नीति आयोग सदस्य ने हैदराबाद स्थित सीसीआरएएस-एनआईआईएमएच का दौरा कर चिकित्सा विरासत संरक्षण पर जोर दिया

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) प्रो. (डॉ.) एम. श्रीनिवास ने सीसीआरएएस-एनआईआईएमएच हैदराबाद का दौरा किया — diagram

नीति आयोग सदस्य ने हैदराबाद स्थित सीसीआरएएस-एनआईआईएमएच का दौरा कर चिकित्सा विरासत संरक्षण पर जोर दिया

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✎ नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) के दौरे ने भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत के संरक्षण, डिजिटलीकरण और वैश्विक पहचान के महत्व को रेखांकित किया, जिसमें CCRAS-NIIMH जैसे संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — स्वास्थ्य, शिक्षा और मानव संसाधन से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोजमर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव
  • Prelims: नीति आयोग, आयुष मंत्रालय, केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS), राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा विरासत संस्थान (NIIMH), पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियाँ, डिजिटलीकरण, शैक्षिक पर्यटन
  • Essay: भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और वैज्ञानिक विरासत का संरक्षण एवं संवर्धन, स्वास्थ्य सेवा में पारंपरिक ज्ञान का महत्व और भविष्य की दिशा

त्वरित पुनरावृत्ति: नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) के दौरे ने भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत के संरक्षण, डिजिटलीकरण और वैश्विक पहचान के महत्व को रेखांकित किया, जिसमें CCRAS-NIIMH जैसे संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) प्रो. (डॉ.) एम. श्रीनिवास ने आयुष मंत्रालय के अंतर्गत हैदराबाद स्थित केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा विरासत संस्थान (CCRAS-NIIMH) का दौरा किया। इस दौरे का उद्देश्य भारत की समृद्ध चिकित्सा विरासत के दस्तावेजीकरण, संरक्षण और वैश्विक पहचान को बढ़ावा देने के प्रयासों की समीक्षा करना था। उन्होंने संस्थान के कार्यों की सराहना की और दुर्लभ पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण तथा ऐतिहासिक वैज्ञानिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के महत्व पर बल दिया।

पृष्ठभूमि

  • भारत में पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों, जैसे आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी (AYUSH) का एक लंबा और समृद्ध इतिहास रहा है। ये प्रणालियाँ न केवल उपचार प्रदान करती हैं, बल्कि जीवनशैली और कल्याण के समग्र दृष्टिकोण को भी दर्शाती हैं।
  • इन पारंपरिक प्रणालियों से संबंधित ज्ञान, पांडुलिपियों और ऐतिहासिक अभिलेखों का एक विशाल भंडार है, जिनके संरक्षण और दस्तावेजीकरण की आवश्यकता है ताकि यह ज्ञान भविष्य की पीढ़ियों के लिए उपलब्ध रहे।
  • आयुष मंत्रालय (Ministry of AYUSH) भारत सरकार का एक मंत्रालय है जिसका गठन पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के विकास, शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए किया गया है।
  • नीति आयोग (NITI Aayog) भारत सरकार का एक प्रमुख नीति ‘थिंक टैंक’ है जो केंद्र और राज्य सरकारों को प्रासंगिक तकनीकी सलाह प्रदान करता है। स्वास्थ्य इसका एक महत्वपूर्ण कार्यक्षेत्र है।
  • डिजिटलीकरण और आधुनिक सूचना प्रणालियों का उपयोग पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने और उसे व्यापक दर्शकों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
  • भारत अपनी चिकित्सा विरासत को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने और उसे आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ एकीकृत करने के प्रयासों में संलग्न है।

केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा विरासत संस्थान (CCRAS-NIIMH) क्या है?

  • CCRAS-NIIMH, आयुष मंत्रालय के तहत एक प्रमुख संस्थान है जो भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत, विशेषकर आयुर्वेद से संबंधित अनुसंधान और संरक्षण पर केंद्रित है।
  • यह संस्थान भारत की समृद्ध चिकित्सा विरासत का दस्तावेजीकरण, संरक्षण और प्रचार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • NIIMH दुर्लभ पांडुलिपियों, ऐतिहासिक अभिलेखों और पारंपरिक चिकित्सा से संबंधित अन्य सामग्रियों के संग्रह, डिजिटलीकरण और संरक्षण पर काम करता है।
  • संस्थान पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में ऐतिहासिक अनुसंधान करता है और उनके वैज्ञानिक आधार को समझने का प्रयास करता है।
  • यह संग्रहालयों और पुस्तकालयों के माध्यम से भारत की चिकित्सा विरासत को प्रदर्शित करता है और शोधकर्ताओं तथा आम जनता के लिए जानकारी उपलब्ध कराता है।
  • संस्थान का उद्देश्य भारत की चिकित्सा विरासत के लिए वैश्विक मानकों और अधिक पहचान दिलाने में योगदान करना है।
  • यह संस्थान चिकित्सा और संबंधित क्षेत्रों के छात्रों और पेशेवरों के लिए शैक्षिक पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित होने की क्षमता रखता है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
दुर्लभ पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण भारत की समृद्ध चिकित्सा विरासत के संरक्षण और व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने में सहायक।
ऐतिहासिक वैज्ञानिक रिकॉर्ड का संरक्षण पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के वैज्ञानिक आधार को समझने और भविष्य के शोध के लिए महत्वपूर्ण।
आधुनिक सूचना प्रणालियों का उपयोग चिकित्सा विरासत को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करने और शोधकर्ताओं के लिए सुलभ बनाने में सहायक।
अंतर्राष्ट्रीय मानकों को अपनाना संग्रहालयों के संरक्षण और रखरखाव में वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को एकीकृत करना।
क्षमता निर्माण और कुशल कार्यबल पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में विशेषज्ञता विकसित करने और रोजगार के अवसर सृजित करने में सहायक।
शैक्षिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकास छात्रों और पेशेवरों के लिए भारतीय चिकित्सा विरासत के बारे में सीखने और अनुभव करने का अवसर।

महत्व

सांस्कृतिक एवं विरासत संरक्षण

  • भारत की प्राचीन चिकित्सा प्रणालियों जैसे आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध आदि की समृद्ध विरासत का दस्तावेजीकरण और संरक्षण सुनिश्चित करता है।
  • दुर्लभ पांडुलिपियों, शिलालेखों और ऐतिहासिक अभिलेखों के डिजिटलीकरण से भावी पीढ़ियों के लिए इस ज्ञान को सुरक्षित रखा जा सकेगा।

वैज्ञानिक अनुसंधान एवं विकास

  • पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में निहित वैज्ञानिक सिद्धांतों और प्रथाओं को समझने और उनका सत्यापन करने के लिए एक आधार प्रदान करता है।
  • आधुनिक चिकित्सा के साथ पारंपरिक ज्ञान के एकीकरण के लिए नए रास्ते खोलता है, जिससे समग्र स्वास्थ्य देखभाल दृष्टिकोण विकसित हो सकते हैं।

शैक्षिक एवं क्षमता निर्माण

  • चिकित्सा और संबंधित क्षेत्रों के छात्रों और पेशेवरों के लिए भारतीय चिकित्सा विरासत के बारे में सीखने और अनुसंधान करने हेतु एक मंच प्रदान करता है।
  • प्रशिक्षण पाठ्यक्रम, प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम और संयुक्त पोस्ट-डॉक्टोरल कार्यक्रमों के माध्यम से कुशल कार्यबल तैयार करने में मदद करता है।

वैश्विक पहचान एवं कूटनीति

  • भारत की चिकित्सा विरासत को वैश्विक मंच पर मान्यता दिलाने और उसकी ख्याति बढ़ाने में सहायक।
  • पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में भारत को एक अग्रणी देश के रूप में स्थापित कर सॉफ्ट पावर (Soft Power) को बढ़ावा देता है।

चुनौतियाँ

1. दुर्लभ पांडुलिपियों का संरक्षण

  • पुरानी और नाजुक पांडुलिपियों के भौतिक संरक्षण और डिजिटलीकरण में विशेषज्ञता और संसाधनों की कमी।
  • जलवायु परिवर्तन, कीटों और मानवीय त्रुटियों से इन मूल्यवान अभिलेखों को होने वाले नुकसान का जोखिम।

2. आधुनिक सूचना प्रणालियों का एकीकरण

  • पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक डिजिटल प्रारूपों में परिवर्तित करने और उसे सुलभ बनाने में तकनीकी चुनौतियाँ।
  • डेटा सुरक्षा और अभिलेखागार की प्रामाणिकता बनाए रखने की आवश्यकता।

3. क्षमता निर्माण और कुशल कार्यबल

  • पारंपरिक चिकित्सा विरासत के संरक्षण और अनुसंधान के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं की कमी।
  • प्रशिक्षण कार्यक्रमों और पाठ्यक्रमों के लिए अद्यतन पाठ्यक्रम और पर्याप्त संकाय की उपलब्धता।

4. वैश्विक मानकों का अनुपालन

  • संग्रहालयों और अभिलेखागार के संरक्षण में अंतर्राष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने और लागू करने में चुनौतियाँ।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और फंडिंग प्राप्त करने में बाधाएँ।

5. नियामक संस्थाओं के साथ समन्वय

  • राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग (NCISM) और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) जैसी नियामक संस्थाओं के साथ प्रभावी सहयोग स्थापित करना।
  • पारंपरिक चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान को मुख्यधारा की चिकित्सा प्रणाली में एकीकृत करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
संसाधनों की कमी पारंपरिक चिकित्सा विरासत के संरक्षण और डिजिटलीकरण के लिए पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधनों का अभाव।
तकनीकी प्रगति का अभाव आधुनिक सूचना प्रणालियों और शोध पोर्टलों के विकास और रखरखाव में नवीनतम तकनीकों का उपयोग करने में चुनौतियाँ।
जनजागरूकता की कमी भारत की समृद्ध चिकित्सा विरासत के महत्व और संरक्षण की आवश्यकता के बारे में आम जनता में जागरूकता का अभाव।
अंतर-संस्थागत समन्वय विभिन्न आयुष संस्थानों, विश्वविद्यालयों और नियामक निकायों के बीच प्रभावी समन्वय की कमी।
गुणवत्ता नियंत्रण पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों से संबंधित अनुसंधान और प्रकाशनों में गुणवत्ता और मानकीकरण सुनिश्चित करना।

आगे की राह

  • दुर्लभ पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और संरक्षण के लिए अत्याधुनिक तकनीकों और अंतर्राष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाना।
  • पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक सूचना प्रणालियों और शोध पोर्टलों का विकास और उन्नयन करना।
  • चिकित्सा विरासत के संरक्षण और अनुसंधान के लिए कुशल कार्यबल तैयार करने हेतु प्रशिक्षण और प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम शुरू करना।
  • राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग (NCISM) और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) जैसी नियामक संस्थाओं के साथ प्रभावी सहयोग स्थापित करना।
  • आईआईटी (IIT) और अन्य राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों में लघु संग्रहालय विकसित करके भारतीय चिकित्सा विरासत का व्यापक प्रसार करना।
  • एनआईआईएमएच (NIIMH) को चिकित्सा और संबंधित क्षेत्रों के छात्रों और पेशेवरों के लिए एक प्रमुख शैक्षिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना।
  • पारंपरिक चिकित्सा के वैज्ञानिक आधार को मान्य करने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग करते हुए अनुसंधान को बढ़ावा देना।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) के माध्यम से विरासत संरक्षण और अनुसंधान परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण जुटाना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

नीति आयोग · आयुष मंत्रालय · भारतीय चिकित्सा विरासत · सीसीआरएएस-एनआईआईएमएच · पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियाँ · डिजिटलीकरण · वैश्विक मानक · क्षमता निर्माण · शैक्षिक पर्यटन · राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 49’, ‘note’: ‘राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों, स्थानों और वस्तुओं का संरक्षण’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A(f)’, ‘note’: ‘हमारी समग्र संस्कृति की समृद्ध विरासत को महत्व देना’}

अवधारणा प्रवाह

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) का दौरा  →  सीसीआरएएस-एनआईआईएमएच (CCRAS-NIIMH) की पहलों की सराहना  →  भारत की चिकित्सा विरासत के संरक्षण पर बल  →  वैश्विक मानकों, क्षमता निर्माण और शैक्षिक पर्यटन का आह्वान  →  नियामक संस्थाओं और अन्य संस्थानों के साथ सहयोग का सुझाव  →  चिकित्सा विरासत के संरक्षण और वैश्विक पहचान को बढ़ावा देना

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नीति आयोग भारत सरकार का एक थिंक टैंक है, जिसने योजना आयोग का स्थान लिया है।
2. आयुष मंत्रालय भारत में पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के विकास और प्रचार के लिए जिम्मेदार है।
3. केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) आयुष मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। नीति आयोग (National Institution for Transforming India) का गठन 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग के स्थान पर किया गया था। कथन 2 सही है। आयुष मंत्रालय (Ayurveda, Yoga and Naturopathy, Unani, Siddha and Homoeopathy) भारत में पारंपरिक और गैर-पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के विकास, शिक्षा और अनुसंधान के लिए जिम्मेदार है। कथन 3 सही है। CCRAS आयुर्वेद के क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने और समन्वय करने के लिए आयुष मंत्रालय के तहत एक शीर्ष निकाय है।

Q2. राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा विरासत संस्थान (NIIMH) का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?

  1. आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान के लिए धन उपलब्ध कराना।
  2. भारत की समृद्ध चिकित्सा विरासत का दस्तावेजीकरण और संरक्षण करना।
  3. केवल यूनानी चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देना।
  4. अंतर्राष्ट्रीय चिकित्सा छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान करना।

उत्तर: भारत की समृद्ध चिकित्सा विरासत का दस्तावेजीकरण और संरक्षण करना। — राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा विरासत संस्थान (NIIMH) का प्राथमिक उद्देश्य भारत की समृद्ध चिकित्सा विरासत का दस्तावेजीकरण, संरक्षण और प्रचार करना है, जिसमें दुर्लभ पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण और ऐतिहासिक वैज्ञानिक अभिलेखों को सुरक्षित रखना शामिल है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत के संरक्षण और संवर्धन में नीति आयोग तथा आयुष मंत्रालय की भूमिका का परीक्षण कीजिए। इस विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं? (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय: नीति आयोग और आयुष मंत्रालय का संक्षिप्त परिचय तथा पारंपरिक चिकित्सा के संदर्भ में उनकी भूमिका।
मुख्य भाग:
1. नीति आयोग की भूमिका: स्वास्थ्य क्षेत्र में नीति निर्माण, रणनीतिक दिशा-निर्देश, समन्वय और नवाचार को बढ़ावा देना। पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के एकीकरण और विकास के लिए सिफारिशें।
2. आयुष मंत्रालय की भूमिका: पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों (आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी) के विकास, शिक्षा, अनुसंधान और विनियमन के लिए नीतियां और कार्यक्रम। CCRAS-NIIMH जैसे संस्थानों के माध्यम से संरक्षण और दस्तावेजीकरण के प्रयास।
3. संरक्षण और संवर्धन के प्रयास: दुर्लभ पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण, ऐतिहासिक अभिलेखों का संरक्षण, अनुसंधान और विकास, क्षमता निर्माण (प्रशिक्षण कार्यक्रम), शैक्षिक पर्यटन को बढ़ावा देना।
4. वैश्विक पहचान के लिए कदम: अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाना, संयुक्त पोस्ट-डॉक्टरल कार्यक्रम, नियामक निकायों (NCISM, NMC) के साथ सहयोग, IITs जैसे संस्थानों में लघु संग्रहालयों का विकास, वैश्विक मंचों पर प्रतिनिधित्व।
निष्कर्ष: भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत के महत्व को रेखांकित करते हुए, इसके संरक्षण और वैश्विक प्रचार के लिए एक एकीकृत और बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Telangana PCS (TGPSC (TSPSC)) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) प्रो. (डॉ.) एम. श्रीनिवास द्वारा हाल ही में किस संस्थान का दौरा किया गया?

  1. A. सीसीआरएएस-एनआईआईएमएच, हैदराबाद
  2. B. आईआईटी हैदराबाद
  3. C. सीएसआईआर-सीसीएमबी, हैदराबाद
  4. D. एनआईटी वारंगल

उत्तर: A. सीसीआरएएस-एनआईआईएमएच, हैदराबाद — प्रो. (डॉ.) एम. श्रीनिवास ने नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) के रूप में सीसीआरएएस-एनआईआईएमएच (केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान परिषद – राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, हैदराबाद) का दौरा किया।

Mains: नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) द्वारा सीसीआरएएस-एनआईआईएमएच, हैदराबाद के दौरे के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, तेलंगाना राज्य में आयुर्वेदिक अनुसंधान एवं विकास में इसकी भूमिका का विश्लेषण कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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