संयुक्त राष्ट्र ने 27 नवंबर को वैश्विक बाल विवाह विरोधी दिवस घोषित किया, जानिए इसके महत्व

A.P. NGO welcomes UN’s declaration of November 27 as Global Day Against Child Marriage — diagram

संयुक्त राष्ट्र ने 27 नवंबर को वैश्विक बाल विवाह विरोधी दिवस घोषित किया, जानिए इसके महत्व

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✎ संयुक्त राष्ट्र द्वारा 27 नवंबर को बाल विवाह के विरुद्ध वैश्विक दिवस घोषित किया गया है, जो इस प्रथा को समाप्त करने के वैश्विक प्रयासों को मजबूत करेगा।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — समाज एवं सामाजिक मुद्दे  |  GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध, सामाजिक न्याय  |  GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा (महिलाओं और बच्चों से संबंधित मुद्दे)
  • Prelims: बाल विवाह, संयुक्त राष्ट्र, वैश्विक दिवस, बाल विवाह निषेध अधिनियम, वासव्या महिला मंडली, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन (JRC), बाल विवाह मुक्त भारत अभियान
  • Essay: भारत में बाल विवाह की चुनौती और समाधान, महिलाओं एवं बच्चों के अधिकारों का संरक्षण: वैश्विक और राष्ट्रीय प्रयास

त्वरित पुनरावृत्ति: संयुक्त राष्ट्र द्वारा 27 नवंबर को बाल विवाह के विरुद्ध वैश्विक दिवस घोषित किया गया है, जो इस प्रथा को समाप्त करने के वैश्विक प्रयासों को मजबूत करेगा।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

संयुक्त राष्ट्र (UN) ने 27 नवंबर को बाल विवाह के विरुद्ध वैश्विक दिवस (Global Day Against Child Marriage) घोषित किया है। आंध्र प्रदेश के एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) वासव्या महिला मंडली (VMM) ने इस घोषणा का स्वागत किया है। यह घोषणा भारत सहित दुनिया भर में बाल विवाह को समाप्त करने के प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देती है। भारत सरकार ने भी 27 नवंबर, 2024 को ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान शुरू किया था।

पृष्ठभूमि

  • बाल विवाह एक वैश्विक समस्या है जो बच्चों के मानवाधिकारों का उल्लंघन करती है, विशेषकर लड़कियों के। यह उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और समग्र विकास को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।
  • भारत में, बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 (Prohibition of Child Marriage Act, 2006) बाल विवाह को प्रतिबंधित करता है। इस अधिनियम के तहत लड़कियों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष निर्धारित की गई है।
  • कई भारतीय गैर-सरकारी संगठन, जैसे जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन (JRC) और वासव्या महिला मंडली (VMM), जमीनी स्तर पर बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रहे हैं और कानूनी हस्तक्षेप के माध्यम से ऐसे विवाहों को रोक रहे हैं।
  • JRC ने बाल विवाह के विरुद्ध एक समर्पित वैश्विक दिवस के लिए अंतरराष्ट्रीय अभियान चलाया था, जिसे सिएरा लियोन और भारत सहित 67 देशों का समर्थन मिला।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) ने 4 सितंबर को इस प्रस्ताव को अपनाया, जिससे 27 नवंबर को बाल विवाह के विरुद्ध वैश्विक दिवस के रूप में स्थापित किया गया।
  • भारत सरकार ने 27 नवंबर, 2024 को JRC के सहयोग से ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान शुरू किया था, जो इस वैश्विक पहल के साथ संरेखित है।

बाल विवाह के विरुद्ध वैश्विक दिवस का महत्व

  • यह दिवस बाल विवाह की गंभीर समस्या की ओर वैश्विक ध्यान आकर्षित करेगा और इसके उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता को मजबूत करेगा।
  • यह सरकारों, नागरिक समाज संगठनों और समुदायों को बाल विवाह को रोकने और प्रभावित बच्चों की सहायता करने के लिए एकजुट होने का अवसर प्रदान करेगा।
  • यह बाल विवाह के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और सामाजिक मानदंडों को बदलने में मदद करेगा जो इस प्रथा को कायम रखते हैं।
  • यह उन देशों को प्रोत्साहित करेगा जहां बाल विवाह अभी भी प्रचलित है, वे अपनी नीतियों और कानूनों को मजबूत करें और उनके प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करें।
  • यह लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सशक्तिकरण में निवेश को बढ़ावा देगा, जो बाल विवाह को रोकने के लिए महत्वपूर्ण कारक हैं।
  • यह उन जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं और संगठनों के प्रयासों को मान्यता देगा जो बाल विवाह के खिलाफ अथक प्रयास कर रहे हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
बाल विवाह के विरुद्ध वैश्विक दिवस संयुक्त राष्ट्र द्वारा 27 नवंबर को बाल विवाह के विरुद्ध वैश्विक दिवस घोषित करना, इस सामाजिक बुराई के खिलाफ वैश्विक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
भारत की भूमिका भारत ने सिएरा लियोन के साथ मिलकर इस प्रस्ताव का समर्थन किया, जो बाल विवाह उन्मूलन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
जमीनी स्तर पर कार्रवाई यह घोषणा जमीनी स्तर पर संगठनों के प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय मान्यता देती है और उन्हें बाल विवाह रोकने के लिए और अधिक कार्य करने हेतु प्रेरित करती है।
बाल विवाह मुक्त भारत अभियान भारत सरकार ने 27 नवंबर, 2024 को ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान शुरू किया था, जो इस वैश्विक पहल के साथ संरेखित है।
गैर-सरकारी संगठनों का योगदान वासव्या महिला मंडली (VMM) और जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन (JRC) जैसे NGO ने जागरूकता कार्यक्रमों, कानूनी हस्तक्षेपों और सरकारी योजनाओं से जोड़कर हजारों बाल विवाह रोके हैं।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • बाल विवाह के विरुद्ध वैश्विक दिवस की घोषणा बालिकाओं के अधिकारों की सुरक्षा और उनके सशक्तिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • यह समाज में बाल विवाह के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और सामाजिक मानदंडों को बदलने में मदद करेगा।
  • यह बालिकाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित बचपन का अधिकार सुनिश्चित करने में सहायक होगा।

अंतर्राष्ट्रीय संबंध

  • संयुक्त राष्ट्र की यह घोषणा बाल विवाह उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और एकजुटता को बढ़ावा देती है।
  • भारत का इस पहल का समर्थन करना वैश्विक मंच पर मानवाधिकारों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

शासन और नीति

  • यह घोषणा सरकारों को बाल विवाह को रोकने के लिए मजबूत नीतियां और कानून बनाने तथा उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रेरित करेगी।
  • यह ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ जैसे राष्ट्रीय अभियानों को वैश्विक समर्थन प्रदान करता है, जिससे उनके प्रभाव में वृद्धि होगी।

चुनौतियाँ

1. सामाजिक मानदंड और परंपराएँ

  • कई समुदायों में बाल विवाह को सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है, जिससे इसे समाप्त करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
  • जागरूकता की कमी और रूढ़िवादी सोच बाल विवाह को बढ़ावा देती है।

2. गरीबी और आर्थिक असुरक्षा

  • गरीब परिवार अक्सर अपनी बेटियों पर आर्थिक बोझ कम करने या दहेज से बचने के लिए उनका बाल विवाह कर देते हैं।
  • आर्थिक असुरक्षा बालिकाओं को शिक्षा से वंचित कर बाल विवाह के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है।

3. कानून का कमजोर प्रवर्तन

  • बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 जैसे कानूनों के बावजूद, जमीनी स्तर पर उनका प्रभावी प्रवर्तन अक्सर कमजोर होता है।
  • पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच जागरूकता और संवेदनशीलता की कमी भी एक चुनौती है।

4. शिक्षा तक पहुंच का अभाव

  • शिक्षा से वंचित बालिकाएं बाल विवाह के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं, क्योंकि उन्हें अपने अधिकारों और विकल्पों के बारे में जानकारी नहीं होती।
  • स्कूल छोड़ने की उच्च दर भी बाल विवाह का एक प्रमुख कारण है।

5. लैंगिक असमानता

  • पितृसत्तात्मक समाज में लड़कियों को लड़कों से कमतर समझा जाता है, जिससे उनके अधिकारों का हनन होता है और बाल विवाह को बढ़ावा मिलता है।
  • महिलाओं के लिए सीमित अवसर और निर्णय लेने की शक्ति की कमी भी बाल विवाह का कारण बनती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
कानूनी आयु का उल्लंघन बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत लड़कियों के लिए 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष की कानूनी विवाह आयु का उल्लंघन।
स्वास्थ्य जोखिम कम उम्र में गर्भावस्था और प्रसव से मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव।
शिक्षा से वंचित बाल विवाह के कारण लड़कियों की शिक्षा बाधित होती है, जिससे उनके भविष्य के अवसर सीमित हो जाते हैं।
हिंसा और दुर्व्यवहार बाल वधू अक्सर घरेलू हिंसा, यौन शोषण और अन्य प्रकार के दुर्व्यवहार का शिकार होती हैं।
मनोवैज्ञानिक आघात कम उम्र में विवाह से बच्चों पर गंभीर मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक आघात होता है।
जनसांख्यिकीय प्रभाव उच्च जन्म दर और जनसंख्या वृद्धि पर अप्रत्यक्ष प्रभाव।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • बाल विवाह मुक्त भारत अभियान

आगे की राह

  • बाल विवाह के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक और सतत अभियान चलाए जाएं, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में।
  • बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 का प्रभावी प्रवर्तन सुनिश्चित किया जाए, जिसमें दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शामिल हो।
  • बालिकाओं की शिक्षा तक पहुंच में सुधार किया जाए और स्कूल छोड़ने वाली लड़कियों को वापस शिक्षा प्रणाली में लाने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जाएं।
  • गरीब और कमजोर परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाए, ताकि उन्हें अपनी बेटियों का बाल विवाह करने के लिए मजबूर न होना पड़े।
  • समुदायों, धार्मिक नेताओं, पंचायती राज संस्थाओं और गैर-सरकारी संगठनों को बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई में सक्रिय रूप से शामिल किया जाए।
  • बालिकाओं को सशक्त बनाने के लिए कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएं, ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
  • बाल विवाह के मामलों की रिपोर्टिंग को प्रोत्साहित करने और पीड़ितों को सहायता प्रदान करने के लिए एक मजबूत शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया जाए।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत किया जाए और बाल विवाह उन्मूलन के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान किया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

बाल विवाह · संयुक्त राष्ट्र · बाल विवाह मुक्त भारत अभियान · बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 · लैंगिक समानता · मानव अधिकार · सतत विकास लक्ष्य (SDGs) · महिला सशक्तिकरण · सामाजिक कुरीतियाँ · अंतर्राष्ट्रीय सहयोग · गैर-सरकारी संगठन (NGOs) · कानूनी हस्तक्षेप

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21A’, ‘note’: ‘शिक्षा का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 24’, ‘note’: ‘बाल श्रम का निषेध’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(f)’, ‘note’: ‘बच्चों के स्वस्थ विकास के अवसर’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 45’, ‘note’: ‘बच्चों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल’}

अवधारणा प्रवाह

संयुक्त राष्ट्र द्वारा 27 नवंबर को बाल विवाह के विरुद्ध वैश्विक दिवस घोषित।  →  यह घोषणा बाल विवाह के खिलाफ वैश्विक प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।  →  भारत सहित विभिन्न देशों द्वारा जमीनी स्तर पर प्रयासों को प्रोत्साहन।  →  जागरूकता कार्यक्रमों और कानूनी हस्तक्षेपों में वृद्धि।  →  बाल विवाह की घटनाओं में कमी और बालिकाओं के अधिकारों की सुरक्षा।  →  बालिकाओं के लिए बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और समग्र विकास के अवसर।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संयुक्त राष्ट्र ने 27 नवंबर को बाल विवाह के खिलाफ वैश्विक दिवस (Global Day Against Child Marriage) घोषित किया है।
2. भारत सरकार ने ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान 27 नवंबर, 2024 को शुरू किया था।
3. बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 भारत में बाल विवाह को रोकने के लिए प्रमुख कानून है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र ने 27 नवंबर को बाल विवाह के खिलाफ वैश्विक दिवस घोषित किया है। कथन 2 सही है क्योंकि भारत सरकार ने ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान 27 नवंबर, 2024 को शुरू किया था। कथन 3 सही है क्योंकि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 भारत में बाल विवाह को रोकने के लिए प्राथमिक कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।

Q2. बाल विवाह के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सबसे उपयुक्त रूप से ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के उद्देश्य का वर्णन करता है?

  1. यह केवल जागरूकता बढ़ाने पर केंद्रित है।
  2. इसका उद्देश्य भारत में बाल विवाह को पूरी तरह से समाप्त करना है।
  3. यह केवल लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए है।
  4. यह केवल कानूनी हस्तक्षेपों पर निर्भर करता है।

उत्तर: इसका उद्देश्य भारत में बाल विवाह को पूरी तरह से समाप्त करना है। — बाल विवाह मुक्त भारत अभियान का व्यापक उद्देश्य देश से बाल विवाह की कुप्रथा को पूरी तरह से समाप्त करना है, जिसमें जागरूकता, कानूनी हस्तक्षेप और सामुदायिक भागीदारी जैसे बहुआयामी दृष्टिकोण शामिल हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ बाल विवाह के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र द्वारा 27 नवंबर को ‘वैश्विक दिवस’ घोषित करने के निहितार्थों पर चर्चा कीजिए। भारत में बाल विवाह की रोकथाम में ‘बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006’ की भूमिका और इसकी चुनौतियों का भी विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** बाल विवाह के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र द्वारा 27 नवंबर को ‘वैश्विक दिवस’ घोषित करने के हालिया संदर्भ का उल्लेख करें और इसके महत्व को रेखांकित करें।
2. **वैश्विक दिवस के निहितार्थ:**
* अंतर्राष्ट्रीय मान्यता और प्रतिबद्धता को बढ़ावा।
* वैश्विक स्तर पर जागरूकता और एकजुटता।
* सतत विकास लक्ष्यों (SDGs), विशेषकर SDG 5 (लैंगिक समानता) की प्राप्ति में योगदान।
* अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को प्रोत्साहन।
* राष्ट्रीय सरकारों पर कार्रवाई करने का दबाव।
3. **बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की भूमिका:**
* **कानूनी ढाँचा:** बाल विवाह को अवैध घोषित करना और दंड का प्रावधान।
* **संरक्षण:** नाबालिगों, विशेषकर लड़कियों के अधिकारों की रक्षा।
* **प्रावधान:** बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी (CMPO) की नियुक्ति, विवाह को शून्य घोषित करने का प्रावधान, भरण-पोषण का अधिकार।
* **निवारक उपाय:** कानूनी हस्तक्षेपों और जागरूकता कार्यक्रमों का आधार।
4. **चुनौतियाँ:**
* **सामाजिक-सांस्कृतिक कारक:** गहरी जड़ें जमा चुकी परंपराएँ, गरीबी, अशिक्षा, लैंगिक असमानता।
* **कार्यान्वयन में कमी:** कानून का अपर्याप्त प्रवर्तन, जागरूकता की कमी, सामुदायिक भागीदारी का अभाव।
* **पलायन:** धार्मिक रीति-रिवाजों के नाम पर या दूरदराज के इलाकों में विवाह का जारी रहना।
* **पंजीकरण का अभाव:** कई विवाहों का पंजीकृत न होना, जिससे कानूनी कार्रवाई मुश्किल होती है।
* **बालिकाओं पर प्रभाव:** शिक्षा, स्वास्थ्य और समग्र विकास पर नकारात्मक प्रभाव।
5. **निष्कर्ष:** बाल विवाह को समाप्त करने के लिए कानूनी प्रावधानों के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता, शिक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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