11 Aug तमिलनाडु निश्चित पेंशन योजना: केंद्र की ₹11,000 करोड़ की स्वीकृति का इंतजार
✎ राजकोषीय संघवाद केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय शक्तियों और जिम्मेदारियों का विभाजन है, जिसमें राज्यों की उधार लेने की शक्ति अनुच्छेद 293 द्वारा नियंत्रित होती है और अक्सर केंद्र की सहमति पर निर्भर करती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान – संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर तक शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ। | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाना, संवृद्धि, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय। सरकारी बजट।
- Prelims: राजकोषीय संघवाद, केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध, राज्य ऋण, राजकोषीय घाटा, राज्यों की उधार लेने की शक्ति, अनुच्छेद 293
- Essay: भारत में राजकोषीय संघवाद की चुनौतियाँ और समाधान, कल्याणकारी योजनाओं का वित्तपोषण: केंद्र और राज्यों की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: राजकोषीय संघवाद केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय शक्तियों और जिम्मेदारियों का विभाजन है, जिसमें राज्यों की उधार लेने की शक्ति अनुच्छेद 293 द्वारा नियंत्रित होती है और अक्सर केंद्र की सहमति पर निर्भर करती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
तमिलनाडु सरकार ने घोषणा की है कि तमिलनाडु सुनिश्चित पेंशन योजना (Tamil Nadu Assured Pension Scheme – TAPS) को तभी लागू किया जाएगा जब केंद्र सरकार राज्य को ₹11,000 करोड़ के ऋण के लिए स्वीकृति प्रदान करेगी। राज्य के वित्त मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि योजना का कार्यान्वयन केंद्र की मंजूरी पर निर्भर करता है, जो केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों और राज्यों की उधार लेने की शक्ति पर बहस को सामने लाता है।
पृष्ठभूमि
- तमिलनाडु सुनिश्चित पेंशन योजना (TAPS) राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई एक कल्याणकारी योजना है, जिसका उद्देश्य सेवानिवृत्त होने वाले या सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है।
- इस योजना के कार्यान्वयन के लिए ₹11,000 करोड़ के अतिरिक्त ऋण की आवश्यकता है, जिसके लिए राज्य सरकार को केंद्र सरकार से अनुमति लेनी होगी।
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 293(3) के अनुसार, यदि किसी राज्य ने भारत सरकार को कोई ऋण दिया है या भारत सरकार द्वारा दिए गए ऋण की गारंटी दी है, तो वह राज्य केंद्र की सहमति के बिना कोई और ऋण नहीं ले सकता है।
- राज्यों के वित्त पर ‘श्वेत पत्र’ (White Paper) जारी कर तमिलनाडु सरकार ने अपनी वित्तीय स्थिति स्पष्ट की है, जिसमें राजस्व घाटे और राज्य के अपने कर राजस्व में गिरावट का उल्लेख है।
- केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संबंध भारतीय संघीय ढांचे का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जिसमें संसाधनों का वितरण और उधार लेने की शक्तियाँ शामिल हैं।
- राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism) का सिद्धांत केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय शक्तियों और जिम्मेदारियों के विभाजन से संबंधित है, जिसका उद्देश्य आर्थिक दक्षता और क्षेत्रीय समानता सुनिश्चित करना है।
केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध और राजकोषीय संघवाद क्या है?
- केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध भारतीय संविधान के भाग XII (अनुच्छेद 268 से 293) में निहित हैं, जो केंद्र और राज्यों के बीच राजस्व के वितरण और उधार लेने की शक्तियों को नियंत्रित करते हैं।
- राजकोषीय संघवाद एक ऐसा ढाँचा है जहाँ सरकार के विभिन्न स्तरों (केंद्र, राज्य, स्थानीय) के बीच वित्तीय शक्तियाँ और जिम्मेदारियाँ विभाजित होती हैं, ताकि सार्वजनिक वस्तुओं और सेवाओं का कुशल प्रावधान सुनिश्चित किया जा सके।
- संविधान केंद्र और राज्यों के बीच कर लगाने और राजस्व एकत्र करने की शक्तियों का स्पष्ट विभाजन करता है। कुछ कर केंद्र द्वारा लगाए और एकत्र किए जाते हैं, जबकि कुछ राज्यों द्वारा।
- वित्त आयोग (Finance Commission) एक संवैधानिक निकाय है जो केंद्र और राज्यों के बीच शुद्ध कर आय के वितरण और राज्यों को सहायता अनुदान (Grants-in-aid) के सिद्धांतों पर राष्ट्रपति को सिफारिशें करता है।
- राज्यों की उधार लेने की शक्ति संविधान के अनुच्छेद 293 द्वारा नियंत्रित होती है। यदि किसी राज्य पर केंद्र का ऋण बकाया है, तो उसे अतिरिक्त ऋण लेने के लिए केंद्र की सहमति आवश्यक होती है।
- राज्यों के लिए ऋण लेना उनकी विकास परियोजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं के वित्तपोषण के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन अत्यधिक ऋण राजकोषीय अस्थिरता का कारण बन सकता है।
- राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) सरकार के कुल व्यय और राजस्व प्राप्तियों के बीच का अंतर है, जो सरकार की उधार लेने की आवश्यकता को दर्शाता है।
- राजकोषीय संघवाद में चुनौतियाँ अक्सर राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता, केंद्र पर निर्भरता और कल्याणकारी योजनाओं के वित्तपोषण को लेकर उत्पन्न होती हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| तमिलनाडु सुनिश्चित पेंशन योजना (Tamil Nadu Assured Pension Scheme – TAPS) | राज्य सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों के लिए एक नई पेंशन योजना का प्रस्ताव, जिसका उद्देश्य सेवानिवृत्त कर्मचारियों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। |
| केंद्र सरकार की स्वीकृति | योजना के कार्यान्वयन के लिए केंद्र सरकार से ₹11,000 करोड़ के ऋण की स्वीकृति आवश्यक है, जो संघवाद में केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों को दर्शाता है। |
| अंतरिम भुगतान | योजना लागू होने तक, 1 जनवरी, 2026 को या उसके बाद सेवानिवृत्त होने वाले या हो रहे कर्मचारियों को अंतरिम भुगतान का प्रावधान, जो राज्य की वित्तीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है। |
| राजकोषीय स्थिति | राज्य के राजस्व घाटे और GSDP संवृद्धि दर में गिरावट का उल्लेख, जो राज्य की वित्तीय चुनौतियों और ऋण प्रबंधन की आवश्यकता को उजागर करता है। |
| ऋण प्रबंधन | राज्य द्वारा GSDP के सापेक्ष ऋण को कम करने का दावा, जो वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों को दर्शाता है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह योजना राज्य के राजकोष पर महत्वपूर्ण वित्तीय बोझ डाल सकती है, विशेषकर जब राज्य पहले से ही उच्च राजस्व घाटे और धीमी GSDP संवृद्धि दर का सामना कर रहा हो।
- केंद्र सरकार से ऋण स्वीकृति की आवश्यकता केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों और राज्य के ऋण लेने की क्षमता पर केंद्र के नियंत्रण को दर्शाती है।
- पेंशन योजनाओं का दीर्घकालिक वित्तीय प्रभाव राज्य के बजट और भविष्य की विकासात्मक परियोजनाओं के लिए धन की उपलब्धता को प्रभावित करता है।
सामाजिक महत्व
- यह योजना सेवानिवृत्त कर्मचारियों को वित्तीय सुरक्षा और स्थिरता प्रदान करने का लक्ष्य रखती है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार हो सकता है।
- अंतरिम भुगतान का प्रावधान उन कर्मचारियों के लिए तत्काल राहत प्रदान करता है जो योजना के पूर्ण कार्यान्वयन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
शासन और संघीय संबंध
- राज्य सरकारों द्वारा कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने के लिए केंद्र सरकार की वित्तीय स्वीकृति पर निर्भरता भारतीय संघवाद (Federalism) की एक महत्वपूर्ण विशेषता है।
- यह घटना केंद्र और राज्य के बीच वित्तीय स्वायत्तता और जवाबदेही के मुद्दों पर बहस को जन्म देती है।
चुनौतियाँ
1. राजकोषीय स्थिरता
- राज्य का बढ़ता राजस्व घाटा और धीमी GSDP संवृद्धि दर नई पेंशन योजना के लिए धन जुटाने में चुनौती पेश करती है।
- केंद्र से ऋण की स्वीकृति न मिलने पर योजना का कार्यान्वयन बाधित हो सकता है, जिससे राज्य की वित्तीय प्रतिबद्धताओं पर सवाल उठ सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: राजकोषीय नीति, केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध
2. केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध
- राज्य के ऋण लेने की क्षमता पर केंद्र सरकार का नियंत्रण राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता को सीमित करता है।
- केंद्र की स्वीकृति में देरी से राज्य की कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में बाधा आ सकती है, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध
3. दीर्घकालिक वित्तीय नियोजन
- पेंशन योजनाओं का दीर्घकालिक वित्तीय बोझ राज्य के बजट पर स्थायी प्रभाव डालता है, जिसके लिए दूरगामी वित्तीय नियोजन की आवश्यकता होती है।
- जनसांख्यिकीय परिवर्तनों और बढ़ती जीवन प्रत्याशा को देखते हुए पेंशन देनदारियों का प्रबंधन एक जटिल चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: आर्थिक नियोजन, सामाजिक सुरक्षा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| उच्च राजस्व घाटा | राज्य की वित्तीय स्थिरता पर दबाव, नई योजनाओं के लिए धन की कमी। |
| GSDP संवृद्धि दर में गिरावट | राजस्व सृजन की क्षमता में कमी, आर्थिक विकास में बाधा। |
| केंद्र से ऋण स्वीकृति की निर्भरता | राज्य की वित्तीय स्वायत्तता पर सीमा, योजनाओं के कार्यान्वयन में देरी का जोखिम। |
| पेंशन देनदारियों का प्रबंधन | दीर्घकालिक वित्तीय बोझ, भविष्य की पीढ़ियों पर प्रभाव। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- तमिलनाडु सुनिश्चित पेंशन योजना (Tamil Nadu Assured Pension Scheme – TAPS)
आगे की राह
- राज्य सरकारों को अपनी राजकोषीय स्थिति को मजबूत करने के लिए राजस्व संवर्धन और व्यय युक्तिकरण के उपाय करने चाहिए।
- केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संबंधों को और अधिक पारदर्शी और सहकारी बनाने के लिए एक संवाद तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए।
- पेंशन योजनाओं को डिजाइन करते समय दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता और अंतर-पीढ़ीगत इक्विटी (Inter-generational Equity) को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
- राज्यों को अपनी ऋण लेने की क्षमता का विवेकपूर्ण ढंग से उपयोग करना चाहिए और ऋण-GSDP अनुपात को स्थायी स्तर पर बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए।
- राज्यों को अपनी आर्थिक संवृद्धि दर बढ़ाने के लिए निवेश आकर्षित करने और संरचनात्मक सुधारों को लागू करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राज्य ऋण · राजकोषीय संघवाद · राजकोषीय घाटा · राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम · राज्य वित्त · केंद्र-राज्य संबंध · सार्वजनिक ऋण · पेंशन योजनाएँ · राजकोषीय समेकन · उधार सीमाएँ
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 292: भारत सरकार द्वारा उधार लेना
- अनुच्छेद 293: राज्यों द्वारा उधार लेना
- सातवीं अनुसूची: संघ सूची (संघ द्वारा उधार लेना), राज्य सूची (राज्य द्वारा उधार लेना)
अवधारणा प्रवाह
तमिलनाडु सरकार ने सुनिश्चित पेंशन योजना प्रस्तावित की। → योजना के लिए ₹11,000 करोड़ के ऋण की आवश्यकता। → केंद्र सरकार से ऋण स्वीकृति की प्रतीक्षा। → राज्य का उच्च राजस्व घाटा और धीमी GSDP संवृद्धि दर। → केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों और राजकोषीय स्थिरता पर प्रभाव।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत के संविधान के अनुच्छेद 293 के तहत, राज्य सरकारें केंद्र सरकार की सहमति के बिना उधार नहीं ले सकती हैं यदि उनके पास केंद्र को चुकाने के लिए कोई बकाया ऋण है।
2. राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम, 2003 केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के लिए राजकोषीय घाटे को कम करने के लक्ष्य निर्धारित करता है।
3. राज्य सरकारों द्वारा लिए गए ऋणों को भारत की संचित निधि से चुकाया जाता है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है। अनुच्छेद 293(3) के अनुसार, यदि किसी राज्य पर केंद्र सरकार का कोई बकाया ऋण है, तो वह केंद्र की सहमति के बिना कोई नया ऋण नहीं ले सकता। कथन 2 सही है। FRBM अधिनियम केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के लिए राजकोषीय घाटे और ऋण को कम करने के लिए राजकोषीय अनुशासन स्थापित करता है। कथन 3 गलत है। राज्य सरकारों द्वारा लिए गए ऋणों को राज्य की संचित निधि से चुकाया जाता है, न कि भारत की संचित निधि से।
Q2. भारत में केंद्र सरकार द्वारा राज्यों के लिए उधार सीमा निर्धारित करने का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- राज्यों के बीच समान विकास सुनिश्चित करना।
- राज्यों को अत्यधिक ऋण लेने से रोकना और व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखना।
- राज्यों को केंद्रीय योजनाओं के लिए अधिक धन आवंटित करने के लिए प्रोत्साहित करना।
- राज्यों को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से सीधे उधार लेने से रोकना।
उत्तर: राज्यों को अत्यधिक ऋण लेने से रोकना और व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखना। — केंद्र सरकार द्वारा राज्यों के लिए उधार सीमा निर्धारित करने का प्राथमिक उद्देश्य राज्यों को अत्यधिक ऋण लेने से रोकना है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिरता और देश की व्यापक आर्थिक स्थिरता बनी रहे। यह राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने में मदद करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में राजकोषीय संघवाद के संदर्भ में, राज्य सरकारों के लिए केंद्र सरकार की उधार सहमति के महत्व का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या यह राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता को बाधित करता है? (15 अंक)
रूपरेखा: परिचय: राजकोषीय संघवाद और अनुच्छेद 293 का संक्षिप्त परिचय।
महत्व: केंद्र की सहमति के महत्व को समझाएं (जैसे राजकोषीय अनुशासन, व्यापक आर्थिक स्थिरता, ऋण स्थिरता)।
राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता पर प्रभाव: तर्क दें कि यह कैसे राज्यों की स्वायत्तता को बाधित कर सकता है (जैसे विकास परियोजनाओं में देरी, नीतिगत विकल्पों पर प्रतिबंध)।
संतुलन: केंद्र और राज्यों के बीच एक संतुलन की आवश्यकता पर चर्चा करें।
सुझाव: राजकोषीय संघवाद को मजबूत करने और उधार प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए सुधारों पर सुझाव (जैसे वित्त आयोग की भूमिका, FRBM अधिनियम का कार्यान्वयन)।
निष्कर्ष: एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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