29 Sep विलुप्पुरम में डीआईएसएचए बैठक: केंद्र की योजनाओं की समीक्षा
✎ जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (DISHA) केंद्र प्रायोजित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, समन्वय और निगरानी के लिए ज़िला स्तर पर गठित एक महत्वपूर्ण मंच है, जिसकी अध्यक्षता संबंधित लोकसभा सांसद करते हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पहलू, केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ तथा इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय
- Prelims: जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (दिशा), ग्रामीण विकास मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय, आवास योजनाएँ, PM-JANMAN योजना, केंद्र प्रायोजित योजनाएँ, स्थानीय स्वशासन, लाभार्थी पहचान
- Essay: भारत में समावेशी विकास सुनिश्चित करने में स्थानीय शासन की भूमिका, केंद्र प्रायोजित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन: चुनौतियाँ और समाधान
त्वरित पुनरावृत्ति: जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (DISHA) केंद्र प्रायोजित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, समन्वय और निगरानी के लिए ज़िला स्तर पर गठित एक महत्वपूर्ण मंच है, जिसकी अध्यक्षता संबंधित लोकसभा सांसद करते हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, विल्लुपुरम के सांसद ने जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (DISHA) की बैठक में जिले में लागू की जा रही विभिन्न केंद्रीय योजनाओं की समीक्षा की। इस बैठक में ग्रामीण विकास, पंचायती राज, स्थानीय प्रशासन, कृषि, वन और पशुपालन जैसे विभागों के तहत चल रही योजनाओं के क्रियान्वयन, निधि आवंटन, प्रगति और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। सांसद ने अधिकारियों को ‘सभी के लिए आवास’ (Housing for All) और PM-JANMAN जैसी योजनाओं के लंबित कार्यों को शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार ने केंद्र प्रायोजित योजनाओं (Centrally Sponsored Schemes) के अधिक प्रभावी और कुशल कार्यान्वयन के लिए जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (DISHA) का गठन किया है।
- DISHA का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों की योजनाओं के कार्यान्वयन में समन्वय स्थापित करना और उनकी निगरानी करना है, ताकि उनका लाभ लक्षित लाभार्थियों तक पहुँच सके।
- इन समितियों की अध्यक्षता लोकसभा के संबंधित सदस्य (सांसद) करते हैं और इसमें राज्य विधानसभा के सदस्य (विधायक), पंचायती राज संस्थानों के प्रतिनिधि और ज़िला प्रशासन के अधिकारी शामिल होते हैं।
- यह समिति ज़िला स्तर पर विभिन्न योजनाओं के लिए आवंटित निधियों के उपयोग, चल रहे कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता मानकों का आकलन करती है।
- DISHA की बैठकें नियमित अंतराल पर आयोजित की जाती हैं ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सके और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
- यह मंच केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय स्थापित करने तथा स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों में जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (DISHA) क्या है?
- DISHA का पूर्ण रूप ‘जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति’ (District Development Coordination and Monitoring Committee) है।
- इसका गठन ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development) द्वारा 2016 में किया गया था।
- इसका प्राथमिक उद्देश्य केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के कार्यान्वयन में समन्वय स्थापित करना और उनकी प्रभावी निगरानी करना है।
- समिति की अध्यक्षता संबंधित लोकसभा सांसद करते हैं, जो ज़िले में केंद्र सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए जवाबदेह होते हैं।
- इसमें ज़िले के सभी विधायक, ज़िला पंचायत के अध्यक्ष, महापौर/नगरपालिका परिषद के अध्यक्ष, ज़िला कलेक्टर और अन्य ज़िला स्तरीय अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल होते हैं।
- DISHA की बैठकें त्रैमासिक आधार पर आयोजित की जाती हैं, जहाँ योजनाओं की प्रगति, निधि उपयोग और लाभार्थियों तक पहुँच की समीक्षा की जाती है।
- यह समिति योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं की पहचान करती है और उनके समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने की सिफारिश करती है।
- इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि केंद्र प्रायोजित योजनाओं का लाभ अंतिम लाभार्थी तक पहुँचे और विकास कार्यों में पारदर्शिता व जवाबदेही बनी रहे।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| DISHA समिति की बैठक | यह जिला स्तर पर केंद्र प्रायोजित योजनाओं (Centrally Sponsored Schemes – CSS) और केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं (Central Sector Schemes – CS) के प्रभावी कार्यान्वयन और निगरानी के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है। |
| सांसद की अध्यक्षता | सांसद की अध्यक्षता यह सुनिश्चित करती है कि स्थानीय प्रतिनिधियों की भागीदारी हो और योजनाओं का क्रियान्वयन जन-प्रतिनिधित्व के माध्यम से हो, जिससे जवाबदेही बढ़ती है। |
| योजनाओं की समीक्षा | बैठक में विभिन्न विभागों जैसे ग्रामीण विकास, पंचायती राज, कृषि, वन और पशुपालन की योजनाओं की प्रगति, धन आवंटन और गुणवत्ता की समीक्षा की जाती है। |
| लाभार्थी-केंद्रित दृष्टिकोण | अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाता है कि योजनाएँ लक्षित लाभार्थियों तक पहुँचें और बुनियादी ढाँचे का कार्य गुणवत्तापूर्ण हो। |
| लंबित कार्यों का निपटान | आवास योजना और PM-JANMAN जैसी योजनाओं के तहत लंबित कार्यों को शीघ्र पूरा करने पर जोर दिया जाता है, जिससे समय पर लाभ सुनिश्चित हो। |
महत्व
शासन और प्रशासन
- DISHA समिति केंद्र सरकार की योजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करती है, जिससे सुशासन (Good Governance) को बढ़ावा मिलता है।
- यह जिला प्रशासन और निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच समन्वय स्थापित करने में मदद करती है, जिससे योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी होता है।
- योजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा से कार्यान्वयन में आने वाली बाधाओं की पहचान होती है और उनके समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाते हैं।
सामाजिक-आर्थिक विकास
- आवास, ग्रामीण विकास और बुनियादी सुविधाओं से संबंधित योजनाओं की निगरानी से समाज के वंचित वर्गों तक लाभ पहुँचता है, जिससे समावेशी विकास (Inclusive Development) को गति मिलती है।
- गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढाँचे के निर्माण पर जोर देने से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार होता है।
- योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होते हैं।
संघवाद (Federalism)
- यह केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग को बढ़ावा देती है, क्योंकि केंद्र प्रायोजित योजनाओं का क्रियान्वयन राज्य मशीनरी द्वारा किया जाता है।
- स्थानीय स्तर पर योजनाओं की समीक्षा से संघवाद के सहकारी पहलू को मजबूती मिलती है, जहाँ केंद्र और राज्य मिलकर विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करते हैं।
चुनौतियाँ
1. धन का अप्रभावी उपयोग
- कई बार योजनाओं के लिए आवंटित धन का उपयोग निर्धारित समय-सीमा के भीतर नहीं हो पाता या उसका दुरुपयोग होता है।
- धन के उपयोग की निगरानी प्रणाली में कमियाँ होने से पारदर्शिता का अभाव रहता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
2. अंतर-विभागीय समन्वय का अभाव
- विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय की कमी से योजनाओं के कार्यान्वयन में देरी होती है और दक्षता प्रभावित होती है।
- एक ही लाभार्थी के लिए कई योजनाओं के होने पर भी विभागों के बीच जानकारी साझा करने में समस्याएँ आती हैं।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
3. गुणवत्ता नियंत्रण की समस्या
- बुनियादी ढाँचे के कार्यों में गुणवत्ता मानकों का पालन न करने से निर्मित संपत्तियों की दीर्घायु प्रभावित होती है।
- ठेकेदारों और अधिकारियों के बीच मिलीभगत की संभावना से गुणवत्ता से समझौता किया जाता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेability
4. लक्षित लाभार्थियों तक पहुँच का अभाव
- कई बार योजनाएँ अपने वास्तविक लाभार्थियों तक नहीं पहुँच पातीं, जिससे उनका उद्देश्य विफल हो जाता है।
- जागरूकता की कमी, जटिल प्रक्रियाएँ और भ्रष्टाचार लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ उठाने से रोकते हैं।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| योजनाओं का धीमा क्रियान्वयन | परियोजनाओं को पूरा करने में अनावश्यक देरी से लागत में वृद्धि होती है और लाभार्थियों को समय पर लाभ नहीं मिल पाता। |
| निगरानी तंत्र की कमियाँ | प्रभावी निगरानी और मूल्यांकन प्रणालियों के अभाव में योजनाओं की वास्तविक प्रगति और प्रभाव का आकलन करना मुश्किल हो जाता है। |
| मानव संसाधन की कमी | योजनाओं को लागू करने और निगरानी करने के लिए प्रशिक्षित और पर्याप्त कर्मचारियों की कमी से कार्यान्वयन की गुणवत्ता प्रभावित होती है। |
| राजनीतिक हस्तक्षेप | योजनाओं के चयन, कार्यान्वयन और लाभार्थियों के चुनाव में राजनीतिक हस्तक्षेप से निष्पक्षता और दक्षता प्रभावित होती है। |
| डेटा की अविश्वसनीयता | प्रगति रिपोर्टों और डेटा में विसंगतियाँ या अविश्वसनीयता सही निर्णय लेने में बाधा डालती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- सभी के लिए आवास योजना (Housing for All scheme)
- प्रधानमंत्री जन-जाति आदिवासी न्याय महा-अभियान (PM-JANMAN scheme)
आगे की राह
- योजनाओं के लिए धन आवंटन और उपयोग की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाए।
- अंतर-विभागीय समन्वय को मजबूत करने के लिए नियमित बैठकें और साझा डेटाबेस प्रणाली विकसित की जाए।
- बुनियादी ढाँचे के कार्यों में गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र तृतीय-पक्ष ऑडिट (Third-Party Audit) प्रणाली लागू की जाए।
- योजनाओं के बारे में लाभार्थियों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार अभियान चलाए जाएँ और आवेदन प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए।
- लंबित कार्यों को शीघ्र पूरा करने के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की जाए और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
- स्थानीय स्वशासन निकायों (Local Self-Government Bodies) को योजनाओं के कार्यान्वयन और निगरानी में अधिक अधिकार और संसाधन दिए जाएँ।
- डेटा संग्रह और रिपोर्टिंग की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) आधारित प्रणाली विकसित की जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (दिशा) · केंद्र प्रायोजित योजनाएं · स्थानीय स्वशासन · पंचायती राज · कल्याणकारी योजनाएं · योजना कार्यान्वयन · जवाबदेही · सुशासन · लाभार्थी उन्मुखीकरण · बुनियादी ढांचा विकास · समयबद्ध परियोजना पूर्णता · गुणवत्ता मानक
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 243G: पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व
- अनुच्छेद 243W: नगरपालिकाओं की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व
- सातवीं अनुसूची: संघ और राज्य के बीच विधायी शक्तियों का वितरण
अवधारणा प्रवाह
केंद्र सरकार द्वारा योजनाएँ तैयार करना → राज्यों और जिलों को धन का आवंटन → DISHA समिति द्वारा कार्यान्वयन की समीक्षा → सांसद और अधिकारियों द्वारा प्रगति का मूल्यांकन → योजनाओं की बाधाओं की पहचान और समाधान → लक्षित लाभार्थियों तक लाभ पहुँचाना
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (DISHA) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. DISHA समिति का गठन ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा किया गया है।
2. DISHA समिति की बैठकों की अध्यक्षता संबंधित जिले के लोकसभा सांसद करते हैं।
3. DISHA समिति केवल केंद्र सरकार की योजनाओं के कार्यान्वयन की समीक्षा करती है, राज्य सरकार की योजनाओं की नहीं।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। DISHA समिति का गठन ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा केंद्र प्रायोजित योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए किया गया है। कथन 2 भी सही है। DISHA समिति की बैठकों की अध्यक्षता संबंधित जिले के लोकसभा सांसद करते हैं, ताकि निर्वाचित प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। कथन 3 गलत है। DISHA समिति केंद्र सरकार की योजनाओं के साथ-साथ राज्य सरकार की योजनाओं के कार्यान्वयन की भी निगरानी करती है, जिनका उद्देश्य स्थानीय विकास और कल्याण होता है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से ‘सभी के लिए आवास’ योजना का उद्देश्य है/हैं?
1. शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र लाभार्थियों को किफायती आवास प्रदान करना।
2. बेघर परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करना।
3. झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों के लिए इन-सीटू पुनर्वास को बढ़ावा देना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — सभी के लिए आवास योजना (Housing for All scheme) का मुख्य उद्देश्य शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में पात्र लाभार्थियों को किफायती आवास प्रदान करना है। इसमें बेघर परिवारों को वित्तीय सहायता देना और झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों के लिए इन-सीटू पुनर्वास (in-situ rehabilitation) को बढ़ावा देना शामिल है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (DISHA) के गठन के उद्देश्यों और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन में इसकी भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: DISHA समिति का संक्षिप्त परिचय, इसका गठन और उद्देश्य।
2. गठन के उद्देश्य: केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन, पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित करना। स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों में समन्वय स्थापित करना।
3. भूमिका: केंद्र प्रायोजित योजनाओं (Centrally Sponsored Schemes) के कार्यान्वयन की निगरानी, लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करना, धन के उचित उपयोग की समीक्षा, गुणवत्ता मानकों का पालन, अंतर-विभागीय समन्वय।
4. आलोचनात्मक परीक्षण: इसकी सफलताओं और चुनौतियों का विश्लेषण।
सकारात्मक पहलू: स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से योजनाओं में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ी है। जमीनी स्तर पर समस्याओं की पहचान और समाधान में मदद मिलती है। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय में सुधार।
चुनौतियां: बैठकों की नियमितता और गुणवत्ता, सदस्यों की सक्रिय भागीदारी का अभाव, सिफारिशों का कार्यान्वयन, राजनीतिक हस्तक्षेप, प्रशासनिक क्षमता की कमी, धन के उपयोग में देरी, डेटा की विश्वसनीयता।
5. सुधार के सुझाव: क्षमता निर्माण, तकनीकी सहायता का उपयोग, जनभागीदारी को बढ़ावा देना, निगरानी तंत्र को मजबूत करना, सिफारिशों के कार्यान्वयन पर सख्त अनुवर्ती कार्रवाई।
6. निष्कर्ष: DISHA समिति की क्षमता और महत्व को रेखांकित करते हुए, इसके प्रभावी कामकाज के लिए आवश्यक उपायों पर बल देना।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Anthropology VS PSIR
- Best PSIR optional coaching
- Best PSIR optional coaching online
- Best PSIR optional teacher
- सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बंद निगमों के कर्मचारियों को मिलेगा एक लाख मुआवजा - September 30, 2026
- West Bengal’s Transport Roadmap: AI Signals, Tram Revival & River Links - September 30, 2026
- चुनाव आयोग ने पूरा हुआ राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण तो फॉर्म 6 से हटाया SIR घोषणा पत्र - September 30, 2026

No Comments