भारत ने पाकिस्तान को एससीओ बैठक में किया आमंत्रित, पूर्वी तट पर चक्रवात अरनब से हाहाकार

भारत ने पाकिस्तान को एससीओ बैठक में किया आमंत्रित, पूर्वी तट पर चक्रवात अरनब से हाहाकार

भारत ने पाकिस्तान को एससीओ बैठक में किया आमंत्रित, पूर्वी तट पर चक्रवात अरनब से हाहाकार

चक्रवात अरनब: आपदा प्रबंधन प्रक्रियानिम्न दाब क्षेत्रसमुद्र में उत्पत्तिगहरा होनाचक्रवाती तूफानपूर्वानुमानमौसम विभागनिकासीलोगों को सुरक्षित स्थानराहतराज्य सरकार
चक्रवात अरनब: आपदा प्रबंधन प्रक्रिया

✎ चक्रवात की तीव्रता IMD के हवा-गति मानकों से तय होती है, जबकि आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत निकासी और राहत का प्राथमिक दायित्व राज्य सरकारों के पास होता है, जिसे NDMA और NDRF समन्वित करते हैं।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र I — भूगोल (उष्णकटिबंधीय चक्रवात, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर की चक्रवात प्रणाली)  |  सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (क्षेत्रीय संगठन, SCO, भारत की पड़ोस नीति)  |  सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — आपदा प्रबंधन (आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005, पूर्व चेतावनी प्रणाली, निकासी)  |  सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — अर्थव्यवस्था (महँगाई भत्ता, राजकोषीय प्रभाव)
  • Prelims: चक्रवात का IMD वर्गीकरण (चक्रवाती तूफ़ान से लेकर सुपर चक्रवात तक), उत्तर हिंद महासागर में चक्रवात निर्माण के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ, शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सदस्य देश, मुख्यालय और स्थापना वर्ष, SCO का क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी ढाँचा (RATS), ताशकंद, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के प्रमुख प्रावधान, महँगाई भत्ता (DA) और महँगाई राहत (DR) में अंतर, आंध्र प्रदेश और ओडिशा तट पर चक्रवात से प्रभावित क्षेत्र
  • Essay: प्राकृतिक आपदाएँ और जलवायु परिवर्तन: तैयारी से लचीलापन तक, क्षेत्रीय सहयोग और बहुपक्षीय कूटनीति की सीमाएँ और संभावनाएँ

त्वरित पुनरावृत्ति: चक्रवात की तीव्रता IMD के हवा-गति मानकों से तय होती है, जबकि आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत निकासी और राहत का प्राथमिक दायित्व राज्य सरकारों के पास होता है, जिसे NDMA और NDRF समन्वित करते हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

29 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित विद्यालय सभा समाचार में दो प्रमुख घटनाएँ उल्लिखित हैं। पहली, चक्रवात अर्णब के कारण ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में अति गंभीर चक्रवाती तूफ़ान की स्थिति बनी, जिससे ओडिशा में 30,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया और झारखंड व ओडिशा में विद्यालय बंद किए गए। दूसरी, भारत ने पाकिस्तान को नई दिल्ली में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में आमंत्रित किया, जिसे ऑपरेशन सिंदूर के बाद का पहला ऐसा निमंत्रण बताया गया है। इसके अतिरिक्त केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केंद्रीय कर्मचारियों के महँगाई भत्ते में 3 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दी है, जो 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होगी। ये तीनों समाचार आपदा प्रबंधन, क्षेत्रीय कूटनीति और सरकारी व्यय के नीतिगत आयामों को एक साथ दर्शाते हैं।

पृष्ठभूमि

  • भारत के पूर्वी तट पर बंगाल की खाड़ी से उठने वाले चक्रवात अक्टूबर-नवंबर के उत्तर-पूर्वी मानसून काल में अधिक तीव्र होते हैं, क्योंकि इस समय समुद्री सतह का तापमान ऊँचा रहता है।
  • वर्ष 1999 के ओडिशा सुपर चक्रवात के बाद चक्रवात प्रबंधन में बड़े सुधार हुए, जिनमें चक्रवात आश्रय स्थल, तटीय क्षेत्रों में पूर्व चेतावनी प्रणाली और समुदाय-आधारित निकासी व्यवस्था शामिल हैं।
  • आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की स्थापना हुई और राज्यों में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण बने; आपदा की स्थिति में निकासी और राहत का मुख्य दायित्व राज्य सरकारों के पास होता है।
  • शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना वर्ष 2001 में शंघाई में हुई थी। भारत और पाकिस्तान इसके पूर्णकालिक सदस्य वर्ष 2017 में बने।
  • महँगाई भत्ता (DA) का निर्धारण उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर होता है और इसे समय-समय पर संशोधित किया जाता है; सेवानिवृत्त कर्मचारियों को मिलने वाली इसी प्रकार की राशि को महँगाई राहत (DR) कहते हैं।

चक्रवात और शंघाई सहयोग संगठन क्या हैं?

  • चक्रवात निम्न दाब क्षेत्र वाले ऐसे वायुमंडलीय तंत्र हैं, जिनमें हवाएँ तेज़ी से घूमती हैं; उत्तर हिंद महासागर में इनकी उत्पत्ति मुख्यतः मई और अक्टूबर-नवंबर में होती है।
  • भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) हवा की गति के आधार पर चक्रवातों को वर्गीकृत करता है: चक्रवाती तूफ़ान, गंभीर चक्रवाती तूफ़ान, अति गंभीर चक्रवाती तूफ़ान, अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफ़ान और सुपर चक्रवात।
  • अति गंभीर चक्रवाती तूफ़ान में लगभग 64 से 89 नॉट (लगभग 118 से 166 किमी प्रति घंटा) की हवाएँ चलती हैं, जिससे तटीय क्षेत्रों में भारी नुकसान की आशंका रहती है।
  • आपदा के समय की तैयारी में पूर्व चेतावनी, आश्रय स्थलों की व्यवस्था, मछुआरों के लिए चेतावनी, विद्यालयों व अस्पतालों की सुरक्षा तथा राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की तैनाती प्रमुख उपाय हैं।
  • शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक स्थायी क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग का मंच है, जिसका सचिवालय बीजिंग में है।
  • SCO के सदस्य देशों में चीन, रूस, कज़ाखिस्तान, किर्गिज़स्तान, ताजिकिस्तान, उज़बेकिस्तान, भारत और पाकिस्तान शामिल हैं।
  • SCO का क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी ढाँचा (RATS) ताशकंद में स्थित है और यह सदस्य देशों के बीच आतंकवाद से निपटने में समन्वय के लिए कार्य करता है।
  • किसी बहुपक्षीय बैठक में किसी सदस्य देश को आमंत्रित करना भारत की विदेश नीति का सामान्य राजनयिक उपकरण है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
चक्रवात आर्यब (Cyclone Arnab) की प्रकृति समाचार के अनुसार यह ‘अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान’ (Very Severe Cyclonic Storm) के रूप में ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटों से टकराया, जिससे भारी वर्षा और तेज़ हवाएँ चलीं
सक्रिय निकासी (Evacuation) ओडिशा प्रशासन ने संकटग्रस्त क्षेत्रों से 30,000 से अधिक लोगों को निकाला; यह पूर्व-चेतावनी आधारित निकासी का उदाहरण है
स्कूलों का बंद होना झारखंड और ओडिशा में एहतियातन विद्यालय बंद किए गए, जो आपदा के समय बच्चों की सुरक्षा के लिए सरकारी प्रशासन की सक्रियता दर्शाता है
तटीय भूभाग की संवेदनशीलता बंगाल की खाड़ी से उठने वाले चक्रवात तटीय ज़िलों की निचली बस्तियों, मछुआरों और कृषि भूमि के लिए सीधा खतरा बनते हैं
प्रारंभिक चेतावनी और समन्वय मौसम पूर्वानुमान, राज्य–केंद्र समन्वय और स्थानीय प्रशासन की भूमिका से जनहानि कम करने की क्षमता बढ़ती है

महत्व

आपदा प्रबंधन और शासन

  • आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005) के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) नीति-निर्देश देता है, जबकि राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) और ज़िला प्रशासन वास्तविक निकासी और राहत का संचालन करते हैं
  • ओडिशा का चक्रवात-प्रबंधन मॉडल 2013 के फैनी (Phailin) चक्रवात के बाद विकसित हुआ, जिसमें समय पर निकासी, चक्रवात आश्रय-स्थल और सामुदायिक तैयारी प्रमुख तत्व रहे हैं
  • यह घटना दिखाती है कि जनहानि घटाने में पूर्व-चेतावनी और निकासी की भूमिका भौतिक संरचनाओं से कम नहीं है

सामाजिक और मानवीय आयाम

  • संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित जीवन और दैहिक स्वतंत्रता के अधिकार की व्याख्या में राज्य का दायित्व है कि वह आपदा के समय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे
  • तटीय गरीब परिवार, मछुआरे और कच्चे मकानों में रहने वाले लोग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं, इसलिए राहत-वितरण में सामाजिक न्याय का प्रश्न उठता है
  • विद्यालय बंद होने से बच्चों की शिक्षा में अस्थायी बाधा आती है, जिससे आपदा के बाद शैक्षिक पुनर्स्थापन की आवश्यकता बनती है

आर्थिक प्रभाव

  • धान की खड़ी फसल, मत्स्य व्यापार और तटीय पर्यटन पर सीधा असर पड़ता है, जिससे ग्रामीण आय प्रभावित होती है
  • बुनियादी ढाँचे (सड़क, बिजली, संचार) की क्षति से पुनर्निर्माण पर सार्वजनिक व्यय बढ़ता है, जो राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) पर दबाव डाल सकता है

चुनौतियाँ

1. जलवायु परिवर्तन से बढ़ती चक्रवाती तीव्रता

  • समुद्र की सतह के तापमान में वृद्धि से चक्रवात अधिक तीव्र हो सकते हैं, हालाँकि किसी एक घटना को सीधे जलवायु परिवर्तन से जोड़ना वैज्ञानिक रूप से सावधानी का विषय है
  • तटीय क्षेत्रों में समुद्र-स्तर वृद्धि और तूफानी लहरों (Storm Surge) का जोखिम बढ़ता है

2. तटीय बस्तियों की भेद्यता

  • कच्चे मकान, अनियोजित तटीय बसावट और जल-निकासी की कमी से क्षति बढ़ती है
  • आजीविका के लिए तट पर निर्भर परिवार निकासी को अक्सर टालते हैं, जिससे जोखिम बढ़ता है

3. केंद्र और राज्य के बीच समन्वय

  • आपदा प्रबंधन में नीति केंद्र के स्तर पर बनती है और कार्यान्वयन राज्य के स्तर पर होता है, जिसमें संसाधनों और निर्णय-प्रक्रिया का तालमेल आवश्यक है
  • राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की तैनाती और राज्य पुलिस तथा स्थानीय निकायों के बीच तालमेल चुनौती बन सकता है

4. पूर्व-चेतावनी का अंतिम मील तक पहुँचना

  • मौसम विभाग (IMD) का पूर्वानुमान तभी उपयोगी है जब वह भाषा, माध्यम और समय के अनुसार अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे
  • ग्रामीण और मछुआरा समुदायों तक समय पर सूचना न पहुँचना निकासी की सफलता को सीमित करता है

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
निकासी के बाद पुनर्वास निकाले गए परिवारों के लिए अस्थायी आश्रय, भोजन, पेयजल और चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती है
फसल और आजीविका की क्षति धान और मत्स्य क्षेत्र की हानि से ग्रामीण आय में गिरावट और ऋण-भार बढ़ सकता है
बुनियादी ढाँचे का पुनर्निर्माण बिजली, सड़क और संचार लाइनों की मरम्मत में समय और धन दोनों लगते हैं
विद्यालय और शिक्षा में व्यवधान बच्चों की पढ़ाई रुकने से सीखने की निरंतरता टूटती है, विशेषकर ग्रामीण और वंचित वर्ग में
तटीय भेद्यता का दीर्घकालिक जोखिम अनियोजित बसावट और प्राकृतिक अवरोधों (मैंग्रोव, बालू के टीलों) के क्षरण से भविष्य का खतरा बढ़ता है

आगे की राह

  • पूर्व-चेतावनी प्रणाली को ज़िला और पंचायत स्तर तक ले जाकर स्थानीय भाषाओं में संदेश, सायरन और मोबाइल अलर्ट का समन्वित उपयोग किया जाए
  • तटीय गाँवों में चक्रवात आश्रय-स्थलों का नियमित रख-रखाव और उनकी संख्या व गुणवत्ता में वृद्धि की जाए
  • आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction) को स्थानीय विकास योजनाओं में मुख्यधारा में लाया जाए, जैसा कि सेंडाई फ्रेमवर्क (Sendai Framework) 2015–2030 की प्राथमिकताओं में कहा गया है
  • मछुआरों और किसानों के लिए फसल-बीमा तथा आपदा-पश्चात आजीविका सहायता का त्वरित और पारदर्शी वितरण सुनिश्चित किया जाए
  • तटीय मैंग्रोव और प्राकृतिक अवरोधों के संरक्षण को तटीय क्षेत्र प्रबंधन योजनाओं में शामिल किया जाए
  • निकासी के बाद विद्यालयों को शीघ्र खोलने और प्रभावित बच्चों के लिए शैक्षिक सहायता की योजना बनाई जाए
  • केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों के बीच आपदा के समय संयुक्त संचालन-केंद्र और स्पष्ट भूमिका-विभाजन तय किया जाए
  • आपदा के बाद के मूल्यांकन (Post-disaster Assessment) को सार्वजनिक करके भविष्य की तैयारी में सुधार किया जाए

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005) · राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) · राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) · चक्रवात प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली · भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) · आपदा पूर्व तैयारी और निकासी · सेंडाई फ्रेमवर्क (Sendai Framework for Disaster Risk Reduction) · आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction) · सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) · समुदाय-आधारित आपदा प्रबंधन · राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) · आपदा-रोधी अवसंरचना

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 21: जीवन और सुरक्षा का अधिकार

अवधारणा प्रवाह

समुद्र में निम्न दाब क्षेत्र का गहरा होकर चक्रवाती तूफान में बदलना  →  मौसम विभाग द्वारा पूर्वानुमान और चेतावनी जारी करना  →  राज्य प्रशासन द्वारा संकटग्रस्त तटीय क्षेत्रों से निकासी (Evacuation) का आदेश  →  चक्रवात आश्रय-स्थलों में अस्थायी आश्रय और आवश्यक सेवाओं की व्यवस्था  →  तट से टकराने पर भारी वर्षा, तेज़ हवाओं और तूफानी लहरों से फसल, मकान और बुनियादी ढाँचे की क्षति  →  राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के चरण में आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के ढाँचे के अंतर्गत केंद्र और राज्य का सहयोग

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की स्थापना वर्ष 2001 में हुई थी।
2. SCO का सचिवालय नई दिल्ली में स्थित है।
3. SCO की आतंकवाद-विरोधी क्षेत्रीय संरचना (RATS) का मुख्यालय ताशकंद में है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: SCO की स्थापना 2001 में शंघाई में हुई थी। कथन 2 गलत है: इसका सचिवालय बीजिंग में है, नई दिल्ली में नहीं। कथन 3 सही है: RATS का मुख्यालय ताशकंद में है। अतः सही कथन दो हैं।

Q2. कथन (A): भारत सरकार समय-समय पर केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (Dearness Allowance) में संशोधन करती है।
कारण (R): महंगाई भत्ते की गणना उपभोक्ता मूल्य सूचकांक, औद्योगिक श्रमिक (CPI-IW) में हुए परिवर्तन के आधार पर की जाती है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सत्य हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सत्य है, किंतु (R) असत्य है।
  4. (A) असत्य है, किंतु (R) सत्य है।

उत्तर: (A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — महंगाई भत्ते का उद्देश्य बढ़ती महंगाई से वेतन की क्रय शक्ति की रक्षा करना है, इसलिए इसका संशोधन आवश्यक होता है। इसकी गणना का आधार श्रम ब्यूरो द्वारा जारी CPI-IW है, जो R को सत्य और A की सही व्याख्या बनाता है।

Q3. निम्नलिखित सूचियों का सही मिलान कीजिए:

सूची-I (चक्रवाती तूफ़ान की श्रेणी, IMD के अनुसार)
1. चक्रवाती तूफ़ान (Cyclonic Storm)
2. अति प्रचंड चक्रवाती तूफ़ान (Very Severe Cyclonic Storm)
3. सुपर चक्रवाती तूफ़ान (Super Cyclonic Storm)

सूची-II (अधिकतम सतही पवन गति)
a. 34-47 नॉट
b. 64-89 नॉट
c. 120 नॉट या उससे अधिक

नीचे दिए गए कूटों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. 1-a, 2-b, 3-c
  2. 1-b, 2-a, 3-c
  3. 1-a, 2-c, 3-b
  4. 1-c, 2-b, 3-a

उत्तर: 1-a, 2-b, 3-c — IMD के वर्गीकरण में चक्रवाती तूफ़ान की पवन गति 34-47 नॉट, अति प्रचंड चक्रवाती तूफ़ान की 64-89 नॉट और सुपर चक्रवाती तूफ़ान की 120 नॉट या उससे अधिक होती है। अतः सही मिलान 1-a, 2-b, 3-c है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ चक्रवात ‘आर्नब’ के स्थल-पात के समय ओडिशा सहित पूर्वी तट के राज्यों से 30,000 से अधिक लोगों की निकासी इस तथ्य को रेखांकित करती है कि आपदा प्रबंधन में प्रारंभिक चेतावनी और निकासी की व्यवस्था अब प्रभावी हो चुकी है। आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत बनी संस्थागत संरचना की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए केवल आपातकालीन प्रतिक्रिया पर्याप्त क्यों नहीं है। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल उत्तर संरचना: (1) भूमिका: 28 अक्टूबर 2026 को चक्रवात आर्नब का तट से टकराना और ओडिशा में 30,000 से अधिक लोगों की निकासी; IMD द्वारा ‘अति प्रचंड चक्रवाती तूफ़ान’ की श्रेणी का उल्लेख। (2) संस्थागत ढाँचा: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 3 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (प्रधानमंत्री अध्यक्ष), धारा 14 के अंतर्गत राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (मुख्यमंत्री अध्यक्ष), धारा 25 के अंतर्गत जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण; धारा 44 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा मोचन बल; राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना, 2019। (3) वित्तीय ढाँचा: राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDMF) तथा वित्त आयोग की भूमिका। (4) सफलता के प्रमाण: 1999 के ओडिशा सुपर चक्रवात के बाद चक्रवात आश्रय-स्थलों, चक्रवात प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और समुदाय-आधारित तैयारी का विकास; 2019 के ‘फानी’ चक्रवात में बड़े पैमाने पर निकासी को सराहा गया। (5) समालोचनात्मक पक्ष: राज्यों की क्षमता में असमानता, स्थानीय स्तर पर समन्वय की कमी, जलवायु परिवर्तन से बढ़ती तीव्रता, प्रारंभिक चेतावनी का अंतिम मील तक न पहुँचना, आपदा-रोधी अवसंरचना में कमी। (6) सहकारी संघवाद का प्रश्न: आपदा प्रबंधन में केंद्र और राज्य की भूमिकाओं का संतुलन, राज्य द्वारा प्रथम प्रतिक्रिया और केंद्र द्वारा संसाधन-समर्थन। (7) वैश्विक आयाम: सेंडाई फ्रेमवर्क (2015-2030) की चार प्राथमिकताएँ, विशेषकर आपदा जोखिम को समझना और आपदा जोखिम न्यूनीकरण में निवेश। (8) निष्कर्ष: आपातकालीन प्रतिक्रिया से आगे बढ़कर जोखिम-आधारित नियोजन, भू-उपयोग नियंत्रण, आपदा-रोधी भवन और जन-जागरूकता की आवश्यकता पर बल।

स्रोत: The Indian Express


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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