21 Oct विशाखापट्टनम में उच्च जोखिम गर्भावस्था की निगरानी बढ़ाने पर कलेक्टर का निर्देश, जानिए पूरी जानकारी
✎ मातृ मृत्यु की रोकथाम का मूल सूत्र है: उच्च जोखिम गर्भावस्था की समय पर पहचान, प्रसव-पूर्व देखभाल, उच्च सुविधा केंद्र तक त्वरित रेफरल, और हर मातृ मृत्यु की MDSR के तहत समीक्षा।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — शासन व्यवस्था एवं सामाजिक न्याय (स्वास्थ्य सेवाएँ, कमजोर वर्गों के लिए योजनाएँ) | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — केंद्र और राज्य की योजनाएँ तथा जिला प्रशासन की भूमिका
- Prelims: मातृ मृत्यु अनुपात (Maternal Mortality Ratio – MMR), मातृ मृत्यु निगरानी एवं प्रतिक्रिया (Maternal Death Surveillance and Response – MDSR), प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (Pradhan Mantri Surakshit Matritva Abhiyan – PMSMA), जननी सुरक्षा योजना (Janani Suraksha Yojana – JSY), जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (Janani Shishu Suraksha Karyakram – JSSK), लक्ष्य पहल (LaQshya – Labour Room Quality Improvement Initiative), सहायक नर्स मिडवाइफ (Auxiliary Nurse Midwife – ANM), अनुच्छेद 47 (राज्य के नीति निदेशक तत्व — पोषण और लोक स्वास्थ्य)
- Essay: स्वास्थ्य का अधिकार और राज्य की जिम्मेदारी: मातृ स्वास्थ्य के संदर्भ में, मातृ मृत्यु रोकने में स्थानीय प्रशासन, जवाबदेही और समय पर उपचार की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: मातृ मृत्यु की रोकथाम का मूल सूत्र है: उच्च जोखिम गर्भावस्था की समय पर पहचान, प्रसव-पूर्व देखभाल, उच्च सुविधा केंद्र तक त्वरित रेफरल, और हर मातृ मृत्यु की MDSR के तहत समीक्षा।
यह खबर चर्चा में क्यों?
आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम जिले के कलेक्टर एम. अभिषिक्त किशोर ने 21 अक्टूबर 2026 को जिला मातृ मृत्यु निगरानी एवं प्रतिक्रिया समिति की बैठक में उच्च जोखिम गर्भावस्था की निगरानी मजबूत करने और समय पर रेफरल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। यह निर्देश जनवरी से जून 2026 के बीच जिले में दर्ज छह मातृ मृत्यु के मामलों की समीक्षा के बाद आया है। ये मृत्यु न्यू गाजुवाका, भवानी गार्डन्स, पीएम पालेम और बालाजी नगर के शहरी स्वास्थ्य केंद्रों तथा गाजुवाका और सोंतयम के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के क्षेत्र में हुईं। निर्देशों में निजी अस्पतालों द्वारा उच्च जोखिम मामलों की सूचना जिला स्वास्थ्य प्राधिकरण को देना, प्रसव-पूर्व देखभाल में सुधार, उच्च रक्तचाप की प्रारंभिक पहचान और पोषण व प्रसव नियोजन सहायता तक पहुँच सुनिश्चित करना शामिल है।
पृष्ठभूमि
- भारत में मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) में पिछले दो दशकों में उल्लेखनीय कमी आई है, फिर भी गर्भावस्था और प्रसव से जुड़ी मृत्यु को रोकना राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति की प्राथमिकता बनी हुई है।
- सतत विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals – SDG) के लक्ष्य 3.1 के अंतर्गत 2030 तक प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों पर MMR को 70 से नीचे लाने का लक्ष्य रखा गया है।
- मातृ मृत्यु निगरानी एवं प्रतिक्रिया (MDSR) के राष्ट्रीय दिशा-निर्देश स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 2017 में जारी किए गए, जिनमें हर मातृ मृत्यु की सूचना, समीक्षा और कारणों के विश्लेषण के बाद सुधारात्मक कदम उठाने की व्यवस्था है।
- उच्च रक्तचाप विकार, रक्तस्राव और संक्रमण मातृ मृत्यु के प्रमुख कारणों में गिने जाते हैं, और इनमें से अनेक को समय पर जाँच, उचित रेफरल और प्रशिक्षित प्रसव सेवा से रोका जा सकता है।
- जननी सुरक्षा योजना, जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान जैसी योजनाएँ संस्थागत प्रसव, निःशुल्क सेवाओं और प्रसव-पूर्व जाँच को बढ़ावा देने के लिए लागू की गई हैं।
मातृ मृत्यु निगरानी एवं प्रतिक्रिया (MDSR) क्या है?
- MDSR एक व्यवस्थित तंत्र है जिसके अंतर्गत गर्भावस्था, प्रसव या प्रसव के 42 दिनों के भीतर होने वाली हर मृत्यु की सूचना दी जाती है, उसकी जाँच की जाती है और उसके कारणों के आधार पर सुधार किए जाते हैं।
- इसका उद्देश्य केवल आँकड़े दर्ज करना नहीं, बल्कि रोकी जा सकने वाली मृत्यु के कारणों (जैसे देर से रेफरल, उपचार में विलंब, सेवाओं की कमी) की पहचान कर व्यवस्था में सुधार करना है।
- इसमें सामुदायिक, सुविधा (facility), जिला और राज्य स्तर पर समीक्षा की व्यवस्था है, और जिला स्तर की समिति स्थानीय स्वास्थ्य प्राधिकरणों, अस्पतालों तथा निजी चिकित्सकों के बीच समन्वय सुनिश्चित करती है।
- उच्च जोखिम गर्भावस्था वह स्थिति है जिसमें माँ या शिशु के लिए जटिलताओं का खतरा अधिक हो, जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कम उम्र या अधिक उम्र में गर्भधारण, या पूर्व की गर्भावस्था में जटिलता।
- प्रसव-पूर्व देखभाल (Antenatal Care) के दौरान ऐसी गर्भावस्था की समय पर पहचान और उसकी नियमित निगरानी ही मातृ मृत्यु रोकने की पहली कड़ी है।
- उच्च जोखिम मामलों को उच्च सुविधा वाले सरकारी अस्पताल में भेजना (रेफरल) और वहाँ विशेषज्ञ प्रसव सेवा सुनिश्चित करना इस तंत्र का अनिवार्य हिस्सा है।
- सहायक नर्स मिडवाइफ (ANM) और चिकित्साधिकारी प्रसव-पूर्व जाँच, पोषण परामर्श और प्रसव नियोजन के मुख्य स्तंभ हैं, इसलिए उनकी जवाबदेही तय करना नीतिगत रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| घटना का स्वरूप | विशाखापत्तनम (Visakhapatnam) जिले में जनवरी से जून 2026 के बीच छह मातृ मृत्यु दर्ज हुईं। ये मामले न्यू गाजुवाका, भवानी गार्डन्स, पीएम पालेम और बालाजी नगर के शहरी स्वास्थ्य केंद्रों तथा गाजुवाका और सोंट्यम के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की सीमा में आए |
| समीक्षा तंत्र | जिला मातृ मृत्यु निगरानी और प्रतिक्रिया समिति (District MDSR Committee) ने कलेक्टोरेट में मामलों की समीक्षा की। यह मातृ मृत्यु निगरानी और प्रतिक्रिया की राष्ट्रीय व्यवस्था का जिला स्तरीय रूप है |
| उच्च जोखिम गर्भावस्था का प्रबंधन | विस्तृत केस इतिहास रखना, निजी अस्पतालों द्वारा ऐसे मामलों की जिला स्वास्थ्य प्राधिकरण को सूचना देना और उच्च जोखिम वाले मामलों को बिना देरी किंग जॉर्ज अस्पताल (King George Hospital, KGH) या विक्टोरिया सरकारी अस्पताल (Victoria Government Hospital, VGH) भेजना |
| जवाबदेही का ढांचा | चिकित्सा अधिकारियों और सहायक नर्स मिडवाइफ (Auxiliary Nurse Midwife, ANM) को आगे की मातृ मृत्यु रोकने के लिए उत्तरदायी ठहराया गया है |
| रोकथाम के मुख्य उपाय | प्रसव-पूर्व देखभाल (Antenatal Care) में सुधार, उच्च रक्तचाप (Hypertension) की प्रारंभिक पहचान, समय पर जांच सेवाएँ, पोषण और प्रसव नियोजन में सहायता |
महत्व
स्वास्थ्य और मानव विकास
- मातृ मृत्यु अनुपात (Maternal Mortality Ratio, MMR) सतत विकास लक्ष्य 3.1 का मुख्य संकेतक है, जिसके अनुसार 2030 तक वैश्विक मातृ मृत्यु अनुपात प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 70 से कम करने का लक्ष्य रखा गया है
- जिला स्तर पर मृत्यु के कारणों की समीक्षा से रोकथाम योग्य मृत्युओं की पहचान होती है और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार का आधार बनता है
प्रशासनिक और शासन-संबंधी
- जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में समीक्षा से सरकारी स्वास्थ्य विभाग, निजी क्षेत्र और ग्रामीण-शहरी स्वास्थ्य केंद्रों के बीच समन्वय बढ़ता है
- जवाबदेही तय करने से निगरानी को केवल आंकड़ों की रिपोर्ट से आगे ले जाकर वास्तविक कार्रवाई से जोड़ा जाता है
सामाजिक और पोषण-संबंधी
- उच्च जोखिम गर्भावस्था अक्सर कुपोषण, रक्ताल्पता और सीमित स्वास्थ्य पहुँच से जुड़ी होती है, इसलिए पोषण और जन्म-नियोजन पर बल देना सामाजिक सुरक्षा का हिस्सा है
- समय पर पहचान से परिवार पर आर्थिक बोझ और शिशु मृत्यु के जोखिम दोनों कम हो सकते हैं
संस्थागत रेफरल ढांचा
- प्राथमिक और शहरी स्वास्थ्य केंद्रों से उच्च स्तरीय अस्पतालों तक रेफरल श्रृंखला का सुदृढ़ होना आपातकालीन प्रसूति देखभाल के लिए आवश्यक है
- निजी अस्पतालों को सूचना-तंत्र में शामिल करने से सार्वजनिक-निजी समन्वय की व्यावहारिक दिशा मिलती है
चुनौतियाँ
1. निजी क्षेत्र की सूचना में अंतर
- निजी अस्पतालों में होने वाले उच्च जोखिम मामलों की सूचना अक्सर सरकारी आंकड़ों में नहीं आती, जिससे वास्तविक जोखिम कम आंका जाता है
- निजी और सार्वजनिक प्रणालियों के बीच डेटा साझा करने का मानकीकृत प्रारूप सीमित है
यूपीएससी लिंक: GS2: स्वास्थ्य क्षेत्र में सार्वजनिक-निजी भागीदारी और शासन
2. रेफरल में देरी
- तीन देरी मॉडल (Three Delays Model) के अनुसार मातृ मृत्यु के पीछे निर्णय लेने, सुविधा तक पहुँचने और उपचार मिलने में देरी प्रमुख कारण हो सकते हैं
- जटिल मामलों को उच्च केंद्र तक समय पर पहुँचाने के लिए परिवहन और समन्वय की कमी बाधा बनती है
यूपीएससी लिंक: GS2: स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप
3. मानव संसाधन की कमी और जवाबदेही का दबाव
- ANM और चिकित्सा अधिकारियों पर जवाबदेही तय करते समय उनके कार्यभार, प्रशिक्षण और संसाधनों पर भी ध्यान देना आवश्यक है
- बिना पर्याप्त संसाधन के जवाबदेही केवल औपचारिक बनकर रह सकती है
यूपीएससी लिंक: GS2: लोक सेवा वितरण और प्रशासनिक जवाबदेही
4. उच्च रक्तचाप की समय पर पहचान
- गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप संबंधी विकार मातृ मृत्यु के प्रमुख कारणों में गिने जाते हैं
- नियमित रक्तचाप जांच और जोखिम-आधारित वर्गीकरण की कमी होने पर गंभीर स्थिति देर से पकड़ में आती है
यूपीएससी लिंक: GS2: स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता और पहुँच
5. ग्रामीण-शहरी और भौगोलिक अंतर
- दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों से जिला अस्पताल तक पहुँचना अधिक समय लेता है, जिससे आपातकालीन स्थिति में जोखिम बढ़ता है
- शहरी केंद्रों में भी निम्न आय वर्ग की बस्तियों तक सेवाओं की पहुँच असमान रह सकती है
यूपीएससी लिंक: GS1 और GS2: सामाजिक न्याय और सेवाओं में क्षेत्रीय असमानता
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| सूचना का अधूरापन | निजी अस्पतालों से उच्च जोखिम मामलों की सूचना नियमित न होने से निगरानी तंत्र अधूरा रहता है |
| रेफरल में विलंब | निर्णय, परिवहन और उच्च केंद्र पर उपचार, तीनों चरणों में देरी से मृत्यु की संभावना बढ़ती है |
| मानव संसाधन का दबाव | ANM और चिकित्सा अधिकारियों की उपलब्धता और प्रशिक्षण पर्याप्त न होने से प्रसव-पूर्व जांच प्रभावित होती है |
| रक्तचाप की देर से पहचान | उच्च रक्तचाप समय पर न पकड़े जाने से प्री-एक्लेम्पसिया जैसी गंभीर स्थितियाँ अचानक उभरती हैं |
| पोषण और सामाजिक कारक | रक्ताल्पता और कुपोषण से गर्भावस्था का जोखिम बढ़ता है, जिसे केवल चिकित्सा हस्तक्षेप से पूरी तरह नहीं रोका जा सकता |
| जवाबदेही बनाम संसाधन | जिम्मेदारी तय करने के साथ आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध न हों तो कर्मचारियों पर मनोवैज्ञानिक और प्रशासनिक दबाव बढ़ता है |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (Janani Shishu Suraksha Karyakram, JSSK): उच्च जोखिम मामलों में सरकारी संस्थानों तक निःशुल्क परिवहन और निदान सेवाओं से सीधा संबंध
- प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (Pradhan Mantri Surakshit Matritva Abhiyan, PMSMA): उच्च जोखिम गर्भावस्था की पहचान और विशेषज्ञ जांच से सीधा संबंध
आगे की राह
- निजी अस्पतालों से उच्च जोखिम गर्भावस्था की सूचना को अनिवार्य और नियमित बनाने के लिए स्पष्ट प्रारूप और समय-सीमा तय की जाए
- प्रत्येक उच्च जोखिम मामले के लिए रेफरल का समय, परिवहन और प्राप्ति केंद्र का रिकॉर्ड रखा जाए ताकि देरी के वास्तविक बिंदु पहचाने जा सकें
- उच्च रक्तचाप की जांच को प्रसव-पूर्व देखभाल का अनिवार्य हिस्सा बनाकर हर गर्भवती महिला का जोखिम-आधारित वर्गीकरण किया जाए
- ANM और चिकित्सा अधिकारियों के लिए उच्च जोखिम प्रबंधन पर नियमित प्रशिक्षण और पर्यवेक्षण की व्यवस्था की जाए
- जवाबदेही के साथ आवश्यक संसाधन, दवाइयाँ और जांच सुविधाएँ सुनिश्चित की जाएँ ताकि कर्मचारी प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें
- पोषण, रक्ताल्पता नियंत्रण और जन्म-नियोजन परामर्श को स्वास्थ्य सेवाओं के साथ समन्वित किया जाए
- मातृ मृत्यु के हर मामले की समीक्षा के निष्कर्षों को सुधारात्मक कार्ययोजना में बदलकर उसकी प्रगति की नियमित निगरानी की जाए
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
उच्च जोखिम गर्भावस्था (High-Risk Pregnancy) · मातृ मृत्यु अनुपात (Maternal Mortality Ratio – MMR) · मातृ मृत्यु निगरानी एवं प्रतिक्रिया (Maternal Death Surveillance and Response – MDSR) · प्रसव-पूर्व देखभाल (Antenatal Care) · समय पर रेफरल तंत्र (Timely Referral System) · प्रसूति आपातकालीन देखभाल (Emergency Obstetric Care) · प्रसूति कक्ष गुणवत्ता सुधार पहल (LaQshya) · सतत विकास लक्ष्य 3.1 (SDG 3.1) · अनुच्छेद 21 और जीवन का अधिकार · स्वास्थ्य: राज्य सूची का विषय · मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (ASHA) · सहायक नर्स मिडवाइफ (Auxiliary Nurse Midwife – ANM)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21: जीवन का अधिकार, जिसमें स्वास्थ्य सुविधा का अधिकार निहित माना गया है
- अनुच्छेद 42: प्रसूति सहायता के लिए न्यायसंगत और मानवीय दशाएँ सुनिश्चित करना
- अनुच्छेद 47: पोषण स्तर और लोक स्वास्थ्य के सुधार का राज्य का कर्तव्य
- सातवीं अनुसूची, राज्य सूची की प्रविष्टि 6: लोक स्वास्थ्य, अस्पताल और औषधालय राज्य का विषय
अवधारणा प्रवाह
जनवरी से जून 2026 के बीच जिले में छह मातृ मृत्यु दर्ज होती हैं → जिला मातृ मृत्यु निगरानी और प्रतिक्रिया समिति मामलों की समीक्षा करती है और मृत्यु के कारणों की पहचान करती है → समीक्षा के आधार पर उच्च जोखिम गर्भावस्था की निगरानी, केस इतिहास और निजी अस्पतालों से सूचना का निर्देश दिया जाता है → चिकित्सा अधिकारियों और ANM को जवाबदेह ठहराकर प्रसव-पूर्व देखभाल, रक्तचाप जांच और पोषण सेवाओं को सुदृढ़ किया जाता है → उच्च जोखिम मामलों को किंग जॉर्ज अस्पताल या विक्टोरिया सरकारी अस्पताल जैसे उच्च स्तरीय केंद्रों तक बिना देरी पहुँचाया जाता है → समय पर पहचान और रेफरल से मातृ मृत्यु के जोखिम में कमी और सतत विकास लक्ष्य 3.1 की दिशा में प्रगति की संभावना बढ़ती है
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) को प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर होने वाली मातृ मृत्युओं की संख्या के रूप में परिभाषित किया जाता है।
2. स्वास्थ्य संविधान की समवर्ती सूची (Concurrent List) का विषय है।
3. संविधान का अनुच्छेद 47 राज्य को पोषण स्तर ऊँचा करने और लोक स्वास्थ्य में सुधार की दिशा में कार्य करने का निर्देश देता है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है, क्योंकि MMR प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर मातृ मृत्यु की संख्या है। कथन 2 गलत है, क्योंकि स्वास्थ्य सातवीं अनुसूची की राज्य सूची (प्रविष्टि 6) का विषय है, समवर्ती सूची का नहीं। कथन 3 सही है, क्योंकि अनुच्छेद 47 राज्य के पोषण स्तर, जीवन स्तर और लोक स्वास्थ्य सुधार से संबंधित है। अतः दो कथन सही हैं।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए, जिनमें एक अभिकथन (A) और एक कारण (R) दिया गया है:
अभिकथन (A): उच्च जोखिम गर्भावस्था की समय पर पहचान और उच्च स्तरीय अस्पतालों को समय पर रेफरल से मातृ मृत्यु की संभावना घटाई जा सकती है।
कारण (R): प्रसव के दौरान रक्तस्राव और उच्च रक्तचाप से जुड़े विकारों (जैसे प्री-एक्लेम्पसिया और एक्लेम्पसिया) के लिए प्रायः ऐसी आपातकालीन प्रसूति सुविधाओं की आवश्यकता होती है, जो प्राथमिक स्तर पर सदैव उपलब्ध नहीं होतीं।
नीचे दिए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — अभिकथन और कारण दोनों सही हैं। रक्तस्राव और प्री-एक्लेम्पसिया/एक्लेम्पसिया जैसी आपात स्थितियों में प्रसूति आपातकालीन देखभाल (Emergency Obstetric Care) आवश्यक होती है, इसलिए रेफरल तंत्र की गति ही जोखिम घटाने का मुख्य उपाय है। अतः (R) सीधे (A) की व्याख्या करता है।
Q3. निम्नलिखित में से सूची-I (मातृ स्वास्थ्य योजना/कार्यक्रम) को सूची-II (विशेषता) से सुमेलित कीजिए:
सूची-I
1. जननी सुरक्षा योजना (JSY)
2. प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA)
3. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY)
4. जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (JSSK)
सूची-II
P. प्रत्येक माह की 9 तारीख को स्वयंसेवी निजी चिकित्सकों द्वारा निःशुल्क प्रसव-पूर्व जाँच
Q. संस्थागत प्रसव के लिए नकद प्रोत्साहन
R. पहले जीवित जन्म पर किस्तों में सशर्त नकद सहायता
S. गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए निःशुल्क दवाएँ, जाँच, परिवहन और भोजन की सुविधा
सही सुमेलन चुनिए:
- 1-Q, 2-P, 3-R, 4-S
- 1-P, 2-Q, 3-S, 4-R
- 1-R, 2-S, 3-P, 4-Q
- 1-S, 2-R, 3-Q, 4-P
उत्तर: 1-Q, 2-P, 3-R, 4-S — जननी सुरक्षा योजना संस्थागत प्रसव हेतु नकद प्रोत्साहन देती है (Q)। PMSMA में निजी चिकित्सक प्रत्येक माह की 9 तारीख को निःशुल्क प्रसव-पूर्व जाँच करते हैं (P)। PMMVY पहले जीवित जन्म पर किस्तों में सशर्त नकद सहायता देती है (R)। JSSK निःशुल्क सेवाएँ, दवाएँ, जाँच और परिवहन देती है (S)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में मातृ मृत्यु का बड़ा भाग रोकथाम योग्य माना जाता है, क्योंकि रक्तस्राव, उच्च रक्तचाप से जुड़े विकार और संक्रमण जैसे कारणों की समय पर पहचान और उपचार से जोखिम घटाया जा सकता है। उच्च जोखिम गर्भावस्था की निगरानी में जिला स्तरीय प्रशासनिक और संस्थागत तंत्र की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि स्वास्थ्य के राज्य सूची का विषय होने के कारण केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय की कौन-सी सीमाएँ इस तंत्र की प्रभावशीलता को प्रभावित करती हैं। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की रूपरेखा (Model-Answer Skeleton):
1. प्रसंग: विशाखापट्टनम कलेक्टर द्वारा जनवरी से जून 2026 के बीच छह मातृ मृत्यु मामलों की समीक्षा; न्यू गाजुवाका, भवानी गार्डन्स, पीएम पालेम, बालाजी नगर शहरी स्वास्थ्य केंद्र तथा गाजुवाका और सोंट्यम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की सीमा में घटनाएँ; जिला मातृ मृत्यु निगरानी एवं प्रतिक्रिया समिति की बैठक; उच्च जोखिम मामलों का KGH/VGH को समय पर रेफरल।
2. अवधारणा और आँकड़े: मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) की परिभाषा; सतत विकास लक्ष्य 3.1 के अंतर्गत 2030 तक प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 70 से कम का लक्ष्य; आँकड़ों का स्रोत नमूना पंजीकरण प्रणाली (SRS) और गुमनाम मृत्यु रिपोर्टिंग की चुनौती।
3. संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार, परमानंद कटारा बनाम भारत संघ, 1989 में आपातकालीन चिकित्सा सहायता का कर्तव्य); अनुच्छेद 42 (प्रसूति सहायता); अनुच्छेद 47 (लोक स्वास्थ्य); स्वास्थ्य राज्य सूची (प्रविष्टि 6) का विषय।
4. नीतिगत और संस्थागत ढाँचा: मातृ मृत्यु निगरानी एवं प्रतिक्रिया (MDSR) दिशानिर्देश, 2017 (मृत्यु की सूचना और समीक्षा); प्रसूति कक्ष गुणवत्ता सुधार पहल (LaQshya, 2017); प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA, 2016); जननी सुरक्षा योजना (JSY, 2005); जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (JSSK, 2011); प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY, 2017); मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम, 2017 (26 सप्ताह का सवैतनिक अवकाश); राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की भूमिका; जिला स्वास्थ्य समिति की अध्यक्षता जिलाधिकारी द्वारा।
5. संरचनात्मक चुनौतियाँ: प्राथमिक स्तर पर रक्तचाप की पहचान और प्रसव-पूर्व जाँच की गुणवत्ता; एनीमिया; परिवहन और रेफरल में विलंब; निजी अस्पतालों द्वारा उच्च जोखिम मामलों की सूचना देने में अनुपालन; ANM और ASHA के कार्यभार और प्रशिक्षण की स्थिति; ग्रामीण-शहरी असमानता।
6. समालोचना: जवाबदेही पर बल (ANM और चिकित्सकों को उत्तरदायी ठहराना) बनाम संसाधन-आधारित सुधार; निगरानी को दंडात्मक नहीं, सीखने वाली प्रणाली के रूप में देखने का तर्क; अमर्त्य सेन के क्षमता दृष्टिकोण (Capability Approach) के अनुसार मातृ स्वास्थ्य को जीवन-क्षमता के मूल तत्व के रूप में देखना; केंद्र-राज्य समन्वय में वित्त, दिशानिर्देश और कार्यान्वयन के बीच का अंतर।
7. संतुलित दृष्टिकोण और निष्कर्ष: समीक्षा बैठकें और सूचना-बाध्यता जवाबदेही बढ़ाती हैं, पर स्थायी सुधार हेतु प्रशिक्षित मानव संसाधन, रेफरल परिवहन, उपकरण और डेटा गुणवत्ता में निवेश आवश्यक है; सहकारी संघवाद के आधार पर केंद्र-राज्य समन्वय सुदृढ़ करने का समग्र निष्कर्ष।
स्रोत: The Hindu
Andhra Pradesh PCS (APPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: विशाखापत्तनम के कलेक्टर द्वारा वर्ष 2026 में उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की निगरानी को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा उपाय सबसे अधिक प्रभावी माना जा सकता है?
- A. उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान के लिए सभी सरकारी अस्पतालों में AI-आधारित स्क्रीनिंग प्रणाली लागू करना
- B. गर्भवती महिलाओं के लिए मुफ्त निजी अस्पतालों में प्रसव की सुविधा प्रदान करना
- C. उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं के मामलों की रिपोर्टिंग के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू करना
- D. गर्भावस्था के दौरान नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयों का विस्तार करना
उत्तर: A. उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान के लिए सभी सरकारी अस्पतालों में AI-आधारित स्क्रीनिंग प्रणाली लागू करना — AI-आधारित स्क्रीनिंग प्रणाली उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की शीघ्र पहचान और समय पर हस्तक्षेप में सहायक होगी, जिससे मातृ मृत्यु दर को कम किया जा सकेगा।
Mains: विशाखापत्तनम में वर्ष 2026 में उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं के कारण हुई छह मातृ मृत्युओं के संदर्भ में, राज्य सरकार द्वारा उठाए जाने वाले संभावित नीति और प्रशासनिक उपायों का विस्तृत विश्लेषण कीजिए। इसमें विशेष रूप से जन स्वास्थ्य प्रणाली के सुदृढ़ीकरण, तकनीकी नवाचार, और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से मातृ मृत्यु दर को कम करने के उपायों पर प्रकाश डालिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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