14 Sep यूपीएससी तैयारी: गुजरात में हुआर संरक्षण के लिए नया एक्शन प्लान, जानिए डिटेल्स
✎ महान भारतीय बस्टर्ड (GIB) एक 'गंभीर रूप से लुप्तप्राय' प्रजाति है जिसके संरक्षण हेतु 'गुजरात एक्शन प्लान' जारी किया गया है, जो आवास पुनर्स्थापन और समुदाय की भागीदारी के माध्यम से भू-दृश्य-स्तरीय संरक्षण पर केंद्रित है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता
- Prelims: महान भारतीय बस्टर्ड (GIB), प्रोजेक्ट चीता, घासस्थल पुनर्स्थापना, गुजरात एक्शन प्लान, भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), प्रोसोपिस जुलिफ्लोरा, IUCN रेड लिस्ट
- Essay: भारत में जैव विविधता संरक्षण: चुनौतियाँ और समाधान, पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित संरक्षण का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: महान भारतीय बस्टर्ड (GIB) एक ‘गंभीर रूप से लुप्तप्राय’ प्रजाति है जिसके संरक्षण हेतु ‘गुजरात एक्शन प्लान’ जारी किया गया है, जो आवास पुनर्स्थापन और समुदाय की भागीदारी के माध्यम से भू-दृश्य-स्तरीय संरक्षण पर केंद्रित है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने हाल ही में भुज, कच्छ (गुजरात) में महान भारतीय बस्टर्ड (GIB) के संरक्षण की स्थिति, घासस्थल पुनर्स्थापना और प्रोजेक्ट चीता से संबंधित प्रमुख कार्यक्रमों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में ‘GIB संरक्षण के लिए गुजरात एक्शन प्लान’ भी जारी किया गया, जो इस गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजाति के संरक्षण हेतु एक विज्ञान-आधारित रोडमैप प्रस्तुत करता है।
पृष्ठभूमि
- महान भारतीय बस्टर्ड (Great Indian Bustard – GIB) भारत के सबसे गंभीर रूप से संकटग्रस्त पक्षियों में से एक है, जिसे IUCN (International Union for Conservation of Nature) की रेड लिस्ट में ‘गंभीर रूप से लुप्तप्राय’ (Critically Endangered) श्रेणी में रखा गया है।
- भारत में GIB की आबादी मुख्य रूप से राजस्थान और गुजरात के कुछ हिस्सों तक सीमित है, जिसमें कच्छ क्षेत्र एक महत्वपूर्ण लेकिन छोटी और अलग-थलग आबादी का समर्थन करता है।
- GIB के आवास मुख्य रूप से घासस्थल और खुले प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र हैं, जो कृषि विस्तार, बुनियादी ढाँचा विकास और ऊर्जा लाइनों जैसे खतरों का सामना कर रहे हैं।
- ‘प्रोजेक्ट चीता’ भारत में चीतों को फिर से लाने की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका उद्देश्य देश के पारिस्थितिकी तंत्र में चीतों की आबादी को पुनः स्थापित करना है।
- घासस्थल भारत के कुल भू-भाग का लगभग 24 प्रतिशत हिस्सा कवर करते हैं और कई प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण आवास प्रदान करते हैं, लेकिन ये देश के सबसे अधिक क्षतिग्रस्त और कम संरक्षित पारिस्थितिकी तंत्रों में से हैं।
- संरक्षण प्रयासों में अब एकल प्रजाति के बजाय संपूर्ण भू-दृश्यों के पुनर्स्थापन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जिसमें वैज्ञानिक प्रबंधन, आवास पुनर्स्थापन और समुदाय की भागीदारी शामिल है।
महान भारतीय बस्टर्ड (GIB) और संबंधित संरक्षण प्रयास
- महान भारतीय बस्टर्ड (GIB) एक बड़ा मैदानी पक्षी है जो भारत और पाकिस्तान के शुष्क और अर्ध-शुष्क घासस्थलों में पाया जाता है।
- यह राजस्थान का राज्य पक्षी है और भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के तहत संरक्षित है।
- GIB संरक्षण के लिए गुजरात एक्शन प्लान का उद्देश्य 30 से अधिक पक्षियों की न्यूनतम व्यवहार्य आबादी स्थापित करना और 200–500 वर्ग किमी सुरक्षित, सतत आवास सुनिश्चित करना है।
- इस योजना में आवास पुनर्स्थापन, चराई प्रबंधन, आक्रामक प्रजातियों (जैसे प्रोसोपिस जुलिफ्लोरा) को हटाना, शिकारी प्रबंधन और बुनियादी ढांचे से जुड़े खतरों को कम करने जैसे हस्तक्षेप शामिल हैं।
- एक ‘जंप-स्टार्ट’ हस्तक्षेप के तहत जंगली GIB मादाओं द्वारा दिए गए बांझ अंडों को संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम से प्राप्त सजीव अंडों में बदला गया है, जिससे चूजों के जीवित रहने की दर में सुधार हुआ है।
- नालिया (कच्छ) में एक GIB सॉफ्ट रिलीज सेंटर विकसित किया गया है, जो कैद-प्रजनित पक्षियों को जंगल में छोड़ने से पहले अनुकूलित करेगा।
- घासस्थल पुनर्स्थापन कार्यक्रम का लक्ष्य भारत में घासस्थलों के पारिस्थितिक महत्व को पहचानना और उनके प्रबंधन के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा विकसित करना है, जिससे GIB और अन्य विशेषज्ञ वन्यजीवों को लाभ होगा।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| महान भारतीय बस्टर्ड (GIB) संरक्षण | यह गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजाति के अस्तित्व को सुनिश्चित करता है और जैव विविधता के संरक्षण में सहायक है। |
| घासस्थल पुनर्स्थापना | पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने, मृदा संरक्षण और विभिन्न प्रजातियों के आवास के लिए महत्वपूर्ण। |
| प्रोजेक्ट चीता की प्रगति | भारत में चीतों को फिर से लाने और पारिस्थितिकी तंत्र में शीर्ष शिकारी की भूमिका को बहाल करने का प्रयास। |
| गुजरात एक्शन प्लान | GIB संरक्षण के लिए विज्ञान-आधारित रोडमैप प्रदान करता है, जिसमें आवास पुनर्स्थापन और सामुदायिक भागीदारी शामिल है। |
| भू-दृश्य-स्तरीय संरक्षण | एकल प्रजाति के बजाय संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण पर केंद्रित, जो अधिक स्थायी परिणाम देता है। |
महत्व
पर्यावरणिक महत्व
- महान भारतीय बस्टर्ड (GIB) जैसी गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजातियों का संरक्षण जैव विविधता (Biodiversity) के लिए महत्वपूर्ण है।
- घासस्थलों का पुनर्स्थापन पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं जैसे जल विनियमन, मृदा संरक्षण और कार्बन पृथक्करण (Carbon Sequestration) को बढ़ाता है।
- खुले प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों का संरक्षण न केवल GIB बल्कि चिंकारा, रेगिस्तानी बिल्लियों और गिद्धों जैसी अन्य प्रजातियों के लिए भी आवास प्रदान करता है।
सामाजिक महत्व
- संरक्षण प्रयासों में स्थानीय समुदायों की भागीदारी उन्हें प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में हितधारक बनाती है, जिससे दीर्घकालिक सफलता सुनिश्चित होती है।
- पर्यावरण शिक्षा और जागरूकता को बढ़ावा मिलता है, जिससे नागरिकों में संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।
वैज्ञानिक महत्व
- GIB संरक्षण के लिए ‘जंप-स्टार्ट’ हस्तक्षेप और सॉफ्ट रिलीज सेंटर जैसी पहलें संरक्षण प्रजनन और प्रजातियों के पुनर्बहाली में नए वैज्ञानिक तरीकों का प्रदर्शन करती हैं।
- घासस्थल प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय ढांचा विकसित करने हेतु राष्ट्रीय आकलन वैज्ञानिक आधार प्रदान करेगा, जिससे प्रभावी नीति निर्माण संभव होगा।
चुनौतियाँ
1. आवास का नुकसान और विखंडन
- कृषि विस्तार, शहरीकरण और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कारण GIB के प्राकृतिक आवास सिकुड़ रहे हैं और खंडित हो रहे हैं।
- आक्रामक प्रजातियाँ जैसे प्रोसोपिस जुलिफ्लोरा घासस्थलों की प्राकृतिक वनस्पति को बाधित करती हैं, जिससे GIB और अन्य वन्यजीवों के लिए भोजन और आश्रय की कमी होती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता
2. बुनियादी ढांचा संबंधी खतरे
- बिजली लाइनों और पवन टर्बाइनों से टकराना GIB की मृत्यु का एक प्रमुख कारण है, खासकर उनके उड़ान मार्गों में।
- सड़क नेटवर्क का विस्तार और अन्य विकासात्मक गतिविधियाँ वन्यजीवों के आवागमन को बाधित करती हैं और उनके आवासों को और अलग करती हैं।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रभाव आकलन, सतत विकास
3. शिकारियों का प्रबंधन
- जंगली सूअर और आवारा कुत्ते जैसे शिकारी GIB के अंडों और चूजों के लिए खतरा पैदा करते हैं, जिससे उनकी आबादी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- शिकारियों के प्रबंधन के लिए प्रभावी रणनीतियों की आवश्यकता है, जिसमें बाड़ लगाना और लक्षित नियंत्रण शामिल है।
यूपीएससी लिंक: वन्यजीव प्रबंधन, पारिस्थितिकी
4. समुदाय की भागीदारी और जागरूकता
- स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में शामिल करना और उन्हें GIB के महत्व के बारे में शिक्षित करना एक चुनौती है।
- मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना और स्थानीय लोगों के लिए वैकल्पिक आजीविका के अवसर प्रदान करना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण शासन, सहभागी विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| GIB की घटती आबादी | गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजाति के विलुप्त होने का खतरा, जैव विविधता का नुकसान। |
| आवास का विखंडन | प्रजातियों के लिए पर्याप्त और जुड़े हुए आवासों की कमी, जिससे उनकी प्रजनन क्षमता और आनुवंशिक विविधता प्रभावित होती है। |
| बुनियादी ढांचा संबंधी मौतें | बिजली लाइनों और पवन ऊर्जा परियोजनाओं से टकराने के कारण GIB की उच्च मृत्यु दर। |
| आक्रामक प्रजातियाँ | प्रोसोपिस जुलिफ्लोरा जैसी आक्रामक प्रजातियों द्वारा घासस्थलों का अतिक्रमण, प्राकृतिक वनस्पति को नुकसान। |
| सीमित संरक्षण प्रजनन | जंगली GIB मादाओं द्वारा दिए गए बांझ अंडों की चुनौती, सफल प्रजनन कार्यक्रमों की आवश्यकता। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रोजेक्ट चीता (Project Cheetah)
आगे की राह
- GIB के प्रमुख आवासों को सुरक्षित और विस्तारित करने के लिए वैज्ञानिक आवास पुनर्स्थापन और चराई प्रबंधन रणनीतियों को लागू करना।
- बिजली लाइनों और अन्य बुनियादी ढांचागत खतरों को कम करने के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों को अपनाना, जैसे भूमिगत केबलिंग और बर्ड डायवर्टर।
- स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में सक्रिय रूप से शामिल करना, उन्हें GIB संरक्षण के महत्व के बारे में शिक्षित करना और वैकल्पिक आजीविका के अवसर प्रदान करना।
- GIB के सफल प्रजनन और पुनर्बहाली के लिए संरक्षण प्रजनन कार्यक्रमों और सॉफ्ट रिलीज सेंटरों को मजबूत करना।
- आक्रामक प्रजातियों को हटाकर और देशी वनस्पति को बढ़ावा देकर घासस्थलों के पारिस्थितिक स्वास्थ्य को बहाल करना।
- वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India) और अन्य अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग को बढ़ावा देना ताकि संरक्षण रणनीतियों के लिए वैज्ञानिक आधार प्रदान किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
महान भारतीय बस्टर्ड (GIB) · संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम · घासस्थल पुनर्स्थापना · प्रोजेक्ट चीता · भू-दृश्य-स्तरीय संरक्षण · पारिस्थितिकी तंत्र · वन्यजीव संरक्षण · जैव विविधता · पर्यावरण नीति · सामुदायिक भागीदारी
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘राज्य पर्यावरण संरक्षण का प्रयास करेगा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘वन्यजीवों की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य’}
अवधारणा प्रवाह
GIB की घटती आबादी और आवास का नुकसान → गुजरात एक्शन प्लान का विकास और कार्यान्वयन → आवास पुनर्स्थापन और शिकारी प्रबंधन → संरक्षण प्रजनन और सॉफ्ट रिलीज सेंटर → समुदाय की भागीदारी और जागरूकता → GIB आबादी में वृद्धि और पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महान भारतीय बस्टर्ड (GIB) भारत के पश्चिमी शुष्क क्षेत्रों में पाया जाने वाला एक गंभीर रूप से संकटग्रस्त पक्षी है।
2. ‘GIB संरक्षण के लिए गुजरात एक्शन प्लान’ का उद्देश्य 30 से अधिक पक्षियों की न्यूनतम व्यवहार्य आबादी स्थापित करना है।
3. प्रोसोपिस जुलिफ्लोरा (Prosopis juliflora) एक आक्रामक प्रजाति है जो घासस्थलों के पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुँचाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। GIB पश्चिमी शुष्क क्षेत्रों में पाया जाता है और IUCN की लाल सूची में ‘गंभीर रूप से संकटग्रस्त’ (Critically Endangered) श्रेणी में है। कथन 2 सही है। गुजरात एक्शन प्लान का लक्ष्य 30 से अधिक GIB की व्यवहार्य आबादी स्थापित करना है। कथन 3 सही है। प्रोसोपिस जुलिफ्लोरा एक आक्रामक विदेशी प्रजाति है जो स्थानीय वनस्पति को विस्थापित कर घासस्थलों को नुकसान पहुँचाती है।
Q2. महान भारतीय बस्टर्ड (GIB) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- यह भारत का सबसे बड़ा उड़ने वाला पक्षी है।
- यह मुख्य रूप से घासस्थलों और शुष्क कृषि क्षेत्रों में पाया जाता है।
- इसके संरक्षण के लिए ‘प्रोजेक्ट GIB’ नामक एक राष्ट्रीय कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
- यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में सूचीबद्ध है।
उत्तर: यह भारत का सबसे बड़ा उड़ने वाला पक्षी है। — विकल्प (a) सही नहीं है। महान भारतीय बस्टर्ड भारत का सबसे बड़ा उड़ने वाला पक्षी नहीं है, बल्कि यह सबसे भारी उड़ने वाले पक्षियों में से एक है। सारस क्रेन (Sarus Crane) भारत का सबसे बड़ा उड़ने वाला पक्षी है। विकल्प (b), (c) और (d) सही हैं। GIB घासस्थलों और शुष्क कृषि क्षेत्रों में पाया जाता है, इसके संरक्षण के लिए ‘प्रोजेक्ट GIB’ चलाया जा रहा है और यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में शामिल है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ महान भारतीय बस्टर्ड (GIB) के संरक्षण में भू-दृश्य-स्तरीय दृष्टिकोण के महत्व का परीक्षण कीजिए। इस संबंध में ‘GIB संरक्षण के लिए गुजरात एक्शन प्लान’ की प्रमुख विशेषताओं पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत महान भारतीय बस्टर्ड (GIB) के परिचय और उसकी संकटग्रस्त स्थिति से करें।
भू-दृश्य-स्तरीय दृष्टिकोण का महत्व समझाएँ: इसमें एकल प्रजाति के बजाय पूरे पारिस्थितिकी तंत्र, आवास पुनर्स्थापन, सामुदायिक भागीदारी और वैज्ञानिक प्रबंधन को शामिल करने पर जोर दें। यह बताएं कि कैसे यह दृष्टिकोण GIB के आवासों को व्यापक रूप से संरक्षित करता है, जिसमें अन्य विशेषज्ञ वन्यजीव भी शामिल हैं।
‘GIB संरक्षण के लिए गुजरात एक्शन प्लान’ की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन करें: इसमें 30 से अधिक पक्षियों की न्यूनतम व्यवहार्य आबादी स्थापित करने का लक्ष्य, 200-500 वर्ग किमी सुरक्षित आवास सुनिश्चित करना, लाला-रावा भू-दृश्य पर तत्काल ध्यान केंद्रित करना, आवास पुनर्स्थापन, चराई प्रबंधन, आक्रामक प्रजातियों को हटाना (जैसे प्रोसोपिस जुलिफ्लोरा), शिकारी प्रबंधन और बुनियादी ढांचे से जुड़े खतरों को कम करने जैसे हस्तक्षेप शामिल हैं।
संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम और ‘जंप-स्टार्ट’ हस्तक्षेप जैसे अभिनव प्रयासों का उल्लेख करें।
निष्कर्ष में, GIB संरक्षण के लिए इस व्यापक और समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता और संभावित सफलता पर बल दें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Gujarat PCS (GPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: हाल ही में गुजरात के भुज में ‘महान भारतीय हुआर (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड)’ संरक्षण एवं घासस्थल पुनर्स्थापना परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव द्वारा निम्नलिखित में से कौन-सा प्रमुख बिंदु उठाया गया था?
- A. गुजरात में GIB के लिए नए संरक्षण अभयारण्यों की स्थापना
- B. GIB संरक्षण हेतु अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता
- C. GIB के लिए घासस्थलों के पुनर्स्थापन एवं संरक्षण पर विशेष ध्यान
- D. गुजरात में ‘प्रोजेक्ट चीता’ के अंतर्गत GIB के संरक्षण को शामिल करना
उत्तर: C. GIB के लिए घासस्थलों के पुनर्स्थापन एवं संरक्षण पर विशेष ध्यान — भूपेंद्र यादव ने भुज में GIB संरक्षण के लिए घासस्थलों के पुनर्स्थापन एवं उनके संरक्षण पर विशेष बल दिया था, ताकि इन लुप्तप्राय पक्षियों के लिए उपयुक्त आवास उपलब्ध हो सके।
Mains: गुजरात में ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB)’ के संरक्षण एवं उसके आवासीय पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्स्थापन के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का वर्णन कीजिए। साथ ही, इन प्रयासों में आने वाली प्रमुख चुनौतियों एवं उनके निराकरण के उपायों पर प्रकाश डालिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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