07 Sep नीति आयोग ने लॉन्च किए पीएसीटी और ज़ेडईटी मार्केटप्लेस, माल ढुलाई में विद्युतीकरण का आग्रह
✎ PACT और ZET मार्केटप्लेस भारत के माल ढुलाई क्षेत्र के विद्युतीकरण को गति देने और 2070 के नेट ज़ीरो लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नीति आयोग की एक महत्वपूर्ण पहल है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था, आधारभूत संरचना, पर्यावरण और पारिस्थितिकी | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
- Prelims: नीति आयोग, ई-फास्ट इंडिया शिखर सम्मेलन, प्लेटफॉर्म फॉर एग्रीगेटिंग क्लीन ट्रांसपोर्ट (PACT), जीरो एमिशन ट्रक (ZET) मार्केटप्लेस, नेट ज़ीरो लक्ष्य, उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना, FAME योजना, इलेक्ट्रिक वाहन (EV)
- Essay: भारत के आर्थिक विकास में स्वच्छ ऊर्जा और परिवहन की भूमिका, जलवायु परिवर्तन: चुनौतियाँ और भारत की रणनीतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: PACT और ZET मार्केटप्लेस भारत के माल ढुलाई क्षेत्र के विद्युतीकरण को गति देने और 2070 के नेट ज़ीरो लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नीति आयोग की एक महत्वपूर्ण पहल है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
नीति आयोग के सदस्य श्री राजीव गौबा ने 5वें ई-फास्ट इंडिया शिखर सम्मेलन 2026 में ‘प्लेटफॉर्म फॉर एग्रीगेटिंग क्लीन ट्रांसपोर्ट (PACT)’ और ‘जीरो एमिशन ट्रक (ZET)’ मार्केटप्लेस का शुभारंभ किया। उन्होंने देश के माल ढुलाई क्षेत्र के रणनीतिक विद्युतीकरण पर जोर दिया, इसे भारत के 2070 तक नेट ज़ीरो (Net Zero) लक्ष्य और 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए महत्वपूर्ण बताया।
पृष्ठभूमि
- भारत ने वर्ष 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन (Net Zero Emission) का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके लिए परिवहन क्षेत्र का डीकार्बोनाइजेशन (Decarbonization) एक महत्वपूर्ण घटक है।
- परिवहन क्षेत्र, विशेषकर भारी वाणिज्यिक वाहन, देश के कुल कार्बन उत्सर्जन में एक बड़ा हिस्सा योगदान करते हैं। भारी ट्रक वाहन बेड़े का केवल 3-4 प्रतिशत हैं, लेकिन परिवहन क्षेत्र से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में एक-तिहाई से अधिक के लिए जिम्मेदार हैं।
- भारत में लगभग 70 प्रतिशत माल ढुलाई सड़क मार्ग से होती है, जिससे इस क्षेत्र का विद्युतीकरण ऊर्जा सुरक्षा और वायु गुणवत्ता सुधार के लिए आवश्यक हो जाता है।
- सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles – EV) को बढ़ावा देने के लिए कई पहलें की हैं, जिनमें ऑटोमोबाइल और एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (Production-Linked Incentive – PLI) योजनाएं तथा FAME (Faster Adoption and Manufacturing of Electric Vehicles) जैसी मांग-पक्षीय योजनाएं शामिल हैं।
- भारी इलेक्ट्रिक ट्रकों को अपनाने में लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों के बीच संरचनात्मक विखंडन, वित्तपोषण की उच्च लागत और समन्वित कॉरिडोर योजना का अभाव जैसी बाधाएं मौजूद हैं।
- वर्ष 2025 में लगभग 800 भारी इलेक्ट्रिक ट्रकों की बिक्री हुई, जो इस क्षेत्र में बढ़ती रुचि और क्षमता को दर्शाता है।
PACT और ZET मार्केटप्लेस क्या हैं?
- PACT (प्लेटफॉर्म फॉर एग्रीगेटिंग क्लीन ट्रांसपोर्ट) और ZET (जीरो एमिशन ट्रक) मार्केटप्लेस नीति आयोग द्वारा शुरू किए गए दो नए प्लेटफॉर्म हैं।
- इनका मुख्य उद्देश्य भारत के माल ढुलाई क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी लाना है, विशेषकर भारी ट्रकों के लिए।
- PACT प्लेटफॉर्म मांग एकत्रीकरण (Demand Aggregation) को बढ़ावा देगा, जिससे लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं, वाहन निर्माताओं, चार्जिंग प्वाइंट ऑपरेटरों और वित्तपोषकों को एक साथ लाया जा सके।
- ZET मार्केटप्लेस शून्य उत्सर्जन वाले ट्रकों के लिए एक विशिष्ट बाजार के रूप में कार्य करेगा, जो खरीद और बिक्री को सुगम बनाएगा।
- ये प्लेटफॉर्म वित्तपोषण संबंधी नवाचारों और कॉरिडोर-आधारित परियोजना निर्माण को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं, ताकि इलेक्ट्रिक ट्रकों के लिए पूंजी की लागत को कम किया जा सके।
- इनका लक्ष्य मिश्रित वित्तपोषण तंत्र (Blended Financing Mechanisms), लीजिंग मॉडल (Leasing Models) और अधिक मजबूत डेटा प्रणालियों के माध्यम से इलेक्ट्रिक ट्रकों को डीजल से चलने वाले ट्रकों के करीब लाना है।
- ये पहलें बाजार को स्वयं उपयुक्त समाधान खोजने में सक्षम बनाने के लिए एक सक्षमकारी तंत्र (Enabling Mechanism) के रूप में कार्य करती हैं, बजाय इसके कि सरकार सीधे परिणामों को निर्धारित करे।
- इन मार्केटप्लेस का शुभारंभ भारत की स्वच्छ परिवहन यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो इरादे से क्रियान्वयन की ओर बदलाव को दर्शाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| प्लेटफॉर्म फॉर एग्रीगेटिंग क्लीन ट्रांसपोर्ट (PACT) | मांग एकत्रीकरण, वित्तपोषण नवाचार और कॉरिडोर-आधारित परियोजना निर्माण को बढ़ावा देकर इलेक्ट्रिक ट्रकों के बाजार विकास में बाधाओं को दूर करेगा। |
| जीरो एमिशन ट्रक (ZET) मार्केटप्लेस | लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों, वाहन निर्माताओं, चार्जिंग पॉइंट ऑपरेटरों और वित्तपोषकों को एक साथ लाकर इलेक्ट्रिक माल ढुलाई के लिए एक समन्वित पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करेगा। |
| रणनीतिक विद्युतीकरण पर जोर | भारत में 70 प्रतिशत माल ढुलाई सड़क मार्ग से होती है, जिसमें भारी ट्रक एक-तिहाई से अधिक कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं। विद्युतीकरण से उत्सर्जन में कमी आएगी। |
| ई-फास्ट इंडिया शिखर सम्मेलन 2026 | स्वच्छ परिवहन से संबंधित विमर्श को इरादे से क्रियान्वयन की ओर ले जाने का एक मंच, जो समन्वित कार्रवाई को बढ़ावा देता है। |
| मिश्रित वित्तपोषण तंत्र और लीजिंग मॉडल | इलेक्ट्रिक ट्रकों के लिए पूंजी की लागत को कम करने और उन्हें डीजल से चलने वाले ट्रकों के बराबर लाने में सहायक। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर संक्रमण से देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी, क्योंकि यह जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करेगा।
- स्वच्छ परिवहन से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आ सकती है, जिससे अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
- उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं जैसी पहलें घरेलू विनिर्माण और रोजगार सृजन को बढ़ावा देती हैं।
पर्यावरणीय महत्व
- भारी वाणिज्यिक वाहनों के विद्युतीकरण से परिवहन क्षेत्र से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी, जो भारत के 2070 तक ‘नेट जीरो’ लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- वायु प्रदूषण में कमी से नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा और सार्वजनिक स्वास्थ्य लाभ मिलेंगे।
रणनीतिक महत्व
- इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने से भारत को 2047 तक ‘विकसित भारत’ के विजन को साकार करने में मदद मिलेगी।
- यह पहल भारत को स्वच्छ ऊर्जा और परिवहन प्रौद्योगिकियों में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करने में सहायक होगी।
सामाजिक महत्व
- बेहतर वायु गुणवत्ता से शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार होगा।
- चार्जिंग अवसरंचना के विस्तार से इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में आसानी होगी, जिससे आम जनता को लाभ मिलेगा।
चुनौतियाँ
1. संरचनात्मक विखंडन
- लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों के बीच विखंडन के कारण मांग एकत्रीकरण और बड़े पैमाने पर विद्युतीकरण में बाधा आती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: अवसरंचना, निवेश मॉडल
2. वित्तपोषण की उच्च लागत
- इलेक्ट्रिक ट्रकों के लिए पूंजी की प्रारंभिक लागत अधिक होती है, जिससे लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों के लिए उन्हें अपनाना मुश्किल हो जाता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: निवेश, वित्तीय बाजार
3. समन्वित कॉरिडोर योजना का अभाव
- प्रमुख माल ढुलाई कॉरिडोरों पर चार्जिंग अवसरंचना और सहायक सेवाओं की कमी इलेक्ट्रिक ट्रकों के संचालन को बाधित करती है।
यूपीएससी लिंक: भूगोल: परिवहन; अर्थव्यवस्था: अवसरंचना
4. डेटा प्रणालियों की कमी
- इलेक्ट्रिक ट्रकों के प्रदर्शन, लागत और लाभों पर मजबूत डेटा की कमी निवेशकों और ऑपरेटरों के लिए जोखिम बढ़ाती है।
यूपीएससी लिंक: शासन: ई-गवर्नेंस; अर्थव्यवस्था: डेटा अर्थव्यवस्था
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| भारी वाणिज्यिक वाहनों का उत्सर्जन | कुल वाहन बेड़े का केवल 3-4 प्रतिशत होने के बावजूद, ये परिवहन क्षेत्र के कार्बन उत्सर्जन में एक-तिहाई से अधिक का योगदान करते हैं। |
| बाजार विकास में बाधाएं | लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों के बीच संरचनात्मक विखंडन, वित्तपोषण की उच्च लागत और समन्वित कॉरिडोर योजना का अभाव प्रमुख बाधाएं हैं। |
| इलेक्ट्रिक ट्रकों की पूंजी लागत | डीजल से चलने वाले ट्रकों की तुलना में इलेक्ट्रिक ट्रकों के लिए पूंजी की लागत अधिक है, जिससे उन्हें अपनाना चुनौतीपूर्ण है। |
| चार्जिंग अवसरंचना का विस्तार | सार्वजनिक चार्जिंग अवसरंचना का पर्याप्त विस्तार अभी भी एक चुनौती है, खासकर प्रमुख माल ढुलाई कॉरिडोरों पर। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- ऑटोमोबाइल के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना
- एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना
- FAME योजना (फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स)
- परिवर्तन योजना
- PM e-बस सेवा योजना
आगे की राह
- PACT और ZET मार्केटप्लेस जैसे सक्षमकारी तंत्रों का प्रभावी ढंग से उपयोग करके मांग एकत्रीकरण और वित्तपोषण नवाचार को बढ़ावा देना।
- इलेक्ट्रिक ट्रकों के लिए पूंजी की लागत को कम करने हेतु मिश्रित वित्तपोषण तंत्र, लीजिंग मॉडल और अन्य वित्तीय नवाचारों को विकसित करना।
- प्रमुख माल ढुलाई कॉरिडोरों पर चार्जिंग अवसरंचना के विस्तार और समन्वित योजना पर ध्यान केंद्रित करना।
- इलेक्ट्रिक ट्रकों के प्रदर्शन और लागत-लाभ विश्लेषण पर मजबूत डेटा प्रणालियों का निर्माण करना।
- लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं, वाहन निर्माताओं, चार्जिंग पॉइंट ऑपरेटरों और वित्तपोषकों सहित सभी हितधारकों के बीच सहयोग को मजबूत करना।
- बाजार को स्वयं उपयुक्त समाधान खोजने में सक्षम बनाने वाली प्रणालियों का निर्माण करके सरकार की भूमिका को सुविधाजनक बनाना।
- जागरूकता कार्यक्रमों और प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से इलेक्ट्रिक ट्रकों को अपनाने के लिए अनुकूल माहौल बनाना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
नीति आयोग · ई-फास्ट इंडिया शिखर सम्मेलन · स्वच्छ परिवहन · इलेक्ट्रिक वाहन · नेट ज़ीरो लक्ष्य · उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना · FAME योजना · PM ई-बस सेवा · माल ढुलाई क्षेत्र का विद्युतीकरण · PACT मार्केटप्लेस · ZET मार्केटप्लेस · ऊर्जा सुरक्षा · कार्बन उत्सर्जन में कमी
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 48A: पर्यावरण का संरक्षण और सुधार तथा वन एवं वन्य जीवों की रक्षा (राज्य के नीति निदेशक तत्व)
- अनुच्छेद 246: संघ, राज्य और समवर्ती सूचियों के तहत विधायी शक्तियों का वितरण (सातवीं अनुसूची)
अवधारणा प्रवाह
माल ढुलाई क्षेत्र से उच्च कार्बन उत्सर्जन → इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर संक्रमण की आवश्यकता → बाजार विकास में बाधाएं (उच्च लागत, विखंडन) → PACT और ZET मार्केटप्लेस का शुभारंभ → मांग एकत्रीकरण, वित्तपोषण, कॉरिडोर योजना → इलेक्ट्रिक ट्रकों को तेजी से अपनाना → कार्बन उत्सर्जन में कमी और ऊर्जा सुरक्षा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नीति आयोग ने 5वें ई-फास्ट इंडिया शिखर सम्मेलन 2026 में ‘प्लेटफॉर्म फॉर एग्रीगेटिंग क्लीन ट्रांसपोर्ट (PACT)’ और ‘जीरो एमिशन ट्रक (ZET)’ मार्केटप्लेस का शुभारंभ किया।
2. भारत ने वर्ष 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है।
3. भारी वाणिज्यिक वाहन परिवहन क्षेत्र से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में एक-तिहाई से अधिक के लिए जिम्मेदार हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। नीति आयोग के सदस्य श्री राजीव गौबा ने 5वें ई-फास्ट इंडिया शिखर सम्मेलन 2026 में ‘PACT’ और ‘ZET’ मार्केटप्लेस का शुभारंभ किया। कथन 2 सही है। भारत ने वर्ष 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। कथन 3 सही है। भारी ट्रक वाहन बेड़े का केवल 3-4 प्रतिशत हैं, लेकिन परिवहन क्षेत्र से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में एक-तिहाई से अधिक के लिए जिम्मेदार हैं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सी योजनाएँ भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने और चार्जिंग अवसरंचना के विस्तार से संबंधित हैं?
1. FAME योजना
2. PM ई-ड्राइव (DRIVE) योजना
3. परिवर्तन योजना
4. PM ई-बस सेवा योजना
सही विकल्प का चयन कीजिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 1, 3 और 4
- केवल 2, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — FAME, PM ई-ड्राइव (DRIVE), परिवर्तन और PM ई-बस सेवा सभी मांग-पक्षीय योजनाएँ हैं जो इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में वृद्धि और चार्जिंग अवसरंचना के विस्तार को समर्थन देती हैं।
Q3. अभिकथन (A): इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर संक्रमण आर्थिक, पर्यावरणीय और रणनीतिक दृष्टि से अनिवार्य है।
कारण (R): यह वर्ष 2070 तक नेट ज़ीरो के वैश्विक संकल्प को पूरा करने और 2047 तक विकसित भारत के विजन को साकार करने के लिए आवश्यक है।
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, और कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का संक्रमण भारत के दीर्घकालिक आर्थिक, पर्यावरणीय और रणनीतिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है, जिसमें 2070 तक नेट ज़ीरो और 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य शामिल है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत के माल ढुलाई क्षेत्र के रणनीतिक विद्युतीकरण की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए। इस संदर्भ में, ‘प्लेटफॉर्म फॉर एग्रीगेटिंग क्लीन ट्रांसपोर्ट (PACT)’ और ‘जीरो एमिशन ट्रक (ZET)’ मार्केटप्लेस किस प्रकार सहायक सिद्ध हो सकते हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** भारत के माल ढुलाई क्षेत्र का संक्षिप्त परिचय और इसके विद्युतीकरण की आवश्यकता का उल्लेख। (जैसे, 70% माल ढुलाई सड़क मार्ग से होती है, कार्बन उत्सर्जन में भारी ट्रकों का योगदान)।
2. **रणनीतिक विद्युतीकरण की आवश्यकता:**
* **पर्यावरणीय लाभ:** कार्बन उत्सर्जन में कमी (नेट ज़ीरो लक्ष्य 2070)।
* **आर्थिक लाभ:** ऊर्जा सुरक्षा, आयात बिल में कमी, परिचालन लागत में कमी।
* **रणनीतिक अनिवार्यता:** 2047 तक विकसित भारत के विजन को साकार करने में भूमिका।
* **जीवन की गुणवत्ता:** वायु प्रदूषण में कमी।
3. **वर्तमान चुनौतियाँ:**
* लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों के बीच संरचनात्मक विखंडन।
* वित्तपोषण की उच्च लागत।
* समन्वित कॉरिडोर योजना का अभाव।
* चार्जिंग अवसरंचना की कमी।
4. **PACT और ZET मार्केटप्लेस की भूमिका:**
* **PACT (प्लेटफॉर्म फॉर एग्रीगेटिंग क्लीन ट्रांसपोर्ट):** मांग एकत्रीकरण को बढ़ावा देना, जिससे इलेक्ट्रिक ट्रकों की खरीद में बड़े पैमाने पर लाभ मिल सके।
* **ZET (जीरो एमिशन ट्रक) मार्केटप्लेस:** इलेक्ट्रिक ट्रकों के लिए एक केंद्रीकृत मंच प्रदान करना, खरीद-बिक्री को सुगम बनाना।
* **वित्तपोषण नवाचार:** मिश्रित वित्तपोषण तंत्र, लीजिंग मॉडल और पूंजी की लागत को कम करने के उपाय।
* **कॉरिडोर-आधारित परियोजना निर्माण:** प्रमुख माल ढुलाई कॉरिडोरों के विद्युतीकरण पर ध्यान केंद्रित करना।
* **हितधारक समन्वय:** लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं, वाहन निर्माताओं, चार्जिंग पॉइंट ऑपरेटरों और वित्तपोषकों को एक साथ लाना।
5. **निष्कर्ष:** भारत के स्वच्छ परिवहन लक्ष्यों को प्राप्त करने और आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा देने में इन पहलों का महत्व।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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