01 Sep पीएम मोदी 2 सितंबर को जल सुरक्षा शिखर सम्मेलन के समापन सत्र में करेंगे संबोधन
✎ सहकारी संघवाद केंद्र और राज्य सरकारों के बीच राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को प्राप्त करने के लिए सहयोग और समन्वय की भावना है, जिसे जल सुरक्षा पर विभागीय शिखर सम्मेलन जैसे मंचों के माध्यम से मजबूत किया जा रहा है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान, संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध, सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप | GS Paper III — जल संसाधन, पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन
- Prelims: सहकारी संघवाद, जल जीवन मिशन, कैच द रेन, जल अवसंरचना, टीम इंडिया की भावना, केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय, पेयजल सुरक्षा, राष्ट्रीय जल मिशन
- Essay: भारत में जल सुरक्षा: चुनौतियाँ और समाधान, सहकारी संघवाद और राष्ट्रीय विकास
त्वरित पुनरावृत्ति: सहकारी संघवाद केंद्र और राज्य सरकारों के बीच राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को प्राप्त करने के लिए सहयोग और समन्वय की भावना है, जिसे जल सुरक्षा पर विभागीय शिखर सम्मेलन जैसे मंचों के माध्यम से मजबूत किया जा रहा है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन के समापन सत्र में भाग लिया। यह दो दिवसीय शिखर सम्मेलन प्रधानमंत्री द्वारा परिकल्पित विभागीय शिखर सम्मेलनों की श्रृंखला में पहला था, जिसका उद्देश्य ‘टीम इंडिया’ की भावना को मजबूत करना और सहकारी संघवाद को गहरा करना है। इस सम्मेलन में केंद्र और राज्य सरकारों ने जल सुरक्षा से संबंधित प्रमुख प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया और समयबद्ध कार्य योजनाओं को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया।
पृष्ठभूमि
- भारत में जल सुरक्षा एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्राथमिकता है, विशेषकर बढ़ती जनसंख्या और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के कारण।
- जल संसाधन संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत राज्य सूची का विषय है, लेकिन इसके प्रबंधन में केंद्र सरकार की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
- केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय और सहयोग जल संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन और जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।
- विभिन्न केंद्रीय योजनाएँ, जैसे जल जीवन मिशन और राष्ट्रीय जल मिशन, राज्यों के साथ मिलकर जल सुरक्षा के लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास करती हैं।
- प्रधानमंत्री द्वारा परिकल्पित विभागीय शिखर सम्मेलन ‘टीम इंडिया’ की भावना को मजबूत करने और सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- यह पहल केंद्र और राज्यों के बीच घनिष्ठ सहयोग के माध्यम से राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के सामूहिक स्वामित्व को बढ़ावा देने के लिए एक सुव्यवस्थित मंच प्रदान करती है।
सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) क्या है?
- सहकारी संघवाद एक ऐसा दृष्टिकोण है जिसमें केंद्र और राज्य सरकारें राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मिलकर काम करती हैं।
- यह प्रतिस्पर्धी संघवाद (Competitive Federalism) के विपरीत है, जहाँ राज्य एक-दूसरे के साथ या केंद्र के साथ संसाधनों और निवेश के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं।
- भारतीय संविधान में सहकारी संघवाद के कई प्रावधान हैं, जैसे अंतर-राज्यीय परिषद (Inter-State Council) का गठन (अनुच्छेद 263)।
- नीति आयोग (NITI Aayog) भी सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करता है, जो राज्यों को नीति निर्माण प्रक्रिया में शामिल करता है।
- इस दृष्टिकोण का उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच विश्वास, सहयोग और समन्वय को बढ़ावा देना है ताकि शासन और सेवा वितरण में सुधार किया जा सके।
- विभागीय शिखर सम्मेलन जैसे मंच केंद्र और राज्य सरकारों के राजनीतिक नेतृत्व और वरिष्ठ अधिकारियों को एक साथ लाते हैं ताकि प्रमुख प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया जा सके, सर्वोत्तम प्रणालियों को साझा किया जा सके और कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियों का समाधान किया जा सके।
- यह राष्ट्रीय लक्ष्यों के लिए साझा जिम्मेदारी को बढ़ावा देता है और यह सुनिश्चित करता है कि विचार-विमर्श से शासन और सेवा वितरण में मापनयोग्य सुधार हों।
- जल सुरक्षा के संदर्भ में, सहकारी संघवाद जल अवसंरचना परियोजनाओं के समय पर कार्यान्वयन, जल संचय में जनभागीदारी, स्थायी पेयजल स्रोतों को सुनिश्चित करने और ग्रामीण पेयजल सेवाओं की विश्वसनीयता में सुधार के लिए महत्वपूर्ण है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| पहला विभागीय शिखर सम्मेलन | केंद्र-राज्य सहयोग को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर सामूहिक स्वामित्व सुनिश्चित करने की दिशा में एक नई पहल। |
| टीम इंडिया की भावना | सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को गहरा करने और केंद्र तथा राज्यों के बीच घनिष्ठ सहयोग स्थापित करने पर केंद्रित। |
| संयुक्त विचार-विमर्श मंच | प्रमुख क्षेत्रीय प्राथमिकताओं पर केंद्र और राज्य सरकारों के राजनीतिक नेतृत्व तथा वरिष्ठ अधिकारियों को एक साथ लाता है। |
| समयबद्ध कार्य योजनाएं | विचार-विमर्श के आधार पर ठोस और समयबद्ध कार्रवाई योजनाएं विकसित करने पर जोर, जिससे शासन और सेवा वितरण में सुधार हो। |
| चार प्रमुख क्षेत्र | जल अवसंरचना परियोजनाओं का कार्यान्वयन, जल संचय जन भागीदारी, पेयजल स्रोतों की स्थिरता और जल जीवन मिशन 2.0 पर ध्यान केंद्रित। |
महत्व
शासन और नीति निर्माण
- यह शिखर सम्मेलन केंद्र और राज्य सरकारों के बीच नीति निर्माण और कार्यान्वयन में तालमेल बिठाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।
- यह राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को साझा जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ाने और जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणामों को सुनिश्चित करने में सहायक है।
सहकारी संघवाद
- यह पहल ‘टीम इंडिया’ की भावना को मजबूत करती है, जहाँ केंद्र और राज्य मिलकर राष्ट्रीय विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कार्य करते हैं।
- यह सहकारी संघवाद के सिद्धांतों को गहरा करता है, जिससे राज्यों को केंद्र की नीतियों में सक्रिय भागीदार बनने का अवसर मिलता है।
जल सुरक्षा
- जल सुरक्षा भारत के लिए एक महत्वपूर्ण विकासात्मक चुनौती है, और यह शिखर सम्मेलन इस क्षेत्र में ठोस कार्रवाई और स्थायी समाधानों को बढ़ावा देगा।
- यह जल संरक्षण, पेयजल आपूर्ति और जल अवसंरचना के समय पर कार्यान्वयन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करके देश की जल सुरक्षा को मजबूत करेगा।
चुनौतियाँ
1. कार्यान्वयन में समन्वय
- केंद्र और राज्यों के बीच विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के कार्यान्वयन में समन्वय स्थापित करना एक चुनौती हो सकती है।
- राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं और क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए एक समान दृष्टिकोण अपनाना कठिन हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, विकास प्रक्रियाएं
2. वित्तीय संसाधन
- जल अवसंरचना परियोजनाओं और पेयजल योजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है।
- राज्यों की वित्तीय बाधाएं परियोजनाओं की गति और पैमाने को प्रभावित कर सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: सरकारी बजट, राजकोषीय संघवाद
3. जनभागीदारी का अभाव
- जल संचय और संरक्षण प्रयासों में जनभागीदारी (Public Participation) को बढ़ाना एक चुनौती है, जिसके लिए व्यापक जागरूकता और सामुदायिक जुड़ाव की आवश्यकता होती है।
- स्थानीय समुदायों को जल प्रबंधन में सक्रिय रूप से शामिल करना अक्सर मुश्किल होता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, सामाजिक सशक्तिकरण
4. पेयजल स्रोतों की स्थिरता
- जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और अत्यधिक दोहन के कारण पेयजल स्रोतों की स्थिरता बनाए रखना एक गंभीर चुनौती है।
- भूजल स्तर में गिरावट और सतही जल स्रोतों के प्रदूषण से निपटने के लिए दीर्घकालिक रणनीतियों की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| केंद्र-राज्य समन्वय | विभिन्न राज्यों में राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक क्षमताओं में भिन्नता के कारण नीतियों का समान कार्यान्वयन। |
| वित्तीय बाधाएं | जल परियोजनाओं के लिए पर्याप्त और समय पर धन आवंटन की कमी, विशेषकर राज्यों के स्तर पर। |
| तकनीकी विशेषज्ञता | जल प्रबंधन और अवसंरचना विकास में आधुनिक तकनीकों और विशेषज्ञता की कमी, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में। |
| डेटा की कमी | जल संसाधनों, उपयोग और गुणवत्ता पर विश्वसनीय और अद्यतन डेटा की अनुपलब्धता, जो प्रभावी योजना में बाधा डालती है। |
| जलवायु परिवर्तन के प्रभाव | बदलते वर्षा पैटर्न, सूखा और बाढ़ जैसी चरम मौसमी घटनाओं से जल संसाधनों पर बढ़ता दबाव। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- जल जीवन मिशन 2.0
- कैच द रेन अभियान
आगे की राह
- केंद्र और राज्यों के बीच नियमित संवाद और समन्वय तंत्र को और मजबूत करना।
- जल क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना तथा नई तकनीकों को अपनाना।
- जल संरक्षण और प्रबंधन में स्थानीय समुदायों और पंचायती राज संस्थाओं की भागीदारी को बढ़ाना।
- जल परियोजनाओं के लिए पर्याप्त और समय पर वित्तीय संसाधन सुनिश्चित करना, जिसमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) को प्रोत्साहित करना भी शामिल है।
- पेयजल स्रोतों की स्थिरता के लिए एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन (Integrated Water Resource Management) दृष्टिकोण अपनाना।
- जल गुणवत्ता निगरानी और डेटा संग्रह प्रणालियों में सुधार करना ताकि प्रभावी निर्णय लिए जा सकें।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति जल अवसंरचना को अधिक लचीला बनाना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
सहकारी संघवाद · जल सुरक्षा · जल जीवन मिशन · जल अवसंरचना · जनभागीदारी · केंद्र-राज्य संबंध · टीम इंडिया की भावना · राष्ट्रीय प्राथमिकताएँ · जल संचय · पेयजल स्रोत स्थिरता
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘संघ, राज्य और समवर्ती सूचियों में विषयों का विभाजन’}
अवधारणा प्रवाह
विभागीय शिखर सम्मेलन आयोजित → केंद्र-राज्य के बीच प्राथमिकताएं तय → समयबद्ध कार्य योजनाएं विकसित → जल अवसंरचना और संरक्षण में सुधार → जल सुरक्षा और पेयजल स्थिरता सुनिश्चित
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. जल शक्ति मंत्रालय द्वारा आयोजित विभागीय शिखर सम्मेलन सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने की दिशा में एक पहल है।
2. इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य केवल केंद्र सरकार की जल नीतियों पर विचार-विमर्श करना है।
3. ‘कैच द रेन’ अभियान जल संचय में जनभागीदारी से संबंधित है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि शिखर सम्मेलन का उद्देश्य टीम इंडिया की भावना को मजबूत करना और सहकारी संघवाद को गहरा करना है। कथन 2 गलत है क्योंकि शिखर सम्मेलन में केंद्र और राज्य सरकारें दोनों शामिल हैं, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर संयुक्त रूप से विचार-विमर्श करना है। कथन 3 सही है क्योंकि ‘कैच द रेन’ अभियान जल संचय में जनभागीदारी को प्रोत्साहित करता है, जो शिखर सम्मेलन के प्रमुख क्षेत्रों में से एक है।
Q2. जल जीवन मिशन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इसका उद्देश्य 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण घर में नल का पानी उपलब्ध कराना है।
2. यह मिशन जल शक्ति मंत्रालय के तहत आता है।
3. मिशन का एक प्रमुख घटक ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजनाओं का संचालन और रखरखाव है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि जल जीवन मिशन का लक्ष्य 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण घर में कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) प्रदान करना है। कथन 2 सही है क्योंकि यह मिशन जल शक्ति मंत्रालय के तहत आता है। कथन 3 सही है क्योंकि ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजनाओं का संचालन और रखरखाव मिशन के महत्वपूर्ण घटकों में से एक है, जैसा कि जल जीवन मिशन 2.0 में भी उल्लेख किया गया है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) के सिद्धांत को सुदृढ़ करने में विभागीय शिखर सम्मेलन जैसे मंचों की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। जल सुरक्षा के संदर्भ में ऐसे मंचों की प्रासंगिकता पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. सहकारी संघवाद की अवधारणा को परिभाषित करें (जैसे केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग और समन्वय)।
2. विभागीय शिखर सम्मेलन जैसे मंचों की भूमिका का विश्लेषण करें: ‘टीम इंडिया’ की भावना को मजबूत करना, राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर सामूहिक स्वामित्व, संयुक्त विचार-विमर्श, सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना, कार्यान्वयन चुनौतियों का समाधान, समयबद्ध कार्य योजनाओं का विकास।
3. सहकारी संघवाद को सुदृढ़ करने में इन मंचों की प्रभावशीलता का समालोचनात्मक परीक्षण करें: संभावित लाभ (जैसे नीतिगत सामंजस्य, संसाधनों का इष्टतम उपयोग, त्वरित कार्यान्वयन) और चुनौतियाँ (जैसे राजनीतिक मतभेद, राज्यों की स्वायत्तता पर प्रभाव, केंद्र का प्रभुत्व)।
4. जल सुरक्षा के संदर्भ में ऐसे मंचों की प्रासंगिकता पर चर्चा करें: जल अवसंरचना परियोजनाओं का समय पर कार्यान्वयन, जल संचय में जनभागीदारी (कैच द रेन), पेयजल स्रोतों की स्थिरता, जल जीवन मिशन 2.0 के तहत ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजनाओं का संचालन एवं रखरखाव।
5. निष्कर्ष में, जल सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सहकारी संघवाद के महत्व और ऐसे मंचों की आवश्यकता पर बल दें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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