14 Sep आईएनएस मैसूर ने मलेशिया में समुद्र लक्ष्मण अभ्यास में लिया भाग, जानिए मुख्य बातें
✎ अभ्यास समुद्र लक्ष्मण भारत और मलेशिया की नौसेनाओं के बीच एक द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास है, जिसका उद्देश्य अंतर-संचालनीयता और समुद्री सहयोग को बढ़ाना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा (सामुद्रिक सुरक्षा)
- Prelims: अभ्यास समुद्र लक्ष्मण, आईएनएस मैसूर, रॉयल मलेशियाई नौसेना, भारत-मलेशिया रक्षा सहयोग, अंतर-संचालनीयता, सामुद्रिक सुरक्षा
- Essay: भारत की एक्ट ईस्ट नीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उसकी भूमिका, सामुद्रिक सुरक्षा में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: अभ्यास समुद्र लक्ष्मण भारत और मलेशिया की नौसेनाओं के बीच एक द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास है, जिसका उद्देश्य अंतर-संचालनीयता और समुद्री सहयोग को बढ़ाना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस मैसूर ने 9 से 12 सितंबर 2026 तक मलेशिया के लुमुट में रॉयल मलेशियाई नौसेना के साथ ‘अभ्यास समुद्र लक्ष्मण’ के चौथे संस्करण में भाग लिया। यह अभ्यास दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच पेशेवर और परिचालन गतिविधियों के व्यापक दायरे में संलग्न होने का अवसर प्रदान करता है, जिससे समुद्री साझेदारी को और मजबूत किया जा सके।
पृष्ठभूमि
- भारत और मलेशिया के बीच रक्षा संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं, जिसमें नियमित रूप से उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान और सैन्य अभ्यास शामिल हैं।
- ‘अभ्यास समुद्र लक्ष्मण’ दोनों नौसेनाओं के बीच द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास की एक श्रृंखला है, जिसका उद्देश्य अंतर-संचालनीयता (inter-operability) और परिचालन समन्वय को बढ़ाना है।
- यह अभ्यास भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति (Act East Policy) के अनुरूप है, जो दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ संबंधों को गहरा करने पर केंद्रित है।
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती उपस्थिति के मद्देनजर, क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए समान विचारधारा वाले देशों के बीच समुद्री सहयोग महत्वपूर्ण हो गया है।
- हाल ही में 1 जुलाई 2026 को आयोजित 12वीं भारत-मलेशिया उप-समिति बैठक ने द्विपक्षीय समन्वय को आगे बढ़ाया है, जिसकी परिणति इस अभ्यास में हुई।
- आईएनएस मैसूर भारतीय नौसेना का एक महत्वपूर्ण युद्धपोत है, जो विभिन्न अभियानों में भारत की नौसैनिक शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है।
अभ्यास समुद्र लक्ष्मण क्या है?
- अभ्यास समुद्र लक्ष्मण भारत और मलेशिया की नौसेनाओं के बीच आयोजित एक द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास है।
- इसका मुख्य उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता, परिचालन समन्वय और समुद्री सहयोग को बढ़ावा देना है।
- यह अभ्यास बंदरगाह चरण और समुद्री परिचालन चरण दोनों को समाहित करता है, जिसमें पेशेवर आदान-प्रदान, बातचीत और समन्वित समुद्री अभ्यास शामिल होते हैं।
- अभ्यास में भाग लेने वाले जहाज एक साथ प्रभावी ढंग से काम करने की अपनी क्षमता को मजबूत करते हैं, जिससे समुद्री सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलती है।
- यह अभ्यास भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा प्रतिबद्धताओं और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- यह दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को गहरा करने और आपसी समझ को बढ़ावा देने में सहायक है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| अभ्यास का चौथा संस्करण | यह अभ्यास भारत और मलेशिया के बीच बढ़ते नौसैनिक सहयोग तथा समुद्री साझेदारी की निरंतरता को दर्शाता है। |
| प्रतिभागी नौसेनाएँ | भारतीय नौसेना और रॉयल मलेशियाई नौसेना के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करता है। |
| प्रतिभागी जहाज | भारतीय नौसेना का आईएनएस मैसूर, रॉयल मलेशियाई नौसेना के केडी लेकिर और केडी गगाह समुदेरा के साथ अभ्यास में शामिल हुआ। |
| स्थान | मलेशिया के लुमुट में आयोजित, जो क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा में मलेशिया की भूमिका को रेखांकित करता है। |
| चरण | बंदरगाह चरण (पेशेवर आदान-प्रदान) और समुद्री परिचालन चरण (समन्वित समुद्री अभ्यास) शामिल थे। |
| मुख्य उद्देश्य | अंतर-संचालनीयता (Inter-operability) और परिचालन समन्वय को बढ़ावा देना, तथा एक साथ प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता को मजबूत करना। |
महत्व
सामरिक महत्व
- यह अभ्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति (Act East Policy) और समुद्री सुरक्षा हितों को मजबूत करता है।
- यह दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ भारत के रक्षा संबंधों को गहरा करता है, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
- समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने और समुद्री आतंकवाद जैसी साझा चुनौतियों का सामना करने के लिए दोनों नौसेनाओं की क्षमता बढ़ाता है।
रक्षा सहयोग
- दोनों नौसेनाओं के बीच परिचालन समझ और पेशेवर जुड़ाव में वृद्धि करता है, जिससे भविष्य के संयुक्त अभियानों की नींव मजबूत होती है।
- यह अभ्यास सैन्य कूटनीति का एक महत्वपूर्ण साधन है, जो मित्र देशों के साथ विश्वास और सहयोग का निर्माण करता है।
- तकनीकी विशेषज्ञता और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को सुगम बनाता है, जिससे दोनों नौसेनाओं की दक्षता में सुधार होता है।
भू-राजनीतिक महत्व
- यह भारत-मलेशिया समुद्री साझेदारी के विस्तार में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाता है।
- यह क्षेत्र में चीन के बढ़ते समुद्री प्रभाव का मुकाबला करने के लिए समान विचारधारा वाले देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है।
- अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों और व्यवस्था को बनाए रखने में भारत की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।
चुनौतियाँ
1. क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियाँ
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और शक्ति संतुलन में बदलाव, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता पर दबाव बढ़ रहा है।
- समुद्री डकैती, अवैध, असूचित और अनियमित (IUU) मछली पकड़ने, तथा समुद्री प्रदूषण जैसी गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियाँ।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, सुरक्षा
2. अंतर-संचालनीयता संबंधी बाधाएँ
- विभिन्न नौसेनाओं के बीच उपकरणों, संचार प्रणालियों और प्रक्रियाओं में भिन्नता, जो प्रभावी समन्वय में बाधा डाल सकती है।
- संयुक्त अभियानों के लिए मानकीकृत प्रक्रियाओं और प्रोटोकॉल की कमी, जिससे प्रतिक्रिया समय और दक्षता प्रभावित हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: सुरक्षा, रक्षा प्रौद्योगिकी
3. संसाधन और क्षमता संबंधी सीमाएँ
- छोटे और मध्यम आकार के देशों के लिए अपनी नौसैनिक क्षमताओं को आधुनिक बनाने और बनाए रखने के लिए पर्याप्त संसाधनों की कमी।
- प्रशिक्षित कर्मियों और उन्नत प्रौद्योगिकी तक पहुँच की सीमाएँ, जो जटिल समुद्री अभियानों में भागीदारी को प्रभावित कर सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: रक्षा क्षमता, विकास
4. जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
- समुद्र के बढ़ते स्तर और चरम मौसमी घटनाएँ तटीय सुरक्षा और नौसैनिक ठिकानों के लिए खतरा पैदा करती हैं।
- समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले प्रभाव, जो समुद्री संसाधनों और सुरक्षा को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण, आपदा प्रबंधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| हिंद-प्रशांत में शक्ति प्रतिस्पर्धा | क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा पर संभावित नकारात्मक प्रभाव। |
| गैर-राज्य अभिकर्ताओं से खतरा | समुद्री आतंकवाद और डकैती से व्यापार मार्गों और ऊर्जा सुरक्षा को खतरा। |
| तकनीकी एकीकरण का अभाव | विभिन्न नौसेनाओं के बीच प्रभावी समन्वय और सूचना साझाकरण में बाधा। |
| पर्यावरण क्षरण | समुद्री संसाधनों और तटीय समुदायों के लिए दीर्घकालिक चुनौतियाँ। |
| अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन | कुछ देशों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों की अनदेखी, जिससे विवादों का जन्म होता है। |
आगे की राह
- नियमित और अधिक जटिल संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों का आयोजन करना ताकि अंतर-संचालनीयता और परिचालन दक्षता को और बढ़ाया जा सके।
- समुद्री डोमेन जागरूकता (Maritime Domain Awareness) को बढ़ाने के लिए खुफिया जानकारी और निगरानी डेटा के आदान-प्रदान को मजबूत करना।
- रक्षा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं के माध्यम से रक्षा औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देना।
- आपदा राहत और मानवीय सहायता (HADR) अभियानों में सहयोग का विस्तार करना, जिससे क्षेत्रीय प्रतिक्रिया क्षमताओं में सुधार हो।
- समुद्री सुरक्षा से संबंधित बहुपक्षीय मंचों में सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करना ताकि क्षेत्रीय चुनौतियों का सामूहिक रूप से समाधान किया जा सके।
- समुद्री पर्यावरण संरक्षण और सतत समुद्री संसाधनों के प्रबंधन के लिए संयुक्त पहल शुरू करना।
- दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय रक्षा संवादों और उप-समिति बैठकों को नियमित रूप से आयोजित करना ताकि रणनीतिक साझेदारी को मजबूत किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
अभ्यास समुद्र लक्ष्मण · भारत-मलेशिया नौसैनिक सहयोग · हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा · अंतर-संचालनीयता · ऑपरेशनल समन्वय · समुद्री साझेदारी · रक्षा कूटनीति · क्षेत्रीय स्थिरता · भारतीय नौसेना · रॉयल मलेशियाई नौसेना
अवधारणा प्रवाह
भारत-मलेशिया द्विपक्षीय संबंध मजबूत हुए। → रक्षा सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की गई। → अभ्यास समुद्र लक्ष्मण का आयोजन किया गया। → नौसेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता बढ़ी। → क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा में योगदान मिला। → हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा मिला।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. अभ्यास समुद्र लक्ष्मण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह अभ्यास भारत और मलेशिया के बीच आयोजित किया जाता है।
2. इसका उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता और परिचालन समन्वय को बढ़ाना है।
3. INS मैसूर ने इसके चौथे संस्करण में भाग लिया।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि अभ्यास समुद्र लक्ष्मण भारत और रॉयल मलेशियाई नौसेना के बीच एक द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास है। कथन 2 सही है क्योंकि अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच पेशेवर आदान-प्रदान, अंतर-संचालनीयता और परिचालन समन्वय को बढ़ावा देना है। कथन 3 सही है क्योंकि भारतीय नौसेना के जहाज मैसूर ने मलेशिया के लुमुट में आयोजित अभ्यास समुद्र लक्ष्मण के चौथे संस्करण में भाग लिया।
Q2. निम्नलिखित में से कौन सा देश ‘अभ्यास समुद्र लक्ष्मण’ में भारत का भागीदार है?
- सिंगापुर
- थाईलैंड
- मलेशिया
- इंडोनेशिया
उत्तर: मलेशिया — अभ्यास समुद्र लक्ष्मण भारत और मलेशिया के बीच एक द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत-मलेशिया ‘अभ्यास समुद्र लक्ष्मण’ जैसे द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने में कैसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं? चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: अभ्यास समुद्र लक्ष्मण का संक्षिप्त परिचय और भारत-मलेशिया संबंधों में इसका महत्व।
2. समुद्री सुरक्षा में भूमिका:
क. अंतर-संचालनीयता और परिचालन समन्वय बढ़ाना।
ख. समुद्री डकैती, आतंकवाद और अवैध मछली पकड़ने जैसी चुनौतियों का मुकाबला करने में सहयोग।
ग. मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) अभियानों में समन्वय।
3. क्षेत्रीय स्थिरता में भूमिका:
क. हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने में योगदान।
ख. विश्वास निर्माण और राजनयिक संबंधों को मजबूत करना।
ग. साझा समुद्री हितों की रक्षा और नियम-आधारित व्यवस्था का समर्थन।
4. भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और ‘सागर’ (SAGAR) दृष्टिकोण के साथ संबंध।
5. निष्कर्ष: भारत और मलेशिया के बीच बढ़ते नौसैनिक सहयोग का समग्र महत्व और भविष्य की संभावनाएं।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Karnataka PCS (KPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: आईएनएस मैसूर द्वारा हाल ही में आयोजित ‘समुद्र लक्ष्मण’ अभ्यास के चौथे संस्करण में भाग लेने का मुख्य उद्देश्य क्या था?
- हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना
- मलेशिया में पर्यटन को बढ़ावा देना
- भारतीय नौसेना के जहाजों का तकनीकी उन्नयन
- मलेशिया के साथ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करना
उत्तर: हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना — आईएनएस मैसूर ने ‘समुद्र लक्ष्मण’ अभ्यास के माध्यम से हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा दिया।
Mains: विश्लेषण कीजिए कि ‘समुद्र लक्ष्मण’ अभ्यास जैसे बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास किस प्रकार कर्नाटक राज्य के लिए रणनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
- Kerala’s EcoSens Scholarships Empower 46,000 Students in Waste Management - September 14, 2026
- यूपीएससी तैयारी: गुजरात में गोडावण संरक्षण के लिए नया केंद्र, जानें क्या हुआ - September 14, 2026
- Union Minister launches GIB Soft Release Centre in Kutch, reviews conservation efforts - September 14, 2026

No Comments