29 Sep विकसित पंचायत: संसाधनों और अवसरों का समग्र विकास
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान: ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और आधारभूत संरचना; संघ एवं राज्यों के कार्य और उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण और उसकी चुनौतियाँ; शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस-अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय। | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय; समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।
- Prelims: नीति आयोग, राज्य सहायता मिशन (SSM), विकसित पंचायत, पंचायती राज संस्थाएँ (PRIs), स्थानीय स्वशासन, सतत विकास लक्ष्य (SDGs), ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP), 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम
- Essay: स्थानीय स्वशासन: भारत के विकास की कुंजी, विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में पंचायतों की भूमिका
पृष्ठभूमि
- भारत में स्थानीय स्वशासन (Local Self-Governance) की अवधारणा प्राचीन काल से चली आ रही है, लेकिन इसे संवैधानिक दर्जा 73वें संविधान संशोधन अधिनियम (73rd Constitutional Amendment Act), 1992 के माध्यम से मिला।
- यह संशोधन ग्रामीण क्षेत्रों में त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था (Three-tier Panchayati Raj System) की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करता है, जिसमें ग्राम पंचायत, ब्लॉक पंचायत और जिला पंचायत शामिल हैं।
- पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) को संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची (Eleventh Schedule) में सूचीबद्ध 29 विषयों पर कार्य करने की शक्ति और उत्तरदायित्व सौंपे गए हैं, जिनमें कृषि, ग्रामीण विकास, प्राथमिक शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।
- नीति आयोग, भारत सरकार का एक प्रमुख थिंक टैंक है, जो सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को बढ़ावा देने और राज्यों को नीतिगत मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया है।
- भारत ने 2030 एजेंडा के तहत सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को अपनाया है, और इन लक्ष्यों की प्राप्ति में स्थानीय स्तर पर पंचायतों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
नीति आयोग का ‘विकसित पंचायत’ कार्यशाला क्या है?
- इसका लक्ष्य पंचायतों को ‘विकसित पंचायत’ में रूपांतरित करना है, जिसका अर्थ है ऐसी पंचायतें जो अपने क्षेत्र के लोगों, स्थानों, संसाधनों और अवसरों को प्रभावी ढंग से जोड़कर समग्र विकास सुनिश्चित करती हैं।
- कार्यशाला का उद्देश्य पंचायतों को स्थानीय स्तर पर सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने के लिए एक मंच प्रदान करना और उनकी क्षमता का निर्माण करना है।
- यह पंचायतों को ग्राम पंचायत विकास योजना (Gram Panchayat Development Plan – GPDP) तैयार करने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में सहायता प्रदान करने पर केंद्रित है।
- कार्यशाला में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों, नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिससे अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान संभव हुआ।
- इसका जोर स्थानीय स्तर पर डेटा-आधारित योजना (Data-based Planning), पारदर्शिता (Transparency) और जवाबदेही (Accountability) को बढ़ावा देने पर है।
- यह पहल ‘विकसित भारत @2047’ के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को प्राप्त करने में स्थानीय स्वशासन की भूमिका को रेखांकित करती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| विकसित पंचायत कार्यशाला | पंचायतों को सशक्त बनाने और स्थानीय शासन को मजबूत करने पर केंद्रित। |
| नीति आयोग का राज्य समर्थन मिशन (SSM) | राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नीति निर्माण और सुशासन में सहायता प्रदान करता है। |
| विषय: ‘विकसित पंचायत: लोगों, स्थानों, संसाधनों और अवसरों को जोड़ना’ | स्थानीय स्तर पर समग्र विकास के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है। |
| क्षमता निर्माण और ज्ञान साझाकरण | पंचायती राज संस्थाओं के पदाधिकारियों और हितधारकों के लिए महत्वपूर्ण। |
| सहयोगात्मक संघवाद | केंद्र और राज्य/स्थानीय सरकारों के बीच समन्वय को बढ़ावा देता है। |
महत्व
शासन और प्रशासन
- यह कार्यशाला पंचायतों को ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए सशक्त बनाने पर केंद्रित है।
- स्थानीय स्वशासन (Local Self-Governance) को मजबूत करके, यह जमीनी स्तर पर नीतियों और कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करता है।
- नीति आयोग का राज्य समर्थन मिशन राज्यों को बेहतर शासन प्रथाओं को अपनाने और क्षमता निर्माण (Capacity Building) में सहायता करता है।
सामाजिक-आर्थिक विकास
- पंचायतों को लोगों, स्थानों, संसाधनों और अवसरों को जोड़ने के लिए प्रोत्साहित करके, यह स्थानीय स्तर पर समावेशी विकास को बढ़ावा देता है।
- यह गरीबी उन्मूलन, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण बुनियादी ढांचे (Rural Infrastructure) के विकास जैसे क्षेत्रों में पंचायतों की भूमिका को बढ़ाता है।
- स्थानीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग और अवसरों के सृजन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।
सहयोगात्मक संघवाद
- यह पहल केंद्र सरकार और पंचायती राज संस्थाओं के बीच समन्वय और सहयोग को मजबूत करती है।
- यह राज्यों को नीति आयोग के साथ मिलकर काम करने और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के लिए एक मंच प्रदान करती है।
- जमीनी स्तर पर शासन में सुधार के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच साझेदारी आवश्यक है।
चुनौतियाँ
1. क्षमता और संसाधन की कमी
- कई पंचायतों के पास प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए आवश्यक वित्तीय, मानव और तकनीकी संसाधनों की कमी है।
- पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों और कर्मचारियों के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का अभाव है।
यूपीएससी लिंक: शासन, विकास प्रक्रियाएं
2. शक्तियों का अपर्याप्त हस्तांतरण
- राज्यों द्वारा पंचायतों को अभी भी पर्याप्त शक्तियां, कार्य और धन हस्तांतरित नहीं किए गए हैं, जिससे उनकी स्वायत्तता (Autonomy) सीमित होती है।
- कई मामलों में, राज्य सरकारें पंचायतों के मामलों में अत्यधिक हस्तक्षेप करती हैं।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संविधान, स्थानीय स्वशासन
3. जवाबदेही और पारदर्शिता का अभाव
- पंचायतों में निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी और जवाबदेही तंत्र का कमजोर होना एक चुनौती है।
- ग्राम सभाओं की नियमित बैठकें न होना और उनकी भागीदारी का अभाव भी एक समस्या है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
4. डिजिटल डिवाइड और कनेक्टिविटी
- ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी और तकनीकी साक्षरता (Technical Literacy) की कमी पंचायतों को ई-शासन (e-Governance) अपनाने में बाधा डालती है।
- डिजिटल सेवाओं तक पहुंच की कमी से सूचना का प्रसार और नागरिक भागीदारी प्रभावित होती है।
यूपीएससी लिंक: ई-शासन, प्रौद्योगिकी
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| वित्तीय स्वायत्तता | पंचायतों को राज्य सरकारों से पर्याप्त वित्तीय सहायता और अपने स्वयं के राजस्व स्रोत विकसित करने की सीमित क्षमता। |
| मानव संसाधन | पंचायतों में प्रशिक्षित कर्मचारियों और तकनीकी विशेषज्ञों की कमी। |
| राजनीतिक हस्तक्षेप | राज्य सरकारों और स्थानीय नेताओं द्वारा पंचायतों के कामकाज में अनुचित हस्तक्षेप। |
| जागरूकता का अभाव | नागरिकों और प्रतिनिधियों के बीच पंचायती राज संस्थाओं की शक्तियों और जिम्मेदारियों के बारे में जागरूकता की कमी। |
| बुनियादी ढांचा | पंचायतों के पास कार्यालय भवनों, इंटरनेट कनेक्टिविटी और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे की कमी। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA)
- प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (PMAY-G)
- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA)
आगे की राह
- पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए 73वें संविधान संशोधन (73rd Constitutional Amendment) के प्रावधानों को पूर्ण रूप से लागू किया जाए, जिसमें शक्तियों, कार्यों और धन का वास्तविक हस्तांतरण शामिल है।
- पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों और कर्मचारियों के लिए नियमित और व्यापक क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, जिसमें डिजिटल साक्षरता और ई-शासन पर विशेष ध्यान दिया जाए।
- पंचायतों की वित्तीय स्वायत्तता बढ़ाने के लिए उनके स्वयं के राजस्व स्रोतों को मजबूत किया जाए और राज्य वित्त आयोगों (State Finance Commissions) की सिफारिशों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
- ग्राम सभाओं को अधिक सशक्त और पारदर्शी बनाया जाए, उनकी नियमित बैठकें सुनिश्चित की जाएं और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाई जाए।
- पंचायतों में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए, डिजिटल बुनियादी ढांचे में सुधार किया जाए और ई-शासन सेवाओं को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाया जाए।
- पंचायतों के प्रदर्शन की निगरानी और मूल्यांकन के लिए एक मजबूत तंत्र विकसित किया जाए, जिसमें जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) को बढ़ावा दिया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
नीति आयोग · राज्य सहयोग मिशन · विकसित पंचायत · स्थानीय स्वशासन · पंचायती राज · सतत विकास लक्ष्य · ग्राम पंचायत विकास योजना · क्षमता निर्माण
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 40’, ‘note’: ‘ग्राम पंचायतों का संगठन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243’, ‘note’: ‘पंचायतों की परिभाषा, संरचना, शक्तियाँ’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243H’, ‘note’: ‘पंचायतों द्वारा कर लगाने की शक्तियाँ’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243I’, ‘note’: ‘राज्य वित्त आयोग का गठन’}
- {‘article’: ‘ग्यारहवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘पंचायतों के 29 कार्यात्मक विषय’}
अवधारणा प्रवाह
नीति आयोग द्वारा ‘विकसित पंचायत’ कार्यशाला का आयोजन → पंचायती राज संस्थाओं की क्षमता और ज्ञान में वृद्धि → स्थानीय स्तर पर सुशासन और प्रभावी नीति कार्यान्वयन → ग्रामीण क्षेत्रों में समावेशी सामाजिक-आर्थिक विकास → ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की प्राप्ति में योगदान
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. नीति आयोग एक संवैधानिक निकाय है जो भारत सरकार के लिए नीतिगत थिंक टैंक के रूप में कार्य करता है।
2. राज्य सहयोग मिशन (State Support Mission) नीति आयोग की एक पहल है जिसका उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सुशासन को बढ़ावा देना है।
3. ‘विकसित पंचायत’ पहल का लक्ष्य पंचायतों को सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने में सक्षम बनाना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि नीति आयोग एक गैर-संवैधानिक और गैर-सांविधिक निकाय है। कथन 2 सही है क्योंकि राज्य सहयोग मिशन का उद्देश्य राज्यों में सुशासन को बढ़ावा देना है। कथन 3 सही है क्योंकि ‘विकसित पंचायत’ पहल का लक्ष्य पंचायतों को सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में सक्षम बनाना है।
Q2. नीति आयोग के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. इसका गठन 1 जनवरी, 2015 को योजना आयोग के स्थान पर किया गया था।
2. यह सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) के सिद्धांत पर कार्य करता है।
3. इसके उपाध्यक्ष की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 सही है क्योंकि नीति आयोग का गठन 1 जनवरी, 2015 को योजना आयोग के स्थान पर किया गया था। कथन 2 सही है क्योंकि नीति आयोग सहकारी संघवाद के सिद्धांत पर कार्य करता है, जिसमें राज्यों की भागीदारी को महत्व दिया जाता है। कथन 3 गलत है क्योंकि नीति आयोग के उपाध्यक्ष की नियुक्ति प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ पंचायती राज संस्थाओं के सशक्तिकरण में नीति आयोग के ‘विकसित पंचायत’ पहल के महत्व का परीक्षण करें। यह पहल स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने में किस प्रकार सहायक हो सकती है? (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत नीति आयोग और ‘विकसित पंचायत’ पहल का संक्षिप्त परिचय देकर करें। पहल के महत्व को विभिन्न आयामों में स्पष्ट करें, जैसे क्षमता निर्माण, संसाधन जुटाना, प्रौद्योगिकी का उपयोग और भागीदारीपूर्ण योजना। इसके बाद, यह बताएं कि यह पहल स्थानीय स्वशासन को कैसे मजबूत कर सकती है, जिसमें निर्णय लेने की प्रक्रिया में स्थानीय समुदायों की भागीदारी, जवाबदेही में वृद्धि और जमीनी स्तर पर विकास शामिल है। अंत में, सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति में ‘विकसित पंचायत’ की भूमिका पर चर्चा करें, जिसमें गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण जैसे लक्ष्य शामिल हैं। निष्कर्ष में, पहल की सफलता के लिए आवश्यक चुनौतियों और सुझावों को संक्षेप में प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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