भारत-उज़्बेकिस्तान संबंध: पीएम मोदी की उज़्बेकिस्तान यात्रा से नई ऊर्जा

India, Uzbekistan sign package of bilateral agreements to deepen cooperation — diagram

भारत-उज़्बेकिस्तान संबंध: पीएम मोदी की उज़्बेकिस्तान यात्रा से नई ऊर्जा

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✎ भारत और उज़्बेकिस्तान ने व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने के लिए कई द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जो दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS पेपर II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध  |  GS पेपर III — अर्थव्यवस्था
  • Prelims: भारत-उज़्बेकिस्तान संबंध, रणनीतिक साझेदारी, द्विपक्षीय समझौते, मध्य एशिया, सांस्कृतिक सहयोग, व्यापार और निवेश
  • Essay: भारत की विदेश नीति में मध्य एशिया का महत्व, रणनीतिक साझेदारी के माध्यम से आर्थिक विकास

त्वरित पुनरावृत्ति: भारत और उज़्बेकिस्तान ने व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने के लिए कई द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जो दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, भारत और उज़्बेकिस्तान ने व्यापार, आर्थिक, निवेश, सांस्कृतिक और मानवीय क्षेत्रों सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने के लिए कई द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति और भारत के प्रधानमंत्री की उपस्थिति में इन समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जो दोनों देशों के बीच सदियों पुराने मैत्रीपूर्ण संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पृष्ठभूमि

  • भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं, जो सिल्क रूट के समय से चले आ रहे हैं।
  • दोनों देश 1991 में उज़्बेकिस्तान की स्वतंत्रता के बाद से राजनयिक संबंध बनाए हुए हैं।
  • दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी 2011 में स्थापित की गई थी, जिसका उद्देश्य रक्षा, सुरक्षा, व्यापार और निवेश में सहयोग बढ़ाना था।
  • हाल के वर्षों में, दोनों देशों के नेताओं के बीच उच्च-स्तरीय दौरे और बैठकें नियमित रूप से आयोजित की गई हैं, जो द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
  • उज़्बेकिस्तान मध्य एशिया में भारत के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है, जो कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।

भारत-उज़्बेकिस्तान रणनीतिक साझेदारी

  • भारत-उज़्बेकिस्तान रणनीतिक साझेदारी दोनों देशों के बीच बहुआयामी सहयोग को संदर्भित करती है, जिसमें राजनीतिक, आर्थिक, सुरक्षा और सांस्कृतिक आयाम शामिल हैं।
  • इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ाना, रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना, और क्षेत्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर समन्वय स्थापित करना है।
  • आर्थिक सहयोग में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, कृषि, सूचना प्रौद्योगिकी और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं। भारत उज़्बेकिस्तान में विभिन्न परियोजनाओं में निवेश कर रहा है।
  • रक्षा और सुरक्षा सहयोग में आतंकवाद विरोधी प्रयासों, सैन्य प्रशिक्षण और रक्षा उपकरणों के आदान-प्रदान पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
  • सांस्कृतिक और मानवीय सहयोग दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित है, जिसमें शिक्षा, कला और पर्यटन शामिल हैं।
  • भारत उज़्बेकिस्तान के साथ कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर भी काम कर रहा है, जैसे चाबहार बंदरगाह के माध्यम से मध्य एशिया तक पहुंच।
  • डिजिटल नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) और स्टार्टअप्स में भारत की प्रगति को उज़्बेकिस्तान के साथ व्यापक सहयोग में संरेखित करने का इरादा है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
व्यापार और आर्थिक सहयोग दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना और निवेश के अवसरों को बढ़ाना।
सांस्कृतिक और मानवीय संबंध सदियों पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को बढ़ावा देना तथा लोगों से लोगों के बीच संपर्क को गहरा करना।
औद्योगिक सहयोग औद्योगिक क्षेत्र में संयुक्त परियोजनाओं और साझेदारी को प्रोत्साहित करना।
अंतर-क्षेत्रीय सहयोग दोनों देशों के विभिन्न क्षेत्रों के बीच सीधे संबंधों और सहयोग को बढ़ावा देना।
डिजिटल नवाचार और AI भारत की डिजिटल प्रगति और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) में विशेषज्ञता का लाभ उठाना।
रणनीतिक साझेदारी भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी को एक नए स्तर पर ले जाना।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • समझौतों से व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग में वृद्धि होगी, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को लाभ मिलेगा।
  • भारत की डिजिटल नवाचार और AI क्षमताओं का उज्बेकिस्तान में उपयोग होने से तकनीकी प्रगति को बढ़ावा मिलेगा।

रणनीतिक महत्व

  • मध्य एशिया में भारत की ‘कनेक्ट सेंट्रल एशिया’ नीति को मजबूती मिलेगी, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता और संपर्क बढ़ेगा।
  • उज्बेकिस्तान के साथ गहरे संबंध भारत को मध्य एशियाई क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में स्थापित करेंगे।

सांस्कृतिक और मानवीय महत्व

  • सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों से लोगों के बीच संपर्क से सदियों पुराने संबंधों को और मजबूती मिलेगी।
  • यह सहयोग दोनों देशों के बीच आपसी समझ और सद्भाव को बढ़ावा देगा।

भू-राजनीतिक महत्व

  • यह साझेदारी वैश्विक मंच पर दोनों देशों के प्रभाव को बढ़ाएगी और साझा हितों को आगे बढ़ाएगी।
  • यह मध्य एशिया में भारत की उपस्थिति को मजबूत करेगा, जो ऊर्जा सुरक्षा और कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ

1. कनेक्टिविटी के मुद्दे

  • भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सीधी भूमि कनेक्टिविटी का अभाव व्यापार और निवेश के विस्तार में बाधा उत्पन्न करता है।
  • परिवहन गलियारों की कमी से माल ढुलाई की लागत और समय बढ़ जाता है।

2. निवेश और व्यापार बाधाएँ

  • दोनों देशों के बीच व्यापार की पूरी क्षमता का अभी तक दोहन नहीं हो पाया है, जिसमें टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएँ शामिल हैं।
  • उज्बेकिस्तान में निवेश के माहौल से संबंधित कुछ नियामक और प्रक्रियात्मक चुनौतियाँ हो सकती हैं।

3. क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियाँ

  • अफगानिस्तान में अस्थिरता और मध्य एशिया में आतंकवाद का खतरा क्षेत्रीय सहयोग को प्रभावित कर सकता है।
  • सीमा पार अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी भी चिंता का विषय है।

4. तकनीकी एकीकरण

  • डिजिटल नवाचार और AI के क्षेत्र में सहयोग के लिए मानकीकरण और अंतर-संचालनीयता (interoperability) सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है।
  • साइबर सुरक्षा से संबंधित जोखिमों का प्रबंधन करना महत्वपूर्ण होगा।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
भौगोलिक दूरी सीधी कनेक्टिविटी की कमी से व्यापार और लोगों के आवागमन में बाधा।
व्यापार असंतुलन दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन को दूर करने की आवश्यकता।
नियामक ढाँचा निवेश और व्यापार को सुगम बनाने के लिए नियामक प्रक्रियाओं का सरलीकरण।
क्षेत्रीय अस्थिरता अफगानिस्तान और अन्य पड़ोसी क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ।
तकनीकी अंतर डिजिटल और AI सहयोग में तकनीकी अंतर को पाटना।
सूचना का अभाव दोनों देशों में व्यापार और निवेश के अवसरों के बारे में जागरूकता की कमी।

आगे की राह

  • अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (International North-South Transport Corridor – INSTC) और चाबहार बंदरगाह जैसी परियोजनाओं का पूर्ण उपयोग करके कनेक्टिविटी को बढ़ाना।
  • व्यापार बाधाओं को कम करने और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (Comprehensive Economic Partnership Agreement – CEPA) पर विचार करना।
  • डिजिटल नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्टार्टअप इकोसिस्टम में भारत की विशेषज्ञता को उज्बेकिस्तान के साथ साझा करने के लिए संयुक्त कार्य समूह स्थापित करना।
  • रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना, जिसमें आतंकवाद विरोधी अभ्यास और खुफिया जानकारी साझा करना शामिल है।
  • शैक्षिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ावा देना, जिससे लोगों से लोगों के बीच संबंध और मजबूत हों।
  • ऊर्जा, कृषि और फार्मास्यूटिकल्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों में संयुक्त उद्यमों और निवेश को प्रोत्साहित करना।
  • क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को बढ़ाना, विशेष रूप से शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation – SCO) जैसे मंचों पर।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

भारत-उज़्बेकिस्तान संबंध · द्विपक्षीय समझौते · रणनीतिक साझेदारी · व्यापार और निवेश · सांस्कृतिक सहयोग · क्षेत्रीय संपर्क · मध्य एशिया नीति · डिजिटल नवाचार

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51’, ‘note’: ‘अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना’}

अवधारणा प्रवाह

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच उच्च स्तरीय वार्ता  →  व्यापार, निवेश, संस्कृति आदि पर द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर  →  दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग में वृद्धि  →  मध्य एशिया में भारत की ‘कनेक्ट सेंट्रल एशिया’ नीति को मजबूती  →  क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. उज़्बेकिस्तान मध्य एशिया में एक भूमि से घिरा देश है।
2. भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक संबंध सिल्क रोड के माध्यम से स्थापित हुए थे।
3. हाल ही में, उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘ओली दरजाली दोस्ती’ पुरस्कार से सम्मानित किया।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। उज़्बेकिस्तान मध्य एशिया में स्थित एक दोहरा भूमि से घिरा (double landlocked) देश है। कथन 2 सही है। भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच संबंध प्राचीन सिल्क रोड (Silk Road) के माध्यम से स्थापित हुए थे, जिसमें उज़्बेकिस्तान भी शामिल था। कथन 3 सही है। उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज़्बेकिस्तान के सर्वोच्च राजकीय सम्मान ‘ओली दरजाली दोस्ती’ से सम्मानित किया है।

Q2. भारत की ‘कनेक्ट सेंट्रल एशिया’ नीति के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. इस नीति का उद्देश्य मध्य एशियाई देशों के साथ व्यापार, निवेश और लोगों से लोगों के बीच संपर्क बढ़ाना है।
2. यह नीति मुख्य रूप से ऊर्जा सुरक्षा पर केंद्रित है और अन्य क्षेत्रों को बाहर रखती है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1 और न ही 2

उत्तर: केवल 1 — कथन 1 सही है। भारत की ‘कनेक्ट सेंट्रल एशिया’ नीति का उद्देश्य मध्य एशियाई देशों के साथ व्यापार, निवेश, सुरक्षा और सांस्कृतिक संबंधों सहित विभिन्न क्षेत्रों में संपर्क बढ़ाना है। कथन 2 गलत है। यह नीति केवल ऊर्जा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, रक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे व्यापक क्षेत्र शामिल हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच बढ़ते द्विपक्षीय संबंधों के महत्व का परीक्षण करें। साथ ही, मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक पहुँच के लिए उज़्बेकिस्तान की भूमिका पर चर्चा करें। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत-उज़्बेकिस्तान संबंधों का संक्षिप्त ऐतिहासिक संदर्भ और वर्तमान रणनीतिक साझेदारी का उल्लेख।
2. द्विपक्षीय संबंधों का महत्व (मुख्य बिंदु):
• व्यापार और आर्थिक सहयोग: कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी, ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में बढ़ते व्यापार और निवेश के अवसर।
• रक्षा और सुरक्षा सहयोग: आतंकवाद विरोधी प्रयासों में सहयोग, सैन्य प्रशिक्षण और रक्षा उपकरणों का आदान-प्रदान।
• सांस्कृतिक और लोगों से लोगों के बीच संबंध: ऐतिहासिक सिल्क रोड संबंध, बौद्ध धर्म और सूफीवाद के प्रभाव, शिक्षा और पर्यटन में सहयोग।
• कनेक्टिविटी पहल: चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) और अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (International North-South Transport Corridor – INSTC) जैसी पहलों के माध्यम से संपर्क बढ़ाने के प्रयास।
• डिजिटल नवाचार और प्रौद्योगिकी: उज़्बेकिस्तान की भारत के डिजिटल नवाचार, AI और स्टार्टअप्स में रुचि और सहयोग की संभावनाएँ।
3. मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक पहुँच के लिए उज़्बेकिस्तान की भूमिका:
• ‘कनेक्ट सेंट्रल एशिया’ नीति का प्रवेश द्वार: उज़्बेकिस्तान मध्य एशिया के केंद्र में स्थित होने के कारण भारत के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है।
• क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा: उज़्बेकिस्तान क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता में एक प्रमुख भूमिका निभाता है, जो भारत के सुरक्षा हितों के लिए महत्वपूर्ण है।
• ऊर्जा सुरक्षा: मध्य एशिया के ऊर्जा संसाधनों तक पहुँच के लिए उज़्बेकिस्तान एक संभावित मार्ग प्रदान करता है।
• बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग: शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation – SCO) जैसे मंचों पर साझा हितों को बढ़ावा देना।
4. निष्कर्ष: संबंधों की भविष्य की संभावनाओं और क्षेत्रीय तथा वैश्विक भू-राजनीति में उनके बढ़ते महत्व पर एक संतुलित दृष्टिकोण।

स्रोत: orissapost.com


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