मिशन कर्मयोगी: सरकारी विभागों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का बढ़ता उपयोग

मिशन कर्मयोगी: सरकारी विभागों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का बढ़ता उपयोग

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पहलू, ई-गवर्नेंस-अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही एवं संस्थागत तथा अन्य उपाय।  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी-विकास एवं उनके अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर प्रभाव।
  • Prelims: मिशन कर्मयोगी, iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025, क्षमता निर्माण
  • Essay: प्रशासनिक सुधार और सुशासन में प्रौद्योगिकी की भूमिका, भारत में डिजिटल परिवर्तन: चुनौतियाँ और अवसर

त्वरित पुनरावृत्ति: मिशन कर्मयोगी भारत में सिविल सेवकों के क्षमता निर्माण के लिए एक व्यापक कार्यक्रम है, जिसमें iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल प्रौद्योगिकियों पर प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है, जो डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के तहत डेटा गोपनीयता सुनिश्चित करता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि मिशन कर्मयोगी के तहत सरकारी अधिकारियों के क्षमता निर्माण को उच्च प्राथमिकता दी गई है, विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में। iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर AI और उभरती प्रौद्योगिकियों पर 218 पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं, जिनमें 3.3 करोड़ से अधिक शिक्षार्थियों ने पाठ्यक्रम पूरे किए हैं। इसके साथ ही, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 और नियम, 2025 व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण के लिए सहमति सुनिश्चित करते हैं।

पृष्ठभूमि

  • मिशन कर्मयोगी (National Programme for Civil Services Capacity Building) भारत में प्रशासनिक अधिकारियों के क्षमता निर्माण का एक प्रमुख कार्यक्रम है।
  • इसका उद्देश्य प्रशासनिक अधिकारियों को भविष्य के लिए तैयार करने हेतु कौशल, ज्ञान और दृष्टिकोण से लैस करना है, जिससे वे अधिक प्रभावी और कुशल बन सकें।
  • iGOT (Integrated Government Online Training) कर्मयोगी प्लेटफॉर्म इस मिशन का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो सरकारी कर्मचारियों के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के अवसर प्रदान करता है।
  • यह प्लेटफॉर्म भारत सरकार के सभी मंत्रालयों, विभागों और संगठनों के साथ-साथ राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों के 1.70 करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारियों को जोड़ता है।
  • डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025 व्यक्तिगत डेटा के संरक्षण और प्रसंस्करण के लिए एक कानूनी ढाँचा प्रदान करते हैं।
  • ये कानून सुनिश्चित करते हैं कि व्यक्तिगत डेटा का प्रसंस्करण केवल वैध उद्देश्य के लिए और व्यक्ति की स्वतंत्र, विशिष्ट, सूचित, बिना शर्त और स्पष्ट सहमति से ही किया जाए।

मिशन कर्मयोगी क्या है?

  • मिशन कर्मयोगी भारत में सिविल सेवकों के लिए एक व्यापक क्षमता निर्माण कार्यक्रम है, जिसे ‘नियम-आधारित’ से ‘भूमिका-आधारित’ मानव संसाधन प्रबंधन में बदलाव लाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करना और उन्हें ‘जन-केंद्रित’ दृष्टिकोण के साथ सेवाएँ प्रदान करने में सक्षम बनाना है।
  • यह कार्यक्रम iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन और ऑन-डिमांड प्रशिक्षण प्रदान करता है, जिसमें विभिन्न डोमेन और कार्यात्मक दक्षताओं पर पाठ्यक्रम शामिल हैं।
  • मिशन का लक्ष्य एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है जो व्यक्तिगत, संस्थागत और प्रक्रियात्मक स्तरों पर क्षमता निर्माण का समर्थन करता हो।
  • यह कार्यक्रम सरकारी कर्मचारियों को निरंतर सीखने और कौशल उन्नयन के अवसर प्रदान करके सार्वजनिक सेवा वितरण की गुणवत्ता में सुधार करना चाहता है।
  • मिशन कर्मयोगी में छह स्तंभ शामिल हैं: नीतिगत ढाँचा, संस्थागत ढाँचा, दक्षताओं का ढाँचा, डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म (iGOT कर्मयोगी), इलेक्ट्रॉनिक मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (e-HRMS) और निगरानी एवं मूल्यांकन ढाँचा।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में क्षमता निर्माण को इस मिशन के तहत उच्च प्राथमिकता दी गई है, ताकि सरकारी अधिकारी आधुनिक तकनीकी उपकरणों का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
मिशन कर्मयोगी प्रशासनिक अधिकारियों के क्षमता निर्माण और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करने का प्रमुख कार्यक्रम।
आई-गोट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म भारत सरकार, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के 1.70 करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारियों को डिजिटल कौशल प्रदान करने वाला मंच।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और उभरती प्रौद्योगिकियों पर पाठ्यक्रम मंच पर 218 पाठ्यक्रम उपलब्ध, 3.3 करोड़ से अधिक शिक्षार्थियों ने पूर्ण किए, जो अधिकारियों को आवश्यक डिजिटल ज्ञान और कौशल प्रदान करते हैं।
डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 और नियम, 2025 व्यक्तिगत डेटा के वैध और सहमति आधारित प्रसंस्करण को सुनिश्चित करते हैं, AI उपयोग में डेटा गोपनीयता का आधार।
सार्वजनिक कार्यबल का कौशल विकास AI और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में अधिकारियों को सशक्त बनाना, जिससे शासन में दक्षता और पारदर्शिता बढ़ेगी।

महत्व

शासन और प्रशासन

  • AI और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में अधिकारियों के क्षमता निर्माण से शासन में दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
  • नागरिक-केंद्रित सेवाओं के वितरण में सुधार होगा, जिससे नागरिकों को बेहतर और त्वरित सेवाएँ मिलेंगी।
  • नीति निर्माण और कार्यान्वयन में डेटा-संचालित निर्णय लेने को बढ़ावा मिलेगा, जिससे अधिक प्रभावी नीतियाँ बनेंगी।

आर्थिक विकास और नवाचार

  • सरकारी क्षेत्र में AI के उपयोग से नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और भारत को वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में एक अग्रणी खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।
  • प्रशासनिक प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण से आर्थिक लागत में कमी आएगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा।

सामाजिक प्रभाव

  • डिजिटल साक्षरता और कौशल विकास से सरकारी कर्मचारियों की रोजगार क्षमता बढ़ेगी और वे बदलते तकनीकी परिदृश्य के अनुकूल बन सकेंगे।
  • डेटा संरक्षण अधिनियम के माध्यम से व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, जिससे नागरिकों का डिजिटल प्रणाली पर विश्वास बढ़ेगा।

चुनौतियाँ

1. डेटा गोपनीयता और सुरक्षा

  • AI प्रणालियों द्वारा संसाधित किए जाने वाले विशाल डेटा सेट की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है।
  • डेटा उल्लंघनों और साइबर हमलों से बचाव के लिए मजबूत सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।

2. नैतिक और जवाबदेही के मुद्दे

  • AI-आधारित निर्णयों में पूर्वाग्रह (bias) की संभावना को कम करना और उनकी निष्पक्षता सुनिश्चित करना।
  • AI प्रणालियों द्वारा लिए गए निर्णयों के लिए जवाबदेही तय करना एक जटिल मुद्दा है।

3. कौशल अंतराल और क्षमता निर्माण

  • सरकारी कर्मचारियों के बीच AI और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के उपयोग के लिए आवश्यक कौशल और ज्ञान का अभाव।
  • निरंतर प्रशिक्षण और अद्यतन पाठ्यक्रम उपलब्ध कराना ताकि कर्मचारी नवीनतम तकनीकों से अवगत रहें।

4. बुनियादी ढाँचा और निवेश

  • AI प्रणालियों को लागू करने और बनाए रखने के लिए आवश्यक उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग बुनियादी ढाँचे और पर्याप्त वित्तीय निवेश की आवश्यकता।
  • ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
डेटा गोपनीयता व्यक्तिगत डेटा के दुरुपयोग या अनधिकृत पहुँच का जोखिम।
AI में पूर्वाग्रह प्रशिक्षण डेटा में निहित पूर्वाग्रहों के कारण AI-आधारित निर्णयों में भेदभाव की संभावना।
तकनीकी विशेषज्ञता का अभाव सरकारी विभागों में AI विशेषज्ञता की कमी, जिससे प्रभावी कार्यान्वयन में बाधा।
साइबर सुरक्षा AI प्रणालियों और डेटा को साइबर हमलों से बचाने की चुनौती।
कानूनी और नियामक ढाँचा AI के तेजी से विकास के साथ तालमेल बिठाने के लिए कानूनी और नियामक ढाँचे को अद्यतन करने की आवश्यकता।

आगे की राह

  • AI और डेटा विज्ञान में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और अधिक व्यापक बनाना, जिसमें व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर जोर दिया जाए।
  • डेटा गोपनीयता और सुरक्षा के लिए मजबूत प्रोटोकॉल और एन्क्रिप्शन तकनीकों को लागू करना, साथ ही नियमित सुरक्षा ऑडिट सुनिश्चित करना।
  • AI-आधारित निर्णयों में नैतिक दिशानिर्देशों और जवाबदेही तंत्रों को विकसित करना और उनका पालन करना।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) को बढ़ावा देना ताकि AI विशेषज्ञता और नवाचार का लाभ उठाया जा सके।
  • AI के उपयोग के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय रणनीति विकसित करना, जिसमें अनुसंधान और विकास, कौशल विकास और बुनियादी ढाँचे का विस्तार शामिल हो।
  • डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के प्रावधानों का प्रभावी ढंग से कार्यान्वयन सुनिश्चित करना और जनता में जागरूकता बढ़ाना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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अवधारणा प्रवाह

मिशन कर्मयोगी का शुभारंभ  →  आई-गोट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म का विकास  →  AI और डिजिटल प्रौद्योगिकियों पर पाठ्यक्रमों की उपलब्धता  →  सरकारी कर्मचारियों का क्षमता निर्माण और कौशल विकास  →  शासन में AI का प्रभावी उपयोग  →  नागरिक-केंद्रित सेवाओं में सुधार और दक्षता में वृद्धि  →  डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 द्वारा डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करना

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मिशन कर्मयोगी का उद्देश्य भारत में प्रशासनिक अधिकारियों की क्षमता का निर्माण करना है।
2. iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती प्रौद्योगिकियों पर पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं।
3. डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण के लिए व्यक्ति की सहमति को अनिवार्य करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि मिशन कर्मयोगी का प्राथमिक उद्देश्य प्रशासनिक अधिकारियों को भविष्य के लिए तैयार करने हेतु कौशल प्रदान करना है। कथन 2 भी सही है क्योंकि iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर AI और उभरती प्रौद्योगिकियों पर 218 पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। कथन 3 भी सही है क्योंकि डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 यह सुनिश्चित करता है कि व्यक्तिगत डेटा का प्रसंस्करण वैध उद्देश्य के लिए और व्यक्ति की स्वतंत्र, विशिष्ट, सूचित, बिना शर्त और स्पष्ट सहमति से किया जाए।

Q2. मिशन कर्मयोगी के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

  1. यह केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए है।
  2. इसका मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक अधिकारियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता में प्रशिक्षित करना है।
  3. यह iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म का उपयोग करके क्षमता निर्माण करता है।
  4. यह केवल राज्य सरकारों के कर्मचारियों के लिए है।

उत्तर: यह iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म का उपयोग करके क्षमता निर्माण करता है। — मिशन कर्मयोगी भारत सरकार के सभी मंत्रालयों, विभागों और संगठनों के साथ-साथ राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों के 1.70 करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारियों को iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म के माध्यम से क्षमता निर्माण प्रदान करता है। इसका उद्देश्य व्यापक क्षमता निर्माण है, जिसमें AI भी शामिल है, लेकिन यह केवल AI तक सीमित नहीं है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ मिशन कर्मयोगी के तहत सरकारी मंत्रालयों/विभागों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षमता निर्माण के महत्व का परीक्षण कीजिए। साथ ही, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 इस संदर्भ में किस प्रकार एक सुरक्षा कवच प्रदान करता है, चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर में मिशन कर्मयोगी के उद्देश्यों और AI तथा डिजिटल प्रौद्योगिकियों में क्षमता निर्माण के महत्व को स्पष्ट करना चाहिए। इसमें सार्वजनिक सेवा वितरण में AI के लाभों, दक्षता में वृद्धि और शासन में पारदर्शिता पर प्रकाश डालना चाहिए। इसके बाद, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के प्रमुख प्रावधानों की व्याख्या करनी चाहिए, विशेष रूप से सहमति आधारित डेटा प्रसंस्करण और डेटा सुरक्षा के सिद्धांतों पर जोर देना चाहिए। अंत में, यह बताना चाहिए कि कैसे यह अधिनियम AI के उपयोग से उत्पन्न होने वाले डेटा गोपनीयता संबंधी चिंताओं को संबोधित करता है और एक सुरक्षित डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करता है।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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