30 Sep जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने में देरी क्यों?
✎ जम्मू और कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग भारतीय संघवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह केंद्र-राज्य संबंधों और क्षेत्रीय आकांक्षाओं को संबोधित करती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान और राजव्यवस्था, संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा
- Prelims: जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019, अनुच्छेद 370, राज्य का दर्जा, केंद्र शासित प्रदेश, परिसीमन, संघवाद
- Essay: भारत में संघवाद की चुनौतियाँ और भविष्य, लोकतंत्र और क्षेत्रीय आकांक्षाएँ: जम्मू और कश्मीर का विशेष संदर्भ
त्वरित पुनरावृत्ति: जम्मू और कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग भारतीय संघवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह केंद्र-राज्य संबंधों और क्षेत्रीय आकांक्षाओं को संबोधित करती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
जम्मू और कश्मीर विधानसभा ने 28 सितंबर, 2026 को एक प्रस्ताव पारित कर भारत सरकार से केंद्र शासित प्रदेश को ‘तत्काल और अविलंब पूर्ण राज्य का दर्जा’ बहाल करने का आग्रह किया है। यह मांग 2019 में जम्मू और कश्मीर के विशेष संवैधानिक दर्जे को समाप्त करने और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के बाद से लंबित है।
पृष्ठभूमि
- जम्मू और कश्मीर को 2019 में एक पूर्ण राज्य से केंद्र शासित प्रदेश में बदल दिया गया था।
- केंद्र सरकार ने राज्य के दर्जे की बहाली के लिए परिसीमन, चुनाव और फिर राज्य का दर्जा, यह तीन-चरणीय मार्ग निर्धारित किया है।
- भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने ‘जितनी जल्दी हो सके’ राज्य का दर्जा बहाल करने की बात कही है, जबकि प्रधानमंत्री ने ‘उचित समय पर’ इसका वादा किया है।
- जम्मू और कश्मीर में 2024 के विधानसभा चुनावों में 63.88% मतदान दर्ज किया गया, जिसे पिछले तीन दशकों में सबसे शांतिपूर्ण चुनाव माना गया।
- विधानसभा ने अतीत में भी विशेष दर्जे की मांग को लेकर प्रस्ताव पारित किए हैं, जिनमें 26 जून, 2000 का अधिक स्वायत्तता प्रस्ताव और 6 नवंबर, 2024 का विशेष दर्जा प्रस्ताव शामिल हैं।
भारत में राज्य का दर्जा और केंद्र शासित प्रदेश
- भारतीय संविधान के तहत, भारत राज्यों का एक संघ है। राज्य अपने स्वयं के निर्वाचित विधानमंडल और मंत्रिपरिषद के साथ पूर्ण प्रशासनिक स्वायत्तता का आनंद लेते हैं।
- केंद्र शासित प्रदेश (Union Territory) सीधे केंद्र सरकार द्वारा प्रशासित होते हैं। उनके पास या तो अपना विधानमंडल नहीं होता है, या यदि होता है, तो उसकी शक्तियाँ सीमित होती हैं।
- किसी क्षेत्र को केंद्र शासित प्रदेश में बदलने का निर्णय अक्सर रणनीतिक, सुरक्षा या प्रशासनिक कारणों से लिया जाता है, खासकर जब क्षेत्र की संवेदनशीलता अधिक हो।
- जम्मू और कश्मीर को राज्य से केंद्र शासित प्रदेश में बदलने का निर्णय अनुच्छेद 370 (Article 370) के प्रावधानों को निरस्त करने के साथ लिया गया था, जिसने इस क्षेत्र को विशेष दर्जा दिया था।
- राज्य का दर्जा बहाल करने का अर्थ है कि उस क्षेत्र को फिर से एक पूर्ण राज्य के रूप में मान्यता दी जाएगी, जिसमें एक निर्वाचित सरकार और विधानमंडल होगा जो राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाने में सक्षम होगा।
- संघवाद (Federalism) भारतीय संविधान की एक मूल विशेषता है, जो केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों के विभाजन को सुनिश्चित करती है। राज्य का दर्जा बहाल करना इस संघीय ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक कदम माना जाता है।
- परिसीमन (Delimitation) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत किसी देश या प्रांत में विधायी निकाय के लिए निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया जाता है ताकि जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| राज्य का दर्जा | संघीय ढाँचे में राज्यों को अधिक स्वायत्तता और विधायी शक्तियाँ प्राप्त होती हैं। |
| केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा | केंद्र सरकार का सीधा नियंत्रण, स्थानीय स्वशासन की सीमित शक्तियाँ। |
| अनुच्छेद 370 का निरसन | जम्मू-कश्मीर के विशेष संवैधानिक दर्जे की समाप्ति, भारतीय संघ के साथ पूर्ण एकीकरण। |
| परिसीमन | विधानसभा सीटों का पुनर्गठन, जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना। |
| चुनाव | लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली, जनता द्वारा निर्वाचित सरकार का गठन। |
| संघवाद | केंद्र और राज्यों के बीच शक्ति का बँटवारा, भारतीय संविधान की मूल संरचना का हिस्सा। |
महत्व
लोकतांत्रिक महत्व
- राज्य का दर्जा बहाल होने से जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपनी निर्वाचित सरकार के माध्यम से शासन करने का अधिकार मिलेगा।
- यह निर्णय लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में जनता के विश्वास को मजबूत करेगा और राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा देगा।
- एक सशक्त विधायिका केंद्र सरकार के साथ संवाद का मंच प्रदान करेगी, जिससे स्थानीय मुद्दों का प्रभावी समाधान हो सकेगा।
संघीय ढाँचे का सुदृढ़ीकरण
- जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस मिलने से भारत के संघीय ढाँचे को मजबूती मिलेगी।
- यह कदम केंद्र और राज्यों के बीच शक्ति संतुलन को बहाल करने में मदद करेगा, जो भारतीय संविधान की एक मूलभूत विशेषता है।
- यह दर्शाता है कि केंद्र सरकार राज्यों की स्वायत्तता और संघीय सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध है।
सामाजिक-आर्थिक विकास
- राज्य का दर्जा मिलने से स्थानीय सरकार को विकास परियोजनाओं और नीतियों को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार तैयार करने की अधिक स्वतंत्रता मिलेगी।
- यह निवेश को आकर्षित कर सकता है और रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है, जिससे क्षेत्र में आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलेगा।
- स्थानीय शासन की बहाली से नागरिकों की आवश्यकताओं के प्रति अधिक जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
सुरक्षा और स्थिरता
- लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में जनता की भागीदारी बढ़ने से अलगाववादी प्रवृत्तियों को कम करने में मदद मिल सकती है।
- एक स्थिर और लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने में अधिक प्रभावी हो सकती है।
- यह पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद के प्रभाव को कम करने में सहायक हो सकता है, क्योंकि स्थानीय आबादी को अपनी सरकार पर अधिक विश्वास होगा।
चुनौतियाँ
1. लोकतांत्रिक प्रक्रिया में देरी
- जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाए रखने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में देरी हुई है।
- यह स्थानीय लोगों के बीच असंतोष पैदा कर सकता है और लोकतांत्रिक भागीदारी को हतोत्साहित कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: राजव्यवस्था: संघवाद और केंद्र-राज्य संबंध
2. संघीय सिद्धांतों का उल्लंघन
- एक पूर्ण राज्य को केंद्र शासित प्रदेश में बदलना संघीय सिद्धांतों के विपरीत माना जाता है।
- यह केंद्र-राज्य संबंधों में असंतुलन पैदा करता है और राज्यों की स्वायत्तता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
यूपीएससी लिंक: राजव्यवस्था: भारतीय संघवाद
3. सुरक्षा संबंधी चिंताएँ
- राज्य का दर्जा बहाल करने में देरी को कुछ लोग आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले कारकों में से एक मान सकते हैं।
- स्थानीय सरकार की अनुपस्थिति में सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना करना अधिक कठिन हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा: आतंकवाद और सीमा प्रबंधन
4. विकास और शासन
- केंद्र शासित प्रदेश के रूप में जम्मू-कश्मीर में विकास और शासन संबंधी निर्णय केंद्र सरकार द्वारा लिए जाते हैं।
- इससे स्थानीय आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं की अनदेखी हो सकती है, जिससे असंतोष बढ़ सकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन: विकास प्रक्रियाएँ और नीतियाँ
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| राज्य का दर्जा बहाली में देरी | लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में जनता के विश्वास में कमी। |
| संघीय ढाँचे पर प्रभाव | केंद्र-राज्य संबंधों में असंतुलन और राज्यों की स्वायत्तता का क्षरण। |
| सुरक्षा स्थिति | आतंकवाद और अलगाववाद को बढ़ावा मिलने की आशंका। |
| स्थानीय शासन का अभाव | विकास संबंधी निर्णयों में स्थानीय आवश्यकताओं की अनदेखी। |
| राजनीतिक असंतोष | जनता के बीच निराशा और अलगाव की भावना का बढ़ना। |
आगे की राह
- जम्मू-कश्मीर को बिना किसी और देरी के पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाना चाहिए।
- लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने के लिए विधानसभा चुनावों को शीघ्रता से आयोजित किया जाना चाहिए।
- केंद्र सरकार को जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ विश्वास बहाली के उपाय करने चाहिए।
- स्थानीय निकायों और पंचायतों को सशक्त कर जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत किया जाना चाहिए।
- विकास परियोजनाओं को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जाना चाहिए।
- सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करते हुए नागरिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों का सम्मान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
- केंद्र और राज्य के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
जम्मू-कश्मीर राज्य का दर्जा · संघवाद · लोकतंत्र · अनुच्छेद 370 · पुनर्गठन अधिनियम 2019 · परिसीमन · विधानसभा चुनाव · विशेष संवैधानिक दर्जा · केंद्र-राज्य संबंध · न्यायिक समीक्षा
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 3’, ‘note’: ‘नए राज्यों का निर्माण और मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 239A’, ‘note’: ‘कुछ केंद्र शासित प्रदेशों के लिए स्थानीय विधानमंडल या मंत्रिपरिषद का निर्माण’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संसद और राज्यों के विधानमंडलों द्वारा बनाई गई विधियों की विषय-वस्तु’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘संघ, राज्य और समवर्ती सूचियों के माध्यम से विधायी शक्तियों का वितरण’}
अवधारणा प्रवाह
अनुच्छेद 370 का निरसन और राज्य का विभाजन → जम्मू-कश्मीर का केंद्र शासित प्रदेश बनना → परिसीमन प्रक्रिया का पूरा होना → विधानसभा चुनावों का आयोजन → निर्वाचित सरकार का गठन → पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली → लोकतांत्रिक और संघीय सिद्धांतों का सुदृढीकरण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 ने जम्मू और कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया।
2. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 370 जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करता था।
3. भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने जम्मू और कश्मीर को राज्य का दर्जा ‘जितनी जल्दी हो सके’ बहाल करने का निर्देश दिया है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 ने जम्मू और कश्मीर राज्य को जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख नामक दो केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया। कथन 2 सही है। अनुच्छेद 370 जम्मू और कश्मीर को विशेष संवैधानिक दर्जा प्रदान करता था, जिसे 2019 में समाप्त कर दिया गया। कथन 3 भी सही है। सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य का दर्जा ‘जितनी जल्दी हो सके’ बहाल करने की बात कही है।
Q2. अभिकथन (A): जम्मू और कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करना भारत में संघीय ढांचे को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है।
कारण (R): केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में पूर्ण राज्यों के पास अधिक विधायी और कार्यकारी शक्तियाँ होती हैं, जो स्थानीय शासन और प्रतिनिधित्व को बढ़ाती हैं।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं, और कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है। पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल होने से जम्मू-कश्मीर को अधिक स्वायत्तता मिलेगी, जिससे संघीय व्यवस्था मजबूत होगी। केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में राज्यों को अधिक शक्तियां प्राप्त होती हैं, जो लोकतंत्र और संघवाद के सिद्धांतों के अनुरूप है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ जम्मू और कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग भारतीय संघवाद और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के लिए महत्वपूर्ण क्यों है? इस संदर्भ में, राज्य के दर्जे की बहाली में आने वाली चुनौतियों और संभावित समाधानों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर में जम्मू और कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग के महत्व को भारतीय संघवाद (federalism) और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के संदर्भ में समझाना होगा। इसमें अनुच्छेद 370 के निरस्त होने और 2019 के पुनर्गठन अधिनियम (Reorganisation Act) के बाद की स्थिति का उल्लेख करें। महत्व बताते हुए, संघवाद के सिद्धांतों (राज्यों की स्वायत्तता, केंद्र-राज्य संबंध) और लोकतांत्रिक मूल्यों (जनप्रतिनिधित्व, स्थानीय शासन) पर ध्यान केंद्रित करें। इसके बाद, राज्य के दर्जे की बहाली में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करें, जैसे सुरक्षा संबंधी चिंताएँ, राजनीतिक एकीकरण, और केंद्र सरकार की नीतिगत प्राथमिकताएँ। अंत में, संभावित समाधानों का समालोचनात्मक परीक्षण करें, जिसमें परिसीमन (delimitation), विधानसभा चुनाव (assembly elections), और केंद्र तथा स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच संवाद की भूमिका शामिल हो। सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के निर्देशों और प्रधानमंत्री के बयानों का भी उल्लेख करें।
स्रोत: The Hindu
Jammu & Kashmir PCS (JKPSC (KAS)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: जम्मू और कश्मीर के संबंध में राज्य के पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के बाद राज्य की स्थिति के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू और कश्मीर को विधान सभा और विधान परिषद दोनों प्राप्त हुए। 2. केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू और कश्मीर को केवल विधान सभा प्राप्त हुई। 3. केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू और कश्मीर को केवल विधान परिषद प्राप्त हुई। 4. केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू और कश्मीर को विधान सभा या विधान परिषद दोनों प्राप्त नहीं हुई। उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2
- केवल 3
- केवल 4
उत्तर: केवल 2 — राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के अनुसार, जम्मू और कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया जिसमें केवल विधान सभा (विधान परिषद समाप्त) की व्यवस्था की गई।
Mains: जम्मू और कश्मीर के राज्य के पुनर्गठन के पश्चात केंद्र शासित प्रदेश बनने के राजनीतिक, प्रशासनिक और जनसांख्यिकीय प्रभावों का विश्लेषण कीजिए। राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के प्रमुख प्रावधानों के संदर्भ में अपने उत्तर को स्पष्ट कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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