27 Jul माईगॉव से नीति निर्माण में बढ़ी नागरिक भागीदारी: जानिए कैसे सरकार ले रही आपकी राय!
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, संविधान और राजव्यवस्था, सामाजिक न्याय | GS Paper III — अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी | GS Paper IV — नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिरुचि
- Prelims: माईगॉव प्लेटफॉर्म, नागरिक सहभागिता, डिजिटल इंडिया, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), डेटा संरक्षण, आधार सुधार
- Essay: लोकतंत्र में नागरिक सहभागिता का महत्व, डिजिटल शासन और सुशासन, भारत में नीति-निर्माण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही
त्वरित पुनरावृत्ति: माईगॉव प्लेटफॉर्म भारत सरकार का एक ऑनलाइन नागरिक सहभागिता मंच है जो नागरिकों को नीति-निर्माण प्रक्रिया में सीधे भाग लेने और अपने विचारों तथा सुझावों को सरकार के साथ साझा करने में सक्षम बनाता है, जिससे शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology) द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, केंद्र सरकार के माईगॉव (MyGov) प्लेटफॉर्म ने नीति-निर्माण में नागरिकों की भागीदारी को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है। बजट, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy), डेटा संरक्षण (Data Protection) और आधार (Aadhaar) सुधारों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सार्वजनिक परामर्शों में 6.32 करोड़ से अधिक नागरिकों ने अपनी सहभागिता दर्ज की है, जिससे शासन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हुई है।
पृष्ठभूमि
- माईगॉव प्लेटफॉर्म को नागरिक सहभागिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक ऑनलाइन मंच के रूप में शुरू किया गया था।
- यह विभिन्न सरकारी मंत्रालयों और विभागों को नागरिकों के विचारों और सुझावों को नीति-निर्माण की प्रक्रिया में शामिल करने में सहायता करता है।
- प्लेटफॉर्म चर्चाओं, रचनात्मक गतिविधियों, पोल (Poll), सर्वेक्षणों (Surveys) और जमीनी स्तर की गतिविधियों के माध्यम से नागरिक जुड़ाव को प्रोत्साहित करता है।
- पिछले पांच वर्षों में, माईगॉव पर 180 चर्चाएं, 15 पोल और 56 सर्वेक्षण आयोजित किए गए हैं, जिनमें लाखों नागरिकों ने भाग लिया है।
- हाल के परामर्शों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक-2022, केंद्रीय बजट परामर्श और आधार प्रमाणीकरण नियमों में संशोधन शामिल हैं।
- स्वतंत्र तृतीय-पक्ष प्रभाव आकलन अध्ययनों ने माईगॉव की जन-भागीदारी के विस्तार में भूमिका की पुष्टि की है और समावेशिता बढ़ाने के लिए बहुभाषी सहायता तथा मोबाइल पहुंच जैसे सुधार किए गए हैं।
माईगॉव (MyGov) प्लेटफॉर्म क्या है?
- माईगॉव भारत सरकार का एक नागरिक सहभागिता मंच है।
- इसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों को विभिन्न सरकारी नीतियों, कार्यक्रमों और योजनाओं के निर्माण और कार्यान्वयन में सीधे भाग लेने में सक्षम बनाना है।
- यह प्लेटफॉर्म नागरिकों को सरकार के साथ अपने विचार, सुझाव और प्रतिक्रिया साझा करने के लिए एक सीधा और पारदर्शी माध्यम प्रदान करता है।
- माईगॉव चर्चा मंच, ऑनलाइन सर्वेक्षण, पोल, ब्लॉग और रचनात्मक प्रतियोगिताओं जैसे विभिन्न इंटरैक्टिव टूल का उपयोग करता है।
- यह विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा प्रस्तावित नीतियों पर सार्वजनिक परामर्श आयोजित करता है, जिससे नीति-निर्माण प्रक्रिया अधिक समावेशी बनती है।
- संकलित राय और सुझाव संबंधित मंत्रालयों/विभागों को नीतियों, योजनाओं या कार्यक्रमों को तैयार करने या उनकी समीक्षा करने के लिए भेजे जाते हैं।
- प्लेटफॉर्म 12 भाषाओं (अंग्रेजी और 11 भारतीय क्षेत्रीय भाषाएं) में उपलब्ध है और एक समर्पित मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से भी पहुंच योग्य है।
- यह डिजिटल इंडिया (Digital India) पहल का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो सुशासन (Good Governance) और सहभागी लोकतंत्र (Participatory Democracy) को बढ़ावा देता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| बहुभाषी सहायता | भाषाई बाधाओं को दूर कर 12 भाषाओं में पहुंच सुनिश्चित करना। |
| मोबाइल पहुंच | समर्पित मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से व्यापक उपयोगकर्ता आधार तक पहुंच। |
| विस्तारित पहुंच | डिजिटल और सोशल मीडिया उपस्थिति को मजबूत कर शासन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना। |
| उपयोगकर्ता अनुभव | वेब इंटरफेस को नियमित रूप से अपडेट कर पहुंच और उपयोगिता में सुधार। |
| सार्वजनिक परामर्श | बजट, राष्ट्रीय शिक्षा नीति, डेटा संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर नागरिकों के विचार प्राप्त करना। |
महत्व
शासन और नीति-निर्माण
- माईगॉव प्लेटफॉर्म नागरिकों को नीति-निर्माण प्रक्रिया में सीधे भाग लेने का अवसर प्रदान करता है, जिससे शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है।
- यह सरकार को जनहित और लोककल्याण से जुड़े विषयों पर नागरिकों के विचारों और सुझावों को जानने में मदद करता है, जिससे अधिक समावेशी नीतियां बनती हैं।
- नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से नीतियों और कार्यक्रमों को जमीनी हकीकत के अनुरूप बनाने में सहायता मिलती है, जिससे उनकी प्रभावशीलता बढ़ती है।
लोकतंत्र और नागरिक सहभागिता
- यह मंच सहभागी लोकतंत्र (Participatory Democracy) को बढ़ावा देता है, जहां नागरिक केवल मतदाता नहीं बल्कि नीति-निर्माता भी होते हैं।
- यह नागरिकों और सरकार के बीच संवाद के लिए एक सीधा और सुगम माध्यम प्रदान करता है, जिससे विश्वास और सहयोग बढ़ता है।
- प्लेटफॉर्म पर चर्चा, पोल और सर्वेक्षणों के माध्यम से नागरिक विभिन्न राष्ट्रीय पहलों में अपनी राय व्यक्त कर सकते हैं, जिससे नागरिक सशक्तिकरण होता है।
सामाजिक-आर्थिक विकास
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy)-2020 जैसे महत्वपूर्ण सुधारों पर सार्वजनिक परामर्श से शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
- डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक (Digital Personal Data Protection Bill)-2022 पर नागरिकों की राय से डेटा गोपनीयता और सुरक्षा से संबंधित कानूनों को मजबूत किया जा सकता है।
- केंद्रीय बजट परामर्श में नागरिकों की भागीदारी से वित्तीय नीतियों को जन-केंद्रित बनाने में सहायता मिलती है, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) और समावेशी विकास को बढ़ावा मिलता है।
चुनौतियाँ
1. डिजिटल डिवाइड
- देश में अभी भी एक बड़ा वर्ग डिजिटल रूप से साक्षर नहीं है या उसके पास इंटरनेट तक पहुंच नहीं है, जिससे उनकी भागीदारी सीमित हो सकती है।
- ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच डिजिटल पहुंच में असमानता के कारण सभी नागरिकों की समान भागीदारी सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, शासन
2. प्रतिक्रिया का कार्यान्वयन
- नागरिकों द्वारा दिए गए सुझावों और प्रतिक्रियाओं को नीति-निर्माण में किस हद तक शामिल किया जाता है, यह एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय है।
- संबंधित मंत्रालयों/विभागों द्वारा कार्रवाई प्रतिवेदन (Action Taken Report) और उसके आधार पर नीतियों में परिवर्तन की प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता
3. प्रतिनिधित्व की गुणवत्ता
- प्लेटफॉर्म पर भाग लेने वाले नागरिकों की राय कितनी हद तक पूरे समाज का प्रतिनिधित्व करती है, यह सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
- कुछ विशिष्ट समूहों या हितों की अत्यधिक भागीदारी से अन्य वर्गों की आवाज़ दब सकती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, लोकतंत्र
4. सुरक्षा और गोपनीयता
- नागरिकों द्वारा साझा की गई व्यक्तिगत जानकारी और सुझावों की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- डेटा उल्लंघनों (Data Breaches) और साइबर हमलों से प्लेटफॉर्म को सुरक्षित रखना एक निरंतर चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा, ई-शासन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| डिजिटल साक्षरता की कमी | इंटरनेट पहुंच और डिजिटल कौशल के अभाव में सभी नागरिकों की समान भागीदारी सुनिश्चित करना कठिन। |
| सुझावों का कार्यान्वयन | नागरिकों की प्रतिक्रियाओं को नीति-निर्माण में वास्तविक रूप से कितना शामिल किया जाता है, इसकी पारदर्शिता का अभाव। |
| प्रतिनिधित्व का पूर्वाग्रह | प्लेटफॉर्म पर भाग लेने वाले नागरिकों की राय का पूरे समाज का प्रतिनिधित्व न कर पाना। |
| डेटा सुरक्षा | नागरिकों द्वारा साझा की गई व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता और सुरक्षा बनाए रखना। |
| अत्यधिक जानकारी का बोझ | विभिन्न परामर्शों और सुझावों की बड़ी मात्रा को प्रभावी ढंग से संसाधित और विश्लेषण करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020
आगे की राह
- डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों का विस्तार करना, विशेषकर ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में, ताकि अधिक नागरिक माईगॉव जैसे प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकें।
- नागरिकों द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर की गई कार्रवाई पर नियमित और पारदर्शी रिपोर्ट (Action Taken Report) प्रकाशित करना, जिससे विश्वास बढ़े।
- प्लेटफॉर्म को और अधिक समावेशी बनाने के लिए विभिन्न सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के लोगों को आकर्षित करने हेतु लक्षित अभियान चलाना।
- नागरिकों की प्रतिक्रियाओं के विश्लेषण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) और मशीन लर्निंग (Machine Learning) जैसी तकनीकों का उपयोग करना, ताकि प्रभावी निर्णय लिए जा सकें।
- डेटा सुरक्षा और गोपनीयता प्रोटोकॉल को मजबूत करना, ताकि नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित रहे और वे बिना किसी डर के अपनी राय साझा कर सकें।
- स्थानीय भाषाओं में सामग्री और इंटरफेस को और बेहतर बनाना, जिससे भाषाई विविधता वाले देश में सभी नागरिकों की पहुंच सुनिश्चित हो सके।
- नागरिकों को नीति-निर्माण प्रक्रिया के विभिन्न चरणों के बारे में शिक्षित करना, ताकि वे अधिक प्रभावी और सूचित सुझाव दे सकें।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
नागरिक सहभागिता · माईगॉव प्लेटफॉर्म · नीति-निर्माण प्रक्रिया · डिजिटल शासन · पारदर्शिता · जवाबदेही · राष्ट्रीय शिक्षा नीति · डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक · लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण · सुशासन
अवधारणा प्रवाह
सरकार द्वारा माईगॉव प्लेटफॉर्म की शुरुआत → नागरिकों द्वारा विभिन्न विषयों पर सुझाव/राय देना → सुझावों का संबंधित मंत्रालयों/विभागों को भेजा जाना → मंत्रालयों/विभागों द्वारा नीतियों/योजनाओं की समीक्षा → नागरिकों की प्रतिक्रियाओं के आधार पर नीतिगत बदलाव → शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही में वृद्धि
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. माईगॉव (MyGov) प्लेटफॉर्म के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह केंद्र सरकार द्वारा नीति-निर्माण प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया गया था।
2. यह केवल अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध है ताकि एकरूपता बनी रहे।
3. प्लेटफॉर्म पर प्राप्त सुझावों को संबंधित मंत्रालय/विभाग द्वारा नीतियों में शामिल करना अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 — कथन 1 सही है क्योंकि माईगॉव को नागरिक सहभागिता प्लेटफॉर्म के रूप में शुरू किया गया था। कथन 2 गलत है क्योंकि यह प्लेटफॉर्म 12 भाषाओं (अंग्रेजी और 11 भारतीय क्षेत्रीय भाषाएं) में उपलब्ध है। कथन 3 गलत है क्योंकि नागरिकों के सुझावों को नीतियों में शामिल करना संबंधित मंत्रालयों और विभागों का विशेषाधिकार बना रहता है, अनिवार्य नहीं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सी पहलें हाल ही में माईगॉव प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक परामर्श के लिए आयोजित की गई थीं?
1. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020
2. डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक-2022
3. केंद्रीय बजट परामर्श
4. 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के लिए ज्ञापन
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — दिए गए सभी विकल्प (राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक-2022, केंद्रीय बजट परामर्श और 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के लिए ज्ञापन) हाल ही में माईगॉव प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक परामर्श के लिए आयोजित किए गए थे, जैसा कि प्रेस विज्ञप्ति में उल्लेख किया गया है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ माईगॉव (MyGov) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म भारत में नीति-निर्माण प्रक्रिया में नागरिक सहभागिता को किस प्रकार सुदृढ़ कर रहे हैं? सुशासन को बढ़ावा देने में इन प्लेटफॉर्मों की भूमिका का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में माईगॉव जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्मों द्वारा नागरिक सहभागिता को बढ़ावा देने के विभिन्न तरीकों पर चर्चा करें, जैसे कि चर्चा, पोल, सर्वेक्षण और बहुभाषी पहुंच। दूसरे भाग में, सुशासन के संदर्भ में इन प्लेटफॉर्मों की भूमिका का विश्लेषण करें, जिसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और समावेशिता जैसे पहलुओं को शामिल किया जाए। साथ ही, इनकी सीमाओं और चुनौतियों (जैसे सुझावों को नीतियों में शामिल करने का विशेषाधिकार) का भी उल्लेख करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments