मद्रास उच्च न्यायालय ने 50 वर्ष से अधिक उम्र की विदेशी महिला को दिया आईवीएफ उपचार का अधिकार

Madras High Court allows foreign national aged above 50 to undergo IVF treatment — labelled illustration

मद्रास उच्च न्यायालय ने 50 वर्ष से अधिक उम्र की विदेशी महिला को दिया आईवीएफ उपचार का अधिकार

✎ सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 भारत में ART सेवाओं को विनियमित करता है, जिसमें महिलाओं के लिए 50 वर्ष और पुरुषों के लिए 55 वर्ष की ऊपरी आयु सीमा निर्धारित है, लेकिन मद्रास उच्च न्यायालय ने मानवीय परिस्थितियों…

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सामाजिक न्याय: स्वास्थ्य, मानव संसाधन से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।  |  GS Paper II — शासन, संविधान और राजव्यवस्था: विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप तथा उनके डिज़ाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे।
  • Prelims: सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021, इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF), उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार, चिकित्सा वीज़ा, जीवन प्रत्याशा, न्यायिक सक्रियता
  • Essay: कानून का लचीलापन और मानवीय परिस्थितियाँ: क्या कानून को व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुकूल होना चाहिए?, चिकित्सा पर्यटन और भारत: अवसर और चुनौतियाँ।

त्वरित पुनरावृत्ति: सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 भारत में ART सेवाओं को विनियमित करता है, जिसमें महिलाओं के लिए 50 वर्ष और पुरुषों के लिए 55 वर्ष की ऊपरी आयु सीमा निर्धारित है, लेकिन मद्रास उच्च न्यायालय ने मानवीय परिस्थितियों के आधार पर इसमें लचीलापन दिखाया है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

यह खबर चर्चा में क्यों?

मद्रास उच्च न्यायालय ने एक विदेशी नागरिक को, जिसकी आयु 50 वर्ष से अधिक हो गई थी, चेन्नई में इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) उपचार कराने की अनुमति दी है। न्यायालय ने यह टिप्पणी की कि संसद ने सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 (Assisted Reproductive Technology (Regulation) Act, 2021) के तहत ऊपरी आयु सीमा केवल भारत में जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) को ध्यान में रखते हुए निर्धारित की थी, न कि अन्य देशों की परिस्थितियों को। यह निर्णय अधिनियम के प्रावधानों के लचीलेपन और मानवीय दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित करता है।

पृष्ठभूमि

  • सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 भारत में ART क्लीनिकों और बैंकों के विनियमन का प्रावधान करता है।
  • इस अधिनियम का उद्देश्य ART प्रक्रियाओं के नैतिक और सुरक्षित अभ्यास को सुनिश्चित करना है।
  • अधिनियम के तहत, ART प्रक्रियाओं से गुजरने वाली महिलाओं के लिए ऊपरी आयु सीमा 50 वर्ष और पुरुषों के लिए 55 वर्ष निर्धारित की गई है।
  • यह आयु सीमा बच्चों के कल्याण और भारत में उनके पालन-पोषण की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तय की गई है।
  • वर्तमान मामले में, याचिकाकर्ता दंपति श्रीलंकाई मूल के थे और यू.के. में स्थायी रूप से बस गए थे, जहाँ वे अपने बच्चों का पालन-पोषण करना चाहते थे।
  • दंपति ने 2013 में यू.के. में उपचार शुरू किया था और भ्रूण (embryos) को 2021 के अधिनियम के लागू होने से बहुत पहले ही फ्रीज कर दिया था।

सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 क्या है?

  • यह अधिनियम भारत में सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (ART) सेवाओं को विनियमित करने के लिए बनाया गया है, जिसमें इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF), सरोगेसी (Surrogacy) आदि शामिल हैं।
  • इसका मुख्य उद्देश्य ART क्लीनिकों और ART बैंकों का विनियमन करना, ART प्रक्रियाओं के सुरक्षित और नैतिक अभ्यास को सुनिश्चित करना है।
  • अधिनियम के तहत, राष्ट्रीय सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी और सरोगेसी बोर्ड (National Assisted Reproductive Technology and Surrogacy Board) तथा राज्य बोर्डों की स्थापना का प्रावधान है।
  • यह अधिनियम ART क्लीनिकों और बैंकों के पंजीकरण को अनिवार्य बनाता है और उनके लिए कुछ न्यूनतम मानक निर्धारित करता है।
  • अधिनियम महिलाओं के लिए 50 वर्ष और पुरुषों के लिए 55 वर्ष की ऊपरी आयु सीमा निर्धारित करता है, जिसके बाद वे ART प्रक्रियाओं से नहीं गुजर सकते।
  • यह अधिनियम ART प्रक्रियाओं से पैदा हुए बच्चों के अधिकारों की रक्षा करता है और दाता (donor) के अधिकारों व गोपनीयता को भी सुनिश्चित करता है।
  • अधिनियम में ART सेवाओं के दुरुपयोग, मानव भ्रूणों के अवैध व्यापार और लिंग चयन जैसी प्रथाओं को रोकने के लिए कड़े प्रावधान शामिल हैं।
  • इस अधिनियम का उद्देश्य भारत में चिकित्सा पर्यटन (Medical Tourism) के बढ़ते क्षेत्र में ART सेवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा को बनाए रखना भी है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 भारत में सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (ART) सेवाओं को विनियमित करता है।
उम्र सीमा अधिनियम महिलाओं के लिए 50 वर्ष और पुरुषों के लिए 55 वर्ष की ऊपरी आयु सीमा निर्धारित करता है।
मद्रास उच्च न्यायालय का निर्णय एक विदेशी नागरिक को 50 वर्ष से अधिक आयु होने पर भी IVF उपचार कराने की अनुमति दी।
न्यायालय का तर्क आयु सीमा भारत में जीवन प्रत्याशा और बच्चों के कल्याण को ध्यान में रखकर तय की गई थी, न कि अन्य देशों के लिए।
विशेष परिस्थितियाँ याचिकाकर्ता ने 2013 में भ्रूण जमा किए थे, 2023 से भारत में उपचार करा रहे थे, और भारतीय चिकित्सा वीज़ा वैध आयु सीमा के भीतर प्राप्त किया था।

महत्व

न्यायिक व्याख्या और अधिकार क्षेत्र

  • यह निर्णय सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 (Assisted Reproductive Technology (Regulation) Act, 2021) के प्रावधानों की न्यायिक व्याख्या प्रस्तुत करता है, विशेषकर आयु सीमा के संबंध में।
  • यह दर्शाता है कि न्यायालय असाधारण परिस्थितियों में मानवीय त्रुटियों और विदेशी नागरिकों की विशिष्ट स्थितियों पर विचार कर सकता है, भले ही अधिनियम की कठोरता मौजूद हो।
  • यह भारत के भीतर चिकित्सा पर्यटन (Medical Tourism) के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम कर सकता है, जहाँ विदेशी नागरिक विशिष्ट उपचारों के लिए आते हैं।

सामाजिक और नैतिक निहितार्थ

  • यह निर्णय प्रजनन अधिकारों (Reproductive Rights) और व्यक्तियों की स्वायत्तता (Autonomy) के व्यापक मुद्दे पर प्रकाश डालता है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो वृद्धावस्था में प्रजनन क्षमता की तलाश में हैं।
  • यह भारत में जीवन प्रत्याशा और अन्य देशों में जीवन प्रत्याशा के बीच के अंतर को स्वीकार करता है, जो कानून के सार्वभौमिक अनुप्रयोग की सीमाओं को दर्शाता है।

कानूनी और नीतिगत निहितार्थ

  • यह भविष्य में ART अधिनियम में संभावित संशोधनों या स्पष्टीकरणों की आवश्यकता पर बल दे सकता है, विशेषकर विदेशी नागरिकों और असाधारण परिस्थितियों के संबंध में।
  • यह चिकित्सा वीज़ा (Medical Visa) प्रक्रियाओं और भारत में चिकित्सा उपचार की तलाश करने वाले विदेशी नागरिकों के लिए आयु-संबंधी नियमों के बीच सामंजस्य स्थापित करने की आवश्यकता को उजागर करता है।

चुनौतियाँ

1. कानून का कठोर अनुप्रयोग बनाम मानवीय परिस्थितियाँ

  • अधिनियम में निर्धारित कठोर आयु सीमा का सामना उन व्यक्तियों द्वारा किया जाता है जिनकी परिस्थितियाँ अद्वितीय होती हैं, जिससे मानवीय आधार पर छूट की आवश्यकता उत्पन्न होती है।
  • न्यायालय को कानून के उद्देश्य (भारत में बच्चों का कल्याण और जीवन प्रत्याशा) और व्यक्तिगत प्रजनन अधिकारों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।

2. चिकित्सा पर्यटन और नियामक ढाँचा

  • भारत चिकित्सा पर्यटन का एक केंद्र है, लेकिन ART जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विदेशी नागरिकों के लिए विशिष्ट नियम अक्सर अस्पष्ट होते हैं या कठोर रूप से लागू होते हैं।
  • विदेशी नागरिकों के लिए चिकित्सा वीज़ा और उपचार के नियमों के बीच सामंजस्य की कमी से कानूनी जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

3. प्रजनन अधिकार और नैतिक दुविधाएँ

  • वृद्धावस्था में प्रजनन क्षमता की तलाश करने वाले व्यक्तियों के अधिकार और जन्म लेने वाले बच्चे के कल्याण के बीच नैतिक दुविधाएँ मौजूद हैं।
  • कानून का उद्देश्य बच्चों के कल्याण को सुनिश्चित करना है, लेकिन यह व्यक्तिगत स्वायत्तता के अधिकार को भी प्रभावित कर सकता है।

4. अंतर्राष्ट्रीय तुलना और घरेलू कानून

  • भारतीय कानून अन्य देशों की जीवन प्रत्याशा और सामाजिक-आर्थिक स्थितियों को ध्यान में रखे बिना आयु सीमा निर्धारित करता है, जिससे विदेशी नागरिकों के लिए समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
  • एक सार्वभौमिक कानून के बजाय, विभिन्न देशों की विशिष्टताओं को ध्यान में रखने की आवश्यकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
ART अधिनियम की आयु सीमा भारत की जीवन प्रत्याशा पर आधारित, विदेशी नागरिकों के लिए अनुपयुक्त हो सकती है।
विदेशी नागरिकों के लिए उपचार चिकित्सा वीज़ा और उपचार के नियमों के बीच विसंगतियाँ।
मानवीय त्रुटि और कानूनी परिणाम छोटी सी मानवीय त्रुटि के कारण उपचार से वंचित होने का जोखिम।
प्रजनन अधिकारों का संतुलन व्यक्तिगत प्रजनन अधिकारों और जन्म लेने वाले बच्चे के कल्याण के बीच संतुलन साधना।
न्यायिक सक्रियता की सीमाएँ कानून के दायरे में रहते हुए असाधारण परिस्थितियों में हस्तक्षेप की सीमाएँ।

आगे की राह

  • सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 में विदेशी नागरिकों के लिए विशिष्ट प्रावधानों या छूट तंत्रों को शामिल करने पर विचार किया जाना चाहिए।
  • चिकित्सा पर्यटन को बढ़ावा देने और विदेशी नागरिकों के लिए उपचार को सुगम बनाने हेतु चिकित्सा वीज़ा नियमों और ART उपचार दिशानिर्देशों के बीच सामंजस्य स्थापित किया जाए।
  • अधिनियम के तहत ‘असाधारण परिस्थितियों’ को परिभाषित करने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश विकसित किए जाएँ, जिससे न्यायालयों को ऐसे मामलों में निर्णय लेने में सहायता मिल सके।
  • प्रजनन अधिकारों, बच्चे के कल्याण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाने के लिए व्यापक सार्वजनिक बहस और हितधारक परामर्श आयोजित किए जाएँ।
  • ART उपचार चाहने वाले विदेशी नागरिकों को उनके अधिकारों और दायित्वों के बारे में स्पष्ट जानकारी प्रदान करने के लिए एक केंद्रीकृत सूचना प्रणाली स्थापित की जाए।
  • कानून के प्रावधानों की नियमित समीक्षा की जाए ताकि बदलते सामाजिक-आर्थिक और चिकित्सा परिदृश्यों के अनुकूल इसे अद्यतन किया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 · उच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार · जीवन प्रत्याशा · चिकित्सा पर्यटन · न्यायिक सक्रियता · मानवाधिकार · विदेशी नागरिक · चिकित्सा वीजा · प्रजनन अधिकार · कानून की व्याख्या · संघीय ढाँचा · नीति निर्माण

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 14’, ‘note’: ‘कानून के समक्ष समानता’}

अवधारणा प्रवाह

सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 लागू होता है।  →  अधिनियम महिलाओं के लिए 50 वर्ष की ऊपरी आयु सीमा निर्धारित करता है।  →  एक विदेशी नागरिक 50 वर्ष से अधिक आयु होने पर IVF उपचार चाहता है।  →  अस्पताल अधिनियम के प्रावधानों के कारण उपचार से इनकार करता है।  →  याचिकाकर्ता मद्रास उच्च न्यायालय में अपील करता है।  →  उच्च न्यायालय असाधारण परिस्थितियों के आधार पर उपचार की अनुमति देता है।  →  न्यायालय का निर्णय ART अधिनियम की व्याख्या को प्रभावित करता है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह अधिनियम भारत में सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (ART) क्लीनिकों और बैंकों के विनियमन का प्रावधान करता है।
2. इस अधिनियम के तहत महिलाओं के लिए ART प्रक्रियाओं से गुजरने की ऊपरी आयु सीमा 50 वर्ष निर्धारित की गई है।
3. यह अधिनियम विदेशी नागरिकों पर लागू नहीं होता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। अधिनियम भारत में ART क्लीनिकों और बैंकों को विनियमित करता है और महिलाओं के लिए 50 वर्ष की ऊपरी आयु सीमा निर्धारित करता है। कथन 3 गलत है, क्योंकि अधिनियम विदेशी नागरिकों पर भी लागू होता है, जैसा कि मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले में स्पष्ट किया गया है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद उच्च न्यायालयों को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन सहित अन्य उद्देश्यों के लिए रिट जारी करने का अधिकार देता है?

  1. अनुच्छेद 32
  2. अनुच्छेद 136
  3. अनुच्छेद 226
  4. अनुच्छेद 142

उत्तर: अनुच्छेद 226 — अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन और किसी अन्य उद्देश्य के लिए रिट जारी करने का अधिकार देता है। अनुच्छेद 32 सर्वोच्च न्यायालय को यह शक्ति देता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत निर्धारित आयु सीमा के संबंध में मद्रास उच्च न्यायालय के हालिया फैसले का समालोचनात्मक परीक्षण करें। क्या यह निर्णय भारत में चिकित्सा पर्यटन और प्रजनन अधिकारों पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 (Assisted Reproductive Technology (Regulation) Act, 2021) का संक्षिप्त परिचय और इसके तहत निर्धारित आयु सीमा (महिलाओं के लिए 50 वर्ष, पुरुषों के लिए 55 वर्ष) का उल्लेख।
2. मद्रास उच्च न्यायालय का फैसला: मामले के तथ्यों का संक्षिप्त विवरण (विदेशी नागरिक, 50 वर्ष से अधिक आयु, UK में उपचार शुरू करना, भारत में इलाज जारी रखने की इच्छा) और न्यायालय के तर्क (भारत की जीवन प्रत्याशा के आधार पर आयु सीमा, विदेशियों पर इसका प्रभाव, मानवीय त्रुटि, भ्रूण का पहले से जमे होना) का उल्लेख।
3. फैसले का समालोचनात्मक परीक्षण:
a. न्यायिक सक्रियता (Judicial Activism) और कानून की व्याख्या: क्या न्यायालय ने कानून की भावना से परे जाकर व्याख्या की है या मानवीय दृष्टिकोण अपनाया है।
b. विधायी इरादा बनाम व्यक्तिगत अधिकार: संसद के आयु सीमा निर्धारित करने के पीछे के उद्देश्यों (बच्चों का कल्याण, माता-पिता की जीवन प्रत्याशा) और व्यक्तिगत प्रजनन अधिकारों के बीच संतुलन।
c. ‘असाधारण परिस्थितियों’ की अवधारणा: न्यायालय द्वारा ‘असाधारण परिस्थिति’ (extraordinary circumstance) के आधार पर छूट देने का औचित्य।
4. चिकित्सा पर्यटन (Medical Tourism) पर प्रभाव:
a. सकारात्मक प्रभाव: भारत को एक पसंदीदा चिकित्सा पर्यटन गंतव्य के रूप में बढ़ावा देना, विशेषकर ART उपचारों के लिए।
b. संभावित चुनौतियाँ: आयु सीमा में छूट के लिए भविष्य में इसी तरह के मामलों की बाढ़, नैतिक और नियामक मुद्दे।
5. प्रजनन अधिकारों पर प्रभाव:
a. व्यक्तिगत स्वायत्तता: व्यक्तियों के प्रजनन संबंधी निर्णय लेने के अधिकार को मजबूत करना।
b. सार्वभौमिकता बनाम राष्ट्रीय कानून: क्या राष्ट्रीय कानून को अंतरराष्ट्रीय संदर्भों में लचीला होना चाहिए।
6. निष्कर्ष: फैसले के महत्व का सारांश, भारत में प्रजनन कानून और चिकित्सा पर्यटन के भविष्य के लिए निहितार्थों पर संतुलित दृष्टिकोण।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


Related guides on our sites

No Comments

Post A Comment