भारत ने संयुक्त राष्ट्र के नक्शा सुधार प्रस्ताव का किया समर्थन, जानिए पूरा मामला

India backs UN resolution to correct world map, address continental distortions — labelled illustration

भारत ने संयुक्त राष्ट्र के नक्शा सुधार प्रस्ताव का किया समर्थन, जानिए पूरा मामला

✎ भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उस संकल्प का समर्थन किया है जो विश्व मानचित्रों में महाद्वीपीय भूभागों के अधिक सटीक प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने और मर्केटर प्रक्षेप जैसी विकृतियों को दूर करने पर केंद्रित है, विशेष रूप से समान…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS पेपर I — भूगोल (विश्व का भौतिक भूगोल)  |  GS पेपर II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध (महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान)
  • Prelims: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA), मर्केटर प्रक्षेप (Mercator Projection), समान क्षेत्र प्रक्षेप (Equal Area Projection), कार्टोग्राफी (Cartography), महाद्वीपीय विकृति, टोगो द्वारा प्रायोजित संकल्प
  • Essay: वैश्विक प्रतिनिधित्व और भू-राजनीति में मानचित्रों की भूमिका, तकनीकी प्रगति और वैश्विक सहयोग के माध्यम से असमानताओं का समाधान

त्वरित पुनरावृत्ति: भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उस संकल्प का समर्थन किया है जो विश्व मानचित्रों में महाद्वीपीय भूभागों के अधिक सटीक प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने और मर्केटर प्रक्षेप जैसी विकृतियों को दूर करने पर केंद्रित है, विशेष रूप से समान क्षेत्र प्रक्षेपों के उपयोग को प्रोत्साहित करते हुए तकनीकी तटस्थता बनाए रखने पर जोर दिया है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के एक संकल्प के पक्ष में मतदान किया है, जिसका उद्देश्य विश्व मानचित्रों में महाद्वीपीय भूभागों के अधिक सटीक प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देना है। यह संकल्प विशेष रूप से अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया जैसे क्षेत्रों के कथित आकार को कम करने वाली विकृतियों को दूर करने पर केंद्रित है, जो 16वीं शताब्दी में नेविगेशनल उद्देश्यों के लिए डिज़ाइन किए गए मर्केटर प्रक्षेप के व्यापक उपयोग के कारण उत्पन्न हुई हैं।

पृष्ठभूमि

  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ‘मानचित्र को सही करना: वैश्विक कार्टोग्राफिक प्रतिनिधित्व को पुनर्संतुलित करना और दुनिया के क्षेत्रों, विशेष रूप से अफ्रीका के न्यायसंगत प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देना’ शीर्षक से एक संकल्प अपनाया है।
  • इस संकल्प को टोगो द्वारा प्रायोजित किया गया था और इसे 164 मतों के साथ भारी समर्थन मिला, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका ने इसके खिलाफ मतदान किया।
  • मर्केटर प्रक्षेप, जो 16वीं शताब्दी में नौवहन के लिए बनाया गया था, अभी भी शैक्षिक, मीडिया, डिजिटल और आधिकारिक सामग्रियों में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है, बावजूद इसके कि यह भूमध्य रेखा से दूर उत्तरी और दक्षिणी भूभागों में महत्वपूर्ण विकृति पैदा करता है।
  • यह विकृति अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया के कथित आकार को कम करती है, जिससे दुनिया का एक असंतुलित दृष्टिकोण बना रहता है।
  • भारत ने इस संकल्प का समर्थन करते हुए स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य ‘समान क्षेत्र मानचित्र प्रक्षेप’ (Equal Area map projections) के व्यापक उपयोग और विचार का समर्थन करना है, न कि किसी विशिष्ट प्रक्षेप, जैसे ‘इक्वल अर्थ प्रक्षेप’ (Equal Earth projection) का समर्थन करना।
  • भारत का मानना है कि विभिन्न प्रक्षेप विभिन्न कार्टोग्राफिक उद्देश्यों को पूरा करते हैं और कोई भी एक प्रक्षेप हर अनुप्रयोग के लिए उपयुक्त नहीं होता है। इसलिए, संकल्प को तकनीकी और पद्धति-तटस्थ रहना चाहिए।

मानचित्र प्रक्षेप (Map Projection) क्या है?

  • मानचित्र प्रक्षेप एक गोलाकार पृथ्वी की सतह को एक सपाट द्वि-आयामी मानचित्र पर दर्शाने की एक व्यवस्थित विधि है।
  • पृथ्वी की गोलाकार सतह को सपाट सतह पर दर्शाते समय कुछ विकृतियाँ (distortions) अनिवार्य रूप से उत्पन्न होती हैं, जैसे आकार, आकृति, दूरी या दिशा में परिवर्तन।
  • मर्केटर प्रक्षेप एक बेलनाकार प्रक्षेप है जो दिशाओं को सटीक रूप से संरक्षित करता है, जिससे यह नौवहन के लिए उपयोगी होता है, लेकिन यह ध्रुवों के पास के भूभागों के आकार को अत्यधिक बढ़ा देता है।
  • समान क्षेत्र प्रक्षेप (Equal Area Projection) वे प्रक्षेप होते हैं जो महाद्वीपीय और क्षेत्रीय भूभागों के सापेक्ष आकार या क्षेत्रों को संरक्षित करते हैं, जिससे उनके वास्तविक आकार का अधिक सटीक प्रतिनिधित्व मिलता है।
  • विभिन्न मानचित्र प्रक्षेपों का उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है; उदाहरण के लिए, कुछ प्रक्षेप दूरी को संरक्षित करते हैं, जबकि अन्य आकृति या दिशा को संरक्षित करते हैं।
  • इस संकल्प का मुख्य उद्देश्य उन मानचित्रों के उपयोग को बढ़ावा देना है जो भूभागों के सापेक्ष आकार को अधिक सटीक रूप से दर्शाते हैं, जिससे वैश्विक प्रतिनिधित्व में संतुलन स्थापित हो सके।
  • भारत ने इस बात पर जोर दिया कि मानचित्र समाज की भूगोल और दुनिया के सापेक्ष पैमाने को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
संयुक्त राष्ट्र महासभा का प्रस्ताव विश्व मानचित्रों में महाद्वीपीय विकृतियों को ठीक करने का लक्ष्य।
मर्केटर प्रक्षेप (Mercator Projection) 16वीं शताब्दी में नौवहन के लिए डिज़ाइन किया गया, लेकिन भूमि द्रव्यमानों को विकृत करता है, विशेषकर भूमध्य रेखा से दूर।
समान-क्षेत्र प्रक्षेप (Equal-Area Projections) महाद्वीपीय और क्षेत्रीय भूमि द्रव्यमानों के सापेक्ष आकार या क्षेत्रों को संरक्षित करते हैं।
भारत का रुख सटीक मानचित्रण प्रथाओं का समर्थन करता है, लेकिन किसी विशिष्ट प्रक्षेप का समर्थन नहीं करता।
अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया का प्रतिनिधित्व विकृत मानचित्रों में इन क्षेत्रों का आकार अक्सर कम करके आंका जाता है।

महत्व

भू-राजनीतिक महत्व

  • यह प्रस्ताव वैश्विक मानचित्रण में ऐतिहासिक विकृतियों को दूर करने का प्रयास करता है, जो अक्सर अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया जैसे क्षेत्रों के कथित आकार को कम करके आंकते हैं।
  • सटीक मानचित्रण वैश्विक शक्ति संतुलन और क्षेत्रीय महत्व की धारणाओं को प्रभावित कर सकता है, जिससे विकासशील देशों के लिए अधिक न्यायसंगत प्रतिनिधित्व को बढ़ावा मिल सकता है।

शैक्षिक और सांस्कृतिक प्रभाव

  • मानचित्र समाज की भूगोल और दुनिया के सापेक्ष पैमाने की समझ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अधिक सटीक मानचित्रण भौगोलिक साक्षरता और सांस्कृतिक संवेदनशीलता को बढ़ा सकता है।
  • गलत मानचित्रण ऐतिहासिक रूप से कुछ क्षेत्रों के महत्व को कम कर सकता है, जिससे वैश्विक दृष्टिकोण में पूर्वाग्रह पैदा हो सकता है।

तकनीकी और वैज्ञानिक निहितार्थ

  • यह प्रस्ताव विभिन्न मानचित्र प्रक्षेपों की उपयुक्तता पर बहस को उजागर करता है, यह स्वीकार करते हुए कि कोई भी एकल प्रक्षेप हर उद्देश्य के लिए उपयुक्त नहीं है।
  • भारत का रुख तकनीकी और पद्धतिगत तटस्थता पर जोर देता है, जिससे देशों और कार्टोग्राफरों को उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं के लिए सबसे उपयुक्त प्रक्षेप का चयन करने की स्वतंत्रता मिलती है।

चुनौतियाँ

1. मानचित्र प्रक्षेपों का चयन

  • विभिन्न मानचित्र प्रक्षेपों के अपने फायदे और नुकसान हैं, और कोई भी एकल प्रक्षेप सभी भौगोलिक विशेषताओं (जैसे आकार, दिशा, दूरी और क्षेत्र) को एक साथ सटीक रूप से संरक्षित नहीं कर सकता है।
  • एक सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत ‘सही’ मानचित्र प्रक्षेप का अभाव एक चुनौती प्रस्तुत करता है, क्योंकि विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए विभिन्न प्रक्षेपों की आवश्यकता होती है।

2. ऐतिहासिक जड़ें और जड़ता

  • मर्केटर प्रक्षेप जैसे ऐतिहासिक रूप से स्थापित मानचित्र प्रक्षेप व्यापक रूप से शैक्षिक, मीडिया और आधिकारिक सामग्रियों में उपयोग किए जाते रहे हैं, जिससे उन्हें बदलना मुश्किल हो जाता है।
  • मानचित्रों को बदलने में वैश्विक सहमति प्राप्त करना और विभिन्न देशों और संस्थानों द्वारा नए मानकों को अपनाना एक लंबी प्रक्रिया हो सकती है।

3. तकनीकी और पद्धतिगत तटस्थता

  • यह सुनिश्चित करना कि प्रस्ताव किसी विशिष्ट मानचित्र प्रक्षेप का समर्थन न करे, बल्कि समान-क्षेत्र दृष्टिकोणों के व्यापक उपयोग को बढ़ावा दे, एक संतुलन कार्य है।
  • विभिन्न देशों और कार्टोग्राफरों को उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं के लिए सबसे उपयुक्त प्रक्षेप निर्धारित करने की स्वतंत्रता बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
मर्केटर प्रक्षेप की विकृतियाँ भूमध्य रेखा से दूर भूमि द्रव्यमानों के आकार को महत्वपूर्ण रूप से विकृत करता है, जिससे अफ्रीका और दक्षिण एशिया जैसे क्षेत्रों का कथित आकार कम हो जाता है।
वैश्विक प्रतिनिधित्व में असंतुलन विकृत मानचित्र दुनिया के बारे में एक असंतुलित दृष्टिकोण को बढ़ावा देते हैं, जो भू-राजनीतिक धारणाओं को प्रभावित कर सकता है।
मानचित्रण प्रथाओं में एकरूपता की कमी विभिन्न प्रक्षेपों का उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है, जिससे वैश्विक मानचित्रण में एकरूपता प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
तकनीकी बनाम राजनीतिक निर्णय मानचित्र प्रक्षेपों का चयन तकनीकी और वैज्ञानिक विचारों के साथ-साथ राजनीतिक और सांस्कृतिक प्रभावों से भी प्रभावित हो सकता है।

आगे की राह

  • संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों को समान-क्षेत्र प्रक्षेपों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय नीतियों और दिशानिर्देशों को अपनाना चाहिए, विशेष रूप से शैक्षिक और आधिकारिक सामग्रियों में।
  • कार्टोग्राफरों, भूगोलवेत्ताओं और शिक्षाविदों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ताकि सबसे उपयुक्त मानचित्रण प्रथाओं पर सहमति बनाई जा सके जो सटीकता और प्रतिनिधित्व को संतुलित करती हैं।
  • नई मानचित्रण तकनीकों और प्रक्षेपों में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा दिया जाना चाहिए जो वैश्विक भूमि द्रव्यमानों का अधिक सटीक और न्यायसंगत प्रतिनिधित्व प्रदान कर सकें।
  • शैक्षिक पाठ्यक्रम में मानचित्र प्रक्षेपों की सीमाओं और विभिन्न प्रकार के प्रक्षेपों के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाई जानी चाहिए।
  • अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर संवाद और चर्चा जारी रखी जानी चाहिए ताकि मानचित्रण प्रथाओं के मानकीकरण और वैश्विक स्तर पर सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने के लिए एक आम सहमति बन सके।
  • डिजिटल मानचित्रण प्लेटफार्मों और जीआईएस (Geographic Information System) प्रौद्योगिकियों को समान-क्षेत्र प्रक्षेपों को डिफ़ॉल्ट विकल्प के रूप में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, जहां उपयुक्त हो।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

संयुक्त राष्ट्र महासभा · विश्व मानचित्र · कार्टोग्राफिक प्रतिनिधित्व · मर्केटर प्रक्षेपण · समान क्षेत्र प्रक्षेपण · महाद्वीपीय विकृति · भौगोलिक सटीकता · वैश्विक प्रतिनिधित्व · भारत का रुख · अंतर्राष्ट्रीय सहयोग

अवधारणा प्रवाह

संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्ताव पारित  →  विश्व मानचित्रों में महाद्वीपीय विकृतियों को ठीक करने का लक्ष्य  →  मर्केटर प्रक्षेप द्वारा उत्पन्न विकृतियों पर चिंता  →  समान-क्षेत्र प्रक्षेपों के उपयोग को बढ़ावा देना  →  भारत का तकनीकी और पद्धतिगत तटस्थता का समर्थन  →  अधिक सटीक और न्यायसंगत वैश्विक मानचित्रण की दिशा में कदम

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मर्केटर प्रक्षेपण (Mercator projection) को 16वीं शताब्दी में नौवहन उद्देश्यों के लिए डिज़ाइन किया गया था।
2. यह प्रक्षेपण भूमध्य रेखा से दूर उत्तरी और दक्षिणी भूभागों के आकार को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाता है।
3. भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में ‘मानचित्र को सही करना’ (Correct the map) प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसका उद्देश्य समान क्षेत्र प्रक्षेपणों (Equal Area projections) के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है, मर्केटर प्रक्षेपण 16वीं शताब्दी में नौवहन के लिए बनाया गया था। कथन 2 गलत है, यह उत्तरी और दक्षिणी भूभागों के आकार को कम करके दिखाता है, न कि बढ़ा-चढ़ाकर। कथन 3 सही है, भारत ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है और समान क्षेत्र प्रक्षेपणों के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा मानचित्र प्रक्षेपण महाद्वीपीय और क्षेत्रीय भूभागों के सापेक्ष आकार या क्षेत्रों को संरक्षित करता है?

  1. मर्केटर प्रक्षेपण
  2. समान क्षेत्र प्रक्षेपण (Equal Area projection)
  3. रॉबिन्सन प्रक्षेपण
  4. प्लेन प्रक्षेपण

उत्तर: समान क्षेत्र प्रक्षेपण (Equal Area projection) — समान क्षेत्र प्रक्षेपण (Equal Area projection) विशेष रूप से महाद्वीपीय और क्षेत्रीय भूभागों के सापेक्ष आकार या क्षेत्रों को संरक्षित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जिससे विभिन्न क्षेत्रों के कथित आकार में विकृतियों को दूर करने में मदद मिलती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा ‘मानचित्र को सही करना’ प्रस्ताव के पीछे के उद्देश्यों की विवेचना कीजिए। भारत ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए किन तकनीकी और कार्यप्रणाली संबंधी विचारों पर बल दिया है? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: संयुक्त राष्ट्र महासभा के ‘मानचित्र को सही करना’ प्रस्ताव का संक्षिप्त परिचय और इसके मुख्य उद्देश्य।
2. प्रस्ताव के उद्देश्य: मर्केटर प्रक्षेपण की सीमाओं और इसके कारण होने वाली महाद्वीपीय विकृतियों (विशेषकर अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया के संदर्भ में) पर चर्चा। वैश्विक कार्टोग्राफिक प्रतिनिधित्व में संतुलन और भौगोलिक सटीकता को बढ़ावा देने का लक्ष्य।
3. भारत का रुख और तकनीकी विचार: भारत द्वारा प्रस्ताव के समर्थन का कारण। समान क्षेत्र प्रक्षेपणों (Equal Area projections) के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देने पर भारत का जोर।
4. भारत द्वारा स्पष्टीकरण: भारत का यह स्पष्टीकरण कि प्रस्ताव को किसी विशिष्ट प्रक्षेपण (जैसे इक्वल अर्थ प्रक्षेपण) का समर्थन करने के बजाय ‘तकनीकी और कार्यप्रणाली-तटस्थ’ (technological and methodological-neutral) रहना चाहिए। विभिन्न कार्टोग्राफिक उद्देश्यों के लिए विभिन्न प्रक्षेपणों की आवश्यकता पर बल।
5. निष्कर्ष: वैश्विक भौगोलिक समझ और प्रतिनिधित्व में सटीकता के महत्व को रेखांकित करते हुए एक संतुलित निष्कर्ष।

स्रोत: orissapost.com


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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