त्योहारों में हाथियों का उपयोग: वैज्ञानिक समीक्षा की ज़रूरत, जानें पूरा मामला

त्योहारों में हाथियों का उपयोग: वैज्ञानिक समीक्षा की ज़रूरत, जानें पूरा मामला

त्योहारों में हाथियों का उपयोग: वैज्ञानिक समीक्षा की ज़रूरत, जानें पूरा मामला

हाथी उत्सव उपयोग पर सरकारी प्रक्रियाघटनाहौदा ढोते हाथीप्रारंभिक रिपोर्टवन विभागवैज्ञानिक समीक्षापशु व्यवहारसरकारी निर्णयनियमों में बदलाव
हाथी उत्सव उपयोग पर सरकारी प्रक्रिया

✎ बंदी हाथी का उपयोग उत्सवों में परंपरा, पशु-कल्याण और सार्वजनिक सुरक्षा के संतुलन का प्रश्न है, जिसका समाधान वैज्ञानिक समीक्षा और वन्यजीव संरक्षण कानून के ढाँचे में ही संभव है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण एवं जैव-विविधता (वन्यजीव संरक्षण, बंदी हाथियों का प्रबंधन, Project Elephant)  |  GS Paper II — शासन एवं संविधान (संविधान के अनुच्छेद 48A और 51A(छ)/(ज)/(झ) से संबंधित राज्य की भूमिका; राज्य सरकार के निर्णय-तंत्र)  |  GS Paper IV — नैतिकता (पशु-कल्याण बनाम सांस्कृतिक परंपरा; वैज्ञानिक दृष्टिकोण)
  • Prelims: Wildlife (Protection) Act, 1972 — अनुसूची I (Schedule I), Project Elephant (1992), एशियाई हाथी (Asian Elephant) — IUCN स्थिति: संकटग्रस्त (Endangered), राष्ट्रीय विरासत पशु (National Heritage Animal) — हाथी (2010), अनुच्छेद 48A — राज्य के नीति-निदेशक तत्व (वन और वन्यजीव), अनुच्छेद 51A — मूल कर्तव्य (जीवित प्राणियों के प्रति करुणा; वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास), पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 (Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960), भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (Animal Welfare Board of India), महावत (Mahout) और हौदा (Howdah) — बंदी हाथियों के उपयोग से जुड़े पारंपरिक शब्द
  • Essay: परंपरा और पशु-कल्याण: सांस्कृतिक उत्सवों में पशुओं के उपयोग की नैतिक सीमाएँ, नीति-निर्माण में वैज्ञानिक दृष्टिकोण: जन-भावना, परंपरा और साक्ष्य के बीच संतुलन

त्वरित पुनरावृत्ति: बंदी हाथी का उपयोग उत्सवों में परंपरा, पशु-कल्याण और सार्वजनिक सुरक्षा के संतुलन का प्रश्न है, जिसका समाधान वैज्ञानिक समीक्षा और वन्यजीव संरक्षण कानून के ढाँचे में ही संभव है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

कर्नाटक के शिवमोगा में दशहरा शोभायात्रा के दौरान 21 अक्टूबर 2026 को हौदा ढो रहा हाथी सोमन्ना अचानक मुड़कर मार्ग पर इधर-उधर भाग पड़ा, जिससे अफरा-तफरी मची और दर्शक भयभीत हुए। इस घटना के बाद राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री तथा शिवमोगा के प्रभारी मंत्री मधु बंगारप्पा ने कहा कि उत्सवों में हाथियों के उपयोग के प्रश्न पर राज्य सरकार वैज्ञानिक आधार पर निर्णय लेगी। उन्होंने बताया कि मुख्य वन संरक्षक (Chief Conservator of Forests) ने घटना पर प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी है और सरकार उसके आधार पर कार्रवाई करेगी। अधिकारियों और महावतों की सर्वसम्मति से सोमन्ना को हौदा ढोने के लिए चुना गया था, जबकि तीनों हाथियों को समान प्रशिक्षण और पूर्वाभ्यास दिया गया था। इसलिए यह मामला अब वन विभाग की रिपोर्ट, सरकारी समीक्षा और पशु-व्यवहार के वैज्ञानिक विश्लेषण के दायरे में आ गया है।

पृष्ठभूमि

  • दशहरा जैसे उत्सवों में हाथियों की भागीदारी लंबी सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा रही है। मैसूरु दशहरा इसका प्रसिद्ध उदाहरण है, जहाँ सजे हुए हाथी देवी की प्रतिमा वाला हौदा ढोते हैं।
  • बंदी हाथियों (Captive Elephants) का प्रबंधन मुख्यतः वन्यजीव संरक्षण कानून, केंद्र एवं राज्य सरकारों के दिशा-निर्देशों और राज्य-स्तरीय नियमों से होता है। इसमें पंजीकरण, स्वास्थ्य जाँच और देखभाल के मानक शामिल हैं।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया बनाम ए. नागराज (2014) मामले में जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध को उचित ठहराते हुए पशुओं के प्रति क्रूरता के विरुद्ध संवैधानिक दृष्टिकोण स्पष्ट किया। इस निर्णय से यह सिद्धांत मजबूत हुआ कि सांस्कृतिक परंपरा की वैधता का परीक्षण पशु-कल्याण के मानकों पर भी होता है।
  • हाथी संरक्षण के लिए Project Elephant (1992) चलाया जाता है। इसका उद्देश्य हाथियों के आवास, गलियारों और मानव-हाथी संघर्ष का समाधान करना है।
  • भारत में हाथी को वर्ष 2010 में राष्ट्रीय विरासत पशु घोषित किया गया। एशियाई हाथी को IUCN ने संकटग्रस्त (Endangered) श्रेणी में रखा है, इसलिए इसके प्रति संरक्षण और कल्याण की जिम्मेदारी अधिक है।

बंदी हाथी और उत्सवों में उनके उपयोग से जुड़े मुद्दे क्या हैं?

  • बंदी हाथी वे हाथी हैं जो मंदिरों, मठों, उत्सवों, शोभायात्राओं या निजी स्वामित्व में रखे जाते हैं और जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण नहीं करते।
  • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत हाथी अनुसूची I में आता है, इसलिए उसे रखने, पंजीकृत करने और उसके स्थानांतरण पर कानूनी नियंत्रण है।
  • महावत हाथी का पारंपरिक देखभालकर्ता होता है। हाथी के व्यवहार, थकान, तनाव और भय को समझना उसके प्रशिक्षण और सुरक्षित उपयोग के लिए आवश्यक है।
  • हौदा का भार, भीड़, तेज़ ध्वनि, पटाखे और संकरे मार्ग हाथी के तनाव को बढ़ा सकते हैं। इससे अचानक व्यवहार-परिवर्तन की आशंका रहती है।
  • पशु-कल्याण की दृष्टि से हाथी की शारीरिक और मानसिक स्थिति, विश्राम-अवधि और उपयोग की सीमा का वैज्ञानिक मूल्यांकन आवश्यक है।
  • नीति-स्तर पर प्रश्न यह है कि सांस्कृतिक परंपरा को बनाए रखते हुए सार्वजनिक सुरक्षा और पशु-कल्याण को किस प्रकार सुनिश्चित किया जाए।
  • संविधान का अनुच्छेद 51A(छ) प्रत्येक नागरिक से जीवित प्राणियों के प्रति करुणा रखने की अपेक्षा करता है, जबकि अनुच्छेद 51A(ज) वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास को मूल कर्तव्य बनाता है।
  • ऐसे निर्णय सामान्यतः विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट, प्रशासनिक जाँच, पशु-चिकित्सा मूल्यांकन और संबंधित विभागों की संयुक्त समीक्षा से होते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
घटना का स्वरूप शिवमोग्गा में दशहरा जुलूस के दौरान हौदा (Howdah) उठाए हुए हाथी सोमन्ना के अचानक मुड़कर भागने से अफरा-तफरी मची। यह घटना उत्सवों में बंदी हाथियों के उपयोग पर नीति-स्तरीय प्रश्न उठाती है।
प्रशासनिक प्रक्रिया वन विभाग के मुख्य संरक्षक (Chief Conservator of Forests) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार निर्णय लेगी। यह जाँच-आधारित प्रशासनिक निर्णय-प्रक्रिया का उदाहरण है।
जवाबदेही का प्रश्न महावत (Mahout) और संबंधित अधिकारियों की सामूहिक सहमति के बावजूद घटना हुई। इसलिए जिम्मेदारी तय करने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर समीक्षा आवश्यक है।
पशु व्यवहार की अनिश्चितता हाथी का व्यवहार पूर्वानुमेय नहीं होता। प्रशिक्षण और अभ्यास के बावजूद भय या तनाव से प्रतिक्रिया बदल सकती है, जिससे मानव सुरक्षा और पशु कल्याण दोनों प्रभावित होते हैं।
वैज्ञानिक समीक्षा की माँग राज्य सरकार ने कहा है कि यह विषय वैज्ञानिक आधार पर तय होगा। इससे नीति-निर्माण में साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण (Evidence-based Policy) की भूमिका स्पष्ट होती है।

महत्व

पशु कल्याण और संरक्षण

  • हाथी भारत में अनुसूची I में संरक्षित प्रजाति है, इसलिए बंदी हाथियों के उपयोग में उसके कल्याण को प्राथमिकता देना वैधानिक और नैतिक दायित्व है।
  • उत्सवों में हाथियों की भागीदारी से तनाव, चोट और लंबे समय के स्वास्थ्य-प्रभाव जुड़े हो सकते हैं, जिनका वैज्ञानिक मूल्यांकन आवश्यक है।

सार्वजनिक सुरक्षा

  • जुलूसों में भीड़ के बीच बेकाबू हाथी से जनहानि और संपत्ति-हानि का खतरा रहता है।
  • सुरक्षा मानकों, दूरी-नियमों और आपात-प्रबंधन की समीक्षा से ऐसे जोखिम कम किए जा सकते हैं।

सांस्कृतिक और सामाजिक आयाम

  • दशहरा जैसे उत्सव सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े हैं, इसलिए किसी भी बदलाव में परंपरा और पशु कल्याण के बीच संतुलन आवश्यक है।
  • परंपरा के नाम पर निर्णय लेने से पहले स्थानीय समुदाय, आयोजक और विशेषज्ञों की सहभागिता से सर्वमान्य समाधान की संभावना बढ़ती है।

शासन और नीति-प्रक्रिया

  • यह मामला दर्शाता है कि प्रशासनिक निर्णयों में प्रारंभिक रिपोर्ट, विशेषज्ञ राय और बहु-स्रोत सूचना का समन्वय कैसे किया जाता है।
  • वन्यजीव प्रबंधन में राज्य और केंद्र की भूमिकाओं की स्पष्टता से नियामक ढाँचा अधिक प्रभावी बनता है।

चुनौतियाँ

1. बंदी हाथियों के कल्याण का प्रश्न

  • बंदी हाथियों को लंबी यात्राओं, भीड़, शोर और ढाँचा-आधारित गतिविधियों में रखने से शारीरिक और मानसिक तनाव हो सकता है।
  • जुलूस में हौदा का भार और असामान्य मार्ग हाथी के लिए जोखिमपूर्ण होते हैं, इसलिए उपयुक्त आयु, स्वास्थ्य और व्यवहार का मूल्यांकन आवश्यक है।

2. पशु व्यवहार की पूर्वानुमेयता

  • हाथी के व्यवहार को पूरी तरह नियंत्रित करना कठिन है, क्योंकि भय, शोर या अचानक उत्तेजना से वह अप्रत्याशित प्रतिक्रिया दे सकता है।
  • प्रशिक्षण और रिहर्सल होने के बावजूद जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं होता, इसलिए जोखिम-प्रबंधन योजना अनिवार्य है।

3. जवाबदेही और उत्तरदायित्व का निर्धारण

  • घटना के लिए महावत, आयोजक, प्रशासन और वन विभाग में से किसकी जिम्मेदारी है, यह स्पष्ट करना प्रशासनिक चुनौती है।
  • प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद अंतिम जाँच में पारदर्शिता बनाए रखना विश्वसनीयता के लिए आवश्यक है।

4. परंपरा और कानूनी नियमन के बीच संतुलन

  • धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में हाथी की भागीदारी लंबे समय से रही है, जिससे किसी भी प्रतिबंध पर सामाजिक विरोध हो सकता है।
  • परंपरा का सम्मान करते हुए वैधानिक मानकों और पशु कल्याण के नियमों को लागू करना नीतिगत चुनौती है।

5. साक्ष्य-आधारित नीति का अभाव

  • उत्सवों में हाथी के उपयोग पर अब तक एकसमान राष्ट्रीय या राज्यस्तरीय वैज्ञानिक मानदंड सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हैं।
  • वैज्ञानिक समीक्षा के बिना निर्णय लेने से नीति अस्थिर हो सकती है और विवाद बढ़ सकते हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
बंदी हाथियों का कल्याण लंबी यात्रा, भीड़ और भार से शारीरिक तथा मानसिक तनाव
सार्वजनिक सुरक्षा जुलूस में अचानक भागने से भीड़ में भगदड़ और चोट का खतरा
जवाबदेही महावत, आयोजक और प्रशासन के बीच जिम्मेदारी का स्पष्ट निर्धारण न होना
प्रशिक्षण और व्यवहार पशु व्यवहार की अनिश्चितता, जिसे पूरी तरह पूर्वानुमेय बनाना कठिन है
नियामक मानक उत्सवों में हाथी उपयोग के लिए एकसमान वैज्ञानिक और प्रशासनिक मानकों का अभाव
परंपरा बनाम नियमन सांस्कृतिक भावनाओं और पशु कल्याण नियमों के बीच संतुलन की कठिनाई

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • प्रोजेक्ट एलिफेंट (Project Elephant)

आगे की राह

  • वन विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट के साथ स्वतंत्र पशु चिकित्सकों और वन्यजीव विशेषज्ञों की समिति से वैज्ञानिक समीक्षा कराई जाए।
  • उत्सवों में हाथियों की आयु, स्वास्थ्य, प्रशिक्षण-स्तर और व्यवहार-मूल्यांकन के लिए मानक प्रक्रिया (Standard Operating Procedure) तय की जाए।
  • जुलूस मार्ग, भीड़ की दूरी और आपात-निकास योजना के लिए सुरक्षा-मानदंड निर्धारित किए जाएँ।
  • हाथी के भार, गर्मी, शोर और यात्रा-अवधि पर सीमा तय कर उसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।
  • महावत और आयोजकों के लिए प्रशिक्षण और जिम्मेदारी-संहिता लागू की जाए, जिसमें उल्लंघन पर दंड का स्पष्ट प्रावधान हो।
  • बंदी हाथियों के पंजीकरण, स्वास्थ्य-रिकॉर्ड और गतिविधि-लॉग का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाए।
  • परंपरा से जुड़े समुदायों, आयोजकों और नागरिक समाज के साथ परामर्श करके सर्वमान्य विकल्प तलाशे जाएँ।
  • जाँच के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएँ, ताकि नीति-निर्णय में पारदर्शिता और विश्वास बना रहे।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

बंदी हाथी (Captive Elephant) · वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (Wild Life (Protection) Act, 1972) · पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 (Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960) · प्रोजेक्ट एलिफेंट (Project Elephant) · राष्ट्रीय धरोहर पशु (National Heritage Animal) · वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temper) और अनुच्छेद 51A(h) · अनुच्छेद 51A(g) और जीवों के प्रति करुणा · अनुच्छेद 48A और पर्यावरण व वन्यजीव संरक्षण · धार्मिक आचरण की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 25 की सीमाएँ · पशु कल्याण बोर्ड, भारत (Animal Welfare Board of India) · महावत प्रशिक्षण एवं प्रमाणन · सांस्कृतिक परंपरा बनाम पशु कल्याण

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 48A: पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण का राज्य का दायित्व
  • अनुच्छेद 51A(छ): प्राणियों के प्रति दया भाव रखने का मौलिक कर्तव्य

अवधारणा प्रवाह

दशहरा जुलूस में हौदा उठाए हुए हाथी सोमन्ना का मुड़कर भागना और अफरा-तफरी मचना  →  महावत और अधिकारियों की सहमति के बावजूद घटना से पशु-व्यवहार की अनिश्चितता उजागर होना  →  वन विभाग के मुख्य संरक्षक की प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार होना  →  राज्य सरकार द्वारा वैज्ञानिक समीक्षा और बहु-स्रोत रिपोर्टों पर निर्णय की प्रक्रिया आरंभ होना  →  जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान और उत्तरदायित्व तय होना  →  बंदी हाथियों के कल्याण और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए उत्सवों में हाथी उपयोग के मानक तय होना

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एशियाई हाथी (Elephas maximus) वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में सूचीबद्ध है।
2. IUCN की लाल सूची में एशियाई हाथी को ‘संकटग्रस्त (Endangered)’ श्रेणी में रखा गया है।
3. प्रोजेक्ट एलिफेंट जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा संचालित केंद्र प्रायोजित योजना है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: एशियाई हाथी को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में रखा गया है, जिससे उसे उच्चतम विधिक संरक्षण मिलता है। कथन 2 सही है: IUCN ने एशियाई हाथी को ‘Endangered’ श्रेणी में रखा है। कथन 3 गलत है: प्रोजेक्ट एलिफेंट पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के अंतर्गत है, जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत नहीं।

Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
कथन (A): किसी धार्मिक या सांस्कृतिक समारोह में बंदी हाथियों के उपयोग की वैज्ञानिक समीक्षा संवैधानिक दृष्टि से उचित है।
कारण (R): अनुच्छेद 51A(h) नागरिकों से वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना के विकास की अपेक्षा करता है।
नीचे दिए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
  3. (A) सही है, किंतु (R) गलत है
  4. (A) गलत है, किंतु (R) सही है

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — अनुच्छेद 51A(h) मूल कर्तव्यों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास को नागरिक का कर्तव्य बताता है, इसलिए किसी पशु-उपयोग की प्रथा की वैज्ञानिक समीक्षा इसी कर्तव्य की व्यावहारिक अभिव्यक्ति है। कारण सही है और वह कथन की सीधी व्याख्या करता है।

Q3. जल्लीकट्टू से संबंधित निम्नलिखित में से किसे वर्ष 2023 में उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने बहुमत से वैध ठहराया?

  1. तमिलनाडु जल्लीकट्टू विनियमन अधिनियम, 2017
  2. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I का संशोधन
  3. राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा वर्ष 2014 में दिया गया सामान्य प्रतिबंध आदेश
  4. केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण द्वारा जारी बंदी पशुओं का पंजीकरण नियम

उत्तर: तमिलनाडु जल्लीकट्टू विनियमन अधिनियम, 2017 — मई 2023 में संविधान पीठ ने तमिलनाडु जल्लीकट्टू विनियमन अधिनियम, 2017 और उससे जुड़े पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के 2017 के संशोधन की वैधता को बहुमत से बरकरार रखा। यह निर्णय सांस्कृतिक प्रथा और पशु कल्याण के संतुलन में नियमन के मॉडल का उदाहरण है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सवों में हाथियों जैसे पशुओं के उपयोग को लेकर सांस्कृतिक परंपरा और पशु कल्याण के बीच टकराव बार-बार उभरता रहा है। बंदी हाथियों के उपयोग के विधिक और नैतिक ढांचे की समालोचनात्मक परीक्षा कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि ऐसे विवादों के समाधान के लिए राज्य कौन-से वैज्ञानिक और संस्थागत तंत्र अपना सकता है। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल उत्तर की रूपरेखा:
1. संवैधानिक ढांचा: अनुच्छेद 51A(g) (जीवों के प्रति करुणा) और अनुच्छेद 51A(h) (वैज्ञानिक दृष्टिकोण); अनुच्छेद 48A के अंतर्गत राज्य का पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण का दायित्व; अनुच्छेद 25 के अंतर्गत धार्मिक आचरण की स्वतंत्रता, जो लोक व्यवस्था, नैतिकता, स्वास्थ्य और भाग III के अन्य प्रावधानों के अधीन है।
2. विधिक ढांचा: एशियाई हाथी का वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में होना; बंदी पशुओं के पंजीकरण और उपयोग से जुड़े प्रावधान; पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11 के अंतर्गत क्रूरता के अपराध; पशु कल्याण बोर्ड, भारत की सलाहकार भूमिका।
3. न्यायिक दृष्टि: Animal Welfare Board of India v. A. Nagaraja (2014) में पशुओं की पाँच स्वतंत्रताओं का उल्लेख और सांस्कृतिक प्रथाओं पर विधिक सीमाएँ; मई 2023 का संविधान पीठ निर्णय, जिसने तमिलनाडु जल्लीकट्टू विनियमन अधिनियम, 2017 को बरकरार रखा। दोनों निर्णय प्रतिबंध और नियमन के बीच संतुलन का मार्ग दिखाते हैं।
4. प्रशासनिक और वैज्ञानिक तंत्र: प्रोजेक्ट एलिफेंट के अंतर्गत बंदी हाथियों के प्रबंधन के लिए केंद्र सरकार के दिशानिर्देश; वन विभाग द्वारा विशेषज्ञ समीक्षा (पशु व्यवहार विज्ञान और पशु चिकित्सा); महावतों का प्रशिक्षण एवं प्रमाणन; भीड़, ध्वनि और मार्ग का प्रबंधन; आपात स्थिति की योजना; प्रारंभिक और अंतिम जांच रिपोर्ट द्वारा जवाबदेही तय करना। हाल की शिवमोगा घटना (21 अक्टूबर) को उदाहरण के रूप में रखा जा सकता है, जहाँ मुख्य वन संरक्षक की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर निर्णय की प्रक्रिया बताई गई।
5. नैतिक विमर्श: जेरेमी बेंथम का कथन कि प्रश्न यह है कि क्या वे पीड़ा सह सकते हैं; पीटर सिंगर का पशु-अधिकार विमर्श; सांस्कृतिक सापेक्षवाद का तर्क; पूर्ण प्रतिबंध बनाम नियमित और वैज्ञानिक उपयोग के पक्ष-विपक्ष।
6. निष्कर्ष: केवल प्रतिबंध या केवल परंपरा के बजाय साक्ष्य-आधारित नियमन, स्वतंत्र वैज्ञानिक समीक्षा और पारदर्शी जवाबदेही को संतुलित मार्ग के रूप में प्रस्तुत करना।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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