संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी: जलवायु परिवर्तन से महासागर की कार्बन सोखने की क्षमता कमजोर हो रही है

संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी: जलवायु परिवर्तन से महासागर की कार्बन सोखने की क्षमता कमजोर हो रही है

संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी: जलवायु परिवर्तन से महासागर की कार्बन सोखने की क्षमता कमजोर हो रही है

महासागर कार्बन अवशोषण क्षमता में गिरावटजलवायु परिवर्तनतापमान वृद्धिमहासागर क्षमता6% कमीCO₂ अवशोषण30% घटावायुमंडल में CO₂अधिक बचातापन तीव्रगति बढ़ी
महासागर कार्बन अवशोषण क्षमता में गिरावट

✎ महासागर वैश्विक CO₂ उत्सर्जन का लगभग 30 प्रतिशत अवशोषित करता है, पर जलवायु परिवर्तन से उसकी क्षमता लगभग 6 प्रतिशत घट चुकी है; इसलिए निगरानी, नीला कार्बन संरक्षण और उत्सर्जन में कटौती साथ-साथ चलने चाहिए, तकनीकी शॉर्टकट के रूप में…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण (जलवायु परिवर्तन, कार्बन सिंक, जैव-विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण)  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (समुद्री निगरानी प्रौद्योगिकी, महासागर-आधारित जलवायु उपाय)  |  GS Paper II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (संयुक्त राष्ट्र निकाय, UNFCCC, COP प्रक्रिया, लघु द्वीपीय विकासशील राज्य)
  • Prelims: कार्बन सिंक (Carbon Sink) और महासागर की भूमिका, नीला कार्बन (Blue Carbon): मैंग्रोव, सीग्रास और साल्ट मार्श, समुद्री कार्बन डाइऑक्साइड निष्कासन (Marine Carbon Dioxide Removal), लघु द्वीपीय विकासशील राज्य (SIDS), ऋण-के-बदले-प्रकृति अदला-बदली (Debt-for-Nature Swap) — सेशेल्स, 2015, UNEP बनाम UNFCCC: भूमिका और संस्थागत अंतर, मैंग्रोव पहल: तटीय आवास और मूर्त आय हेतु (MISHTI), महासागरीय अम्लीकरण (Ocean Acidification)
  • Essay: “महासागर: जलवायु का मौन रक्षक, पर दबाव में” — कार्बन अवशोषण में गिरावट और मानव-प्रेरित जलवायु परिवर्तन, जलवायु समाधानों में तकनीकी शॉर्टकट की सीमाएँ: उत्सर्जन में कटौती और पारिस्थितिकी संरक्षण का विकल्प नहीं

त्वरित पुनरावृत्ति: महासागर वैश्विक CO₂ उत्सर्जन का लगभग 30 प्रतिशत अवशोषित करता है, पर जलवायु परिवर्तन से उसकी क्षमता लगभग 6 प्रतिशत घट चुकी है; इसलिए निगरानी, नीला कार्बन संरक्षण और उत्सर्जन में कटौती साथ-साथ चलने चाहिए, तकनीकी शॉर्टकट के रूप में नहीं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और जलवायु परिवर्तन संबंधी संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) की एक नई रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण महासागर की कार्बन अवशोषण क्षमता लगभग 6 प्रतिशत घट चुकी है। यह रिपोर्ट नवंबर में होने वाले COP31 जलवायु सम्मेलन से पहले जारी हुई है। महासागर मानव-जनित कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन का लगभग 30 प्रतिशत और ग्रीनहाउस गैसों द्वारा रोकी गई अतिरिक्त ऊष्मा का लगभग 90 प्रतिशत अवशोषित करता है। रिपोर्ट के अनुसार बढ़ते तापमान और महासागर की रसायन-शास्त्र, परिसंचरण तथा पारिस्थितिकी तंत्र में आ रहे बदलाव इस क्षमता को और कमजोर कर रहे हैं, जिससे वायुमंडल में अधिक CO₂ बचा रह रहा है। रिपोर्ट ने दक्षिणी और हिंद महासागर, आर्कटिक तथा कई तटीय क्षेत्रों में विश्वसनीय निगरानी आंकड़ों की कमी को प्रमुख चुनौती बताया है और “महासागरीय कार्बन इंटेलिजेंस” को सुदृढ़ करने का आह्वान किया है।

पृष्ठभूमि

  • महासागर वायुमंडलीय कार्बन का एक प्रमुख सिंक है। वह वायुमंडल से CO₂ को घोलकर और जैविक प्रक्रियाओं के माध्यम से दीर्घकालिक रूप से संचित करता है। इसकी क्षमता घटने का अर्थ है कि उत्सर्जन का अधिक हिस्सा वायुमंडल में रहेगा और तापन को तेज़ करेगा।
  • नीला कार्बन (Blue Carbon) की अवधारणा को संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने 2009 की एक रिपोर्ट में व्यापक रूप से प्रस्तुत किया। मैंग्रोव, सीग्रास और साल्ट मार्श तटीय पारिस्थितिकी तंत्र हर वर्ष लगभग 40.7 करोड़ टन CO₂ संचित करते हैं।
  • लघु द्वीपीय विकासशील राज्य (SIDS) वैश्विक उत्सर्जन में एक प्रतिशत से भी कम योगदान देते हैं, फिर भी वे महासागर और जलवायु प्रभावों की अग्रिम पंक्ति में हैं। इसी कारण वित्त, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता-निर्माण की माँग उनकी प्रमुख अपेक्षा है।
  • सेशेल्स ने 2015 में ऋण-के-बदले-प्रकृति अदला-बदली के तहत अपने विदेशी ऋण के एक हिस्से की पुनर्संरचना की और बदले में सामुद्रिक संरक्षण की प्रतिबद्धताएँ दीं। इससे समुद्री संरक्षण, जलवायु सहनशीलता और सतत नीली अर्थव्यवस्था के लिए एक न्यास निधि (Trust Fund) बनाई गई।
  • पेरिस समझौता (2015) के तहत देश राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) प्रस्तुत करते हैं। महासागर-आधारित उपाय इन्हीं प्रयासों को पूरक बना सकते हैं, पर रिपोर्ट के अनुसार वे उत्सर्जन में कटौती का विकल्प नहीं हैं।

महासागरीय कार्बन अवशोषण क्या है?

  • महासागर CO₂ को दो मुख्य प्रक्रियाओं से अवशोषित करता है: भौतिक पंप (Physical Pump), जिसमें CO₂ सतही जल में घुलकर गहरे जल तक पहुँचता है, और जैविक पंप (Biological Pump), जिसमें समुद्री पादप-प्लवक प्रकाश-संश्लेषण द्वारा कार्बन को जैविक पदार्थ में बदलते हैं और वह तलछट में जमा होता है।
  • तापमान बढ़ने पर समुद्री जल में गैसों की घुलनशीलता घटती है, जिससे अवशोषण क्षमता कम होती है। गर्म सतही जल का स्तरीकरण (Stratification) गहरे जल के साथ मिश्रण को भी घटा देता है।
  • जब महासागर अधिक CO₂ घोलता है तो उसका pH घटता है, जिसे महासागरीय अम्लीकरण (Ocean Acidification) कहा जाता है। इससे कैल्शियम कार्बोनेट से खोल और कंकाल बनाने वाले जीवों पर दबाव पड़ता है।
  • नीला कार्बन तटीय पारिस्थितिकी तंत्र, विशेषकर मैंग्रोव, सीग्रास मेडो और साल्ट मार्श, में मिट्टी और जैविक पदार्थ में दीर्घकाल तक संचित रहता है। ये तटरेखा की रक्षा, जैव-विविधता और आजीविका को भी सहारा देते हैं।
  • समुद्री कार्बन डाइऑक्साइड निष्कासन (Marine CDR) वे तकनीकी उपाय हैं जो वायुमंडल से CO₂ निकालकर दीर्घकाल तक संग्रह का लक्ष्य रखते हैं। इनमें अभी उच्च अनिश्चितता है और शोध, निगरानी तथा नियमन की आवश्यकता है।
  • महासागर-आधारित तकनीकों को तीन श्रेणियों में देखा जा सकता है: निगरानी (सेंसर, आंकड़ा प्रणाली और मॉडलिंग), नीला कार्बन पारिस्थितिकी तंत्र और समुद्री CDR। निगरानी को रिपोर्ट में सबसे परिपक्व और तत्काल आवश्यक माना गया है।
  • लघु द्वीपीय विकासशील राज्यों की आवश्यकताओं के लिए वित्त तक पहुँच, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता-निर्माण आवश्यक है। प्रशांत क्षेत्र में फिजी, पापुआ न्यू गिनी, सोलोमन द्वीप और वानुअतु को सीग्रास और मैंग्रोव मानचित्रण तथा कार्बन मापन में सहायता मिली है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
महासागर की कार्बन अवशोषण क्षमता महासागर मानव-जनित कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन का लगभग 30 प्रतिशत और ग्रीनहाउस गैसों द्वारा रोकी गई अतिरिक्त ऊष्मा का लगभग 90 प्रतिशत अवशोषित करता है।
जलवायु परिवर्तन से क्षरण जलवायु परिवर्तन ने महासागर की CO₂ अवशोषण क्षमता को लगभग 6 प्रतिशत घटा दिया है, जिससे वायुमंडल में अधिक CO₂ रह जाती है।
नीला कार्बन पारिस्थितिकी तंत्र (Blue Carbon Ecosystems) मैंग्रोव, सी-ग्रास और लवणीय दलदल (Salt Marsh) प्रतिवर्ष लगभग 407 मिलियन टन (लगभग 40.7 करोड़ टन) CO₂ संग्रहित करते हैं, और इनकी बहाली से यह मात्रा और बढ़ सकती है।
तीन प्रमुख महासागरीय जलवायु प्रौद्योगिकियाँ महासागर निगरानी, नीला कार्बन और समुद्री कार्बन डाइऑक्साइड निष्कासन (Marine Carbon Dioxide Removal) में से प्रत्येक के अवसर और जोखिम अलग-अलग हैं।
संस्थागत संदर्भ यह रिपोर्ट UNEP और UNFCCC का संयुक्त प्रयास है और नवंबर में होने वाले COP31 सम्मेलन से पहले जारी की गई है।

महत्व

पर्यावरणीय (Environmental)

  • महासागर वैश्विक जलवायु प्रणाली का प्रमुख नियामक है; उसकी अवशोषण क्षमता में कमी से तापमान वृद्धि की गति तेज़ हो सकती है।
  • नीला कार्बन पारिस्थितिकी तंत्र तटीय क्षेत्रों की रक्षा करते हैं और जैव विविधता को सहारा देते हैं।

आर्थिक (Economic)

  • नीला अर्थव्यवस्था (Blue Economy) में मत्स्य पालन, पर्यटन और तटीय आजीविका जैसे क्षेत्र महासागर की स्वस्थ स्थिति पर निर्भर हैं।
  • कार्बन संग्रहण के आँकड़ों से कार्बन बाज़ार और वित्तीय प्रोत्साहन की संरचना को आधार मिल सकता है।

वैज्ञानिक एवं तकनीकी (Scientific and Technological)

  • सेंसर, उपग्रह और मॉडलिंग से महासागरीय कार्बन प्रणाली को समझना और प्रबंधित करना संभव होता है।
  • समुद्री CO₂ निष्कासन जैसी तकनीकें अभी अनिश्चित हैं, इसलिए उनके लिए अनुसंधान और नियमन आवश्यक है।

न्याय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग (Equity and International Cooperation)

  • लघु द्वीपीय विकासशील राज्य (Small Island Developing States – SIDS) वैश्विक उत्सर्जन में एक प्रतिशत से भी कम योगदान देते हैं, फिर भी वे जलवायु प्रभावों की अग्रिम पंक्ति में हैं।
  • वित्त, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता-निर्माण की पहुँच ऐसे देशों को स्थानीय समाधान विकसित करने में सक्षम बनाती है।

चुनौतियाँ

1. महासागरीय आँकड़ों की कमी

  • दक्षिणी महासागर, हिंद महासागर, आर्कटिक और कई तटीय क्षेत्रों में विश्वसनीय निगरानी आँकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
  • जो क्षेत्र मापे नहीं जाते, उनके प्रबंधन और संरक्षण की योजना बनाना कठिन है।

2. महासागरीय रासायनिक और भौतिक परिवर्तन

  • तापमान वृद्धि, महासागरीय परिसंचरण में बदलाव और रासायनिक संरचना में परिवर्तन से अवशोषण और भंडारण की प्रक्रिया धीमी पड़ती है।
  • इस प्रक्रिया के और तेज़ होने की संभावना है, जिससे वायुमंडलीय CO₂ का संचय बढ़ सकता है।

3. नीला कार्बन पारिस्थितिकी तंत्र का क्षरण

  • मैंग्रोव, सी-ग्रास और लवणीय दलदल का विनाश कार्बन भंडार को मुक्त कर देता है और तटीय सुरक्षा को कमजोर करता है।
  • तटीय विकास और प्रदूषण इन पारिस्थितिकी तंत्रों के सामने प्रमुख दबाव हैं।

4. समुद्री CO₂ निष्कासन की अनिश्चितता

  • समुद्री कार्बन डाइऑक्साइड निष्कासन की तकनीकें अभी प्रायोगिक हैं और उनके दीर्घकालिक प्रभाव स्पष्ट नहीं हैं।
  • इन्हें उत्सर्जन में कटौती का विकल्प मान लेने से नीतिगत शिथिलता का जोखिम है।

5. SIDS की वित्तीय और तकनीकी निर्भरता

  • लघु द्वीपीय विकासशील राज्यों के पास महासागर-आधारित समाधानों के लिए पर्याप्त वित्त और तकनीकी क्षमता का अभाव है।
  • ऋण-के-बदले-प्रकृति अदला-बदली जैसे उपकरण हर देश के लिए उपयुक्त या सरल नहीं होते।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
आँकड़ों का अंतर कम निगरानी वाले महासागरीय क्षेत्रों में प्रबंधन और नीति-निर्माण के लिए आधार-सामग्री की कमी।
अवशोषण क्षमता में गिरावट तापमान और रासायनिक बदलाव से CO₂ अवशोषण घटने पर वायुमंडलीय तापमान वृद्धि में तेज़ी का खतरा।
नीला कार्बन का विनाश तटीय विकास और प्रदूषण से कार्बन भंडार का नष्ट होना और तटीय सुरक्षा का कमजोर होना।
समुद्री CO₂ निष्कासन का जोखिम अनिश्चित तकनीकों पर निर्भरता से उत्सर्जन में कटौती की प्रतिबद्धता कमजोर होने की आशंका।
SIDS की असमान स्थिति कम उत्सर्जन के बावजूद जलवायु प्रभाव अधिक, और वित्त तथा तकनीक तक सीमित पहुँच।

आगे की राह

  • महासागर निगरानी नेटवर्क (सेंसर, उपग्रह, आँकड़ा प्रणाली और मॉडलिंग) का विस्तार करें, विशेषकर दक्षिणी और हिंद महासागर तथा तटीय क्षेत्रों में।
  • महासागरीय कार्बन बुद्धिमत्ता (Ocean Carbon Intelligence) के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी, आँकड़े और स्थानीय ज्ञान को एक ढाँचे में जोड़ें।
  • मैंग्रोव, सी-ग्रास और लवणीय दलदल की बहाली को तटीय प्रबंधन योजनाओं और जैव विविधता संरक्षण में शामिल करें।
  • SIDS के लिए वित्त, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता-निर्माण सुनिश्चित करें, ताकि वे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित कर सकें।
  • ऋण-के-बदले-प्रकृति अदला-बदली जैसे वित्तीय उपकरणों का मूल्यांकन करें और उनके लिए पारदर्शी मानक तय करें।
  • समुद्री CO₂ निष्कासन के लिए पहले अनुसंधान, निगरानी और नियामक ढाँचा तैयार करें; बड़े पैमाने पर तैनाती से पहले पर्यावरणीय जोखिमों का आकलन करें।
  • महासागर-आधारित समाधानों को उत्सर्जन में कटौती और पारिस्थितिकी संरक्षण के पूरक के रूप में प्राथमिकता दें, विकल्प के रूप में नहीं।
  • राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) में महासागर और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र को शामिल करने पर COP31 जैसे मंचों पर सहमति बनाएँ।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

महासागरीय कार्बन सिंक (Ocean Carbon Sink) · नीला कार्बन (Blue Carbon) · समुद्री कार्बन डाइऑक्साइड निष्कासन (Marine Carbon Dioxide Removal) · महासागरीय कार्बन इंटेलिजेंस (Ocean Carbon Intelligence) · महासागरीय अम्लीकरण (Ocean Acidification) · ऋण-के-बदले-प्रकृति अदला-बदली (Debt-for-Nature Swap) · लघु द्वीपीय विकासशील राज्य (Small Island Developing States – SIDS) · साझा परंतु विभेदित उत्तरदायित्व (Common but Differentiated Responsibilities – CBDR) · पेरिस समझौता (Paris Agreement) · सावधानी सिद्धांत (Precautionary Principle) · COP31 · UNFCCC

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 48A — पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन का राज्य का दायित्व
  • अनुच्छेद 51क(छ) — प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा का मूल कर्तव्य

अवधारणा प्रवाह

मानव-जनित CO₂ उत्सर्जन और ग्रीनहाउस गैसों से अतिरिक्त ऊष्मा का बढ़ना।  →  महासागर द्वारा लगभग 30 प्रतिशत CO₂ और लगभग 90 प्रतिशत अतिरिक्त ऊष्मा का अवशोषण।  →  तापमान, महासागरीय रसायन, परिसंचरण और पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव।  →  अवशोषण क्षमता में लगभग 6 प्रतिशत की कमी और वायुमंडल में CO₂ का अधिक संचय।  →  महासागरीय आँकड़ों की कमी से प्रभावी प्रबंधन और संरक्षण में बाधा।  →  विज्ञान, नीला कार्बन पारिस्थितिकी तंत्र और सावधानीपूर्ण नियमन के साथ समाधान की खोज।  →  उत्सर्जन में कटौती के साथ-साथ संरक्षण, और SIDS के लिए वित्त व तकनीकी सहायता।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मैंग्रोव, सीग्रास और लवणीय दलदल (salt marsh) ‘नीला कार्बन’ पारिस्थितिकी तंत्र के उदाहरण हैं।
2. वैश्विक मानवजनित कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन का लगभग 30 प्रतिशत महासागरों द्वारा अवशोषित किया जाता है।
3. समुद्री कार्बन डाइऑक्साइड निष्कासन की तकनीकें पूर्णतः सिद्ध हैं और उनके लिए किसी नियामक ढाँचे की आवश्यकता नहीं है।

उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: मैंग्रोव, सीग्रास और लवणीय दलदल नीला कार्बन पारिस्थितिकी तंत्र हैं और तटीय पारिस्थितिकी में कार्बन संग्रह करते हैं। कथन 2 सही है: UN रिपोर्ट के अनुसार महासागर मानवजनित CO₂ उत्सर्जन का लगभग 30 प्रतिशत और ग्रीनहाउस गैसों से फँसी अतिरिक्त ऊष्मा का लगभग 90 प्रतिशत अवशोषित करता है। कथन 3 गलत है: समुद्री CDR के उपाय अभी अनिश्चित हैं और इन्हें और शोध, निगरानी तथा विनियमन की आवश्यकता है।

Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): जलवायु परिवर्तन के साथ महासागर की कार्बन अवशोषण क्षमता घट रही है।
कारण (R): बढ़ते तापमान और महासागरीय रसायन, परिसंचरण तथा पारिस्थितिकी तंत्रों में परिवर्तन से महासागर द्वारा कार्बन संग्रह करने की क्षमता कमज़ोर होती है।

उपर्युक्त के संदर्भ में सही उत्तर चुनिए:

  1. A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सही है, परंतु R गलत है।
  4. A गलत है, परंतु R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है। — UN रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन ने महासागर की कार्बन अवशोषण क्षमता में लगभग 6 प्रतिशत की कमी की है, इसलिए A सही है। बढ़ता तापमान, महासागरीय रसायन, परिसंचरण और पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव कार्बन संग्रह की क्षमता घटाते हैं, अतः R, A की सही व्याख्या है।

Q3. निम्नलिखित सूचियों का सही मिलान कीजिए:

सूची I (अवधारणा)
A. नीला कार्बन पारिस्थितिकी तंत्र
B. महासागरीय निगरानी
C. समुद्री कार्बन डाइऑक्साइड निष्कासन
D. ऋण-के-बदले-प्रकृति अदला-बदली

सूची II (विवरण)
1. वेधशाला प्रणालियाँ, सेंसर, डेटा प्रणालियाँ और मॉडलिंग
2. मैंग्रोव, सीग्रास और लवणीय दलदल
3. वायुमंडलीय CO₂ को निकालकर दीर्घकाल तक संग्रहित करने के उपाय
4. विदेशी ऋण के एक भाग का पुनर्गठन, बदले में समुद्री संरक्षण की प्रतिबद्धता

सही उत्तर चुनिए:

  1. A-1, B-2, C-3, D-4
  2. A-2, B-1, C-4, D-3
  3. A-2, B-1, C-3, D-4
  4. A-1, B-2, C-4, D-3

उत्तर: A-2, B-1, C-3, D-4 — नीला कार्बन पारिस्थितिकी तंत्र (A) मैंग्रोव, सीग्रास और लवणीय दलदल हैं, इसलिए A-2। महासागरीय निगरानी (B) सेंसर, डेटा और मॉडलिंग पर आधारित है, इसलिए B-1। समुद्री CDR (C) वायुमंडलीय CO₂ को निकालने के उपाय हैं, इसलिए C-3। ऋण-के-बदले-प्रकृति अदला-बदली (D) में ऋण पुनर्गठन और संरक्षण प्रतिबद्धता का संबंध है, इसलिए D-4। UN रिपोर्ट में सेशेल्स का उदाहरण इसी व्यवस्था को दर्शाता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ महासागर वायुमंडलीय कार्बन के सबसे बड़े प्राकृतिक कार्बन सिंक में से एक है, किंतु जलवायु परिवर्तन से उसकी कार्बन अवशोषण क्षमता कमज़ोर हो रही है। महासागरीय कार्बन सिंक को सुदृढ़ करने में नीला कार्बन और समुद्री कार्बन डाइऑक्साइड निष्कासन की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इसके साथ यह भी बताइए कि लघु द्वीपीय विकासशील राज्यों के लिए वित्त, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता-निर्माण क्यों आवश्यक हैं। (15 Marks)

रूपरेखा: MODEL-ANSWER SKELETON: (1) भूमिका: महासागर लगभग 30 प्रतिशत मानवजनित CO₂ और लगभग 90 प्रतिशत अतिरिक्त ऊष्मा अवशोषित करता है; UN रिपोर्ट (UNEP और UNFCCC, COP31 से पूर्व) के अनुसार जलवायु परिवर्तन से यह क्षमता लगभग 6 प्रतिशत घट चुकी है। (2) कारण: तापमान वृद्धि से CO₂ की विलेयता घटना, महासागरीय परिसंचरण और स्तरीकरण में बदलाव, महासागरीय अम्लीकरण से कार्बोनेट संतुलन पर असर, और पारिस्थितिकी तंत्र का क्षरण; कार्बन चक्र में जैविक एवं भौतिक पंप की व्याख्या। (3) नीला कार्बन: मैंग्रोव, सीग्रास और लवणीय दलदल वार्षिक लगभग 407 मिलियन टन CO₂ संग्रह करते हैं; तटरेखा संरक्षण, जैव विविधता और आजीविका से जुड़े सह-लाभ; भारत में मैंग्रोव संरक्षण हेतु MISHTI पहल और तटीय विनियमन के लिए पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत CRZ अधिसूचना, 2019 का उल्लेख। (4) समुद्री CDR: महासागरीय क्षारीयता वृद्धि जैसी तकनीकें; अनिश्चितता, पारिस्थितिक जोखिम, नैतिक संकट (moral hazard) और समुद्री अपशिष्ट निपटान पर लंदन अभिसमय/लंदन प्रोटोकॉल जैसे अंतरराष्ट्रीय ढाँचे; UN रिपोर्ट की चेतावनी कि ये ‘शॉर्टकट’ नहीं, बल्कि उत्सर्जन में कटौती के पूरक हों। (5) निगरानी अंतराल: दक्षिणी और हिंद महासागर, आर्कटिक तथा तटीय क्षेत्रों में डेटा की कमी; महासागरीय कार्बन इंटेलिजेंस की आवश्यकता; INCOIS और Argo फ्लोट जैसे भारतीय एवं वैश्विक प्रयासों का उल्लेख। (6) SIDS: वैश्विक उत्सर्जन में एक प्रतिशत से कम योगदान, फिर भी अग्रिम मोर्चे पर प्रभाव; न्याय का प्रश्न, UNFCCC का CBDR-RC सिद्धांत (अनुच्छेद 3.1); SAMOA पथ (2014) और मॉरीशस रणनीति (2005) के संदर्भ; सेशेल्स का ऋण-के-बदले-प्रकृति मॉडल और फ़िजी, पापुआ न्यू गिनी, सोलोमन द्वीप, वानुअतु में सीग्रास एवं मैंग्रोव मानचित्रण से प्राप्त शिक्षा। (7) संतुलित दृष्टिकोण: तकनीकी आशावाद बनाम सावधानी सिद्धांत; पेरिस समझौते के अनुच्छेद 4 (NDC), अनुच्छेद 5 (सिंक का संरक्षण) और अनुच्छेद 6 (सहकारी दृष्टिकोण) के अंतर्गत महासागर को शामिल करने की चुनौती। (8) निष्कर्ष: उत्सर्जन में तीव्र कटौती प्राथमिक है; नीला कार्बन और निगरानी व्यावहारिक पूरक हैं; CDR पर विनियमन और वित्त के बिना यह शॉर्टकट बन सकता है।

स्रोत: news.un.org


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