‘बीमा सखी’ योजना: ग्रामीण महिलाओं को बीमा क्षेत्र में उद्यमिता का अवसर

‘Bima Sakhi’ scheme lauded for boosting women entrepreneurs in insurance — diagram

‘बीमा सखी’ योजना: ग्रामीण महिलाओं को बीमा क्षेत्र में उद्यमिता का अवसर

Bima Sakhi schemeWomen agentsTrained as LIC agents3,500 in Kadapa districtInsurance policiesLife insurance coverageExpanded in rural areasFinancial inclusionRural access boostedVulnerable groups coveredEconomic empowermentSelf-employment for womenIncome generation
Bima Sakhi scheme

✎ बीमा सखी योजना ग्रामीण महिलाओं को जीवन बीमा एजेंट के रूप में सशक्त बनाकर महिला उद्यमिता और ग्रामीण क्षेत्रों में बीमा कवरेज का विस्तार करती है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सरकारी नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप तथा उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे  |  GS Paper II — महिलाओं से संबंधित मुद्दे  |  GS Paper III — समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय
  • Prelims: बीमा सखी योजना, महिला उद्यमिता, ग्रामीण विकास, जीवन बीमा, वित्तीय समावेशन, LIC, DRDA
  • Essay: भारत में महिला सशक्तिकरण के लिए सरकारी योजनाओं की भूमिका, वित्तीय समावेशन और समावेशी विकास में बीमा क्षेत्र का योगदान

त्वरित पुनरावृत्ति: बीमा सखी योजना ग्रामीण महिलाओं को जीवन बीमा एजेंट के रूप में सशक्त बनाकर महिला उद्यमिता और ग्रामीण क्षेत्रों में बीमा कवरेज का विस्तार करती है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, 70वें बीमा सप्ताह समारोह के दौरान केंद्र सरकार की ‘बीमा सखी’ योजना की सराहना की गई। इस योजना को महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने और पहले से अछूते क्षेत्रों में जीवन बीमा पॉलिसियों की पहुंच का विस्तार करने में इसकी भूमिका के लिए सराहा गया। कडापा जिले में इस योजना के तहत 3,500 ‘बीमा सखियां’ कार्यरत हैं, जो राज्य में LIC के लिए सर्वाधिक राजस्व उत्पन्न करने वाले डिवीजनों में से एक है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में बीमा क्षेत्र का ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में अभी भी सीमित प्रवेश है, जिससे एक बड़े वर्ग को वित्तीय सुरक्षा से वंचित रहना पड़ता है।
  • महिला सशक्तिकरण और वित्तीय समावेशन सरकार के प्रमुख विकासात्मक लक्ष्यों में से एक रहे हैं।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर और उद्यमिता को बढ़ावा देना आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
  • जीवन बीमा निगम (LIC) जैसी संस्थाएं देश भर में बीमा कवरेज का विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • सरकार ने विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित करने के प्रयास किए हैं।
  • वित्तीय साक्षरता और बीमा उत्पादों के बारे में जागरूकता की कमी ग्रामीण आबादी के बीच बीमा अपनाने में एक बड़ी बाधा रही है।

बीमा सखी योजना क्या है?

  • बीमा सखी योजना केंद्र सरकार की एक पहल है जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को जीवन बीमा एजेंट के रूप में सशक्त बनाना है।
  • यह योजना ग्रामीण आबादी के बीच जीवन बीमा पॉलिसियों की पहुंच का विस्तार करने और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
  • इस योजना के तहत, 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की SSC (कक्षा 10) उत्तीर्ण महिलाएं जीवन बीमा एजेंट के रूप में करियर शुरू कर सकती हैं।
  • एजेंटों को बीमा पॉलिसियों की बिक्री पर कमीशन के अतिरिक्त प्रोत्साहन के रूप में मासिक वजीफा प्रदान किया जाता है।
  • पहले वर्ष में ₹7,000, दूसरे वर्ष में ₹6,000 और तीसरे वर्ष में ₹5,000 का मासिक वजीफा प्रदान किया जाता है।
  • यह योजना ग्रामीण महिलाओं के लिए उद्यमिता के अवसर पैदा करती है, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
  • इसका लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन बीमा कवरेज सुनिश्चित करना और वित्तीय सुरक्षा जाल को मजबूत करना है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
महिला उद्यमिता को बढ़ावा यह योजना महिलाओं को बीमा एजेंट के रूप में अपना करियर शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
ग्रामीण क्षेत्रों में बीमा पहुंच का विस्तार बीमा सखियाँ विशेष रूप से ग्रामीण और पहले से अछूते क्षेत्रों में जीवन बीमा पॉलिसियों की पहुंच बढ़ाने में मदद करती हैं।
प्रोत्साहन राशि योजना के तहत पहले तीन वर्षों के लिए मासिक प्रोत्साहन राशि (पहले वर्ष ₹7,000, दूसरे वर्ष ₹6,000 और तीसरे वर्ष ₹5,000) प्रदान की जाती है, जो महिलाओं को इस क्षेत्र में बने रहने के लिए प्रेरित करती है।
न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता SSC (10वीं कक्षा) उत्तीर्ण और 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी महिलाएं इस योजना का लाभ उठा सकती हैं, जिससे व्यापक भागीदारी सुनिश्चित होती है।
आर्थिक सशक्तिकरण यह योजना महिलाओं को न केवल आय का स्रोत प्रदान करती है, बल्कि उन्हें वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में उद्यमी बनने का अवसर भी देती है।

महत्व

आर्थिक सशक्तिकरण और वित्तीय समावेशन

  • यह योजना महिलाओं को बीमा एजेंट के रूप में स्वरोजगार के अवसर प्रदान करके उनके आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में बीमा पॉलिसियों की पहुंच बढ़ाकर, यह वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा देती है और ग्रामीण आबादी को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है।

सामाजिक-आर्थिक विकास

  • महिलाओं को उद्यमी बनाने से न केवल उनकी व्यक्तिगत आय बढ़ती है, बल्कि यह उनके परिवारों और समुदायों के समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास में भी योगदान देता है।
  • यह योजना महिलाओं को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे लैंगिक समानता (Gender Equality) और महिला श्रम बल भागीदारी में सुधार होता है।

बीमा क्षेत्र का विस्तार

  • बीमा सखियों के माध्यम से, बीमा कंपनियों को ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में अपनी पहुंच बढ़ाने में मदद मिलती है, जिससे बीमा पैठ (Insurance Penetration) में वृद्धि होती है।
  • यह बीमा क्षेत्र में रोजगार सृजन को भी बढ़ावा देती है, विशेषकर महिलाओं के लिए।

चुनौतियाँ

1. जागरूकता और विश्वास की कमी

  • ग्रामीण क्षेत्रों में बीमा उत्पादों के बारे में जागरूकता की कमी और वित्तीय उत्पादों पर विश्वास बनाने में कठिनाई एक बड़ी चुनौती है।
  • बीमा सखियों को अक्सर ग्रामीण आबादी को बीमा के लाभों और इसकी जटिलताओं को समझाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

2. प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण

  • बीमा उत्पादों की जटिल प्रकृति को देखते हुए, बीमा सखियों के लिए पर्याप्त और सतत प्रशिक्षण महत्वपूर्ण है।
  • उन्हें बिक्री कौशल, ग्राहक संबंध प्रबंधन और विभिन्न बीमा पॉलिसियों की गहरी समझ विकसित करने की आवश्यकता होती है।

3. प्रोत्साहन और स्थिरता

  • प्रारंभिक वर्षों में प्रोत्साहन राशि महत्वपूर्ण है, लेकिन उसके बाद बीमा सखियों की आय पूरी तरह से कमीशन पर निर्भर करती है, जो उनकी स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
  • लंबे समय तक इस पेशे में बने रहने के लिए उन्हें पर्याप्त और स्थिर आय सुनिश्चित करना एक चुनौती है।

4. डिजिटल साक्षरता और कनेक्टिविटी

  • बीमा प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण के साथ, बीमा सखियों के लिए डिजिटल साक्षरता (Digital Literacy) और ग्रामीण क्षेत्रों में विश्वसनीय इंटरनेट कनेक्टिविटी आवश्यक है।
  • तकनीकी बाधाएँ उनके काम की दक्षता को प्रभावित कर सकती हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
ग्रामीण क्षेत्रों में कम बीमा पैठ वित्तीय सुरक्षा की कमी और अप्रत्याशित घटनाओं के प्रति भेद्यता।
महिलाओं के लिए सीमित आर्थिक अवसर लैंगिक असमानता और महिला श्रम बल भागीदारी में कमी।
बीमा उत्पादों की जटिलता आम जनता के लिए समझना मुश्किल, जिससे खरीद में हिचकिचाहट।
प्रारंभिक आय की अनिश्चितता नए बीमा एजेंटों के लिए स्थिरता और प्रेरणा बनाए रखने में कठिनाई।
डिजिटल डिवाइड ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी पहुंच और साक्षरता की कमी, जो डिजिटल लेनदेन को बाधित करती है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • बीमा सखी योजना

आगे की राह

  • बीमा सखियों के लिए नियमित और उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएँ, जिसमें बीमा उत्पादों की गहन जानकारी, बिक्री कौशल और डिजिटल उपकरणों का उपयोग शामिल हो।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में बीमा के महत्व और लाभों के बारे में व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएँ, ताकि लोगों में वित्तीय सुरक्षा के प्रति विश्वास पैदा हो।
  • बीमा सखियों को प्रारंभिक वर्षों के बाद भी स्थिर आय सुनिश्चित करने के लिए कमीशन संरचना में सुधार या प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन (Performance-based Incentives) प्रदान किए जाएँ।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाए और बीमा सखियों को आवश्यक डिजिटल उपकरणों और कनेक्टिविटी तक पहुंच प्रदान की जाए।
  • बीमा सखियों के लिए एक मजबूत सहायता प्रणाली (Support System) विकसित की जाए, जिसमें मेंटरशिप, सहकर्मी सहायता समूह और शिकायत निवारण तंत्र शामिल हों।
  • स्थानीय स्वयं सहायता समूहों (Self-Help Groups – SHGs) और पंचायती राज संस्थाओं (Panchayati Raj Institutions – PRIs) के साथ साझेदारी करके योजना की पहुंच और प्रभावशीलता बढ़ाई जाए।
  • बीमा उत्पादों को ग्रामीण आबादी की विशिष्ट आवश्यकताओं और सामर्थ्य के अनुरूप सरल और लचीला बनाया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

बीमा सखी योजना · महिला उद्यमिता · वित्तीय समावेशन · ग्रामीण विकास · बीमा पैठ · सामाजिक सुरक्षा · आर्थिक सशक्तिकरण · स्वरोजगार · सरकारी योजनाएँ · बीमा क्षेत्र

अवधारणा प्रवाह

सरकार द्वारा ‘बीमा सखी’ योजना का शुभारंभ  →  महिलाओं को बीमा एजेंट के रूप में प्रशिक्षित और नियुक्त करना  →  ग्रामीण क्षेत्रों में बीमा उत्पादों की पहुंच में वृद्धि  →  महिलाओं के लिए स्वरोजगार और आय सृजन  →  ग्रामीण आबादी के लिए वित्तीय सुरक्षा और समावेशन

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. बीमा सखी योजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को जीवन बीमा एजेंट के रूप में प्रशिक्षित करने और उन्हें स्वरोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए बनाई गई है।
2. इस योजना के तहत, पात्र महिलाओं को पहले तीन वर्षों के लिए मासिक प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।
3. इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण आबादी के बीच जीवन बीमा कवरेज का विस्तार करना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को बीमा एजेंट बनाना है। कथन 2 सही है क्योंकि योजना पहले तीन वर्षों के लिए मासिक प्रोत्साहन राशि प्रदान करती है (पहले वर्ष ₹7,000, दूसरे वर्ष ₹6,000 और तीसरे वर्ष ₹5,000)। कथन 3 सही है क्योंकि योजना का एक प्रमुख लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में बीमा की पहुँच बढ़ाना है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से ‘बीमा सखी’ योजना का/के मुख्य उद्देश्य है/हैं?
1. ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना।
2. ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन बीमा की पहुँच बढ़ाना।
3. महिलाओं को वित्तीय साक्षरता प्रदान करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 2 — बीमा सखी योजना का प्राथमिक उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को बीमा एजेंट के रूप में स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना (कथन 1) और ग्रामीण आबादी के बीच जीवन बीमा कवरेज का विस्तार करना (कथन 2) है। वित्तीय साक्षरता प्रदान करना एक अप्रत्यक्ष लाभ हो सकता है, लेकिन यह योजना का सीधा मुख्य उद्देश्य नहीं है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ बीमा सखी योजना ग्रामीण भारत में महिला उद्यमिता और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में कैसे सहायक है? इस योजना की प्रमुख विशेषताओं और इसके संभावित सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** बीमा सखी योजना का संक्षिप्त परिचय, इसके मुख्य उद्देश्य (महिला उद्यमिता और बीमा पैठ)।
2. **प्रमुख विशेषताएँ:**
* पात्रता मानदंड (जैसे 18 वर्ष और SSC उत्तीर्ण महिलाएँ)।
* प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर।
* मासिक प्रोत्साहन राशि का प्रावधान (पहले तीन वर्षों के लिए ₹7,000, ₹6,000, ₹5,000)।
* ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान।
3. **महिला उद्यमिता को बढ़ावा:**
* महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाना।
* आय सृजन के अवसर प्रदान करना।
* नेतृत्व और व्यावसायिक कौशल का विकास।
* उदाहरण: कडप्पा जिले में 3,500 बीमा सखियों द्वारा उत्पन्न राजस्व का 18% योगदान।
4. **वित्तीय समावेशन में भूमिका:**
* ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों तक बीमा उत्पादों की पहुँच बढ़ाना।
* जीवन बीमा कवरेज का विस्तार, विशेषकर ग्रामीण आबादी के बीच।
* सामाजिक सुरक्षा जाल को मजबूत करना।
* वित्तीय जागरूकता में वृद्धि।
5. **सामाजिक-आर्थिक प्रभाव:**
* महिलाओं का सशक्तिकरण और लैंगिक समानता में योगदान।
* ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा।
* गरीबी उन्मूलन और जीवन स्तर में सुधार।
* वित्तीय स्थिरता और सुरक्षा प्रदान करना।
6. **निष्कर्ष:** योजना की सफलता और भविष्य की संभावनाओं पर संतुलित दृष्टिकोण, जिसमें इसके विस्तार और प्रभाव को और बढ़ाने के उपायों का उल्लेख हो।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


Related guides on our sites

No Comments

Post A Comment