14 Sep केरल की इकोसेंस छात्रवृत्तियां: 46,000 छात्रों को अपशिष्ट प्रबंधन में सशक्त बना रही हैं
✎ केरलम की इकोसेंस छात्रवृत्ति पहल स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत छात्रों को अपशिष्ट प्रबंधन में सक्रिय रूप से शामिल कर रही है, जिससे उनमें पर्यावरण-अनुकूल कौशल और सतत आदतें विकसित हो रही हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन | GS Paper III — पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन
- Prelims: इकोसेंस छात्रवृत्ति, स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0, अपशिष्ट प्रबंधन, स्थानीय स्वशासन विभाग, केरल सामान्य शिक्षा विभाग, छात्र ग्रीन ब्रिगेड
- Essay: युवा भागीदारी के माध्यम से सतत विकास लक्ष्य प्राप्त करना, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण में सामुदायिक सहभागिता की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: केरलम की इकोसेंस छात्रवृत्ति पहल स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत छात्रों को अपशिष्ट प्रबंधन में सक्रिय रूप से शामिल कर रही है, जिससे उनमें पर्यावरण-अनुकूल कौशल और सतत आदतें विकसित हो रही हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केरलम की ‘इकोसेंस’ पहल, स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 (Swachh Bharat Mission-Urban 2.0) के तहत, छात्रों को अपशिष्ट प्रबंधन (Waste Management) में सक्रिय रूप से शामिल कर रही है। इस कार्यक्रम के तहत लगभग 46,000 छात्रवृत्तियां प्रदान की गई हैं, जिसका उद्देश्य युवा नागरिकों में पर्यावरण-अनुकूल कौशल और टिकाऊ आदतों को बढ़ावा देना है। यह पहल कक्षाओं से लेकर समुदायों तक, अपशिष्ट प्रबंधन को एक जन आंदोलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पृष्ठभूमि
- स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 का लक्ष्य केवल बुनियादी ढांचे के विकास तक सीमित न रहकर, लोगों की भागीदारी और व्यवहार परिवर्तन पर केंद्रित नई पीढ़ी की पहलों को बढ़ावा देना है।
- यह मिशन बच्चों और युवाओं को व्यावहारिक अपशिष्ट प्रबंधन गतिविधियों में शामिल करके अपशिष्ट पृथक्करण (Waste Segregation), पुन: उपयोग (Reuse), संसाधन संरक्षण (Resource Conservation) और सतत जीवन (Sustainable Living) को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर देता है।
- केरलम का स्टूडेंट ग्रीन ब्रिगेड स्कॉलरशिप – इकोसेंस इसी दृष्टिकोण का एक सशक्त उदाहरण है, जो विद्यालयों को अपशिष्ट प्रबंधन सीखने और अभ्यास करने के केंद्रों में बदल रहा है।
- यह पहल केरल सरकार के स्थानीय स्वशासन विभाग (Local Self-Government Department) के नेतृत्व में और सामान्य शिक्षा विभाग (General Education Department) के सहयोग से शुरू की गई है।
- इकोसेंस कार्यक्रम का उद्देश्य अपशिष्ट प्रबंधन में सक्रिय भागीदारी के लिए 50,000 छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान करना और उनमें हरित कौशल (Green Skills) तथा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देना है।
इकोसेंस छात्रवृत्ति कार्यक्रम क्या है?
- इकोसेंस केरलम सरकार की एक छात्र-केंद्रित पहल है जिसका उद्देश्य छात्रों को अपशिष्ट प्रबंधन पद्धतियों में सक्रिय रूप से शामिल करना है।
- यह कार्यक्रम वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देता है, छात्रों को स्थानीय अपशिष्ट संबंधी चुनौतियों के लिए नवीन समाधान विकसित करने और टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों की व्यावहारिक समझ विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
- प्रत्येक ग्राम पंचायत से 50, प्रत्येक नगरपालिका से 75 और प्रत्येक निगम से 100 छात्रों को छात्रवृत्ति के लिए चुना जाता है।
- इस वर्ष, उच्च प्राथमिक (कक्षा 6 और 7), हाई स्कूल (कक्षा 8 और 9) तथा उच्च माध्यमिक और व्यावसायिक उच्च माध्यमिक श्रेणियों के प्रथम वर्ष के छात्रों को शामिल किया गया है।
- प्रत्येक चयनित छात्र को 1,500 रुपये की छात्रवृत्ति के साथ-साथ एक मान्यता प्रमाण पत्र भी दिया जाता है।
- छात्रों को घरों में अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों, अपशिष्ट को कम करने के तरीकों, ग्रीन प्रोटोकॉल (Green Protocol) के पालन और ग्रीन स्कूल व क्लीन स्कूल पहलों के सिद्धांतों का पता लगाने का अवसर मिलता है।
- कार्यक्रम में खाद बनाने और बेकार पड़ी सामग्रियों के पुन: उपयोग जैसी व्यावहारिक गतिविधियां शामिल हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण | युवा नागरिकों में अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति जागरूकता और सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देना। |
| व्यावहारिक अनुभव | कक्षा चर्चाओं से परे जाकर छात्रों को अपशिष्ट पृथक्करण, खाद बनाने और पुन: उपयोग जैसी गतिविधियों में शामिल करना। |
| हरित कौशल विकास | पर्यावरण-अनुकूल कौशल और टिकाऊ आदतों को विकसित करना, जो भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। |
| सामुदायिक जुड़ाव | छात्रों के माध्यम से परिवारों और समुदायों में अपशिष्ट प्रबंधन प्रथाओं को बढ़ावा देना। |
| वित्तीय प्रोत्साहन और मान्यता | छात्रवृत्ति (1,500 रुपये) और प्रमाण पत्र के माध्यम से छात्रों के योगदान को प्रोत्साहित करना। |
| स्थानीय स्वशासन के साथ सहयोग | स्थानीय निकायों और शिक्षा विभाग के समन्वय से कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करना। |
महत्व
पर्यावरण संबंधी महत्व
- यह पहल अपशिष्ट पृथक्करण (Waste Segregation), पुन: उपयोग (Reuse) और संसाधन संरक्षण (Resource Conservation) को बढ़ावा देकर वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन पद्धतियों को सुदृढ़ करती है।
- यह छात्रों को स्थानीय अपशिष्ट संबंधी चुनौतियों के लिए नवीन समाधान विकसित करने और अपशिष्ट को कम करने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण का निर्माण होता है।
सामाजिक महत्व
- यह युवा नागरिकों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना और टिकाऊ जीवन शैली (Sustainable Lifestyle) को बढ़ावा देती है, जिससे भविष्य के लिए जागरूक नागरिक तैयार होते हैं।
- छात्रों की भागीदारी के माध्यम से, यह परिवारों और व्यापक समुदाय में अपशिष्ट प्रबंधन प्रथाओं के बारे में जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन लाती है।
शैक्षिक महत्व
- यह कार्यक्रम छात्रों को अपशिष्ट प्रबंधन के सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान करता है, जिससे उनकी सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और अनुभवात्मक बनती है।
- यह विद्यालयों को ऐसे स्थानों में बदलता है जहाँ छात्र न केवल अपशिष्ट प्रबंधन के बारे में सीखते हैं, बल्कि सक्रिय रूप से इसका अभ्यास भी करते हैं, जिससे हरित कौशल (Green Skills) का विकास होता है।
शासन संबंधी महत्व
- यह स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 (Swachh Bharat Mission-Urban 2.0) के ‘लोगों, भागीदारी और व्यवहार परिवर्तन’ पर केंद्रित दृष्टिकोण का एक सफल उदाहरण है।
- स्थानीय स्वशासन विभाग और सामान्य शिक्षा विभाग के बीच सहयोग एक प्रभावी बहु-हितधारक मॉडल को दर्शाता है।
चुनौतियाँ
1. व्यवहार परिवर्तन की निरंतरता
- छात्रों और समुदायों में टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन आदतों को दीर्घकालिक रूप से बनाए रखना एक चुनौती है।
- जागरूकता को स्थायी व्यवहार में बदलने के लिए निरंतर प्रोत्साहन और अनुवर्ती कार्रवाई की आवश्यकता होती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
2. बुनियादी ढांचे का अभाव
- वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचे (जैसे सामग्री संग्रहण सुविधाएँ (MCF) और संसाधन पुनर्प्राप्ति सुविधाएँ (RRF)) की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधाओं की कमी एक बड़ी बाधा हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा, शहरीकरण
3. निगरानी और मूल्यांकन
- कार्यक्रम की प्रभावशीलता और छात्रों द्वारा अपनाई गई प्रथाओं की निगरानी और मूल्यांकन के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित करना।
- छात्रवृत्ति के उपयोग और उसके वास्तविक प्रभाव का आकलन करना।
यूपीएससी लिंक: विकास प्रक्रियाएँ, गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका
4. वित्तीय स्थिरता
- छात्रवृत्ति कार्यक्रम और संबंधित गतिविधियों के लिए दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना।
- सरकारी बजट पर निर्भरता के अलावा अन्य स्रोतों से धन जुटाने की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: सरकारी बजट, संसाधन जुटाना
5. पाठ्यक्रम में एकीकरण
- अपशिष्ट प्रबंधन शिक्षा को औपचारिक स्कूल पाठ्यक्रम में स्थायी रूप से एकीकृत करना।
- शिक्षकों को इस विषय पर प्रशिक्षित करना और उन्हें आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन, शिक्षा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| व्यवहार परिवर्तन का स्थायित्व | जागरूकता को स्थायी आदतों में बदलने में निरंतरता की कमी। |
| अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना | वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रसंस्करण के लिए पर्याप्त सुविधाओं की कमी। |
| निगरानी और प्रभाव आकलन | कार्यक्रम की प्रभावशीलता और वास्तविक जमीनी परिवर्तन का सटीक मापन। |
| वित्तीय संसाधनों की निरंतरता | कार्यक्रम को दीर्घकालिक रूप से बनाए रखने के लिए स्थिर धन की आवश्यकता। |
| शैक्षिक पाठ्यक्रम में एकीकरण | अपशिष्ट प्रबंधन शिक्षा को औपचारिक शिक्षा प्रणाली का स्थायी हिस्सा बनाना। |
| जनभागीदारी का विस्तार | छात्रों से परे व्यापक समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 (Swachh Bharat Mission-Urban 2.0)
- केरलम का स्टूडेंट ग्रीन ब्रिगेड स्कॉलरशिप – इकोसेंस (Keralam’s Student Green Brigade Scholarship – EcoSense)
आगे की राह
- अपशिष्ट प्रबंधन शिक्षा को स्कूल पाठ्यक्रम का एक अभिन्न अंग बनाना, जिससे यह केवल एक गतिविधि न होकर स्थायी ज्ञान का हिस्सा बने।
- छात्रों द्वारा विकसित हरित कौशलों को मान्यता देने और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए एक राष्ट्रीय प्रमाणन प्रणाली विकसित करना।
- स्थानीय स्वशासन निकायों को अपशिष्ट प्रबंधन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे (जैसे सामग्री संग्रहण सुविधाएँ और संसाधन पुनर्प्राप्ति सुविधाएँ) के विकास में सहायता प्रदान करना।
- छात्रों को नवाचार और उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित करना, ताकि वे अपशिष्ट से मूल्य सृजन (Waste to Wealth) के मॉडल विकसित कर सकें।
- कार्यक्रम की प्रभावशीलता का नियमित और कठोर मूल्यांकन करना, जिसमें व्यवहार परिवर्तन और पर्यावरणीय प्रभाव शामिल हों।
- छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और स्थानीय समुदायों सहित सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।
- अपशिष्ट प्रबंधन में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने और दोहराने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच एक मंच स्थापित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 · अपशिष्ट प्रबंधन · व्यवहार परिवर्तन · स्थानीय स्वशासन · पर्यावरण-अनुकूल कौशल · टिकाऊ जीवनशैली · छात्रवृत्ति कार्यक्रम · सामुदायिक भागीदारी
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243W’, ‘note’: ‘नगरपालिकाओं की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A(g)’, ‘note’: ‘पर्यावरण की रक्षा और सुधार का मौलिक कर्तव्य’}
अवधारणा प्रवाह
स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 का ‘व्यवहार परिवर्तन’ पर जोर → केरलम द्वारा ‘इकोसेंस छात्रवृत्ति’ पहल की शुरुआत → 46,000 छात्रों को अपशिष्ट प्रबंधन में प्रशिक्षण और छात्रवृत्ति → छात्रों द्वारा घरों और स्कूलों में व्यावहारिक अपशिष्ट प्रबंधन → समुदायों में अपशिष्ट पृथक्करण और टिकाऊ आदतों का प्रसार → कचरा मुक्त शहरों की दिशा में प्रगति और पर्यावरणीय सुधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 (SBM-U 2.0) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसका मुख्य ध्यान बुनियादी ढांचे के विकास और अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों पर है।
2. यह लोगों, भागीदारी और व्यवहार परिवर्तन पर केंद्रित नई पीढ़ी की पहलों को बढ़ावा देता है।
3. केरलम की इकोसेंस छात्रवृत्ति पहल SBM-U 2.0 के उद्देश्यों के अनुरूप है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि SBM-U 2.0 बुनियादी ढांचे से हटकर लोगों, भागीदारी और व्यवहार परिवर्तन पर केंद्रित है। कथन 2 सही है क्योंकि यह SBM-U 2.0 का एक प्रमुख उद्देश्य है। कथन 3 सही है क्योंकि इकोसेंस पहल छात्रों को अपशिष्ट प्रबंधन में शामिल करके SBM-U 2.0 के व्यवहार परिवर्तन के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करती है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से केरलम की इकोसेंस छात्रवृत्ति पहल का/के उद्देश्य है/हैं?
1. छात्रों में हरित कौशल और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देना।
2. वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन पद्धतियों को बढ़ावा देना।
3. छात्रों को स्थानीय अपशिष्ट संबंधी चुनौतियों के लिए नवीन समाधान विकसित करने हेतु प्रोत्साहित करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — इकोसेंस पहल का उद्देश्य छात्रों में हरित कौशल और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देना, वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन पद्धतियों को बढ़ावा देना और छात्रों को स्थानीय अपशिष्ट संबंधी चुनौतियों के लिए नवीन समाधान विकसित करने हेतु प्रोत्साहित करना है। अतः, सभी तीनों कथन सही हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 (SBM-U 2.0) के तहत अपशिष्ट प्रबंधन में व्यवहार परिवर्तन लाने में छात्र-केंद्रित पहलों की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। केरलम की इकोसेंस छात्रवृत्ति पहल के संदर्भ में इसके प्रभाव और चुनौतियों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के लक्ष्यों और अपशिष्ट प्रबंधन में व्यवहार परिवर्तन के महत्व का संक्षिप्त परिचय।
2. छात्र-केंद्रित पहलों की भूमिका: SBM-U 2.0 के तहत व्यवहार परिवर्तन लाने में छात्र-केंद्रित पहलों की भूमिका पर प्रकाश डालें। इसमें जागरूकता, कौशल विकास, सामुदायिक भागीदारी और टिकाऊ आदतों को बढ़ावा देना शामिल होगा।
3. केरलम की इकोसेंस छात्रवृत्ति पहल: पहल का विस्तृत विवरण दें, जिसमें इसके उद्देश्य, कार्यान्वयन (स्थानीय स्वशासन विभाग और सामान्य शिक्षा विभाग), लक्षित समूह (कक्षा 6 से उच्च माध्यमिक तक), छात्रवृत्ति राशि (1,500 रुपये), और गतिविधियों (अपशिष्ट पृथक्करण, खाद बनाना, पुन: उपयोग, MCF/RRF दौरे) शामिल हों।
4. प्रभाव: इकोसेंस पहल के सकारात्मक प्रभावों का विश्लेषण करें, जैसे कि 46,000 से अधिक छात्रों को सशक्त बनाना, हरित कौशल का विकास, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना, और व्यावहारिक अपशिष्ट प्रबंधन प्रथाओं को बढ़ावा देना।
5. चुनौतियाँ: ऐसी संभावित चुनौतियों पर चर्चा करें जो इन पहलों के व्यापक और दीर्घकालिक प्रभाव को बाधित कर सकती हैं, जैसे कि फंडिंग की निरंतरता, कार्यक्रम का पैमाना, शहरी-ग्रामीण विभाजन, अभिभावकों और समुदाय की भागीदारी का स्तर, और व्यवहार परिवर्तन की मापनीयता।
6. निष्कर्ष: व्यवहार परिवर्तन के लिए छात्र-केंद्रित पहलों के महत्व को दोहराते हुए, आगे के सुधारों और स्थायी प्रभाव के लिए सिफारिशों के साथ निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Kerala PCS (Kerala PSC (KAS)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: केरल सरकार द्वारा शुरू की गई ‘इकोसेंस’ छात्रवृत्ति योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- A. पर्यावरण संरक्षण और अपशिष्ट प्रबंधन में कौशल विकास
- B. उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना
- C. खेलकूद में उत्कृष्टता को बढ़ावा देना
- D. तकनीकी शिक्षा में नवाचार को प्रोत्साहित करना
उत्तर: A. पर्यावरण संरक्षण और अपशिष्ट प्रबंधन में कौशल विकास — इस योजना का उद्देश्य 46,000 से अधिक छात्रों को अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में प्रशिक्षित कर उन्हें सशक्त बनाना है।
Mains: केरल सरकार की ‘इकोसेंस’ छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से अपशिष्ट प्रबंधन में कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए अपनाई गई प्रमुख रणनीतियों का वर्णन करें। इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर भी प्रकाश डालें।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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