डीडीयू-जीकेवाई 2.0: ग्रामीण युवाओं को कौशल एवं रोजगार से जोड़ने की केंद्र सरकार की पहल

दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना 2.0 — diagram

डीडीयू-जीकेवाई 2.0: ग्रामीण युवाओं को कौशल एवं रोजगार से जोड़ने की केंद्र सरकार की पहल

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DDU-GKY 2.0 process

✎ दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना (DDU-GKY) 2.0 ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और सतत रोजगार के अवसर प्रदान करके समावेशी विकास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने वाली एक प्रमुख सरकारी पहल है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप, गरीबी और भूख से संबंधित विषय  |  GS Paper III — समावेशी विकास, मानव संसाधन, कौशल विकास
  • Prelims: दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना (DDU-GKY), ग्रामीण विकास मंत्रालय, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, कौशल विकास, रोजगार सृजन, रोशनी पहल, हिमायत योजना, पूर्वोत्तर राज्यों के लिए विशेष प्रावधान
  • Essay: भारत में जनसांख्यिकीय लाभांश का उपयोग: चुनौतियाँ और अवसर, ग्रामीण विकास और समावेशी संवृद्धि में कौशल विकास की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना (DDU-GKY) 2.0 ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और सतत रोजगार के अवसर प्रदान करके समावेशी विकास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने वाली एक प्रमुख सरकारी पहल है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना (DDU-GKY) अपनी 12वीं वर्षगांठ मना रही है। इस अवसर पर, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मई 2025 में उन्नत DDU-GKY 2.0 दिशानिर्देशों को अधिसूचित किया है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण युवाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण, प्लेसमेंट और सतत आजीविका के अवसरों को मजबूत करना है। यह योजना ग्रामीण भारत में कौशल विकास और रोजगार सृजन के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

पृष्ठभूमि

  • भारत की युवा आबादी 2036 तक लगभग 345 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जो आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करती है।
  • इस जनसांख्यिकीय क्षमता का उपयोग करने के लिए गुणवत्तापूर्ण कौशल, रोजगार और आजीविका के अवसरों तक पहुंच आवश्यक है।
  • ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 25 सितंबर 2014 को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (National Rural Livelihoods Mission) के तहत DDU-GKY का शुभारंभ किया था।
  • यह योजना गरीब परिवारों के 15-35 वर्ष आयु वर्ग के ग्रामीण युवाओं को रोजगार से जुड़ा कौशल प्रशिक्षण प्रदान करती है।
  • यह अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (SC/ST) समुदायों (50 प्रतिशत), महिलाओं (33 प्रतिशत) और दिव्यांगजनों (5 प्रतिशत) के अनिवार्य कवरेज के माध्यम से सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देती है।
  • केंद्रीय बजट 2026-27 में DDU-GKY के लिए 750 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो ग्रामीण कौशल पर निरंतर ध्यान को दर्शाता है।

दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना (DDU-GKY) 2.0 क्या है?

  • DDU-GKY 2.0 मई 2025 में अधिसूचित उन्नत दिशानिर्देशों का एक समूह है, जो प्रशिक्षण, प्लेसमेंट, रोजगार स्थिरता और प्लेसमेंट के बाद की सहायता के ढांचे को मजबूत करता है।
  • यह एयरोस्पेस, विमानन, कृषि, सौंदर्य और कल्याण, हरित रोजगार, स्वास्थ्य सेवा और वस्त्र जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उद्योग की आवश्यकताओं के आधार पर प्रशिक्षण प्रदान करता है।
  • विशेष पहल ‘रोशनी’ गृह मंत्रालय द्वारा अधिसूचित वामपंथी उग्रवाद (LWE) प्रभावित जिलों और आकांक्षी जिलों की विशिष्ट आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करती है, जिसमें महिला उम्मीदवारों के लिए 40 प्रतिशत कवरेज के साथ आवासीय कौशल प्रशिक्षण शामिल है।
  • विशेष पहल ‘हिमायत’ जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए एक विशेष DDU-GKY योजना है, जो ग्रामीण और शहरी युवाओं को कवर करती है और मजदूरी, स्वयं और गिग रोजगार का समर्थन करती है।
  • पूर्वोत्तर राज्यों के लिए कुल आवंटन का 10 प्रतिशत निर्धारित किया गया है, जो उनकी सामाजिक-सांस्कृतिक और भौगोलिक चुनौतियों को ध्यान में रखता है।
  • DDU-GKY 2.0 रोजगार प्रतिधारण और करियर की प्रगति सहित कौशल और रोजगार के लिए अधिक समग्र दृष्टिकोण अपनाता है, साथ ही प्रवासन से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करता है और प्रौद्योगिकी-सक्षम ढांचे को मजबूत करता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
लक्षित आयु वर्ग गरीब परिवारों के 15-35 वर्ष आयु वर्ग के ग्रामीण युवाओं पर केंद्रित, जो भारत की युवा आबादी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
सामाजिक समावेशन SC/ST (50%), महिलाओं (33%) और दिव्यांगजनों (5%) के लिए अनिवार्य कवरेज, जिससे वंचित वर्गों का सशक्तिकरण होता है।
उन्नत दिशानिर्देश (2.0) मई 2025 में अधिसूचित, प्रशिक्षण, प्लेसमेंट, रोजगार स्थिरता और प्लेसमेंट-पश्चात सहायता के ढांचे को मजबूत करते हैं।
क्षेत्रीय प्रशिक्षण एयरोस्पेस, विमानन, कृषि, स्वास्थ्य सेवा, वस्त्र आदि सहित उद्योग की आवश्यकताओं के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण।
विशेष पहलें रोशनी (वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों के लिए), हिमायत (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए), और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए विशेष आवंटन।
प्रशिक्षण ढांचे का मानकीकरण न्यूनतम 576 घंटे का प्रशिक्षण, जिसमें डोमेन प्रशिक्षण (396 घंटे) और गैर-डोमेन प्रशिक्षण (180 घंटे) शामिल है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रदान कर उन्हें रोजगार योग्य बनाना, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।
  • बेरोजगारी को कम करने और आय के अवसरों को बढ़ाने में सहायक, जो समग्र आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) में योगदान देता है।
  • कुशल कार्यबल का निर्माण कर विभिन्न उद्योगों की मांग को पूरा करना, जिससे उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है।

सामाजिक महत्व

  • वंचित समुदायों (SC/ST, महिलाएं, दिव्यांगजन) को मुख्यधारा में लाकर सामाजिक समावेशन (Social Inclusion) को बढ़ावा देना।
  • ग्रामीण-शहरी प्रवास को कम करने में मदद करना, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में ही आजीविका के अवसर उपलब्ध होते हैं।
  • युवाओं में आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास की भावना पैदा करना, जिससे सामाजिक सशक्तिकरण होता है।

शासनिक महत्व

  • सरकार की ‘कौशल भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी पहलों को मजबूत करना।
  • लक्षित क्षेत्रों (जैसे वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिले, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, पूर्वोत्तर राज्य) में विकास और स्थिरता को बढ़ावा देना।
  • प्रौद्योगिकी-सक्षम निगरानी और कार्यान्वयन के माध्यम से योजनाओं की दक्षता और पारदर्शिता में सुधार करना।

चुनौतियाँ

1. प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रासंगिकता

  • प्रशिक्षण कार्यक्रमों को उद्योग की बदलती मांगों के अनुरूप अद्यतन रखना एक चुनौती है।
  • प्रशिक्षण प्रदाताओं की क्षमता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

2. प्लेसमेंट और रोजगार प्रतिधारण

  • प्रशिक्षण के बाद युवाओं के लिए स्थायी और सम्मानजनक रोजगार सुनिश्चित करना।
  • प्लेसमेंट के बाद की सहायता और करियर की प्रगति के लिए तंत्र को मजबूत करना।

3. ग्रामीण-शहरी विभाजन

  • ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और अवसरों की कमी के कारण शहरी क्षेत्रों की तुलना में कौशल विकास में चुनौतियां।
  • ग्रामीण युवाओं को आधुनिक उद्योगों के लिए तैयार करना।

4. विशेष क्षेत्रों तक पहुंच

  • दुर्गम क्षेत्रों, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों और पूर्वोत्तर राज्यों में योजना का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना।
  • इन क्षेत्रों की विशिष्ट सामाजिक-सांस्कृतिक और भौगोलिक चुनौतियों का समाधान करना।

5. डिजिटल साक्षरता और उद्यमिता

  • ग्रामीण युवाओं में डिजिटल साक्षरता और उद्यमिता कौशल को बढ़ावा देना।
  • उद्यमिता के लिए आवश्यक वित्तीय और परामर्श सहायता प्रदान करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
प्रशिक्षण की गुणवत्ता उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के साथ प्रशिक्षण मॉड्यूल का तालमेल बिठाना।
रोजगार की स्थिरता प्रशिक्षण के बाद दीर्घकालिक और सम्मानजनक रोजगार सुनिश्चित करना।
भौगोलिक पहुंच दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में योजना का प्रभावी कार्यान्वयन।
तकनीकी एकीकरण प्रौद्योगिकी-सक्षम निगरानी और मूल्यांकन को मजबूत करना।
सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाएं महिलाओं और हाशिए पर पड़े समूहों के लिए भागीदारी सुनिश्चित करना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (National Rural Livelihoods Mission)
  • दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना (Deen Dayal Upadhyaya Grameen Kaushalya Yojana)

आगे की राह

  • उद्योग की बदलती मांगों के अनुरूप प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों को नियमित रूप से अद्यतन किया जाए और नवीनतम तकनीकों को शामिल किया जाए।
  • प्रशिक्षण प्रदाताओं की गुणवत्ता और क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाए, जिसमें नियमित ऑडिट और मूल्यांकन शामिल हो।
  • प्लेसमेंट के बाद की सहायता तंत्र को मजबूत किया जाए, जिसमें करियर परामर्श, वित्तीय साक्षरता और उद्यमिता सहायता शामिल हो।
  • विशेष क्षेत्रों जैसे वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए लक्षित और अनुकूलित रणनीतियाँ विकसित की जाएँ।
  • डिजिटल साक्षरता और उद्यमिता कौशल को प्रशिक्षण के अनिवार्य घटक के रूप में और मजबूत किया जाए, जिससे युवा स्वयं का व्यवसाय शुरू कर सकें।
  • प्रौद्योगिकी का उपयोग करके योजना के कार्यान्वयन, निगरानी और मूल्यांकन को और अधिक पारदर्शी और कुशल बनाया जाए।
  • निजी क्षेत्र, गैर-सरकारी संगठनों और स्थानीय समुदायों के साथ साझेदारी को बढ़ावा दिया जाए ताकि योजना की पहुंच और प्रभावशीलता बढ़ाई जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना (DDU-GKY) · ग्रामीण विकास मंत्रालय · कौशल विकास · ग्रामीण आजीविका · रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण · सामाजिक समावेशन · रोशनी पहल · हिमायत योजना · उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए विशेष प्रावधान · DDU-GKY 2.0

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि का प्रयास करेगा’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 39’, ‘note’: ‘आजीविका के पर्याप्त साधनों का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 41’, ‘note’: ‘काम पाने, शिक्षा पाने का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘दुर्बल वर्गों के शैक्षिक, आर्थिक हितों की अभिवृद्धि’}

अवधारणा प्रवाह

ग्रामीण युवा आबादी की जनसांख्यिकीय क्षमता  →  कौशल और रोजगार के अवसरों की आवश्यकता  →  दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना (DDU-GKY) का शुभारंभ  →  प्रशिक्षण, प्लेसमेंट और रोजगार प्रतिधारण पर ध्यान  →  ग्रामीण युवाओं का सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना (DDU-GKY) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत शुरू की गई थी।
2. यह योजना केवल 15-35 वर्ष आयु वर्ग के गरीबी रेखा से नीचे (BPL) के ग्रामीण युवाओं को लक्षित करती है।
3. DDU-GKY 2.0 दिशानिर्देशों में प्रशिक्षण की न्यूनतम अवधि 576 घंटे निर्धारित की गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि DDU-GKY ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत शुरू की गई थी। कथन 2 गलत है क्योंकि यह योजना गरीब परिवारों के 15-35 वर्ष आयु वर्ग के ग्रामीण युवाओं को लक्षित करती है, न कि केवल BPL। हिमायत योजना के तहत BPL और APL दोनों को कवर किया जाता है। कथन 3 सही है क्योंकि DDU-GKY 2.0 में न्यूनतम 576 घंटे की प्रशिक्षण अवधि निर्धारित की गई है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से DDU-GKY 2.0 के तहत विशेष कार्यक्रम है/हैं?
1. रोशनी
2. हिमायत
3. पूर्वोत्तर के लिए विशेष आवंटन

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — रोशनी और हिमायत DDU-GKY 2.0 के तहत दो विशेष कार्यक्रम हैं। पूर्वोत्तर के लिए विशेष आवंटन एक प्रावधान है, न कि एक अलग कार्यक्रम।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना (DDU-GKY) ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास और सतत आजीविका सुनिश्चित करने में किस प्रकार सहायक रही है? DDU-GKY 2.0 के प्रमुख प्रावधानों और इसके तहत शुरू की गई विशेष पहलों का विस्तार से वर्णन कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: DDU-GKY का संक्षिप्त परिचय, इसकी स्थापना का उद्देश्य (ग्रामीण विकास मंत्रालय, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत, 2014 में)।
2. DDU-GKY की भूमिका: ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास, रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण, सामाजिक समावेशन (SC/ST, महिलाएँ, दिव्यांगजन) और आजीविका के अवसरों को मजबूत करने में इसकी भूमिका का वर्णन। पिछले एक दशक में इसके विकास पर प्रकाश।
3. DDU-GKY 2.0 के प्रमुख प्रावधान: मई 2025 में अधिसूचित उन्नत दिशानिर्देशों का उल्लेख।
– प्रशिक्षण, प्लेसमेंट, रोजगार स्थिरता और पोस्ट-प्लेसमेंट सहायता के ढांचे को मजबूत करना।
– विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण (एयरोस्पेस, कृषि, स्वास्थ्य सेवा आदि)।
– प्रशिक्षण ढांचे का मानकीकरण: न्यूनतम 576 घंटे की अवधि, डोमेन और गैर-डोमेन प्रशिक्षण (अंग्रेजी संचार, रोजगारपरकता, कंप्यूटर साक्षरता, उद्यमिता)।
– न्यूनतम प्लेसमेंट अवधि और प्लेसमेंट के बाद के समर्थन में वृद्धि।
– प्रवासन से जुड़ी चुनौतियों का समाधान और प्रौद्योगिकी-सक्षम निगरानी।
4. विशेष पहलें: DDU-GKY 2.0 के तहत लागू की गई विशिष्ट पहलों का विस्तृत वर्णन:
– रोशनी: वामपंथी उग्रवाद (LWE) प्रभावित जिलों और आकांक्षी जिलों के लिए, आवासीय कौशल प्रशिक्षण, महिलाओं के लिए 40% कवरेज।
– हिमायत: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए, ग्रामीण और शहरी युवाओं को कवर करना (BPL और APL), मजदूरी, स्वयं और गिग रोजगार का समर्थन, 100% केंद्र द्वारा वित्त पोषित।
– पूर्वोत्तर के लिए विशेष प्रावधान: कुल आवंटन का 10%।
– दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच: विशेष क्षेत्र भत्ता।
5. निष्कर्ष: योजना के महत्व और ग्रामीण भारत में आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में इसकी क्षमता पर संक्षिप्त टिप्पणी।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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