगरानी और मूल्यांकन के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित किया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि फंड का उपयोग इच्छित उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है और इसके परिणाम प्रभावी हैं।
  • उद्योगों, विशेषकर उन क्षेत्रों में जो जैविक संसाधनों का उपयोग करते हैं, को ABS तंत्र में सक्रिय रूप से भाग लेने और अपने लाभ-साझाकरण दायित्वों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु प्रोत्साहन और नियामक उपाय किए जाएँ।
  • राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय स्तर पर विभिन्न हितधारकों – NBA, SBBs, BMCs, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों – के बीच समन्वय और सहयोग को मजबूत किया जाए।
  • जैव विविधता संरक्षण और समुदाय के कल्याण के लिए ABS फंड के अलावा अन्य स्थायी वित्तपोषण तंत्रों की खोज की जाए।
  • पारंपरिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण और संरक्षण को बढ़ावा दिया जाए, और यह सुनिश्चित किया जाए कि ज्ञान धारकों को उनके योगदान के लिए उचित मान्यता और लाभ मिले।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

जैव विविधता अधिनियम, 2002 · राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) · पहुँच और लाभ साझाकरण (ABS) · जैव संसाधनों का संरक्षण · स्थानीय समुदायों का कल्याण · पारंपरिक ज्ञान · जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ (BMC) · वन्यजीव संरक्षण · सतत विकास · पर्यावरणीय शासन · बीज क्षेत्र · सामुदायिक भागीदारी

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48क’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51क (छ)’, ‘note’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करना’}

अवधारणा प्रवाह

जैविक संसाधनों का औद्योगिक उपयोग (जैसे बीज क्षेत्र)।  →  जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के तहत ABS दायित्व।  →  उद्योग द्वारा राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) को ABS फंड का भुगतान।  →  NBA द्वारा ABS फंड का स्थानीय समुदायों/BMCs को वितरण।  →  फंड का उपयोग जैव विविधता संरक्षण और समुदाय के कल्याण के लिए।  →  स्थानीय जैव विविधता का संरक्षण और ग्रामीण आजीविका में सुधार।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) का गठन जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत किया गया था।
2. पहुँच और लाभ साझाकरण (ABS) तंत्र का उद्देश्य जैव संसाधनों के उपयोग से होने वाले लाभों को उन समुदायों के साथ साझा करना है जो इन संसाधनों का संरक्षण करते हैं।
3. NBA केवल केंद्र सरकार को सलाह देता है और राज्यों के लिए बाध्यकारी निर्देश जारी नहीं कर सकता।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। NBA एक वैधानिक निकाय है जिसका गठन जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत किया गया था। कथन 2 सही है। ABS जैव विविधता अधिनियम का एक प्रमुख सिद्धांत है, जिसका उद्देश्य जैव संसाधनों के उपयोग से होने वाले मौद्रिक और गैर-मौद्रिक लाभों को स्थानीय समुदायों के साथ साझा करना है। कथन 3 गलत है। NBA केंद्र और राज्य सरकारों दोनों को सलाह देता है और जैव विविधता के संरक्षण, उसके घटकों के सतत उपयोग और लाभ साझाकरण से संबंधित मामलों पर बाध्यकारी निर्देश भी जारी कर सकता है।

Q2. पहुँच और लाभ साझाकरण (ABS) तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. यह जैव विविधता पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (CBD) के तीन मुख्य उद्देश्यों में से एक है।
2. यह केवल विदेशी संस्थाओं द्वारा भारतीय जैव संसाधनों के उपयोग पर लागू होता है।
3. इसके तहत लाभ साझाकरण में मौद्रिक और गैर-मौद्रिक दोनों प्रकार के लाभ शामिल हो सकते हैं।
सही उत्तर का चयन करें:

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 3
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है। CBD के तीन मुख्य उद्देश्य हैं: जैव विविधता का संरक्षण, इसके घटकों का सतत उपयोग, और आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से होने वाले लाभों का उचित और न्यायसंगत साझाकरण (ABS)। कथन 2 गलत है। ABS तंत्र भारतीय संस्थाओं पर भी लागू होता है, खासकर जब वे स्थानीय समुदायों के जैव संसाधनों और संबंधित पारंपरिक ज्ञान का उपयोग करते हैं। कथन 3 सही है। लाभ साझाकरण में रॉयल्टी, शुल्क, संयुक्त उद्यम, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, अनुसंधान और विकास में भागीदारी, और स्थानीय समुदायों के लिए क्षमता निर्माण जैसे मौद्रिक और गैर-मौद्रिक लाभ शामिल हो सकते हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) की भूमिका और कार्यों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। पहुँच और लाभ साझाकरण (ABS) तंत्र के माध्यम से स्थानीय समुदायों के कल्याण को सुनिश्चित करने में यह कितना सफल रहा है? (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय में जैव विविधता अधिनियम, 2002 और NBA के गठन का संक्षिप्त उल्लेख करें। मुख्य भाग में NBA की भूमिका और कार्यों का विस्तार से वर्णन करें, जिसमें इसके नियामक, सलाहकार और प्रवर्तन कार्य शामिल हों। इसके बाद, पहुँच और लाभ साझाकरण (ABS) तंत्र की अवधारणा और इसके उद्देश्यों को समझाएं। ABS के माध्यम से स्थानीय समुदायों के कल्याण को सुनिश्चित करने में NBA की सफलता और चुनौतियों का समालोचनात्मक विश्लेषण करें। इसमें बीज क्षेत्र से ABS निधियों के संवितरण जैसे हालिया उदाहरणों का उल्लेख करें। निष्कर्ष में NBA की प्रभावशीलता बढ़ाने और ABS को मजबूत करने के लिए सुझाव दें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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