एमएसएमई उत्पादकता बढ़ाने के लिए सरकार का 10,371 करोड़ का इंडियाएआई मिशन

एमएसएमई उत्पादकता बढ़ाने के लिए सरकार का 10,371 करोड़ का इंडियाएआई मिशन — AI & Digital Adoption for MSMEs

एमएसएमई उत्पादकता बढ़ाने के लिए सरकार का 10,371 करोड़ का इंडियाएआई मिशन

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
  • Prelims: इंडियाएआई मिशन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), नीति आयोग का आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क (OOMF)
  • Essay: भारत के आर्थिक विकास में डिजिटल परिवर्तन और समावेशी प्रौद्योगिकी की भूमिका, कृत्रिम बुद्धिमत्ता: अवसर, चुनौतियाँ और सामाजिक-आर्थिक प्रभाव

त्वरित पुनरावृत्ति: इंडियाएआई मिशन भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समावेशी विकास और MSME सहित सभी क्षेत्रों में इसके व्यापक अपनाने को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है, जिसका उद्देश्य उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

भारत सरकार लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल प्रौद्योगिकियों को अपनाने को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित कर रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा ₹10,371.92 करोड़ के परिव्यय के साथ कार्यान्वित किया जा रहा इंडियाएआई मिशन, इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य समाज के सभी वर्गों में AI के लाभों का लोकतंत्रीकरण करना है। यह जानकारी केंद्रीय लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री द्वारा लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर के रूप में दी गई।

पृष्ठभूमि

  • भारत सरकार MSME क्षेत्र को देश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ मानती है, जो रोजगार सृजन और आर्थिक संवृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रहने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए MSME के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाना आवश्यक है।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल प्रौद्योगिकियां MSME को लागत कम करने, दक्षता बढ़ाने, नए उत्पाद विकसित करने और बाजारों तक बेहतर पहुंच बनाने में मदद कर सकती हैं।
  • सरकार ने MSME के डिजिटल विकास का आकलन करने के लिए अनुसंधान अध्ययनों और नीति आयोग के आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क (OOMF) जैसे तंत्र स्थापित किए हैं।
  • इंडियाएआई मिशन को 7 मार्च, 2024 को ₹10,371.92 करोड़ के परिव्यय के साथ स्वीकृति मिली, जिसका उद्देश्य AI नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है।
  • यह मिशन MSME सहित समाज के सभी वर्गों में AI के लाभों को सुलभ बनाने पर केंद्रित है, ताकि समावेशी विकास सुनिश्चित किया जा सके।

इंडियाएआई मिशन क्या है?

  • इंडियाएआई मिशन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा कार्यान्वित एक महत्वाकांक्षी पहल है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना और समाज के सभी वर्गों में AI के लाभों का लोकतंत्रीकरण करना है।
  • मिशन का लक्ष्य सामाजिक रूप से प्रभावशाली, जिम्मेदार और समावेशी AI विकास सुनिश्चित करना है, जिसमें सभी क्षेत्रों में AI को अपनाने को सुगम बनाना शामिल है।
  • यह मिशन ₹10,371.92 करोड़ के कुल परिव्यय के साथ 7 मार्च, 2024 को स्वीकृत किया गया था।
  • मिशन में सात प्रमुख स्तंभ शामिल हैं: इंडियाएआई कंप्यूट क्षमता, इंडियाएआई नवाचार केंद्र, इंडियाएआई डेटासेट प्लेटफॉर्म, इंडियाएआई अनुप्रयोग विकास पहल, इंडियाएआई भविष्य कौशल, इंडियाएआई स्टार्टअप वित्तपोषण और सुरक्षित एवं विश्वसनीय AI।
  • यह MSME सहित विभिन्न क्षेत्रों की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए AI प्रौद्योगिकियों को अपनाने को बढ़ावा देता है।
  • मिशन का उद्देश्य भारत को AI के क्षेत्र में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करना और इसके आर्थिक एवं सामाजिक लाभों को अधिकतम करना है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
इंडियाएआई मिशन ₹10,371.92 करोड़ के परिव्यय के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा कार्यान्वित।
सात स्तंभ कंप्यूट क्षमता, नवाचार केंद्र, डेटासेट प्लेटफॉर्म, अनुप्रयोग विकास, भविष्य कौशल, स्टार्टअप वित्तपोषण और सुरक्षित एआई शामिल हैं।
समावेशी विकास एआई के लाभों का लोकतंत्रीकरण कर समाज के सभी वर्गों, विशेषकर MSME में उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना।
मूल्यांकन तंत्र उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और नीति आयोग के आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क (OOMF) के माध्यम से MSME में डिजिटल अपनाने का आकलन।
MSME पर ध्यान लघु एवं मध्यम उद्यमों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल प्रौद्योगिकियों को अपनाने को बढ़ावा देना।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • MSME की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि से आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलेगा।
  • डिजिटल प्रौद्योगिकियों को अपनाने से MSME वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Global Value Chains) में बेहतर ढंग से एकीकृत हो सकेंगे।
  • एआई-आधारित समाधान लागत दक्षता में सुधार कर सकते हैं और नए व्यावसायिक मॉडल को जन्म दे सकते हैं।

सामाजिक महत्व

  • एआई के लाभों का लोकतंत्रीकरण (Democratization) कर समाज के सभी वर्गों तक पहुँच सुनिश्चित करना।
  • नवीन कौशल विकास से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और कार्यबल की गुणवत्ता में सुधार होगा।
  • समावेशी विकास सुनिश्चित करना, जिससे छोटे व्यवसायों को भी तकनीकी प्रगति का लाभ मिल सके।

तकनीकी महत्व

  • भारत को एआई नवाचार और विकास के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायता।
  • एआई पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को मजबूत करना, जिसमें अनुसंधान, विकास और अनुप्रयोग शामिल हैं।
  • सुरक्षित और विश्वसनीय एआई के विकास पर जोर, जिससे नैतिक और जिम्मेदार एआई उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।

चुनौतियाँ

1. डिजिटल साक्षरता और कौशल की कमी

  • MSME क्षेत्र में कई उद्यमियों और कर्मचारियों के पास एआई और डिजिटल प्रौद्योगिकियों को समझने और उपयोग करने के लिए आवश्यक कौशल का अभाव है।
  • प्रशिक्षण कार्यक्रमों की कमी और मौजूदा कार्यबल को पुनः कौशल (Reskilling) प्रदान करने की चुनौती।

2. उच्च प्रारंभिक निवेश लागत

  • एआई समाधानों और डिजिटल अवसंरचना (Infrastructure) को अपनाने के लिए MSME को महत्वपूर्ण प्रारंभिक निवेश की आवश्यकता होती है।
  • छोटे व्यवसायों के लिए वित्तीय संसाधनों तक पहुँच एक बड़ी बाधा हो सकती है।

3. डेटा गोपनीयता और सुरक्षा चिंताएँ

  • डिजिटल प्रौद्योगिकियों को अपनाने से डेटा उल्लंघनों (Data Breaches) और साइबर हमलों का जोखिम बढ़ जाता है।
  • MSME के पास अक्सर मजबूत साइबर सुरक्षा उपायों को लागू करने के लिए विशेषज्ञता और संसाधन नहीं होते हैं।

4. तकनीकी एकीकरण और अनुकूलन

  • मौजूदा व्यावसायिक प्रक्रियाओं और प्रणालियों में नई एआई और डिजिटल प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करना जटिल हो सकता है।
  • प्रत्येक MSME की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप समाधानों को अनुकूलित (Customise) करने की चुनौती।

5. जागरूकता और विश्वास की कमी

  • कई MSME मालिक एआई और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के संभावित लाभों से अनभिज्ञ हैं या उन्हें अपनाने में संकोच करते हैं।
  • नई तकनीकों की प्रभावशीलता और विश्वसनीयता पर विश्वास की कमी एक बाधा हो सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
डिजिटल साक्षरता MSME कर्मचारियों में एआई और डिजिटल उपकरणों के उपयोग के लिए आवश्यक कौशल की कमी।
वित्तीय बाधाएँ एआई समाधानों और अवसंरचना में निवेश के लिए MSME के पास पर्याप्त पूंजी का अभाव।
डेटा सुरक्षा डिजिटल अपनाने से जुड़े साइबर सुरक्षा जोखिम और डेटा गोपनीयता संबंधी चिंताएँ।
तकनीकी एकीकरण मौजूदा व्यावसायिक प्रक्रियाओं में नई प्रौद्योगिकियों को सहजता से एकीकृत करने में कठिनाई।
जागरूकता का अभाव MSME मालिकों के बीच एआई के लाभों और अनुप्रयोगों के बारे में जानकारी की कमी।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • इंडियाएआई मिशन

आगे की राह

  • MSME के लिए लक्षित कौशल विकास और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करना, जिसमें एआई और डिजिटल साक्षरता पर ध्यान केंद्रित हो।
  • एआई और डिजिटल प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए MSME को वित्तीय सहायता, सब्सिडी और आसान ऋण प्रदान करना।
  • MSME के लिए अनुकूलित, लागत प्रभावी और उपयोग में आसान एआई समाधान विकसित करने हेतु अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना।
  • साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम और किफायती सुरक्षा समाधान प्रदान कर MSME के डेटा को सुरक्षित करना।
  • एआई और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के लाभों के बारे में MSME मालिकों और कर्मचारियों के बीच जागरूकता बढ़ाना।
  • नीति आयोग के OOMF जैसे तंत्रों का उपयोग करके डिजिटल अपनाने की प्रगति का नियमित मूल्यांकन और नीतिगत सुधार करना।
  • उद्योग, शिक्षाविदों और सरकार के बीच सहयोग को बढ़ावा देना ताकि MSME के लिए एक मजबूत एआई पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हो सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

इंडियाएआई मिशन · सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) · कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) · डिजिटल प्रौद्योगिकी · उत्पादकता वृद्धि · नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र · समावेशी विकास · नीति आयोग · आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क · आत्मनिर्भर भारत

अवधारणा प्रवाह

सरकार द्वारा इंडियाएआई मिशन का शुभारंभ  →  MSME में एआई और डिजिटल प्रौद्योगिकियों को अपनाने हेतु प्रोत्साहन  →  MSME की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि  →  आर्थिक संवृद्धि और समावेशी विकास को बढ़ावा  →  भारत को वैश्विक एआई केंद्र के रूप में स्थापित करना

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. इंडियाएआई मिशन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इंडियाएआई मिशन को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
2. इस मिशन का कुल परिव्यय ₹10,371.92 करोड़ है।
3. इसका उद्देश्य केवल बड़े उद्योगों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को बढ़ावा देना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि इंडियाएआई मिशन को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है। कथन 2 भी सही है क्योंकि मिशन का कुल परिव्यय ₹10,371.92 करोड़ है। कथन 3 गलत है क्योंकि मिशन का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों, जिसमें MSME भी शामिल हैं, में AI के लाभों का लोकतंत्रीकरण करना है, न कि केवल बड़े उद्योगों में।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा इंडियाएआई मिशन का एक स्तंभ नहीं है?

  1. इंडियाएआई कंप्यूट क्षमता
  2. इंडियाएआई नवाचार केंद्र
  3. इंडियाएआई कृषि विकास
  4. इंडियाएआई स्टार्टअप वित्तपोषण

उत्तर: इंडियाएआई कृषि विकास — इंडियाएआई मिशन के सात स्तंभों में इंडियाएआई कंप्यूट क्षमता, इंडियाएआई नवाचार केंद्र, इंडियाएआई डेटासेट प्लेटफॉर्म, इंडियाएआई अनुप्रयोग विकास पहल, इंडियाएआई भविष्य कौशल, इंडियाएआई स्टार्टअप वित्तपोषण और सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई शामिल हैं। ‘इंडियाएआई कृषि विकास’ इसका एक स्तंभ नहीं है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल प्रौद्योगिकियों की भूमिका का परीक्षण कीजिए। इंडियाएआई मिशन MSME क्षेत्र के लिए समावेशी AI अपनाने को कैसे बढ़ावा दे रहा है? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: MSME क्षेत्र का महत्व और वर्तमान संदर्भ में AI व डिजिटल प्रौद्योगिकियों की प्रासंगिकता।
2. AI और डिजिटल प्रौद्योगिकियों की भूमिका: MSME की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में AI व डिजिटल प्रौद्योगिकियों के विशिष्ट लाभों का विस्तार से वर्णन करें। इसमें लागत दक्षता, बाजार पहुंच, नवाचार, प्रक्रिया स्वचालन, डेटा विश्लेषण और निर्णय लेने में सुधार जैसे बिंदु शामिल होने चाहिए।
3. इंडियाएआई मिशन: मिशन के उद्देश्यों और सात स्तंभों का उल्लेख करें। विशेष रूप से यह बताएं कि मिशन MSME सहित समाज के सभी वर्गों में AI के लाभों के लोकतंत्रीकरण पर कैसे केंद्रित है।
4. समावेशी AI अपनाने को बढ़ावा देने के उपाय: मिशन के तहत MSME के लिए AI अपनाने को सुगम बनाने हेतु सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डालें, जैसे कि कंप्यूट क्षमता, डेटासेट प्लेटफॉर्म, कौशल विकास और स्टार्टअप वित्तपोषण।
5. मूल्यांकन और निगरानी: नीति आयोग के आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क (OOMF) और अनुसंधान अध्ययनों के माध्यम से MSME में डिजिटल अपनाने के आकलन की प्रक्रिया का उल्लेख करें।
6. चुनौतियाँ और आगे की राह: AI अपनाने में MSME के सामने आने वाली संभावित चुनौतियों (जैसे वित्तीय बाधाएँ, कौशल की कमी, जागरूकता का अभाव) और उन्हें दूर करने के लिए सुझावों पर संक्षिप्त चर्चा करें।
7. निष्कर्ष: भारत के आर्थिक विकास और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में MSME के डिजिटल परिवर्तन के महत्व पर जोर दें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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