08 Sep पीएम मोदी-पुतिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में द्विपक्षीय वार्ता करेंगे
✎ BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय बैठक यूक्रेन संघर्ष, ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा सहयोग जैसे प्रमुख रणनीतिक मुद्दों पर केंद्रित होगी, जो दोनों देशों की 'विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी' को…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper III — अर्थव्यवस्था
- Prelims: BRICS, भारत-रूस संबंध, यूक्रेन संघर्ष, परमाणु ऊर्जा संयंत्र, रक्षा सहयोग, बहुपक्षीय मंच
- Essay: बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत की विदेश नीति और बहुपक्षीय मंचों की भूमिका, भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा आत्मनिर्भरता में रणनीतिक साझेदारियों का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय बैठक यूक्रेन संघर्ष, ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा सहयोग जैसे प्रमुख रणनीतिक मुद्दों पर केंद्रित होगी, जो दोनों देशों की ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ को रेखांकित करती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन BRICS शिखर सम्मेलन के इतर द्विपक्षीय बैठक करेंगे। रूस ने यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए भारत के प्रयासों का स्वागत किया है और दोनों देशों के रुख में समानता बताई है।
पृष्ठभूमि
- BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) पांच प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 25% और विश्व की आबादी के 40% से अधिक का प्रतिनिधित्व करता है।
- भारत और रूस के बीच ऐतिहासिक रूप से एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी रही है, जो रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में फैली हुई है।
- यूक्रेन संघर्ष के बाद से, भारत ने एक तटस्थ रुख अपनाया है, जिसमें बातचीत और कूटनीति के माध्यम से शांतिपूर्ण समाधान का आह्वान किया गया है।
- भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रूसी कच्चे तेल का एक महत्वपूर्ण खरीदार बना हुआ है, विशेष रूप से पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद।
- दोनों देश रक्षा क्षेत्र में लंबे समय से भागीदार हैं, जिसमें हथियारों की खरीद और संयुक्त उत्पादन परियोजनाएं शामिल हैं।
- परमाणु ऊर्जा भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, और रूस भारत में कई परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण में सहयोग कर रहा है।
BRICS क्या है और भारत-रूस संबंधों के प्रमुख आयाम
- BRICS एक अंतर-सरकारी संगठन है जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना और वैश्विक आर्थिक शासन में सुधार करना है।
- यह समूह वार्षिक शिखर सम्मेलनों, मंत्रिस्तरीय बैठकों और विभिन्न कार्य समूहों के माध्यम से काम करता है।
- BRICS ने न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) और आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था (CRA) जैसे संस्थानों की स्थापना की है, जो सदस्य देशों को वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं।
- भारत और रूस के बीच संबंध ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ पर आधारित हैं।
- रक्षा सहयोग भारत-रूस संबंधों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जिसमें भारत रूस से सैन्य हार्डवेयर का सबसे बड़ा आयातक है।
- ऊर्जा क्षेत्र में, रूस भारत को कच्चे तेल और परमाणु ऊर्जा प्रौद्योगिकी का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Kudankulam Nuclear Power Plant) इसका एक प्रमुख उदाहरण है।
- अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, और सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी दोनों देशों के बीच सहयोग के महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं।
- दोनों देश संयुक्त राष्ट्र (UN), शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और BRICS जैसे बहुपक्षीय मंचों पर वैश्विक मुद्दों पर समन्वय करते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| BRICS शिखर सम्मेलन | वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक मंच पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व। भारत के लिए बहुपक्षीय कूटनीति का अवसर। |
| भारत-रूस द्विपक्षीय बैठक | दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने, रक्षा, ऊर्जा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का अवसर। |
| यूक्रेन संघर्ष पर भारत की स्थिति | भारत शांतिपूर्ण समाधान का पक्षधर है, जो रूस की स्थिति से काफी हद तक मेल खाता है। यह भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को दर्शाता है। |
| परमाणु ऊर्जा संयंत्रों पर वार्ता | भारत की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण। रूस भारत में नए परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने में सहयोग कर रहा है। |
| Su-57 विमानों की बिक्री | भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करेगा और रूस के साथ सैन्य-तकनीकी सहयोग को गहरा करेगा। |
महत्व
भू-राजनीतिक महत्व
- BRICS मंच पर भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय बैठक वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में दोनों देशों की भूमिका को रेखांकित करती है।
- यूक्रेन संघर्ष पर भारत की तटस्थ लेकिन शांति-उन्मुख स्थिति, जो रूस की स्थिति के साथ कुछ हद तक मेल खाती है, भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को दर्शाती है।
आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा
- रूस से कच्चे तेल की खरीद पर अमेरिकी टैरिफ के संभावित कदम को रूस द्वारा ‘अवैध और अस्वीकार्य’ बताया जाना वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर इसके प्रभाव को दर्शाता है।
- भारत में नए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना पर वार्ता भारत की बढ़ती ऊर्जा मांगों को पूरा करने और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ने में महत्वपूर्ण है।
रक्षा और सामरिक सहयोग
- Su-57 जैसे उन्नत लड़ाकू विमानों की संभावित बिक्री भारत की रक्षा आधुनिकीकरण योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है और रूस के साथ दीर्घकालिक रक्षा साझेदारी को मजबूत करती है।
- यह बैठक दोनों देशों के बीच सैन्य-तकनीकी सहयोग के भविष्य के रोडमैप पर चर्चा करने का अवसर प्रदान करती है।
चुनौतियाँ
1. भू-राजनीतिक दबाव
- रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण उत्पन्न वैश्विक भू-राजनीतिक ध्रुवीकरण भारत के लिए एक संतुलनकारी कार्य प्रस्तुत करता है।
- पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के बीच भारत को अपने राष्ट्रीय हितों को साधते हुए अपनी विदेश नीति को संचालित करना होगा।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध: भारत की विदेश नीति
2. ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार
- रूस से कच्चे तेल की खरीद पर संभावित अमेरिकी टैरिफ जैसे कदम भारत की ऊर्जा आयात रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं।
- रूस के साथ व्यापार में भुगतान तंत्र और प्रतिबंधों से संबंधित चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: ऊर्जा सुरक्षा, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
3. रक्षा निर्भरता का विविधीकरण
- ऐतिहासिक रूप से रूस पर भारत की रक्षा निर्भरता को कम करने और रक्षा स्रोतों में विविधता लाने की आवश्यकता है।
- उन्नत सैन्य प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण और सह-उत्पादन को बढ़ावा देना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा: रक्षा उद्योग, अंतर्राष्ट्रीय संबंध
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| यूक्रेन संघर्ष | वैश्विक स्थिरता पर प्रभाव, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा चुनौतियाँ। |
| पश्चिमी प्रतिबंध | रूस के साथ व्यापार और रक्षा सहयोग पर संभावित प्रभाव। |
| ऊर्जा आयात | भू-राजनीतिक तनावों के कारण आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और मूल्य अस्थिरता का जोखिम। |
| रक्षा आधुनिकीकरण | उन्नत प्रौद्योगिकियों तक पहुंच और घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की आवश्यकता। |
आगे की राह
- भारत को अपनी स्वतंत्र विदेश नीति बनाए रखते हुए वैश्विक और क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान देना चाहिए।
- रूस के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करते हुए अन्य प्रमुख शक्तियों के साथ संबंधों में संतुलन बनाए रखना चाहिए।
- ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऊर्जा स्रोतों और आपूर्तिकर्ताओं में विविधता लानी चाहिए।
- रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) को बढ़ावा देना और घरेलू रक्षा उत्पादन क्षमताओं को बढ़ाना चाहिए।
- बहुपक्षीय मंचों जैसे BRICS में सक्रिय भूमिका निभाकर वैश्विक शासन में सुधारों का समर्थन करना चाहिए।
- रूस के साथ व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने के लिए वैकल्पिक भुगतान तंत्रों का पता लगाना चाहिए।
- अंतर्राष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराना चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
BRICS शिखर सम्मेलन · भारत-रूस संबंध · अंतर्राष्ट्रीय संबंध · बहुपक्षीय मंच · कूटनीति · यूक्रेन संघर्ष · ऊर्जा सुरक्षा · रक्षा सहयोग · परमाणु ऊर्जा · वैश्विक भू-राजनीति
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 51: अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना
अवधारणा प्रवाह
BRICS शिखर सम्मेलन का आयोजन → भारत-रूस द्विपक्षीय बैठक का निर्धारण → यूक्रेन संघर्ष पर भारत की शांतिपूर्ण स्थिति की पुष्टि → ऊर्जा और रक्षा सहयोग पर चर्चा → वैश्विक भू-राजनीतिक और आर्थिक प्रभावों का आकलन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. BRICS एक बहुपक्षीय मंच है जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं।
2. BRICS का प्राथमिक उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग और राजनीतिक समन्वय को बढ़ावा देना है।
3. भारत BRICS का संस्थापक सदस्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि BRICS में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। कथन 2 भी सही है क्योंकि BRICS का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना है। कथन 3 गलत है क्योंकि दक्षिण अफ्रीका 2010 में BRICS में शामिल हुआ था, जबकि भारत संस्थापक सदस्यों में से एक था।
Q2. भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय संबंधों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से क्षेत्र प्रमुख सहयोग के बिंदु हैं?
1. रक्षा
2. परमाणु ऊर्जा
3. तेल और गैस
4. अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — भारत और रूस के बीच रक्षा, परमाणु ऊर्जा, तेल और गैस तथा अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी सहित कई क्षेत्रों में व्यापक सहयोग है। ये सभी क्षेत्र दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ BRICS जैसे बहुपक्षीय मंचों के माध्यम से भारत की विदेश नीति के उद्देश्यों को प्राप्त करने में द्विपक्षीय बैठकों का महत्व क्या है? यूक्रेन संघर्ष के संदर्भ में भारत-रूस संबंधों के बदलते आयामों का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** BRICS जैसे बहुपक्षीय मंचों का संक्षिप्त परिचय और भारत की विदेश नीति में उनके महत्व का उल्लेख।
2. **द्विपक्षीय बैठकों का महत्व:**
* बहुपक्षीय मंचों पर साझा हितों को आगे बढ़ाना।
* रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना।
* विशिष्ट मुद्दों पर सहमति बनाना।
* आपसी विश्वास और समझ को बढ़ाना।
* वैश्विक शासन में सुधार के लिए समन्वय।
3. **यूक्रेन संघर्ष के संदर्भ में भारत-रूस संबंध:**
* भारत की तटस्थ स्थिति और शांतिपूर्ण समाधान पर जोर।
* रूस से रियायती तेल आयात और ऊर्जा सुरक्षा पर इसका प्रभाव।
* रक्षा सहयोग पर पश्चिमी प्रतिबंधों का प्रभाव और भारत की आत्मनिर्भरता पर जोर।
* परमाणु ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग जारी रखना।
* वैश्विक भू-राजनीति में भारत की बढ़ती भूमिका और स्वतंत्र विदेश नीति का प्रदर्शन।
4. **निष्कर्ष:** भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और बहु-संरेखण (multi-alignment) की नीति को रेखांकित करते हुए, द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मंचों के बीच तालमेल का महत्व।
स्रोत: orissapost.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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