09 Aug केरल सीएम पर INL का आरोप: पीएम श्री योजना लागू न करने पर केंद्र का स्पष्टीकरण

✎ पीएम श्री योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप देश भर के स्कूलों को मॉडल स्कूलों के रूप में अपग्रेड करने की एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसके क्रियान्वयन में केंद्र-राज्य समन्वय महत्वपूर्ण है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान: केंद्र एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर तक शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण एवं उसकी चुनौतियाँ। | GS Paper II — शिक्षा, मानव संसाधन से संबंधित विषय।
- Prelims: पीएम श्री योजना, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), समग्र शिक्षा केरल (SSK), केंद्र-राज्य संबंध, संघवाद, शिक्षा समवर्ती सूची
- Essay: भारत में संघीय व्यवस्था की चुनौतियाँ: केंद्र-राज्य संबंधों का बदलता स्वरूप, राष्ट्रीय शिक्षा नीति का क्रियान्वयन: राज्यों की भूमिका और स्वायत्तता
त्वरित पुनरावृत्ति: पीएम श्री योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप देश भर के स्कूलों को मॉडल स्कूलों के रूप में अपग्रेड करने की एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसके क्रियान्वयन में केंद्र-राज्य समन्वय महत्वपूर्ण है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, इंडियन नेशनल लीग (INL) ने केरल के मुख्यमंत्री से पीएम श्री योजना (PM SHRI scheme) के संबंध में सवाल किए हैं। यह तब हुआ जब केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री ने संसद में स्पष्ट किया कि केरल में पीएम श्री योजना लागू नहीं की गई है, बल्कि राज्य ने केवल एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। INL का दावा है कि केंद्र का यह स्पष्टीकरण मुख्यमंत्री के उस बार-बार के दावे का खंडन करता है कि राज्य इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए बाध्य था क्योंकि पिछली सरकार ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे।
पृष्ठभूमि
- पीएम श्री योजना एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसका उद्देश्य देश भर के स्कूलों को उन्नत बनाना है।
- केरल के मुख्यमंत्री ने पहले दावा किया था कि राज्य इस योजना को लागू करने के लिए बाध्य है क्योंकि पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार ने इसके लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे।
- केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि केरल में पीएम श्री योजना लागू नहीं हुई है और राज्य ने केवल समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
- INL ने आरोप लगाया है कि केरल में पीएम श्री योजना के तहत एक भी सरकारी स्कूल शामिल नहीं किया गया है और केवल समग्र शिक्षा केरल (SSK) कार्यक्रम लागू किया गया है, जिसके तहत राज्य को ₹99.27 करोड़ प्राप्त हुए हैं।
- INL का दावा है कि पिछली LDF सरकार ने तमिलनाडु की तरह पीएम श्री योजना पर एक स्पष्ट धर्मनिरपेक्ष रुख अपनाया था और SSK निधियों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए केवल समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे。
- INL ने यह भी आरोप लगाया है कि वर्तमान UDF सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy) को लागू करने का प्रयास कर रही है, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वैचारिक दृष्टिकोण को दर्शाती है।
पीएम श्री योजना क्या है?
- पीएम श्री योजना (PM SHRI – PM Schools for Rising India) एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसे वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित किया गया था।
- इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश भर के 14,500 से अधिक स्कूलों को ‘पीएम श्री स्कूल’ के रूप में अपग्रेड और विकसित करना है।
- इन स्कूलों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy – NEP) 2020 के प्रावधानों के अनुरूप मॉडल स्कूलों के रूप में विकसित किया जाएगा।
- योजना का लक्ष्य छात्रों को समग्र, न्यायसंगत, समावेशी और आनंदमय शिक्षण अनुभव प्रदान करना है, जिससे वे 21वीं सदी के लिए आवश्यक कौशल से लैस हो सकें।
- इन स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, खेल और कला-एकीकृत शिक्षा, आधुनिक बुनियादी ढाँचा और नवीनतम तकनीक जैसी सुविधाएँ होंगी।
- यह योजना केंद्र और राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों तथा स्कूल प्रबंधन समितियों के बीच साझेदारी पर आधारित है।
- शिक्षा समवर्ती सूची (Concurrent List) का विषय है, जिसका अर्थ है कि केंद्र और राज्य दोनों इस पर कानून बना सकते हैं। केंद्र प्रायोजित योजनाओं के क्रियान्वयन में राज्यों की सहमति और भागीदारी महत्वपूर्ण होती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| PM SHRI योजना का उद्देश्य | यह योजना केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित है, जिसका उद्देश्य देश भर में 14,500 से अधिक स्कूलों को अपग्रेड करना है। इन स्कूलों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप ‘आदर्श स्कूलों’ के रूप में विकसित किया जाना है। |
| राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 | NEP 2020 भारत की शिक्षा प्रणाली में परिवर्तनकारी सुधारों का प्रस्ताव करती है, जिसमें पाठ्यक्रम, मूल्यांकन, शिक्षण-शास्त्र और शासन में बदलाव शामिल हैं। PM SHRI योजना NEP के सिद्धांतों को जमीनी स्तर पर लागू करने का एक माध्यम है। |
| केरल का रुख | केरल सरकार ने PM SHRI योजना के संबंध में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन राज्य में इसके पूर्ण कार्यान्वयन पर सवाल उठाए गए हैं। राज्य का दावा है कि MoU पर हस्ताक्षर समग्रा शिक्षा केरल (SSK) के तहत धन प्राप्त करने के लिए आवश्यक था। |
| समग्रा शिक्षा केरल (SSK) | यह केरल में एक एकीकृत शिक्षा योजना है, जो स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। राज्य सरकार का तर्क है कि PM SHRI योजना के MoU पर हस्ताक्षर SSK के लिए केंद्रीय सहायता प्राप्त करने की एक शर्त थी। |
| केंद्र सरकार का स्पष्टीकरण | केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि केरल में PM SHRI योजना लागू नहीं की गई है, और राज्य ने केवल एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह स्पष्टीकरण राज्य सरकार के दावों के विपरीत है कि वह योजना को आगे बढ़ाने के लिए बाध्य थी। |
महत्व
संघवाद और केंद्र-राज्य संबंध
- यह घटना केंद्र और राज्यों के बीच शिक्षा जैसे समवर्ती सूची के विषयों पर नीतिगत कार्यान्वयन में तनाव को उजागर करती है।
- यह दर्शाता है कि कैसे केंद्र प्रायोजित योजनाएं (Centrally Sponsored Schemes) राज्यों के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए कुछ शर्तों को स्वीकार करने का दबाव बना सकती हैं।
- राज्यों द्वारा केंद्रीय योजनाओं को अपनाने या अस्वीकार करने के पीछे राजनीतिक और वैचारिक मतभेद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शिक्षा नीति और कार्यान्वयन
- यह मामला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के कार्यान्वयन में राज्यों की स्वायत्तता और उनकी चिंताओं को दर्शाता है।
- राज्यों द्वारा केंद्रीय नीतियों को ‘एक आकार सभी के लिए उपयुक्त’ (one-size-fits-all) दृष्टिकोण के रूप में देखने की प्रवृत्ति को उजागर करता है, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के साथ संघर्ष होता है।
- शिक्षा क्षेत्र में सुधारों को लागू करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच प्रभावी समन्वय और संवाद की आवश्यकता पर बल देता है।
राजनीतिक प्रभाव
- विपक्षी दल (INL) द्वारा मुख्यमंत्री पर सवाल उठाना राज्य की राजनीति में योजना के राजनीतिकरण को दर्शाता है।
- यह घटना राज्य में सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच वैचारिक विभाजन को उजागर करती है, खासकर शिक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर।
- यह दर्शाता है कि कैसे केंद्रीय योजनाओं का कार्यान्वयन राज्य स्तर पर राजनीतिक बहस और आरोप-प्रत्यारोप का विषय बन सकता है।
चुनौतियाँ
1. केंद्र-राज्य समन्वय का अभाव
- केंद्रीय योजनाओं के कार्यान्वयन में राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं और चिंताओं को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं किया जाता है।
- नीति निर्माण और कार्यान्वयन के बीच संवाद और परामर्श की कमी, जिससे राज्यों में प्रतिरोध उत्पन्न होता है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध
2. वित्तीय निर्भरता और शर्तों का बोझ
- राज्यों को केंद्रीय योजनाओं के तहत धन प्राप्त करने के लिए अक्सर ऐसी शर्तों को स्वीकार करना पड़ता है जो उनकी अपनी प्राथमिकताओं के अनुरूप नहीं होती हैं।
- यह राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता को कम करता है और उन्हें केंद्रीय निर्देशों का पालन करने के लिए मजबूर करता है।
यूपीएससी लिंक: राजकोषीय संघवाद, वित्त आयोग
3. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का कार्यान्वयन
- NEP 2020 के सिद्धांतों को सभी राज्यों में समान रूप से लागू करने में चुनौतियाँ, खासकर उन राज्यों में जिनकी अपनी शिक्षा नीतियाँ और प्राथमिकताएँ हैं।
- NEP के कुछ पहलुओं पर राज्यों के वैचारिक मतभेद, जिससे कार्यान्वयन में देरी या प्रतिरोध होता है।
यूपीएससी लिंक: शिक्षा नीति, सामाजिक क्षेत्र में विकास
4. राजनीतिकरण और वैचारिक मतभेद
- शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नीतिगत निर्णयों का राजनीतिकरण, जिससे वास्तविक सुधारों के बजाय राजनीतिक लाभ पर ध्यान केंद्रित होता है।
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच वैचारिक भिन्नताएँ, जो केंद्रीय योजनाओं के सुचारू कार्यान्वयन में बाधा डालती हैं।
यूपीएससी लिंक: राजनीतिक दल, शासन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| PM SHRI योजना का कार्यान्वयन | केरल में योजना के पूर्ण कार्यान्वयन पर अस्पष्टता और केंद्र-राज्य के दावों में विरोधाभास। |
| समझौता ज्ञापन (MoU) की प्रकृति | क्या MoU केवल SSK के लिए धन प्राप्त करने का एक साधन था, या यह PM SHRI योजना को लागू करने की प्रतिबद्धता थी? |
| राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का दृष्टिकोण | केरल सरकार द्वारा NEP को ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वैचारिक दृष्टि’ के रूप में देखना, जो इसके कार्यान्वयन में बाधा उत्पन्न करता है। |
| संघवाद का सिद्धांत | केंद्र प्रायोजित योजनाओं के माध्यम से राज्यों पर केंद्रीय नीतियों को थोपने की धारणा, जो संघवाद की भावना के विरुद्ध है। |
| जनता के लिए स्पष्टता | योजना के वास्तविक स्थिति और राज्य सरकार के रुख पर जनता के बीच भ्रम, जिससे पारदर्शिता की कमी होती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- PM SHRI योजना (PM Schools for Rising India)
- समग्रा शिक्षा केरल (Samagra Shiksha Kerala)
आगे की राह
- केंद्र और राज्यों के बीच शिक्षा जैसे समवर्ती विषयों पर नीतिगत संवाद और परामर्श को मजबूत करना।
- केंद्रीय योजनाओं को डिजाइन करते समय राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं और स्थानीय संदर्भों को ध्यान में रखना।
- राज्यों को केंद्रीय योजनाओं के कार्यान्वयन में अधिक लचीलापन और स्वायत्तता प्रदान करना।
- वित्तीय सहायता के साथ जुड़ी शर्तों को तर्कसंगत बनाना ताकि राज्यों पर अनावश्यक बोझ न पड़े।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के कार्यान्वयन के लिए एक सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाना, जिसमें राज्यों की सक्रिय भागीदारी हो।
- शिक्षा क्षेत्र में सुधारों को राजनीतिकरण से बचाना और छात्रों के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देना।
- केंद्रीय योजनाओं की स्थिति और उनके कार्यान्वयन पर सार्वजनिक डोमेन में स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पीएम श्री योजना · राष्ट्रीय शिक्षा नीति · संघवाद · केंद्र-राज्य संबंध · शिक्षा का अधिकार · समग्र शिक्षा अभियान · राज्य की स्वायत्तता · नीति निर्माण · सहकारी संघवाद · राज्यों की भूमिका
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ, राज्य और समवर्ती सूची’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘शिक्षा समवर्ती सूची का विषय’}
अवधारणा प्रवाह
केंद्र सरकार PM SHRI योजना शुरू करती है। → केरल सरकार SSK फंड के लिए MoU पर हस्ताक्षर करती है। → केंद्र संसद में स्पष्ट करता है कि केरल में PM SHRI लागू नहीं। → INL मुख्यमंत्री पर विरोधाभासी दावों पर सवाल उठाता है। → केंद्र-राज्य संबंधों और NEP कार्यान्वयन पर बहस तेज होती है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. पीएम श्री योजना (PM SHRI Scheme) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना केंद्र सरकार द्वारा पूरी तरह से वित्त पोषित है।
2. इस योजना का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों को लागू करना है।
3. इसके तहत चयनित स्कूलों को ग्रीन स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 गलत है क्योंकि पीएम श्री योजना एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसमें केंद्र और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच लागत साझा की जाती है। कथन 2 और 3 सही हैं। यह योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों को लागू करने और चयनित स्कूलों को ग्रीन स्कूल के रूप में विकसित करने पर केंद्रित है।
Q2. अभिकथन (A): केंद्र प्रायोजित योजनाओं के कार्यान्वयन में राज्यों की सहमति और सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
कारण (R): भारत का संविधान शिक्षा को समवर्ती सूची में रखता है, जिससे केंद्र और राज्य दोनों को इस पर कानून बनाने का अधिकार मिलता है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सत्य है क्योंकि केंद्र प्रायोजित योजनाओं में राज्यों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, विशेषकर जब वे राज्य सूची या समवर्ती सूची के विषयों से संबंधित हों। कारण (R) भी सत्य है और A की सही व्याख्या है, क्योंकि शिक्षा समवर्ती सूची का विषय होने के कारण केंद्र और राज्य दोनों की जिम्मेदारी बनती है, और इसलिए योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए उनकी सहमति और सहयोग आवश्यक है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ केंद्र प्रायोजित योजनाओं के कार्यान्वयन में राज्यों की स्वायत्तता और केंद्र-राज्य संबंधों पर पड़ने वाले प्रभावों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या पीएम श्री योजना जैसे कार्यक्रम सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत करते हैं या कमजोर करते हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** केंद्र प्रायोजित योजनाओं (Centrally Sponsored Schemes – CSS) की संक्षिप्त परिभाषा और भारत में उनकी भूमिका। पीएम श्री योजना का संदर्भ दें।
2. **राज्यों की स्वायत्तता पर प्रभाव:**
* **सकारात्मक:** राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति में मदद, वित्तीय सहायता, विशेषज्ञता का हस्तांतरण, राज्यों में क्षमता निर्माण।
* **नकारात्मक:** राज्यों की प्राथमिकताओं पर केंद्र का प्रभाव, ‘वन-साइज़-फिट्स-ऑल’ दृष्टिकोण की समस्या, राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ (मैचिंग ग्रांट), नीतिगत स्वायत्तता का हनन।
3. **केंद्र-राज्य संबंधों पर प्रभाव:**
* **सहकारी संघवाद को बढ़ावा:** साझा लक्ष्यों के लिए सहयोग, संसाधनों का पूल, राष्ट्रीय एजेंडे पर सहमति।
* **टकराव के बिंदु:** राज्यों पर शर्तों का थोपा जाना, MoU पर हस्ताक्षर की बाध्यता, राजनीतिक मतभेद, केरल के मामले का उल्लेख (MoU पर हस्ताक्षर के बावजूद कार्यान्वयन में देरी/अस्वीकृति)।
4. **पीएम श्री योजना का विशिष्ट संदर्भ:**
* राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy – NEP) 2020 के लक्ष्यों को प्राप्त करने में इसकी भूमिका।
* राज्यों द्वारा इसके कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियाँ (जैसे केरल और तमिलनाडु का ‘धर्मनिरपेक्ष रुख’ का दावा)।
* क्या यह योजना राज्यों को अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार शिक्षा प्रणाली को अनुकूलित करने की अनुमति देती है या केंद्रीय दृष्टिकोण को थोपती है।
5. **निष्कर्ष:** सहकारी संघवाद को मजबूत करने के लिए केंद्र प्रायोजित योजनाओं में राज्यों की अधिक भागीदारी, लचीलेपन और वित्तीय स्वायत्तता की आवश्यकता पर बल दें। नीति आयोग (NITI Aayog) की भूमिका और सिफारिशों का उल्लेख किया जा सकता है।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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