30 Jul यूपीएससी परीक्षा दृष्टिकोण: एमएसएमई में एआई अपनाने के लिए सरकार का ₹10,371 करोड़ मिशन
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और नियोजन, संसाधन जुटाने, वृद्धि, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव
- Prelims: इंडियाएआई मिशन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), नीति आयोग का आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क (OOMF)
- Essay: भारत के आर्थिक विकास में डिजिटल परिवर्तन की भूमिका, कृत्रिम बुद्धिमत्ता: अवसर और चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: इंडियाएआई मिशन, ₹10,371 करोड़ के परिव्यय के साथ, MSME सहित समाज के सभी वर्गों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल प्रौद्योगिकियों को अपनाने को बढ़ावा देकर भारत के AI पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूत करने पर केंद्रित है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारत सरकार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल प्रौद्योगिकियों को अपनाने को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित कर रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा कार्यान्वित इंडियाएआई मिशन, ₹10,371 करोड़ के परिव्यय के साथ, समाज के सभी वर्गों, विशेषकर MSME क्षेत्र में, AI के लाभों के लोकतंत्रीकरण पर केंद्रित है। यह पहल MSME क्षेत्र के डिजिटल विकास का आकलन करने के लिए नीति आयोग के आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क (OOMF) और अनुसंधान अध्ययनों का भी उपयोग करती है।
पृष्ठभूमि
- सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, जो रोज़गार सृजन, निर्यात और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
- वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रहने और अपनी दक्षता बढ़ाने के लिए MSME के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाना आवश्यक है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल प्रौद्योगिकियाँ MSME को लागत कम करने, उत्पादन प्रक्रियाओं को अनुकूलित करने और नए बाज़ारों तक पहुँचने में मदद कर सकती हैं।
- इंडियाएआई मिशन को 7 मार्च, 2024 को ₹10,371.92 करोड़ के कुल परिव्यय के साथ अनुमोदित किया गया था, जिसका उद्देश्य भारत में एक मज़बूत AI पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।
- यह मिशन सामाजिक रूप से प्रभावशाली, ज़िम्मेदार और समावेशी AI विकास सुनिश्चित करने पर केंद्रित है, जिसमें सभी क्षेत्रों में AI को अपनाने की सुविधा शामिल है।
- सरकार उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से MSME में डिजिटल अपनाने की सीमा का नियमित रूप से आकलन करती है।
इंडियाएआई मिशन क्या है?
- इंडियाएआई मिशन भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य देश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के विकास और अपनाने को बढ़ावा देना है।
- यह मिशन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
- इसका प्राथमिक लक्ष्य समाज के सभी वर्गों में AI के लाभों का लोकतंत्रीकरण करना, AI नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूत करना और सामाजिक रूप से प्रभावशाली, ज़िम्मेदार और समावेशी विकास सुनिश्चित करना है।
- मिशन में सात प्रमुख स्तंभ शामिल हैं: इंडियाएआई कंप्यूट क्षमता, इंडियाएआई नवाचार केंद्र, इंडियाएआई डेटासेट प्लेटफॉर्म, इंडियाएआई अनुप्रयोग विकास पहल, इंडियाएआई भविष्य कौशल, इंडियाएआई स्टार्टअप वित्तपोषण और सुरक्षित एवं विश्वसनीय AI।
- यह मिशन MSME सहित विभिन्न क्षेत्रों में AI को अपनाने की सुविधा प्रदान करके उनकी उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।
- मिशन का कुल परिव्यय ₹10,371.92 करोड़ है, जिसे 7 मार्च, 2024 को स्वीकृत किया गया था।
- यह पहल भारत को AI के क्षेत्र में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करने और AI-संचालित आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| इंडियाएआई कंप्यूट क्षमता | एआई मॉडल के प्रशिक्षण और विकास के लिए आवश्यक कंप्यूटिंग संसाधनों को उपलब्ध कराना। |
| इंडियाएआई नवाचार केंद्र | एआई में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना। |
| इंडियाएआई डेटासेट प्लेटफॉर्म | एआई अनुप्रयोगों के विकास के लिए उच्च गुणवत्ता वाले डेटासेट तक पहुंच प्रदान करना। |
| इंडियाएआई अनुप्रयोग विकास पहल | विभिन्न क्षेत्रों में एआई-आधारित समाधानों के विकास को प्रोत्साहित करना। |
| इंडियाएआई भविष्य कौशल | एआई से संबंधित कौशल में कार्यबल को प्रशिक्षित करना और क्षमता निर्माण करना। |
| इंडियाएआई स्टार्टअप वित्तपोषण | एआई स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता और प्रोत्साहन प्रदान करना। |
| सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई | एआई प्रौद्योगिकियों के नैतिक और जिम्मेदार विकास तथा उपयोग को सुनिश्चित करना। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि से आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलेगा।
- डिजिटल प्रौद्योगिकियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) को अपनाने से MSMEs की लागत दक्षता में सुधार होगा और नए बाजार खुलेंगे।
- रोजगार सृजन में वृद्धि होगी क्योंकि AI और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के एकीकरण से नए व्यावसायिक मॉडल और सेवाएँ सामने आएंगी।
सामाजिक महत्व
- AI के लाभों का लोकतंत्रीकरण (Democratization) समाज के सभी वर्गों तक पहुंच सुनिश्चित करेगा, जिससे समावेशी विकास (Inclusive Development) को बढ़ावा मिलेगा।
- MSMEs के डिजिटल सशक्तिकरण से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी आर्थिक अवसर बढ़ेंगे, जिससे क्षेत्रीय असमानताएँ कम होंगी।
तकनीकी महत्व
- भारत में एक मजबूत AI नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र (Innovation Ecosystem) का निर्माण होगा, जिससे देश वैश्विक AI परिदृश्य में अग्रणी भूमिका निभा सकेगा।
- अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे स्वदेशी AI समाधानों का विकास होगा और तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
शासन और नीति महत्व
- नीति आयोग (NITI Aayog) के आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क (OOMF) के माध्यम से सरकारी हस्तक्षेपों के परिणामों का प्रभावी मूल्यांकन संभव होगा, जिससे नीतियों की दक्षता बढ़ेगी।
- सरकार द्वारा MSMEs के डिजिटल विकास का आकलन करने से लक्षित नीतिगत हस्तक्षेपों को तैयार करने में मदद मिलेगी।
चुनौतियाँ
1. डिजिटल साक्षरता और कौशल की कमी
- MSMEs के बीच डिजिटल उपकरणों और AI प्रौद्योगिकियों के उपयोग के लिए आवश्यक कौशल और ज्ञान की कमी एक बड़ी बाधा है।
- कर्मचारियों को नई प्रौद्योगिकियों के अनुकूल बनाने के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन पेपर-3: भारतीय अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
2. उच्च प्रारंभिक लागत
- AI और डिजिटल प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए आवश्यक हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और बुनियादी ढांचे में निवेश की प्रारंभिक लागत MSMEs के लिए एक चुनौती हो सकती है।
- छोटे उद्यमों के पास अक्सर ऐसे बड़े निवेश के लिए पर्याप्त पूंजी का अभाव होता है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन पेपर-3: भारतीय अर्थव्यवस्था
3. डेटा गोपनीयता और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ
- डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डेटा साझा करने और AI के उपयोग से डेटा गोपनीयता और साइबर सुरक्षा संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।
- MSMEs के पास अक्सर इन जोखिमों से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय या विशेषज्ञता नहीं होती है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन पेपर-3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आंतरिक सुरक्षा
4. बुनियादी ढांचे की कमी
- विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में विश्वसनीय इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल बुनियादी ढांचे की कमी AI और डिजिटल प्रौद्योगिकियों को अपनाने में बाधा डाल सकती है।
- उच्च गति इंटरनेट तक पहुंच एक समान नहीं है, जिससे डिजिटल विभाजन (Digital Divide) बढ़ सकता है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन पेपर-3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढाँचा
5. तकनीकी विशेषज्ञता का अभाव
- MSMEs के पास अक्सर AI समाधानों को विकसित करने, लागू करने और बनाए रखने के लिए आंतरिक तकनीकी विशेषज्ञता का अभाव होता है।
- बाहरी विशेषज्ञों पर निर्भरता लागत बढ़ा सकती है और अनुकूलित समाधानों की उपलब्धता को सीमित कर सकती है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन पेपर-3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| तकनीकी जागरूकता का अभाव | MSMEs को AI और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के लाभों और उपयोग के मामलों की पूरी जानकारी नहीं है। |
| वित्तीय बाधाएँ | प्रौद्योगिकी अपनाने के लिए आवश्यक निवेश और परिचालन लागत वहन करने में MSMEs की अक्षमता। |
| कुशल कार्यबल की कमी | नई प्रौद्योगिकियों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों का अभाव। |
| डेटा सुरक्षा जोखिम | डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संवेदनशील व्यावसायिक डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने में चुनौतियाँ। |
| अनुकूलित समाधानों की अनुपलब्धता | MSMEs की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप AI समाधानों की कमी। |
| नियामक और नीतिगत स्पष्टता | AI के नैतिक उपयोग और डेटा शासन पर स्पष्ट दिशानिर्देशों का अभाव। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- इंडियाएआई मिशन
आगे की राह
- MSMEs के लिए AI और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के लाभों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक अभियान चलाए जाएँ।
- डिजिटल साक्षरता और AI कौशल विकास के लिए लक्षित प्रशिक्षण कार्यक्रम और कार्यशालाएँ आयोजित की जाएँ।
- प्रौद्योगिकी अपनाने के लिए MSMEs को वित्तीय सहायता, सब्सिडी और आसान ऋण सुविधाएँ प्रदान की जाएँ।
- AI समाधानों के विकास और कार्यान्वयन में MSMEs की सहायता के लिए परामर्श और तकनीकी सहायता सेवाएँ स्थापित की जाएँ।
- डेटा सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत नियामक ढाँचा और दिशानिर्देश विकसित किए जाएँ।
- ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में डिजिटल बुनियादी ढांचे और इंटरनेट कनेक्टिविटी में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया जाए।
- MSMEs की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप अनुकूलित और लागत प्रभावी AI समाधानों को बढ़ावा दिया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
इंडियाएआई मिशन · सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) · कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) · डिजिटल प्रौद्योगिकी · उत्पादकता वृद्धि · प्रतिस्पर्धात्मकता · समावेशी विकास · नीति आयोग · आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क (OOMF) · डिजिटल अपनाने का आकलन · नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र · भविष्य कौशल
अवधारणा प्रवाह
सरकार MSMEs में AI और डिजिटल प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देती है। → इंडियाएआई मिशन जैसे कार्यक्रम लागू किए जाते हैं। → MSMEs की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है। → आर्थिक संवृद्धि और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलता है। → समावेशी विकास और तकनीकी आत्मनिर्भरता सुनिश्चित होती है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इंडियाएआई मिशन का उद्देश्य केवल बड़े उद्योगों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को बढ़ावा देना है।
2. यह मिशन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
3. इंडियाएआई मिशन में सात स्तंभ शामिल हैं, जिनमें इंडियाएआई कंप्यूट क्षमता और इंडियाएआई स्टार्टअप वित्तपोषण शामिल हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि इंडियाएआई मिशन का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों, विशेषकर MSME सहित, में AI के लाभों का लोकतंत्रीकरण करना है। कथन 2 सही है क्योंकि यह मिशन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है। कथन 3 सही है क्योंकि मिशन में सात स्तंभ शामिल हैं, जिनमें इंडियाएआई कंप्यूट क्षमता और इंडियाएआई स्टार्टअप वित्तपोषण प्रमुख हैं।
Q2. इंडियाएआई मिशन के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. इसका कुल परिव्यय ₹10,371.92 करोड़ है।
2. इसका एक प्रमुख लक्ष्य MSME की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना है।
3. नीति आयोग का आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क (OOMF) इसके कार्यान्वयन की निगरानी में सहायक है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि मिशन का कुल परिव्यय ₹10,371.92 करोड़ है। कथन 2 भी सही है क्योंकि MSME सहित सभी वर्गों में AI के लाभों का लोकतंत्रीकरण करना और उनकी उत्पादकता बढ़ाना इसका लक्ष्य है। कथन 3 भी सही है क्योंकि नीति आयोग का OOMF सरकारी हस्तक्षेपों के परिणामों के मूल्यांकन के लिए एक संस्थागत तंत्र के रूप में कार्य करता है, जिसमें इस मिशन का मूल्यांकन भी शामिल है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल प्रौद्योगिकियों की भूमिका का परीक्षण कीजिए। इस संबंध में इंडियाएआई मिशन के उद्देश्यों और प्रमुख स्तंभों पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: MSME क्षेत्र का संक्षिप्त महत्व और वर्तमान चुनौतियाँ।
मुख्य भाग 1: MSME की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में AI और डिजिटल प्रौद्योगिकियों की भूमिका का विश्लेषण करें। इसमें लागत में कमी, दक्षता में सुधार, नवाचार, बाजार पहुंच और निर्णय लेने में सुधार जैसे बिंदु शामिल करें।
मुख्य भाग 2: इंडियाएआई मिशन के उद्देश्यों को विस्तार से समझाएँ, जैसे AI के लाभों का लोकतंत्रीकरण, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना और समावेशी विकास सुनिश्चित करना।
मुख्य भाग 3: मिशन के सात स्तंभों का उल्लेख करें (इंडियाएआई कंप्यूट क्षमता, इंडियाएआई नवाचार वा केंद्र, इंडियाएआई डेटासेट प्लेटफॉर्म, इंडियाएआई अनुप्रयोग विकास पहल, इंडियाएआई भविष्य कौशल, इंडियाएआई स्टार्टअप वित्तपोषण और सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई)।
निष्कर्ष: MSME क्षेत्र के लिए AI और डिजिटल प्रौद्योगिकियों को अपनाने के महत्व पर जोर दें और सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए आगे की राह सुझाएँ।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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