भारत में AI स्केलिंग की चुनौतियाँ: विशेषज्ञों की राय

भारत में AI स्केलिंग की चुनौतियाँ: विशेषज्ञों की राय

भारत में AI स्केलिंग की चुनौतियाँ: विशेषज्ञों की राय

✎ भारतीय कंपनियों को AI को स्केल करने में डेटा गुणवत्ता, सुरक्षा और कुशल पेशेवरों की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

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प्रासंगिकता — UPSC & State PCS: Science & Technology

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**भारतीय कंपनियों के लिए AI को स्केल करने में चुनौतियाँ: विशेषज्ञ की दृष्टि**

भारतीय उद्यमों के सामने AI को बड़े पैमाने पर अपनाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने के बीच एक बड़ी खाई बनी हुई है। आईबीएम इंडिया के जनरल मैनेजर श्रीराम राघवन के अनुसार, कंपनियाँ मुख्य रूप से डेटा की गुणवत्ता, सुरक्षा संबंधी जोखिमों और कुशल पेशेवरों की कमी से जूझ रही हैं। जहाँ कुछ कंपनियाँ AI को अपने संचालन में शामिल कर चुकी हैं, वहीं अधिकांश अभी भी इसे प्रयोगात्मक स्तर पर ही समझ रही हैं। राघवन का मानना है कि AI संप्रभुता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए भारत को हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों स्तरों पर निवेश करना होगा, हालांकि पूर्ण स्वायत्तता फिलहाल अव्यावहारिक है, क्योंकि देश अभी भी विदेशी तकनीक पर निर्भर है।

AI संप्रभुता पर सरकार और उद्यम दोनों ही नियंत्रण और विकल्पों की मांग कर रहे हैं। सरकार जहाँ लंबे समय के दृष्टिकोण से तकनीकी स्टैक के हर स्तर पर संप्रभुता चाहती है, वहीं उद्यमों के लिए यह रणनीतिक निर्णयों का मसला है। राघवन का कहना है कि हार्डवेयर स्तर पर संप्रभुता हासिल करने में दशकों लग सकते हैं, लेकिन सॉफ्टवेयर के माध्यम से AI की दक्षता बढ़ाई जा सकती है। वे बताते हैं कि AI मॉडलों की वास्तुकला में सुधार, पावर दक्षता बढ़ाने और बेहतर प्लेटफॉर्म विकसित करने से लागत कम की जा सकती है। हालांकि, यह प्रक्रिया धीमी है, क्योंकि नए हार्डवेयर या चिप्स का विकास हर तिमाही में संभव नहीं होता।

AI आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान और बुनियादी ढांचे तक पहुँच की कमी भी भारतीय कंपनियों के लिए बड़ी बाधा है। बड़ी AI प्रयोगशालाएँ अभी तक भारत में बड़े निवेश करने से बच रही हैं, जिससे उद्यमों को स्थानीय स्तर पर समाधान खोजने में मुश्किल हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI को अपनाने का अर्थ है कंपनी के संचालन मॉडल में बदलाव लाना। फिलहाल, केवल 15% भारतीय कंपनियाँ ही AI को सक्रिय रूप से लागू कर रही हैं, जबकि 85% अभी भी इसे समझने की प्रक्रिया में हैं। ऐसे में, सरकार और निजी क्षेत्र दोनों को मिलकर कौशल विकास, नियामक ढाँचे और तकनीकी स्वायत्तता पर ध्यान देना होगा।

यह मुद्दा UPSC और राज्य PCS जैसी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है, क्योंकि AI और तकनीकी स्वायत्तता राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास और डिजिटल क्रांति जैसे विषयों से सीधे जुड़े हैं। परीक्षाओं में इससे संबंधित प्रश्न तकनीकी, नीति निर्माण और रणनीतिक दृष्टिकोण पर केंद्रित हो सकते हैं, जैसे AI संप्रभुता की चुनौतियाँ, डेटा सुरक्षा, और कौशल विकास। इसके अलावा, राज्य स्तर पर AI अपनाने से जुड़े स्थानीय मुद्दों पर भी चर्चा की जा सकती है, जिससे प्रशासनिक और तकनीकी दृष्टिकोण का संतुलन बनाया जा सके।

स्रोत: The Indian Express

अभ्यास प्रश्न

Q1. AI तकनीक को अपनाने के बावजूद भारतीय कंपनियों के लिए इसे बढ़ाने में मुख्य चुनौती क्या है?

  1. AI तकनीक की उच्च लागत
  2. AI कौशल की कमी और विशेषज्ञता का अभाव
  3. सरकारी नीतियों का अभाव
  4. उपभोक्ताओं द्वारा AI उत्पादों की स्वीकार्यता में कमी
उत्तर

AI कौशल की कमी और विशेषज्ञता का अभाव — विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय कंपनियों में AI को बढ़ाने में मुख्य चुनौती कुशल AI पेशेवरों और विशेषज्ञता की कमी है। इसके अलावा, डेटा की गुणवत्ता और तकनीकी बुनियादी ढांचे में भी सुधार की आवश्यकता है।

Q2. AI स्केलिंग में भारतीय कंपनियों के सामने आने वाली प्रमुख बाधाओं में से एक क्या है?

  1. विदेशी निवेशकों द्वारा AI स्टार्टअप्स में निवेश की कमी
  2. AI मॉडल के लिए पर्याप्त डेटा का अभाव
  3. AI उत्पादों के लिए बाजार की मांग में कमी
  4. AI तकनीक की कानूनी और नियामक चुनौतियां
उत्तर

AI मॉडल के लिए पर्याप्त डेटा का अभाव — AI स्केलिंग में प्रमुख बाधा पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण डेटा की कमी है। AI मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए बड़ी मात्रा में डेटा की आवश्यकता होती है, जो कई भारतीय कंपनियों के लिए उपलब्ध नहीं होता।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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